केले का फूल है मधुमेह का रामबाण इलाज, जाने कैसे करें सेवन

मधुमेह एक तेजी से बढ़ती गंभीर समस्या है जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बेहतर डाइट के जरिए इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि साधारण जीवनशैली में बदलाव जैसे व्यायाम करना, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकता है।

शुगर की कई तरह की दवाएं हैं, लेकिन इसके लिए आप कुछ घरेलू या आयुर्वेदिक नुस्खे भी आजमा सकते हैं। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए केले का फूल एक बेहतर उपाय साबित हो सकता है।

माना जाता है कि केले के फूलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसके अलावा इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण यह शुगर को नियंत्रित करने के लिए बेहतर है।

ये बैंगनी फूल टाइप 2 मधुमेह को रोकने और नियंत्रित करने के लिए फायदेमंद माने जाते हैं क्योंकि यह शरीर में रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है।

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पोषक तत्व

केले के फूलों में एंटीऑक्सिडेंट, खनिज और प्रोटीन सहित कई पोषक तत्व होते हैं। 3.5-औंस (100 ग्राम) केले के फूल में कैलोरी: 23, कार्ब्स: 4 ग्राम, फैट: 0 ग्राम और प्रोटीन: 1.5 ग्राम होता है।

यह पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, जस्ता और तांबे जैसे खनिजों का खजाना भी है। ये खनिज आपके शरीर के कई कार्यों में सहायता करते हैं।

रक्त शर्करा को नियंत्रित करने वाले फाइबर

वे कैलोरी में कम लेकिन फाइबर में उच्च होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, इसमें पाए जाने वाले घुलनशील फाइबर शरीर में कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं, जबकि अघुलनशील फाइबर कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को रोकने में मदद कर सकते हैं।

केले के फूलों में वे सभी आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं जिनकी आपके शरीर को जरूरत होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केले के फल और अन्य उष्णकटिबंधीय फलों की तुलना में कम प्राकृतिक चीनी होती है, जिसके कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए एक बेहतर विकल्प है।

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कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर को एक साथ खत्म करें

केले के फूलों में कई यौगिक होते हैं जो उच्च कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि जिन चूहों को केले के फूल का पाउडर दिया गया था, उनमें कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा का स्तर कम था।

एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि केले के फूल में ‘क्वेरसेटिन‘ और ‘कैटेचिन‘ जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल को कम कर सकते हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट कार्ब्स को अवशोषित करने वाले एंजाइम को अवरुद्ध करके काम कर सकते हैं।

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आंतों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है

घुलनशील और अघुलनशील फाइबर से भरपूर, केले के फूल पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि फाइबर के सेवन से आंत के माइक्रोबायोम में सुधार हो सकता है जो कोलन कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। फाइबर पेट में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में मदद करने के लिए प्रीबायोटिक के रूप में भी काम करता है।

कैसे करें उपयोग

आपको बता दें कि केले के फूल उतने ही फायदेमंद होते हैं जितने कि केले। केले की तरह इसमें भी वे सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के बेहतर कामकाज के लिए जरूरी होते हैं।

केले के फूल न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव करने की क्षमता रखते हैं। केले के फूल को आप कच्चा या पका कर खा सकते हैं। इसके अलावा आप इसे सलाद या सूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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लकड़ी पर सबसे लम्बी और अदभुत नक्काशी!

चुनहुई चीन के एक प्रसिद्ध लकड़ी पर नक्काशी करने वाले कलाकार हैं उन्होंने एक 40 फीट लंबी लकड़ी पर खूबसूरत नक्काशी करके अपना नाम गिनीज बुक में शामिल कर लिया। उन्होंने लकड़ी के तने पर नावों की, भवनों की, पुलों की और 500 लोगों की नक्काशी की थी।

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ऊपर दिया गया दृश्य असल में चीन की मशहूर पेंटिंग “Along the River During the Quinming Festival” की नकल है, जो 1 हज़ार साल पुरानी पेंटिंग है।

बहुत से लोग इस पेंटिंग को “चीन की मोनालिसा” पेंटिंग कहते हैं। यह लकड़ी पर की गयी नक्काशी प्राचीन चीन की संस्कृति को दर्शाती है।

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बिल गेट्स के आलीशान घर “शानाडू” से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य!!!

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स का घर वाशिंगटन शहर में दुनिया का सबसे शानदार निजी निवास है.

बिल गेट्स का घर वाशिंगटन झील के किनारे स्थित किसी जन्नत से कम नहीं लगता. आइए जाने बिल गेट्स के आलीशान घर के कुछ दिलचस्प तथ्य…..

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  • वाशिंगटन झील के पास मौजूद बिल गेट्स के घर का नाम शानाडू है. इस घर को बनाने में सात साल का समय लगा है. यह घर करीब 66,000 स्क्वॉयर फीट में फैला हुआ है.
  • बिल गेट्स के घर में स्विमिंग पूल, 7 बेडरूम, 24 बाथरूम, 6 किचन, 2,500 स्क्वायर फीट में जिम और 2,300 स्क्वायर फीट का रिसेप्शन हॉल है.
  • वाशिंगटन में स्थित बिल गेट्स के घर का आर्किटेक्ट जेम्स कटलर (James Cutler) और बोह्लिन क्य्विन्सकी जैक्सन फर्म (Bohlin Cywinski Jackson firm) में मिलकर बनाया था. जेम्स कटलर उत्तर पश्चिमी शैली के सबसे प्रसिद्ध वास्तुकार माने जाते हैं.
  • गेट्स के घर की खासियत यह है कि किसी भी वक्त परिवार के सदस्य या अन्यों लोगों के कदमों के दबाव पड़ने से पता लग जाता हैं कि घर में कौन मौजूद है. घर की लाइट्स अपने आप ही जलने और बुझने लगती हैं. घर में लगे स्पीकरों में चलने वाला म्यूजिक घर में मौजूद व्यक्ति को एक कमरे से दूसरे कमरे तक पीछा करता है.
  • बिल गेट्स ने घर के अंदर एक शानदार पुस्तकालय भी बनवा रखी है. यह पुस्तकालय लगभग 2,100 स्क्वायर फ़ीट तक फैला है और इसे बनाने में लगभग 190 करोड़ रुपये का खर्च आया था.
  • बिल के घर शानाडू में 60 फीट गहरा स्विमिंग पूल है. इस पूल में पानी के अंदर भी म्यूजिक सिस्टम लगा हुआ है.
  • बिल गेट्स के घर को 300 मजदूरों ने मिलकर बनाया है. 300 मजदूरों में से 100 मजदूर इलेक्ट्रीशियन ही थे.
  • घर को देखने आने वाले लोगों को घर में अंदर प्रवेश करने से पहले एक माइक्रोचिप दी जाती है. यह चिप पूरे घर में सिग्नल भेजती है.
  • बिल ने एक बार चैरिटी के आयोजन के लिए अपने घर को देखने की बोली लगाई गई. जिसमें एक व्यक्ति ने 35,000 डॉलर केवल बिल गेट्स के घर को देखने के लिए खर्च कर डाले.
  • शानाडू घर में इस्तेमाल में लाई गई लकड़ी उम्दा किस्म की हैं. इन लकड़ियों को दुनिया के कोने-कोने से लाया गया हैं.

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वायरल: फटे जूतों से शख्स ने बनाया जबरदस्त फुटबॉल, वीडियो देख लोग बोले- ‘वाह’!

इस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो अपने टैलेंट से कई बार ऐसे कारनामे कर जाते हैं जिन्हें देख कर लोग दंग रह जाते हैं।इन दिनों सोशल मीडिया पर एक शख्स का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें वह अपने फटे जूतों से एक कूल फुटबॉल बनाता है।

खासकर जुगाड़ तकनीक का इस्तेमाल करने वाले लोग, जो बेकार की चीजों को इधर-उधर नहीं फेंकते और उससे अपने इस्तेमाल की चीजें बनाते हैं। वैसे तो दुनिया में बहुत कम ऐसे लोग बचे हैं जो इतने टैलेंटेड होते हैं इसलिए जब भी उनका कोई कारनामा इंटरनेट पर आता है तो वह अंधाधुंध वायरल हो जाता है।

हाल ही में भी एक ऐसे ही शख्स का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें यह शख्स ने अपने फटे जूतों से फुटबाल बना रहा है।

वायरल हो रहे इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक शख्स अपने फटे जूतों को लेकर उन्हें एक शेप में काट लेता है। फिर दूसरे फटे हुए जूतों से इस तरह की कई आकृतियां काट लेता है।

इसके बाद वह सभी टुकड़ों को जोड़कर इसमें हवा भर देता है और उसे फुटबॉल का आकार दे देता है। अपने जुगाड़ को सफल होते देख वह खुशी से उछल पड़ता है।

इस वीडियो को ट्विटर पर @MorissaSchwartz नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। जिसके साथ उन्होंने कैप्शन लिखा है “हाओ कूल ” !! कई लोगों ने इस वीडियो पर कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

एक यूजर ने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, ‘यह सभी जुगाड़ तकनीक का कमाल है।’ वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, यह जुगाड़ वाकई काबिले तारीफ है।

एक अन्य यूजर ने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, ‘इस जुगाड़ के आगे इंजीनियरिंग भी फेल हो गए। इसके अलावा और भी कई यूजर्स ने इस ट्रिक की तारीफ की है।

होट्ज़िन: एक अजीब और अद्भुत पक्षी!

पूरी दुनिया में अनगिनत अनोखे पक्षी पाए जाते हैं जिनमें से कई बेहद खूबसूरत और अद्भुत होता हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको होट्ज़िन पक्षी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे रेप्टाइल बर्ड, स्कंक बर्ड, स्टिंकबर्ड, या कांजे तीतर के नाम से भी जाना जाता है।

यह उष्णकटिबंधीय पक्षी की एक प्रजाति है जो दक्षिण अमेरिका में दलदलों, नदी के किनारे के जंगलों और अमेज़न के मैंग्रोव और ओरिनोको घाटियों में पाई जाती है।

यह जीनस ओपिसथोकोमस का एकमात्र सदस्य है ओपिसथोकोमस (Opisthocomidae परिवार में यह एकमात्र मौजूदा जीनस है।

रोचक तथ्य

  • होट्ज़िन तीतर के आकार का है, जिसकी कुल लंबाई 65 सेंटीमीटर (26 इंच) है, और इसकी लंबी गर्दन, सिर पर पंखों का मुकुट और नीले घेरे के बीच लाल आँखें होती हैं। इसका शरीर पीले पंखों के साथ गहरे और हल्के भूरे रंग के पंखों से ढंका होता है।
  • यह दक्षिणी अमेरिका में पाया जाता है इसकी पूंछ लंबी होती है।
  • होट्ज़िन लंबाई में करीब 64 सेंटीमीटर होता है और इनका वजन लगभग एक किलोग्राम तक होता है।
  • यह दुर्लभ पक्षियों में से एक है, जो शाकाहारी होते हैं। ये विभिन्न प्रकार के हरे पौधे और पत्ते खाते हैं।
  • यह एक बुद्धू पक्षी माना जाता है और अपना ज्यादातर समय पानी के पास पेड़ की शाखाओं पर बैठकर बिताता है।
  • यह एक अप्रिय गंध पैदा करता है, इसी कारण इसको ‘स्टिंकबर्ड‘ के नाम से भी जाना जाता है। लोग इसकी गंध के कारण इसका शिकार करने से बचते हैं।
  • होट्ज़िन के समूह को ‘कॉलोनी‘ कहा जाता है। ये 10 से 50 पक्षियों की कॉलोनियों में रहते हैं।
  • होट्ज़िन का जीवनकाल लगभग 15 से 30 साल तक होता है।

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8 सनसनीखेज भूतिया गुड़िया जो अस्तित्व में हैं!!

गुड़िया छोटे बच्चों का फेवरेट खिलौना होती है। आजकल मार्केट में तरह- तरह की गुड़ियों की भरमार है। हर एक बच्चा इन डॉल्स के साथ खेलना पसंद करता है। लेकिन ये गुड़िया अगर खतरनाक और जानलेवा निकल आए, तो क्या होगा।

हॉलीवुड में रिलीज हुई फिल्म एनाबेल, भूतिया गुड़िया पर ही बनी है, असल में वो एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म है। आज हम आपको इन भुतहा गुड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आस्तित्व में है।

एनाबेल: सबसे भूतिया गुड़िया

इस भूतिया गुड़िया की कहानी साल 1970 की है। अमेरिका में एक माँ ने अपनी बेटी डॉना को उसके जन्मदिन पर यह गुड़िया गिफ्ट दी थी। शुरुआत में तो वह गुड़िया सिर्फ एक खिलौना थी, लेकिन धीरे- धीरे वह गुड़िया हाथ हिलाने लगी। इसके बाद अगर उसे रात को कुर्सी पर रखा जाता, तो सुबह वह जमीन पर पड़ी मिलती थी। कभी- कभी गुड़िया पर खून के धब्बे लगे हुए मिलते थे।

इसके बाद डॉना की माँ ने पैरानॉर्मल एक्सपर्ट एड ऑर लौरेन वॉरेन को बुलाया। वॉरेन ने गुड़िया को देख बताया किसी बेहद शक्तिशाली आत्मा ने इस पर कब्जा कर रखा है। इस गुड़िया को तंत्र-मंत्र के सहारे से बड़ी मुश्किल से काबू किया गया। इसके बाद इसे वॉरेन के ओकलट म्यूजियम में, शीशे के सोकेस में रखा गया है और इसे हाथ ना लगाने की चेतावनी भी दी गई है।

रॉबर्ट: काले जादू से बोलने वाला खिलौना

रॉबर्ट एक खिलौना है। रॉबर्ट यूजीन ओटो नाम के एक व्यक्ति को ये खिलौना उसके नौकर ने उसे गिफ्ट में दिया था। यह नौकर काला जादू जानता था और उसने खिलौने पर काला जादू किया था। यह खिलौना बोलता भी था, रॉबर्ट के माता- पिता ने उसे कई बार रॉबर्ट का नाम लेते सुना। यह खिलौना अब ईस्ट मारटिलो म्यूजियम में है।

मैंडी: असाधाराण शक्तियों वाली गुड़िया

मैंडी नाम की इस डॉल की मालकिन ने बताया कि इस डॉल में कुछ असाधारण शक्तियां थी। उसने बताया आधी रात को घर में किसी बच्चे के रोने की आवाज ज़ोर- ज़ोर से सुनाई देती थी। जहां ये डॉल पड़ी होती थी, उस कमरे की खिड़कियां खुद ही खुल जाया करती थी और हर बार घर में बड़ी अजीबोगरीब घटनाएं होती थी। फिर उसने साल 1991 में इस डॉल को म्यूजियम में दे दिया था।

ओकिको: जिसके बाल बढ़ते हैं!

जापान की रहने वाली 17 साल की ईकीची सुजुकी ने इस डॉल को खरीदा था। उसने ये डॉल अपनी 2 साल की बहन ओकिको के लिए खरीदी। एक साल बाद ठंड की वजह से उसकी बहन ओकिको की मौत हो गई। परिवार के सदस्य बताते हैं कि ओकिको अपनी इस डॉल से बहुत प्यार करती थी, इसलिए उसकी आत्मा इस डॉल में बसती है।

परिवार के दूसरे जगह चले जाने के कारण डॉल को किसी मंदिर में रख दिया गया। कहा जाता है कि डॉल के बाल खुद ही बढ़ते हैं। हालांकि नियमित रुप से इसके बाल कटवाये भी जाते हैं, लेकिन यह बढ़ते रहते हैं।

कटजा: शापित गुड़िया

कटजा एक शापित डॉल है। इस डॉल का कटजा नाम साल 1730 में रुस में पड़ा था। कहा जाता है कि एक औरत गर्भवती थी और उसके परिवार वाले चाहते थे कि लड़का हो। लेकिन लड़की पैदा हुई, पर उन्होंने लड़की को जिंदा जला दिया। ऐसा होने के बाद लड़की की मां ने उसकी राख से एक डॉल बनाई और उसमें सिरेमिक, पोलसिलेन मिलाया।

उसके बाद, सभी पीढ़ियों ने इस डॉल की रक्षा की, क्योंकि उनका मानना था कि ये शापित डॉल है। इस डॉल को ईबे पर बेचने के लिए भी तैयार किया गया, लेकिन ईबे से इसे जल्द ही बंद कर दिया गया।

प्यूपा: असली बालों वाली गुड़िया

प्यूपा नाम की इस डॉल के बाल असली हैं। ऐसा कहा जाता है कि प्यूपा की मालकिन को प्यूपा तब मिली थी, जब वो एक बच्ची थीं। साल 1920 से लेकर साल 2005 तक प्यूपा उनके साथ ही रही। प्यूपा की मालकिन की मौत के बाद उसके घर वालों ने इस डॉल में बड़े ही अजीबोगरीब चीजों को नोटिस किया।

घर के शोकेस में राखी इस डॉल  के पास अगर कोई जाता, तो वहां से ग्लासों के खटखटाने की आवाजें सुनाई देती थी। ऐसा लगता कि प्यूपा अपने हाथों और पैरों से ग्लास को तोड़ने की कोशिश कर रही हो, ऐसा लगता कि वो वहां से बाहर निकलना चाहती थी।

मर्सी: जब रेडियो अपने आप बजने लगा

मर्सी डॉल की मालकिन शेर्री एक पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर है, उसने इस डॉल को एक ईबे सेलर के जरिए खरीदा था। जब से उसने इस डॉल को खरीदा था, तभी से उसे अपने घर में नेगेटिव एनर्जी महसूस होने लगी। शेर्री बताती है एक दिन अचानक कमरे में रखा रेडियो अपने-आप बजने लगा। एक दिन तो शेर्री और उसके पति ने इस डॉल को अपने शेल्फ में पाया।

क्रिस्टीना: फोटो में अपने आप जगह बदलने वाली गुड़िया

क्रिस्टीना के मालिक ने इसे ईबे पर खरीदा था। इस डॉल की आंखों में पैरानॉर्मल एक्टिविटी देखी गई है। इस डॉल के मालिक बताते हैं कि जब बहुत ज्यादा फोटो क्लिक की जाती है, तो फोटो की श्रृंखला खुद ही बदल जाती है। इतना ही नहीं इस डॉल की स्थिति भी फोटो में बदल जाती है। इसके बालों की सभी गांठें निकाल दी जाती थी, लेकिन फिर भी अगले दिन इसके बाल खुद ही उलझ जाते थे।

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कुत्तों में भी होता है मोटापा, जानिए क्या है कारण और लक्षण?

मनुष्यों की तरह कुत्ते भी मोटापे का शिकार हो सकते हैं। शारीरिक व्यायाम की कमी और अधिक खाने की वजह से उनका भी वजन बढ़ता है और वे मोटापे का शिकार हो जाते हैं। कुछ लोग अपने पालतू कुत्तों को हर घड़ी कुछ न कुछ खाने को देते रहते हैं, यह भी एक वजह है।

जब  उनके शरीर में अतिरिक्त मात्रा में वाइट एडिपोज टिश्यू इकट्ठा होने लगता है, तो इस स्थिति को केनाइन ओबेसिटी या कुत्ते में मोटापा कहा जाता है।

मोटापा कुत्ते के जीवनकाल से लगभग दो वर्ष कम कर देता है। मोटापे की वजह से उसे हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ऑस्टियोआर्थइटिस जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।

लक्षण

यदि कमर के चारों ओर अतिरिक्त चर्बी बढ़ी हुई है, कुत्ते को छूने पर पसलियां महसूस नहीं हो रही हों, उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही हो, दौड़ नहीं पा रहा हो, सुस्त रहता हो तो आपका पालतू कुत्ता मोटापे का शिकार है।

कुत्तों का अधिक वजन तब माना जाता है जब उनका वजन उनके आदर्श शरीर के वजन से 10-20% अधिक होता है।

इन कारणों से बढ़ता है वज़न

  • कुत्ता भोजन के माध्यम से जितनी कैलोरी ले रहा है, उसका शरीर उतना इस्तेमाल नहीं कर पाता। यह कैलोरी उसके शरीर में चर्बी के रूप में जमा होने लगती है। शारीरिक क्रिया न होने की वजह से भी शरीर की चर्बी बढ़ती जाती है।
  • इंसानों की तरह श्वानों (कुत्तों) में भी उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिजम धीमा हो जाता है और पाचन क्रिया भी मंद हो जाती है जिससे मोटापे का ख़तरा बढ़ने लगता है।
  • लैब्राडोर में मोटापे का ख़तरा अधिक होता है। इसके अलावा अन्य नस्ल जैसे कि टेरियर, स्पैनियल, डैशहंड्स, बीगल में भी अनुवांशिक रूप से मोटापे का ख़तरा अधिक होता है।
  • न्यूटेरिंग एक चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें कुत्ते को नपुसंक बना दिया जाता है। इस प्रक्रिया से हार्मोन प्रभावित हो जाते हैं और मेटाबोलिजम भी प्रभावित होता है। नतीजतन कुत्तों में वजन बढ़ जाता है।
  • कई बार कुछ दवाइयों के कारण भी मोटापा बढ़ जाता है।
  • कुत्तों में भी हाइपोथायरायडिज्म की वजह से मोटापा हो सकता है।
  • कशिंग रोग में अत्यधिक कॉर्टिसोल बनने लगता है जिसकी वजह से पॉलिफेजिया (अत्यधिक भूख लगना) की समस्या होती है और यह मोटापे का कारण बनती है।

इन बातों पर दें ध्यान

  • संतुलित आहार, व्यायाम और आहार देने की विधि पर ध्यान दें। पालतू को प्रोटीन से भरपूर व कम वसा वाला आहार दें। इससे पालतू को पेट भरा हुआ लगेगा, बार-बार भूख महसूस नहीं होगी।
  • कुत्तों को मनुष्यों का भोजन न दें क्योंकि उसमें वसा की मात्रा अधिक होती है। बाजार में कुत्तों के लिए मौजूद विशेष प्रकार का भोजन ही दें।
  • कुत्ते को दौड़ाएं और उसके साथ खेलें ताकि उसकी ऊर्जा बनी रहे।

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इन 10 जानी-मानी अभिनेत्रियों ने रचाई विदेशी लड़कों से शादी !

शादी वो पवित्र रिश्ता है जो दो दिलो को हमेशा के लिए जोड़े रखता है। हर किसी की ज़िंदगी में शादी का अलग ही महत्व होता है, चाहे वो बॉलीवुड इंडस्ट्री के बड़े बड़े सितारे हो या फिर मध्यम वर्ग के आम लोग।

बॉलीवुड सितारे फिल्मों के साथ-साथ पर्सनल लाइफ को लेकर भी काफी काफी चर्चा में रहते हैं वहीं बॉलीवुड की कुछ अभिनेत्रीयों ने अपनी शादी को लेकर काफी ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं।

ऐसे में आज के इस लेख में हम आपको बॉलीवुड की उन 10 अभिनेत्रियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने विदेशी लड़कों से शादी रचाई है, तो चलिए जानते हैं :-

प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस

बॉलीवुड में देसी गर्ल के नाम से मशहूर प्रियंका चोपड़ा ने दिसंबर 2018 मे एक अमेरिकी गायक, गीतकार, अभिनेता और रिकॉर्ड निर्माता निक जोनस से शादी की। कुछ दिनों पहले ही कपल सरोगेसी के जरिए बेटी के पैरेंट्स बने हैं।

प्रीति जिंटा और जीन गुडइनफ

‘कल हो ना हो‘ की स्टार प्रीति जिंटा ने 28 फरवरी, 2018 को एक अमेरिकी व्यवसायी जीन गुडइनफ से शादी की। संयुक्त राज्य अमेरिका में शादी करने से पहले ये दोनों पांच साल तक एक दूसरे को डेट कर कर रहे थे।

वे लॉस एंजिल्स के सांता मोनिका में मिले थे। कुछ महीने पहले प्रीति जिंटा और जीन गुडइनफ सरोगेसी के जरिए जुड़वा बच्चों के माता-पिता बने hai।

राधिका आप्टे और बेनेडिक्ट टेलर

फिल्म इंडस्ट्री की दमदार एक्ट्रेस में शुमार राधिका आप्टे हमेशा अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए जानी जाती हैं लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि इंडस्ट्री में आने से पहले ही राधिका शादीशुदा थीं।

राधिका और बेनेडिक्ट टेलर की मुलाकात 2011 में तब हुई थी जब राधिका कंटेम्परेरी डांस सीखने के लिए लंदन गई थीं। एक साल डेटिंग के बाद राधिका ने बेनेडिक्ट टेलर से साल 2012 में शादी कर ली। दोनों एक साथ समय बिताने के दौरान अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को दूर रखते हैं।

सेलिना जेटली और पीटर हाग

बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली काफी दिनों से इंडस्ट्री से दूर हैं। सेलिना जेटली ने ऑस्ट्रिया के होटेलियर पीटर हाग से साल 2011 में शादी की थी।

2010 में दोनों ने सगाई की और 2011 में उन्होंने शादी कर ली। इन दोनों की पहली मुलाकात दुबई हुई थी। वियना स्थित होटल व्यवसायी पीटर हाग देश भर में होटलों की एक श्रृंखला चलाते हैं।

माधुरी दीक्षित और डॉ. श्रीराम नेने

बॉलीवुड की धक धक गर्ल को कौन नहीं जानता अपनी अदाओं से दीवाना बनाने वाली ड्रीम गर्ल ने 1999 में यूएस बेस्ड कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. श्रीराम नेने से शादी की।

इस खबर ने लाखों दिल तोड़ दिए। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि नेने उनकी पहली मुलाकात से पहले माधुरी को नहीं जानते थे। इतना ही नहीं उन्हें ये तक नहीं पता था कि माधुरी देश की टॉप एक्ट्रेस हैं।

श्रिया सरन और आंद्रेई कोसचीव

एक प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रिया सरन ने 19 मार्च, 2018 को रूस के आंद्रेई कोशेव से शादी करके देश को चौंका दिया। आंद्रेई एक सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ एक प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी भी हैं।

जूही चावला और जय मेहता

अपनी दिलकश मुस्कान और 1984 में ‘मिस इंडिया‘ का खिताब जीत चुकी जूही चावला ने 1995 को एनआरआई बिज़नेसमैन जय मेहता के साथ शादी रचा ली थी।

जूही जय मेहता की दूसरी पत्नी है। जय एक बिजनेसमैन है, उनका व्यापार भारत के अलावा अफ्रीका, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में फैला हुआ है।

कश्मीरा शाह और लिस्टरमैन

साल 2002, कश्मीरा शाह ने हॉलीवुड निर्माता ब्रैड लिस्टरमैन से शादी की, जिनसे उनकी मुलाकात एक इंटरनेट डेटिंग सेवा पर हुई थी।

पहली आमने-सामने की मुलाकात के अगले दिन उन्होंने शादी कर ली थी। हालाँकि, उन्होंने एक साल बाद, 2007 में तलाक ले लिया था।

शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा

यूके रियलिटी शो बिग ब्रदर जीतने के बाद शिल्पा शेट्टी ने लंदन के एक बिजनेसमैन राज कुंद्रा से 22 नवंबर, 2009 को शादी कर ली। राज कुंद्रा पहले से शादीशुदा थे। उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक देने के बाद शिल्पा शेट्टी से ब्याह रचाया था।

ब्रेंट गोबल और आशका गोराडिया

आशका गोराडिया ने संयुक्त राज्य अमेरिका के मूल निवासी ब्रेंट गोबल से शादी की थी। दोनों ने पहले 1 दिसंबर 2017 को ईसाई रीति-रिवाज से शादी की और फिर 3 दिसंबर को हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए।

वे दोनों एक दूसरे 2016 में लास वेगास में एक पार्टी में मिले थे। बता दें कि ब्रेंट आशका से 4 साल छोटे हैं।

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जानिए नाखूनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!!

नाखून मनुष्यों के हाथ तथा पांव की उंगलियों के आख़िरी हिस्से के ऊपरी भाग में एक ठोस कवचनुमा आवरण होता है। यह वानरों और कुछ अन्य स्तनपाइयों में भी विद्यमान होता है। यह एक कठोर प्रोटीन कॅराटिन से बना होता है पशुओं के सींग और खुरों भी इसी पदार्थ के होते हैं।

जहाँ तक साज सज्जा की बात करें तो महिलाओं में अपने नाखुनो के प्रति बड़ा लगाव होता है और महिलाएं अपने नेल्स पर पहले साधारण नेल पेंट लगाया करतीं थी मगर अब बाजार में अनेकानेक कलर्स डिज़ाइन्स अर्टिफिसल नेल्स आने लगे हैं

और महिलाओं में यह एक आकर्षण का केंद्र भी माना जाता है अभी काफी समय से अमेजिंग नेल आर्ट स्टूडियो ने भी अपनी एक नई पहचान बनाई है और महिलाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं नाखूनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य :

सबसे लंबे नाखून

विश्व में सबसे लंबे नाखूनों का रिकॉर्ड भारत के श्रीधर लाल के नाम था। उन्होंने 66 साल बाद साल 2018 में अपने नाखून कटवा लिए। आखिरी बार श्रीधर ने जब अपने नाखूनों का नाप लिया था तब वे तकरीबन 909 सैंटीमीटर लंबे थे।

नाखून चबाने की आदत

नाखून चबाने की आदत को मैडिकल भाषा में ‘ऑनिकोफेजिया‘ कहा जाता है। वैसे तो नाखून चबाने की कोई निश्चित वजह नहीं है लेकिन आमतौर पर यह आदत बचपन में शुरू होती है लेकिन एक बार शुरू होने के बाद, इसे रोकना मुश्किल होता है।

अक्सर जिन लोगों को नाखून चबाने की आदत होती है वे ऐसा तब करते हैं जब उन्हें किसी वजह से ‘एंग्जाइटी‘ यानी बेचैनी महसूस होती है क्योंकि नाखून चबाने से तनाव और नीरसता दूर करने में मदद मिलती है।

नाखूनों के अलग-अलग हिस्से

‘क्यूटिकल’: यह त्वचा की पतली परत होती है जो सतह पर नाखून के उभरने से ठीक पहले नाखून और उसकी जड़ को ढंक लेती है।

‘नेल प्लेट‘ : इसे ‘बॉडी ऑफ नेल‘ के रूप में भी जाना जाता है। यही नाखून का प्रमुख हिस्सा है जो अमीनो एसिड से बना ‘कॅराटिन‘ प्रोटीन होता है।

‘नेल फोल्ड’ : यह वह हिस्सा है जो नाखून की जड़ में नेल ‘मैट्रिक्स‘ को घेरता है। यह नाखून को बाकी त्वचा से जोड़ता है।

‘नेल मैट्रिक्स‘: वह हिस्सा जहां आपके नाखून बढ़ने लगते हैं। यह नई त्वचा कोशिकाओं का निर्माण करता है जो पुरानी मृत त्वचा कोशिकाओं को बाहर निकालकर हाथों और पैरों की उंगलियों के नाखूनों दोनों का निर्माण करता है।

‘नेल लुनुला’ : यह नाखून के तल पर पाया जाता है जो नाखून की जड़ का दिखने वाला हिस्सा है। हर नाखून पर यह एक घुमावदार सफेद निशान जैसा दिखता है। हालांकि, यह भी जरूरी नहीं है कि हर किसी के ‘लुनुला‘ दिखाई दें।

‘नेल बैड’ : वह हिस्सा जिस पर अधिकांश नाखून टिका होता है। इसकी चोटें दर्दनाक हो सकती हैं और उंगलियों का उपयोग करने से रोक सकती हैं।

‘नेल हाइपोनीचियम’: यह ‘नेल प्लेट‘ के मुक्त किनारे और उंगलियों की त्वचा के बीच का क्षेत्र है। ये नाखूनों को वाटरप्रूफ भी बनाते हैं।

‘नेल फ्री एज’ : नाखून का अंत जो उंगलियों के सिरे से आगे तक फैला होता है – जिसे ‘फ्री नेल एंगल‘ या ‘डिस्टल नेल प्लेट‘ के रूप में भी जाना जाता है। यह नाखून का ‘मृत’ या दर्द रहित हिस्सा है।

‘एपोनिचियम‘: यह उंगलियों और पैर के नाखूनों के आसपास त्वचा की मोटी परत होती है। इसे ‘मेडियल‘ या ‘नेल फोल्ड‘ भी कहा जा सकता है।

पंजाब केसरी से साभार

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बेहद गुणकारी है ‘खुबानी’

खुबानी गुठली वाला फल होता है और इसकी खास बात है कि इसको कच्चा और सूखे मेवे, दोनों ही रूपों में खाया जा सकता है।

यह पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अच्छा है। आयुर्वेद में खुबानी का प्रयोग औषधि के रूप में बहुतायत मात्रा में किया जाता है।

खुबानी क्या है?

खुबानी का वानस्पतिक नाम ‘पूनस आरमीनिआका‘ है। इसे अंग्रेजी में एप्रीकॉट कहते हैं जबकि संस्कृत में इसका नाम “उरुमाण” है जबकि फारसी में इसे मिश-मिश तथा जरदालु कहते हैं।

खुबानी का वर्णन चरक, सुश्रुत तथा अष्टांग-हृदय जैसी संहिताओं में बादाम, अखरोट आदि मेवा फलों के साथ किया गया है। आड़ जैसे इस फल का छिलका थोड़ा खुरदुरा होता है।

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आयुर्वेद के अनुसार खुबानी मीठा और गर्म तासीर का फल है। अपने गुणों के कारण यह वात और कफ को कम करने के साथ कमजोरी दूर करने में मददगार होता है।

इसके अलावा खुबानी शुक्राणुओं की क्वालिटी और संख्या बढ़ाने में भी सहायता करता है। खुबानी में जीवाणुरोधी तत्व भी होते हैं जिससे यह बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है।

लम्बी उम्र का राज

पाकिस्तान की हुंजा घाटी में रहने वाली महिलाएं 80 साल की उम्र में भी महज 30-40 की लगती हैं जबकि यहां के पुरुष 90 साल की उम्र में भी पिता बन सकते हैं। कहते हैं कि यहां के लोग औसतन 120 साल तक जिंदा रहते हैं।

इनकी लम्बी उम्र का एक राज नियमित रूप से खुबानी के सेवन को भी माना जाता है जो यहां प्रचुर मात्रा में उगती हैं।
खुबानी में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘सी’, विटामिन ‘ई’, नियासिन, पोटाशियम, मैंगनीज।

मैग्निशियम जैसे बहत सारे पौष्टिक तत्व होते हैं जो इसे अनगिनत गुणों वाला बना देते हैं। इसके फल के सेवन से सेहत को फायदा तो होता ही है, इसके पेड़ पर लगने वाले फूल, पत्ते तथा बीज भी फायदेमंद हैं।

कमजोरी में खुबानी के सेवन से लाभ

अगर लंबे समय तक बीमार होने के कारण कमजोरी हो गई है तो खुबानी के सेवन से लाभ मिल सकता है। इसका रोज सेवन करने से दुर्बलता कम होती है तथा शरीर की ताकत बढ़ती है।

भारत के हिमालयी क्षेत्रों में खुबानी का तेल बहुतायत से सेवन किया जाता है। यह अत्यन्त पौष्टिक होता है। कमजोरी दूर करने के लिए 1 चम्मच तेल को दूध में डालकर पाना चाहिए।

खांसी में

यह खांसी के उपचार में भी गुणकारी है। इसके फूल के चूर्ण में काली मिर्च तथा अदरक मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से खांसी तथा सांस लेने में जो असुविधा होती है उससे आराम मिलता है। वैसे यह पेय के रूप में भी काफी स्वादिष्ट होता है।

दस्त या अतिसार में

खाने में संतुलन बिगड़ा नहीं कि दस्त की समस्या हो गई। इसे रोकने के लिए खुबानी के बीज का काढ़ा बनाकर 15-20 मि.ली. मात्रा में पीने से दस्त में लाभ होता है।

बार-बार प्यास लगने की समस्या में अक्सर किसी दवा के साइड इफैक्ट के कारण या किसी बीमारी के लक्षण के रूप में बार-बार प्यास लगने की समस्या हो सकती है।

यहां तक कि मेनोपॉज के कारण भी गला बार-बार सूखने लगता है। खुबानी का सेवन करने से अत्यधिक प्यास लगना कम होता है।

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गठिया के दर्द में

गठिया का दर्द आजकल हर उम्र के लोगों को होने लगा है। खुबानी के सेवन से इस दर्द से होने वाली परेशानी कुछ हद तक कम हो सकती है।

अल्सर में

खुबानी बीज के तेल को लगाने से जलने से जो घाव या अल्सर जैसा होता है उससे आराम मिलता है।

रूखी त्वचा से राहत

आजकल बाहर प्रदूषण बहुत अधिक है और खान-पान में असंतुलन का असर भी त्वचा पर होता है। खुबानी के तेल के प्रयोग से त्वचा का रूखापन कम होता है और यह कोमल हो जाती है।

पंजाब केसरी से साभार

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