दुनिया के शीर्ष 10 सबसे हरे-भरे और खूबसूरत शहर

हम आपको दुनिया की शीर्ष 10 सबसे खूबसूरत और हरे-भरे शहरों की सूची दिखाने जा रहे है l इन शहरों में सबसे कम प्रदूषण और गंदगी है और इनमें से कई शहर अपनी खूबसूरती और सफाई के लिए पुरूस्कार भी जीत चुके हैं l

इन शहरों को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने का श्रेय इनमें रहने वाले लोगों को जाता है जिन्होंने नियमों की पालन करके इन शहरों को दुनिया के शीर्ष 10 सबसे हरे-भरे और खूबसूरत शहरों में लाया है तो आइए देखते हैं विश्व के 10 खूबसूरत शहर:-

 कोपेनहेगेन,डेनमार्क

खूबसूरत शहरकोपेनहेगेन, जो डेनमार्क की राजधानी है l दुनिया के हरे-भरे शहरों की सूची में पहले नंबर पर आता है l इस राजधानी में 20 लाख लोग रहते हैं और यह लोग पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान देते हैं l लोगों का लक्ष्य इस शहर को 2025 तक कार्बन न्यूट्रल बनाना है l

 ऐम्स्टर्डैम,नीदरलैंड्स

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एम्स्टर्डम में सभी लोग सिर्फ साइकिल ही चलाते हैं और ऐसा वो एक दशक से कर रहे हैं l यह दुनिया का सबसे बड़ा साइकिल चलाने के लिए अनुकूल शहर है क्योंकि इस शहर की सडकें, गलियां, पार्के साइकिल चलाने के लिए ही अच्छी तरह से बनायी गयी हैं l इस शहर में साइकिलों की संख्या लोगों से भी ज्यादा है l

 स्टॉकहोल्म,स्वीडन

world-top-10-greenest-cities-Stockholmस्टॉकहोल्म, यूरोप का पहला शहर है जिसने यूरोप ग्रीन कैपिटल पुरुस्कार भी जीता है l इस शहर को हरा बनाने की योजना 1970 में शुरू की गई थी l अब इस शहर की योजना में 2050 तक इस शहर को फॉसिल फ्यूल से मुक्त कर दिया जायेगा l यह दुनिया का सबसे हरा-भरा शहर है l

 वैंकोवर,कनाडा

world-top-10-greenest-cities-Vancouverवैंकोवर ज्यादा आबादी वाला और महंगे शहरों में से एक है l लेकिन इस शहर का मौसम बहुत अच्छा है जो इस शहर को रहने के लिए सबसे पसंदीदा शहर बनाता है l यह शहर कनाडा के सबसे हरे भरे शहरों में पहले नंबर पर आता है l

 लन्दन,इंगलैंड

world-top-10-greenest-cities-londonआप लन्दन शहर को हरे भरे शहरों की सूची में आने से हैरान हो सकते हैं लेकिन इस शहर को हरा-भरा बनाने के लिए काम शुरू कर दिया गया है l इस शहर में ग्रीन हाउस स्टेशनों को हटाया जा रहा है और इस शहर को हरा-भरा बनने में कुछ ही समय लगेगा l

 बर्लिन,जर्मनी

world-top-10-greenest-cities-Berlinबर्लिन यूरोप का पहला सबसे हरा भरा शहर है l इस शहर में सिर्फ वह ही वाहन चल सकते हैं जो पर्यावरण को ज्यादा नुकसान ना पहुंचाते हों l बर्लिन, जर्मनी की राजधानी है और इस शहर की आबादी 35 लाख है l बर्लिन जर्मनी का दूसरा सबसे बड़ा शहर है l

 न्यूयॉर्क,संयुक्त राज्य अमेरिका

world-top-10-greenest-cities-green_high_line_new_yorkन्यूयॉर्क, शायद अमेरिका का सबसे ज्यादा हरा-भरा शहर है l इस शहर की ज्यादातर आबादी पब्लिक ट्रासपोर्ट में सफर करती है l इस शहर में हरी भरी इमारतों को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है l इस शहर में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन अमेरिका में सबसे कम है l

सिंगापुर

world-top-10-greenest-cities-singaporeऔद्योगीकरण के बाद सिंगापुर प्रदूषण से ग्रस्त हो गया था l फिर 1992 में इस शहर को हरा भरा बनाने का काम शुरू कर दिया गया l इस योजना का मुख्य लक्ष्य शहर को प्रदूषण रहित बनाना था और अब यह शहर दुनिया के सबसे हरे-भरे और खूबसूरत शहरों में जाना जाता है l

 हेलसिंकी,फिनलैंड

world-top-10-greenest-cities-helsinkiकई स्कॅन्डिनेवियन शहरों की तरह, फ़िनलैंड की राजधानी ने अपने शहरवासियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट और साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित किया है l यह शहर उर्जा को बचाने का काम 1950 से करता आया है l 1992 में फ़िनलैंड ने अपने शहरों को स्वस्थ और खूबसूरत बनाने के लिए बहुत कठोर नियम पारित किये थे l

 ओस्लो,नॉर्वे

world-top-10-greenest-cities-osloओस्लो नॉर्वे की राजधानी है l इस शहर की सरकार ने ऐसी नियम बनाये हैं जिससे इस शहर में कम से कम गंदगी फैले इस नियम की सभी शहरवासी पालना करते हैं l ओस्लो अपनी बैंकिंग सेवाओं, पर्यटन स्थलों और इंडस्ट्री के लिए जाना जाता हैl

जानिए साइकिल चलाने से होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में

इन दिनों कोरोना काल में साइकिल चलाने का ट्रेंड खूब चल रहा है। अच्छी सेहत के लिए के लोगों का रुझान की साइकिल चलाने से तरफ बढ़ रहा है। साइकिल चलाने के एक नहीं कई फायदे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार नियमित साइकिल चलाने से त्वचा अल्ट्रा वॉयलेट किरणों के दुष्प्रभाव से बचती है जिससे बढ़ती उम्र चेहरे पर दिखाई नहीं देती।

साइकिल चलाने जैसी कसरत से रक्त का संचार तेज होता है और त्वचा की कोशिकाओं को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन व पोषक तत्व मिलते हैं।

आइये जानते है साइकिल चलाने से  होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में

तनाव रहेगा दूर

इन दिनों हर कोई तनाव में है कुछ लोग तो इस समय डिप्रेशन के शिकार भी हो रहे हैं । ऐसे लोगों के लिए साइकिल चलाना बेहद फायदेमंद है क्योंकि साइकिल से मानसिक तंदरुस्ती बनी रहती है।

आंकड़ों की मानें तो रोजाना साइकिल चलाने वाले लोगों का दिमागी स्तर आम लोगों की अपेक्षा 15 प्रतिशत ज्यादा बेहतर होता है। शरीर में नए बेन सेल्स बनते हैं।

अच्छी भरपूर नींद

जिन लोगों को नींद नहीं आती उनके लिए भी फायदेमंद है साइकिल चलना। साइकिल तनाव कम करता है जिससे खुद-ब-खुद नींद आती है।

दिल के लिए फायदेमंद

साइकिल चलाने से दिल की धड़कन तेज होने लगती है जिससे खून का प्रवाह बेहतर होता हैं और बीमारियां दूर होती है।

फेफड़ों की मजूबती

जब आप साइकिल चलाते हैं तो आप सामान्य की तुलना में ज्यादा गहरी सांसे लेते हैं, जिससे फेफड़ों को ताजी हवा मिलती है और फेफड़ों को मजबूती मिलती हैं।

मांसपेशियों की मजबूती

साइकिल चलाने से पैरों का व्यायाम होता है जो लोग घंटों एक ही जगह पर बैठे रहते हैं उन्हें साइकिल जरूर चलानी  चाहिए। इससे मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।

तनाव से पाएं छुटाकारा

साइकिल आप और आपके मूड को हेल्दी बनाता है। विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से साइकिल चलाने वाले तनाव और अवसाद का शिकार दूसरों की तुलना में काफी कम होते हैं।

स्टैमिना बढ़ता है

साइकिल चलाने से ब्लड सेल्स और स्किन में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति होती है। इससे आपकी त्वचा ज्यादा अच्छी और चमकदार व यंग दिखती है। आप खुद-ब-खुद महसूस करते हैं कि स्टैमिना बढ़ गया है।

डायबिटीज से राहत

शुगर यानि डाइबिटीज दिल, त्वचा, आंखे, किडनी ना जाने कितने रोगों के लिए जिम्मेदार है इसलिए डायबिटीज को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है और इसे कंट्रोल में रखने में साइकिल चलाना सबसे बेस्ट है क्योंकि इससे कोशिकाओं में उपस्थित ग्लूकोज कम या फिर समाप्त हो जाता है। फिर रक्त में उपस्थित ग्लूकोज को कोशिकाएं अवशोषित करके उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है।

इम्यून पॉवर बढ़ाए

आपकी इम्यूनिटी स्ट्रांग होगी तो आप इंफेक्शन से भी बचे रहेंगे। शरीर में रक्त संचार होगा। त्वचा व अन्य कोशिकाओं को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं।

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साइकिल के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी!!

बाइसाइकिल यानी साइकिल किसी समय आवागमन का एक महत्वपूर्ण माध्यम था। आधुनिकता की दौड़ और तेज रफ्तार जिंदगी ने धीरे-धीरे साइकिल को उच्च तथा मध्यम वर्ग के लोगों से दूर कर दिया, जिसकी जगह तेज रफ्तार मोटर गाड़ियों ने ले ली।

हालांकि एक बड़े वर्ग, जिसमें निम्न वर्ग के गरीब लोग शामिल हैं, मैं अभी भी साइकिल परिवहन का एक लोकप्रिय माध्यम है। इन दिनों पर्यावरण तथा प्रदूषण को लेकर वैश्विक स्तर पर छिड़ी चर्चा के बीच साइकिल का महत्व एक बार फिर सामने आया है।

वाहनों में इस्तेमाल होने वाले जैव ईंधन से होने वाले वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के मद्देनजर सही सोच वाले लोगों, जिनमें हर वर्ग के लोग शामिल हैं, ने पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहनों को त्याग कर साइकिल अपनाने पर विचार करना शुरू कर दिया है।

साइकिल चालन न केवल प्रदूषण कम करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान डालता है बल्कि स्वास्थ्य और फिटनैस में भी अपनी भूमिका को लेकर भी यह लोकप्रिय हो रहा है।

शहरों में तो साइक्लिंग क्लब तक बन गए हैं, जिनके सदस्यों को सुबह शाम रंग-बिरंगे हैल्मैट पहनकर सड़कों पर स्पोर्टी साइकिल चलाते देखा जा सकता है।

यहां तक की इस की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई शहरों में पार्कों में तथा गलियों व सड़कों के साथ-साथ साइकिल चालकों के लिए विशेष लेंस बनाई गई हैं।

साइकिल परिवहन का अब तक का सर्वाधिक सस्ता, सबसे भरोसेमंद माध्यम है तथा 1920 के दशक में बहुत से व्यापारियों ने इस्तेमाल के लिए इसे अपनाया था। आज इस पोस्ट में हम जानेंगे साइकिल से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में :-

  • पहला बाइसाइकिल तथा 1818 का ‘बैरन डी ड्रेस’ का ‘ड्रेसिएन’। चालक को आगे बढ़ने के लिए जमीन पर अपने पांव से इसे धकेल ना पड़ता था।
  • 1839 में स्कॉटिश लोहार किर्कपैट्रिक मैकमिलन ने पैडलों तथा ब्रेक वाले पहले बाइसिकल का आविष्कार किया।
  • मैकमिलन की वेलोसिपीड में पैडल पिछले पहिए पर क्रैंक्स के साथ एक रोड़ के माध्यम से जुड़े थे। यह पहिए को धीरे-धीरे घूमाते थे।
  • 1861 में फ्रांसीसी पिता व बेटे पियरे तथा अर्नस्ट मिचौक्स ने पहली सफल बाइसिकल बनाने के लिए पैडलों को सीधे आगे वाले पहिए के साथ जोड़ दिया और इसे बोनशेकर उपनाम दिया।
  • 1870 जेम्स स्टार्ले ने बोनशेकर में सुधार करके ऑर्डिनरी नाम दिया। एक विशाल अगले पहिए के कारण जरा से पैडल मारने पर ही काफी रफ्तार मिल जाती थी ।
  • 1874 में एच.जे.लॉसन ने चेन से चलने वाला दुनिया का पहला बाई साइकिल बनाया। उस में इसे ‘सेफ्टी बाय साइकिल ‘कहा जाता थ क्योंकि यह काफी ऊंचे का लंबे ‘ऑर्डिनरी‘ साइकिल से सुरक्षित था।
  • 1885 में स्टार्ले के भतीजे जॉन ने ‘रोवर सेफ्टी‘ नामक बाइसिकल। बनाया 1890 में इसमें हवा भरे टायर शामिल किए गए और आधुनिक बाइसिकल का जन्म हुआ।
  • 1895 तक 40 लाख, अमरिकी साइकिल की सवारी कर रहे थे। बाकी दुनिया भी में साइकिल चलाने वालों की संख्या बढ़ती गई।

सारी दुनिया में जितने लोग साइकिल चलाते हैं, उनकी कुल संख्या से अधिक लोग आज चीन में साइकिल चलाते हैं। पंजाब केसरी से साभार….। यह भी पढ़ें :-

औषधीय गुणों से भरपूर हैं ये 4 पौधे

भारत वर्षों से जड़ी-बूटियों के लिए जाना जाता है। आयुर्वेद में बड़े पेड़ों से लेकर जमीन पर एक इंच तक उगने वाली घास के फायदे और नुकसान का जिक्र है।

लेकिन हम में से बहुत से लोगों को इसके बारे में बहुत कम या बिल्कुल भी जानकारी नहीं है। साथ ही हमारे पास आपके घर के बगीचे में उगने के लिए औषधीय पौधों और पेड़ों के इतने विकल्प हैं कि उनका सही तरीके से उपयोग करने से आप डॉक्टर के चकर लगाने से बच सकते हैं।

घर कितना भी छोटा क्यों न हो, उसमें बगीचे के लिए जगह जरूर होती है। शायद ही आपने ऐसा घर देखा होगा जिसमें एक भी पौधा न लगा हो। घरों के आसपास पौधे लगाने का सिलसिला अनादि काल से चला आ रहा है।

उसमें कुछ सुंदर दिखने वाले पौधे और कुछ विशेष गुण वाले होते थे। जिससे घर की खूबसूरती के साथ-साथ सेहत भी तरोताजा बनी रहे।

हालाँकि, अंग्रेजी दवा के आगमन के बाद, लोगों में पौधे के औषधीय गुणों के प्रति समझ और रुचि दोनों कम हो गई थी। लेकिन कोरोना के बाद लोग एक बार फिर जड़ी-बूटियों के महत्व को जान रहे हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको औषधीय गुणों से भरपूर 4 पौधों के बारे में बताने जा हैं, तो चलिए जानते हैं :-

नीम

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  • शरीर को ठंडा रखता है।
  • पाचन में सुधार करता है।
  • थकान को दूर करता है।
  • घावों को साफ करने और ठीक करने का काम करता है।
  • त्वचा संबंधी रोगों में लाभकारी।
  • मधुमेह में सहायक।
  • पेशाब की समस्या को दूर करने का काम करता है।

भारतीय बोरेज

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  • पाचन में सुधार करता है।
  • भूख में सुधार करता है।
  • पेट में कीड़े होने की समस्या को दूर करता है।
  • बुखार में लाभकारी।
  • खांसी की समस्या में उपयोगी
  • सिर दर्द में आराम देता है।
  • अपच में कारगर।

तुलसी

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  • खांसी की समस्या में उपयोगी।
  • पेट में कीड़े होने की समस्या को दूर करता है।
  • भूख और स्वाद में सुधार करता है।
  • पाचन शक्ति में सुधार करता है।
  • अस्थमा और सांस की बीमारियों में राहत देता है।
  • यह कीड़े के काटने में लाभकारी होता है।
  • त्वचा संबंधी रोगों के लिए लाभकारी।
  • गुर्दे की पथरी में लाभ होता है।

एलो वेरा

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  • जलने पर राहत देता है।
  • घाव को ठीक करता है।
  • शरीर को ठंडा रखता है।
  • पेट संबंधी समस्याओं में लाभकारी।
  • मासिक धर्म के दर्द में कारगर।
  • यकृत समारोह में सुधार करता है।
  • कब्ज, एसिडिटी और भारीपन से राहत दिलाता है।

ये आयुर्वेदिक पौधे न सिर्फ शरीर के अंदर के दोषों को दूर करते हैं बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाते हैं।

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केले का फूल है मधुमेह का रामबाण इलाज, जाने कैसे करें सेवन

मधुमेह एक तेजी से बढ़ती गंभीर समस्या है जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बेहतर डाइट के जरिए इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि साधारण जीवनशैली में बदलाव जैसे व्यायाम करना, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकता है।

शुगर की कई तरह की दवाएं हैं, लेकिन इसके लिए आप कुछ घरेलू या आयुर्वेदिक नुस्खे भी आजमा सकते हैं। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए केले का फूल एक बेहतर उपाय साबित हो सकता है।

माना जाता है कि केले के फूलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसके अलावा इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण यह शुगर को नियंत्रित करने के लिए बेहतर है।

ये बैंगनी फूल टाइप 2 मधुमेह को रोकने और नियंत्रित करने के लिए फायदेमंद माने जाते हैं क्योंकि यह शरीर में रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है।

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पोषक तत्व

केले के फूलों में एंटीऑक्सिडेंट, खनिज और प्रोटीन सहित कई पोषक तत्व होते हैं। 3.5-औंस (100 ग्राम) केले के फूल में कैलोरी: 23, कार्ब्स: 4 ग्राम, फैट: 0 ग्राम और प्रोटीन: 1.5 ग्राम होता है।

यह पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, जस्ता और तांबे जैसे खनिजों का खजाना भी है। ये खनिज आपके शरीर के कई कार्यों में सहायता करते हैं।

रक्त शर्करा को नियंत्रित करने वाले फाइबर

वे कैलोरी में कम लेकिन फाइबर में उच्च होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, इसमें पाए जाने वाले घुलनशील फाइबर शरीर में कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं, जबकि अघुलनशील फाइबर कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को रोकने में मदद कर सकते हैं।

केले के फूलों में वे सभी आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं जिनकी आपके शरीर को जरूरत होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केले के फल और अन्य उष्णकटिबंधीय फलों की तुलना में कम प्राकृतिक चीनी होती है, जिसके कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए एक बेहतर विकल्प है।

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कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर को एक साथ खत्म करें

केले के फूलों में कई यौगिक होते हैं जो उच्च कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि जिन चूहों को केले के फूल का पाउडर दिया गया था, उनमें कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा का स्तर कम था।

एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि केले के फूल में ‘क्वेरसेटिन‘ और ‘कैटेचिन‘ जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल को कम कर सकते हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट कार्ब्स को अवशोषित करने वाले एंजाइम को अवरुद्ध करके काम कर सकते हैं।

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आंतों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है

घुलनशील और अघुलनशील फाइबर से भरपूर, केले के फूल पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि फाइबर के सेवन से आंत के माइक्रोबायोम में सुधार हो सकता है जो कोलन कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। फाइबर पेट में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में मदद करने के लिए प्रीबायोटिक के रूप में भी काम करता है।

कैसे करें उपयोग

आपको बता दें कि केले के फूल उतने ही फायदेमंद होते हैं जितने कि केले। केले की तरह इसमें भी वे सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के बेहतर कामकाज के लिए जरूरी होते हैं।

केले के फूल न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव करने की क्षमता रखते हैं। केले के फूल को आप कच्चा या पका कर खा सकते हैं। इसके अलावा आप इसे सलाद या सूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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लकड़ी पर सबसे लम्बी और अदभुत नक्काशी!

चुनहुई चीन के एक प्रसिद्ध लकड़ी पर नक्काशी करने वाले कलाकार हैं उन्होंने एक 40 फीट लंबी लकड़ी पर खूबसूरत नक्काशी करके अपना नाम गिनीज बुक में शामिल कर लिया। उन्होंने लकड़ी के तने पर नावों की, भवनों की, पुलों की और 500 लोगों की नक्काशी की थी।

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ऊपर दिया गया दृश्य असल में चीन की मशहूर पेंटिंग “Along the River During the Quinming Festival” की नकल है, जो 1 हज़ार साल पुरानी पेंटिंग है।

बहुत से लोग इस पेंटिंग को “चीन की मोनालिसा” पेंटिंग कहते हैं। यह लकड़ी पर की गयी नक्काशी प्राचीन चीन की संस्कृति को दर्शाती है।

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बिल गेट्स के आलीशान घर “शानाडू” से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य!!!

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स का घर वाशिंगटन शहर में दुनिया का सबसे शानदार निजी निवास है.

बिल गेट्स का घर वाशिंगटन झील के किनारे स्थित किसी जन्नत से कम नहीं लगता. आइए जाने बिल गेट्स के आलीशान घर के कुछ दिलचस्प तथ्य…..

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  • वाशिंगटन झील के पास मौजूद बिल गेट्स के घर का नाम शानाडू है. इस घर को बनाने में सात साल का समय लगा है. यह घर करीब 66,000 स्क्वॉयर फीट में फैला हुआ है.
  • बिल गेट्स के घर में स्विमिंग पूल, 7 बेडरूम, 24 बाथरूम, 6 किचन, 2,500 स्क्वायर फीट में जिम और 2,300 स्क्वायर फीट का रिसेप्शन हॉल है.
  • वाशिंगटन में स्थित बिल गेट्स के घर का आर्किटेक्ट जेम्स कटलर (James Cutler) और बोह्लिन क्य्विन्सकी जैक्सन फर्म (Bohlin Cywinski Jackson firm) में मिलकर बनाया था. जेम्स कटलर उत्तर पश्चिमी शैली के सबसे प्रसिद्ध वास्तुकार माने जाते हैं.
  • गेट्स के घर की खासियत यह है कि किसी भी वक्त परिवार के सदस्य या अन्यों लोगों के कदमों के दबाव पड़ने से पता लग जाता हैं कि घर में कौन मौजूद है. घर की लाइट्स अपने आप ही जलने और बुझने लगती हैं. घर में लगे स्पीकरों में चलने वाला म्यूजिक घर में मौजूद व्यक्ति को एक कमरे से दूसरे कमरे तक पीछा करता है.
  • बिल गेट्स ने घर के अंदर एक शानदार पुस्तकालय भी बनवा रखी है. यह पुस्तकालय लगभग 2,100 स्क्वायर फ़ीट तक फैला है और इसे बनाने में लगभग 190 करोड़ रुपये का खर्च आया था.
  • बिल के घर शानाडू में 60 फीट गहरा स्विमिंग पूल है. इस पूल में पानी के अंदर भी म्यूजिक सिस्टम लगा हुआ है.
  • बिल गेट्स के घर को 300 मजदूरों ने मिलकर बनाया है. 300 मजदूरों में से 100 मजदूर इलेक्ट्रीशियन ही थे.
  • घर को देखने आने वाले लोगों को घर में अंदर प्रवेश करने से पहले एक माइक्रोचिप दी जाती है. यह चिप पूरे घर में सिग्नल भेजती है.
  • बिल ने एक बार चैरिटी के आयोजन के लिए अपने घर को देखने की बोली लगाई गई. जिसमें एक व्यक्ति ने 35,000 डॉलर केवल बिल गेट्स के घर को देखने के लिए खर्च कर डाले.
  • शानाडू घर में इस्तेमाल में लाई गई लकड़ी उम्दा किस्म की हैं. इन लकड़ियों को दुनिया के कोने-कोने से लाया गया हैं.

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वायरल: फटे जूतों से शख्स ने बनाया जबरदस्त फुटबॉल, वीडियो देख लोग बोले- ‘वाह’!

इस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो अपने टैलेंट से कई बार ऐसे कारनामे कर जाते हैं जिन्हें देख कर लोग दंग रह जाते हैं।इन दिनों सोशल मीडिया पर एक शख्स का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें वह अपने फटे जूतों से एक कूल फुटबॉल बनाता है।

खासकर जुगाड़ तकनीक का इस्तेमाल करने वाले लोग, जो बेकार की चीजों को इधर-उधर नहीं फेंकते और उससे अपने इस्तेमाल की चीजें बनाते हैं। वैसे तो दुनिया में बहुत कम ऐसे लोग बचे हैं जो इतने टैलेंटेड होते हैं इसलिए जब भी उनका कोई कारनामा इंटरनेट पर आता है तो वह अंधाधुंध वायरल हो जाता है।

हाल ही में भी एक ऐसे ही शख्स का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें यह शख्स ने अपने फटे जूतों से फुटबाल बना रहा है।

वायरल हो रहे इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक शख्स अपने फटे जूतों को लेकर उन्हें एक शेप में काट लेता है। फिर दूसरे फटे हुए जूतों से इस तरह की कई आकृतियां काट लेता है।

इसके बाद वह सभी टुकड़ों को जोड़कर इसमें हवा भर देता है और उसे फुटबॉल का आकार दे देता है। अपने जुगाड़ को सफल होते देख वह खुशी से उछल पड़ता है।

इस वीडियो को ट्विटर पर @MorissaSchwartz नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। जिसके साथ उन्होंने कैप्शन लिखा है “हाओ कूल ” !! कई लोगों ने इस वीडियो पर कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

एक यूजर ने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, ‘यह सभी जुगाड़ तकनीक का कमाल है।’ वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, यह जुगाड़ वाकई काबिले तारीफ है।

एक अन्य यूजर ने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, ‘इस जुगाड़ के आगे इंजीनियरिंग भी फेल हो गए। इसके अलावा और भी कई यूजर्स ने इस ट्रिक की तारीफ की है।

होट्ज़िन: एक अजीब और अद्भुत पक्षी!

पूरी दुनिया में अनगिनत अनोखे पक्षी पाए जाते हैं जिनमें से कई बेहद खूबसूरत और अद्भुत होता हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको होट्ज़िन पक्षी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे रेप्टाइल बर्ड, स्कंक बर्ड, स्टिंकबर्ड, या कांजे तीतर के नाम से भी जाना जाता है।

यह उष्णकटिबंधीय पक्षी की एक प्रजाति है जो दक्षिण अमेरिका में दलदलों, नदी के किनारे के जंगलों और अमेज़न के मैंग्रोव और ओरिनोको घाटियों में पाई जाती है।

यह जीनस ओपिसथोकोमस का एकमात्र सदस्य है ओपिसथोकोमस (Opisthocomidae परिवार में यह एकमात्र मौजूदा जीनस है।

रोचक तथ्य

  • होट्ज़िन तीतर के आकार का है, जिसकी कुल लंबाई 65 सेंटीमीटर (26 इंच) है, और इसकी लंबी गर्दन, सिर पर पंखों का मुकुट और नीले घेरे के बीच लाल आँखें होती हैं। इसका शरीर पीले पंखों के साथ गहरे और हल्के भूरे रंग के पंखों से ढंका होता है।
  • यह दक्षिणी अमेरिका में पाया जाता है इसकी पूंछ लंबी होती है।
  • होट्ज़िन लंबाई में करीब 64 सेंटीमीटर होता है और इनका वजन लगभग एक किलोग्राम तक होता है।
  • यह दुर्लभ पक्षियों में से एक है, जो शाकाहारी होते हैं। ये विभिन्न प्रकार के हरे पौधे और पत्ते खाते हैं।
  • यह एक बुद्धू पक्षी माना जाता है और अपना ज्यादातर समय पानी के पास पेड़ की शाखाओं पर बैठकर बिताता है।
  • यह एक अप्रिय गंध पैदा करता है, इसी कारण इसको ‘स्टिंकबर्ड‘ के नाम से भी जाना जाता है। लोग इसकी गंध के कारण इसका शिकार करने से बचते हैं।
  • होट्ज़िन के समूह को ‘कॉलोनी‘ कहा जाता है। ये 10 से 50 पक्षियों की कॉलोनियों में रहते हैं।
  • होट्ज़िन का जीवनकाल लगभग 15 से 30 साल तक होता है।

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8 सनसनीखेज भूतिया गुड़िया जो अस्तित्व में हैं!!

गुड़िया छोटे बच्चों का फेवरेट खिलौना होती है। आजकल मार्केट में तरह- तरह की गुड़ियों की भरमार है। हर एक बच्चा इन डॉल्स के साथ खेलना पसंद करता है। लेकिन ये गुड़िया अगर खतरनाक और जानलेवा निकल आए, तो क्या होगा।

हॉलीवुड में रिलीज हुई फिल्म एनाबेल, भूतिया गुड़िया पर ही बनी है, असल में वो एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म है। आज हम आपको इन भुतहा गुड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आस्तित्व में है।

एनाबेल: सबसे भूतिया गुड़िया

इस भूतिया गुड़िया की कहानी साल 1970 की है। अमेरिका में एक माँ ने अपनी बेटी डॉना को उसके जन्मदिन पर यह गुड़िया गिफ्ट दी थी। शुरुआत में तो वह गुड़िया सिर्फ एक खिलौना थी, लेकिन धीरे- धीरे वह गुड़िया हाथ हिलाने लगी। इसके बाद अगर उसे रात को कुर्सी पर रखा जाता, तो सुबह वह जमीन पर पड़ी मिलती थी। कभी- कभी गुड़िया पर खून के धब्बे लगे हुए मिलते थे।

इसके बाद डॉना की माँ ने पैरानॉर्मल एक्सपर्ट एड ऑर लौरेन वॉरेन को बुलाया। वॉरेन ने गुड़िया को देख बताया किसी बेहद शक्तिशाली आत्मा ने इस पर कब्जा कर रखा है। इस गुड़िया को तंत्र-मंत्र के सहारे से बड़ी मुश्किल से काबू किया गया। इसके बाद इसे वॉरेन के ओकलट म्यूजियम में, शीशे के सोकेस में रखा गया है और इसे हाथ ना लगाने की चेतावनी भी दी गई है।

रॉबर्ट: काले जादू से बोलने वाला खिलौना

रॉबर्ट एक खिलौना है। रॉबर्ट यूजीन ओटो नाम के एक व्यक्ति को ये खिलौना उसके नौकर ने उसे गिफ्ट में दिया था। यह नौकर काला जादू जानता था और उसने खिलौने पर काला जादू किया था। यह खिलौना बोलता भी था, रॉबर्ट के माता- पिता ने उसे कई बार रॉबर्ट का नाम लेते सुना। यह खिलौना अब ईस्ट मारटिलो म्यूजियम में है।

मैंडी: असाधाराण शक्तियों वाली गुड़िया

मैंडी नाम की इस डॉल की मालकिन ने बताया कि इस डॉल में कुछ असाधारण शक्तियां थी। उसने बताया आधी रात को घर में किसी बच्चे के रोने की आवाज ज़ोर- ज़ोर से सुनाई देती थी। जहां ये डॉल पड़ी होती थी, उस कमरे की खिड़कियां खुद ही खुल जाया करती थी और हर बार घर में बड़ी अजीबोगरीब घटनाएं होती थी। फिर उसने साल 1991 में इस डॉल को म्यूजियम में दे दिया था।

ओकिको: जिसके बाल बढ़ते हैं!

जापान की रहने वाली 17 साल की ईकीची सुजुकी ने इस डॉल को खरीदा था। उसने ये डॉल अपनी 2 साल की बहन ओकिको के लिए खरीदी। एक साल बाद ठंड की वजह से उसकी बहन ओकिको की मौत हो गई। परिवार के सदस्य बताते हैं कि ओकिको अपनी इस डॉल से बहुत प्यार करती थी, इसलिए उसकी आत्मा इस डॉल में बसती है।

परिवार के दूसरे जगह चले जाने के कारण डॉल को किसी मंदिर में रख दिया गया। कहा जाता है कि डॉल के बाल खुद ही बढ़ते हैं। हालांकि नियमित रुप से इसके बाल कटवाये भी जाते हैं, लेकिन यह बढ़ते रहते हैं।

कटजा: शापित गुड़िया

कटजा एक शापित डॉल है। इस डॉल का कटजा नाम साल 1730 में रुस में पड़ा था। कहा जाता है कि एक औरत गर्भवती थी और उसके परिवार वाले चाहते थे कि लड़का हो। लेकिन लड़की पैदा हुई, पर उन्होंने लड़की को जिंदा जला दिया। ऐसा होने के बाद लड़की की मां ने उसकी राख से एक डॉल बनाई और उसमें सिरेमिक, पोलसिलेन मिलाया।

उसके बाद, सभी पीढ़ियों ने इस डॉल की रक्षा की, क्योंकि उनका मानना था कि ये शापित डॉल है। इस डॉल को ईबे पर बेचने के लिए भी तैयार किया गया, लेकिन ईबे से इसे जल्द ही बंद कर दिया गया।

प्यूपा: असली बालों वाली गुड़िया

प्यूपा नाम की इस डॉल के बाल असली हैं। ऐसा कहा जाता है कि प्यूपा की मालकिन को प्यूपा तब मिली थी, जब वो एक बच्ची थीं। साल 1920 से लेकर साल 2005 तक प्यूपा उनके साथ ही रही। प्यूपा की मालकिन की मौत के बाद उसके घर वालों ने इस डॉल में बड़े ही अजीबोगरीब चीजों को नोटिस किया।

घर के शोकेस में राखी इस डॉल  के पास अगर कोई जाता, तो वहां से ग्लासों के खटखटाने की आवाजें सुनाई देती थी। ऐसा लगता कि प्यूपा अपने हाथों और पैरों से ग्लास को तोड़ने की कोशिश कर रही हो, ऐसा लगता कि वो वहां से बाहर निकलना चाहती थी।

मर्सी: जब रेडियो अपने आप बजने लगा

मर्सी डॉल की मालकिन शेर्री एक पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर है, उसने इस डॉल को एक ईबे सेलर के जरिए खरीदा था। जब से उसने इस डॉल को खरीदा था, तभी से उसे अपने घर में नेगेटिव एनर्जी महसूस होने लगी। शेर्री बताती है एक दिन अचानक कमरे में रखा रेडियो अपने-आप बजने लगा। एक दिन तो शेर्री और उसके पति ने इस डॉल को अपने शेल्फ में पाया।

क्रिस्टीना: फोटो में अपने आप जगह बदलने वाली गुड़िया

क्रिस्टीना के मालिक ने इसे ईबे पर खरीदा था। इस डॉल की आंखों में पैरानॉर्मल एक्टिविटी देखी गई है। इस डॉल के मालिक बताते हैं कि जब बहुत ज्यादा फोटो क्लिक की जाती है, तो फोटो की श्रृंखला खुद ही बदल जाती है। इतना ही नहीं इस डॉल की स्थिति भी फोटो में बदल जाती है। इसके बालों की सभी गांठें निकाल दी जाती थी, लेकिन फिर भी अगले दिन इसके बाल खुद ही उलझ जाते थे।

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