गुस्सा कम करने के आसान उपाय

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वैज्ञानिकों के अनुसार गुस्सा करना अपनी भावना व्यक्त करने का माध्यम है, जैसे हम जब ज्यादा परेशान हो जाते हैं, या हमारे मन में कोई डर बैठ जाता है. या फिर हमें किसी चीज के खो जाने का डर होता है. जैसे हमारे अपने, हमारी इज़्ज़त, संपत्ति, या खुद की पहचान, और ख़ास कर तब, जब हमारे पास ऐसे हालत से निपटने के लिए कोई हल नजर नहीं आता.

उदाहरण के लिए:

हम किसी को कोई बात समझाना चाहते हैं, और वह व्यक्ति उस बात को समझने की बजाय आप से वाद-विवाद करने लगे, तो आप अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए गुस्से का सहारा लेते हैं. या फिर हमें पता चलता है, कि हमारे अपनों को, कोई नुकसान पहुंचाना चाहता है पर हम कुछ कर नहीं पाते हैं, तो हमें खुद पर गुस्सा आता है. अगर आप अपने गुस्से को काबू में नहीं रख पाते, तो इससे आपका ही नुकसान है. आपका स्वास्थ्य खराब होता है. आपके मस्तिष्क को हानि पहुँचती है. आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.

यहाँ तक, इसके अधिक प्रचार से दिमाग की नसें फट सकती है, और इंसान की मौत भी हो सकती है. हम गुस्से में अपना साधारण स्वभाव भूल जाते है, क्योंकि इसकी वजह से हमारे मस्तिष्क में हॉर्मोन्स के प्रभाव से दिमाग सुन्न हो जाता है. हमारे सोचने की क्षमता पर असर पड़ता है. हम ऐसा बुरा व्यव्हार करते हैं जिसका बाद में हमें पछतावा होता है.

क्रोध से हम सिर्फ अपना ही नहीं, हमारे अपनों की भी हानि करते हैं. हमारे अतिरिक्त गुस्से से वे भी परेशान हो जाते हैं. उन्हें हमारे कठोर जवाबों से दुःख और तकलीफ होती है, धीरे धीरे वह हमसे दूर होने लगते हैं. बाहर भी, क्रोधित इंसान के स्वभाव की वजह से, कोई उन्हें पसंद नहीं करता. क्रोध को नियंत्रण में लाने के लिए, पहले उसके होने वाले कारण को पहचानना जरूरी है.

आइये जाने गुस्से को काबू में करने के कुछ गुण:

1.बात करते वक़्त, अगर वाद-विवाद की संभावना दिखे तो खुद को तर्क से दूर रखिये.
2.गुस्से को शांत करने के लिए अच्छा गाना गायें या सुनें (जो आपको पसंद हो).
3.अच्छी चीज़ें सोचें, जो चीज़ें आपको ख़ुशी देती है.
4.क्रोध को कम करने के लिए बातचीत बंद करें, और खाने में जो चीज़ पसंद है, उसे स्वयं के लिए बनाना शुरू करें, तो कुछ ही समय में आप क्रोध को भूल जायेंगे.
5.योगा, हमारे शरीर और मन की संतुलन को ठीक रखने में हमारी मदद करता है। हर रोज़ योगा का और मैडिटेशन का प्रयास, क्रोध को नियंत्रण करने में बहुत हद तक मदद करता है.

अगर कुछ काम ना आये तो ज्ञानी पुरुषों की बात मानें और अकेले में “ॐ” स्वर का प्रयोग करें.

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