नकारात्मक सोच से कैसे छुटकारा पाएं!

परिस्थितियां सोच की जननी होती है, फिर वही सोच आगे चलकर सकारात्मक एवं नकारात्मक परिस्थितियों को जन्म देती है। नकारात्मक सोच की शुरूआत किसी विपरीत परिस्थिति से होती है। नकारात्मक विचार हमारे मानसिक और शारारिक स्वास्थ्य के दुश्मन है। नकारात्मक विचारों से डर और तनाव पैदा होता है। यदि नकारात्मक विचार दिमाग में अपना घर बना ले तो उससे जीवन नरक बन जाता है। तो आइये जानते हैं कि ‘नकारात्मक विचारों से छुटकारा कैसे पाएं’:-

सुबह जल्दी उठें

सुबह की शुरुआत अगर अच्छी हो तो पूरा दिन सकरात्मक रहता है इसलिए सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। सुबह जल्दी उठना और एक नियमित दिनचर्या का पालन करना आपको बुद्धिमान बनाता है। सुबह जल्दी उठने से आपके पास अपने पूरे दिन की तैयारी के लिए काफ़ी समय होता है।

योगा करें

योगा करने से न सिर्फ हमारा शरीर स्वस्थ होता है बल्कि इससे हमारे मानसिक विकास में भी बदलाव आता है। रोजाना 30 मिनट योगा करना अच्छा रहता है। इससे आपके दिमाग में सकारात्मक विचार आते हैं, मानसिक शांति मिलती है और साथ ही पूरा दिन शरीर में एक नयी उमंग रहती हैl

ईश्वर में ध्यान लगाएं

सुबह के समय कुछ देर ईश्वर में ध्यान लगाएं इससे आपका मन शांत रहेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। भगवान से प्रार्थना करें इससे आपको बहुत अच्छा महसूस होगा।

गलत संगत से दूर रहें

सबसे जरुरी है ऐसे लोगों को पहचानना जो नकारात्मक सोच वाले हों। ऐसे लोगों के संपर्क में रहने से हमारे जीवन में  नकारात्मकता हावी होने लगती है क्यूंकि हमारी सोच पर संगत का बहुत असर होता है।

अगर आप कुछ अच्छा काम करने की सोचते हो तो बुरी संगत में आप वह काम नहीं कर पाएंगे । बुरी संगत से आदमी न सिर्फ नकारात्मक बनता है बल्कि गलत आदतों का शिकार भी हो जाता है इसलिए गलत संगत से हमेशा दूर रहना चाहिए।

म्यूजिक सुनें

जब भी आप अकेलापन महसूस करें या जीवन में नकारात्मकता बढ़ने लगे तो संगीत सुने। इससे आपके दिमाग में नकरात्मक विचार नहीं आएंगे और आपका मूड भी फ्रेश हो जायेगा। संगीत सुनने से आपको एक नए जोश के साथ आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।

अपनों के साथ समय बिताएं

जितना हो सके अपने पेरेंट्स, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय बिताएं, उनके साथ खाना खाएं, टीवी देखें, गेम्स खेलें। ऐसा करने से आपके मन में आने वाले नकारात्मक विचार दूर होंगे और आपको पॉज़िटिव एनर्जी मिलेगी। वर्तमान के बारे में सोचें l ज़्यादातर लोग पुरानी बातों और ग़लतियों के कारण नकारात्मक सोच का शिकार होते हैं लेकिन अगर आप आज के बारे में सोचेंगे तो आप ख़ुश रहेंगे।

नए दोस्त बनायें

महिला हो या पुरुष अगर जीवन में दोस्तों की कमी हो तो जीवन में अकेलापन बढ़ता है और हम किसी से भी सुख दुःख शेयर नहीं कर पाते जिससे नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। जहाँ तक हो सके नए दोस्त बनायें और उनके साथ हंसी मजाक करें और हमेशा सकारात्मक बाते करें।

हमेशा खुश रहें

ज़िन्दगी में खुश रहना मतलब सकारात्मकता का होना है। अक्सर आदमी के दिमाग में नकारात्मक सोच तब आती है जब वह दुखी या परेशान होता है। अगर आपको किसी काम से असफ़ल होने पर दुःख हो रहा है तो ये नहीं सोचें की आपको उससे कुछ नहीं मिला बल्कि ये सोचें कि आपने वहां से बहुत कुछ सीखा है और आगे आप उसे बेहतर ढंग से कर सकते हो इसलिए जितना हो सके खुश रहें।

जानिए कोरोना वायरस से बचने के लिए कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

जानिए कोरोना वायरस से बचने के लिए कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

कोरोना वायरस के प्रकोप ने दुनिया भर के देशों को प्रभावित किया है। इस खतरनाक वायरस के संक्रमण को कम करने के लिए प्रत्येक देश संभव कोशिश कर रहा है। फिलहाल इस वायरस से बचने के लिए केवल सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र उपाय है। इसके साथ ही यदि मानव शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो वो किसी भी बीमारी से लड़ सकता है। मजबूत इम्यून सिस्टम इंफेक्शन से लड़ने में मदद कर सकता है।

प्रोटीन से भरपूर चीज़े खाएं

प्रोटीन से हमारे शरीर को अमीनो एसिड मिलता है, जो हमारे शरीर में हेल्पर टी-सेल्स को जनरेट करने में मदद करता है। ये टी-सेल्स हमारी इम्युनिटी क्षमता बढ़ाने वाले सेल्स को एनर्जी देते हैं। इसके लिए आप  दलिया, उबली हुई दालों की सलाद, साबुत अनाज और (स्प्राउट्स) खा सकते हैं।

कुछ देर धूप में जरूर बिताएं

धूप में कुछ समय जरूर बिताएं। धूप में वक्त बिताना इसलिए जरूरी है क्योंकि धूप हमारे शरीर में मौजूद इंफेक्शन से फाइट में मदद करने वाली टी-सेल्स को एनर्जी देने का काम करती है।

अदरक और लहसुन का सेवन करें

अदरक में कई एंटी-वायरल तत्व मौजूद होते हैं। आप इसे सौंफ या शहद के साथ ले सकते हैं। उसी प्रकार एंटिऑक्सीडेंट्स के गुणों से भरपूर लहसुन शरीर में वायरस इंफेक्शन या बैक्टीरिया को रोकने में मदद करता है। इनके नियमित रूप से सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

विटामिन सी युक्त चीजों का सेवन करें

विटामिन सी शरीर में न सिर्फ हड्डियों को मजबूत करती है बल्कि इम्यूनिटी क्षमता को भी बढ़ाती है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। आप शिमला मिर्च, पालक, आंवला, पपीता, संतरा, नीम्बू ,और अमरूद जैसी चीजों का सेवन कर विटामिन सी प्राप्त कर सकते हैं।

मैडिटेशन करें

मैडिटेशन करने से हमारा दिमाग शांत रहता है और हैपी हॉर्मोन्स का उत्पादन बढ़ता है। ये हॉर्मोन्स हमारे शरीर की अन्य कोशिकाओं को स्ट्रेस फ्री करने में मदद करते हैं, जिससे हमारा शरीर अंदर से मजबूत बनता है।

व्यायाम करें

जो लोग सप्ताह में 5 से 6 दिन व्यायाम करते हैं, उन्हें सर्दी और गले में खराश होने के चांस उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं, जो लोग व्याया नहीं करते हैं। व्यायाम से हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बूस्ट होता है और तेजी से ब्लड सेल्स बनाता है। ये ब्लड सेल्स शरीर में पहुंचे वायरस को मारने का काम करता है।

खुश रहने का प्रयास करें

स्ट्रेस फ्री रहना कई तरीकों से हमारी इम्युनिटी बढ़ाता है। इसके लिए आप डांस, म्यूजिक, मेडिटेशन, भजन-कीर्तन और पसंदीदा किताबों की मदद ले सकते हैं। खुश रहने की अधिक से अधिक कोशिश करें, क्योंकि खुश रहने से हमारे शरीर को रिलैक्सेशन मिलती है। जब शरीर रिलैक्स होता है तो इम्यूनिटी अपने आप बढ़ जाती है।

पर्याप्त नींद लें

नींद हमारे शरीर को इम्यून सेल्स के फैलाव में मदद करती है यानी नींद के वक्त हमारे इम्यूनिटी सिस्टम के लिए इंफेक्शन वाली जगह खोजकर वहां इम्यून सेल्स को पहुंचाना आसान हो जाता है। फिर ये इम्यून सेल उन वायरस को खत्म करने का काम करती हैं। इस तरह से नींद शरीर की इम्यूनिटी क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।

सुंदरवन के बारे में कुछ रोचक तथ्य

सुंदरवन के बारे में कुछ रोचक तथ्य

सुंदरवन लंबे समय से अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। सुंदरवन भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित एक डेल्टा क्षेत्र हैं जो वन्यजीवों में खासकर रॉयल बंगाल टाइगर के लिए पूरी दूनिया में प्रसिद्ध है। यहां रहने वाले जीव-प्रजातियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया है।

यहां पर वन्य जीवों के अलावा वनस्पतियों की कई अनोखी और दुलर्भ प्रजातियां पाई जाती है। यहां सुंदरी नाम के पेड़ भारी संख्या में पाए जाते हैं, जिसके नाम पर इस डेल्टाई क्षेत्र का नाम “सुंदरवन” पड़ा। आइए जानते हैं सुंदरवन के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • सुंदरवन का नाम इस जंगली इलाके में भारी संख्या में पाए जाने वाले “सुन्दरी” पेड़ो से लिया गया है और साथ ही बंगाली भाषा के शब्द “शुंदोर” का प्रयोग करके इसका नाम सुंदरवन रखा गया l आम भाषा में लोग इस वन को सुंदरबन या सुंदरवन के नाम से जानते है l
  • सुंदरवन में मौजूद मैनग्रोव जंगल यहाँ के रॉयल बंगाल टाइगर का घर माना जाता है जो दलदली जमीन पर बना हुआ है।
  • सुंदरवन का इतिहास 200-300 ईस्वी के आसपास का माना जाता है इसका प्रमाण बागमरा फारेस्ट ब्लाक में मिले अवशेषों से मिलता हैं |
  • सुंदरवन में तरह-तरह की वनस्पतियां पाई जाती है जो पूरी दुनिया में सिर्फ यहाँ पर ही मिलती है l
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि सुंदरवन में भारत का सबसे बड़ा फिशरी बोर्ड है जहां सुंदरवन डेवलपमेंट बोर्ड 50 हेक्टेयर के इलाके में फिशरी प्रोजेक्ट चलाता है l
  • सुंदरवन में स्तनधारियों की 50 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती है। इसके अलावा 60 से ज़्यादा रेंगने वाले जीवों की प्रजातियाँ, 300 से ज़्यादा पक्षियों और वनस्पतियों की प्रजातीयाँ पाई जाती है l
  • सुंदरवन 10,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें से 6000 वर्ग किमी बांग्लादेश में आता है और भारत के हिस्से में 4110 वर्ग किमी आता है |
  • पश्चिम बंगाल में सुंदरवन क्षेत्र, रॉयल बंगाल बाघों के लिए प्रसिद्ध है।
  • सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है | गंगा और ब्रह्मपुत्र दोनों नदियों के एकीकरण से बने इस डेल्टा को बंगाल डेल्टा या ग्रीन डेल्टा भी कहा जाता है |
  • सुंदरवन को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है जिसकी वजह से इसका संरक्षण काफी बड़े स्तर पर हो रहा है |
  • सुंदरवन डेल्टा बंगाल बेसिन से जुड़ा विश्व का सबसे चौड़ा, गहरा और सबसे सक्रिय डेल्टा है l
  • सुंदरवन सर्वाधिक हराभरा रहने वाला वन है इसका कारण यहाँ पर होने वाली सर्वाधिक वर्षा है। सुंदरवन को वर्षावन भी कहा जाता है।
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि सुंदरवन के विशाल डेल्टा में 5-6 द्वीप नहीं बल्कि 54 छोटे छोटे द्वीपों का समूह है l

विश्व से जुड़े कुछ ऐतिहासिक रोचक तथ्य !

विश्व से जुड़े कुछ ऐतिहासिक रोचक तथ्य !

  • प्राचीन रोमन कैलेंडर में जनवरी और फरवरी के महीने नहीं होते थे। अतः उनका नव वर्ष 1मार्च को मनाया जाता था।
  • भारत का सबसे पहला ग्रंथ वेद हैं। वेदों की कुल संख्या चार है – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद।
  • वेदों को अच्छी तरह से समझने के लिए वेदांगो की रचना की गई है जिनकी संख्या 6 है– शिक्षा, ज्योतिष, कल्प, व्याकरण, निरूक्त और छंद।
  • हिंदु महाकाव्यों और पुराणों में भारत को ‘भारतवर्ष’ कहा गया है जिसका अर्थ है – ‘भरत का देश’। इन्हीं ग्रंथों में यहां के निवासियों को ‘भारत संतति’ कहा गया है अर्थात् ‘भरत की संतान’।
  • क्या आप जानते हैं सबसे पहले मिले कंकाल का नाम ‘लूसी’ रखा गया था।
  • मैक्सिको के राजा सैंटा एना का युद्ध के दौरान पैर कट गया था, पर क्या आपको पता है कि उस पैर का क्या हुआ? उस पैर का बाकायदा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया l
  • हमारे प्राचीन विद्वानों ने हिमालय से लेकर समुद्र तक फैली हुई भूमि को चक्रवर्ती सम्राट की निजी जागीर बताया है।
  • प्राचीन मिश्र में मधुमक्खियों के हमलों से बचने के लिए नौकरों के शरीर पर शहद लगाकर उन्हें शहर से बाहर कर दिया जाता था , ताकि मधुमक्खियां राजमहल में न जाकर किले से बाहर ही रहें।
  • 19वीं शताब्दी से पहले जानवरों पर भी मुकदमे चलाए जाते थे।
  • संसार का सबसे पुराना बबलगम 9000 साल पुराना है।
  • 1811 में एक जबरदस्त भूचाल के कारण उत्तरी अमेरिका की मिसिसीपी नाम की नदी उल्टी दिशा में बहने लगी थी।
  • किसी समय तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे भारत में प्राकृत भाषा का उपयोग होता था l
  • हिमालय के पर्वत साल के ज़्यादातर समय बर्फ से ढके रहते हैं इसी कारण किसी भी भारतीय राजा ने उत्तरी क्षेत्रों को  जीतने के लिए अभियान नहीं चलाया।
  • वैदिक काल में पत्नी को इस प्रकार सम्मान दिया गया है – ‘वो अर्धांगिनी और सच्ची मित्र है। वो गुणों का स्रोत है। वो खुशी और लक्ष्मी का रूप है। जब आप उसके साथ अकेले होते हैं, तो वो आपकी मित्र होती है, जब आप उसके साथ विचार-विमर्श करते हैं, तो वो पिता के समान होती है।’
  • डॉक्टर स्मिथ के अनुसार ‘विष्णु पुराण’ मौर्य वंश की और ‘मत्स्य पुराण’ आन्ध्र एवं शिशुनाग वंश के संबंध में जानकारी प्रदान करते हैं।
  • क्या आप जानते हैं यूरोप में कुछ जगहों पर 15वीं शताब्दी में मृतकों के शवों को खाया जाता था। इसके पीछे यह मान्यता थी कि ऐसा करने से वे रोगो से बच सकेंगे।
  • 755 ईस्वी के आसपास चीन के लुसान में हुए विद्रोह में 30 मिलियन के करीब लोगों की मौतें हुई थी, जो उस समय  दुनिया की आबादी का 1/6 हिस्सा था।
  • प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत में अमेरिकी एयरफोर्स में महज 18 पायलट थे।
  • क्या आप जानते हैं कि इंग्लैड और जंजीबार में युद्ध हुआ था जो केवल 38 मिनट तक ही चला था।
  • क्या आपको पता है कि मध्यकाल में नकली दांतों को कैसे लगाया जाता था? मध्यकाल में जो लोग युद्ध में मारे जाते थे उनके दांतों को निकाल लिया जाता था, ताकि वो किसी और को लगाए जा सके l

विलुप्त हो रही प्रजातियाँ जिनके बारे में आपको नहीं पता

पृथ्वी आकर्षक वन्य प्रजातियों से भरी हुई है. पृथ्वी पर ऐसी भी बहुत सी विलुप्त हो रही प्रजातियाँ हैं जिनके बारे में शायद ही आपको को पता होगा. आइए जानें ऐसी प्रजातियों के बारे में जो विलुप्त हो रही हैं.

सिल्की (Silkie)

silkieसिल्की एक मुर्गे की नस्ल है जिसके पखं बहुत ही मुलायम होते हैं. सिल्की नस्ल की त्वचा और हड्डियाँ काले रंग की होती हैं और उनके पैर में पांच उगलियाँ होती हैं. जबकि दूसरी प्रजातियों में केवल चार ही उगलियाँ होती हैं. ऐसे ही कई और अन्य असामान्य गुणों के कारण यह प्रजाति सबसे अलग है. इनकी विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं के अलावा सिल्की प्रजाति शांत और दोस्ताना स्वभाव के लिए भी जानी जाती है.

सुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया (Sunda Flying Lemur)

sunda-flying-lemurसुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया को मलायी कोलुगो भी कहा जाता है. दरसल कोलुगो एक प्रजाति है जो इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया में पाई जाती है. सुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया प्रजाति रात को ही जागती है. इस प्रजाति के जीव केवल पत्तियां, फूल, फल और टहनियों के मुलायम भाग ही खाते हैं. सुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया एक कुशल पर्वतारोही है लेकिन जमीन पर असहाय है.

सोनकुत्ता (Dhole)

dholeसोनकुत्ता, वनजुक्कुर कुत्तों के कुल का जंगली प्राणी है जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है. यह अपनी प्रजाति का इकलौता जीवित नस्ल है. इस प्रजाति को अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा विलुप्त प्रजाति घोषित कर दिया है क्योंकि इनके आवास क्षेत्र और शिकार की कमी के कारण इनकी संख्या तेज़ी से घट रही है. हालाँकि वनजुक्कुर कुत्ते मनुष्यों से डरते हैं लेकिन इनके झुण्ड बड़े और खतरनाक होते हैं यहां तक की जंगली सुअर, जंगली भैंसा तथा बाघ पर आक्रमण करने से भी नहीं हिचकिचाते हैं. यह अपने शिकार को भगा-भगा के मारते हैं.

मारखोर (Markhor)

markhorमारखोर जंगली बकरी की एक बड़ी प्रजाति है जोकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कश्मीर, तजाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान में पाई जाती है. IUCN की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रजाति लुप्त हो रही है. मारखोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु है. मारखोर नाम थोड़ा अजीब है. फ़ारसी में इसका मतलब एक साँप खाने वाला पहाड़ी जानवर है.

चपटी नाक वाला बंदर (Snub-nosed Monkey)

snub-nosed-monkeyकाफ़ी समय पहले से चपटी नाक वाले बंदरों का समूह पाया जाता है. इनकी पूंछ 55 से 97 सेमी तक लंबी होती है. चपटी नाक वाले बंदर विशेष रूप से दक्षिणी चीन, तिब्बत, सिचुआन, युन्नान, वियतनाम और म्यांमार के उत्तरी भागों में पाये जाते हैं. ये बंदर ज्यादातर पेड़ों पे ही रहते हैं. यह समूह बना कर रहते हैं जिसमें 600 से अधिक बंदर होते हैं. सर्दियों में भोजन की कमी की वजह से ये छोटे छोटे समूहों में बंट जाते हैं.

रकून कुत्ता (Raccoon Dog)

raccoon-dogरकून कुत्ते या तनुकी (tanuki) पूर्व एशिया में पाए जाते हैं. यह बहुत ही अनोखे कुत्ते होते हैं. यह न्य्क्टेरयूतेस (Nyctereutes) की प्रजाति है.

मानेद वुल्फ (Maned Wolf)

maned-wolfमानेद वुल्फ दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी प्रजाति है. यह लोमड़ी की तरह है जिसके पतले पैर और लंबी टागें हैं. यह दक्षिण अमेरिका के घास के मैदानों में पाया जाता है. इसके लम्बें पैर घास के मैदानों के लिए अनुकूल हैं.

गेरेनुक (Gerenuk)

gerenukगेरेनुक एक हिरन की प्रजाति है. लेकिन इनकी आँखें और कान अनुपात में बड़े होते हैं. यह प्रजाति पूर्वी अफ्रीका में पाई जाती है. गेरेनुक हिरन की गर्दन लंबी होती है.

अमेजन रॉयल फ्लाईकैचर (Amazonian Royal Flycatcher)

amazonian royal flycatcherअमेजन रॉयल फ्लाईकैचर तानाशाह फ्लाईकैचर परिवार का एक गौरैया पक्षी है. वे अमेजन घाटी के वनों में पाए जाते हैं. इनकी लंबाई 6 इंच तक होती है. बर्ड लाइफ इंटरनेशनल (BirdLife International) के अनुसार यह प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है.

ज़ेबरा दुइकर (Zebra Duiker)

zebra-duikerज़ेबरा दुइकर एक छोटा हिरन होता है जो की अफ्रीका में पाया जाता है. इनके शरीर पर काले रंग की धारियाँ, पैर पर काले निशान और चेहरे पर लाल-भूरे रंग के बाल होते हैं. इनकी लंबाई 90 सेमी और ऊंचाई 45 सेमी तक होती है. ज़ेबरा दुइकर का बजन 20 किलो तक होता है. इनके सींग 4.5 सेमी लंबे होते हैं. ज़ेबरा दुइकर तराई वर्षावन में रहते हैं और ज्यादातर पत्तियां व फल ही खाते हैं.

पृथ्वी पर 10 सबसे अदभुत घटनाएँ

प्रकृति बहुत सुंदर और अदभुत है. इसके रंग निराले है. कभी-कभी प्रकृति ऐसे दृश्यों, संयोगों या घटनायों का निर्माण करती हैं जो हमें हैरत में डाल देते हैं और सोचने को मजबूर कर देते हैं कि क्या यह वास्तव में हैं या कोई सपना है.

हम आपको प्रकृति द्वारा निर्मित कुछ ऐसे ही चुनिन्दा 10 घटनाक्रम और दृश्य दिखाने जा रहे हैं जो वाकई में हैरतअंगेज हैं. लेकिन सच्चाई यही है कि यह दृश्य या घटनाएं वास्तविक हैं और प्रकृति द्वारा ही सृजित यानि उत्पन्न हैं.

अन्टार्कटिका में खून का गिरना

top-10-amazing-events-on-earth-Blood-Falls-in-Antarctica अंटार्कटिका (Antarctica) में टेलर ग्लेशियर (Tylor Glacier) के मुहाने से वेस्ट लेक बोन्नी (West Lake Bonney) में गिरने वाला पानी खून जैसा दिखता है. इस कलगी वाले नमकीन पानी में आयरन-ऑक्साइड की अधिकता होने के कारण इस पानी का रंग खून जैसा दिखता है. यह जगह पूर्वी अंटार्कटिका के विक्टोरिया लैंड(Victoria Land) में स्थित मैकमुरदो सूखी वैली (McMurdo Dry Valley) की टेलर वैली में है.

कैलुआ, हवाई में नीलगिरी के इंद्रधनुषी पेड़

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नीलगिरी (Eucalyptus deglupta) का पेड़ काफी ऊँचा होता है जिसे सामान्यत: इंद्रधनुषी नीलगिरी का पेड़ भी कहा जाता है. यह नीलगिरी पेड़ों की एकमात्र ऐसी किस्म है जो केवल न्यू-ब्रिटेन (New Britain), न्यू गिनी (New Guinea), सीरम(Ceram), सुलवेसी(Sulawesi) और मीदंनाओ(Mindanao) में पाई जाती है. अद्वितीय बहुरंगी छाल इस पेड़ का विशिष्ट गुण है. इस पेड़ की बाहरी छाल के हिस्से हर साल अलग अलग समय पर निकलते रहते हैं, जिनके निकलने पर हरे रंग की चमकीली परत निकल आती है. इसके धीरे-धीरे यह परत नीले, बैंगनी, नारंगी और फिर लाल रंग की परत में बदलती जाती है जिससे पूरा पेड़ इन्द्रधनुषी रंग में नज़र आता है.

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 अरिजोन की लहर

top-10-amazing-events-on-earth-the-wave-arizona अरिजोन की लहर जिसको “वेव ऑफ़ ओरिजिन” के नाम से भी जाना जाता है. अमेरिका के उत्तरी हिस्से में परिया घाटी में स्थित है. यह जगह संदूरी चट्टानों से घिरी हुई है. इन चट्टानों को संदूर-बलुआ पत्थर भी कहा जाता है. यह जगह फोटोग्राफरों और पर्यटकों की पसंदीदा जगह है.

वाढू के झिलमिलाते किनारे, मालदीव्स

top-10-amazing-events-on-earth-vaadhoo-island-maldivesसमुन्द्र के किनारों पर काँटों की रौशनी के जगमगाने का दृश्य मालदीव में देखने को मिलता है. चमकती हुई नीली लहरें, जैविक रौशनी असल समुंदरी जीवों द्वारा पैदा की जाती है. इस दृश्य से यह जगह धरती पर स्वर्ग सी लगती है. रात को यह जगह दुनिया की सबसे रोमांटिक जगह लगती है.

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मोस्को के ऊपर प्रकाश के स्तंभों का बनना

top-10-amazing-events-on-earth-light-pillars-over-moscowयह दृश्य तब बनता है जब आकाश में बर्फ के क्रिस्टलों पर रौशनी पडती है. यह रौशनी सूरज, चंद्रमा और कहीं से भी आ सकती है. बर्फ के क्रिस्टलों पर जब रौशनी पडती है तब यह क्रिस्टल आकाश में अलग-2 कलाकृतियाँ बनाते हैं.

बोलीविया की चिंतनशील साल्ट फ्लैट

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यह एक हैरान कर देने वाला दृश्य है. जिसमें आकाश और धरती मिलकर एक अदभुत दृश्य बनाते हैं. सलार दे उयुनी दुनिया की सबसे बढ़ी नमक वाली सपाट जगह है. यह जगह पानी से नही, पूरी तरह से नमक से ढकी हुई है. यह जगह आकाश के लिए शीशे का काम करती है.

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 मेक्सिको में भूमिगत प्राकृतिक फव्वारा

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मेक्सिको में ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जिनपर विश्वास करना बहुत कठिन है.यह भूमिगत प्रक्रतिक स्प्रिंग यानि फव्वारा भी उन जगहों में से एक है. इनको सेनोत भी कहा जाता है. यह एक कुदरती गड्डा होता है, जो चूना पत्थर के नीचे गिरने से बनता है.

 ज्वालामुखी का में बिजली और गर्जना

top-10-amazing-events-on-earth-volcanic-lightninज्वालामुखी के भयंकर तूफ़ान को “वोल्कानिक रौशनी” भी कहा जाता है. यह तूफ़ान असल में ज्वालामुखी के बादल होते हैं. जो बहुत भयंकर बिजली पैदा करते हैं. विज्ञानियों का मानना है कि यह रौशनी तब पैदा होती है जब ज्वालामुखी में पत्थर के टुकड़े, उसकी राख आपस में टकराते हैं.

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 पाकिस्तान में भूत जैसे दिखाई देने वाले पेड़

top-10-amazing-events-on-earth-spiderweb-cocooned-trees-in-pakistanपाकिस्तान में जब बाढ़ आई थी तो लाखों की तादाद में मकड़ियां बाढ़ के पानी से बचने के लिए इन पेड़ों पर चढ़ गई और इन पेड़ों पर जाल बिछा दिए. क्योंकि बाढ़ का पानी काफी समय तक रहा इसलिए इन मकड़ियों ने पूरे पेड़ों पर ही अपने जाल बिछा दिए. अब यह पेड़ भूतों की तरह दिखते हैं.

 कैंद्ली झील में पानी के नीचे वन

top-10-amazing-events-on-earth-underwater-forest-of-lake-kaindyयह धंसे हुए और पानी के भीतर जंगल कैंद्ली झील का हिस्सा हैं. यह जंगल 400 मीटर तक फैले हुए हैं. यह जगह अल्माती से 129 किलोमीटर दूर हैं. यह झील भूस्खलन से बनी हुई है, जो कि 1911 में भूकंप के कारण हुआ था. यह बहुत ही खूबसूरत और आनंदमय जगह है.

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डायनासोर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

डायनासोर का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में बहुत बड़े- बड़े जानवरों की छवियां आने लगती हैं। आज से करोड़ों साल पहले धरती पर सबसे बड़े जीव यानि डायनासोर का अस्तित्व था, लेकिन आज के युग में डायनासोर के केवल अवशेष ही पाये जाते हैं। डायनासोर एक बहुत बड़े आकार का जीव था। आइये जानतें हैं डायनासोर से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में :-

  • डायनासोर पृथ्वी पर करीब 150 करोड़ वर्ष पहले रहते थे, यह समय धरती के अस्तित्व का मध्य काल था।
  • डायनासोर शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले ब्रिटिश पलांटोलॉजिस्ट रिचर्ड ओवेन ने सन 1842 में किया इसका मतलब होता है “भयानक छिपकली” l
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ डायनासोर शाकाहारी और कुछ मांसाहारी हुआ करते थे। इसके अलावा कुछ डायनासोर दो पैरों से चलने वाले तो कुछ चार पैरों पर चलने वाले हुआ करते थे। ऐसा माना जाता था कि डायनासोर अपनी आवश्यकता के अनुसार दो और चार पैरों के रूप में अपने शरीर को बदल लेते थे।
  • वैसे तो अधिकतर डायनासोर बहुत विशालकाय शरीर वाले होते थे लेकिन कुछ डायनासोर की प्रजातियों का आकार इंसान के बराबर भी हुआ करता था।
  • जो डायनासोर छोटे आकार के होते थे उनका कद 4 से 5 फिट का होता था परन्तु विशालकाय डायनासोर का कद करीब 50 से 60 फीट भी होता था।
  • माना जाता है कि उस समय डायनासोर की लगभग 2468 प्रजातियां थी जिनमें से कुछ प्रजातियां उड़ भी सकती थी l
  • शाकाहारी डायनासोर 1 दिन में 1 टन पत्तियां खा जाते थे।
  • डायनासोर करीब 20 मील प्रति घंटे की तेज रफ्तार से दौड सकते थे।
  • जिस प्रकार पक्षी अपने अंडों के लिए घोंसला बनाते हैं वैसे ही डायनासोर भी अपने अंडे देने के लिए घोंसले बनाया करते थे। डायनासोर के अंडे टेनिस बॉल और फुटबॉल जितने बड़े हुआ करते थे।
  • डायनासोर की लगभग सभी प्रजातियां अंडे दिया करती थी, परन्तु वैज्ञानिक अभी तक करीब 40 तरह की प्रजातियों के  अंडों की खोज करने में सफल रहे है।
  • डायनासोर के मुंह में 50 दांत होते थे जिससे वह किसी भी अन्य जीव की हड्डियां आसानी से तोड़ सकते थे।
  • क्या आप जानते है डायनासोर की पूँछ करीब 45 फ़ीट लम्बी हुआ करती थी।
  • डायनासोर का शरीर बहुत विशालकाय हुआ करता था, लेकिन एक वयस्क डायनासोर के दिमाग का आकार इंसान के बच्चे के दिमाग से भी छोटा होता था।
  • जिस प्रकार सांप और छिपकली अपनी स्किन छोड़ते हैं वैसे ही डायनासोर भी समयानुसार अपनी स्किन छोड़ते थे।
  • डायनासोर के सर की खोपड़ी की हड्डियों में बड़े बड़े छेद होते थे जो कि उनके सर को हल्का बनाये रखने में उनकी मदद करते थे। डायनासोर के सर का आकार एक कार के आकार जितना होता था l
  • ऐसा माना जाता है कि डायनासोर का जीवन काल करीब 200 साल का हुआ करता था।
  • क्या आप जानते है की 65 करोड़ साल पहले मेक्सिको के पास एक बड़ा उल्कापिंड पृथ्वी से टकराया था जिससे 112 मील  चौड़ा गड्डा बन गया था। इसके बाद धीरे धीरे डायनासोर विलुप्त होने लगे।

फिटकरी से होने वाले चमत्कारी फायदे

फिटकरी से होने वाले चमत्कारी फायदे

हमारे रोजमर्रा के जीवन में फिटकरी बहुत उपयोगी होती है। फिटकरी का इस्तेमाल स्किन से लेकर गंभीर या हल्की चोटों तक बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए घर में फिटकरी का होना जरुरी है।  इसका प्रयोग पीने के पानी को साफ करने के लिए किया जाता है, ताकि पानी में मौजूद कीटाणु समाप्त हो जाएं। इसके अलावा त्वचा की सफाई के लिए भी फिटकरी का उपयोग किया जाता है। फिटकरी से बहते हुए खून को भी रोका जा सकता है। अधिकांश लोग इसे ही फिटकरी का सबसे बड़ा फायदा मानते हैं।

फिटकरी से होने वाले फायदे

चोट लगने पर

अगर चोट लग जाने की वजह से  शरीर से लगातार खून निकल रहा हो तो बहते हुए खून को रोकने के लिए फिटकरी का प्रयोग कर सकते हैं। फिटकरी को पानी में डुबोकर खून निकलने वाली जगह पर रगड़ने से खून का निकलना बंद हो जाता है।

चेहरे की झुर्रियां दूर करने में

चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए फिटकरी के टुकड़े को पानी में डुबोकर चेहरे पर हल्के हाथ से मलना चाहिए। सूखने पर साफ पानी से धो लें। कुछ ही दिनों में झुर्रियां कम हो जाएंगी।

पसीने की बदबू दूर करने के लिए

अगर आप शरीर की दुर्गंध से परेशान हैं तो फिटकरी का इस्तेमाल कर सकते हैं। पैरों की बदबू दूर करने के लिए भी फिटकरी का प्रयोग किया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार फिटकरी का इस्तेमाल त्वचा की दुर्गंध हटाने के लिए आफ्टरशेव, डिओडरेंट और बॉडी लोशन में भी किया जाता है।

माउथवॉश के लिए

मुंह की गंदी बदबू के मुख्य कारणों में से एक निश्चित रूप से बैक्टीरिया की उपस्थिति होती है, जो अक्सर विषाक्त पदार्थ और एसिड बनाते हैं। फिटकरी युक्त माउथवॉश से मुंह की सफाई करने से बैक्टीरिया के विकास को रोका जा सकता है। इस प्रकार आप फिटकरी का उपयोग करके मुंह से आने वाली बदबू को दूर कर सकते हैं।

फटी एड़ियों का उपचार

फटी एड़ियों का उपचार फिटकरी पाउडर के द्वारा किया जा सकता है। इसके लिए एक छोटे बर्तन में फिटकरी डालकर पानी को गर्म कर लें। जब फिटकरी पूरी तरह से पिघल जाये तो इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें। फिर इसे नारियल के तेल के साथ मिलाकर पैरों में लगाए। यह फटी एड़ियों को ठीक करने का सबसे अच्छा उपचार है।

मौसमी समस्या होगी दूर

एक अध्ययन के अनुसार, फिटकरी के इस्तेमाल से मौसमी एलर्जी जैसी बीमारियों से राहत पाई जा सकती है।

मुंहासों से परेशान

अगर आप मुंहासों से परेशान हैं तो फिटकरी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। फिटकरी एस्ट्रिजेंट गुणों से समृद्ध होती है। इसमें मौजूद एस्ट्रिजेंट के गुण मुंहासों को ठीक करने का काम करते हैं। मुंहासों से राहत पाने के लिए आप फिटकरी का पेस्ट प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं।

जहरीले कीड़े के डंक का उपचार

अगर आपको बर्र, मधुमक्खी, बिच्छू या किसी अन्य जहरीले कीड़े ने काट लिया हो तो फिटकरी के पाउडर को पानी में डालकर एक गाढ़ा घोल बना लें। अब इस घोल को प्रभावित अंग पर लगाएं। इस घोल को लगाने से दर्द में राहत मिलती है तथा विष का असर भी खत्म होता है।

“मैं देशभक्त हूँ”, “आई लव इंडिया”…,”पर मुझे पैसा चाहिए!!”

मा.मोहन लाल, पूर्व परिवहन मंत्रीपंजाब

वर्षों से यह प्रश्न भारत के लोगों को उद्वेलित करता चला आ रहा है कि ‘विश्वगुरु‘ कहलाने वाला भारत देश 1250 साल तक गुलाम क्यों रहायह सोने की चिड़िया‘ कहा जाने वाला भारत वर्ष इतने लम्बे समय तक गुलाम कैसे रहा?

सोते समय कई मर्तबा मेरे स्वयं के मन में यह विचार हिचकोले खाता रहता है कि इतने उच्च आदर्शों वाला यह देश इतनी शताब्दियों तक गुलाम क्यों बना रहाइतनी लम्बी इसकी विरासतइतनी सुशील इस देश की संस्कृतिइतनी श्रेष्ठ इसकी सभ्यता और फिर भी इतनी दीर्धावस्था तक यह देश गुलाम क्यों रहाआश्चर्य है कि दुनिया के किसी मुल्क ने इतनी लम्बी गुलामी नहीं सही।

राम-कृष्ण का देशनानक-गोबिंद सिंह का देश और फिर भी गुलामगुलाम ही नहींलम्बे समय तक गुलाम। जानते हो क्योंक्योंकि जब भी यह देश संकट में आया कुछ काली भेड़ों ने इसे गुलाम बना दिया।

आज विश्व कोरोना वायरस से सहमा हुआ है। इस भयंकर महामारी से भारत त्रस्त है। नित नए केस कोरोना वायरस के डिटैक्ट हो रहे हैंलोग मर रहे हैं और इधर ध्यान तो दो कि कुछ लोग हैंड सैनेटाइजर‘ नकली बनाने को दौड़ पड़े। पैसे की खातिर हाथ धोने वाले लोशन तक को नकली बनाने लगे। निकम्मे और तुच्छ से लगने वाले मास्कों‘ की पूर्ति को बाजारों से गायब कर दिया। और तो और प्रयोग किए गए मास्कों को झाड़-पोंछ कर पुन: बाजारों में बेचा जाने लगा। टके के मुंह ढांपने वाले मास्क को बीस रुपए में बेचा जाने लगा।

अच्छा होता यदि नये मास्क सरकार लोगों को इस संकट की घड़ी में मुफ्त बांटतीपर सरकारें चलो ऐसा न कर सकी तो क्या मास्कों की बनावटी कमी पैदा कर दी जाएकोरोना वायरस की इस भयंकरता में हम प्रयोग किए जा चुके मास्कों को पुनः प्रयोग करने के लिए बीमारों को बाध्य करेंनकली हैंड सैनेटाइजर बनाने की होड़ में लग जाएंसंबंधित दवाइयों को छुपा लें व महंगे दामों पर बेचने लगेंयह तो इंसानी धर्म नहीं। यह तो आदमी-आदमी के बीच की एकता का प्रमाण नहीं। ऐसा करना तो इंसानियत के विरुद्ध है। संकट की इस भयानक बेला में इस प्रकार के काम तो देश के साथ गद्दारी ही कहे जाएंगे।

क्या ऐसे ही लोगों ने देश को गुलाम नहीं बनायाजब छठी शताब्दी में मोहम्मद-बिन-कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया तो ऐसी ही वृत्ति के लोगों ने राजा दाहिर को उसके हालात पर छोड़ दिया होगाअनिवार्य वस्तुओं को छुपा लिया होगाउसे और उसकी युवा बेटियों की लुटती अस्मत पर मुस्कुराते होंगे।

प्लेग-संक्रमण और बंगाल में आए दुर्भिक्ष में जरूरी चीजों को पैसे के लालची ऐसे लोगों ने ही गायब कर दिया होगा और लोग मरते गए होंगेअहमद शाह अब्दाली ने ऐसे ही तो भारत को लूटा नहीं होगाउसे बुलाया तो किसी भारतवासी ने ही होगातैमूर लंग को भारत का रास्ता हमने ही तो बताया होगा।

महमूद गजनवीमोहम्मद गौरी को भारत आने का निमंत्रण किसी और ने तो भेजा नहीं होगापृथ्वी राज चौहान को गौरी ने नहीं जयचंद ने ही मारा होगाबाबर को भारत पर आक्रमण करने का बुलावा किसी अपने ने ही दिया होगामहाराणा प्रताप के सामने कोई उसका अपना ही भाई शक्ति सिंह बन गया होगा?

अकबर की दक्षिण विजय में कोई राजा जयसिंह ही होगाअंग्रेजों ने कई मीर-जाफर‘ पाल रखे होंगेगुरु गोबिंद सिंह के छोटे साहिबजादों को किसी अपने ने ही सरहिंद की दीवारों में चिनवाया होगामुझे तो साढ़े बारह सौ सालों की भारत गुलामी में अपने ही गद्दार दिखाए दिए हैं। भामाशाह तो सिर्फ एक ही मिला है।

हमें गुलाम किसी और ने नहीं बनायाहमने स्वयं गुलामी को निमंत्रण दिया। पूछो क्योंक्योंकि हमें पैसा चाहिएहमें सत्ता चाहिएहमें पद चाहिएहमें अपनी अलग-अलग रियासत चाहिए। हमने कभी सोचा ही नहीं कि यह देश अपने पुरखों की हमें देन है। हमने कभी ध्यान ही नहीं किया कि समाज की पीड़ा हमारी अपनी पीड़ा है। हमें तो पैसा चाहिए।

एकदम स्वार्थी हैं हम। अपने एक पैसे को बचाने के लिए देश का करोड़ों रुपयों का नुक्सान होता है तो हो जाने दो। यह तो कोई बात नहीं हुई कि हमारे देश के प्रधानमंत्री कोरोना जैसी भयंकर बीमारी का हल खोजने के लिए सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों से विचार-विमर्श कर रहे हों और आप नकली हैंड सैनेटाइजर‘ बनाने में जोर लगाने लग पड़ें क्योंकि इससे आपको पैसा मिलता है।

यह तो मानव धर्म‘ नहीं हुआ कि एक तरफ सरकारें स्कूल-कालेजरेल यातायातहवाई सफर और सरकारी अदारे बंद कर कोरोना वायरस से जंग लड़ रही हैं और एक आप लोग हैं कि एक टके के मास्क को बीस रुपए में बेचने लग पड़े। सारे मास्क ही दबा लिए।

हमसे तो अमरीका अच्छा। चौंकिए मत। वहां के पैंतालीस नौजवान स्वयं साइंस लैबोरेटरियों में गएवैज्ञानिकों से कहा, ‘कोरोना वायरस के कीटाणुओं को हममें इंजैक्ट करो। हम पर प्रयोग करो और पता लगाओ कि इस कोरोना वायरस से इंसानी जिंदगियों को कैसे बचाया जा सकता है। है न इंसानी प्यारहै न देशभक्ति?

हम सिर्फ देशभक्ति का ढिंढोरा पीटते हैं। देशभक्ति का मुखौटा ओढ़े बैठे हैं। भक्त सिंह जिंदाबादशहीदे आजम भगत सिंह अमर रहेअमर रहे जैसे नारे जरूर लगाते हैं परन्तु अंदरखाते प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं कि कहीं भगत सिंह हमारे घर में पैदा न हो?

अजीब देशभक्ति है हमारीहमारा तो सब कुछ पैसा ही हुआ नसामूहिक सोचसामूहिक हितदेश भक्ति सिर्फ नारों में ही हम दिखाते हैं। मुझे तब घृणा हुई कि देश कोरोना जैसी महामारी की गिरफ्त में है और आप नकली दवाइयांनकली सैनेटाइजरनकली और गंदे मास्क महंगे दामों पर बेचने की होड़ में लगे होभयानक संकट है देश पर और आप लोगों को सिर्फ अपने लाभ की चिंता है?

सोचो यदि देश ही नहीं रहेगा तो तुम्हारा धन किस काम कापैसा-पैसा-पैसा यह तो गुलाम मानसिकता है। पहले इस देश ने कम गुलामी देखी हैजला दोफूंक दो इस गुलाम पैसे की मानसिकता को। याद रखो विश्वविजेता सिकंदर महान भी जब इस दुनिया से गया था तो उसके दोनों हाथ खाली थे।

पहले देश और समाजफिर पैसा और पद की सोचो। देश के सामने पैसा बिग जीरो‘ है।

पंजाब केसरी से साभार

जानिए अदरक से होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में

जानिए अदरक से होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में

अदरक एक आयुर्वेदिक औषधि है। अदरक का उपयोग हजारों वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जा रहा है:- जैसे सर्दी, उल्टी, गठिया, माइग्रेन और उच्च रक्तचाप। अदरक एक ऐसी औषधि है जो इन सब रोगों से लड़ सकता है।

  • अदरक में बुरे बैक्टीरिया, वायरस और अन्य जीवाणुओं को मारने की क्षमता होती है। सिर्फ अदरक के सेवन से बुरे बैक्टीरिया को मारने में मदद मिल सकती है। जिन लोगों को बार-बार संक्रमण रोग या इन्फेक्शन वाली बीमारियाँ होती हैं, उनके लिए ये बहुत फायदेमंद है। इसके लिए,अदरक को कच्चा भी खा सकते है या फिर पके हुए रूप में भी अदरक का सेवन किया जा सकता है।
  • अदरक में कैंसर जैसी भयानक बीमारी से शरीर को बचाए रखने का गुण होता है। यह कैंसर पैदा करने वाले सेल्स को खत्म करता है। एक रिसर्च से पता चला है कि अदरक स्तन कैंसर पैदा करने वाले सेल को बढ़ने से रोकता है।
  • अदरक में खून को पतला करने के नायाब गुण होते हैं और इसी वजह से यह ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी में तुरंत लाभ के लिए जाना जाता है।
  • सर्दी-खांसी को दूर करने में भी अदरक एक महत्वपूर्ण औषधि है। इसीलिए सर्दियों के दिनों में इसका उपयोग बहुत अधिक बढ़ जाता है। सर्दी होने पर अदरक का काढ़ा बहुत फायदेमंद होता है।
  • गर्भावस्था के शुरूआती महीनों में आई परेशानियों जैसे मॉर्निंग सिकनेस अदरक से आसानी से दूर हो जाती है। अगर आपका  जी मिचला रहा हो तो अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर सेवन किया जा सकता है।
  • यदि अदरक के रस का सेवन किया जाए तो गठिया रोग ठीक हो सकता है। अदरक में सूजन को खत्म करने वाले गुण होते है। गठिया और थायराईड से ग्रस्त मरीजों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।
  • अदरक का रस दांत दर्द और सिरदर्द के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।
  • अगर त्वचा से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या हो तो अदरक के रस को नियमित तौर पर इस्तेमाल करने से मुहांसों और त्वचा की अन्य समस्यों से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • कॉलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए भी अदरक का रस बहुत उपयोगी होता है। यह रक्त के थक्कों को जमने नहीं देता।
  • आजकल मधुमेह एक बहुत ही आम बीमारी हो गई है, इसके लिए यदि आप अदरक का सेवन करते हो तो यह आपको मधुमेह से आराम दिला सकता है। मधुमेह के लिए अदरक बहुत ही फायदेमंद उपचार है।
  • अगर आप घने और चमकदार बाल चाहते हैं तो अदरक के रस का नियमित उपयोग करने से आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है। अदरक का रस आप पी भी सकते हैं और सीधे सिर की त्वचा पर भी लगा सकते हैं। आपको सिर्फ यह ध्यान रखना है कि आप शुद्ध रस सिर पर लगाएं जिसमें पानी की मात्रा बिल्कुल न हो या फिर न के बराबर हो। यह न केवल बाल स्वस्थ बनाएगा बल्कि रूसी से भी छुटकारा दिलाएगा।
  • यदि पाचन संबंधी कोई भी समस्या है, तो समझ लीजिए कि यह समस्या अदरक से ठीक हो सकती है। अदरक एक ऐसी गुणकारी औषधि है जो आपको न केवल पाचन और गैस बल्कि सभी तरह के पेट दर्द से भी राहत दिलाता है।