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भारत में ग्राफिक डिजाइन की कला

भारतीय एक विशाल देश है जिसमें बहुत सारी नदियां बहती हैं और कई पर्वत श्रंखलायें पायी जाती हैं. इस महाद्वीप के अलग-अलग हिस्सों पर रहने वाले लोग अपने-अपने रीती-रिवाजों की पालना करते हैं. भारत की प्राचीन कला यहाँ के शहरों में नहीं बल्कि ज्यादातर भारत में पड़ते दूर-दूर के गाँव वासियों द्वारा अभी भी अभ्यास में लायी जाती है. जैसे कि यह कलाकारी जो भारत की अद्भुत कला को दर्शाती है.

सोहराई (Sohrai)

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सोहराई कला में घरों की दीवारों पर चित्र बनाये जाते हैं. जब फसल काटनी होती है तब गाँव के लोग अपने-अपने घरों पर चित्र बनाते हैं. इस कला को बहुत पवित्र माना जाता है. इन चित्रों को पेड़ों की छड़ों से बनाया जाता है. चित्र बनाते समय पानी का इस्तेमाल भी किया जाता है.

खोवर(Khovar)

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इस कला को भी भारत में एक पवित्र कला के रूप में माना जाता है. इस कला में बनाये जाने वाले चित्रों में काली मिट्टी ओर सफेद मिट्टी का इस्तेमाल होता है. यह चित्र घरों की दीवारों पर उस समय बनाये जाते हैं जिस समय घरों में शादी हो.

कावड़ (Kavad)

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कावड़ को भारत में “भगवान् के डिब्बे” भी कहा जाता है. इन डिब्बों में कई दरवाजे होते हैं और इन डिब्बों पर चित्र बनाये जाते हैं. ज्यादातर इन डिब्बों की उंचाई 80 सेंटीमीटर होती है. इन डिब्बों को हल्की लकड़ी से बनाया जाता है. इन डिब्बों पर मिथक कहानी के चित्र बनाये जाते हैं जैसे कि भगवान कृष्ण की जिंदगी, रामयण, भगवद्गीता, पुराना और तंत्रस इत्यादि.

रंगोली (Rangoli)

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रंगोली, हिन्दुओं में अलग-अलग त्योहारों पर जमीन के ऊपर बनायी जाती है. ऐसा माना जाता है कि रंगोली भगवान को खुश करने के लिए बनायी जाती है. यह परम्परा पीड़ी दर पीड़ी चलती आ रही है. रंगोली बनाने का पैटर्न भारत की विभिन्न जगहों पर अलग-अलग है.

भारतीय जन-जातीय टैटू (Indian Tribe Tattoos)

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टैटू भारत के आदिवासी समाज का एक अभिन्न हिस्सा है. यह लोगों द्वारा अपने शरीर पर बनाये जाते हैं. टैटू को स्याही से बनाया जाता है. यह कला भारत के आदिवासी समाज में अभी भी प्रचलित है.

मेहंदी (Mehndi)

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मेहंदी, एशिया में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में लोकप्रिय है. मेहंदी शब्द को संस्कृत से लिया गया है. यह थोड़े समय के लिए अपने शरीर को सजाने के लिए उपयोग की जाती है. इस कला में हल्दी और मेहंदी का इस्तेमाल किया जाता है.

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