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पक्षियों की अद्भुत कलाकारी, जानिए कैसे बनाते हैं अपने खूबसूरत घोंसले

दुनियाभर में अनगिनत पक्षी पाए जाते हैं जिसमें हजारों किस्म के पक्षी सामिल है। इनके रहने के अलग-अलग तरीके हैं। इनके घोंसले एक तरह का नहीं बल्कि कई तरह का होते हैं। हर पक्षी अपना घोंसला बनाने के लिए हजार बार उड़ती है चीजें इकट्ठा करके घर बनाने के लिए पूरा ताकत लगा देता है।

आज के इस लेख में हम जानेंगे पक्षियों की अद्भुत कलाकारी से घोंसलों के बारे में:-

छोटा घोंसला

दुनिया का सबसे छोटा पक्षी हमिंग बर्ड अपना घोंसला मकड़ी के जाले, छोटे पत्ते और अपने टूटे हुए पंखों से बनाते हैं। यह घोंसला लचीला होता है। अंडे से बच्चे निकलकर जैसे-जैसे बड़े होने लगते हैं, यह घोंसला भी थोड़ा बड़ा हो जाता है।

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जमीन पर घोंसला

बतख, शतुरमुर्ग, एमू आदि पक्षी जमीन पर घोंसला बनाते हैं। ये पत्ते और झाड़ियों का इस्तेमाल कर अपना घोंसला बनाते हैं। शतुरमुर्ग तो अपना घोंसला रेत पर बनाता है और अपने अंडों की सुरक्षा खुद ही करता है।

गुहा घोंसला या कोटर

पेड़ के मोटे तने को चोंच से कुरेदकर बनाए गए घोंसले को गुहा घोंसला कहा जाता है। तोता, उल्लू, मैना, कठफोड़वा आदि प्रजाति पेड़ के कोटर में अपना घोंसला बनाते हैं।

बड़ा घोंसला

चील, सारस जैसे बड़े पक्षी बड़ा घोंसला बनाते हैं। ये पेड़ की छोटी-छोटी टहनियों और झाड़ियों का इस्तेमाल करके अपना घोंसला बनाते हैं। यह आकार में काफी बड़ा होता है। चील पक्षी अपना घोंसला ऊंची पहाड़ियों या ऊंचे पेड़ों पर बनाते हैं।

तैरने वाला घोंसला इस तरह के घोंसले पानी में तैरने वाले पक्षी बनाते हैं। हंस और बटेर की सारी प्रजातियां इसी तरह से अपना घोंसला बनाती हैं।

Sociable Weaver bird सोशिएबल वीवर बर्ड, इस पक्षी का यह नाम इसलिए रखा गया है, क्योंकि ये झुंड में अपना घोंसला बनाते हैं। एक बड़े-से घोंसले में कई होल्स होते हैं, जिनमें सैंकड़ों पक्षी एक साथ रह सकते हैं।

ये पेड़ की ऊंचाई पर घास की तीलियों और छोटी-छोटी टहनियों से अपना घोंसला बनाते हैं और सालों-साल एक ही घोंसले का इस्तेमाल करते हैं। कई बार दूसरे पक्षी भी इनके घोंसले का उपयोग कर लेते हैं।

लटकता हुआ घोंसला

बया या बुनकर पक्षी समुदाय का सदस्य है। इसका वैज्ञानिक नाम Ploceus philippinus है। यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है। यह सबसे आकर्षक घोंसला बनाने में माहिर होते हैं।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये घोंसला मादा पक्षी (Female Bird) नहीं, बल्कि नर (Male) बनाते हैं। घोंसला बनाने के लिए ये घास की लंबी-लंबी पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं।

जब मेल पक्षी घोंसले का बैसिक स्ट्रक्चर बना लेता है, तब फीमेल बर्ड उसे चेक करती है। अगर उसे सही लगा तो वो आगे का घोंसला बनाने में उसकी मदद करती है।

मिट्टी से बना घोंसला

अबाबील (Clay swallow) पक्षी अपना घोंसला मिट्टी से बनाता है। यह मिट्टी के साथ छोटी झाड़ियां और पत्तों को मिलाकर अपना घोंसला बनाता है। इस तरह बने घोसले का बारिश और तूफान में भी कुछ बिगड़ता नहीं है।

खाया जा सकने वाला घोंसला

स्विफ्टलेट (Swiftlet) एक ऐसा पक्षी है, जो एडिबले नेस्ट (edible nest) बनाता है, जिसे खाया जा सकता है। यह घोंसला ये पक्षी अपने ही (Saliva) यानी लार से बनाते हैं।

चीन के लोग स्विफ्टलेट पक्षी के घोंसले को बड़े शौक से खाते हैं और इसका सूप बनाकर भी पीते हैं। यह पक्षी भारत के अंडमान-निकोबार इलाकों में पाए जाते हैं। इनके घोंसले की कीमत भारत में लगभग 3 लाख रुपए प्रति किलो होती है।

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