मानव इतिहास में दर्ज़ 10 महामारियाँ जिनमें लाखों-करोड़ों लोग मारे गए

दुनिया  भर में कोविड19 यानि कोरोना वायरस का खौफ हावी है। दुनिया भर में इससे संक्रमित लोगों की संख्या लगभग 13 लाख तक पहुंच गई है। अब तक करीब 70000 लोग इस वायरस के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। चीन के बाद यूरोप और स।रा। अमेरिका इससे सबसे अधिक प्रभावित है। विश्व स्वास्थ संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित किया है।

हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी बीमारी ने दुनिया भर में इतनी अधिक दहशत फैलाई हो। हैजा, प्लेग, चिकनपॉक्स, इंफ्लूएंजा मानव इतिहास के सबसे बड़े वायरस में शामिल रहे हैं। इन बीमारियों ने 30 से 50 करोड़ लोगों की जान ली है।

आइए जानते हैं कुछ ऐसी वैश्विक महामारियों के बारे में जिन्होंनें लाखों-करोड़ों लोगों की जिन्दगी छीन ली।

स्पैनिश इंफ्लूएंजा 1918-19

मौतें : 5-10 करोड़ (अनुमानित)

किसी भी महामारी में इतनी जानें नहीं गई जितनी कि 1918-1919 में हुई स्पैनिश इन्फ्लुएंजा में गई थी। दुनिया भर में, लगभग 5 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई थी। वायरस से होने वाली इस बीमारी से कई शहरों का नामोनिशान मिट गया। पूरी दुनिया की एक तिहाई यानि 50 करोड़ आबादी इस महामारी की चपेट में आ गई थी।

सन 1918 में लॉरेंस, मास, कैलिफोर्निया, अमेरिका में टेंटों के बाहर ताजी हवा में इलाज के दौरान नर्सें स्पेनिश इन्फ्लूएंजा महामारी के शिकार लोगों की देखभाल करते हुए। (हॉल्टन आर्काइव / गेटी इमेजेज़)

इस महामारी से 50 वर्ष से कम तक के वयस्कों की मृत्यु दर सबसे ज्यादा थी। वर्ष 1918 की शरद ऋतु में स्पेन में हुए इस विनाशकारी फ्लू के कारण इसे स्पैनिश इन्फ्लुएंजा नाम दिया गया। अकेले भारत में ही करीब 1 से 2 करोड़ लोगों की मौत हुई थी।

द ब्लैक डेथ(प्लेग ) 1346-1353

मौतें : 7.5 करोड़ से 20 करोड़

1346 से 1353 की अवधि के अंदर यूरोप में प्लेग की महामारी फैली। प्लेग महामारी के कारण  अफ्रीका और एशिया में करोड़ों लोग मारे गए। अनुमान है कि इस महामारी से 7.5 करोड़ से 20 करोड़ लोग मारे गए। इसकी शुरुआत एशिया से हुई, ऐसा माना जाता है।

प्लेग चूहों से फैलता है और फिर कीड़ों के जरिए मनुष्य इससे संक्रमित होता है। यह समुद्री जहाजों के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंचा। इसका मुख्य वाहक जलपोत बने, जहां चूहों का पनपना आम बात है।

फ्ल्यू (1918 )

मौतें : 2 से 5 करोड़

1918 से 1920 की अवधि में इस जानलेवा इंफ्लूंजा ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया। दुनिया की आबादी का एक-तिहाई हिस्सा इसका शिकार बना और करीब 20 से 50 करोड़ लोगों की जान गई। इस बीमारी से 50 करोड़ लोग प्रभावित हुए और मरने वालों का आंकड़ा 10 से 20 फीसदी के बीच रहा।

इस बीमारी से पहले सप्ताह में ही 2.5 करोड़ लोग मारे गए। इस इंफ्लूंजा की ख़ास बात यह थी कि यह अधिकतर स्वस्थ य़ुवाओं की जान लेता था और जो बच जाते थे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता था। सामान्यत: इंफ्लूएंजा से उम्रदराज लोगों अधिक प्रभावित होते हैं।

एच आईवी एड्स, 1976 – से अब तक

मौतें: 3.6 करोड़

सन 1976 में एचआईवी(ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस) यानि एड्स (एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम) की शुरुआत अफ्रीकी देश कॉन्गो से हुई थी। बाद में यह वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। साल 1976 के बाद एड्स के कारण 3.6 करोड़ लोग इसका शिकार हो गए।

वर्तमान में लगभग 3.1 से 3.5 करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं। एचआइवी से संक्रमित अधिकतर लोग अफ्रीकी देशों में हैं।

2005 से 2012 की अवधि में एचआइवी का इसका प्रभाव सबसे ज्यादा रहा । इसके बाद प्रतिवर्ष मृत्यु का आंकड़ा 22 लाख से 16 लाख प्रति वर्ष तक कम हुआ है। इसका इलाज अभी तक नहीं खोजा जा सका है।

जस्टिनियन प्लेग (541 से 42 )

मौतें : 2.5 करोड़

जस्टिनियन प्लेग या बुबोनिक प्लेग नामक बीमारी ने यूरोप की आधी आबादी को समाप्त कर दिया था। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव बिजेटिनियन साम्राज्य और मेडिटेरिनियन पोर्ट पर पड़ा। केवल एक साल के अंदर ही इस बीमारी के कारण 2.5 करोड़ लोग मौत के मुहं में चले गए थे।

हालाँकि यह पता नहीं चल सका कि इस बीमारी की शुरुआत कहाँ से हुई। लेकिन इस बीमारी के कारण पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। शहर की 40 फीसदी आबादी को समाप्त कर दिया था। बुबोनिक प्लेग  से मृत्यु की औसतन दर 5,000 लोग प्रतिदिन थी।

एन्टोनाइन प्लेग 165

मौतें: 50 लाख

एन्टोनाइन प्लेग  ने उस समय के एशिया, मिस्र, यूनान (ग्रीस) और इटली को सबसे अधिक प्रभावित किया। इस बीमारी को गेलेने के नाम से भी जाना जाता है। कई लोगों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण चेचक या स्मॉलपॉक्स है। हालाँकि इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। इस बीमारी के कारण 50 लाख लोग मौत के मुहं में चले गए।

एशियन फ्ल्यू 1956 -58

मौतें: 20 लाख

एशियन फ्लू ए ग्रेड का इंफ्लूएंजा है, जो H2N2 से फैलता है। इसकी शुरुआत सन 1956 से के मध्य हुई और यह महामारी साल 1958 तक रही। यह महामारी सिंगापुर, हांगकांग और अमेरिका तक फैली । विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार इस बीमारी की वजह से 20 लाख लोग मौत के मुंह में चले गए जिसमें 69,800 लोग अमेरिकी थे।

हांगकांग फ्लू

मौतें: 10 लाख

इस दूसरी श्रेणी की फ्लू महामारी को हांगकांग फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। इसका महामारी का कारण H3N2 कीटाणु है जो इंफ्लूएंजा महामारी पैदा करने वाले H2N2 वायरस की एक प्रजाति है।

हांगकांग फ्ल्यू माहामारी का पहला मामला 13 जुलाई सन 1968 में हांगकांग में आया था और मात्र 17 दिनों के अंदर ही यह बीमारी सिंगापुर और वियतनाम तक फ़ैल गई। इसके बाद केवल तीन महीने के अंदर ही यह बीमारी फिलिपींस, भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में भी फैली और कई लोग इस बीमारी का शिकार हो गए।

इस बीमारी के शिकार होने वाले सिर्फ 5 फीसदी लोगों की मौत होती थी, मगर इसने तब हांगकांग के 5 लाख लोगों यानि उसकी तत्कालीन 15 फीसदी आबादी को मौत की नींद सुला दिया था।

फ्ल्यू 1889-90

मौतें: 10 लाख

फ्ल्यू महामारी को शुरु में एशियाई फ्लू या रूसी फ्लू नाम दिया गया था। यह भी ए ग्रेड का इंफ्लूएंजा है, जो H2N2 से फैलता है। हालांकि, कई शोध में इसकी वजह ए ग्रेड के H3N8 वायरस को भी माना गया है।

सन 1889 में मध्य एशिया के तुर्किस्तान में इस बीमारी का पहला मामला ध्यान में आया था। बाद में  उत्तर-पश्चिमी कनाडा, ग्रीनलैंड में बढ़ते शहरीकऱण के कारण यह बीमारी अधिक तेजी से फैली।

बाद में इस बीमारी की चपेट में पूरी दुनिया आ गई थी ।फ्ल्यू को बैक्टिरिया और वायरस से फैलने वाली पहली महामारी माना जाता है। 1890 तक इसने 10 लाख लोगों की जिन्दगी लील ली थी।

तीसरी श्रेणी का हैजा 1852-60

मौतें : 10 लाख

यह बीमारी हैजा(कॉलेरा) की सात श्रेणियों में से इसे सबसे अधिक जानलेवा माना जाता है। इस रोग की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी। इस बीमारी ने सबसे अधिक प्रभावित सन 1852 से 1860 के दौरान किया।

हैजा की शुरुआत भारत से हुई और फिर यह एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका तक फैल गया। हैजा के कारण  10 लाख लोगों की जान चली गई ।

ब्रिटिश डॉक्टर जॉन स्नो ने पिछड़े इलाकों में रहते हुए इस बीमारी की पहचान की थी। उन्होंने यह पता लगाया कि इस बीमारी की वजह दूषित जल था। साल 1854 में इस बीमारी ने ग्रेट ब्रिटेन में 23,000 लोगों को मौत नींद सुला दिया था।

हैजा (1910)

मौतें : 8 लाख से अधिक

हैजा के कारण फैली हैजा महामारी की शुरुआत भारत से हुई और इस बीमारी ने करीब 8 लाख से अधिक लोगों की जान ले ली। हैजा बीमारी की चपेट में मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पूर्वी यूरोप और रूस भी आ गए थे।

अमेरिका स्वास्थ विभाग इस महामारी के प्रति जल्दी एक्टिव हुए और वर्ष 1923 तक सिर्फ 11 अमेरिकियों की जान इस बीमारी की वजह से चली गई।