जानिए कैसे हुआ फेरिस व्हील का आविष्कार और दुनिया के मशहूर ‘फेरिस व्हील्स’!

मेलों में अक्सर चक्र वाले झूले यानी ‘फेरिस व्हील‘ सभी के आकर्षण का केंद्र बना रहता होगा। आपने भी जरूर कभी न कभी इसकी सवारी की होगी लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘फेरिस हील‘ का आविष्कार किस तरह हुआ और इसका श्रेय किसे जाता है? चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से..

वर्ष 1893 में विश्व कोलम्बियन प्रदर्शनी की तैयारियों ने जब सन् 1891 में जोर पकड़ना शुरू किया था, उस समय मेले के निदेशक डेनियल एच. बर्नहम ने एक खुला चैलेंज दिया कि कुछ ऐसा किया जाए जो मेले का दर्शनीय केंद्र बिंदू हो और पैरिस के एफिल टावर की लोकप्रियता को चुनौती दे सके।

उस समय मात्र साल भर पहले बना एफिल टावर दुनिया भर के लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुका था। डेनियल की इस घोषणा के बाद चैलेंज को पूरा करने के लिए कई योजनाएं आने लगी और उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के कारण अस्वीकृत भी होने लगीं।

 

यूँ आया फेरिस व्हील का पहला विचार

इस चैलेंज को लेकर जॉर्ज वाशिंगटन गेल फेरिस नामक एक व्यक्ति भी काफी उत्साहित थे। वह चाहते थे कि इस दिए गए चैलेंज के लिए वह भी कुछ करें।

उन्होंने काफी सोचा लेकिन उनके दिमाग में कोई ऐसा अनूठा आइडिया नहीं आ पा रहा था जो काम कर सके। एक शाम जब वह शिकागो के एक रेस्तरां में थे, तब उनके मन में कुछ ऐसा आया जिससे वह खुशी से उछल पड़े।

नैपकिन पर बना दिया पहला डिजाइन

जल्दी-जल्दी में उन्होंने वहां पड़े नैपकिन पर ही डिजाइन बना डाला और वापस लौट कर उस पर आगे का कार्य करने में जुट गए।

जब उन्होंने ‘फेरिस व्हील‘का अपना प्रस्ताव निदेशक डेनियल के आगे रखा तो पहले तो वह इसके लिए राजी नहीं हुए क्योंकि वह चीज उन्हें खतरनाक लगी क्योंकि बेहद ऊंचाई पर लोगों से भरी कुर्सियां ऊपर-नीचे करना जोखिम भरा हो सकता था।

काफी दलीलों के बाद आखिर वह मान ही गए। इसके लिए इंजीनियरों की एक टीम को काम पर लगाया गया।
250 फुट व्यास की व्हील बनी, जिसे 140-140 फुट के दो जुड़वां टावरों के बीच लगाया गया। इस व्हील को बनाना उस समय की जबरदस्त सफलता थी।

इसकी ऊंचाई लगभग 26 मंजिला मकान के बराबर थी। अब जॉर्ज वाशिंगटन गेल फेरिस के सम्मान में हर वर्ष 14 फरवरी को अमरीका में ‘नैशनल फेरिस व्हील दिवस‘ के रूप में भी मनाया जाता है।

दुनिया के मशहूर ‘फेरिस व्हील्स’

दुबई ‘फेरिस व्हील’ : यह विश्व का सबसे बड़ा फेरिस व्हील’ है। साल 2021 में समुद्र तट पर तैयार हुई यह ‘फेरिस व्हील’ 250 मीटर ऊंची है।

लास वेगास हाई रोलर‘ : अमरीकी शहर लास वेगास में बनी यह ‘दुबई फेरिस व्हील‘ से पहले करीब एक दशक तक दुनिया की सबसे ऊंची ‘फेरिस व्हील’ रही। यह 167.7 मीटर ऊंची है।

लंदन आई : लंदन में टेम्स नदी के दक्षिणी किनारे पर बनाया गया यह एक विशाल ‘फेरिस व्हील’ है जिसकी ऊंचाई 135 मीटर है।

सिंगापुर फ्लायर : सिंगापुर की यह ‘फेरिस व्हील’ 165 मीटर ऊंची है।

तियानजिन आई : इसका आधिकारिक नाम ‘द टाइर्सिन आई’ है जो 120 मीटर ऊंची ‘फेरिस व्हील‘ है। यह चीन के तियानजिन शहर में हाई नदी पर बने योंगले ब्रिज के ऊपर बनाई गई है।

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आखिर क्यों अविवाहित महिलाओं को शिवलिंग को छूने की अनुमति नहीं होती, जानिए क्या है वजह?

हिंदू धर्म के अनुसार, शिवलिंग की पूजा करना अच्छा माना जाता है, और न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में जहां भी हिंदू रहते हैं, वे इस पूजा को करते हैं। शिव पुराण के अनुसार महादेव के अतिरिक्त अन्य कोई भी देवता साक्षात् ब्रह्मस्वरूप नहीं हैं।

संसार भगवान शिव के ब्रह्मस्वरूप को जान सके इसलिए ही भगवान शिव ज्योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हुए ताकि शिवलिंग के रूप में इनकी पूजा होती है।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि शिवलिंग को छूने और पूजा करने का अधिकार केवल पुरुषों को है और महिलाओं को ही आता हैं, अविवाहित लड़कियों के लिए यह बिल्कुल वर्जित है!

आज इस पोस्ट में जानेंगे कि आखिर क्यों अविवाहित लड़कियों को शिवलिंग को छूने की अनुमति क्यों नहीं होती, तो चलिए जानते हैं।

शिवलिंग का अर्थ

शिवलिंग, भगवान शिव का एक पवित्र प्रतीक है इसलिए उनके भक्तों द्वारा इसकी पूजा की जाती है। लिंग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘लिंगम’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘लिंग’ इसलिए शिव लिंग का अर्थ है ‘भगवान शिव का लिंग‘ जिसे योनि के साथ दर्शाया गया है।

हिंदू धर्म की 4 प्रमुख संप्रदायों में से एक है। ‘शैव सिद्धांत’ जो शैव संप्रदाय की प्रमुख परम्पराओं में से एक है उसमें भगवान शिव की 3 परिपूर्णताएँ: परशिव, पराशक्ति और परमेश्वर बताई गई हैं।

आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?

कथाओं के अनुसार माना जाता है कि भगवान शिव बहुत ही कठोर और पवित्र तपस्या करते थे और वो भी कहीं किसी जंगल में या किसी ऊंचे पहाड़ की चोटी पर, मानव सभ्यता से बहुत दूर। ऐसे में सिर्फ महिलाएं ही नहीं, किसी भी पुरुष का उनके आसपास रहना संभव नहीं था।

ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शिव की पूजा की जाती है तो विधि-विधान का बहुत खयाल रखना पड़ता है। देवता व अप्सराएं भी भगवान शिव की पूजा करते समय बेहद सावधानी से उनकी पूजा करते हैं।

यह इसलिए कि कहीं देवों के देव महादेव की तपस्या भंग न हो जाए। जब शिव की तपस्या भंग होती है तो वे क्रोधित हो जाते हैं। इसी कारण से महिलाओं को शिव पूजा न करने के लिए कहा गया है।

ऐसा नहीं है कि अविवाहित लड़कियां भगवान शिव की पूजा नहीं कर सकती हैं। उनकी पूजा बिल्कुल कर सकते हैं लेकिन अकेले नहीं, बल्कि पार्वती जी के साथ।

लड़कियों को शिव-पार्वती की पूजा करने की अनुमति है। इसके अलावा लड़कियां भी अपनी पसंद का पति पाने के लिए 16 सोमवार का व्रत रखती हैं।

इसका कारण यह है कि भगवान शिव को सबसे अच्छा पति माना जाता है और लड़कियां उनसे अपने लिए उनके जैसा पति मांगती हैं।

लिंग पुराणम के अनुसार, सभी पुरुष भगवान शिव के अंश हैं और सभी लड़कियां पार्वती के अंश हैं। इसलिए भले ही लड़कियों को शिवलिंग को छूने की मनाही है, लेकिन इसमें जल चढ़ाने की कोई मनाही नहीं है।

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अगर आप डल और ऑयली स्किन से हैं परेशान तो अपनाएं ये टिप्स!

बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के स्तर का सबसे पहला शिकार त्वचा होती है और जब गर्मी जोरों पर है, तो यह जरूरी है कि हम अपनी त्वचा की देखभाल अच्छी तरह से करें। आज इस पोस्ट में हम आपको बेजान और ऑयली स्किन से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं, तो चलिए जानते हैं।

  • चेहरे को दिन में दो से तीन बार माइल्ड सोप या फेस वाश से धोएं। लेकिन सावधान रहें कि ज़्यादा न धोएं वरना त्वचा रूखी हो सकती है।
  • शहद की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह त्वचा की प्राकृतिक नमी को बरकरार रखते हुए अतिरिक्त तेल को हटाकर त्वचा को फ्रेश लुक देता है। दस मिनट के लिए शहद की एक पतली परत त्वचा पर लगाएं और फिर चेहरा धो लें।
  • ब्लॉटिंग पेपर का इस्तेमाल करें। अगर आपकी स्किन बेहद ऑयली है तो हमेशा अपने साथ ब्लॉटिंग पेपर रखें। यह अतिरिक्त आयल, और चिपचिपाहट को हटा देता है।
  • खीरे का रस लगाएं। आप चाहें तो इसे एक स्प्रे बोतल में भरकर फ्रिज में रख दें।
  • तैलीय त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी के मास्क भी बहुत होता हैं।
  • बेसन और हल्दी का पैक भी बहुत अच्छा होता है। एक चम्मच बेसन में एक चुटकी हल्दी मिलाकर थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। साथ ही बेहतर परिणाम के लिए नींबू का रस मिलाएं। दस-पंद्रह मिनट बाद या जब यह सूख जाए तो धो लें।
  • अंडे के सफेद भाग में एक नींबू का रस मिलाकर लगाएं। सूखने पर गुनगुने पानी से धो लें।
  • अंडे की सफेदी में शहद मिलाकर इस मास्क को लगाएं। सूखने पर धो लें।
  • संतरे के छिलके का पैक तैलीय त्वचा के लिए भी कारगर है। आप चाहें तो संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर उसका पाउडर बना लें। इसे किसी बोतल में भर कर रख लें। पाउडर में दूध या पानी मिलाकर चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद धो लें।
  • 3-4 बादाम को पीसकर बारीक पेस्ट बना लें, इसमें तीन चम्मच शहद मिलाकर चेहरे पर मसाज करते हुए लगाएं। कुछ देर बाद गुनगुने पानी से धो लें।
  • एलोवेरा का गूदा लगाएं। त्वचा को फ्रेश लुक देने के साथ-साथ यह कई समस्याओं जैसे मुंहासे, दाग-धब्बों, कील मुहांसे आदि में कारगर है। एलोवेरा में एंटी-एजिंग और हीलिंग गुण होते हैं।
  • दही का लेप लगाएं, यह अतिरिक्त तेल निकालने में बहुत फायदेमंद होता है।
  • ओटमील में शहद मिलाकर पैक बना लें, इससे तेल भी नियंत्रित रहता है।
  • नींबू के रस में शहद और हल्दी पाउडर मिलाएं। इस पेस्ट को लगाएं।
  • टमाटर को काट कर मसल लें और चेहरे पर लगा लें सूखने के बाद इसे धो लें। टमाटर में सैलिसिलिक एसिड होता है जो त्वचा में तेल को सोखने में मदद करता है, साथ ही यह बंद रोम छिद्रों को भी खोलता है।
  • अक्सर तैलीय त्वचा वाले लोग सोचते हैं कि उन्हें मॉइस्चराइजर की आवश्यकता नहीं है, लेकिन एक समान टोन के लिए और त्वचा की प्राकृतिक नमी को बनाए रखने के लिए, मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें। लेकिन हां, आप ऑयल-फ्री मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें।
  • बर्फ रगड़ने से भी समस्या कम होती है।
  • ऑयली और जंक फूड कम खाएं।
  • बहुत भारी क्रीम या तेल आधारित मेकअप उत्पादों का प्रयोग न करें।
  • सनस्क्रीन जरूर लगाएं।
  • अल्कोहल बेस्ड स्किन टोनर और एस्ट्रिंजेंट का इस्तेमाल करें।
  • पानी संतुलित मात्रा में पिएं।
  • बाहर से आने पर त्वचा को साफ करें।
  • स्किनकेयर रूटीन को फॉलो करें। क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग।
  • स्क्रबिंग भी करें ताकि डेड स्किन सेल्स निकल जाएं, लेकिन ज्यादा न करें वरना यह समस्या को बढ़ा देगा।

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वजन कम करना चाहते हैं लेकिन भूख पर कंट्रोल नहीं कर पा रहे तो अपनाएं ये आसान ट्रिक्स!

वजन का ज्‍यादा होना न केवल आपके लुक्‍स को ही प्रभावित करता है बल्कि इससे आपकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। वजन कम करने के लिए लोग कई तरीके भी अपनाते हैं।

लेकिन वजन कम करते समय सबसे कठिन काम है भूख को नियंत्रित करना। जिसका आमतौर पर लोगों को सामना करना पड़ता है। भूख को नजरअंदाज करना बेहद मुश्किल है।

मगर अपनी फूड हैबिट्स में थोड़ा सा बदलाव करके आप अपनी भूख को कंट्रोल कर सकते हैं। इस पोस्ट में हम आज जानेंगे वजन कम करते समय भूख को कैसे कंट्रोल करें, तो चलिए जानते हैं :-

पानी पीएं

भूख लगने पर पहले आप एक गिलास पानी पिए फिर 15 मिनट इंतजार करें। पानी के बाद भी अगर आप को भूख लगे तो ही खाना खाये।

आप अगर मोटापा कम करने की वजह से डाइटिंग कर रहे है तो दिन भर में ज्यादा पानी पिए नहीं तो पेट में एसिडिटी, गैस और जलन जैसी परेशानी हो सकती है।

प्रोटीन और फाइबर युक्‍त भोजन करें

खाने में ज्‍यादा से ज्‍यादा प्रोटीन और फाइबर युक्‍त आहार का सेवन करें। ऐसा करने से आपका पेट जल्‍दी भर जाएगा और आप काफी देर तक भूख महसूस नहीं करेंगी।

इतना ही नहीं, फाइबर और प्रोटीन को पचाने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए। जब आप पानी का अधिक सेवन करेंगें तो आपकी भूख भी शांत रहेगी। शोध के अनुसार, प्रोटीन का सेवन बढ़ाने से भूक 60% तक कम हो सकती है।

ग्रीन टी का सेवन

ग्रीन टी भूख और चर्बी कम करने में मदद करती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट अधिक मात्रा में होते है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। दिन भर में ग्रीन टी 2 बार पिए। इसके इलावा ब्लैक टी भी भूख और वजन घटाने में मदद करती है।

पर्याप्त कैलोरी खाएं

शरीर को स्वस्थ रखने और सर्वोत्तम रूप से कार्य करने के लिए शरीर में पर्याप्त कैलोरी और पोषक तत्वों का होना बहुत आवश्यक है।

पर्याप्त कैलोरी और पोषक तत्वों के बिना, यह स्वाभाविक है कि आपका शरीर आपको खाने के लिए संकेत देता है, जो कुछ खाद्य पदार्थों के लिए तीव्र इच्छा पैदा कर सकता है।

फलों और सब्जियों में कैलोरी व फैट कम होते और इनमें विटामिन, फाइबर और अन्य कई पोषक तत्व मौजूद होते है। भोजन करने के बाद भी अगर भूख लगे तो आप फल व सलाद खा सकते है।

खाने के साथ थोड़ा गुड़ खाएं

यदि आप वजन कम करना चाहते हैं, और भूख पर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं तो आपको खाना खाने के बाद थोड़ी सी मात्रा में गुड़ का सेवन स्‍वीट डिश के रूप में करना चाहिए।

गुड़ में विटामिन-A और B के साथ-साथ आयरन, पोटेशियम, गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम आदि पोषक तत्व भी होते हैं।

इतना ही नहीं, इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करता है। अगर आपको डायबिटीज है तो आपको गुड़ खाने से बचना चाहिए।

पर्याप्त नींद लें

शरीर के लिए पर्याप्त मात्रा में सोना व रेस्ट करना भी बहुत जरूरी होता है। पूरी नींद न लेना भी मोटापे का एक कारण होता है। इसलिए पूरी मात्रा में सोएं।

शोध के अनुसार, नींद की कमी आपके मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों को प्रभावित करती है, जिसमें फ्रंटल कॉर्टेक्स और एमिग्डाला शामिल हैं, जो भूख को काफी बढ़ा सकते हैं। इसलिए हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद ज़रूर लेनी चाहिए।

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ऑस्ट्रेलिया में पाया गया दुनिया का सबसे बड़ा पौधा, वीडियो देखें

पौधे जीवन का एक बहुत ही आवश्यक हिस्सा रहे हैं। हाल ही में एक खोज में, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों द्वारा पानी के भीतर उगने वाले दुनिया के सबसे बड़े पौधे की खोज की गई थी।

इस पौधे का नाम पोसिडोनिया ऑस्ट्रेलियस है इसे फाइबर बॉल वीड या रिबन वीड भी कहा जाता है। आमतौर पर ये ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी तट पर पाया जाता है। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि यह पौधा 200 वर्ग किलोमीटर का एरिया कवर करता है।

पहले वैज्ञानिकों ने सोचा कि इतने बड़े क्षेत्र में उगने वाले इस पौधे ने कई बीजों से प्रस्फुटित होकर अपना विशालकाय आकार लिया होगा। लेकिन, रिसर्च में पाया गया कि इस पौधे का आकार न्यू यॉर्क के मैनहैट्टन आइलैंड का तीन गुना है।

प्रारंभिक चरण में, शोधकर्ताओं ने सोचा कि यह पौधा एक विशाल समुद्री घास का मैदान था, लेकिन बाद में उन्होंने पाया कि यह एक ही बीज से फैला हुआ पौधा था।

ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता ने अपने द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में लिखा कि हम सभी वैज्ञानिक ये जानकार अचंभित रह गए कि कोई पौधा इतना बड़ा कैसे हो सकता है।

अपने आप में विशेष होने के बावजूद इसका दुनियाभर के शोधकर्ताओं की नजरों के सामने ना आना किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय के विकासवादी, जीवविज्ञानी और अध्ययन के सह-लेखक एलिजाबेथ सिंक्लेयर ने कहा कि , “जब हमने डेटा को अच्छी तरह से देखा तो हम काफी हैरान थे, और ऐसा लग रहा था कि सब कुछ एक पौधे का है।”

जब पौधों पर शोध किया गया तो यह पता चला कि अपने विशाल आकार के अलावा, इस पौधे में हजारों वर्षों तक खुद को बनाए रखने की क्षमता भी है।

पॉसिडोनिया ऑस्ट्रेलियस का केवल एक पौधा अब घास के मैदान की तरह फैल गया है, जो डॉल्फिन, समुद्री घोड़े, केकड़ों, कछुओं और मछलियों सहित कई समुद्री प्रजातियों की विशाल श्रंखला के लिए आवास प्रदान कर रहा है।

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10 आसान उपाय जिन्हें अपना कर आप ‘ग्लोबल वार्मिंग’ रोकने में सहयोग कर सकते हैं!!

सभी पर्यावरण संरक्षण और इसके बचाव की बातें करते हैं लेकिन शायद ही कोई असल जीवन में पर्यावरण की चिंता करता है. सभी जानते हैं की ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है, और सभी इसकी जिम्मेदारी दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं लेकिन व्यवहार में कुछ भी नहीं करते.

कुछ बहुत ही साधारण सी चीजें हैं जिन्हें अपनी दैनिक आदतों में शामिल करके हम भी पर्यावरण संरक्षण में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं. ये हैं वे चीजें:

  1. कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लाइट (CFL) बल्ब का उपयोग

    कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लाइट बल्ब  महंगे जरुर हैं लेकिन यह लम्बे समय तक चलते हैं और दीर्घकाल में यह बहुत सारी उर्जा बचाते हैं और आपके बिजली के बिल को भी कम रखते हैं.

  2. कचरे का सही निपटारा

    पर्यावरण के लिए प्लास्टिक का कचरा सबसे बड़ा खतरा है. प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग करें. पेय पदार्थों, जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, जूस आदि शीशे की बोतलों में लें. कूड़े का निपटारा सही ढंग से करें, इन्हें सिर्फ कूड़े दान में डालें, इधर-उधर न फैंके.

    हर साल 1 लाख समुद्री स्तनधारी और 10 लाख समुद्री पक्षी प्लास्टिक निगलने से मारे जाते हैं
  3. दान करें

    अपने पुराने कपड़े और चीजें ऐसे व्यक्ति को दान करे जिसे इसकी जरुरत हो. काफी संस्थाएं हैं जो पुराने कपड़े एकत्र करती हैं और उन्हें गरीबों और बेसहारा लोगों को पहुंचती हैं। इससे एक तो आप पर्यावरण की मदद करते हैं दूसरे किसी के काम भी आते हैं।

  4. इस्तेमाल न होने पर बिजली के उपकरण बंद रखें:

    जब आप घर में किसी उपकरण को उपयोग न कर रहें हों तो इन्हें बंद करके रखें. जैसे कि, जब आप टीवी न देख रहें हो तो इसे बंद करके रखें या जब कमरे से बाहर निकलें तो लाइट स्विच ऑफ कर दें।

  5. अधिक पैदल चलें या साइकिल का उपयोग करें

    गाड़ीयां प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है. यदि आप कहीं बाहर जा रहें हो तो अपने आप से प्रश्न पूछें की क्या कार में जाना जरुरी है? यदि थोड़ी दूरी तक ही जा रहें हो तो पैदल जाएँ या साइकिल में जाएँ।

  6. पेड़ लगायें और बचाएं

    अधिक से अधिक पेड़ लगायें और इन्हें बचाएं भी। कागज़ और इमारती लकड़ी का कम से कम उपभोग करें।

  7. साबुन और डिटर्जेंट का कम प्रयोग करें

    कपड़े या बर्तन धोते समय डिटर्जेंट की निर्धारित मात्रा का ही प्रयोग करें। साबुन और डिटर्जेंट नदियों नालों को दूषित करते हैं और जैव विविधता के लिए बहुत ज़्यादा हानिकारक हैं।

  8. टपकते नल और पानी का बचाव

    यदि आपके नलों की टूटियां टपक रहीं हो तो उन्हें तुरंत ठीक करवाएं। ब्रश करते समय नल खुला न रखें। गाड़ी को रोज न धोएं, और केवल बाल्टी में पानी लेकर धोएं। गाड़ी धोने वालों से तो बिलकुल न धुलवाएँ, ये लोग सबसे ज्यादा पानी की बर्बादी करते हैं।

  9. बारिश के पानी का भण्डारण

    संभव हो तो बारिश के पानी का भण्डारण करें. इसे विभिन्न कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।

  10. अपनी आवश्यकता को सीमित रखें

    ग्लोबल वार्मिंग

    महात्मा गांधी के अनुसार, प्रकृति के पास मनुष्य की जरुरत के अनुसार सब कुछ है लेकिन मनुष्य के लालच के आगे सब कुछ कम है।

    अपनी जरूरतों को सीमित रखें। हम भारतीयों में दिखावा करने की बहुत बुरी आदत है, इसे नियंत्रण में रखें। रोटी, कपड़ा और मकान की अपनी जरूरतों को समझदारी से पूरा करें और इसे दिखावे का माध्यम न बनायें।

दुनिया के शीर्ष 10 सबसे हरे-भरे और खूबसूरत शहर

हम आपको दुनिया की शीर्ष 10 सबसे खूबसूरत और हरे-भरे शहरों की सूची दिखाने जा रहे है l इन शहरों में सबसे कम प्रदूषण और गंदगी है और इनमें से कई शहर अपनी खूबसूरती और सफाई के लिए पुरूस्कार भी जीत चुके हैं l

इन शहरों को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने का श्रेय इनमें रहने वाले लोगों को जाता है जिन्होंने नियमों की पालन करके इन शहरों को दुनिया के शीर्ष 10 सबसे हरे-भरे और खूबसूरत शहरों में लाया है तो आइए देखते हैं विश्व के 10 खूबसूरत शहर:-

 कोपेनहेगेन,डेनमार्क

खूबसूरत शहरकोपेनहेगेन, जो डेनमार्क की राजधानी है l दुनिया के हरे-भरे शहरों की सूची में पहले नंबर पर आता है l इस राजधानी में 20 लाख लोग रहते हैं और यह लोग पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान देते हैं l लोगों का लक्ष्य इस शहर को 2025 तक कार्बन न्यूट्रल बनाना है l

 ऐम्स्टर्डैम,नीदरलैंड्स

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एम्स्टर्डम में सभी लोग सिर्फ साइकिल ही चलाते हैं और ऐसा वो एक दशक से कर रहे हैं l यह दुनिया का सबसे बड़ा साइकिल चलाने के लिए अनुकूल शहर है क्योंकि इस शहर की सडकें, गलियां, पार्के साइकिल चलाने के लिए ही अच्छी तरह से बनायी गयी हैं l इस शहर में साइकिलों की संख्या लोगों से भी ज्यादा है l

 स्टॉकहोल्म,स्वीडन

world-top-10-greenest-cities-Stockholmस्टॉकहोल्म, यूरोप का पहला शहर है जिसने यूरोप ग्रीन कैपिटल पुरुस्कार भी जीता है l इस शहर को हरा बनाने की योजना 1970 में शुरू की गई थी l अब इस शहर की योजना में 2050 तक इस शहर को फॉसिल फ्यूल से मुक्त कर दिया जायेगा l यह दुनिया का सबसे हरा-भरा शहर है l

 वैंकोवर,कनाडा

world-top-10-greenest-cities-Vancouverवैंकोवर ज्यादा आबादी वाला और महंगे शहरों में से एक है l लेकिन इस शहर का मौसम बहुत अच्छा है जो इस शहर को रहने के लिए सबसे पसंदीदा शहर बनाता है l यह शहर कनाडा के सबसे हरे भरे शहरों में पहले नंबर पर आता है l

 लन्दन,इंगलैंड

world-top-10-greenest-cities-londonआप लन्दन शहर को हरे भरे शहरों की सूची में आने से हैरान हो सकते हैं लेकिन इस शहर को हरा-भरा बनाने के लिए काम शुरू कर दिया गया है l इस शहर में ग्रीन हाउस स्टेशनों को हटाया जा रहा है और इस शहर को हरा-भरा बनने में कुछ ही समय लगेगा l

 बर्लिन,जर्मनी

world-top-10-greenest-cities-Berlinबर्लिन यूरोप का पहला सबसे हरा भरा शहर है l इस शहर में सिर्फ वह ही वाहन चल सकते हैं जो पर्यावरण को ज्यादा नुकसान ना पहुंचाते हों l बर्लिन, जर्मनी की राजधानी है और इस शहर की आबादी 35 लाख है l बर्लिन जर्मनी का दूसरा सबसे बड़ा शहर है l

 न्यूयॉर्क,संयुक्त राज्य अमेरिका

world-top-10-greenest-cities-green_high_line_new_yorkन्यूयॉर्क, शायद अमेरिका का सबसे ज्यादा हरा-भरा शहर है l इस शहर की ज्यादातर आबादी पब्लिक ट्रासपोर्ट में सफर करती है l इस शहर में हरी भरी इमारतों को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है l इस शहर में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन अमेरिका में सबसे कम है l

सिंगापुर

world-top-10-greenest-cities-singaporeऔद्योगीकरण के बाद सिंगापुर प्रदूषण से ग्रस्त हो गया था l फिर 1992 में इस शहर को हरा भरा बनाने का काम शुरू कर दिया गया l इस योजना का मुख्य लक्ष्य शहर को प्रदूषण रहित बनाना था और अब यह शहर दुनिया के सबसे हरे-भरे और खूबसूरत शहरों में जाना जाता है l

 हेलसिंकी,फिनलैंड

world-top-10-greenest-cities-helsinkiकई स्कॅन्डिनेवियन शहरों की तरह, फ़िनलैंड की राजधानी ने अपने शहरवासियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट और साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित किया है l यह शहर उर्जा को बचाने का काम 1950 से करता आया है l 1992 में फ़िनलैंड ने अपने शहरों को स्वस्थ और खूबसूरत बनाने के लिए बहुत कठोर नियम पारित किये थे l

 ओस्लो,नॉर्वे

world-top-10-greenest-cities-osloओस्लो नॉर्वे की राजधानी है l इस शहर की सरकार ने ऐसी नियम बनाये हैं जिससे इस शहर में कम से कम गंदगी फैले इस नियम की सभी शहरवासी पालना करते हैं l ओस्लो अपनी बैंकिंग सेवाओं, पर्यटन स्थलों और इंडस्ट्री के लिए जाना जाता हैl

जानिए साइकिल चलाने से होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में

इन दिनों कोरोना काल में साइकिल चलाने का ट्रेंड खूब चल रहा है। अच्छी सेहत के लिए के लोगों का रुझान की साइकिल चलाने से तरफ बढ़ रहा है। साइकिल चलाने के एक नहीं कई फायदे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार नियमित साइकिल चलाने से त्वचा अल्ट्रा वॉयलेट किरणों के दुष्प्रभाव से बचती है जिससे बढ़ती उम्र चेहरे पर दिखाई नहीं देती।

साइकिल चलाने जैसी कसरत से रक्त का संचार तेज होता है और त्वचा की कोशिकाओं को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन व पोषक तत्व मिलते हैं।

आइये जानते है साइकिल चलाने से  होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में

तनाव रहेगा दूर

इन दिनों हर कोई तनाव में है कुछ लोग तो इस समय डिप्रेशन के शिकार भी हो रहे हैं । ऐसे लोगों के लिए साइकिल चलाना बेहद फायदेमंद है क्योंकि साइकिल से मानसिक तंदरुस्ती बनी रहती है।

आंकड़ों की मानें तो रोजाना साइकिल चलाने वाले लोगों का दिमागी स्तर आम लोगों की अपेक्षा 15 प्रतिशत ज्यादा बेहतर होता है। शरीर में नए बेन सेल्स बनते हैं।

अच्छी भरपूर नींद

जिन लोगों को नींद नहीं आती उनके लिए भी फायदेमंद है साइकिल चलना। साइकिल तनाव कम करता है जिससे खुद-ब-खुद नींद आती है।

दिल के लिए फायदेमंद

साइकिल चलाने से दिल की धड़कन तेज होने लगती है जिससे खून का प्रवाह बेहतर होता हैं और बीमारियां दूर होती है।

फेफड़ों की मजूबती

जब आप साइकिल चलाते हैं तो आप सामान्य की तुलना में ज्यादा गहरी सांसे लेते हैं, जिससे फेफड़ों को ताजी हवा मिलती है और फेफड़ों को मजबूती मिलती हैं।

मांसपेशियों की मजबूती

साइकिल चलाने से पैरों का व्यायाम होता है जो लोग घंटों एक ही जगह पर बैठे रहते हैं उन्हें साइकिल जरूर चलानी  चाहिए। इससे मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।

तनाव से पाएं छुटाकारा

साइकिल आप और आपके मूड को हेल्दी बनाता है। विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से साइकिल चलाने वाले तनाव और अवसाद का शिकार दूसरों की तुलना में काफी कम होते हैं।

स्टैमिना बढ़ता है

साइकिल चलाने से ब्लड सेल्स और स्किन में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति होती है। इससे आपकी त्वचा ज्यादा अच्छी और चमकदार व यंग दिखती है। आप खुद-ब-खुद महसूस करते हैं कि स्टैमिना बढ़ गया है।

डायबिटीज से राहत

शुगर यानि डाइबिटीज दिल, त्वचा, आंखे, किडनी ना जाने कितने रोगों के लिए जिम्मेदार है इसलिए डायबिटीज को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है और इसे कंट्रोल में रखने में साइकिल चलाना सबसे बेस्ट है क्योंकि इससे कोशिकाओं में उपस्थित ग्लूकोज कम या फिर समाप्त हो जाता है। फिर रक्त में उपस्थित ग्लूकोज को कोशिकाएं अवशोषित करके उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है।

इम्यून पॉवर बढ़ाए

आपकी इम्यूनिटी स्ट्रांग होगी तो आप इंफेक्शन से भी बचे रहेंगे। शरीर में रक्त संचार होगा। त्वचा व अन्य कोशिकाओं को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं।

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साइकिल के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी!!

बाइसाइकिल यानी साइकिल किसी समय आवागमन का एक महत्वपूर्ण माध्यम था। आधुनिकता की दौड़ और तेज रफ्तार जिंदगी ने धीरे-धीरे साइकिल को उच्च तथा मध्यम वर्ग के लोगों से दूर कर दिया, जिसकी जगह तेज रफ्तार मोटर गाड़ियों ने ले ली।

हालांकि एक बड़े वर्ग, जिसमें निम्न वर्ग के गरीब लोग शामिल हैं, मैं अभी भी साइकिल परिवहन का एक लोकप्रिय माध्यम है। इन दिनों पर्यावरण तथा प्रदूषण को लेकर वैश्विक स्तर पर छिड़ी चर्चा के बीच साइकिल का महत्व एक बार फिर सामने आया है।

वाहनों में इस्तेमाल होने वाले जैव ईंधन से होने वाले वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के मद्देनजर सही सोच वाले लोगों, जिनमें हर वर्ग के लोग शामिल हैं, ने पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहनों को त्याग कर साइकिल अपनाने पर विचार करना शुरू कर दिया है।

साइकिल चालन न केवल प्रदूषण कम करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान डालता है बल्कि स्वास्थ्य और फिटनैस में भी अपनी भूमिका को लेकर भी यह लोकप्रिय हो रहा है।

शहरों में तो साइक्लिंग क्लब तक बन गए हैं, जिनके सदस्यों को सुबह शाम रंग-बिरंगे हैल्मैट पहनकर सड़कों पर स्पोर्टी साइकिल चलाते देखा जा सकता है।

यहां तक की इस की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई शहरों में पार्कों में तथा गलियों व सड़कों के साथ-साथ साइकिल चालकों के लिए विशेष लेंस बनाई गई हैं।

साइकिल परिवहन का अब तक का सर्वाधिक सस्ता, सबसे भरोसेमंद माध्यम है तथा 1920 के दशक में बहुत से व्यापारियों ने इस्तेमाल के लिए इसे अपनाया था। आज इस पोस्ट में हम जानेंगे साइकिल से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में :-

  • पहला बाइसाइकिल तथा 1818 का ‘बैरन डी ड्रेस’ का ‘ड्रेसिएन’। चालक को आगे बढ़ने के लिए जमीन पर अपने पांव से इसे धकेल ना पड़ता था।
  • 1839 में स्कॉटिश लोहार किर्कपैट्रिक मैकमिलन ने पैडलों तथा ब्रेक वाले पहले बाइसिकल का आविष्कार किया।
  • मैकमिलन की वेलोसिपीड में पैडल पिछले पहिए पर क्रैंक्स के साथ एक रोड़ के माध्यम से जुड़े थे। यह पहिए को धीरे-धीरे घूमाते थे।
  • 1861 में फ्रांसीसी पिता व बेटे पियरे तथा अर्नस्ट मिचौक्स ने पहली सफल बाइसिकल बनाने के लिए पैडलों को सीधे आगे वाले पहिए के साथ जोड़ दिया और इसे बोनशेकर उपनाम दिया।
  • 1870 जेम्स स्टार्ले ने बोनशेकर में सुधार करके ऑर्डिनरी नाम दिया। एक विशाल अगले पहिए के कारण जरा से पैडल मारने पर ही काफी रफ्तार मिल जाती थी ।
  • 1874 में एच.जे.लॉसन ने चेन से चलने वाला दुनिया का पहला बाई साइकिल बनाया। उस में इसे ‘सेफ्टी बाय साइकिल ‘कहा जाता थ क्योंकि यह काफी ऊंचे का लंबे ‘ऑर्डिनरी‘ साइकिल से सुरक्षित था।
  • 1885 में स्टार्ले के भतीजे जॉन ने ‘रोवर सेफ्टी‘ नामक बाइसिकल। बनाया 1890 में इसमें हवा भरे टायर शामिल किए गए और आधुनिक बाइसिकल का जन्म हुआ।
  • 1895 तक 40 लाख, अमरिकी साइकिल की सवारी कर रहे थे। बाकी दुनिया भी में साइकिल चलाने वालों की संख्या बढ़ती गई।

सारी दुनिया में जितने लोग साइकिल चलाते हैं, उनकी कुल संख्या से अधिक लोग आज चीन में साइकिल चलाते हैं। पंजाब केसरी से साभार….। यह भी पढ़ें :-

औषधीय गुणों से भरपूर हैं ये 4 पौधे

भारत वर्षों से जड़ी-बूटियों के लिए जाना जाता है। आयुर्वेद में बड़े पेड़ों से लेकर जमीन पर एक इंच तक उगने वाली घास के फायदे और नुकसान का जिक्र है।

लेकिन हम में से बहुत से लोगों को इसके बारे में बहुत कम या बिल्कुल भी जानकारी नहीं है। साथ ही हमारे पास आपके घर के बगीचे में उगने के लिए औषधीय पौधों और पेड़ों के इतने विकल्प हैं कि उनका सही तरीके से उपयोग करने से आप डॉक्टर के चकर लगाने से बच सकते हैं।

घर कितना भी छोटा क्यों न हो, उसमें बगीचे के लिए जगह जरूर होती है। शायद ही आपने ऐसा घर देखा होगा जिसमें एक भी पौधा न लगा हो। घरों के आसपास पौधे लगाने का सिलसिला अनादि काल से चला आ रहा है।

उसमें कुछ सुंदर दिखने वाले पौधे और कुछ विशेष गुण वाले होते थे। जिससे घर की खूबसूरती के साथ-साथ सेहत भी तरोताजा बनी रहे।

हालाँकि, अंग्रेजी दवा के आगमन के बाद, लोगों में पौधे के औषधीय गुणों के प्रति समझ और रुचि दोनों कम हो गई थी। लेकिन कोरोना के बाद लोग एक बार फिर जड़ी-बूटियों के महत्व को जान रहे हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको औषधीय गुणों से भरपूर 4 पौधों के बारे में बताने जा हैं, तो चलिए जानते हैं :-

नीम

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  • शरीर को ठंडा रखता है।
  • पाचन में सुधार करता है।
  • थकान को दूर करता है।
  • घावों को साफ करने और ठीक करने का काम करता है।
  • त्वचा संबंधी रोगों में लाभकारी।
  • मधुमेह में सहायक।
  • पेशाब की समस्या को दूर करने का काम करता है।

भारतीय बोरेज

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  • पाचन में सुधार करता है।
  • भूख में सुधार करता है।
  • पेट में कीड़े होने की समस्या को दूर करता है।
  • बुखार में लाभकारी।
  • खांसी की समस्या में उपयोगी
  • सिर दर्द में आराम देता है।
  • अपच में कारगर।

तुलसी

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  • खांसी की समस्या में उपयोगी।
  • पेट में कीड़े होने की समस्या को दूर करता है।
  • भूख और स्वाद में सुधार करता है।
  • पाचन शक्ति में सुधार करता है।
  • अस्थमा और सांस की बीमारियों में राहत देता है।
  • यह कीड़े के काटने में लाभकारी होता है।
  • त्वचा संबंधी रोगों के लिए लाभकारी।
  • गुर्दे की पथरी में लाभ होता है।

एलो वेरा

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  • जलने पर राहत देता है।
  • घाव को ठीक करता है।
  • शरीर को ठंडा रखता है।
  • पेट संबंधी समस्याओं में लाभकारी।
  • मासिक धर्म के दर्द में कारगर।
  • यकृत समारोह में सुधार करता है।
  • कब्ज, एसिडिटी और भारीपन से राहत दिलाता है।

ये आयुर्वेदिक पौधे न सिर्फ शरीर के अंदर के दोषों को दूर करते हैं बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाते हैं।

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