पृथ्वी के बारे में 10 अदभुत तथ्य

  1. हमारी धरती का गठन 4.5 अरब वर्ष पहले हुआ था. 3.5 अरब वर्ष से पृथ्वी पर जीवन कायम है.
  2. पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है. भूमध्य रेखा पर इसका व्यास पोल-टू-पोल व्यास से अधिक है. इसमें 45 किलोमीटर तक का फासला है.
  3. क्योंकि पृथ्वी उभरी हुई है, इसलिए भूमध्य रेखा पर 150 पोंड का भार उत्तरी ध्रुव पर 151 पोंड के बराबर होगा.
  4. पृथ्वी का भार 5,980,000,000,000,000,000,000 टन है.
  5. एलेया के परमेनिदेस (Parmenides of Elea) पहले आदमी थे जिन्होंने कहा था कि पृथ्वी एक क्षेत्र है. वह पांचवी सदी में पैदा हुए थे.
  6. ईस्वी पूर्व तीसरी सदी के समोस के एरिस्टारक्स (Aristarchus of Samos) ने कहा था कि पृथ्वी सूरज के इर्द-गिर्द घूमती है ना कि सूरज पृथ्वी के.
  7. पृथ्वी में मुख्य तत्व लोहा, ऑक्सीजन और सिल्लिकोन हैं जो मिल कर पृथ्वी के भार का 77 प्रतिशत बनाते हैं.
  8. धरती का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है.
  9. चीन का यूरो एशियन ध्रुव समुन्द्र से 1,644 मील की दूरी पर स्थित है.
  10. धरती ही जगत में एकलौता ऐसा ग्रह है जिसका नाम किसी भी रोमन या ग्रीक देवता के नाम पर नहीं है.

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पृथ्वी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!

सौर मंडल के सभी ग्रहों में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन संभव है इसीलिए कहा जाता है कि “धरती स्वर्ग है” | पृथ्वी पर अरबो सालो से पेड़-पौधे एवं जीव जंतु फलते फूलते आ रहे हैं।

पृथ्वी सूर्य से न ज़्यादा दूर है और न ज़्यादा करीब है l यह भी एक कारण जिसकी वजह से हम पृथ्वी पर ज़िंदा रह सकते है। तो आइये जानते है पृथ्वी से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में :

  • पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.54 अरब साल पहले हुआ था और पृथ्वी को लेकर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस गृह पर लगभग 4.1 अरब वर्ष पहले जीवन का अस्तित्व आंरभ हुआ था।
  • सौर मण्डल में धरती ही एक अकेला ऐसा ग्रह है जहाँ पानी तीनों अवस्थाओं में मौजूद है – द्रव, गैस और ठोस।
  • पृथ्वी अपने अक्ष पर 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकेंड में एक चक्कर पूरा करती है, जिससे दिन और रात होते हैं।
  • क्या आप जानते है पिछले चालीस सालों में धरती से 40% जंगली जानवर (वन्य जीव) खत्म हो चुके हैं।
  • सूर्य की ऊर्जा का कुछ भाग पृथ्वी और समुद्र की सतह से टकराकर वायुमंडल में बदल जाता है।
  • हर साल धरती पर करीब 5 लाख भूकंप आते हैं जिनमें से केवल 1 लाख भूकंप ही महसूस किये जाते हैं और केवल 100 भूकंप ही विनाश फैलाते हैं| बाकि भूकंप बहुत छोटे होते हैं जिनका पता भी नहीं चल पाता है
  • समुद्र तल से पृथ्वी की सबसे अधिक ऊंचाई माउंट एवरेस्ट की है जोकि 8,848 मीटर है।
  • यदि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखा जाये तो पृथ्वी एक नीले रंग के तारे जैसी प्रतीत होती है l इसका कारण पृथ्वी पर मौजूद पानी है।
  • क्या आप जानते हैं पृथ्वी के पास एक मात्र प्राकृतिक उपग्रह है जिसका नाम चंद्रमा है। आपकी जानकारी लिए बता दे l बृहस्पति गृह में कुल 67 चंद्रमा हैं। पृथ्वी के चंद्रमा कि त्रिज्या  1,738 किलोमीटर है जोकि सौर मंडल का पांचवां सबसे बड़ा चंद्रमा है।
  • क्या आप जानते है कि इन्द्रधनुष गोल होता है, लेकिन ज़मीन से हमें यह केवल आधा ही दिखाई देता है। परन्तु अगर हवाई जहाज से इंद्रधनुष को देखा जाये तो यह पूरा गोल दिखाई देगा।
  • पृथ्वी की पहली परत का निर्माण सिलिकॉन और एल्युमिनियम धातु से हुआ है।
  • क्रुबेरा धरती की सबसे गहरी गुफा है, जिसकी गहराई 2,197 मीटर है।
  • पृथ्वी की सभी चार परतों में सबसे मोटी परत धातु की है, जो 2900 किलोमीटर मोटी है और सबसे पतली परत क्रस्ट है जो पृथ्वी कि सतह से औसतन 30 किलोमीटर की गहराई पर है।
  • पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन परत पाई जाती है, जो इसे सूर्य की शक्तिशाली और हानिकारक UV किरणों से बचाती है।
  • जीवाश्म इस बात को प्रमाणित करता है कि मछलियां 53 करोड़ साल पहले भी मौजूद थी।
  • क्या आप जानते है कि पृथ्वी पर हर चार साल में एक लीप वर्ष क्यों होता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि पृथ्वी पर एक वर्ष ठीक 365 दिन नहीं बल्कि 365.2564 दिन का होता है, यह अतिरिक्त 0.2564 दिन हर चार साल में फरवरी के महीने में आता है।
  • नील नदी पृथ्वी की सबसे लंबी नदी है, जो बुरुंडी में अपने स्रोत से 6,695 किलोमीटर दूर भूमध्य सागर तक फैली हुई है, हालांकि अमेज़न नदी पानी स्टोरेज के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी नदी है।
  • धरती पर हर घंटे 760 बार बिजली गिरती है।
  • पृथ्वी के वायुमंडल और बाहरी अंतरिक्ष के बीच की सीमा को कर्मन रेखा के रूप में जाना जाता है। यह सीमा पृथ्वी के समुद्र स्तर से 100 किमी की दूरी पर स्थित है। इस सीमा को पार करने वालो को ही अंतरिक्ष यात्री कहाँ जाता है।
  • धरती की घूर्णन गति हर साल 17 मिलीसेकेंड धीमी होती जा रही है अर्थात डायनासोरों के समय में धरती का दिन केवल 22 घंटे का होता था।

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जाने क्या है रहस्य ‘किलिंग स्टोन’ का, जिसको तोड़ने के बाद मुक्त हुआ खूंखार प्रेत

इस समय दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है। एक तरफ जहां जंग जारी है तो दूसरी तरफ लोगों को भूखमरी का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना महामारी ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।

दुनिया पहले से ही महंगाई की मार दुनिया झेल रही है ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध के रूप में एक नई चुनौती दुनिया के सामने है। यह युद्ध पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।

अब इसी बीच एक अजीबोगरीब घटना ने लोगों की नींद उड़ा दी है और क्या है वो घटना चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से :-

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जापान में एक पत्थर को दो अलग-अलग हिस्सों टूट गया है जिसे किलिंग स्टोन के नाम से जाना जाता है। जापान में कई लोगों का कहना है कि ‘खूंखार प्रेत‘ करीब एक हजार साल से इस पत्थर में कैद था, जो अब टूटने के बाद मुक्त हो गया है। इसे मानने वालों की चिंता इस घटना के बाद से बढ़ गई है। अब उन्हें किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है।

जापान में ऐसी मान्यता है कि जो इस पत्थर के पास जाता है उसकी मृत्यु हो जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस पत्थर का नाम सेशो-सेकी है। इससे स्थानीय लोग दहशत में हैं। उनका मानना ​​है कि पत्थर से बुरी आत्मा निकली है।

माना जाता है कि यह पत्थर तमामो-नो-मै की तब्दील हुई लाश थी, जो एक खूबसूरत महिला थी, जिसे नौ पूंछ वाली लोमड़ी के रूप में जाना जाता था, वह एक दुष्ट डेम्यो के लिए काम कर रही थी, जो सम्राट टोबा को मारने और उसका सिंहासन लेने की साजिश रच रही थी।

ओटोगी-ज़ोशी के अनुसार, जब मिउरा-नो-सुके नामक प्रसिद्ध योद्धा द्वारा नौ पूंछ वाली लोमड़ी को मार दिया गया, तो उसका शरीर सेशो-सेकी बन गया।

एक बार, गेनो नामक एक बौद्ध पुजारी पत्थर के पास आराम करने के लिए रुक गया और तमामो-नो-मै की आत्मा ने उसे डराया।

गेनो ने भूत भगाने की रस्में की और आत्मा से उसे माफ़ करने की भीख मांगी। इसके बाद तमामो-नो-मै ने कभी किसी को न डराने की कसम खाई।

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5 मार्च, 2022 को यह बताया गया कि प्राकृतिक अपक्षय के परिणामस्वरूप पत्थर दो भागों में विभाजित हो गया था। कुछ नेटिज़न्स ने इस भूतिया लोमड़ी के बारे में अपना डर ​​व्यक्त किया।

26 मार्च 2022 को, स्थानीय प्रशासन द्वारा पुजारियों को दुष्ट आत्मा को शांत करने के लिए विभाजित चट्टान पर हरेगुशी लहराते हुए प्रार्थना समारोह की मेजबानी की गई और प्रसाद बांटा गया।

समारोह के बाद एक मोटी धुंध ने उस जगह को ढक दिया, जो कुछ लोगों के अनुसार एक अलौकिक घटना थी। यह रहस्यमयी पत्थर नासु में ज्वालामुखी पर्वतों के पास स्थित है। यह पत्थर वर्ष 1957 से एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में पंजीकृत है।

लेकिन यहां पहुंचे लोगों ने जब इस पत्थर को दो टुकड़ों में टूटा हुआ देखा तो वे डर गए। इस पत्थर में बंधी रस्सी भी टूट गई थी। जापान में हुई इस घटना के बाद से कई लोग डरे हुए हैं।

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फिटनेस इन्फ्लुएंसर: फिटनेस को लेकर दीवानी हैं ये 7 लड़कियां

आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर हैं और उनमें उनसे कुछ ज्यादा करने का जज्बा है। अगर फिटनेस की बात करें तो इस क्षेत्र में भी वह पुरुषों को मात दे रही हैं। घर, ऑफिस, बच्चे और परिवार का ख्याल रखते हुए महिलाएं खुद को फिट रखने की पूरी कोशिश करती हैं।

अगर आप भी फिटनेस में रुचि रखते हैं तो आज सोशल मीडिया पर ऐसी कई महिलाएं आपको फिटनेस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

ये महिलाएं आज न सिर्फ फिटनेस की दुनिया में खूब नाम कमा रही हैं बल्कि अपने फॉलोअर्स को फिट और स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित भी करती रहती हैं।

आज हम इस पोस्ट में भारत की कुछ बेहतरीन महिला फिटनेस इन्फ्लुएंसर के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं :-

बानी जे

 

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वुमन फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की लिस्ट में बानी जे का नाम सबसे ऊपर है। रोडीज़ से लेकर फिटनेस तक वह सबसे प्रभावशाली महिला हैं। बानी जे ने रोडीज़ के साथ अपनी यात्रा शुरू की और इस स्टीरियोटाइप को तोड़ दिया कि महिलाएं वजन नहीं उठा सकती हैं और बॉडीबिल्डर नहीं बन सकती हैं।

 

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आप उनके इंस्टाग्राम पर कई ऐसी तस्वीरें और पोस्ट देख सकते हैं, जो उनकी मेहनत और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। उनकी बोल्डनेस, स्टाइल और प्रतिभा ने निश्चित रूप से उन्हें भारत में एक लोकप्रिय फिटनेस इन्फ्लुएंसर बना दिया है।

शिवांगी भटनागर

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यदि आप वास्तव में फिटनेस की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं, तो शिवांगी भटनागर एक आदर्श नाम है। उनके अनुसार, सभी को अपने शरीर को समझना चाहिए और अपने फिटनेस लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अच्छी तकनीकों को अपनाना चाहिए। कुछ गेम चेंजिंग रूटीन के लिए आप उसे इंस्टाग्राम पर फॉलो कर सकते हैं।

सोनाली स्वामी

 

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सोनाली वह सब कुछ है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। वह एक बॉली एरोबिक इंस्ट्रक्टर, ट्रेंड कथक डांसर, टीआरएक्स सस्पेंशन ट्रेनर, बोकवा फिटनेस इंस्ट्रक्टर हैं।

इतना ही नहीं दो बच्चों की मां सोनाली इंटरनेशनल एथलीट भी हैं। वह भारत की शीर्ष महिला बिल्डरों में से एक हैं जिन्होंने 37 साल की उम्र में अपना ये सफर शुरू किया था।

आयशा बिलिमोरिया

आयशा के लिए फिटनेस का मतलब आत्मविश्वास और पूर्ण समर्पण है। आयशा बिलिमोरिया एक ट्रैक एंड फील्ड एथलीट, फिटनेस ट्रेनर और एडिडास रनर्स मुंबई की कप्तान हैं।

वास्तव में, यदि आप अपनी फिटनेस के लिए एक महिला फिटनेस इन्फ्लुएंसर की तलाश में हैं, तो आयशा आपके लिए सबसे अच्छी प्रेरक साबित हो सकती है।

नम्रता पुरोहित

 

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अगर पिलेट्स आपका पसंदीदा वर्कआउट है तो आपको नम्रता पुरोहित को सोशल मीडिया पर जरूर फॉलो करना चाहिए। 16 साल की उम्र में कोर्स पूरा करने के बाद, वह दुनिया की सबसे कम उम्र की प्रमाणित स्टॉट पिलेट्स ट्रेनर होने के साथ-साथ एक लेखिका भी हैं।

उन्होंने ‘द लेजी गर्ल्स गाइड टू बीइंग फिट‘ किताब लिखी है। आप चाहें तो इंस्टाग्राम पर उनके ऑनलाइन कोर्स और ट्रेनिंग सेशन में भी हिस्सा ले सकते हैं।

यास्मीन कराचीवाला

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अगर आप फिटनेस फ्रीक हैं तो आपने यास्मीन कराचीवाला का नाम तो सुना ही होगा। वह एक ऐसी फिटनेस ट्रेनर हैं, जिन्होंने कई मशहूर हस्तियों को ट्रेनिंग दी है।

बता दें कि यास्मीन पहली बीआईएएस प्रमाणित पिलेट्स ट्रेनर हैं, जिन्होंने मुंबई में पहला पिलेट्स स्टूडियो स्थापित किया है। वह निस्संदेह हम में से कई लोगों के लिए एक आदर्श हैं। फ्री होम वर्कआउट के लिए आप इन्हें फॉलो कर सकते हैं।

श्वेता देव

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श्वेता देव एक ऐसी फिटनेस इन्फ्लुएंसर हैं जो हर दिन खुद को चुनौती देकर एक लंबा सफर तय करती हैं। उनके इंस्टाग्राम वीडियो लोगों को ठीक से वजन उठाने और मांसपेशियों के परिवर्तन के लिए खुद को चुनौती देने के लिए प्रेरित करते हैं। वह पेशे से क्रॉसफिट ट्रेनर, मैराथन रनर भी हैं।

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माँ-बेटा जो कई साल भाइयों की तरह रहे – संघर्ष से सफलता की अनोखी कहानी

कोरोना महामारी के बीच देश भर से अदम्य साहस और धैर्य की कई दिल को छू लेने वाली कहानियां सामने आई हैं ऐसी ही एक कहानी है एनी शिवा की, जो लोगों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं हैं और उनका संघर्ष किसी को भी प्रेरणा दे सकता है।

दरअसल यह कहानी केरल पुलिस की एक महिला पुलिस उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) के संघर्ष की है। तो चलिए जानते हैं।

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जिस उम्र में लोग पढ़ते हैं तथा अपने कैरियर के बारे में सोचते हैं उस उम्र में एनी शिवा को अपने बच्चे के साथ कड़ा संघर्ष करना पड़ा।

दरअसल, एनी जब 18 साल की थीं तब उनके पति ने उन्हें एक बच्चे के साथ दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया। लेकिन एनी ने हिम्मत नहीं हारी और जिंदगी की चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया।

उतार चढ़ाव भरी ज़िंदगी

जब एनी शिवा कांजीरामकुलम के केएनएम गवर्नमेंट कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्रा थीं, उसी समय उन्हें एक लड़के से प्यार हो गया और उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जा कर उस लड़के से शादी कर ली।

लेकिन दो साल बाद उसका पति  एनी को अपने 6 महीने के बच्चे के साथ अकेला छोड़कर चला गया। उस समय एनी सिर्फ 21 साल की थी उनके माता पिता ने भी उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया, और तब वह अपनी दादी के घर में रहने के लिए चली गई। एनी ने अपने बेटे का नाम शिवसूर्य रखा।

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रोजी-रोटी कमाने के लिए उन्होंने कभी सेल्सपर्सन बनकर घर-घर सामान बेचा, तो कभी बैंको में इंश्योरेंस पॉलिसिज बेचने का काम किया।

बाद में, उन्होंने वर्कला के आस-पास स्थित त्यौहार में लगने वाले मेलों और पर्यटन स्थलों पर नींबू पानी व आइसक्रीम बेचना शुरू किया। लेकिन यह सब करना एक सिंगल मदर के लिए आसान नहीं था।

उसने एक पुरुष की तरह दिखने के लिए खुद को शारीरिक रूप से बदल लिया और 14 वर्षों तक लोगों को लगा कि वह और उसका बेटा भाई भाई हैं!

वह कहती हैं, ‘कुछ दिन तो दिन में एक बार का खाना भी लग्जरी लगने लगता था। मैंने बेबसी से अपने बेटे को भूख से रोते और सो जाते देखा है।’

उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “इतने सालों में जिन संघर्षों का मैंने सामना किया, उसका इससे बेहतर जवाब और क्या हो सकता है? मैं किसी भी तरह मानसिक रूप से विचलित नहीं हुई। इन तमाम मुश्किलों के बाद जब एक महिला अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने में कामयाब हो जाती है तो लोग दया दिखाते हैं और उनके बारे में झूठ फैलाते रहते हैं। इसलिए, मैं और मेरा बेटा यहां एक बड़े भाई और एक छोटे भाई के रूप में रहते हैं। जीवन में जब भी कठिनाईयों ने मुझे पीछे धकेला मैंने आगे बढ़ने के लिए 10 गुना अधिक मेहनत की। यह मेरी छोटी सी जीत थी लेकिन नकारात्मकताओं से भरी दुनिया में, मुझे खुशी है कि यह इतने सारे लोगों के लिए ताकत और प्रेरणा का स्रोत हो सकता है। अब मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लग रहा है कि मैंने यह सब अकेले किया है और मैं अपने बेटे को एक अच्छी जिंदगी दे सकूंगी।”

हम जानते हैं कि एक मानसिक बीमारी है जिससे भारतीय समाज पीड़ित है, जहां वे यह मान लेते हैं कि अकेली रहने वाली महिला कमजोर है या आसानी से पकड़ में आ जाती है।

इस मुश्किल समय में भी एनी ने काम करने के साथ-साथ, निजी तौर पर पढ़ाई करते हुए, समाजशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 2014 में तिरुवनंतपुरम में केरल राज्य लोक सेवा आयोग के लिए एक प्रशिक्षण संस्थान में शामिल हुईं, 2016 में पुलिस कांस्टेबल परीक्षा उत्तीर्ण की।

2019 में उन्होंने सब-इंस्पेक्टर का एग्जाम भी क्रैक कर लिया। 18 महीने की कोर्स ट्रेनिंग की बाद उन्होंने शनिवार, 26 जून 2021 को वर्कला पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर का पद संभाला। अब उनकी कहानी बहुत सी महिलाओं को जिंदगी में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा दे रही है।

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ये हैं दुनिया के 5 दुर्लभ सांप, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे

आमतौर पर सांप का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दुनिया सांपों को खौफ का दूसरा नाम मानती है, वहीं दूसरी तरफ शास्त्रों में इन्हें पूजनीय भी बताया गया है। भगवान महादेव भी सर्प को एक आभूषण के रूप में स्‍वीकार करते हैं।

आज इस पास में हम आपको 5 ऐसे दुर्लभ सांपो के बारे में बताने वाले हैं जो अन्य सांपों से अलग है और बहुत दुर्लभ है , तो चलिए जानतें हैं।

Spider-tailed horned viper(स्पाइडर-टेल्ड हॉर्नेड वाइपर)

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इस सांप के शिकार करने का तरीका बहुत अनोखा है यह शिकार को अपनी पूछ से भ्रमित करते हैं क्योंकि इनकी पूंछ देखने में किसी मकड़ी की तरह दिखाई देती है।

जिसके बाद जैसे ही कोई चीज इस सांप की पूंछ को मकड़ी समझकर उसका शिकार करने की कोशिश करता है तो वह सांप का शिकार बन जाता है।

इस सांप को 1968 में एक वैज्ञानिक अभियान के दौरान ईरान में खोजा गया था और इस पकड़े गए पहले सांप को शिकागो के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में रखा गया था।

Rainbow boa(रेनबो बोआ)

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सांपों की दुर्लभ प्रजाति में से एक है रेनबो स्नेक जोकि संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा के जंगलों में पाया गया है। शरीर पर काली धारियों वाला यह सांप सूरज की रोशनी में आने के बाद बहुत कलरफुल हो जाता है।

जैसे ही इनकी लाल त्वचा पर सूरज की किरणें पड़ती है यह सांप रंग-बिरंगे दिखाई देने लगते हैं जिस वजह से इस सांप को ‘रैनबो बोआ‘ कहां जाता है।

साउथ अमेरिका का जंगल इन सांपों का घर है इन सांपों को पेड़ों पर चढ़ना बहुत अच्छा लगता है और यह सांप 6.5 फीट लंबे भी हो सकते हैं जो छोटे स्तनपाई जीव को अपना शिकार बनाते हैं। यह रेनबो स्नेक खतरनाक नहीं है।

Atheris hispida (एथेरिस हिस्पिडा)

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इस सांप को आप छोटा ड्रेगन भी कह सकते हैं क्योंकि यह सांप ड्रैगन का मिलाजुला रूप है इसीलिए इस सांप की पीठ भी देखने में किसी ड्रैगन की तरह दिखाई देती है।

यह सांप सेंट्रल अफ्रीका के फॉरेस्ट में पाए जाते हैं जो सूखी पत्तियों और टहनियों के बीच धूप सेकते देखे जा सकते हैं इस प्रजाति के सांपों का रंग अलग-अलग हो सकता है।

इस प्रजाति के नर सांप 28.7 इंच तक बढ़ सकता हैं यह सांप छोटे स्तनपाई जीव और छिपकलियों का शिकार करते हैं। यह भी एक जहरीली प्रजाति के रुप में जानी जाती है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस सांप को रफ-स्केलड बुश वाइपर और स्पाइनी बुश वाइपर के रूप में भी जाना जाता है।

Barbados threadsnake(बारबाडोस थ्रेडस्नेक)

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थ्रेड स्नेक को दुनिया का सबसे छोटा साँप माना जाता हैं। इसकी लम्बाई लगभग 4 इंच यानि की 10 सेंटीमीटर होती हैं इसके अलावा यह सांप 0.9 मीटर मोटे होते हैं।

यह कवेल बारबाडोस के कार्रेबियन आइलैंड में पाया जाता हैं। इस सांप को ‘स्टेफेन ब्लेयर हेडगेस‘ ने खोजा था उन्होंने बीवी केरला के नाम पर इस सांप का साइंटिफिक नाम ‘Leptotyphlops carlae” (लेप्टोटाइप्लप्स कार्ला) रखा था।

स्टेफेन के मुताबिक यह सांप बिल्कुल नूडल जैसे होते हैं और अपने छोटे साइज की वजह से यह केवल दिमक और चींटी के लारवा को अपना शिकार बनाते हैं।

Paradise flying snake(पैराडाइज फ्लाइंग स्नेक)

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इस सांप की उड़ने की काबिलियत की वजह से इसे फ्लाइंग स्नेक कहा जाता है। यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगाने से पहले अपने शरीर को z आकृति मैं मोड़ देते हैं और छलांग लगाते ही अपने शरीर को फैला लेते हैं।

जिससे यह कुछ दूरी को हवा में उड़कर पार कर लेते हैं इसके अलावा यह उड़ते हुए अपनी पूंछ की सहायता से दिशा भी बदल सकते हैं।

यह सांप साउथईस्ट एशिया में पाए जाते हैं जिनमें जहर होता है पर इनका जहर इंसान के लिए खतरनाक नहीं होता है लेकिन उड़ने के कारण इनका खौफ बहुत ज्यादा होता है

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जानिए काली मिर्च के जबरदस्त फायदों के बारे!

बीमारियों से बचने के लिए शरीर को स्वस्थ रखना और स्वस्थ आहार लेना बहुत जरूरी है। पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के साथ, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आपको दवा लेने की जरूरत नहीं है। समाधान आपकी रसोई में है। हम बात कर रहे हैं काली मिर्च की।

काली मिर्च दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों में से एक है इसे “मसालों का राजा” भी माना जाता है। खाने का स्वाद बढ़ाने के अलावा काली मिर्च के कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।

इसमें कई बायोएक्टिव यौगिक होते हैं, जिनमें पिपेरिन सबसे महत्वपूर्ण है। पिपेरिन एक प्राकृतिक अल्कलॉइड है जो काली मिर्च को उसका तीखा स्वाद देता है।

पिपेरिन एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट है, जो हृदय रोग और पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

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रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच काली मिर्च का पाउडर गर्म पानी और नींबू के साथ लेने से इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के अलावा कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

मजबूत होगा इम्यून सिस्टम

काली मिर्च में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की ताकत रखते हैं। यह मसाला शरीर की कोशिकाओं को पूरा पोषण देता है और उन्हें खराब होने से बचाता है। यह शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है।

पाचन के लिए अच्छा

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आंतों का ठीक से काम करना जरूरी है। एक स्वस्थ आंत का मतलब है एक साफ और डिटॉक्सिफाइड पेट। हाइड्रोक्लोरिक एसिड आपकी आंतों को साफ करने और आपको अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों से बचाने में मदद करता है।

यह पाचन में सुधार करता है और पेट की समस्याओं को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए अपने खाने में एक चुटकी काली मिर्च डालना न भूलें।

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निर्जलीकरण को रोकने में मदद करता है

गर्म पानी, नींबू और काली मिर्च का मिश्रण आंत के स्वास्थ्य के लिए अच्छा काम करता है। यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है। यह आपको पूरे दिन ऊर्जावान रहने में मदद करता है। साथ ही यह त्वचा में नमी बनाए रखता है।

वजन घटाने में सहायक

यह आपको वजन कम करने में मदद करता है और इसे ग्रीन टी में मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस मसाले में फाइटोन्यूट्रिएंट्स की भरपूर मात्रा होती है जो अतिरिक्त वसा को तोड़ने में मदद करता है।

इससे आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है। ग्रीन टी और इसमें एक चुटकी काली मिर्च आपको वजन कम करने में मदद कर सकती है। इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करने की आवश्यकता है।

कब्ज का इलाज

जो लोग पुरानी कब्ज से पीड़ित हैं उन्हें काली मिर्च और गर्म पानी का सेवन अवश्य करना चाहिए। यह आपके मल त्याग में सुधार करता है और कब्ज को दूर करता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर पेट और आंतों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।

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किसी भी प्रकार के कैंसर से बचाता है

काली मिर्च को हल्दी के साथ मिलाने से कैंसर से बचाव होता है। इसका सेवन हल्दी और काली मिर्च को दूध में मिलाकर किया जा सकता है। यह पेय आमतौर पर गंभीर सर्दी से पीड़ित व्यक्तियों को दिया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि इसमें एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन ए और कैरोटीनॉयड होते हैं जो कैंसर और अन्य घातक बीमारियों को ठीक करने में मदद करते हैं।

इसके अलावा, इसे अपने दैनिक आहार में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि यह सबसे अच्छा तरीका है जिससे आप प्राकृतिक रूप से फिट रह सकते हैं।

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अगर आप भी खाते हैं मिर्च का अचार, तो जरूर पढ़ें उसके फायदों के बारे में

दुनियाभर में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें मिर्च का अचार खाना बहुत पसंद है हालाँकि वे इसके फायदे के बारे में नहीं जानते। जी हाँ दरअसल मिर्च का अचार खाने में जितना तीखा होता है उतना ही फायदेमंद भी होता है। आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं मिर्च का अचार खाने के फायदों के बारे में।

पोषक तत्वों से भरपूर

अचार एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होता है जो शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ता है जो शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। मिर्च के अचार में विटामिन सी और कई पोषक तत्व होते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे मिनरल्स भी होते हैं, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

पेट की सेहत के लिए फायदेमंद

अचार में हल्दी होती है जो करक्यूमिन से भरपूर होती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करते हैं।

इसके साथ ही यह अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़वा देता है और पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। मिर्च के अचार का सेवन करने से पेट की सेहत में सुधार आता है।

वजन घटाना

मिर्च का अचार खाने से वजन कंट्रोल में रहता है और मिर्च में मौजूद विटामिन शरीर को स्वस्थ रखते हैं और वजन कम करते हैं।

लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें। अगर सिरके में हरी मिर्च बनाई जाए तो इसमें कैलोरी बिल्कुल भी नहीं होती है, जो वजन घटाने में मदद करती है।

मजबूत इम्युनिटी

मिर्च में विटामिन सी होता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाता है। फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है।

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गुड फ्राइडे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!

“गुड फ्राइडे” ईसाई धर्म का त्यौहार है। गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया था। इस दिन को ‘शोक दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैंl तो आइये जानते है गुड फ्राइडे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य-

  • ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस दिन ईसा मसीह ने प्राण त्यागे थे उस दिन शुक्रवार था और इसी दिन की याद में गुड फ्राइडे मनाया जाता है।
  • प्रभु यीशु ने मानव सेवा प्रारंभ करने से पूर्व 40 दिन व्रत किया था और इसी वजह से 40 दिन पहले से उपवास की परंपरा शुरू हो जाती है। इस व्रत में शाकाहारी भोजन खाया जाता है। इस दिन चर्च और घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं या उन्हें कपडे़ से ढक दिया जाता है।
  • गुड फ्राइडे के दिन लोग भगवान ईसा मसीह के प्रतीक क्रॉस को चूमकर भगवान को याद करते हैं।
  • गुड फ्राइडे की प्रार्थना दोपहर 12 से 3 के मध्य की जाती है ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इसी दौरान यीशु को क्रॉस पर चढ़ाया गया था।
  • गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी उसके अगले संडे को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे, इसे ईस्टर संडे कहते है।
  • ईस्टर की आराधना उषाकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त यीशु का पुनरुत्थान हुआ था और उन्हें इन्हें सबसे पहले मरियम मदीलिनी नामक एक महिला ने देख अन्य महिलाओं को इस बारे में बताया था। इसे सनराइज सर्विस कहते हैं।
  • गुड फ्राइडे के दिन ईसा के अंतिम वाक्यों की विशेष व्याख्या की जाती है, जो क्षमा, मेल-मिलाप, सहायता और त्याग पर केंद्रित होती है।
  • गुड फ्राइडे को साल 2012 में क्‍यूबा में राष्‍ट्रीय अवकाश घोषित किया गया था। क्‍यूबा की सरकार ने वर्ष 1960 के बाद पहली बार इस तरह का कोई अवकाश घोषित किया था।
  • गुड फ्राइडे के दिन दुनिया भर के ईसाई चर्च में सामाजिक कार्यो को बढ़ावा देने के लिए चंदा या दान दिया जाता हैं।
  • बहुत से अंग्रेजी देशों, जैसे सिंगापुर में अधिकाँश दुकाने बंद कर दी जाती हैं और टेलिविज़न, रेडियो प्रसारण से कुछ विज्ञापनों को हटा दिया जाता हैं। वहीं ब्रिटेन में गुड फ्राइडे के दिन कोई घुड़दौड़ नहीं होती।
  • गुड फ्राइडे के दिन ईसाई लोग चर्च में लकड़ी के खटखटे से आवाज करते है। चर्च में इस दिन घंटा नहीं बजाया जाता।
  • गुड फ्राइडे को गुड इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसा मसीह ने अपनी मृत्यु के बाद पुन: जीवन धारण किया था और यह संदेश दिया कि हे मानव मैं सदा तुम्हारे साथ हूं और तुम्हारी भलाई करना मेरा उद्देश्य है। यहां गुड का मतलब हॉली (अंग्रेजी शब्द) यानी पवित्र से है।

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क्या है गुड फ्राइडे और क्यों मनाया जाता है!!

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क्या है ‘गुड फ्राइडे’ और क्यों मनाया जाता है!!

‘गुड फ्राइडे’, ईसाई धर्म के लोगों के बीच मनाया जाने वाला ऐसा त्यौहार है, जिसे ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाते हैं। प्रेम, ज्ञान व अहिंसा का संदेश देने वाले प्रभु यीशु को इस दिन सूली पर चढ़ा दिया गया था।

प्रभु यीशु ने ही ईसाई धर्म की स्थापना की थी। आइए जानते है, क्या है ‘गुड फ्राइडे’ और जिस दिन प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था, उस दिन को ‘गुड’ क्यों कहते हैं।

गुड फ्राइडे नाम क्यों पड़ा?

ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह, परमेश्वर के बेटे हैं। उन्‍हें अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए मृत्‍यु दंड की सज़ा दी गई।

कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए पिलातुस ने यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया और उनपर कई तरह से यातनाएं की गईं।

लेकिन यीशु उनके लिए प्रार्थना करते रहे कि ‘हे ईश्‍वर! इन्‍हें क्षमा करना, क्‍योंकि ये नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं’। ईसा मसीह ने लोगों की भलाई के लिए अपनी जान दी थी।

इसलिए इस दिन को ‘गुड’ कहकर संबोधित किया जाता है। जिस दिन ईसा मसीह को क्रॉस पर लटकाया गया था, उस दिन फ्राइडे यानी कि शुक्रवार था, तब से उस दिन को ‘गुड फ्राइडे’ कहा जाने लगा।

6 घंटे तक सूली पर लटके रहे थे प्रभु यीशु

बाइबिल में बताया गया है कि प्रभु यीशु को पूरे 6 घंटे तक सूली पर लटकाया गया था। बताया जाता है कि आखिरी के 3 घंटों में चारों ओर अंधेरा छा गया था।

जब यीशु के प्राण निकले, तो एक जलजला सा आया। कब्रों की कपाटें टूटकर खुल गईं। दिन में अंधेरा हो गया। माना जाता है कि इसी वजह से गुड फ्राइडे के दिन चर्च में दोपहर में करीब 3 बजे प्रार्थना सभाएं होती हैं। मगर किसी भी प्रकार का समारोह नहीं होता है।

तीन दिन बाद हो गए थे जीवित

ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन क्रॉस पर लटकाए जाने के तीसरे ही दिन रविवार को वह फिर से जीवित हो उठे थे। इसलिए पूरी दुनिया में रविवार को ‘ईस्‍टर संडे‘ के रूप में मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे के कुछ और नाम

ईसाई समुदाय में गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है।

काले कपड़े पहनकर करते हैं शोक

ईसाई समुदाय के ज़्यादातर लोग इस दिन काले कपड़े पहनकर अपना शोक व्यक्त करते हैं। प्रभु यीशू से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। चर्च जाकर प्रभु यीशू से प्रार्थना करते हैं और उनके उपदेश को सुनते है।

इस दिन ईसाई समुदाय के लोग प्रसाद स्वरूप गर्म मीठी रोटियां भी खाते हैं। लोग चर्च में घंटे नहीं बजाते हैं, बल्कि एक विशेष प्रार्थना की जाती है और लकड़ी के खटखटे से आवाज़ की जाती है। साथ ही रात के समय कहीं-कहीं काले कपड़े पहनकर प्रभु यीशू की छवि को लेकर पद यात्रा निकालते हैं।

शांति दूत कहलाते थे प्रभु यीशु

यीशु ने लोगों को क्षमा, शांति, दया, करुणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार एवं पवित्र आचरण का उपदेश दिया। उनके इन्हीं सद्गुणों के कारण लोग उन्हें शांति दूत, क्षमा मूर्ति और महात्मा कहकर पुकारने लगे। आज के दिन ईसाई चर्च सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए चंदा व दान देते हैं।

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