जानिए काली मिर्च के जबरदस्त फायदों के बारे!

बीमारियों से बचने के लिए शरीर को स्वस्थ रखना और स्वस्थ आहार लेना बहुत जरूरी है। पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के साथ, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आपको दवा लेने की जरूरत नहीं है। समाधान आपकी रसोई में है। हम बात कर रहे हैं काली मिर्च की।

काली मिर्च दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों में से एक है इसे “मसालों का राजा” भी माना जाता है। खाने का स्वाद बढ़ाने के अलावा काली मिर्च के कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।

इसमें कई बायोएक्टिव यौगिक होते हैं, जिनमें पिपेरिन सबसे महत्वपूर्ण है। पिपेरिन एक प्राकृतिक अल्कलॉइड है जो काली मिर्च को उसका तीखा स्वाद देता है।

पिपेरिन एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट है, जो हृदय रोग और पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

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रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच काली मिर्च का पाउडर गर्म पानी और नींबू के साथ लेने से इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के अलावा कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

मजबूत होगा इम्यून सिस्टम

काली मिर्च में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की ताकत रखते हैं। यह मसाला शरीर की कोशिकाओं को पूरा पोषण देता है और उन्हें खराब होने से बचाता है। यह शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है।

पाचन के लिए अच्छा

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आंतों का ठीक से काम करना जरूरी है। एक स्वस्थ आंत का मतलब है एक साफ और डिटॉक्सिफाइड पेट। हाइड्रोक्लोरिक एसिड आपकी आंतों को साफ करने और आपको अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों से बचाने में मदद करता है।

यह पाचन में सुधार करता है और पेट की समस्याओं को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए अपने खाने में एक चुटकी काली मिर्च डालना न भूलें।

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निर्जलीकरण को रोकने में मदद करता है

गर्म पानी, नींबू और काली मिर्च का मिश्रण आंत के स्वास्थ्य के लिए अच्छा काम करता है। यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है। यह आपको पूरे दिन ऊर्जावान रहने में मदद करता है। साथ ही यह त्वचा में नमी बनाए रखता है।

वजन घटाने में सहायक

यह आपको वजन कम करने में मदद करता है और इसे ग्रीन टी में मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस मसाले में फाइटोन्यूट्रिएंट्स की भरपूर मात्रा होती है जो अतिरिक्त वसा को तोड़ने में मदद करता है।

इससे आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है। ग्रीन टी और इसमें एक चुटकी काली मिर्च आपको वजन कम करने में मदद कर सकती है। इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करने की आवश्यकता है।

कब्ज का इलाज

जो लोग पुरानी कब्ज से पीड़ित हैं उन्हें काली मिर्च और गर्म पानी का सेवन अवश्य करना चाहिए। यह आपके मल त्याग में सुधार करता है और कब्ज को दूर करता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर पेट और आंतों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।

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किसी भी प्रकार के कैंसर से बचाता है

काली मिर्च को हल्दी के साथ मिलाने से कैंसर से बचाव होता है। इसका सेवन हल्दी और काली मिर्च को दूध में मिलाकर किया जा सकता है। यह पेय आमतौर पर गंभीर सर्दी से पीड़ित व्यक्तियों को दिया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि इसमें एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन ए और कैरोटीनॉयड होते हैं जो कैंसर और अन्य घातक बीमारियों को ठीक करने में मदद करते हैं।

इसके अलावा, इसे अपने दैनिक आहार में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि यह सबसे अच्छा तरीका है जिससे आप प्राकृतिक रूप से फिट रह सकते हैं।

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अगर आप भी खाते हैं मिर्च का अचार, तो जरूर पढ़ें उसके फायदों के बारे में

दुनियाभर में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें मिर्च का अचार खाना बहुत पसंद है हालाँकि वे इसके फायदे के बारे में नहीं जानते। जी हाँ दरअसल मिर्च का अचार खाने में जितना तीखा होता है उतना ही फायदेमंद भी होता है। आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं मिर्च का अचार खाने के फायदों के बारे में।

पोषक तत्वों से भरपूर

अचार एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होता है जो शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ता है जो शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। मिर्च के अचार में विटामिन सी और कई पोषक तत्व होते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे मिनरल्स भी होते हैं, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

पेट की सेहत के लिए फायदेमंद

अचार में हल्दी होती है जो करक्यूमिन से भरपूर होती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करते हैं।

इसके साथ ही यह अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़वा देता है और पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। मिर्च के अचार का सेवन करने से पेट की सेहत में सुधार आता है।

वजन घटाना

मिर्च का अचार खाने से वजन कंट्रोल में रहता है और मिर्च में मौजूद विटामिन शरीर को स्वस्थ रखते हैं और वजन कम करते हैं।

लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें। अगर सिरके में हरी मिर्च बनाई जाए तो इसमें कैलोरी बिल्कुल भी नहीं होती है, जो वजन घटाने में मदद करती है।

मजबूत इम्युनिटी

मिर्च में विटामिन सी होता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाता है। फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है।

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गुड फ्राइडे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!

गुड फ्राइडे” ईसाई धर्म का त्यौहार है। गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया था। इस दिन को ‘शोक दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैंl तो आइये जानते है गुड फ्राइडे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य-

  • ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस दिन ईसा मसीह ने प्राण त्यागे थे उस दिन शुक्रवार था और इसी दिन की याद में गुड फ्राइडे मनाया जाता है।
  • प्रभु यीशु ने मानव सेवा प्रारंभ करने से पूर्व 40 दिन व्रत किया था और इसी वजह से 40 दिन पहले से उपवास की परंपरा शुरू हो जाती है। इस व्रत में शाकाहारी भोजन खाया जाता है। इस दिन चर्च और घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं या उन्हें कपडे़ से ढक दिया जाता है।
  • गुड फ्राइडे के दिन लोग भगवान ईसा मसीह के प्रतीक क्रॉस को चूमकर भगवान को याद करते हैं।
  • गुड फ्राइडे की प्रार्थना दोपहर 12 से 3 के मध्य की जाती है ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इसी दौरान यीशु को क्रॉस पर चढ़ाया गया था।
  • गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी उसके अगले संडे को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे, इसे ईस्टर संडे कहते है।
  • ईस्टर की आराधना उषाकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त यीशु का पुनरुत्थान हुआ था और उन्हें इन्हें सबसे पहले मरियम मदीलिनी नामक एक महिला ने देख अन्य महिलाओं को इस बारे में बताया था। इसे सनराइज सर्विस कहते हैं।
  • गुड फ्राइडे के दिन ईसा के अंतिम वाक्यों की विशेष व्याख्या की जाती है, जो क्षमा, मेल-मिलाप, सहायता और त्याग पर केंद्रित होती है।
  • गुड फ्राइडे को साल 2012 में क्‍यूबा में राष्‍ट्रीय अवकाश घोषित किया गया था। क्‍यूबा की सरकार ने वर्ष 1960 के बाद पहली बार इस तरह का कोई अवकाश घोषित किया था।
  • गुड फ्राइडे के दिन दुनिया भर के ईसाई चर्च में सामाजिक कार्यो को बढ़ावा देने के लिए चंदा या दान दिया जाता हैं।
  • बहुत से अंग्रेजी देशों, जैसे सिंगापुर में अधिकाँश दुकाने बंद कर दी जाती हैं और टेलिविज़न, रेडियो प्रसारण से कुछ विज्ञापनों को हटा दिया जाता हैं। वहीं ब्रिटेन में गुड फ्राइडे के दिन कोई घुड़दौड़ नहीं होती।
  • गुड फ्राइडे के दिन ईसाई लोग चर्च में लकड़ी के खटखटे से आवाज करते है। चर्च में इस दिन घंटा नहीं बजाया जाता।
  • गुड फ्राइडे को गुड इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसा मसीह ने अपनी मृत्यु के बाद पुन: जीवन धारण किया था और यह संदेश दिया कि हे मानव मैं सदा तुम्हारे साथ हूं और तुम्हारी भलाई करना मेरा उद्देश्य है। यहां गुड का मतलब हॉली (अंग्रेजी शब्द) यानी पवित्र से है।

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क्या है गुड फ्राइडे और क्यों मनाया जाता है!!

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क्या है ‘गुड फ्राइडे’ और क्यों मनाया जाता है!!

‘गुड फ्राइडे’, ईसाई धर्म के लोगों के बीच मनाया जाने वाला ऐसा त्यौहार है, जिसे ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाते हैं। प्रेम, ज्ञान व अहिंसा का संदेश देने वाले प्रभु यीशु को इस दिन सूली पर चढ़ा दिया गया था।

प्रभु यीशु ने ही ईसाई धर्म की स्थापना की थी। आइए जानते है, क्या है ‘गुड फ्राइडे’ और जिस दिन प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था, उस दिन को ‘गुड’ क्यों कहते हैं।

गुड फ्राइडे नाम क्यों पड़ा?

ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह, परमेश्वर के बेटे हैं। उन्‍हें अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए मृत्‍यु दंड की सज़ा दी गई।

कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए पिलातुस ने यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया और उनपर कई तरह से यातनाएं की गईं।

लेकिन यीशु उनके लिए प्रार्थना करते रहे कि ‘हे ईश्‍वर! इन्‍हें क्षमा करना, क्‍योंकि ये नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं’। ईसा मसीह ने लोगों की भलाई के लिए अपनी जान दी थी।

इसलिए इस दिन को ‘गुड’ कहकर संबोधित किया जाता है। जिस दिन ईसा मसीह को क्रॉस पर लटकाया गया था, उस दिन फ्राइडे यानी कि शुक्रवार था, तब से उस दिन को ‘गुड फ्राइडे’ कहा जाने लगा।

6 घंटे तक सूली पर लटके रहे थे प्रभु यीशु

बाइबिल में बताया गया है कि प्रभु यीशु को पूरे 6 घंटे तक सूली पर लटकाया गया था। बताया जाता है कि आखिरी के 3 घंटों में चारों ओर अंधेरा छा गया था।

जब यीशु के प्राण निकले, तो एक जलजला सा आया। कब्रों की कपाटें टूटकर खुल गईं। दिन में अंधेरा हो गया। माना जाता है कि इसी वजह से गुड फ्राइडे के दिन चर्च में दोपहर में करीब 3 बजे प्रार्थना सभाएं होती हैं। मगर किसी भी प्रकार का समारोह नहीं होता है।

तीन दिन बाद हो गए थे जीवित

ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन क्रॉस पर लटकाए जाने के तीसरे ही दिन रविवार को वह फिर से जीवित हो उठे थे। इसलिए पूरी दुनिया में रविवार को ‘ईस्‍टर संडे के रूप में मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे के कुछ और नाम

ईसाई समुदाय में गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है।

काले कपड़े पहनकर करते हैं शोक

ईसाई समुदाय के ज़्यादातर लोग इस दिन काले कपड़े पहनकर अपना शोक व्यक्त करते हैं। प्रभु यीशू से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। चर्च जाकर प्रभु यीशू से प्रार्थना करते हैं और उनके उपदेश को सुनते है।

इस दिन ईसाई समुदाय के लोग प्रसाद स्वरूप गर्म मीठी रोटियां भी खाते हैं। लोग चर्च में घंटे नहीं बजाते हैं, बल्कि एक विशेष प्रार्थना की जाती है और लकड़ी के खटखटे से आवाज़ की जाती है। साथ ही रात के समय कहीं-कहीं काले कपड़े पहनकर प्रभु यीशू की छवि को लेकर पद यात्रा निकालते हैं।

शांति दूत कहलाते थे प्रभु यीशु

यीशु ने लोगों को क्षमा, शांति, दया, करुणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार एवं पवित्र आचरण का उपदेश दिया। उनके इन्हीं सद्गुणों के कारण लोग उन्हें शांति दूत, क्षमा मूर्ति और महात्मा कहकर पुकारने लगे। आज के दिन ईसाई चर्च सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए चंदा व दान देते हैं।

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अम्बेडकर जयंती: जाति व्यवस्था का कड़वा सच दिखाती हैं ये फिल्में

बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती हर साल 14 अप्रैल को पूरे देश में मनाई जाती है। भारत का संविधान बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। उन्होंने संविधान समिति का नेतृत्व किया और स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में कार्य किया।

उन्होंने अपने पूरे जीवन में शोषितों के लिए आवाज उठाना जारी रखा। उन्होंने जाति व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकने और भारत में सभी को समान नागरिकता का अधिकार दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

आज उनकी जयंती पर हम बात करेंगे उन फिल्मों की जो जाति व्यवस्था और दलितों पर आधारित हैं, तो चलिए जानते हैं:-

बैंडिट क्वीन

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यह एक दलित लड़की की कहानी है जिसे लगातार बलात्कार और मानसिक हमलों का शिकार होना पड़ता है। इसके बाद वह हथियार उठा लेती है और डकैत बन जाती है।

यह फिल्म भारत की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक मानी जाती है। सीमा बिस्वास ने फिल्म में फूलन देवी का किरदार निभाया था। फिल्म का निर्देशन शेखर कपूर ने किया था।

आर्टिकल 15

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यह फिल्म काफी हद तक जातिगत भेदभाव के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में आयुष्मान एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आए थे जो दो दलित लड़कियों की हत्या की जांच करता है।

इस दौरान उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही थी। फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया था।

आरक्षण

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जैसा कि नाम से पता चलता है, फिल्म आरक्षण प्रणाली के बारे में बनाई गई थी। फिल्म का निर्देशन प्रकाश झा ने किया था। इस फिल्म में सैफ अली खान, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण, मनोज वाजपेयी जैसे सितारों ने काम किया था।

मांझी

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फिल्म मांझी नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग की काफी तारीफ हुई थी। फिल्म एक दलित व्यक्ति की कहानी है जिसकी पत्नी को हर दिन पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है।

एक दिन वह पहाड़ से फिसल जाती है और उसकी मृत्यु हो जाती है। इसके बाद मांझी खुद पहाड़ के बीच से रास्ता बनाता है। इस फिल्म को बेस्ट मोटिवेशनल फिल्म कहा जाता है।

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भगवान महावीर जी के बारे में कुछ विशेष बातें

14 अप्रैल को भगवान महावीर स्वामी को जयंती है। सम्पूर्ण मानव समाज को अन्धकार से प्रकाश की ओर लाने वाले महापुरुष भगवान श्री महावीर स्वामी का जन्म 599 वर्ष पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी तिथि को बिहार में लिच्छिवी वंश में हुआ था l

उनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशिला देवी था। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी की जयंती चैत्र महीने की शुक्ल-त्रयोदशी को मनाई जाती है।

  • भगवान महावीर का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था। बचपन में भगवान महावीर स्वामी का नाम वर्द्धमान था। उनके परिवार में ऐश्वर्य, धन-संपदा की कोई कमी नहीं थी l वे मनचाहा उपभोग भी कर सकते थे, परन्तु युवावस्था में क़दम रखते ही वे संसार की माया-मोह, सुख-ऐश्वर्य और राज्य को छोड़कर सन्यासी हो गए।
  • राजकुमार वर्द्धमान के माता-पिता जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे। वर्द्धमान सबसे प्रेम का व्यवहार करते थे। उन्हें इस बात का अनुभव हो गया था, कि इन्द्रियों का सुख, विषय-वासनाओं का सुख, दूसरों को दुःख पहुँचा कर ही पाया जा सकता है। महावीर जी जब 28 वर्ष के थे तब इनके माता-पिता का देहान्त हो गया।
  • तीस वर्ष की आयु मे महावीर स्वामी ने पूर्ण संयम रखकर अध्ययन-यात्रा पर निकल गये। अधिकांश समय वे ध्यान में ही मग्न रहते। हाथ में ही भोजन कर लेते थे l गृहस्थों से कोई चीज नहीं माँगते थे। धीरे-धीरे उन्होंने पूर्ण आत्मसाधना प्राप्त कर ली।
  • इसके पश्चात साढ़े बारह वर्ष की कठिन तपस्या और साधना के बाद ऋजुबालुका नदी के किनारे महावीर स्वामी जी को शाल वृक्ष के नीचे वैशाख शुक्ल दशमी के दिन केवल ज्ञान- केवल दर्शन की उपलब्धि प्राप्त हुई l

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  • वर्द्धमान महावीर ने 12 साल तक मौन तपस्या की और तरह-तरह के कष्ट झेले। अन्त में उन्हें ‘केवलज्ञान’ प्राप्त हुआ। केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद जनकल्याण के लिए उपदेश देना शुरू किया। महावीर जी अर्धमागधी भाषा में उपदेश देने लगे ताकि जनता उसे भलीभाँति समझ सके।
  • भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में अहिंसा, सत्य, और ब्रह्मचर्य पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। भगवान महावीर ने श्रमण और श्रमणी, श्रावक और श्राविका, सबको लेकर चतुर्विध संघ की स्थापना की। उनका मानना था कि जीवन का एक ही लक्ष्य होना चाहिए वह है  ” समानता”। देश के भिन्न-भिन्न भागों में घूमकर भगवान महावीर ने अपना पवित्र संदेश फैलाया।
  • भगवान महावीर ने 72 वर्ष की आयु में पावापुरी (बिहार) में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को मोक्ष प्राप्त किया। इनके मोक्ष दिवस पर घर-घर दीपक जलाकर दीपावली मनाई जाती है।
  • यदि हम भगवान महावीर के उपदेशों का सच्चे मन से पालन करने लगें और यह जान लें कि संसार के सभी छोटे-बड़े जीव हमारी ही तरह हैं, हमारी आत्मा का ही स्वरूप हैं। तो हमारा जीवन सफल हो जाए।
  • जैन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, वर्द्धमान ने कठोर तप द्वारा अपनी समस्त इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर विजेता कहलाए l इन्द्रियों को जीतने के कारण उन्हें जितेन्द्रिय भी कहा जाता था। यह कठिन तप पराक्रम के समान माना गया, इसलिए वे ‘महावीर’ कहलाए। उन्हें ‘वीर’  ‘अतिवीर’ और ‘सन्मति’ भी कहा जाता है।

डॉ. बी.आर अम्बेडकर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

डॉ. बी.आर अम्बेडकर को भारतीय संविधान के रचयिता के रूप में जाना जाता है, उन्होंने देश के लिए एक ऐसा संविधान तैयार किया जो सभी जाति और धर्म के लोगों की रक्षा करे।

उनकी सोच और उनके व्यक्तित्व के पीछे उनके अपने सिद्धांत थे, जिन्होंने न सिर्फ उन्हें एक सफल इंसान बनाया बल्कि हर ऊंचाई को छूने में मदद भी की।

डॉ भीमराव का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू गांव में हुआ था। वे अपने माता-पिता की 14वीं संतान थे।

  • डॉ. अम्बेडकर का वास्तविक सरनेम अंबाडवेकर था। लेकिन उनके शिक्षक, महादेव अम्बेडकर, जो उन्हें बहुत मानते थे, उन्होंने स्कूल रिकार्ड्स में उनका नाम अम्बेडकर कर दिया।
  • डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर विदेश जाकर अर्थशास्त्र में पी एच डी की डिग्री प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे।
  • बाबा साहेब ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में 8 वर्ष में समाप्त होने वाली पढाई केवल 2 वर्ष 3 महीने में पूरी कर ली थी l इसके लिए उन्होंने प्रतिदिन 21-21 घंटे पढ़ाई की थी|
  • डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर 64 विषयों में मास्टर थे| वे हिन्दी, पाली, संस्कृत, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, मराठी, पर्शियन और गुजराती जैसे 9 भाषाओँ के जानकार थे| इसके अलावा उन्होंने लगभग 21 साल तक विश्व के सभी धर्मों की तुलनात्मक रूप से पढाई की थी|
  • डॉ. बी.आर अम्बेडकर एकमात्र ऐसे भारतीय हैं जिनकी प्रतिमा लन्दन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है।
  • भारतीय तिरंगे में “अशोक चक्र” को जगह देने का श्रेय भी डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर को जाता है।
  • मध्य प्रदेश और बिहार के बेहतर विकास के लिए बाबा साहेब ने 50 के दशक में विभाजन का प्रस्ताव रखा था, परन्तु सन 2000 में जाकर यह विभाजन किया गया और छत्तीसगढ़ और झारखण्ड का गठन हुआ।
  • विश्व का सबसे बड़ा निजी पुस्तकालय “राजगृह” में है जिसमें 50,000 से भी अधिक किताबें है।
  • डॉ. बाबा साहेब द्वारा लिखी गई पुस्तक “वेटिंग फॉर अ वीसा” कोलंबिया विश्वविद्यालय में टेक्स्टबुक है। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने 2004 में विश्व के शीर्ष 100 विद्वानों की सूची बनाई थी और उसमे पहला नाम डॉ. भीमराव अम्बेडकर का था|
  • डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर का 8,50,000 समर्थको के साथ बौद्ध धर्म में दीक्षा लेना विश्व में ऐतिहासिक था, क्योंकि यह विश्व का सबसे बडा धर्मांतरण था।
  • बाबा साहेब को बौद्ध धर्म की दीक्षा देने वाले महान बौद्ध भिक्षु “महंत वीर चंद्रमणी” ने उन्हें “इस युग का आधुनिक बुद्ध” कहा था।
  • डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म छोड़ते समय 22 वचन लिए थे, उन्होंने कहा था ” मैं राम और कृष्ण जो भगवान् के अवतार माने जाते हैं की कभी पूजा नहीं करूँगा”l
  • लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से “डॉक्टर ऑल सायन्स” (Doctor All Science) नामक अनमोल डॉक्टरेट पदवी प्राप्त करने वाले बाबा साहेब विश्व के पहले और एकमात्र महापुरूष हैं। कई छात्रों ने इसके लिए प्रयास किये परन्तु वे अब तक सफल नहीं हो सके हैं|
  • विश्व में हर जगह बुद्ध की बंद आंखो वाली प्रतिमाएं एवं पेंटिग्स दिखाई देती है लेकिन बाबा साहेब जो उत्तम चित्रकार भी थे, उन्होंने सर्वप्रथम बुद्ध की ऐसी पेंटिंग बनाई थी जिसमें बुद्ध की आंखे खुली थी।

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  • विश्व में जिस नेता के ऊपर सबसे अधिक गाने और किताबें लिखी गई है वह डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर हैं|
  • गवर्नर लॉर्ड लिनलिथगो और महात्मा गांधी का मानना था कि बाबा साहेब हजारों विद्वानों से भी अधिक बुद्धिमान हैं|
  • पीने के पानी के लिए सत्याग्रह करने वाले बाबा साहेब विश्व के प्रथम और एकमात्र सत्याग्रही थे|
  • 1954 में काठमांडू, नेपाल में आयोजित “जागतिक बौद्ध धर्मपरिषद” में बौद्ध भिक्षुओं नें डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर को बौद्ध धर्म की सर्वोच्च उपाधि “बोधीसत्त्व” प्रदान की थी| उनकी प्रसिद्ध किताब “दि बुद्ध अण्ड हिज् धम्म” भारतीय बौद्धों का “धर्मग्रंथ” है।
  • डॉ. बी.आर अम्बेडकर भगवान बुद्ध, संत कबीर और महात्मा फुले इन तीनों महापुरूषों को अपना गुरू मानते थे।
  • दुनिया में सबसे अधिक स्टेच्यु बाबा साहेब के ही हैं। उनकी जयंती भी पूरे विश्व में मनाई जाती है।
  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए “द मेकर्स ऑफ़ द यूनिवर्स” नामक सर्वेक्षण के आधार पर पिछले 10 हजार वर्षो के शीर्ष 100 मानवतावादी विश्व मानवों की सूची बनाई गई थी जिसमें चौथा नाम डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर का था|
  • 1950 में बाबा साहेब का पहला स्टेच्यु उनके जीवित रहते बनाया गया था। यह कोल्हापूर शहर में  है।

“बैलेंसिंग रॉक” जिसे बड़े से बड़ा भूकंप भी नहीं हिला पाया, जाने क्या है रहस्य

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दुनिया में बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जो हर किसी को हैरत में डाल देती हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक ऐसा ही बैलेंसिंग रॉक है जिसे देखकर हरकोई हैरान रह जाता है। इस पत्थर का संतुलन ऐसा है कि सबसे बड़े भूकंप के झटके भी उसे  हिला नहीं पाए हैं।

इस पत्थर को देखने के लिए यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। खासकर छुट्टियों के दिनों में यहां पर्यटकों की काफी भीड़ रहती है। वर्षों से यह पत्थर एक ही स्थान पर टिका हुआ है।

कई विशेषज्ञों ने भी इसके रहस्य को सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन उनका जवाब यही होता है कि यह पत्थर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण टिका हुआ है।

इस पोस्ट में आज हम इसी रहस्य्मय पत्थर के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं

ये पत्थर कभी नहीं हिलता

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22 मई 1997 के भूकंप ने जबलपुर में भारी तबाही मचाई। भूकंप के झटकों से कई इमारतें धराशायी हो गईं। 40 लोगों की मौत हो गई थी।

पूरे शहर में केवल एक बैलेंसिंग रॉक थी, जो भूकंप से प्रभावित नहीं हुई थी। 1997 में आए भूकंप की तीव्रता 6.2 थी। लेकिन यह पत्थर अपनी जगह से नहीं डगमगाया। यही कारण है कि इसे बैलेंसिंग रॉक कहा जाता है।

कहाँ हैं ये बैलेंसिंग रॉक

जबलपुर शहर ग्रेनाइट चट्टानों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शहर ग्रेनाइट चट्टानों से घिरा हुआ है। इन ग्रेनाइट चट्टानों के बीच में मदन महल की पहाड़ियों में रानी दुर्गावती का किला स्थित है। बैलेंस रॉक रानी दुर्गावती के किले के पास स्थित है। इस बैलेंस रॉक को देखने के लिए देश भर से लोग आते हैं।

यह एशिया की तीन संतुलन चट्टानों में शामिल है।

जबलपुर स्थित बैलेंस रॉक एशिया की तीन बैलेंस रॉक्स में से एक है। इस बैलेंस रॉक को देखने के लिए दुनिया भर से लोग जबलपुर आते हैं और इसे देखकर हैरान रह जाते हैं।

एक चट्टान दूसरी चट्टान के ऊपर संतुलित है। वर्षों से यह चट्टान उसी तरह एक और चट्टान के ऊपर बनी हुई है, जो आज तक प्राकृतिक आपदा से हिली तक नहीं है।

लगता है गिर जाएगा

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बैलेंसिंग रॉक एक ऐसा पत्थर है, जो देखने में ऐसा लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है। जिन्हें इस पत्थर के बारे में पता नहीं है, वे पास जाने से भी डरते हैं।

बैलेंसिंग रॉक दूसरे पत्थर के कुछ ही हिस्सों पर टिकी हुई है लेकिन आंधी हो या तूफान यह पत्थर ज़रा भी नहीं हिलता । पुरातत्वविद भी आज तक इसके रहस्य को नहीं सुलझा पाए हैं। उनका कहना हैं कि इन चट्टानों का निर्माण मैग्मा के ज़माने से हुआ होगा। जबलपुर के आसपास कई संतुलन चट्टानें हैं।

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वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की ऐसी सनक, जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे

दुनिया में कुछ लोग वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के चक्कर में कुछ ना कुछ ऐसा कर देते हैं जिसके बारे में जानकर लोग हैरान हो जाते हैं या फिर ऐसे लोगों को आप सनकी भी सकते हैं।

आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे कान छिदवाने का शौक है। दरअसल शौक नहीं आप इसे सनक कह सकते हैं यह महिला चाहती है कि उसके कान में छेद इतने बड़े जाए कि विश्व रिकॉर्ड बन जाए। इसके लिए वह अपने कानों के छेदों को खींचती रहती हैं। सही में सनकी है!

आज इस पोस्ट में हम आपको इसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं :-

वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की सनक

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दरअसल इस महिला का नाम बियांका फेरो है और वह वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर अपनी पहचान बनाना चाहती है। इसके लिए वह अपने कान के छेद खींचती रहती है।

13 साल की उम्र में उन्होंने अपने कान के छेद को खींच कर बड़ा करना शुरू कर दिया था। अब तक उसके कान के छेद 3.3 इंच लंबे हो चुके हैं। बियांका 24 साल की हैं और अमेरिका के न्यू जर्सी में रहती हैं। वह पेशे से टैटू आर्टिस्ट हैं।

बियांका को बॉडी मॉडिफिकेशन का बहुत शौक है। स्कूल में उन्हें मोटा कहकर सभी बहुत चिढ़ाते थे। बाद में उसने खुद से प्यार करना सीखा और दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए अपने कानों के छेद को बड़ा करना शुरू कर दिया। वह कई बार कान छिदवा चुकी है।

बियांका का कहना है कि वह अपने कान के जरिए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहती हैं। उसने अब तक अपने कान का छेद 3.3 इंच लंबा कर लिया है। विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए उन्हें अपना कान 4.1 इंच तक बढ़ाने होंगे।

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इसके लिए बियांका हर संभव कोशिश कर रही है। बियांका को पूरी उम्मीद है कि भविष्य में एक दिन ऐसा आएगा जब उसकी मेहनत रंग लाएगी और वह विश्व रिकॉर्ड बनाने में सफल होगी। इसके अलावा बियांका ने अपने शरीर पर कई टैटू भी बनवाए हैं।

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गर्मी को मात देने के लिए बेहद फायदेमंद है ये पेय पदार्थ, आप भी जरूर ट्राय करें

गर्मियों में हमें अपने शरीर का खास ख्याल रखना पड़ता है। सही खान-पान से लेकर जीवनशैली में बदलाव गर्मियों के हानिकारक प्रभावों से हमें बचा सकते हैं। भीषण गर्मी में चलते रहने और अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हाइड्रेटेड रहना सबसे महत्वपूर्ण कारक है।

वैसे तो प्यास बुझाने के लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण पेय है, लेकिन आप गर्मियों में अन्य पेय पदार्थों को भी आजमा सकते हैं जो न केवल आपकी प्यास को संतुष्ट करते हैं बल्कि आपके शरीर को भी ठंडा रखते हैं।

इस पोस्ट में हम जानेगें गर्मी को मात देने के लिए कुछ बेहतरीन पेय पदार्थों के बारे में तो चलिए जानते हैं (वीडियो भी देखें):-

आम पन्ना

आम पन्ना एक तरोताज़ा कर देने वाला पेय है जिसे हर आयु वर्ग के लोग चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए पी सकते हैं। यह पेय कच्चे आम से बनाया जाता है।

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यह बहुत ही स्वादिष्ट होता है और आपको भीषण गर्मी से लड़ने में मदद करता है। इसलिए, यदि आपकी यात्रा करने की कोई योजना है तो आप निश्चित रूप से इस अद्भुत पेय को अपने साथ ले जा सकते हैं।

छाछ

छाछ में हमारे शरीर को अत्यधिक गर्मी में भी ठंडा रखने के लिए आवश्यक प्रोबायोटिक्स, विटामिन और खनिज होते हैं। रोजाना या दिन में दो बार छाछ पीने से आपके शरीर को ठंडक मिल सकती है। अपनी ऊर्जा को बहाल करने और अपने शरीर को स्वाभाविक रूप से ठंडा करने के लिए एक गिलास ठंडा छाछ जरूर पिएं।

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गन्ने का जूस

गर्मी के दिनों में एक गिलास गन्ने के जूस से बेहतर और क्या हो सकता है? इसका स्वाद बहुत ही अद्भुत होता है। हालांकि, इसके स्वाद के अलावा और भी इसमें कई गुण हैं जैसे कि यह स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है और कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, फास्फोरस आदि का एक बड़ा स्रोत है।

तरबूज़ का जूस

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आम के अलावा, तरबूज एक और ऐसा फल है जो गर्मी की मात देने के लिए एक अच्छा स्त्रोत है। आमतौर पर तरबूज में 92% पानी होता है, जो डिहाइड्रेशन को रोकने और शरीर को ठंडा रखने में मदद करेगा।

तरबूज विटामिन-बी का अच्छा स्रोत है, जो शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाने का काम करता है। तरबूज जरूरी विटामिन, जैसे बी6 से समृद्ध होता है, जो ऊर्जा के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

अगर तरबूज या इसके जूस का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो यह आपके शरीर की गर्मी को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

जलजीरा

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गर्मी के मौसम में झटपट तैयार होने वाला चटपटा पेय ‘जलजीरा’ उत्तर भारत का बहुत पॉपुलर ड्रिंक है। जिसे कुछ जगहों पर शिकंजी भी कहा जाता है।

बर्फ, नींबू और मसालों सी बना जलजीरा ड्रिंक पेट को ठंडा तो रखता ही है, साथ ही पाचन और इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है।

यह उत्तर भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय है जहां अक्सर सड़कों पर विशाल मिट्टी के मटके के साथ ठेले, पुदीने की पत्तियों और बूंदी से सजा हुआ ठंडा जल जीरा बेचते हैं।

ठंडाई

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ठंडाई काफी लोकप्रिय पारंपरिक पेय है जो उत्तर भारतीय राज्यों जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, यूपी, आदि में प्रसिद्ध है। भीषण गर्मी में ठंडाई के ताज़ा स्वाद से बेहतर कुछ नहीं है।

कोकम शरबत

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कोकम न केवल आपकी प्यास बुझाने में मदद करता है, बल्कि यह निर्जलीकरण और सनस्ट्रोक को भी रोकता है, जिसकी गर्मियों में बहुत आवश्यकता होती है।

कोकम में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-एजिंग गुण होते हैं और यह शरीर की गर्मी को कम करने में भी मदद करता है, जिससे गर्मियों के लिए ठंडा और ताज़ा कोकम शरबत एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है।

जिगरथंडा

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जिगरथंडा जिसका शाब्दिक अर्थ है “ठंडा दिल” एक ऐसा पेय है जो बहुत सी चीजों का मिश्रण है। तमिलनाडु के दक्षिण भारतीय शहर मदुरै में विशेष रूप से प्रसिद्ध यह पेय आम तौर पर तैयार किया जाता है। इसमें ढेर सारी आइसक्रीम, ठंडी बासुंदी, मलाई वाला दूध और बादाम, गोंद, चाइना ग्रास और रूट सिरप शामिल हैं।

पनाकम

पनाकम एक ताज़ा मसालेदार पेय है जो गुड़, पानी, काली मिर्च, अदरक पाउडर और इलायची और नींबू के साथ बनाया जाता है।

पनाकामी श्री राम नवमी उत्सव के लिए बनाया जाने वाला एक विशेष पेय है। इसे गर्मियों के लिए कूलिंग ड्रिंक के रूप में भी बनाया जा सकता है। पनाकम को पनागम या पनका के नाम से भी जाना जाता है।

सोलकढ़ी

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सोलकढ़ी वैसे तो एक प्रकार का पेय है, लेकिन आमतौर पर इसे चावल के साथ खाया जाता है या कभी-कभी भोजन के बाद या साथ में पिया जाता है।

यह गोवा, दक्षिणी महाराष्ट्र और उत्तरी कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय है। सोलकढ़ी नारियल के दूध के रूप में ताजे नारियल के तरल अर्क से तैयार की जाती है। इससे आपके पाचन तंत्र क्रिया सही रहती है।

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