ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक नस्ल के कुत्ते

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ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक नस्ल के कुत्ते

इंसान का सबसे वफादार साथी कुत्ता होता है जो अपने मालिक के लिए जान देने और जान लेने के लिए तैयार रहता हैं इसलिए आज भी लोग अपने घरों की रखवाली का काम कुत्तों को ही देते है लेकिन क्या आप जानतें है कि दुनिया में कुछ ऐसी नस्ल के कुत्ते भी हैं जो शेर से भी खतरनाक और भेडियें से ज़्यादा फुर्तिले होते हैं। हम आज आपको दुनिया भर के ऐसे खतरनाक डॉग ब्रीड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इतने खतरनाक हैं कि इनमें से कई कुत्तों को पालने पर बैन लग चुका है।

पिट बुल

पिट बुल प्रजाति के कुत्ते सबसे खतरनाक और आक्रामक नस्ल के होते हैं। इसका वजन 16 से 30 किलो के बीच होता है। दुनियाभर के कई देशों ने इन कुत्तों को रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, अमेरिका सहित कई अन्य देशों में पिट बुल को आज भी पाला जाता है, लेकिन इनके आक्रामकता को रोकने के लिए बेहतर ट्रेनिंग की जरूरत होती है। सन् 2015 में सिर्फ अमेरिका में ही पिट बुल के हमले से 28 लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है।

रोट व्हीलर

 

इस प्रजाति के कुत्ते सबसे ताकतवर ब्रीड में से गिने जाते है l इस नस्ल के कुत्तों को अगर सही तरीके से ट्रेन और रख-रखाव ठीक से नही हुआ तो इस इस प्रजाति के कुत्ते बेहद खतरानक हो जाते हैं ।

जर्मन शेफर्ड

जर्मन शेफर्ड दुनिया के सबसे खतरनाक कुत्तों में से एक है इसे पुलिसिया कुते के रूप में भी जाना जाता है। इनका वजन 30 से 40 किलो के बीच होता है। कई देशों में इसे पालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है परन्तु यदि इस नस्ल के कुत्ते को सही प्रशिक्षण मिले तो यह एक वफादार और बहुत प्यार करने वाला घरेलू पालतू कुत्ता है।

डाबरमैन पिन्स्चर

इन कुत्तों का भी ज़्यादातर पुलिस ही इस्तेमाल करती है हालाँकि इनको अब लोग घरों में भी पालने लगे हैं लेकिन अनजान लोगों के लिए ये मौत का कारण बन सकते है। यह खतरनाक कुत्ता अजनबी लोगों को देखते ही आक्रामक हो जाता है, लेकिन अक्सर मालिकों को देखते ही शांत हो जाता है। इनका वजन 34 से 45 किलो के बीच होता है। कई देशों में इसे भी पालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बुलमास्टिफ़

बुलमास्टिफ नस्ल का कुत्ता भी आक्रामक स्वभाव का होता है, इसके पैर लंबे होते हैं। ये बहुत ही भारी भरकम कुत्ते होते हैं इनका वजन 55 से 60 किलो के बीच होता है।

वुल्फ हाइब्रिड्स

 

इस कुत्ते का नाम जैसा है उसी तरह का यह दिखाई भी देता है इस कुत्ते की प्रजाति भेडियों के जैसी होती है इसलिए इनका नाम वोल्फ हाईब्रिड रखा गया है। अमेरिका के कई राज्यों ने इस विशेष नस्ल को पालने पर प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि वे अपने मालिकों के साथ-साथ दूसरों के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।

बॉक्सर

बॉक्सर प्रजाति को शिकारी कुत्तो का वंशज कहा जाता है। ये अपने मजबूत जबड़े से किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं। इनकी पहचान अड़ियल कुत्तों के रूप में भी है। इनका वजन 30 से 32 किलो के बीच होता है।

हस्की

हस्की प्रजाति के कुत्ते खतरनाक होने के साथ-साथ बेहद ही इंटेलिजेंट होते हैं। इन्हें स्लेज डॉग के रूप में भी जाना जाता है इन्हें बर्फीले रास्तों पर बिना पहियों की गाड़ी खींचने के लिए जाना जाता है। इनका वजन 20 से 27 किलो के बीच होता है। वैसे तो ये कुत्ते बहुत समझदार होते हैं लेकिन आक्रामक होने पर ये किसी की भी जान ले सकते हैं। यह जब आक्रामक मूड में होते है तब किसी की भी जान ले सकते है। इस नस्ल के कुत्ते के कारण अमेरिका में 1979 से 1993 के बीच 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

मालाम्यूट

मालाम्यूट प्रजाति के कुत्ते उत्तरी अमेरिका में पाए जाते हैं। इस प्रजाति के कुत्ते काफी समझदार होते हैं। इनका वजन 34 से 49 किलो तक होता है। ये कुत्ते आक्रामक होने पर जान भी ले सकते हैं। इस प्रजाति के कुत्ते इंटेलिजेंट होने के साथ ही एनर्जी और आक्रामकता से भरे होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की स्टडी के अनुसार 1966 से 1980 के बीच इस कुत्ते के काटने से 5 लोगों की मौत हो चुकी है।

ग्रेट डैन

 

इस प्रजाति के कुत्तों को अगर ट्रेनिंग देकर पालतू बनाया जाये तो ये सुरक्षा के लिहाज से बहुत बेहतरीन कुत्ते हैं लेकिन बिना प्रशिक्षण के अगर इन कुत्तों को रखा जाये तो ये बहुत ही खतरनाक भी साबित हो सकते हैं। इस कारण से इन्हें किलिंग मशीन के नाम से भी जाना जाता है। इनका वजन 54 से 90 किलो के बीच होता है।

हॉर्नबिल के बारे में कुछ रोचक तथ्य

हॉर्नबिल के बारे में कुछ रोचक तथ्य

हॉर्नबिल पक्षी की दुनियाभर में लगभग 55 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से भारत में इस पक्षी की 9 प्रजातियां पाई है। यह पक्षी एशिया, अफ्रीका और मलेशिया में पाया जाता है। आइए जानते हैं इस पक्षी के बारे में कुछ रोचक तथ्य:-

  • भारत में हॉर्नबिल पक्षी की “ग्रे हॉर्नबिल” प्रजाति पाई जाती है जिसको भारत में “धनेश” के नाम से भी जाना जाता है। हॉर्नबिल पक्षी का आकार सभी प्रजातियों में अलग-अलग होता है।
  • इस पक्षी का आकार 30 सेमी से लेकर 4 फीट तक होता है। भारतीय हॉर्नबिल का आकार करीब 24 इंच तक होता है। इसके पंखों का फेलाव 60 इंच का होता है तथा इसका वजन ढाई से 4 किलो के बीच होता है।
  • भारतीय हॉर्नबिल ज़्यादातर हिमालय के दक्षिण और पश्चिम पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाते हैं इसके अलावा यह पक्षी उन क्षेत्रों में भी पाए जाते है जहाँ पर घने जंगल और पेड़ होते हैं।
  • हॉर्नबिल पक्षी की चोंच इसकी पहचान होती है इसकी चोंच नीचे की तरफ मुड़ी होती है और हॉर्नबिल की चोंच भारी और इसकी मजबूत गर्दन से जुडी होती है। इसकी बड़ी चोंच के ऊपर सर पर स्थित पीले केसरिया लाल रंग की टोपी जैसी संरचना होती है, जिसकी वजह से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है, मादा पक्षी में इस टोपी का रंग पीछे की तरफ लाल होता है।
  • मादा हॉर्नबिल 2 से 6 अंडे देती है। यह अपने बिल में ही अंडे देती है और जब तक बच्चे बड़े ना हो जाए तब तक वो अपने बच्चो के साथ पेड़ के बिल में ही रहती है। इन अंडों से बच्चे 30 से 40 दिनों में निकलते हैं। इस दौरान खाने का प्रबंध नर हॉर्नबिल करता है।
  • इस पक्षी की आवाज़ चील से काफी मिलती जुलती है।
  • हॉर्नबिल पक्षी का मुख्य भोजन कीड़े, मकोड़े, छिपकलियां और फल या छोटे जानवर होते हैं और कुछ प्रजातियां केवल फल ही खाती हैं।
  • हॉर्नबिल पक्षी ज़्यादातर झुंड में ही रहना पसंद करते हैं और कभी-कभी ही अलग देखने को मिलते हैं। प्रजनन के समय भी यह झुंड में ही अपना जोड़ा बनाते हैं और जीवनभर अपने एक ही जोड़े के साथ रहते है।
  • क्या आप जानते हैं कि ये पक्षी 2000 फिट की ऊंचाई तक भी उड़ सकता है।
  • मादा हॉर्नबिल नर से छोटी होती है जिसकी आंखें नीली और सफेद होती है नर हॉर्नबिल की आंखें लाल रंग की होती है l
  • इस पक्षी का जीवनकाल लगभग 20 वर्ष तक का ही होता है।

गर्मियों में हीट स्ट्रोक या लू से बचने के लिए खाएं ये फायदेमंद चीज़े!!

गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है और गर्मियों के मौसम में सेहत का खास ध्यान रखना पड़ता है। हमारा शरीर 37 डिग्री तक तापमान सहन करने में सक्षम होता है। तापमान इससे ऊपर जाने पर शरीर में कई प्रकार की दिक्कतें महसूस होने लगती है।
इस मौसम में इंसान के शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन होने की संभावना बढ़ जाती है। गर्मी में ज़्यादा देर धूप में रहने से शरीर से अधिक मात्रा में पसीना निकलने के कारण पानी की कमी हो जाती है।

इससे सर में दर्द, थकान, सुस्ती, भूख का कम होना, उल्टी होना, पेट मे दर्द, जलन, दस्त होना, चक्कर आना और साथ ही मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसे हालात पैदा हो जाते हैं तो चलिए हम आपको बताते हैं कि किस प्रकार खान पान में कुछ बदलाव करके लू से बचा जा सकता है।

दही

दही एक डेयरी प्रोडक्ट हैl दूध में जिस बैक्टीरिया को मिलाकर दही बनाया जाता है, उसे “योगर्ट कल्चर” कहते हैं। रोजाना इसका सेवन करने से आप लू लगने से बच सकते हैं और साथ ही साथ यह आपके शरीर को कई सारे विटामिन्स और मिनरल्स भी प्रदान करती है। इसमें काफी मात्रा में प्रोटीन भी पाया जाता है, जो शरीर को एनर्जी देता है। आप दही से बनी छाछ, लस्सी आदि का भी सेवन कर सकते हैं।

नारियल पानी

नारियल पानी में लाइट शुगर और जरूरी मिनरल्स होते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। यह पोटेशियम का अच्छा स्रोत है। वेट लॉस  में भी नारियल पानी बहुत कारगर है।

पुदीना

पुदीना खाने से शरीर को काफी ठंडक मिलती है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। इसलिए गर्मी में पुदीने को पीसकर पीने से आप लू से बच सकते हैं। पुदीने को आप नींबू पानी, चटनी आदि के रूप में भी इसका सेवन कर सकते हैं। किसी अन्य प्लांट की अपेक्षा पुदीने में सबसे अधिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसे खाने में फ्रेश और ड्राय दोनों तरह से प्रयोग में लाया जाता है। ये कई फूड प्रोडक्ट्स और ड्रिंक्स में एक फेमस इंग्रिडिएंट है, जिसमें चाय और एल्कोहॉल से लेकर सॉस, सलाद और डेजर्ट भी शामिल हैं।

प्याज

कच्चे प्याज में कैलोरी बहुत कम होती है, केवल 40 कैलोरी प्रति 100 gm। प्याज में 89% पानी, 9% कार्ब और 1.7% फाइबर होते हैं, जिनमें थोड़ी मात्रा में प्रोटीन और फैट भी होता है। प्याज को खाने से शरीर में पानी की मात्रा बढ़ती है और इसकी तासीर ठंडी होने से आपका शरीर भी ठंडा रहता है इसलिए लू से बचने के लिए प्याज का सेवन भी करना चाहिए। प्याज एंटीऑक्सिडेंट और सल्फर युक्त यौगिकों में हाई होता है।

तरल पदार्थों का ज़्यादा प्रयोग करें

पानी जो कर सकता है वो कोई चीज नहीं कर सकती, ये बात रिसर्च से साबित हो चुकी है। गर्मी लगने का कारण ही शरीर में पानी और नमक की कमी होती है। इसके लिए जरूरी है कि आप पानी और नमक का सही बैलेंस अपनी बॉडी में बनाए रखें।
लू या गर्मी से बचने के लिए आपको अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। धूप में निकलने से पहले पानी पिएं, लेकिन याद रखें बाहर जाने से पहले ज़्यादा ठंडा पानी पीना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ऐसे में आपको ठंडा गर्म हो सकता है।

गर्मियों में नींबू पानी से बेहतर जूस कोई नहीं, हालांकि गर्मियों में संतरे या मौसमी जैसे फलों या सब्जियों के जूस भी ले सकते हैं। गर्मी के मौसम में शरीर को पानी की ज़्यादा जरूरत होती है इसलिए पेय पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए ताकि शरीर को पर्याप्त पानी मिल सके।

गर्मियों में क्या नहीं करना चाहिए ?

गर्मी में डाइट ऐसी होनी चाहिए जिसे पचाने में आंतों को ज़्यादा मेहनत न करनी पडे़। इस मौसम में भारी खाने से बचें, क्योंकि यह सुस्ती पैदा करता है। पूड़ी, परांठा, जंक फूड जैसे पिज्जा, बर्गर को इस मौसम में नहीं खाना चाहिए , क्योंकि इनकी तासीर गर्म है। इसके अलावा आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स को नजर अंदाज करना अच्छा है। बहुत ठंडी चीज़ें शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं, इसलिए इनसे बचें।

 

ब्लू व्हेल के बारे में रोचक तथ्य

ब्लू व्हेल के बारे में रोचक तथ्य

ब्लू व्हेल संसार का सबसे बड़ा जीव है और ये दुनिया के सभी महासागरों में पाई जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार ब्लू व्हेल इस पृथ्वी पर लगभग 5 करोड़ सालों से मौजूद है।

ब्लू व्हेल जब महासागरों में लड़ाई करती है तो पनडुब्बी और जहाज को भी अपना रास्ता बदलना पड़ता है। ब्लू व्हेल की अनेक प्रजातियां हैं, जैसे स्पर्म व्हेल, किलर  व्हेल, पायलट व्हेल, बेलुगा व्हेल आदि। तो आइये जानतें है ब्लू व्हेल से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-

  • बीसवीं सदी के शुरुआत में ब्लू व्हेल पृथ्वी के लगभग सभी महासागरों में बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती थी लेकिन लगातार एक सदी तक इनका शिकार किए जाने के कारण यह लगभग विलुप्त होने के कगार तक पहुंच गई हैं।
  • ब्लू व्हेल 30 मीटर तक लम्बी और इनका वजन 180 टन तक हो सकता है। देखा जाए तो ब्लू व्हेल डायनासोर के मिलने वाले कंकाल जिसका आकार लगभग 27 मीटर का है, से भी बड़ी होती है।
  • सबसे हैरानी वाली बात यह है कि व्हेल पानी में सांस नहीं ले सकती। इनके सर पर एक छेद होता है जिसकी सहायता से ये सांस ले पाती है l जब ये पानी से निकलकर गोता लगाती है तब वह छेद की मदद से सांस लेती है l ब्लू व्हेल अपनी सांस 35 मिनट से लेकर 2 घंटे तक रोक सकती है।
  • क्या आप जानते है कि एक ब्लू व्हेल की जीभ एक अफ्रीकी वन हाथी के बराबर होती है और इनका दिल कम से कम एक गोल्फ गाड़ी के आकार का होता है। इनके दिल की धडकनों को 2 मील दूर से सुना जा सकता है।
  • ब्लू व्हेल बहुत कम सोती है । यह 3 महीने तक बिना सोए भी रह सकती है। सोते समय इनका दिमाग आधा जागता है और आधा सोता है । अगर ये गहरी नींद में सो जाए तो यह डूबकर मर सकती है।
  • ब्लू व्हेल के दिल का वजन 400 पाउडं ( 180 kg) किलो के बराबर होता है।
  • ब्लू व्हेल की गर्दन काफी लचीली होती है, जो कि तैरते वक्त गोल घूम सकती है। इनकी पूंछ के अंत में दो सिर होते है जो उन्हें तैरने में सहायता करते है l यह 46 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तैर सकती हैं।
  • मादा ब्लू व्हेल अन्य मछलियों की तरह अंडे  नहीं देती है बल्कि ये बच्चे पैदा करती है। एक बार में ये एक बच्चे को जन्म देती है। ब्लू व्हेल के बच्चे लगभग 7 महीने के होने तक रोजाना करीब 380 लीटर तक दूध पीते हैं।
  • ब्लू व्हेल एक दिन में करीब 4 टन से 6 टन तक भोजन करती है। भोजन से प्राप्त उर्जा को वह सुरक्षित करके रख लेती है जिसकी वजह से वह 200 दिन तक बिना भोजन खाए भी रह सकती है।
  • ब्लू व्हेल के शरीर के अंगों की तुलना में, ब्लू व्हेल का मस्तिष्क बहुत छोटा होता है और इसका वजन केवल 92 किलोग्राम ही होता है, जो उसके शरीर के वजन का 0.007 प्रतिशत है।
  • ब्लू व्हेल दुनिया में सबसे सशक्त जानवर हैं वे एक-दूसरे की आवाज 1000 मील दूर तक सुन सकते हैं यानी 1000 मील दूर तक एक दूसरे को बुला सकते है। वह अपने साथियों को बुलाने के लिए काफी मधुर आवाज़ निकालती हैं।

जानिए उपवास रखने से होने वाले फायदे!

जानिए उपवास रखने से होने वाले फायदे

अलग−अलग धर्मों के लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपवास या व्रत रखते हैं और ईश्वर की आराधना करते हैं। वहीं अगर इसे साइंटिफिक नजरिए से देखा जाये तो उपवास रखने से हमारी सेहत को भी बहुत लाभ होता है। जी हां, उपवास रखना सेहत के लिए बेहद ही लाभकारी होता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

इम्म्यून सिस्टम होता है मजबूत

उपवास रखने से शरीर का इम्म्यून सिस्टम मजबूत होता है। इस वजह से शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा कोलाइटिस ,थकान,कब्ज और सिरदर्द होने का खतरा काफी कम हो जाता  है।

शरीर से विषैले तत्व निकलने में मदद होती है

आमतौर पर लोग दिनभर उल्टा−सीधा खाते हैं, लेकिन जब आप व्रत रखते हैं तो आपके शरीर द्वारा कोई भोजन नहीं खाया जाता है। ऐसे में शरीर में मौजूद फैट ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। इतना ही नहीं, एक दिन भोजन स्किप करने और केवल जल या लिक्विड पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।

पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

उपवास का हमारे पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। महीने में कम से कम तीन बार उपवास रखने से हमारी पाचन क्रिया ठीक होती  है। उपवास के दौरान हमारे पेट और लिवर को काफी आराम मिलता है।

वजन कम करने में सहायक

अगर आप सप्ताह में एक या दो बार उपवास रखते हैं। इससे वजन कम करने में भी सहायता मिलती है। उपवास के दौरान शरीर फैट को एनर्जी में तब्दील करता है, जिससे धीरे−धीरे आपका वजन कम होने लगता है। इसके अतिरिक्त इससे आपका मेटाबॉलिज्म भी बूस्टअप होता है। इस तरह उपवास रखने की आदत से आप अपना वजन आसानी से कम कर सकते हैं।

ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखता है

वर्ल्ड जर्नल ऑफ डायबिटीज द्वारा प्रकाशित 2017 के एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि टाइप 2 डायबिटीज वाले लगभग 10 में से एक व्यक्ति को उपवास से लाभ हुआ क्योंकि इससे ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। उपवास इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है, जिससे इंसुलिन के लिए शरीर की संवेदनशीलता बढ़ जाती है और यह रक्त प्रवाह से ग्लूकोज को कोशिकाओं तक अधिक कुशलता से ले जाता है।

बेहतर मानसिक स्वास्थ्य

आपको शायद पता न हो लेकिन उपवास आपके शरीर के साथ−साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है। उपवास के बाद, ब्लड में एंडोर्फिन का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह आपको एक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। उपवास का प्रभाव व्यायाम की तरह ही होता है।

आंतों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है

अगर आप अपनी आंतों को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो उपवास जरूर करें। उम्र के साथ−साथ व्यक्ति के इंटस्टाइल स्टेम सेल्स की कार्यक्षमता में गिरावट आती है, लेकिन उपवास के दौरान, कोशिकाएं ग्लूकोज के बजाय फैटी एसिड को तोड़ देती हैं और इससे नई कोशिकाएं बनने में मदद मिलती हैं।

डिप्रेशन कम होता है

उपवास मानसिक शांति का बेहतर विकल्प होता है इससे तनाव, चिंता और डिप्रेशन से बचा जा सकता है।  व्रत रखने से मन शांत रहता है और हमारी इच्छाशक्ति भी मजबूत होती है।

बेहतर हीलिंग प्रोसेस

उपवास करने का एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे शरीर में हीलिंग प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। दरअसल, जब भोजन पेट में मौजूद नहीं होता है, तो शरीर पाचन के बजाय अन्य महत्वपूर्ण कार्यों जैसे मेटाबोलिक गतिविधि और इम्म्यून सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करता है। कई रिसर्च में भी इस बात की पुष्टि हुई है, यहां तक कि एथलीटों को प्रशिक्षण के दिनों में उपवास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि अतिरिक्त फैट को बहाया जा सके और मांसपेशियों की वृद्धि को अनुकूलित किया जा सके।

गुस्से पर काबू कैसे पाएं

गुस्से पर काबू कैसे पाएं

गुस्सा आजकल हर किसी के लिए बड़ी समस्या है। किसी को गुस्सा बहुत ज़्यादा आता है, तो किसी को गुस्सा बर्दाश्त करना पड़ता है। गुस्से में अक्सर लोग ऐसा काम कर जाते हैं जिससे उन्हें बाद में बहुत पछताना पड़ता है। गुस्से में लोग अपनी नौकरी छोड़ देते हैं, किसी के साथ मारपीट कर देते हैं, घर का सामान तोड़ देते हैं। अगर आपको भी बात-बात पर गुस्सा आता है और आप इस आदत से तंग आ चुके हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस पर कैसे काबू पाएं :-

व्यायाम और योग करें

हर दिन कम से कम 45 मिनट का व्यायाम करना चाहिए। सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम जैसे योगाआसन करने चाहिए। व्यायाम करने से दिमाग और मन शांत रहते हैं। इसके साथ-साथ तनाव को कम करने के लिए तैराकी (स्विमिंग) भी कर सकते हैं जिससे आपका ध्यान बंटा रहेगा और गुस्सा कम आएगा।

टहलने निकल जाएं

जब भी आपको गुस्सा आये तो आप वह स्थान छोड़ कर कहीं टहलने निकल जाएं। गुस्सा पैदा करने वाली स्थिति से दूर हो जाने से आप शांत महसूस करेंगे और इससे चीजों को समझने में भी मदद मिलेगी। बाहर निकलकर प्रकृति पर ध्यान दें। टहलकर आप तुरंत उस नकारात्मक ऊर्जा से बच सकते हैं और अपने गुस्से पर काबू पा सकते हैं।

गहरी साँसें लें

जब भी आपको बहुत गुस्सा आता है तो एक लंबी और गहरी सांसे लेनी चाहिए जिससे आपके मस्तिष्क में अधिक से अधिक ऑक्सीजन जा सके। गहरी साँसे लेना वैसे भी एक बहुत बढ़िया आदत है जो हमारे शरीर के लिए सही होता है इससे हमारा दिमाग शांत होता है और बाकी की फ़ालतू की चीज़ें हमसे दूर चली जाती है l

बोलने से पहले सोच लें

यदि आपको गुस्सा आये तो सामने वाले व्यक्ति से जो भी बोले, वो बोलने से पहले सोचे लें कि आप कहीं गलत तो नहीं बोलने जा रहे हैं, यदि आपको लगता है कि आप सही हैं तो बोल दें और आराम से बात करें, तेज आवाज़ में बात न करें।  इस तरीके से आप गलत बोलने से बच जायगें और सामने खड़े व्यक्ति से आपके रिश्ते भी ख़राब नहीं होंगे।

संगीत सुनें

जब भी आपको लगे कि आपको गुस्सा आ रहा है तो अपने पसंदीदा संगीत को सुने इससे आपका मन शांत होगा और आपका मूड भी अच्छा होगा। संगीत को सुनकर आप निश्चित रूप से अच्छा महसूस करेंगे, भले ही आपको जितना भी गुस्सा हो परन्तु संगीत सुनने से आपको अच्छा लगेगा।

किसी एकांत स्थान पर चले जाएं

अलग-अलग लोग अलग-अलग तरह से अपना गुस्सा दिखाते हैं। कुछ लोग अपने कपड़ो को फाड़ देते हैं, कुछ लोग अपना फोन उठा कर ज़मीन पर पटक देते हैं, कुछ लोग घर का सामान तोड़ डालते हैं और कुछ लोग घर के सदस्यों के साथ मारपीट करते हैं और अपने साथ-साथ दुसरो को भी नुकसान पहुंचाते हैं। यह सभी तरीके नकारात्मक हैं। जब भी आपको गुस्सा आये तो आप तुरंत वह स्थान छोड़ कर कहीं एकांत में कुछ पल बिताए, ऐसा करने से आपका गुस्सा जल्दी शांत होगा।

राजस्थान के दिल जैसलमेर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

राजस्थान के दिल जैसलमेर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

राजस्थान में स्थित जैसलमेर किला विश्व के सबसे बड़े किलों में से एक है। इस किले को ‘सोनार किला’ या ‘स्वर्ण किला’ भी कहा जाता है। राजस्थान की शान में सदियों से खड़ी ऐतिहासिक धरोहर जैसलमेर का किला भारत ही नहीं अपितु विश्व भर में प्रसिद्ध है। “वर्ल्ड हेरिटेज साइट” की शृंखला में शुमार यह किला राजस्थान के प्राचीन इतिहास को अपने में समेटे हुए है।

  • इस किले को गोल्डन किला या सोनार किला भी कहा जाता है क्योंकि दिन के समय सूरज की रौशनी में इस किले की दीवारें हल्के सुनहरे रंग की दिखाई देती हैं। यह किला विश्व में सबसे बड़े किलों में से एक है।
  • जैसलमेर किले का निर्माण सन 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक रावल जैसल द्वारा किया गया था।
  • इस किले को बनाने में बेहद ही खूबसूरत पीले और सुनहरे पत्थरों का प्रयोग किया गया था, पूरे किले में कहीं भी चूना या गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया था।
  • किले के अन्दर एक शानदार जलनिकासी सिस्टम भी है जिसे “घुट नाली” नाम दिया गया है जो बरसात के पानी को किले से आसानी से बाहर निकाल देता है।
  • यह किला 1500 फीट लंबा, 750 फीट चौड़ा और 250 फीट ऊँचे पर्वत पर बना हुआ है। किले में एक तहखाना भी है जो 15 फीट लंबा है।
  • इस किले में एक भव्य लाइब्रेरी भी बनाई गई है जिसमें प्राचीन किताबें और दुर्लभ कलाकृतियां हैं l
  • जून 2013 को “नोम पेन्ह” में विश्व धरोहर समिति की 37वीं बैठक के दौरान जैसलमेर किले को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया गया था।
  • राजस्थान के अन्य किलों की भांति इस किले में भी अखाई पोल, हवा पोल, सूरज पोल और गणेश पोल जैसे कई द्वार हैं सभी द्वार अपनी शानदार स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है।
  • 16वीं सदी के दौरान महवालजीत सिंह ने “बड़ा बाग़” का निर्माण शुरू किया था। उनके निधन के बाद उनके बेटे लुणकरण ने इसके निर्माण को पूरा किया। इस बाग़ को एक स्मारक के रूप में बनाया गया है जहां पर श्रेष्ठ लोग और उनके परिवार को दफनाया गया था।
  • इस किले से एक किलोमीटर की दूरी पर “गड़ीसर नदी” स्थित है। इस नदी को राजा रावल जैसल ने बनवाया था और बाद में इसे दुबारा साल 1367 ऐ.डी. में महारावल जर्सी ने बनवाया था। यहाँ के लोग अपनी पानी की ज़रूरतों के लिए इसके टैंक पर निर्भर रहते हैं।
  • इस किले में राजपूत और मुगल वास्तुकला शैली का मिश्रण देखने को मिलता है।
  • जैसलमेर किले के अंदर स्थित जैन मंदिरों की एक श्रृंखला है जो जैन तीर्थंकारों को समर्पित है।
  • इस किले के भीतर बहुत ही सुन्दर महल, मंदिर, सैनिकों व व्यापारियों के आवासीय परिसर बने हुए हैं, जो इसे अन्य किलों से अलग बनाते हैं। यह किला जैसलमेर के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।

तितलियों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

तितलियों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

तितली एक बहुत ही सुन्दर जीव है। रंग बिरंगी तितलियां सभी का मन मोह लेती हैं और लोग इन्हें काफी पसंद भी करते हैं लेकिन खूबसूरत दिखने वाली इन तितलियों से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में आपको पता नहीं होगा। आज हम आपको तितलियों से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं तितलियों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-

  • पूरी दुनिया में 24,000 से भी ज़्यादा प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं। अंटार्टिका को छोड़कर बाकी सभी महाद्वीपों में तितलियां पाई जाती हैं।
  • तितली, कीटों की श्रेणी में आने वाला एक जीव है जो भिन्न-भिन्न रंगों में पाया जाता है। इसके रंग बिरंगे पंख बहुत ही आकर्षक होते हैं। भारत में लगभग 1500 विभिन्न प्रजातियों की तितलियां पाई जाती हैं।
  • आपने तितली को फूलों पर बैठते तो देखा ही होगा दरअसल वो फूलों के रस को पीती है लेकिन क्या आपको यह पता है कि तितलियां किसी भी चीज का स्वाद पैरों से चखती हैं।
  • क्या आप जानते हैं तितलियों का जीवनकाल बेहद छोटा होता है और यह लगभग 2 से 4 सप्ताह तक ही जीवित रह सकती हैं लेकिन कुछ ऐसी प्रजातियां भी हैं जो 9 महीने तक जिंदा रहती हैं
  • तितली में सुनने की क्षमता नहीं होती लेकिन यह वाइब्रेशन को महसूस कर सकती हैं।
  • अमेज़न (Amazon) के जंगलों में पाई जाने वाली तितलियों के शरीर में सोडियम की कमी होती है और वे इस कमी को पूरा करने के लिए कछुओं के आंसू को पीती हैं।
  • तितली के पंखों के आर पार देखा जा सकता है इसके चार पंख होते हैं। सबसे बड़ी तितली के 12 पंख होते हैं ।
  • दुनिया की सबसे बड़ी तितली 12 इंच की है और दुनिया की सबसे छोटी तितली का साइज आधे इंच के बराबर है।
  • तितली की आंख में 6000 से ज़्यादा लेंस होते हैं जिसके कारण वह अल्ट्रावॉयलेट किरणें भी देख सकती हैं ।
  • तितलियां भी मधुमक्खियों की तरह फूलों से नेक्टर चुस्ती हैं और जिंदा रहती हैं।
  • तितलियां किसी भी चीज का स्वाद उस पर खड़े हो कर लेती हैं क्योंकि इनके चखने वाले सेंसर पैरों में पाए जाते हैं।
  • क्या आप जानते हैं तितलियां भविष्य भी देख सकती है तितलियां अगले दिन के मौसम का अंदाजा एक दिन पहले ही लगा सकती हैं l
  • तितली भोजन के रूप में फूल,पत्तियां इत्यादि खाती हैं और अधिकांश तितलियां शाकाहारी होती है।
  • तितलियां पराबैंगनी किरणों को देख सकती हैं जिन्हें इंसान नहीं देख सकते।
    आपको जानकर हैरानी होगी कि तितलियां अपनी उड़ान से 3000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती हैं।
  • धरती के ऊपर एक “89’98” नाम की तितली मौजूद है इस तितली का यह नाम इसलिए रखा गया है क्यूंकि इस तितली के पंख के एक तरफ देखने पर 89 और दूसरी तरफ देखने पर 98 दिखाई देता है l
  • आमतौर पर तितलियां 17 फीट/सेकंड की स्पीड से उड़ने में सक्षम होती हैं, लेकिन ‘स्किपर’ नाम की तितली इतनी तेजी से उड़ती है कि यह एक घोड़े को भी पीछे छोड़ सकती हैl
  • तितलियों का हम मनुष्यों के साथ पुराना रिश्ता रहा है प्राचीन मिस्र के लगभग 3500 साल पुरानी चित्रकला में भी तितलियों की आकृति छपी हुई पाई गई है l

खूबसूरत नहीं बल्कि डरावने दिखाई देते हैं कुछ पौधे

इस धरती पर पेड़-पौधे, फूल पत्तियां सब प्रकृति की देन है और इन्हीं से हमारी पृथ्वी खिल उठती है। घर के आसपास फूल, पेड़-पौधों को लगा कर नकारात्मकता दूर की जाती है। प्रकृति की हर रचना अद्भुत है, वैसे तो सभी पेड़-पौधे और उनके फूल देखने में खूबसूरत होते है लेकिन आपको बता दें कि हमारी इस प्रकृति में कुछ पौधे और फूल ऐसे भी है जो देखने में बहुत ही डरवाने हैं। आज हम आपको ऐसे ही पौधों और फूलों के बारे में बताने जा रहे हैं जो दिखने में बहुत ही डरावने होते हैं:-

स्नेप ड्रैगन

स्नेप ड्रैगन एक प्रकार का फूल है परन्तु देखने में ये मानव कंकाल की खोपड़ी जैसा लगता है। इस फूल की एक खासियत यह है कि यदि आप इस फूल के पक्षों को निचोड़ते हो तो यह किसी ड्रैगन के मुंह खुलने तथा बंद करने जैसा दिखाई पड़ता है। प्राचीन लोगों का इस पौधें के बारे में ऐसा विश्वास था कि यह पौधा लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है।

पॉदोस्ट्रोमा कॉर्न डुमा

यह पौधा देखने में बहुत ही डरावना लगता है और यह काफी कम जगहों पर देखने को मिलता है। इसको देखने पर ऐसा लगता है कि जैसे किसी भूत प्रेत का हाथ जमीन से बाहर की ओर निकल रहा हो। आपको बता दें कि इसका किसी भी प्रकार से प्रयोग करना हमारे शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक हो सकता है।

मंकी फेस ऑर्चिड

मंकी फेस ऑर्चिड फूल भी देखने में बहुत ही अजीब लगता है यह फूल देखने में ऐसा लगता है कि जैसे ये किसी बंदर का फेस हो। आपको यह जानकर हैरानी होंगी कि यह दक्षिण इक्वाडोर तथा पेरू के बादल वन में करीब 3 हजार फिट की ऊंचाई पर पाया जाता है और सबसे खास बात है कि यह फूल पूरे वर्ष खिलता है। इसमें से पके हुए संतरे के जैसी गंध आती है।

डेविल्स टूथ

डेविल्स टूथ दिखने में तो बिल्कुल मशरूम की तरह लगता है, लेकिन इसका इस्तेमाल खाने में नहीं किया जाता। दरअसल इस पौधे की ऊपरी सतह सफेद रंग की होती है और उस पर लाल रंग के धब्बे बने होते हैं। इस पौधे की विचित्र बात यह है कि इन लाल धब्बों से लाल रंग का द्रव्य निकलता रहता है, जिसको देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इस पौधे से खून निकल रहा हो।

ऑक्टोपस स्टिंकहॉर्न

इस पौधे को ‘ऑक्टोपस स्टिंकहॉर्न’ के नाम से जाना जाता है। यह लाल रंग का पौधा दिखने में बिल्कुल ऑक्टोपस की तरह लगता है, जिसके आठ पैर होते हैं। यह पौधा काफी बदबुदार होता है, जिस वजह से तरह-तरह के कीड़े इसकी ओर आसानी से आकर्षित हो जाते हैं।

बुद्धास् हैंड

बुद्धास् हैंड नाम का यह पौधा दिखने में बिल्कुल ही अजीबो-गरीब है। इस पौधे को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इसकी कई सारी ऊंगलियां निकली हुई हों। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह अजीबो-गरीब पौधा नींबू की प्रजातियों में से एक है।

इस पौधे पर गोल नींबू तो नहीं उगते, लेकिन इसकी खुशबू बिल्कुल नींबू के जैसी होती है, इसलिए इस पौधे को लोग रूम फ्रेशनर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

डॉल्स आईज

डॉल्स आईज नामक पौधे को देखने पर ऐसा लगता है कि इसकी टहनियों पर बहुत सारी आंखें लटकी हुई हैं। अजीबो-गरीब दिखने वाला यह पौधा एक तरह की बेरी है लेकिन इसे खाया नहीं जा सकता क्योंकि यह विषैला पौधा है।

ब्लैक बैट

थाईलैंड और मलेशिया में मिलने वाला यह पौधा काले चमगादड़ जैसा लगता है। इसकी पत्तियों का आकार 12 इंच तक होता है जो इसको हर जगह से घेरे रखती हैं। अंधेरे में इसे देख कर कोई भी चकरा जाएगा। इस पौधे की अजीबो-गरीब खूबी यह है कि अगर इस पौधे को अंधेरे में देखा जाए तो यह बिल्कुल चमगादड़ की तरह ही नज़र आता है।

हमेशा खुश रहने के असरदार उपाय

खुशी एक ऐसा एहसास है जिसे सभी लोग हमेशा महसूस करना चाहते हैं। जीवन के उतार-चढ़ाव की वजह से लोग बेहद निराश हो जाते हैं, चिंता और तनाव हर किसी की जिंदगी में आते है लेकिन जरूरी यह होता है कि हम उनसे कैसे निपटते हैं।

परिस्थिति चाहे जैसी भी हो चेहरे पर एक मुस्कान हमेशा रहनी चाहिए। खुशी और मुस्कुराहट आपको जीवन में दुखों से लड़ने में मदद करती है, तो वहीं खुश रहने से आप में कॉन्फिडेंस भी आता है जिससे आप अपने काम को बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

दिन की सही शुरुआत

सुबह की शुरुआत बड़े ही शांतिपूर्ण तरीके से होनी चाहिए, जिससे दिन भर के लिए एक नई ताज़गी मिले। सुबह उठकर व्यायाम करें, अच्छे से स्नान करें और पूजा अर्चना करें। सुबह का नाश्ता भरपूर होना चाहिए जिससे दिन भर शरीर को ऊर्जा मिलती रहे। अधिक घी, तेल में बने चटपटे मसालेदार खाना खाने से दिमाग का सारा ध्यान पाचन क्रिया में जुट जाता है, जिससे सुस्ती छाने लगती है।

इसलिए हल्का फुल्का पौष्टिक नाश्ता जैसे:– फल व सलाद आदि का सेवन करें, जो शरीर को अधिक ताकतवर तथा फुर्तीला बनाए रखने में सहायक हो। जब आप सुबह से ही ऊर्जावान बने रहेंगे तो आपको दिन भर में हर काम को करने में खुशी मिलेगी।

प्रेरणा लें

जिस व्यक्ति का काम अच्छा लगे उससे प्रेरणा लें। अखबार,किताबें पढ़ने की आदत डालें। हर व्यक्ति में अच्छी और बुरी बातें होती है आप उनमें क्या देखते हैं और क्या सीखते हैं यह आप पर ही निर्भर करता है। हर व्यक्ति की अच्छी बातें सीखने का प्रयास करना चाहिए उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

जलन ईर्ष्या न करें

किसी से ईर्ष्या करने का मतलब है-अपनी खुशियों को कम करना। जिस तरह चिंता “चिता” के समान होती है, उसी तरह ईर्ष्या खुशियों को खत्म करती है। यदि आप किसी से ईर्ष्या करते हैं, तो इसका मतलब आप अंदर-ही-अंदर जलते हैं।

हमेशा खुश रहने के लिए ईर्ष्या से हर संभव तरीके से बचने की कोशिश करें। किसी से ईर्ष्या करना अच्छी आदत नहीं है। अपने काम से काम रखें। अपने काम में रुचि रखें। कौन क्या कर रहा है, कितनी तरक्की कर रहा है, कैसे तरक्की कर रहा है इन सब बातों के चक्कर में रहकर अपनी खुशियों को खराब न करें।

दूसरों की मदद करें

हम हमेशा अपनी ख़ुशी के बारे में सोचते रहते हैं लेकिन दूसरों की मदद करने से भी हमें खुशी मिल सकती है।  किसी की सहायता करना आपको सकारात्मकता और ख़ुशी प्रदान कर सकता है। अपने दोस्तों-रिश्तेदारों की बात सुनना और फिर उनकी परेशानियों पर सलाह देना भी एक तरह का मदद करना ही है। याद रखें, खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और दुःख बांटने से काम होते हैं।

सकारात्मक सोचें

खुश रहना हमारे विचारों पर भी निर्भर करता है। यदि आपके विचार सकारात्मक है तो आपके पास ख़ुशी के हज़ारों रास्ते होंगे उदाहरण के लिए जैसे एक तरफ आपके हाथ में सफलता है परन्तु आप उससे संतुष्ट नहीं हैं और आपके दिमाग में उससे और बेहतर हासिल करने की चाह है। इस स्थिति में न तो खुश रह सकते हो और न ही सकारात्मक।

खुश रहने का तरीका हमेशा आपके दिमाग से जुड़ा होता है। यदि आप सकारात्मक सोचते हैं तो बॉडी में ऊर्जा और उत्पादकता का स्तर 30% बढ़ जाता है। आपको अपने विचारों को सकारात्मक बनाए रखना है जिससे आपको छोटी-छोटी सफलताओं में भी ख़ुशी प्राप्त होगी।