प्राचीन शिव मंदिर, जहां जीवित लड़की बन गई मूर्ति

भगवान शिव के मंदिर भारत के इलावा और भी कई देशों मे स्थित हैं। ऐसा ही एक प्राचीन मंदिर इंडोनेशिया में स्थित है। यह मंदिर प्रम्बानन मंदिर के नाम से प्रचलित है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ एक देवी की मूर्ति भी स्थापित है।

इस मंदिर की सुंदरता और कलाकारी देखने लायक है और इस मंदिर की दीवारों पर बने हुए चित्र रामायण महाकाव्य को दर्शाते हैं।

यह मंदिर इंडोनेशिया के जावा में स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ भगवती दुर्गा के रूप में रोरो जोंग्गरंग नाम की देवी को पूजा जाता है।

इस देवी को पूजने का कारण एक प्राचीन कथा है जो की इस प्रकार है, किसी समय जावा में प्रबु बका नामक का राक्षस राज्य करता था। उसकी रोरो जोंग्गरंग नाम की खूबसूरत बेटी थी।

बांडुंग बोन्दोवोसो नामक युवक ने रोरो जोंग्गरंग को विवाह का प्रस्ताव दिया था। रोरो जोंग्गरंग को दिल से यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं था। उसने सीधे तौर पर उस युवक को मना ना करते हुए उसके आगे एक शर्त रखी की उसे एक ही रात में एक हजार मूर्तियां बनानी होंगी।

शर्त के अनुसार बांडुंग बोन्दोवोसो ने 999 मूर्तियां बना दी और जैसे ही उसने आखिरी मूर्ति बनाना शुरू किया तब रोरो जोंग्गरंग ने पुरे शहर के चावल के खेतों में आग लगवा दी, जिससे बांडुंग बोन्दोवोसो को लगा की उजाला हो गया है, और उसने मूर्ति बनाना बंद कर दिया और वह शर्त हार गया ।

परन्तु, जब बांडुंग बोन्दोवोसो को इस बात का पता चला तो वह यह बर्दाश नहीं कर पाया और उसने गुस्से में रोरो जोंग्गरंग को आखिरी मूर्ति बन जाने का श्राप दे दिया । अब मंदिर में उसी मूर्ति को दुर्गा मान कर पूजा जाता है |

इंडोनेशिया के लोग इस कथा को रोरो जोंग्गरंग से संबंधित होने के कारण ही इस मंदिर को रोरो जोंग्गरंग मंदिर के नाम से पुकारते हैं| जब कि हिंदू लोगों के लिए प्रम्बानन मंदिर आस्था का केंद्रबन चूका है।

प्रम्बानन मंदिर इतना सुंदर है,कि वहां की बनावट हर किसी को अपने मोह में बांध लेती है । मंदिर की दीवारों पर रामायण काल के चित्र भी अंकित किये गए हैं। ये चित्र रामायण की गाथा को भी बयान करते हैं।

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मध्‍य प्रदेश में अगले सत्र से हिंदी माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे विद्यार्थी

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मध्य प्रदेश नए शैक्षणिक सत्र से हिंदी में चिकित्सा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मध्‍य प्रदेश के विद्यार्थी अगले सत्र से हिंदी माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे।

इसके लिए एमबीबीएस चिकित्सा पाठ्यक्रम की किताबों को हिंदी भाषा में तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय को शासन की तरफ से यह जिम्मेदारी दी गई है।

हिंदी विवि को नोडल एजेंसी बनाया गया है। सबसे पहले हिंदी विश्वविद्यालय एमबीबीएस चिकित्सा पाठ्यक्रम का प्रथम वर्ष का कोर्स हिंदी में तैयार करेगा।

इस संबंध में मंगलवार को विश्वविद्यालय विनिमायक आयोग में बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि एमबीबीएस, यूनानी और होम्योपैथी एवं अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रम को हिंदी माध्यम में अनुवाद करके सभी विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराया जाएगा। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत की जा रही है।

इसके तहत विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में अध्ययन कर सकेंगे। बैठक में नोडल एजेंसी हिंदी विवि के कुलपति खेमसिंह डहेरिया, विनिमायक आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर भारत शरण सिंह, डा. शिवेंद्र मिश्रा, डा. सुरेश चंद्र अवस्थी, डा. उमेश शुक्ला, डा. डीके राय, डा. नलिनी, डा. बीके राय, डा. जीएस पटेल, डा. अमित दीक्षित आदि शिक्षाविद शामिल हुए। हिंदी विवि के कुलपति का कहना है कि जल्द ही पहले साल की किताबें तैयार कर ली जाएंगी।

पहले चरण में तीन किताबें तैयार की जाएंगी

हिंदी विवि पहले चरण में एमबीबीएस के पहले साल की तीन किताबें हिंदी भाषा में अनुवाद कर तैयार करेगा। छह से सात माह में अनुवाद का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद फिर अगले साल की किताबें तैयार की जाएंगी। एमबीबीएस की पूरी किताबें डेढ़ से दो साल में तैयार कर ली जाएंगी।

हिंदी विवि में पहले चरण में एक साल की तीन किताबें तैयार की जाएंगी। डेढ़ या दो साल में पूरे एमबीबीएस के पाठ्यक्रम को तैयार कर लिया जाएगा।

प्रो. खेमसिंह डहेरिया, कुलपति हिंदी विवि

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जापानी महिला का ऐश्वर्या राय के प्रतिष्ठित डॉयलॉग का यह वीडियो देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि बॉलीवुड सेलेब्स के प्रशंसक देश के बाहर भी हैं। इस बार ऐश्वर्या राय बच्चन की एक फैन ने धमाल मचा दिया है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया गया है जो खूब वायरल हो रहा है जिसमें मेयो जापान नाम की एक इंस्टाग्राम यूजर साड़ी पहने हुए ऐश्वर्या राय बच्चन के प्रतिष्ठित डायलॉग बोल रही है।

इस वीडियो में जापानी लड़की एश्वर्या राय के डॉयलॉग को कॉपी करते हुए बोलती है- ” जब मैं तैयार होकर आऊंगी ना तब देखना कैसे होश उड़ जाएंगे तुम्हारे” यह डॉयलॉग ऐश्वर्या राय बच्चन ने हम दिल दे चुके सनम में कहा – उसके बाद तीन साड़ियों में उनके तीन लुक हैं जिसे वीडियो में देखा जा सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने बॉलीवुड वीडियो बनाया है। वह प्रतिष्ठित बॉलीवुड गानों और डायलॉग्स के डांस वीडियो बनाती रहती है। वह दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग पर आधारित सामग्री भी बनाती है।

 

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हालांकि, इस इंस्टाग्राम रील को 269K से ज्यादा लाइक्स और 2 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। उसके बायो के अनुसार, मेयो एक जापानी प्रभावक है जो भारतीय संस्कृति के इर्द-गिर्द सामग्री बनाता है। उन्होंने “हिंदी में महारत हासिल” की है। उनके इंस्टाग्राम पर 114K फॉलोअर्स हैं।

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कोई कर्ण जैसा अपमान न सहे, सुनवाई के दौरान केरल हाई कोर्ट ने दिया महाभारत का उदाहरण

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केरल हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें कहा कि किसी इनसान को अपने जन्म पहचान-पत्र में पिता का नाम नहीं लिखने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह आदेश अविवाहित मांओं और रेप विक्टिम्स के बच्चों के होने वाली परेशानियों को देखते हुए सुनाया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के पैरेंट्स के रूप में केवल मां के नाम वाला सर्टिफिकेट जारी किया जाए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने महाभारत के कर्ण का जिक्र करते हुए कहा कि हम एक ऐसा समाज चाहते हैं, जिसमें कर्ण न हों, जो अपने जीवन को कोसते हैं।

अपने माता-पिता का नाम नहीं जानने के लिए उन्हें अपमान का सामना करना पड़े। इसके बाद कोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट से पिता के नाम को हटाने और पैरेंट्स के रूप में सिर्फ मां के नाम वाले सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया।

जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा कि ऐसे व्यक्ति की मानसिक पीड़ा की कल्पना ठीक उसी तरह करनी चाहिए, जैसे कोई आपकी निजता में दखल देता है।

हालांकि कुछ मामलों में यह एक जानबूझकर किया जाता है, जबकि कुछ में यह गलती से हो सकता है, लेकिन राज्य को नागरिकों सभी प्रकार के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। वरना उन्हें अकल्पनीय मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ेगा।

अविवाहित मां के बच्चे के पास भी मौलिक अधिकार

कोर्ट ने आगे कहा कि एक अविवाहित मां का बच्चा भी हमारे देश का नागरिक है और कोई भी उसके किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है। इन अधिकारों की गारंटी हमारे संविधान में दी गई है।

वह केवल अविवाहित मां का ही नहीं, बल्कि इस महान देश भारत की भी संतान है। उसकी निजता, गरिमा और स्वतंत्रता के अधिकार को कोई भी अथॉरिटी कम नहीं कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो कोर्ट उनके अधिकारों की रक्षा करेगा।

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आखिर क्यों होती है ओलावृष्टि, जानिए क्या है इसका कारण!

आपने देखा होगा कि बारिश के दौरान कई बार बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े भी गिरने लगते हैं, जिन्हें हम ओले कहते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ये ओले कैसे बनते हैं और फिर अचानक जमीन पर क्यों गिरने लगते हैं? आइए जानते हैं आखिर क्यों होती है ओलावृष्टि क्या है इसके पीछे का कारण।

जैसे कि आप सब जानते हैं कि जब पानी का तापमान 0 डिग्री सेल्सियस होता है, तब पानी बर्फ बन जाता है। ऐसे ही जब आसमान में तापमान शून्य से कई डिग्री कम हो जाता है तो वहां हवा में मौजूद नमी ठंडी बूंदों के रूप में जम जाती है। धीरे-धीरे ये बर्फ के गोलों का रूप धारण कर लेती है, जिन्हें ओले कहते हैं।

समुद्र तटीय वाले हिस्से जैसे मुंबई, तेलंगाना आदि जगहों पर ओले नहीं गिरते हैं। जिन जगहों पर मौसम में ज्यादा नमी रहती है या फिर तापमान गर्म रहता है, ऐसी जगहों पर ओलावृष्टि ना के बराबर होती है।

एक बार ओले जब बड़े आकार में बदल जाते हैं, तो पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण इन्हें धरती की सतह पर ले आता है, जिसे ओले गिरना या ओलावृष्टि कहते हैं, आमतौर पर यह तेज आंधी के साथ होती है।

ओलावृष्टि में सबसे ज्यादा नुकसान फसलों को होता है। इसके अलावा इमारतों की कांच की खिड़कियां, बाहर रखी कांच की चीजें, विमान और कारों को नुकसान होने का खतरा रहता है।

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ये हैं भारत के सबसे ऊंचे शिवलिंग, जानिए क्या है इनकी खासियत !!!

महादेव !! भगवान शिव का दूसरा नाम है, क्योंकि उन्हें सभी हिंदू देवताओं में सबसे दिव्य माना जाता है। भारत के लगभग हर राज्य में भगवान शिव की पूजा की जाती है। उन्हें योगियों का देवता माना जाता है, साथ ही शिव त्रिमूर्ति के तीसरे देवता भी हैं।

इसमें ब्रह्मा को सृष्टि का निर्माता, विष्णु को रक्षक या पालनहार और शिव को संहारक या विनाश का देवता कहा जाता है। कई सदियों से लोग शिवलिंग के रूप में भगवान शिव की पूजा करते आ रहे हैं। शिव लिंगम का अर्थ “शिव का प्रतीक” है।

शिवलिंग की पूजा न केवल भारत और श्रीलंका में बल्कि रोम और दुनिया के अन्य हिस्सों में भी की जाती है। चलिए आज इस लेख के माध्यम से भारत के सबसे ऊंचे शिवलिंग के बारे में जानते हैं –

भोजेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश

भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर भारत के सबसे बड़े शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, 18 फीट ऊंचे शिवलिंग को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित एक ही चट्टान से तैयार किया गया है।

भोजपुर शिव मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे अद्भुत मंदिरों में से एक है। यह बेतवा नदी के तट पर स्थित है। माना जाता है कि भोजेश्वर मंदिर का निर्माण 118 शताब्दी के भोजपुर में परमार राजा “भोज” द्वारा किया गया था।

कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक

कोटिलिंगेश्वर मंदिर में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है जिसकी ऊंचाई 108 फीट है और यह कर्नाटक में स्थित है। भगवान कोटिलिंगेश्वर मंदिर विभिन्न देवताओं के ग्यारह छोटे मंदिरों और नंदीश्वर की एक लंबी मूर्ति के साथ कोटिलिंगेश्वर समर्पित है।

इस विशाल शिवलिंग के ठीक सामने नंदी की एक मूर्ति है जो 35 फीट लंबी है। नंदी को 60 फुट लंबे, 40 फुट चौड़े और 4 फुट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित किया गया है।

सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, अरुणाचल प्रदेश

जीरो शहर भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश में स्थित है और कई वर्षों से विश्व धरोहर स्थल के लिए एक पसंदीदा शहर रहा है।

जीरो का सिद्धेश्वर नाथ मंदिर भगवान शिवलिंग और उनके परिवार की मेजबानी करता है, जिसकी लंबाई 25 फीट और चौड़ाई 22 फीट है। इस मंदिर में भगवान गणेश और देवी पार्वती की सुंदर मूर्तियां भी हैं।

अमरेश्वर महादेव मंदिर, मध्य प्रदेश

यह मंदिर मध्य प्रदेश के अनूपपुर में स्थित है और इसमें 11 फीट लंबा शिवलिंग है। यह शिवलिंग एक ही चूने के पत्थर से बना हुआ है।

अमरेश्वर मंदिर एक अनूठा स्थान है क्योंकि यहां एक ही स्थान पर आपको 12 ज्योतिर्लिंग देखने को मिल जाएंगे। अमरेश्वर महादेव मंदिर बहुत ही सुंदर और  शांत जगह है और यहां का झरना इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देता है। यह स्थान नर्मदा नदी का उद्गम स्थल भी है।

बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु

बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर शहर में स्थित है, जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर के रूप में जाना जाता है। मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है जिसे महान जीवित चोल मंदिरों के रूप में भी जाना जाता है।

ब्रगदेश्वर मंदिर में शिवलिंग तमिलनाडु में सबसे बड़ा है और इसकी ऊंचाई 13.5 फीट है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी की मूर्ति भी स्थापित है।

हरिहर धाम मंदिर, झारखंड

हरिहर धाम मंदिर में शिवलिंग 65 फीट की ऊंचाई के साथ दुनिया में सबसे ऊंचा शिवलिंग है। झारखंड के गिरिडीह में लगभग 25 एकड़ भूमि के साथ विशाल शिव लिंग का निर्माण किया गया है।

यह मंदिर एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है और पूरे भारत से भक्त हर साल श्रावण पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस स्थान पर आते हैं। इसके अलावा हरिहर धाम कई वर्षों से हिंदू विवाहों के लिए एक लोकप्रिय स्थान बन रहा है।

अमरनाथ मंदिर, जम्मू और कश्मीर

अमरनाथ गुफा मंदिर जम्मू और कश्मीर में स्थित है, जो 3,888 मीटर की ऊंचाई पर भगवान शिव को समर्पित है। इसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है।

जुलाई-अगस्त में श्रावणी मेला के त्यौहार के आसपास गुफा बर्फीले पहाड़ों ये घिरी हुई होती है। 40 मीटर (130 फीट) ऊंचे शिवलिंग को आइस लिंगम के रूप में जाना जाता है। शिवलिंग की ऊंचाई में हर साल बदलाव देखा जा सकता है।

महेश्वरम श्री शिव पार्वती मंदिर, केरल

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने तिरुवनंतपुरम जिले के चेकल में महेश्वरम श्री शिव पार्वती मंदिर की 111.2 फीट की संरचना को प्रमाणित करने के बाद केरल के इस शिव लिंगम को दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग कहा जाता है।

बेलनाकार संरचना में आठ मंजिल हैं, जिनमें से छह मानव शरीर के चक्रों या ऊर्जा केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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जानिए मानव शरीर कितनी गर्मी सहन कर सकता है?

अप्रैल से जुलाई तक गर्मी लोगों को जमकर परेशान करती है। सीधे धूप और गर्मी के सम्पर्क में आने से हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। हीट स्ट्रोक और लू और इससे भी ज़्यादा गंभीर स्थिति हाइपर थर्मिया शरीर के तापमान बढ़ने के हाई रूप हैं जिससे मौत भी हो सकती है।

इस पोस्ट के माध्यम से हम देखेंगे कि हमारे शरीर में तापमान सहने की क्या क्षमता है। साथ ही यह भी जानेंगे की गर्मियों में शरीर के तापमान को संतुलन में बनाए रखने के लिए किन बातों पर अमल करना ज़रूरी है।

गर्मियों में आपको खूब पानी पीना चाहिए। जिससे शरीर के अंदर का तापमान सही बना रहता है। हालांकि, यह सवाल भी मन में आता है कि मानव शरीर कितना तापमान झेल सकता है।

सामान्य रूप से शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है। लगभग 25/35 से 42/48 डिग्री सेंटीग्रेड तक का तापमान शरीर बर्दाश्त कर सकता है।

गर्मी हो या सर्दी हमारे शरीर के अंदर का तंत्र हमेशा शरीर का तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस बनाए रखने के लिए काम करता है। वहीं, मस्तिष्क के पिछले हिस्से को हाइपोथैलेमस कहा जाता है जो शरीर के अंदर के तापमान को नियंत्रित करता है।

पसीना आना, मुंह से सांस लेना, गर्म होने पर किसी खुली और हवादार जगह पर जाना, ये सब एक तरह से शरीर के अंदर बने वो सिस्टम है जिससे शरीर अपना तापमान नियंत्रित रखता है। अक़्सर तापमान बढ़ने पर हमारी धमनियाँ (Blood vessels) भी चौड़ी हो जाती हैं ताकि खून ठीक से शरीर के हर हिस्से तक पहुँच सके।

मानव शरीर 37.5 डिग्री सेल्सियस में काम करने के लिए बना है। लेकिन उससे दो-चार डिग्री ऊपर और 2-4 डिग्री नीचे तक के तापमान को एडजस्ट करने में शरीर को दिक़्क़त नहीं आती।

शरीर कितनी गर्मी सहन कर सकता है यह बाहरी तापमान के अलावा और भी कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे-

  • आप कितने समय से उस तापमान के संपर्क में हैं।
  • मौसम में नमी कितनी होती है।
  • शरीर से पसीना या पानी कैसे निकल रहा है।
  • आपकी शारीरिक गतिविधि क्या है।
  • आपने कैसे कपड़े पहने हैं?

ये चीजें के शरीर बढ़े हुए तापमान को संतुलित करने में भी मदद करती हैं। नमी के कारण शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलता है। ऐसे में आपको खूब पानी पीना चाहिए। ज्यादा पसीना आने से पानी की कमी होने लगती है।

यदि शरीर लंबे समय तक सूर्य की किरणों के संपर्क में रहता है, तो इससे बुखार या हर्पीज थर्मिया जैसी स्थिति हो जाती है। अगर बाहर का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है, तो शरीर उसके साथ तालमेल बिठा लेता है, लेकिन अगर अचानक तापमान बढ़ जाता है, जिससे परेशानी होती है।

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800 साल पुराने इस महादेव मंदिर में सूर्य की किरणें करती हैं शिवजी का अभिषेक

हमारे देश में अनेक शिव मंदिर हैं और सभी का अलग-अलग महत्व भी है। ऐसा ही एक मंदिर दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले में अब्रामा गांव में स्थित है। इसे तड़केश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाता है।

मान्यता है कि ये मंदिर करीब 800 साल पुराना है। भोलेनाथ के इस मंदिर पर शिखर का निर्माण संभव नहीं है, इसलिए सूर्य की किरणें सीधे शिवलिंग का अभिषेक करती हैं। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेगें इस आलौकिक मंदिर के बारे में तो चलिए जानते हैं :-

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1994 में हुआ था पुनर्निर्माण

1994 में मंदिर का पुनर्निर्माण कर 20 फुट के गोलाकार आकृति में खुले शिखर में किया गया। शिव भक्त-उपासक हर समय यहां दर्शन कर धर्मलाभ अर्जित करने आते रहते हैं। श्रावण माह व महाशिव रात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है।

पौराणिक मान्यता

800 वर्ष पुराने इस अलौकिक मंदिर के बारे में उल्लेख मिलता है कि एक ग्वाले ने पाया कि उसकी गाय हर दिन झूड से अलग होकर घने जंगल में जाकर एक जगह खड़ी होकर अपने आप दूध की धारा प्रवाहित करती है।

ग्वाले ने अब्रामा गांव लौटकर ग्रामीणों को उसकी सफेद गाय द्वारा घने वन में एक पावन स्थल पर स्वत: दुग्धाभिषेक की बात बताई। शिव भक्त ग्रामीणों ने वहां जाकर देखा तो पवित्र स्थल के गर्भ में एक पावन शिला विराजमान थी फिर शिव भक्त ग्वाले ने हर दिन घने वन में जाकर शिला अभिषेक-पूजन शुरू कर दिया।

ग्वाले की अटूट श्रद्धा पर शिवजी प्रसन्न हुए। शिव जी ने ग्वाले को स्वप्न दिया और आदेश दिया कि घनघोर वन में आकर तुम्हारी सेवा से मैं प्रसन्न हूँ। अब मुझे यहां से दूर किसी पावन जगह ले जाकर स्थापित करो। ग्वाले ने ग्रामीणों को स्वप्न में मिले आदेश की बात बताई।

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ग्वाले की बात सुनकर सारे शिव भक्त ग्रामीण वन में गए। पावन स्थल पर ग्वाले की देख-रेख में खुदाई की तो यह शिला सात फुट की शिवलिंग स्वरूप में निकली। फिर ग्रामीणों ने पावन शिला को वर्तमान तड़केश्वर मंदिर में विधि-विधान से प्रतिष्ठित किया। साथ ही चारों ओर दीवार बना कर ऊपर छप्पर डाला।

ग्रामीणों ने देखा कि कुछ ही वक्त में यह छप्पर स्वत: ही सुलग कर स्वाहा हो गया। ऐसा बार-बार होता गया, ग्रामीण बार-बार प्रयास करते रहे। ग्वाले को भगवान ने फिर स्वप्न में बताया मैं तड़केश्वर महादेव हूँ।

मेरे ऊपर कोई छप्पर-आवरण न बनाएं। फिर ग्रामीणों ने शिव के आदेशानुसार शिवलिंग का मंदिर बनवाया लेकिन शिखर वाला हिस्सा खुला रखा ताकि सूर्य की किरणें हमेशा शिवलिंग पर अभिषेक करती रहें। तड़के का अभिप्राय धूप है जो यहां शिव जी को प्रिय है।

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शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ!

हिंदू धर्म में जिस प्रकार तुलसी के पौधे की काफी मान्यता है और हर घर में इसकी पूजा की जाती है। उसी प्रकार एक और पौधा है जिसे हिंदू धर्म में काफी शुभ माना जाता है और ये है शमी पौधा, शास्त्रों के मुताबिक शमी पत्र का विशेष महत्व है और इसे घर में लगाना बेहद ही शुभ माना जाता है।

​कहा जाता है कि शमी का पौधा भगवान शिव का प्रिय है और भगवान शिव पर जल अर्पित करते समय जल में शमी का फूल या पत्ती डालने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। आज इस पोस्ट में हम भगवान शिव को शमी पत्र चढ़ाने के सही नियम के बारे में जानेंगे, तो चलिए शुरू करते हैं :-

सावन का महीना भगवान शिव का महीना माना जाता है। सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

इस पूरे महीने में पूजा का फल कई गुना होता है। सावन में किसी भी दिन भगवान शिव को शमी के पत्ते चढ़ाए जा सकते हैं। लेकिन अगर सावन के सोमवार को शमी पत्र का भोग लगाया जाए तो भक्त को तुरंत भगवान की कृपा मिलती है।

शमी का पेड़ आपको शनि के प्रकोप से भी बचाता है। शमी के पौधे को घर के ईशान कोण यानी पूर्वोत्‍तर कोने में लगाना सबसे लाभकारी माना जाता है।

ऐसे चढ़ाएं शमीपत्र

सोमवार को स्न्नान करके शिव मंदिर में जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके तांबे के पात्र में गंगाजल सफेद चंदन,चावल आदि मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें। अभिषेक करते समय ‘ऊं नमः शिवाय‘ मंत्र का उच्चारण करें।

जब अभिषेक कर लें, तब शिव जी को बिल्व पत्र, सफेद वस्त्र, जनेऊ, चावल, प्रसाद के साथ शमी के पत्ते भी अर्पित करें। शमी के पत्ते अर्पित करते समय हो सके तो इस मंत्र का उच्चारण करें।

अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च।
दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।

Lord Shiva wallpapers

क्यों शुभ माना जाता है भोलेनाथ को शमी पत्र चढ़ाना ?

पौराणिक मान्यताओं में शमी का वृक्ष बड़ा ही मंगलकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शमी का पेड़ बहुत ही शुभ होता है। जब भगवान श्री राम रावण का वध करके लंका से लौटे तो उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा की।

इसके साथ ही एक अन्य कथा के अनुसार महाभारत में जब पांडवों को गुमनामी दी गई तो उन्होंने अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपा दिए। भोलेनाथ के साथ-साथ गणेश जी और शनिदेव, दोनों को ही शमी बहुत प्रिय है इसलिए शमी का बहुत महत्व है।

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अजीब परंपरा: जहां बेटी को अपने ही पिता से करनी होती है शादी

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बाप-बेटी का रिश्ता बहुत ही पवित्र और अनमोल रिश्ता होता है। भारत जैसे देश में बेटियां लक्ष्मी का रूप होती हैं और पिता बड़े गर्व से उनका पालन-पोषण करते हैं और फिर बड़ी धूमधाम से उनका विवाह कर घर से विदा कर देते हैं।

लेकिन हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक ऐसी जनजाति है, जहां बेटी की शादी उसके पिता से होती है। यह कुप्रथा आज भी इस समाज में प्रसिद्ध है। तो आइए जाने इस पोस्ट के माध्यम से बांग्लादेश की इस अजीब परंपरा के बारे में,

आज भी समाज में कई ऐसी कुरीतियां प्रचलित हैं जो बहुत ही हैरान कर देने वाली हैं। इसी तरह बांग्लादेश में भी एक ऐसी ही परंपरा है जिसमें बेटी को अपनी ही बेटी से शादी करनी पड़ती है। दरअसल बांग्लादेश की मंडी जनजाति में लड़की की शादी पिता से होती है और इसके पीछे का लॉजिक भी बड़ा अजीब है।

बांग्लादेश की मण्डी जनजाति की इस प्रथा के अनुसार ऐसा तब किया जाता है जब किसी महिला का पति बहुत की कम उम्र में गुजर जाये तो उसकी दूसरी शादी परिवार के ही किसी युवक से करा दी जाती है।

ऐसे में महिला के यदि कोई पहले से बेटी होती है तो युवक उस बेटी का भी पति माना जाता है। महिला की बेटी जब कुछ बड़ी हो जाती है तो उसे अपने मां के दूसरे पति को अपना पति मानना पड़ता है।

इसके पीछे लॉजिक ये है कि कम उम्र का पति अपनी पत्नी और बेटी दोनों की लंबे समय तक हिफाजत कर सकता है। आज भी इस कुप्रथा को माना जाता है।

द गार्डियन के मुताबिक 30 साल ‌की ओरोला डालबोट के पिता की मृत्यु तब हो गई थी जब वो बहुत छोटी थी। उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली। जब वह 3 साल की थी, तो उसकी शादी उसके दूसरे पिता से कर दी गई। ओरोला कहती हैं कि दूसरे पिता का नाम नॉटेन था।

ओरोला अपने दूसरे पिता को काफी पसंद करती थी। वो उसकी काफी केयर करता था। ओरोला कहती हैं जब वह बड़ी हुई, तो उसे पता चला कि वह जिसे अपना पिता मानती थी, वह वास्तव में उसका पति है। ये सुनते ही ओरोला के कदमों तले जमीन खिसक गई।

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