माधुरी दीक्षित के लोकप्रिय गाने ‘घाघरा’ पर कोरियाई छात्रों का डांस देखकर हैरान रह जायेंगे आप, वीडियो देखें

गाने सूनना किसे पसंद नहीं है खासकर बालीवुड के गानों की बात करें तो इनका क्रेज इतना बढ़ता जा रहा है कि इनकी चर्चा दूर-दूर तक होती है। बालीवुड के गानों की धूम भारत ही नहीं विदेशों तक मची है।

ऐसा देखने को तब मिला जब कुछ कोरियाई छात्रों को बालीवुड के गानों पर डांस करते देखा गया। एक वायरल वीडियों  में कोरियाई छात्र बालीवुड फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ के माधुरी दीक्षित के गाने पर डांस करते दिख रहे हैं। इस वीडियो को काफी पसंद भी किया जा रहा है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में, कोरियाई छात्रों के एक समूह को हिट आइटम नंबर ‘घाघरा’ की धुन पर थिरकते देखा जा सकता है।

सभी छात्र गाने के हर लाइन पर ऐसे डांस कर रहे हैं मानों उन्हें गाना समझ आ रहा हो। 2013 की फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी‘ के गाने घागरा पर माधुरी दीक्षित और रणबीर कपूर ने अभिनय किया था जो लोगों ने काफी पसंद किया था।

इस गाने में कोरियाई छात्रों न केवल अच्छा डांस कर रहे हैं बल्कि उन्हें पारंपरिक भारतीय पोशाक में भी देखा जाता सकता है, जहां लड़कियों ने घाघरा पहना हुआ है और लड़कों ने कुर्ता-पायजामा।

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देश के प्रसिद्ध प्राचीन घरोहरों में से एक है कोणार्क सूर्य मंदिर, जानिए कुछ रोचक तथ्य

भारत में ऐसी कई अद्भुत जगह हैं जहां हमें प्रकृति और मानव निर्मित दुर्लभ और बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। इन्हीं अद्भुत और खूबसूरत जगहों में से एक है “कोनार्क सूर्य मंदिर“।

कोणार्क मंदिर हिंदू धर्म के अनुसार भगवान सूर्य को समर्पित है। वैदिक काल में मंत्रों द्वारा सूर्य देवता की पूजा की जाती थी। फिर राजाओं द्वारा इनके मंदिर का निर्माण शुरू हो गया।

ओडिशा स्थित कोणार्क का सूर्य मंदिर देश के प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह भारत में निर्मित कुछ सूर्य मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध है।

आज हम इस पोस्ट आपको इस अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं :-

  • कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के ओड़िशा के पुरी जिले में समुद्र तट पर पुरी शहर से लगभग 35 किलोमीटर उत्तर पूर्व में कोणार्क में में स्थित है।
  • गंग वंश के महान शासक राजा नरसिंहदेव ने अपने शासनकाल 13वीं शताब्दी में करीब 1200 कारीगरों की मदद से इस मंदिर का निर्माण कराया था। गंग वंश के शासक सूर्य की पूजा करते थे।

  • यहाँ के स्थानीय निवासी सूर्य देव को बिरंची नारायण के नाम से पुकारते है। साथ ही इस मंदिर को यूरोपियन्स ब्लैक पैगोडा के नाम से पुकारते है।
  • यह मंदिर एक बेहद विशाल रथ के आकार में बना हुआ है, जिसमें 24 पहिये लगे हैं और इसको सात घोड़ों द्वारा सूर्य भगवान को ले जाते दिखाया गया है। यह धार्मिक वास्तुकला का एक आश्चर्यजनक स्मारक है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना जाता है।
  • ‘कोणार्क‘ शब्द ‘कोण‘ और ‘अर्क‘ से मिलकर बना है, जहां कोण का अर्थ कोना या किनारा एवं अर्क का अर्थ सूर्य से है अर्थात सूर्य का कोना जिसे कोणार्क कहा जाता है।
  • सूर्य मंदिर कोणार्क को यूनेस्को ने 1984 में विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया था।
  • माना जाता है कि कोणार्क मंदिर में सूर्य की पहली किरण सीधे मुख्य द्वार पर पड़ती है। सूर्य की किरणें मंदिर से पार होकर मूर्ति के केंद्र से प्रतिबिंबित (Reflact) होकर चमकदार दिखाई देती हैं।
  • भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए इसके महत्व को दर्शाने के लिए भारतीय 10 रुपये का नोट के पीछे कोणार्क सूर्य मंदिर को दर्शाया गया है।

  • इसका निर्माण लाल रंग के बलुआ पत्थरों तथा काले ग्रेनाइट के पत्थरों से हुआ है।
  • मंदिर के ये 24 पहिए दोनों ओर 12-12 की दो पंक्तियों में लगे हैं। माना जाता है कि ये 24 पहिए दिन के 24 घंटों के प्रतीक हैं।
  • अपनी अद्भभुत खूबसूरती की वजह से कोणार्क सूर्य मंदिर को भारत के 7 अजूबों  में शामिल किया गया है।

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जानें नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त और कैसे करें नाग देवता की पूजा!

नाग पंचमी का त्यौहार प्रत्येक वर्ष सावन माह की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक करना फलदायी माना गया है। इस मौके पर शिव मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की तैयारी की जाती है।

नाग पंचमी पर नागों की पूजा की जाती है। सावन के महीने मे पड़ने वाला यह त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती को अत्यंत ही प्रिय होता है।

इसके साथ सर्प महादेव के गले की शोभा है और यह देवो के देव महादेव को बहुत प्रिय है। नाग पंचमी पर शिवजी के साथ सांपों को भी पूजा जाता है।

मान्यता है जो भी व्यक्ति नाग पंचमी के दिन सांपों की पूजा करता है उसकी कुंडली में अगर कालसर्प या पितृ दोष है तो वह खत्म हो जाता है।

8 नाग देवताओं की पूजा का विधान

इस दिन नाग देवता की विशेष-पूजा करने के साथ ग्रह शांति, काल सर्प दोष के निवारण के लिए अनुष्ठान भी करें और व्रत भी रखें। हर साल नाग पंचमी सावन के शुक्ल की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

शास्त्रों में 12 प्रकार के नाग बताए गए हैं। इनमें वासुकी, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय नामक अष्टनाग की पूजा करना काफी फलदायी होता है। इनकी पूजा से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है।

ऐसे करें पूजा

इस दिन भगवान शिव व नागों की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। सावन में नागों की पूजा करने से भगवान भोलेनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।

हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार मिथुन, तुला, कुंभ और कर्क राशि वालों के लिए नागपंचमी विशेष लाभकारी साबित हो सकती है। नागों की पूजा करते समय चावल, हल्दी, रोली, फूल, अक्षत, कच्चा दूध और घी का प्रयोग करना चाहिए।

इस दौरान नाग देव से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें कभी क्षति न पहुंचाएं। पूजा करते समय कथा का विशेष महत्व होता है। कथा पढ़ने के बाद आरती कर नाग देवता का आशीर्वाद लेना चाहिए।

नाग पंचमी अवधि

पंचांग के अनुसार, इस बार नाग पंचमी मंगलवार, 02 अगस्त यानी आज है। श्रावण मास की पंचमी तिथि 2 अगस्त को सुबह 5 बजकर 14 मिनट से लेकर 03 अगस्त को सुबह 5 बजकर 42 मिनट तक रहेगी।

इस बीच नाग पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 02 अगस्त को सुबह 5 बजकर 14 मिनट से लेकर 8 बजकर 24 मिनट तक ही रहेगा। यानी नागपंचमी पर पूजा के लिए आपको सिर्फ 2 घंटे 42 मिनट का ही समय मिल पाएगा।

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प्रकृति की सुंदरता है ‘रेनफॉरेस्ट’ जानिए कुछ रोचक तथ्य

पृथ्वी पर इंसान के साथ कई तरह के जीव-जंतु और पेड़-पौधे भी पाए जाते हैं, जिनके लिए पर्यावरण का होना बेहद जरूरी है। पर्यावरण संतुलन के लिए जंगल भी बहुत जरूरी हैं। आइए जानते हैं, दुनिया के कुछ प्रसिद्ध वर्षावनों के बारे में:-

रेनफॉरेस्ट क्या होते हैं :-

वर्षावन उन जंगलों को कहते हैं, जहां बहुत ज्यादा बारिश होती है। यहां साल में लगभग 250 से 450 सेंटीमीटर तक बारिश होती है। दो प्रकार के वर्षावन होते हैं

  • उष्णकटिबंधीय वर्षावन
  • समशीतोष्ण वर्षावन।

पृथ्वी के करीब 2 प्रतिशत भाग पर रेनफॉरेस्ट हैं, लेकिन दुनिया की लगभग 28 प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन इन्हीं वर्षावनों से होता है। पूरी दुनिया में लगभग 50 से 75 प्रतिशत तक पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं। कुछ प्रसिद्ध रेनफॉरेस्ट:-

अमेजन वर्षावन

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अमेजन रेनफॉरेस्ट दुनिया का सबसे बड़ा वर्षावन है। यह अनगिनत जीव-जंतुओं और कीट-पतंगों का घर है और इसकी खूबी है, यहां पाए जाने वाले अनोखे पेड़-पौधे।

धरती की कुल ऑक्सीजन का करीब 17 प्रतिशत भाग अकेले इस जंगल से ही मिलता है। इसे एमजोनिया या अमेजन वन भी कहते हैं। यह दक्षिण अमेरिका के अमेजन बेसिन के एक बड़े भू-भाग पर लगभग 60 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

22 जून को हर साल ‘वर्ल्ड रेनफॉरेस्ट डे’ मनाया जाता है। अमेजन के जंगलों में दुनिया की 10 फीसदी से ज्यादा प्रजातियों के जीव-जंतु और 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं।

यहां पर कहीं-कहीं पर जमीन तक सूर्य की किरणें भी नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे वन का अधिकतर धरातल अंधेरे में डूबा रहता है।

कांगो रेनफॉरेस्ट

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यह अफ्रीका में स्थित है, जिसका अधिकांश भाग कांगो देश में फैला है। यह लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है।

कहते हैं कि इस जंगल के कई हिस्से ऐसे भी हैं, जहां इंसान आज तक नहीं पहुंच पाए हैं। इस जंगल के बीच से कांगो नदी निकलती है। जिसकी लंबाई करीब 4700 किलोमीटर है। यह अफ्रीका की दूसरी सबसे लंबी नदी है तथा दुनिया की सबसे गहरी नदी है।

यह जंगल भी इतना घना है कि कई जगहों पर सूर्य की रोशनी भी जमीन तक नहीं पहुंच पाती है। इस जंगल में एक-दो नहीं, बल्कि कुल पांच नेशनल पार्क हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।

डेंट्री वर्षावन

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डेंट्री रेनफॉरेस्ट दुनिया के सबसे पुराने वर्षावनों में से एक हैं। ऑस्ट्रेलियाई फोटोग्राफर व भू-विज्ञानी रिचर्ड डेंट्री के नाम पर इसका नाम रखा गया है।

डेंट्री वर्षावन ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप का सबसे बड़ा वर्षावन है और इसमें कीटों की करीब 12,000 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं। यह लगभग 1200 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह जंगल खासकर ट्री कंगारुओं के लिए प्रसिद्ध है।

बोर्नियो तराई रेनफॉरेस्ट

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बोर्नियो तराई रेनफॉरेस्ट इंडोनेशिया के ब्रुनेई में स्थित है। यह करीब 4 लाख वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला हुआ है। बोर्नियो तराई वर्षावन दुनिया के सबसे पुराने जंगलों में से एक है।

इसमें लगभग 15,000 पौधों की प्रजातियां, 380 पक्षी प्रजातियां और कई स्तनपायी प्रजातियां पाई जाती हैं इसे सबसे समृद्ध वर्षावनों में गिना जाता है।

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Health Tips: बासी चपाती खाने के होते हैं हैरान करने वाले फायदे, आज से ही खाना शुरू कर दें

ज्यादातर लोगों को ताजी गर्म गर्म चपाती खाना पसंद होता है लेकिन जब भी घर में खाना बनता है तो एक-दो रोटी ज्यादा बन ही जाती है। जिसे आमतौर पर लोग खाना पसंद नहीं करते हैं। बासी चपाती का नाम सुनते ही लोग मुंह बना लेते हैं।

इसीलिए जब कभी भी रोटी बच जाये तो इन बची हुई रोटियों को या तो गाय और कुत्ते को डाल दिया जाता है या फिर फेंक दिया जाता है। लेकिन आप ये नहीं जानते कि ये बासी रोटी कई गुणों से भरपूर होती है।

बासी रोटी खाने से सेहत को भी कई फायदे मिलते हैं। आज हम आपको बासी रोटी खाने से होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहें हैं। जिन्हें जानने के बाद आप खाने के लिए बासी चपाती ही मांगेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं :-

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बासी चपाती के फायदे

शुगर और बीपी रहता है कंट्रोल

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि बासी रोटी खाने से शुगर और बीपी कंट्रोल में रहता है। जी हां, इसे दूध के साथ खाना और भी फायदेमंद होता है। जब चपाती बासी हो जाती है तो उसमें कुछ अच्छे बैक्टीरिया आ जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

कब्ज से राहत

इसमें ग्लूकोज की मात्रा भी कम होती है। फाइबर से भरपूर बासी चपाती पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। दूध के साथ बासी चपाती खाने से आपकी डाइट बेहतर रहती है। इसे खाने से अपच, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी दूर रहती हैं।

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शरीर का तापमान सामान्य रहता है

बासी रोटी खाने से आपके शरीर का तापमान भी सामान्य बना रहता है क्योंकि सुबह बासी रोटी को ठंडे दूध के साथ सेवन करने से आपको राहत मिलती है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

गर्मी के दिनों में अगर बासी चपाती खाई जाए तो लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है। अगर आप बासी चपाती नहीं खाते हैं तो इसे खाना शुरू कर दें क्योंकि इसे खाने से दुबलापन भी दूर हो जाता है।

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ब्लैक सैंड बीच: पानी में खींचकर इंसानों को मार देता है ये समुद्र

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दुनिया में कई बीच हैं जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं और इन्हीं में शामिल है आइसलैंड का ब्लैक सैंड बीच, जो पर्यटकों को अपनी ओर तरफ आकर्षित करता है। लेकिन जियोलॉजी और ‘समुद्र की ताकत‘ मिलकर इसे ‘जानलेवा‘ बनाते हैं।

दरअसल हम बात कर रहे हैं रेनिस्फजारा बीच की। काली रेत और तेज लहरें इस आइसलैंड पर आने वाले लोगों को अपना दीवाना बना देती हैं। लेकिन इस खूबसूरत बीच को जानलेवा भी कहा जाता है क्योंकि यहां उठने वाली स्नीकर वेव्स की वजह से कई लोगों की जान चली गई है।

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स्नीकर तरंगें लोगों को अपने साथ समुद्र में खींचती हैं। खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन इस जगह को सुरक्षित करने की योजना तैयार कर रहा है। इस बीच को देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको इस खतरनाक ब्लैक सैंड बीच के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं…

स्नीकर वेव्स उन बड़ी और शक्तिशाली लहरों को कहते हैं जो कई छोटी-छोटी लहरों की ताकत के एक साथ मिलने से बनती हैं। यह समुद्र के बहाव के कारण भी हो सकता है या रेनिस्फजारा के मामले में लहरों में खींचने की शक्ति के पीछे एक भूमिगत चट्टान भी हो सकती है।

रेनिस्फजारा बीच पर स्नीकर लहरें अन्य लहरों की तुलना में बहुत आगे तक आती हैं जो बेहद शक्तिशाली होती हैं और एक वयस्क को अपने साथ समुद्र के भीतर खींच सकती हैं।

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अगर कोई व्यक्ति स्नीकर वेव की चपेट में आ जाता है, तो उसका वापस आना बेहद मुश्किल होता है। पानी का तापमान बर्फ जमने के स्तर से थोड़ा ही ऊपर होता है, तत्काल हाइपोथर्मिया का कारण बनता है जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है।

अब इस बात पर बहस तेज हो गई है कि समुद्र तट को बंद किया जाए या और सुरक्षा मानकों को लागू किया जाए। रेनिस्फजारा बीच पर लहरों के खतरे के बारे में लोगों को चेतावनी देने वाले बोर्ड लगे हैं।

आइसलैंडिक रोड एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा पार्किंग क्षेत्रों में फुटपाथों और बोर्डों पर लाइटें लगाई जाएंगी। निगरानी के लिए कैमरा भी लगाया जाएगा।

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प्राचीन शिव मंदिर, जहां जीवित लड़की बन गई मूर्ति

भगवान शिव के मंदिर भारत के इलावा और भी कई देशों मे स्थित हैं। ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर इंडोनेशिया में स्थित है। यह मंदिर प्रम्बानन मंदिर के नाम से प्रचलित है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ एक देवी की मूर्ति भी स्थापित है।

इस मंदिर की सुंदरता और कलाकारी देखने लायक है और इस मंदिर की दीवारों पर बने हुए चित्र रामायण महाकाव्य को दर्शाते हैं।

यह मंदिर इंडोनेशिया के जावा में स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ भगवती दुर्गा के रूप में रोरो जोंग्गरंग नाम की देवी को पूजा जाता है।

इस देवी को पूजने का कारण एक प्राचीन कथा है जो की इस प्रकार है, किसी समय जावा में प्रबु बका नामक का राक्षस राज्य करता था। उसकी रोरो जोंग्गरंग नाम की खूबसूरत बेटी थी।

बांडुंग बोन्दोवोसो नामक युवक ने रोरो जोंग्गरंग को विवाह का प्रस्ताव दिया था। रोरो जोंग्गरंग को दिल से यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं था। उसने सीधे तौर पर उस युवक को मना ना करते हुए उसके आगे एक शर्त रखी की उसे एक ही रात में एक हजार मूर्तियां बनानी होंगी।

शर्त के अनुसार बांडुंग बोन्दोवोसो ने 999 मूर्तियां बना दी और जैसे ही उसने आखिरी मूर्ति बनाना शुरू किया तब रोरो जोंग्गरंग ने पुरे शहर के चावल के खेतों में आग लगवा दी, जिससे बांडुंग बोन्दोवोसो को लगा की उजाला हो गया है, और उसने मूर्ति बनाना बंद कर दिया और वह शर्त हार गया ।

परन्तु, जब बांडुंग बोन्दोवोसो को इस बात का पता चला तो वह यह बर्दाश नहीं कर पाया और उसने गुस्से में रोरो जोंग्गरंग को आखिरी मूर्ति बन जाने का श्राप दे दिया । अब मंदिर में उसी मूर्ति को दुर्गा मान कर पूजा जाता है |

इंडोनेशिया के लोग इस कथा को रोरो जोंग्गरंग से संबंधित होने के कारण ही इस मंदिर को रोरो जोंग्गरंग मंदिर के नाम से पुकारते हैं| जब कि हिंदू लोगों के लिए प्रम्बानन मंदिर आस्था का केंद्रबन चूका है।

प्रम्बानन मंदिर इतना सुंदर है,कि वहां की बनावट हर किसी को अपने मोह में बांध लेती है । मंदिर की दीवारों पर रामायण काल के चित्र भी अंकित किये गए हैं। ये चित्र रामायण की गाथा को भी बयान करते हैं।

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भारत का एक अनोखा गांव जो व्हिसलिंग विलेज के नाम से मश्हूर है

मध्‍य प्रदेश में अगले सत्र से हिंदी माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे विद्यार्थी

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मध्य प्रदेश नए शैक्षणिक सत्र से हिंदी में चिकित्सा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मध्‍य प्रदेश के विद्यार्थी अगले सत्र से हिंदी माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे।

इसके लिए एमबीबीएस चिकित्सा पाठ्यक्रम की किताबों को हिंदी भाषा में तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय को शासन की तरफ से यह जिम्मेदारी दी गई है।

हिंदी विवि को नोडल एजेंसी बनाया गया है। सबसे पहले हिंदी विश्वविद्यालय एमबीबीएस चिकित्सा पाठ्यक्रम का प्रथम वर्ष का कोर्स हिंदी में तैयार करेगा।

इस संबंध में मंगलवार को विश्वविद्यालय विनिमायक आयोग में बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि एमबीबीएस, यूनानी और होम्योपैथी एवं अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रम को हिंदी माध्यम में अनुवाद करके सभी विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराया जाएगा। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत की जा रही है।

इसके तहत विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में अध्ययन कर सकेंगे। बैठक में नोडल एजेंसी हिंदी विवि के कुलपति खेमसिंह डहेरिया, विनिमायक आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर भारत शरण सिंह, डा. शिवेंद्र मिश्रा, डा. सुरेश चंद्र अवस्थी, डा. उमेश शुक्ला, डा. डीके राय, डा. नलिनी, डा. बीके राय, डा. जीएस पटेल, डा. अमित दीक्षित आदि शिक्षाविद शामिल हुए। हिंदी विवि के कुलपति का कहना है कि जल्द ही पहले साल की किताबें तैयार कर ली जाएंगी।

पहले चरण में तीन किताबें तैयार की जाएंगी

हिंदी विवि पहले चरण में एमबीबीएस के पहले साल की तीन किताबें हिंदी भाषा में अनुवाद कर तैयार करेगा। छह से सात माह में अनुवाद का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद फिर अगले साल की किताबें तैयार की जाएंगी। एमबीबीएस की पूरी किताबें डेढ़ से दो साल में तैयार कर ली जाएंगी।

हिंदी विवि में पहले चरण में एक साल की तीन किताबें तैयार की जाएंगी। डेढ़ या दो साल में पूरे एमबीबीएस के पाठ्यक्रम को तैयार कर लिया जाएगा।

प्रो. खेमसिंह डहेरिया, कुलपति हिंदी विवि

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जापानी महिला का ऐश्वर्या राय के प्रतिष्ठित डॉयलॉग का यह वीडियो देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि बॉलीवुड सेलेब्स के प्रशंसक देश के बाहर भी हैं। इस बार ऐश्वर्या राय बच्चन की एक फैन ने धमाल मचा दिया है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया गया है जो खूब वायरल हो रहा है जिसमें मेयो जापान नाम की एक इंस्टाग्राम यूजर साड़ी पहने हुए ऐश्वर्या राय बच्चन के प्रतिष्ठित डायलॉग बोल रही है।

इस वीडियो में जापानी लड़की एश्वर्या राय के डॉयलॉग को कॉपी करते हुए बोलती है- ” जब मैं तैयार होकर आऊंगी ना तब देखना कैसे होश उड़ जाएंगे तुम्हारे” यह डॉयलॉग ऐश्वर्या राय बच्चन ने हम दिल दे चुके सनम में कहा – उसके बाद तीन साड़ियों में उनके तीन लुक हैं जिसे वीडियो में देखा जा सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने बॉलीवुड वीडियो बनाया है। वह प्रतिष्ठित बॉलीवुड गानों और डायलॉग्स के डांस वीडियो बनाती रहती है। वह दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग पर आधारित सामग्री भी बनाती है।

 

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हालांकि, इस इंस्टाग्राम रील को 269K से ज्यादा लाइक्स और 2 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। उसके बायो के अनुसार, मेयो एक जापानी प्रभावक है जो भारतीय संस्कृति के इर्द-गिर्द सामग्री बनाता है। उन्होंने “हिंदी में महारत हासिल” की है। उनके इंस्टाग्राम पर 114K फॉलोअर्स हैं।

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कोई कर्ण जैसा अपमान न सहे, सुनवाई के दौरान केरल हाई कोर्ट ने दिया महाभारत का उदाहरण

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केरल हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें कहा कि किसी इनसान को अपने जन्म पहचान-पत्र में पिता का नाम नहीं लिखने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह आदेश अविवाहित मांओं और रेप विक्टिम्स के बच्चों के होने वाली परेशानियों को देखते हुए सुनाया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के पैरेंट्स के रूप में केवल मां के नाम वाला सर्टिफिकेट जारी किया जाए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने महाभारत के कर्ण का जिक्र करते हुए कहा कि हम एक ऐसा समाज चाहते हैं, जिसमें कर्ण न हों, जो अपने जीवन को कोसते हैं।

अपने माता-पिता का नाम नहीं जानने के लिए उन्हें अपमान का सामना करना पड़े। इसके बाद कोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट से पिता के नाम को हटाने और पैरेंट्स के रूप में सिर्फ मां के नाम वाले सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया।

जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा कि ऐसे व्यक्ति की मानसिक पीड़ा की कल्पना ठीक उसी तरह करनी चाहिए, जैसे कोई आपकी निजता में दखल देता है।

हालांकि कुछ मामलों में यह एक जानबूझकर किया जाता है, जबकि कुछ में यह गलती से हो सकता है, लेकिन राज्य को नागरिकों सभी प्रकार के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। वरना उन्हें अकल्पनीय मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ेगा।

अविवाहित मां के बच्चे के पास भी मौलिक अधिकार

कोर्ट ने आगे कहा कि एक अविवाहित मां का बच्चा भी हमारे देश का नागरिक है और कोई भी उसके किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है। इन अधिकारों की गारंटी हमारे संविधान में दी गई है।

वह केवल अविवाहित मां का ही नहीं, बल्कि इस महान देश भारत की भी संतान है। उसकी निजता, गरिमा और स्वतंत्रता के अधिकार को कोई भी अथॉरिटी कम नहीं कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो कोर्ट उनके अधिकारों की रक्षा करेगा।

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