गुड़िया छोटे बच्चों का फेवरेट खिलौना होती है। आजकल मार्केट में तरह- तरह की गुड़ियों की भरमार है। हर एक बच्चा इन डॉल्स के साथ खेलना पसंद करता है। लेकिन ये गुड़िया अगर खतरनाक और जानलेवा निकल आए, तो क्या होगा।

हॉलीवुड में रिलीज हुई फिल्म एनाबेल, भूतिया गुड़िया पर ही बनी है, असल में वो एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म है। आज हम आपको इन भुतहा गुड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आस्तित्व में है।

एनाबेल: सबसे भूतिया गुड़िया

इस भूतिया गुड़िया की कहानी साल 1970 की है। अमेरिका में एक माँ ने अपनी बेटी डॉना को उसके जन्मदिन पर यह गुड़िया गिफ्ट दी थी। शुरुआत में तो वह गुड़िया सिर्फ एक खिलौना थी, लेकिन धीरे- धीरे वह गुड़िया हाथ हिलाने लगी। इसके बाद अगर उसे रात को कुर्सी पर रखा जाता, तो सुबह वह जमीन पर पड़ी मिलती थी। कभी- कभी गुड़िया पर खून के धब्बे लगे हुए मिलते थे।

इसके बाद डॉना की माँ ने पैरानॉर्मल एक्सपर्ट एड ऑर लौरेन वॉरेन को बुलाया। वॉरेन ने गुड़िया को देख बताया किसी बेहद शक्तिशाली आत्मा ने इस पर कब्जा कर रखा है। इस गुड़िया को तंत्र-मंत्र के सहारे से बड़ी मुश्किल से काबू किया गया। इसके बाद इसे वॉरेन के ओकलट म्यूजियम में, शीशे के सोकेस में रखा गया है और इसे हाथ ना लगाने की चेतावनी भी दी गई है।

रॉबर्ट: काले जादू से बोलने वाला खिलौना

रॉबर्ट एक खिलौना है। रॉबर्ट यूजीन ओटो नाम के एक व्यक्ति को ये खिलौना उसके नौकर ने उसे गिफ्ट में दिया था। यह नौकर काला जादू जानता था और उसने खिलौने पर काला जादू किया था। यह खिलौना बोलता भी था, रॉबर्ट के माता- पिता ने उसे कई बार रॉबर्ट का नाम लेते सुना। यह खिलौना अब ईस्ट मारटिलो म्यूजियम में है।

मैंडी: असाधाराण शक्तियों वाली गुड़िया

मैंडी नाम की इस डॉल की मालकिन ने बताया कि इस डॉल में कुछ असाधारण शक्तियां थी। उसने बताया आधी रात को घर में किसी बच्चे के रोने की आवाज ज़ोर- ज़ोर से सुनाई देती थी। जहां ये डॉल पड़ी होती थी, उस कमरे की खिड़कियां खुद ही खुल जाया करती थी और हर बार घर में बड़ी अजीबोगरीब घटनाएं होती थी। फिर उसने साल 1991 में इस डॉल को म्यूजियम में दे दिया था।

ओकिको: जिसके बाल बढ़ते हैं!

जापान की रहने वाली 17 साल की ईकीची सुजुकी ने इस डॉल को खरीदा था। उसने ये डॉल अपनी 2 साल की बहन ओकिको के लिए खरीदी। एक साल बाद ठंड की वजह से उसकी बहन ओकिको की मौत हो गई। परिवार के सदस्य बताते हैं कि ओकिको अपनी इस डॉल से बहुत प्यार करती थी, इसलिए उसकी आत्मा इस डॉल में बसती है।

परिवार के दूसरे जगह चले जाने के कारण डॉल को किसी मंदिर में रख दिया गया। कहा जाता है कि डॉल के बाल खुद ही बढ़ते हैं। हालांकि नियमित रुप से इसके बाल कटवाये भी जाते हैं, लेकिन यह बढ़ते रहते हैं।

कटजा: शापित गुड़िया

कटजा एक शापित डॉल है। इस डॉल का कटजा नाम साल 1730 में रुस में पड़ा था। कहा जाता है कि एक औरत गर्भवती थी और उसके परिवार वाले चाहते थे कि लड़का हो। लेकिन लड़की पैदा हुई, पर उन्होंने लड़की को जिंदा जला दिया। ऐसा होने के बाद लड़की की मां ने उसकी राख से एक डॉल बनाई और उसमें सिरेमिक, पोलसिलेन मिलाया।

उसके बाद, सभी पीढ़ियों ने इस डॉल की रक्षा की, क्योंकि उनका मानना था कि ये शापित डॉल है। इस डॉल को ईबे पर बेचने के लिए भी तैयार किया गया, लेकिन ईबे से इसे जल्द ही बंद कर दिया गया।

प्यूपा: असली बालों वाली गुड़िया

प्यूपा नाम की इस डॉल के बाल असली हैं। ऐसा कहा जाता है कि प्यूपा की मालकिन को प्यूपा तब मिली थी, जब वो एक बच्ची थीं। साल 1920 से लेकर साल 2005 तक प्यूपा उनके साथ ही रही। प्यूपा की मालकिन की मौत के बाद उसके घर वालों ने इस डॉल में बड़े ही अजीबोगरीब चीजों को नोटिस किया।

घर के शोकेस में राखी इस डॉल  के पास अगर कोई जाता, तो वहां से ग्लासों के खटखटाने की आवाजें सुनाई देती थी। ऐसा लगता कि प्यूपा अपने हाथों और पैरों से ग्लास को तोड़ने की कोशिश कर रही हो, ऐसा लगता कि वो वहां से बाहर निकलना चाहती थी।

मर्सी: जब रेडियो अपने आप बजने लगा

मर्सी डॉल की मालकिन शेर्री एक पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर है, उसने इस डॉल को एक ईबे सेलर के जरिए खरीदा था। जब से उसने इस डॉल को खरीदा था, तभी से उसे अपने घर में नेगेटिव एनर्जी महसूस होने लगी। शेर्री बताती है एक दिन अचानक कमरे में रखा रेडियो अपने-आप बजने लगा। एक दिन तो शेर्री और उसके पति ने इस डॉल को अपने शेल्फ में पाया।

क्रिस्टीना: फोटो में अपने आप जगह बदलने वाली गुड़िया

क्रिस्टीना के मालिक ने इसे ईबे पर खरीदा था। इस डॉल की आंखों में पैरानॉर्मल एक्टिविटी देखी गई है। इस डॉल के मालिक बताते हैं कि जब बहुत ज्यादा फोटो क्लिक की जाती है, तो फोटो की श्रृंखला खुद ही बदल जाती है। इतना ही नहीं इस डॉल की स्थिति भी फोटो में बदल जाती है। इसके बालों की सभी गांठें निकाल दी जाती थी, लेकिन फिर भी अगले दिन इसके बाल खुद ही उलझ जाते थे।

यह भी पढ़ें