कुछ मज़ेदार रोचक तथ्य

कुछ मज़ेदार रोचक तथ्य

  • यह तो सभी जानते हैं कि ताश के पत्तों में 4 राजा होते हैं, लेकिन एक बात जो कम ही लोगों को पता होती है वो यह है कि इनमें से तीन राजाओं के तो मूँछें होती हैं लेकिन एक की नहीं होती, और वो राजा होता है “किंग ऑफ़ हार्ट्स” l ब्रिटिश न्यूज़ पेपर ” द गार्डियन ” के अनुसार शुरू में इस राजा के भी मूँछें होती थीं, लेकिन एक बार जब कार्ड्स को रिडिजाइन किया जा रहा था तब डिज़ाइनर उसकी मूँछें बनाना भूल गया और तब से किंग ऑफ़ हार्ट्स बिना मूंछों वाला राजा हो गया l
  • फोटो खींचते समय “say cheese” कहने का प्रचलन है ताकि हमारी मुस्कुराती हुई फोटो आ सके लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि कुछ सौ साल पहले विक्टोरियन काल में लोग फोटो खींचते समय “Say Prunes” कहते थे, ताकि फोटो में उनके चेहरे पर गंभीरता दिखे l दरअसल, उस समय अधिक हँसना गरीबों और शराब पीने वालों से जोड़ कर देखा जाता था, शायद यही कारण है कि जब हम पुराने समय के राजा-महाराजाओं की पोट्रेट देखते हैं तो हमें कहीं भी  “स्माइलिंग फेस ” देखने को नहीं मिलता है।
  • मॉडर्न फिजिक्स की मदर कही जाने वाली महान वैज्ञानिक “मैडम क्यूरी ” का नाम तो आपने जरूर सुना होगा। उन्हें उनके “रेडियो एक्टिव” पदार्थों पर किये गए शोध और पॉलोनियम तथा रेडियम की खोज के लिए जाना जाता है, लेकिन शायद आप यह नहीं जानते कि रेडियो एक्टिव एलिमेंट्स में उनकी रूचि ही उनके मरने का कारण बनी l इन्ही रेडियो एलिमेंट्स से एक्सपोज़र की वजह से उन्हें अप्लास्टिक एनीमिया नामक बीमारी हो गयी जिसने उनकी जान ले ली l
  • प्याज़ काटते वक़्त आँखों से पानी आना आम बात है लेकिन क्या आप जानते है कि यदि  प्याज़ काटते समय च्विंगम चबाई जाए तो आंसू नहीं निकलते।
  • आई फोन का नाम आते ही दिमाग में एप्पल कंपनी , के शानदार प्रोडक्ट की इमेज बन जाती है, परन्तु  आपको जानकार आश्चर्य होगा कि पहली मोबाइल डिवाइस जिसे आई फोन नाम दिया गया था वो एप्पल ने नहीं बल्कि सिस्को कंपनी ने बनायीं थी।
  • कई बार पेरेंट्स से पैसे मांगने पर वे कहते हैं… यहाँ पैसों का कोई पेड़ नहीं लगा या पैसों कि कोई बारिश नहीं हो रही जो तुम्हे हर समय पैसे देते रहें …लेकिन ब्रहमांड में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहाँ पैसे तो छोड़िए हीरों यानी डायमंड्स की बारिश होती है… शनि ग्रह और बृहस्पति ऐसे ही दो ग्रह हैं जहाँ के वातावरण में बड़ी मात्रा में कार्बन मौजूद है और मौसम में बदलाव की वजह से कार्बन पर बिजली गिरती है तो वह बिल्कुल हार्ड हो कर ग्रेफाइट बन जाता है और नीचे गिरने लगता है…जहाँ एटमोस्फियरिक प्रेशर उसे तब तक हार्ड बनाता जाता है जब तक कि वह डायमंड ना बन जाए…और इस तरह वहां हीरों की बारिश होने लगती है।
  • जहाँ हिंदुस्तान में इंसानों की सुविधा के लिए भी फ्लाई ओवर्स या ब्रिज का अभाव है वहीँ नीदरलैंड के “The Hague ” शहर में सिर्फ इसलिए एक ब्रिज का निर्माण किया गया ताकि गिलहरियाँ बिना किसी खतरे के हाइवे पार कर सकें। इस ब्रिज को बनाने में लगभग 1 करोड़ 8 लाख रुपये लगे।
  • जब भी समुद्री डाकुओं की बात होती है तो एक आँख पर पट्टी बांधे किसी आदमी की इमेज दिमाग में बन जाती है लेकिन आपको जान कर आश्चर्य होगा कि दुनिया की सबसे सफल समुद्री डाकू कोई आदमी नहीं बल्कि एक चायनीज़ औरत थी… उसका नाम “चिंग शी” था और वह चेंग I  नाम के एक खतरनाक डाकू की विधवा थी। माना जाता है कि एक समय 1800 समुद्री डाकू जहाजों पर उसकी हुकूमत चलती थी और उसके लिए अस्सी हज़ार आदमी काम करते थे।
  • अगर आपसे पुछा जाए कि दुनिया की सबसे ज़्यादा प्रिंट होने वाली बुक कौन सी है तो शायद आप बाइबिल, क़ुरान, गीता या फिर हैरी पॉटर के बारे में सोचें, लेकिन आपको जान कर आश्चर्य होगा कि फर्नीचर और होम असेस्सरीज़ बेचने वाले IKEA स्टोर का कैटलॉग दुनिया में सबसे अधिक प्रिंट होने वाली बुक का रिकॉर्ड रखता है। लगभग 2 दर्जन भाषाओं में इसकी हर साल 20 करोड़ प्रतियाँ छपती हैं
  • पासवर्ड एक यूनिक कोड होता है जिसे हम चीजों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं..ऐसे में हर किसी का पासवर्ड अलग-अलग होना चाहिए ,लेकिन एक रिसर्च में इस बात का दावा किया गया है कि दुनिया में करीब दो करोड़ लोगों का एक ही पासवर्ड है और वह है-‘123456’। 123456 के बाद दूसरे नंबर पर ‘123456789’ का इस्तेमाल किया गया।
  • ये तो हम सब जानते हैं कि रक्त दान से किसी का जीवन बचाया जा सकता है , लेकिन अगर मैं पूछूँ कि कोई अकेला व्यक्ति अपने जीवन काल में रक्त दान करके कितने लोगों की जान बचा सकता है तो आप 10, 15 या 20 लोगों के बारे में सोचेंगे, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि ऑस्ट्रेलिया के द मैन विद द गोल्डन आर्म… 81 वर्षीय “जेम्स हैरिसन” ने 1954 से लेकर 2018 तक 1137 बार ब्लड डोनेट किया और उससे 24 लाख बच्चों की जान बचायी गयी।  दरअसल, उनके खून में एक बहुत रेयर प्रकार का ब्लड प्लाज्मा है जो गर्भावस्था के दौरान बच्चों को होने वाली (rhesus) रिसस डिजीज के इलाज में उपयोगी है, और यही कारण है कि वे अकेले ही इतने लोगों की जान बचा पाए।

मार्क जुकरबर्ग से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!!

इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वो लोग जो दुनिया की बनाई गई राह पर चलते हैं और दूसरे वे जिनका इस दुनिया में आना ही विशेष होता है। वे अपने कार्यो से सफलता की नींव तैयार करते हैं।

सफलताओं की  इसी कड़ी में फेसबुक के फाउंडर और सी.ई ओ. मार्क जुकरबर्ग का भी नाम आता है जो दुनिया के सबसे युवा अरबपति हैं। मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक रूपी मंच से दुनिया को  एक साथ लाने का प्रयास किया है।

आइये जानते हैं मार्क जुकरबर्ग से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में

  • दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का पूरा नाम मार्क इलयट जुकरबर्ग है।
  • मार्क जुकरबर्ग का जन्म 14 मई 1984 को वाइट प्लेन्स ,न्यू यॉर्क USA में हुआ था। उनके पिता एडवर्ड जुकरबर्ग एक दंतचिकित्सक है और उनकी माँ करेंन जुकरबर्ग एक मनोचिकित्सक है।
  • जुकरबर्ग ने हाई स्कूल में रहते हुए पास के मर्सी कॉलेज से कंप्यूटर स्नातक की पढ़ाई की।
  • मार्क जुकरबर्ग विश्व के 14 वें अमीर इंसान हैं। वे दुनिया के सबसे कम उम्र में बनने वाले अरबपति हैं। फेसबुक की आपार सफलता ने इन्हें यह पहचान दिलाई है।
  • यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही मार्क ने एक वेबसाइट शुरु की थी जिसका नाम “फेसमैश” था। इस साइट ने कॉलेज में तो कोई खास कमाल नहीं दिखाया लेकिन जब मार्क ने इसी साइट को “फेसबुक. कॉम” के नाम से पब्लिक में लांच किया तो इसने धमाल मचा दिया।
  • मार्क जुकरबर्ग बचपन से कंप्यूटर की पढाई में इतने तेज थे कि अपने स्कूल के कंप्यूटर टीचर को भी फेल कर देते थे और अक्सर टीचर इनके सवालों का जवाब देने में खुद को असमर्थ पाते थे।
  • 35 वर्षीय मार्क जुकरबर्ग कलर ब्लाईंडनैस की बीमारी से पीड़ित है तभी तो इन्होंने अपनी साइट के लिए गहरे नीले रंग का प्रयोग किया है, जिससे इन्हें देखने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो।
  • स्कूल के दिनों में मार्क अपने दोस्तों के लिए तरह -तरह के नए विडियो गेम्स बनाते रहते थे जिसके कारण मार्क अपने दोस्तों में प्रोग्रामिंग एक्सपर्ट के नाम से मशहूर थे।
  • जब मार्क ने हावर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था तो पढाई के दौरान उन्होंने कोर्स मैच नाम का ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया जो स्टूडेंट्स को अपनी इच्छा और रूचि के अनुसार इस सॉफ्टवेयर के जरिये सही सब्जेक्ट और कोर्स चुनने में मदद करता था।
  • क्या आप जानते है मार्क जुकरबर्ग दिमाग के इतने तेज हैं इन्होने उस समय की सबसे पॉपुलर सिक्योरिटी में सबसे स्ट्रांग कॉलेज की वेबसाइट को हैक कर लिया था।
  • महज 19 साल की उम्र में पहली बार मार्क जुकरबर्ग ने द फेसबुक वेबसाइट बनाया l शुरुआत में यह वेबसाइट हावर्ड यूनिवर्सिटी में बहुत प्रसिद्ध हुई फिर बाद में मार्क ने इसका प्रचार USA के कई कॉलेज में शुरू किया जोकि बहुत कम समय में ही तेजी से लोगो के बीच पॉपुलर होने लगी थी और फिर यही वेबसाइट फेसबुक के नाम से पूरी दुनिया में फेमस हो गयी।
  • जुकरबर्ग ने सबसे पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अपने डॉरमेट्री से फेसबुक लॉन्च किया।
  • फेसबुक इंक कारपोरेशन कंपनी कैलिफोर्निया में है जिसके जरिये फेसबुक को ऑपरेट किया जाता है।
  • मार्क जुकरबर्ग के फेसबुक की पॉपुलैरिटी से प्रभावित होकर वर्ष 2010 में “द सोशल नेटवर्क” नामक एक फिल्म भी बनी जिसमें मार्क जुकरबर्ग के सफलताओ को दिखाया गया है।
  • मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक की शुरुआत इसलिए की थी ताकि फेसबुक के माध्यम से दुनिया को हम अपने बारे में बता सकें ।
  • मार्क जुकरबर्ग का मानना है कि आज के दौर में एक मंच पर एक अरब से अधिक लोगो को आपस में जोड़ना वाकई सुखद और रोमांचित करने वाला अनुभव है जिसे शब्दों में बया नही किया जा सकता है।

ये हैं भारत की टॉप 10 यूनिवर्सिटीज, जहां पर पढ़ना हर विद्यार्थी का है सपना

भारत प्राचीन काल से ही शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है l नालंदा, तक्षशिला एवं विक्रमशिला के खंडहर विश्वविद्यालय इसके प्रमुख उदाहरण है।

समय के साथ-साथ भारत में शिक्षा और भी बेहतर होती जा रही है। अब भारत का नाम भी दुनिया के उन खास देशों में आता है, जो पढ़ाई-लिखाई के मामले में सबसे आगे हैं। धीरे-धीरे लोगों को शिक्षा का महत्व पता चलता जा रहा है और लोग शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

एक समय ऐसा था जब अच्छी यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के लिए लोगों को विदेश जाना पढ़ता था, लेकिन अब इसकी जरूरत भी समय के साथ-साथ खत्म होती जा रही है क्योंकि भारत में भी कुछ यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जो शिक्षा के मामले में दुनिया भर में जानी जाती हैं।

आइये जानते हैं भारत की टॉप 10 यूनिवर्सिटीज के बारे में:-

कलकत्ता यूनिवर्सिटी

भारत की टॉप यूनिवर्सिटीज में ‘कलकत्ता यूनिवर्सिटी ’ का नाम सबसे पहले आता है। कलकत्ता यूनिवर्सिटी की स्थापना 1857 में की गयी थी और यह दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद दूसरी बहुअयामी यूनिवर्सिटी है।

कलकत्ता यूनिवर्सिटी की ब्रिक्स लिस्ट में 52वां रैंक है और एशिया में इसका रैंक 149वां है। कलकत्ता यूनिवर्सिटी का दावा है कि  इसके पास भारत का सबसे बड़ा नेनो साइंस और नेनो टेक्नोलॉजी सेंटर है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी

 

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी देश की जानी-मानी यूनीवर्सिटीज में से एक है। आप को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) के द्वारा किए गए सर्वे में इसे भारत का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। इस यूनिवर्सिटी में करीब 8,500 से ज़्यादा विधार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

वाराणसी में स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय या बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू.) की स्थापना मदन मोहन मालवीय द्वारा सन् 1916 में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर की गई थी। यह एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। यह एशिया का सबसे बड़ा रेसिडेंशियल विश्वविद्यालय है जिसमे 30 हजार से अधिक छात्र पढ़ते हैं l

यहाँ लगभग 34 देशों से छात्र पढ़ाई करने के लिए आते हैं। नेशनल इंस्टिटूशन रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) ने इस यूनिवर्सिटी को सर्वश्रेष्ठ 5 यूनिवर्सिटीज में शामिल किया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना सन 1922 में की गई थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी को भारत की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटी माना जाता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी को ब्रिक्स लिस्ट में 46वां स्थान मिला है और एशिया में इसकी रैंक 91वीं है।

यहां 3 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स तरह-तरह की शिक्षा प्राप्त करते हैं। यह यूनिवर्सिटी केमिस्ट्री, जियोलॉजी, हिस्ट्री, सोशियोलॉजी और जूलॉजी में डिग्री प्रदान करती है।

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस

बैंग्लोर में स्थित भारत की सबसे अग्रणी यूनिवर्सिटी ‘इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस’ है जिसका ब्रिक्स लिस्ट में पांचवां स्थान है और यह एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 34 वें नंबर पर है।

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस, भारत की टॉप यूनिवर्सिटीज में से एक है जो अपनी टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रिसर्च के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस लगभग 400 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें लगभग 40 विभाग हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी

जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली में स्थित भारत का एक प्रमुख सार्वजनिक विश्‍वविद्यालय है। इसे केन्द्रीय विश्‍वविद्यालय का स्तर हासिल है। यह नई दिल्ली के दक्षिणी क्षेत्र के ओखला में यमुना के किनारे स्थित हैं|

इसकी स्थापना 1920 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। यह 1988 में भारतीय संसद के एक अधिनियम द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया गया।

हैदराबाद यूनिवर्सिटी

 

हैदराबाद विश्वविद्यालय भारत का एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। इसे “सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद” या “एचयू” के नाम से भी जाना जाता है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना प्रो. गुलबक्ष सिंह द्वारा 1974 को की गई थी।

यह विश्वविद्यालय करीब 2324 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसके अंतर्गत 46 विभाग एवं केंद्र आते हैं।

जादवपुर यूनिवर्सिटी

कोलकाता में स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना 1955 में की गई थी। इसके दो कैम्पस हैं – मेन कैम्पस जादवपुर में और नया कैम्पस साल्ट लेक पर स्थिति है। इसके अलावा इसका तीसरा कैम्पस मेन कैम्पस के सामने ही जल्दी खोला जा रहा है

मणिपाल अकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, मणिपाल

मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी भारत का एक समविश्वविद्यालय है। यह ‘मणिपाल विश्वविद्यालय’ के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। यह कर्नाटक के मणिपाल में स्थित है। इसमें 58 देशों के लगभग 24000 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं।

इस विश्वविद्यालय की शाखाएँ बंगलुरु, मंगलोर सिक्किम, जयपुर, दुबई, मलेशिया तथा एण्टीगुआ में भी हैं। यह कॉमनवेल्थ विश्वविद्यालय संघ का एक सदस्य है।

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ, पुणे के उत्तरपश्चिम में स्थित है। यह भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है। इसकी स्थापना सावित्रीबाई फुले ने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर 10 फरवरी, 1949 को की थी। 400 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय में 46 शैक्षणिक विभाग हैं।

जानिए प्याज काटते समय आंसू क्यों निकलते हैं, ऐसा क्या करें जिससे आंसू न आएं

प्याज ऐसी चीज है जिसके बिना सब्जी बनाना बेहद मुश्किल होता है। प्याज भले ही महंगा हो या हमें खूब रुलाए, लेकिन बिना इसके हम सब्जी नहीं बनाते, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर प्याज काटते समय हमें आंसू क्यों आते हैं ।

प्याज काटते समय आंसू क्यों आते हैं?

दरअसल प्याज में एक साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड नामक रसायन पाया जाता है जो कि प्याज काटते समय हमारी आँखों की लेक्राइमल ग्लैंड को उत्तेजित करता है और इस वजह से आँखों में आंसू आ जाते हैं।

पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि ऐसा प्याज में मौजूद एलीनेस नामक एंजाइम के कारण होता है लेकिन शोध में पाया गया कि  इसमें “लेक्राइमेट्री-फैक्टर सिंथेस नामक एंजाइम पाया जाता है और इसे काटते समय इसमें से ये लेक्राइमेटरी-फैक्टर सिंथेस एंजाइम निकलता है।

ये एंजाइम प्याज के अमीनो एसिड को सल्फेनिक एसिड में बदल देता है और साथ ही सल्फेनिक एसिड, साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड में बदल जाता है।

जब ये साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड हवा के माध्यम से हमारी आँखों के संपर्क में आता है तो इसके कारण हमारी आँखों की लेक्राइमल ग्लैंड में परेशानी होती है और इससे आँखों में जलन और आंसू आने लगते हैं।

क्या करें जिससे आँखों से आंसू न निकले

  • प्याज को ठंडा करें

प्याज को काटने से पहले उसे फ्रीजर में 10-15 मिनट तक ठंडा होने के लिए रख दें।

  • गरम पानी या भाप के पास काटें

गरम केतली या गरम पैन के पानी से आपको मदद मिल सकती है | भाप प्याज से बाहर निकल रहे उसके एसिड को निष्क्रिय कर देती है |

  • पानी में डाल कर इसे काटें

प्याज को बहते पानी या पानी से भरे कटोरे में काटने से भी आंसू नहीं आते।

  • काटने से पहले पानी में भिगोएं

प्याज को पानी में भिगोएं इससे प्याज के एंजाइम निष्क्रिय हो जाएंगे हालांकि ऐसा करने से उसके स्वाद में भी थोडा अंतर आ जाता है।

  • विनेगर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं

आप चाहें तो प्याज को छिलकर कुछ देर के लिए विनेगर और पानी के घोल में भी डुबोकर रख सकते हैं।  ऐसा करने से भी आँखों में आंसू नहीं आएंगे।

बेयर ग्रिल्स के बारे में कुछ रोचक तथ्य

बेयर ग्रिल्स के बारे में कुछ रोचक तथ्य

बेयर ग्रिल्स का पूरा नाम एडवर्ड माइकल ग्रिल्स है, और यह नाम बेयर की बड़ी बहन के द्वारा दिया गया था।  बेयर का जन्म 7 जून 1974 को हुआ था। ग्रिल्स का पालन-पोषण चार साल की उम्र तक डोनाघडी, उत्तरी आयरलैंड में हुआ। बेयर ग्रिल्स ब्रिटिश साहसकर्मी, लेखक और टेलीविज़न प्रस्तुतकर्ता हैं।

वे अपनी टेलीविज़न श्रृंखला बॉर्न सरवाइवर के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं, जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में “मैन वर्सस वाइल्ड” के रूप में जाना जाता है।

  • बेयर ग्रिल्स UK में 2006 से 2011 तक चले टी वी सीरियल “मैन वर्सस वाइल्ड” के कारण प्रसिद्ध हुए। “मैन वर्सस वाइल्ड” का असली नाम “बॉर्न सर्वाइवर बेयर ग्रिल्स” था।
  • बेयर ग्रिल्स ईसाई धर्म को मानते हैं और उनका भगवान में बहुत विश्वास है।
  • स्कूल पूरा होने के बाद बेयर ग्रिल्स इंडियन आर्मी में शामिल होना चाहते थे।
  • बेयर ने ब्रिटिश स्पेशल एयर सर्विस (21 SAS) में तीन वर्ष तक सेवा की है।
  • 1998 में, जब वे केवल 23 साल की उम्र के थे तब उनकी रीढ की हड्डी 3 जगह से टूटने के बावजूद भी उन्होंने सबसे कम उम्र में माउंट एवेरेस्ट की चोटी पर चढ़ने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
  • माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ने से एक साल पहले, ऊंचाई से कूदते समय उनके पैराशूट में छेद हो गया और वो पीठ के बल गिर पड़े। जिसकी वजह से उनकी रीढ की हड्डी तीन जगह से टूट गई थी। बेयर ग्रिल्स ऐसी बहुत-सी जगहों पर गए हैं जहाँ उनसे पहले कोई इंसान नही गया।
  • बेयर ग्रिल्स माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले ब्रिटेन के सबसे युवा लोगों में से एक हैं। जुलाई 2009 में ग्रिल्स, 35 साल की उम्र में चीफ़ स्काउट के पद पर नियुक्त होने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे।
  • बेयर ग्रिल्स ने भारत में हिमालय में रहकर इंडियन आर्मी से ट्रेनिंग भी ली है।
  • बेयर ग्रिल्स अपने घर पर गिटार और पियानो बजाना पसंद करते हैं। बेयर ग्रिल्स ने 2002 में लंदन यूनिवर्सिटीज हिस्पैनिक स्टडीज  में डिग्री प्राप्त की थी।
  • बेयर ग्रिल्स ने 7600m की ऊंचाई पर हॉट एयर बैलून के नीचे डिनर करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया है।
  • बेयर ग्रिल्स अपने परिवार से इतना प्यार करते है कि शूटिंग पर जाते समय वे अपने परिवार की फोटो जूतों में डालकर ले जाते हैं। बेयर ग्रिल्स के तीन बच्चे हैं।
  • बेयर ग्रिल्स शो करने के बाद घर जाते ही पेट के कीड़े मारने की दवाई खाते हैं।
  • बेयर ग्रिल्स ने आज तक सबसे गंदी चीज़ बकरे के कच्चे अंडकोष(testicles) खाए हैं।

योग (Yoga) से होने वाले ये लाभ आप नहीं जानते होंगे!!

हजारों सालों से योग (Yoga) लोगों द्वारा प्रयोग में लाया जा रहा है. योग करने के क्या लाभ हैं, यह आप तभी जान सकते हैं, जब आप योग करेंगें. योग आपकी ज़िंदगी में शारीरिक और आध्यात्मिक अनुशासन लेकर आता है. आज हम आपको योग से होने वाले कुछ लाभों के बारे में बताने जा रहे हैं.

भावनाओं पर नियंत्रण

योग करने से आप इस बात को अच्छी तरह से समझेंगे कि ज़िंदगी में आपकी किसी से भी प्रतियोगिता नहीं है और आप स्वयं अपने आप के लिए, अपने आप को बेहतर बनायेंगे. योग करने से आपके अंदर खुद पर नियंत्रण रखने की क्षमता आ जाएगी.

आपके अंदर ज़्यादा विश्वास आने लगेगा

योग करने से आप अपने आप से और अपने शरीर से अच्छी तरह से जुड़ेंगे. आप अपनी ज़िंदगी के हर पल को खुल कर जीने लगेंगे. जब विन्यास (Vinyasa) योग करेंगे, तो आप खुद महसूस करेंगे कि आप अपने शरीर से क्या- क्या कर सकने की क्षमता रखते हैं. योग से आप अपनी मांसपेशियों को मज़बूत कर लेंगे.

आप अपने खाने के भोजन के प्रति ओर भी जागरूक हो जाओगे

योग करने से आप अपने खाने के प्रति ओर भी ज़्यादा जागरूक हो जायेंगे, क्योंकि योग सीधा आपके दिमाग पर अच्छा प्रभाव डालता है, जिससे आपको ज़्यादा मीठा भोजन और तला हुआ भोजन करने का मन नहीं करेगा. आपकी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. आपको योग करने से इतना अच्छा महसूस होगा कि आपको हर काम आसान लगने लगेगा. इससे अलग आपके शरीर की पाचनक्रिया भी पहले से बेहतर होगी .

योग से आपको अच्छी नींद आयेगी

कैथरीन वुडयार्ड (Catherine Woodyard), जो एक मशहूर शोधकर्ता है. उनका मानना है कि योग करने से आपको अच्छी नींद आती है. जब आपको अच्छी नींद आती है, तो आपकी उत्पादकता भी बढ़ जाती है, आप में तनाव भी कम हो जाता है.

आप में अपने कार्यों के प्रति ओर भी जागरूकता आ जाएगी

आपको अपने शरीर के बारे में अच्छी तरह से पता लगेगा कि आपका शरीर अलग-अलग स्थितियों में कैसे प्रतिकिर्या देता है. पूरे दिन आपकी सोच सकरात्मक रहेगी, जिससे आप हर कार्य को अच्छे ढंग से करेंगे.

सांस लेने की क्रिया को समझेंगे

योग करने से आपको सांस लेने की अलग- अलग तकनीकों के बारे में पता चलेगा. जिससे आप मनोवैज्ञानिक रूप से और शरीरक रूप से मज़बूत बनेंगे और पूरे दिन में आने वाले तनाव से मुक्त हो जायेंगे.

योग से आप में दर्द को सहने की क्षमता आयेगी

हार्वर्ड हेल्थ वेबसाइट का मानना है कि जो लोग पिछले कई सालों से दर्द से पीड़ित थे, उनका दर्द योग करने से हफ्ते भर में ही कम हो गया. अगर कोई व्यक्ति गर्दन के दर्द से और पीठ के दर्द से ग्रस्त है, तो उनको योग से बहुत राहत मिलेगी.

इन बातों से पता चलता है कि योग के बहुत सारे लाभ है, जिनके बारे में हम अभी तक अनजान हैं.

यह भी पढ़ें:-

इन पाँच आसान योगसनों से रखिये खुद को जवान और खूबसूरत

योग खूबसूरत बनने तथा फिट रहने का एक शानदार उपाय है। यहां दी गई योग की कसरतें चेहरे की खूबसूरती के लिए हैं जिनमें मुहांसों को दूर रखने से ले कर झुर्रियों को दूर करने की क्षमता भी है।

कपिंग

योग की यह कसरत काले घेरों से छुटकारा पाने का एक आसान उपाय है। आप यह कसरत किसी भी वक्त कहीं भी कर सकतीं हैं। अपने हाथों को एक साथ रगड़े, इससे आपकी हथेलियों में ताप पैदा होना चाहिए, फिर इन हथेलियों को अपनी आंखों पर रखें । इसी मुद्रा में रहें और सांस लें। यह कसरत एक बार 30 सैकेंड तक करें।

कपाल रंध्रा धौती

अपने अंगूठों को अपनी कनपटियों पर रखें। दो या तीन उंगलियों से अपनी आंखों के इर्द-गिर्द चक्र बनाएं जिसकी शुरूआत भौंहों के नीचे से हो। सिर्फ एक ही दिशा में चक्र बनाएं। अब अपने माथे की ओर आएं और यहां नर्म परंतु तेज गति से ब्रश स्ट्रोक बनाएं। ऐसा करते हुए ध्यान केंद्रित रखें और गहरी सांसें लें।

लटकती ठोड़ी तथा गालों के लिए

सांस अंदर की ओर खींचें और अपना सिर दाईं ओर को घुमाएं। सांस बाहर की ओर छोड़ें और अपनी ठोड़ी ऊपर की ओर उठाएं। अपने होंठों को सिकोड़ कर गर्दन की त्वचा को खींचें। ठोड़ी को वापस मध्य में लाएं। अब दूसरी तरफ भी ऐसा ही करें।

कपाल भाती

योग से शानदार चमक पाने के लिए यह आसन बहुत बढ़िया है। ध्यान लगाने की आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं। सिर तथा रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। हाथ अपने घुटनों पर ‘चिन’ या ‘ज्ञान’ की मुद्रा में रखें। दोनों नासिकाओं से सांस बाहर की ओर छोड़े जिससे पेट की मांसपेशियों में जबरदस्त सिकुड़न पैदा हो। सांस अंदर की ओर खींचने की प्रक्रिया पेट की मांसपेशियों के आराम की अवस्था में आने पर अपने आप होनी चाहिए। । लयात्मक तरीके से इसे करती रहें।

संसाग आसन

रक्त प्रवाह प्रणाली के लिए यह आसन बहुत शानदार है। रक्त को सिर की ओर लाने से चेहरे की त्वचा का पुनरुद्धार होता है। साथ ही यह आसन हार्मोन्स को स्थिर करने में भी सहायक होता है, जैसे थाइरायड ग्लैंड जो मुहांसों को रोकने में सहायक होता है। वज्र आसन की मुद्रा में बैठें । अब आगे की ओर झुकें तथा सिर का ऊपरी हिस्सा फर्श पर रखें। जितना संभव हो सके सिर को घुटनों के नजदीक लाएं। हाथों से टखनों को पकड़े। इसी मुद्रा में रह कर सांस लें।

Read More:

सिरदर्द से छुटकारा पाने के कुछ अचूक उपाय

ख़ास है ये सूर्य ग्रहण, 500 सालों में नहीं बना ऐसा संयोग

इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून रविवार को लगने वाला है यह इस साल का पहला सूर्य ग्रहण है । ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। इस साल सूर्य ग्रहण की शुरुआत सुबह 10:20 बजे के करीब हो जाएगी और इसकी समाप्ति दोपहर 01:49 बजे तक होगी।

यह ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला है इसलिए इसका सूतककाल भी बहुत महत्वपूर्ण होगा। सूतक काल की शुरुआत 20 जून की रात 10:17 बजे से हो जाएगी।

इस सूर्य ग्रहण को काफी प्रभावशाली माना जा रहा है क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के समय ग्रह और नक्षत्रों का ऐसा संयोग बन रहा है जो पिछले 500 सालों में नहीं बना।

आइये जानते हैं क्यों खास है ये सूर्य ग्रहण:-

क्या है वलयाकार सूर्य ग्रहण

वलयाकार सूर्य ग्रहण न ही आंशिक सूर्य ग्रहण होगा और न ही पूर्ण सूर्यग्रहण, क्योंकि चन्द्रमा की छाया सूर्य का करीब 99% भाग ही ढकेगी। आकाशमण्डल में चन्द्रमा की छाया सूर्य के केन्द्र के साथ मिलकर सूर्य के चारों ओर एक वलयाकार आकृति बनाएगी।

जिससे सूर्य आसमान में एक आग की अंगूठी की तरह नजर आएगा। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है और सूर्य के मध्य भाग को पूरी तरह से ढक लेता है तो इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप सूर्य का घेरा एक चमकती अंगूठी की तरह दिखाई देता है।

सूतककाल

किसी भी पूर्ण ग्रहण के शुरू होने से 12 घंटे पहले का समय सूतककाल कहलाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान मंदिरों में पूजा पाठ या कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। सूतककाल समाप्त होने के बाद ही मंदिर खुलते हैं और लोग पूजा पाठ शुरू करते हैं।

इन स्थानों पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

भारत समेत इस ग्रहण का नज़ारा नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूऐई, एथोपिया तथा कोंगों में दिखेगा। वहीं भारत में देहरादून, सिरसा अथवा टिहरी जैसे कुछ प्रसिद्ध शहरों में वलयाकार सूर्य ग्रहण का खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलेगा। देश के अन्य हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

सूर्य ग्रहण के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

  • बच्चों से लेकर बड़ों तक कोई भी इस ग्रहण को नंगी आँखों से न देखें।  ऐसा करने से आपकी आँखों पर बुरा असर हो सकता है।
  • ग्रहण के वक्त आकाश की ओर देखने से पहले सोलर फिल्टर चश्मा लगाएं और नज़र नीचे करने के बाद या ग्रहण समाप्त होने के बाद ही इसे हटाएं।
  • ग्रहण के वक्त कार एवं कोई भी अन्य वाहन न चलाएं लेकिन यदि आप घर से बाहर हो तो ग्रहण के समय अपने वाहन की हेडलाइट जलाकर और अन्य वाहनों से कुछ दूरी बनाकर ही वाहन चलाए। ग्रहण के समय ड्राइविंग में विशेष सावधानी बरतनी होगी।

“भादरिया लाइब्रेरी” से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

“भादरिया लाइब्रेरी” राजस्थान में स्थित है l राजस्थान को कई कारणों से जाना जाता है l राजस्थान ने इस देश को कई शूरवीर दिए हैं इसके साथ ही यहां के किले, राज महल और खासकर उम्मेद भवन, हवा महल, चित्तौड़ का किला बहुत प्रसिद्ध हैं। यहां पर उपस्थित 170000 वर्ग किलोमीटर का थार रेगिस्तान दुनिया का 17वां सबसे बड़ा रेगिस्तान है l

राजस्थान में स्थित “भादरिया लाइब्रेरी” अपने आप में कई ऐतिहासिक धरोहरों के साथ साथ एशिया के सबसे बड़े पुस्तकालयों में से एक है।

आइये जानते हैं “भादरिया लाइब्रेरी” के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • यह लाइब्रेरी पोकरण तहसील के भादरिया गांव में बनी हुई है जो कि राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित है।
  • इसकी सबसे रोचक बात यह है कि यह लाइब्रेरी ज़मीन की सतह से 16 फुट नीचे अंडर ग्राउंड में बनी हुई है और इसमें एक साथ 4000 लोग बैठ कर पुस्तकों को पढ़ सकते हैं।
  • वर्तमान में यहां पर कुल 900000 से भी अधिक पुस्तकों का संग्रह है।
  • ज़मीन की सतह से नीचे होने के कारण यह लाइब्रेरी थार की 50 डिग्री सेंटीग्रेड के करीब तापमान की भयंकर गर्मी में भी शीतल रहती है।
  • यह लाइब्रेरी हरवंश सिंह निर्मल के द्वारा बनाई गई थी जिनको भादरिया महाराज के नाम से भी जाना जाता है उन्हें विभिन्न विषयों पर किताबें पढ़ने का बहुत शौक था और इसी शौक के चलते उन्होंने दुनिया के विभिन्न भागों से पुस्तकों को  इकट्ठा किया एवं उन्हें पढा़।
  • यहाँ पर हजारों किताबें ऐसी भी हैं जिन्हें लोगों ने हरवंश सिंह निर्मल को उपहार में भेंट की थी।
  • भादरिया गांव के निवासियों के अनुसार भादरिया महाराज कई वर्षों तक इसी लाइब्रेरी में रहे एवं वहां पर उपस्थित लगभग सभी पुस्तकों को उन्होंने पढ़ा।
  • इस लाइब्रेरी में विज्ञान एवं खगोल शास्त्र से लेकर इतिहास एवं लगभग हर विषय की पुस्तकें उपलब्ध है।
  • इस लाइब्रेरी में पुस्तकें व्यवस्थित रूप से संरक्षित रहें इसके लिए 562 कांच की अलमारियां बनी हुई हैं  जिनमें ये पुस्तकें रखी जाती हैं। इस भूमिगत लाइब्रेरी में साफ सफाई का बहुत ही खास ध्यान रखा जाता है यहाँ ढूंढने पर धूल का एक भी कण नजर नहीं आएगा।
  • इस पुस्तकालय के रखरखाव में हर साल लगभग 6 से 7 लाख रुपए का खर्च आता है।
  • हिंदुस्तान तथा विश्व के किसी भी कोने से कोई भी व्यक्ति यहां आकर इन  पुस्तकों को पढ़ सकता है।
  • वर्तमान में इस पुस्तकालय की देखरेख जगदंबा सेवा समिति के द्वारा की जाती है।
  • प्रतिवर्ष लगभग 60,000 पर्यटक एवं शोधकर्ता यहां इन पुस्तकों को पढ़ने के लिए आते हैं पुस्तकों को पढ़ने के शौकीन व्यक्तियों के लिए यह जगह किसी स्वप्न के साकार होने के जैसा है।

जानिए एलोवेरा से होने वाले फायदों के बारे में

यह तो हम सभी जानते हैं कि एलोवरेा त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। त्वचा की कई समस्याओं के लिए यह एक बहुत अच्छा और प्राकृतिक उपाय है। जहां एक ओर एलोवेरा त्वचा की कई समस्याओं का समाधान है वहीं यह त्वचा को पोषित करने का काम भी करता है। आइये जानते हैं एलोवेरा से होने वाले फायदों के बारे में :-

त्वचा के लिए

गर्मियों के मौसम में सूर्य की रौशनी से बचने के लिए आप एलोवेरा को अपना सकते हैं। एलोवेरा टैन हटाने और स्ट्रेच मार्क कम करने में भी मददगार होता है।

अगर आप आम तौर पर एलोवेरा के पत्तों के बीच का हिस्सा अपने स्किन पर लगाते हैं तो आपके लिए यह काफी लाभदायक होगा। ऐसा करने से आपके चेहरे पर होने वाले टैनिंग भी दूर होती है।

निखार के लिए

एलोवेरा त्वचा की ऊपरी सतह पर मौजूद गंदगी और डेड सेल्स को साफ करने का काम करता है, जिससे चेहरे पर निखार आता है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। यह एक बहुत अच्छा क्लींजर का काम करता है।

बालों के लिए

अगर आप बालों के लंबे न होने से परेशान है तो एक बार एलोवेरा का इस्तेमाल करके देखिए। इसके लिए आप आधा कप एलोवेरा लेकर उसमें मेथी के बीज, तुलसी पाउडर और 2 चम्मच कैस्टर ऑयल मिला लें।

इस पेस्ट को बालों पर लागकर रखें और कुछ घंटों के बाद शैंपू कर लें। कुछ ही दिनों में आपके बालों की ग्रोथ बढ़ने लगेगी। अगर आप बालों में डैन्ड्रफ की समस्या से परेशान हैं तो उसके लिए भी एलोवेरा जेल बहुत फायदेमंद है।

कील-मुंहासों  के लिए

एलोवेरा में एंटी-माइक्रोबियल गुण पाया जाता है। इसकी ये खूबी कील-मंहासों से राहत दिलाने में बहुत कारगर होती है। जब बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन होगा नहीं तो कील-मुंहासों की समस्या भी नियंत्रण में रहेगी।

वजन कम करने के लिए

एलोवेरा वजन कम करने के लिए में भी बहुत सहायक होता है। यदि आप वजन कम करना चाहते हैं तो  इसके लिए आप एलोवेरा जूस का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एलोवेरा जूस का इस्तेमाल आप सुबह और शाम दो बार कर सकते हैं और कुछ ही दिनों में आपको इसका असर देखने को मिल जाएगा।

दाग-धब्बों के लिए

अगर आपके चेहरे पर दाग-धब्बे  हैं तो एलोवेरो का नियमित इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे रेग्युलर इस्तेमाल से त्वचा के अनचाहे दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।

एलोवेरा के फायदे साइनस में

आम तौर पर सर्दियों में लोगों को साइनस की समस्या हो जाती है। कई बार तो लंबे समय तक दवाई का सेवन करने के बाद भी साइनस से राहत नहीं मिलती, लेकिन एलोवेरा साइनस में आपको राहत दिला सकता है।

त्वचा को नमी देने के लिए

एलोवेरा त्वचा को पोषण देने का काम करता है। ये एक बहुत अच्छा मॉइश्चराइजर है।  किसी भी स्किन टाइप के लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखें यदि आपको एलोवेरा से एलर्जी  होती हो तो इसका इस्तेमाल न करें।