जानिए उपवास रखने से होने वाले फायदे!

जानिए उपवास रखने से होने वाले फायदे

अलग−अलग धर्मों के लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपवास या व्रत रखते हैं और ईश्वर की आराधना करते हैं। वहीं अगर इसे साइंटिफिक नजरिए से देखा जाये तो उपवास रखने से हमारी सेहत को भी बहुत लाभ होता है। जी हां, उपवास रखना सेहत के लिए बेहद ही लाभकारी होता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

इम्म्यून सिस्टम होता है मजबूत

उपवास रखने से शरीर का इम्म्यून सिस्टम मजबूत होता है। इस वजह से शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा कोलाइटिस ,थकान,कब्ज और सिरदर्द होने का खतरा काफी कम हो जाता  है।

शरीर से विषैले तत्व निकलने में मदद होती है

आमतौर पर लोग दिनभर उल्टा−सीधा खाते हैं, लेकिन जब आप व्रत रखते हैं तो आपके शरीर द्वारा कोई भोजन नहीं खाया जाता है। ऐसे में शरीर में मौजूद फैट ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। इतना ही नहीं, एक दिन भोजन स्किप करने और केवल जल या लिक्विड पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।

पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

उपवास का हमारे पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। महीने में कम से कम तीन बार उपवास रखने से हमारी पाचन क्रिया ठीक होती  है। उपवास के दौरान हमारे पेट और लिवर को काफी आराम मिलता है।

वजन कम करने में सहायक

अगर आप सप्ताह में एक या दो बार उपवास रखते हैं। इससे वजन कम करने में भी सहायता मिलती है। उपवास के दौरान शरीर फैट को एनर्जी में तब्दील करता है, जिससे धीरे−धीरे आपका वजन कम होने लगता है। इसके अतिरिक्त इससे आपका मेटाबॉलिज्म भी बूस्टअप होता है। इस तरह उपवास रखने की आदत से आप अपना वजन आसानी से कम कर सकते हैं।

ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखता है

वर्ल्ड जर्नल ऑफ डायबिटीज द्वारा प्रकाशित 2017 के एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि टाइप 2 डायबिटीज वाले लगभग 10 में से एक व्यक्ति को उपवास से लाभ हुआ क्योंकि इससे ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। उपवास इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है, जिससे इंसुलिन के लिए शरीर की संवेदनशीलता बढ़ जाती है और यह रक्त प्रवाह से ग्लूकोज को कोशिकाओं तक अधिक कुशलता से ले जाता है।

बेहतर मानसिक स्वास्थ्य

आपको शायद पता न हो लेकिन उपवास आपके शरीर के साथ−साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है। उपवास के बाद, ब्लड में एंडोर्फिन का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह आपको एक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। उपवास का प्रभाव व्यायाम की तरह ही होता है।

आंतों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है

अगर आप अपनी आंतों को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो उपवास जरूर करें। उम्र के साथ−साथ व्यक्ति के इंटस्टाइल स्टेम सेल्स की कार्यक्षमता में गिरावट आती है, लेकिन उपवास के दौरान, कोशिकाएं ग्लूकोज के बजाय फैटी एसिड को तोड़ देती हैं और इससे नई कोशिकाएं बनने में मदद मिलती हैं।

डिप्रेशन कम होता है

उपवास मानसिक शांति का बेहतर विकल्प होता है इससे तनाव, चिंता और डिप्रेशन से बचा जा सकता है।  व्रत रखने से मन शांत रहता है और हमारी इच्छाशक्ति भी मजबूत होती है।

बेहतर हीलिंग प्रोसेस

उपवास करने का एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे शरीर में हीलिंग प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। दरअसल, जब भोजन पेट में मौजूद नहीं होता है, तो शरीर पाचन के बजाय अन्य महत्वपूर्ण कार्यों जैसे मेटाबोलिक गतिविधि और इम्म्यून सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करता है। कई रिसर्च में भी इस बात की पुष्टि हुई है, यहां तक कि एथलीटों को प्रशिक्षण के दिनों में उपवास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि अतिरिक्त फैट को बहाया जा सके और मांसपेशियों की वृद्धि को अनुकूलित किया जा सके।

गुस्से पर काबू कैसे पाएं

गुस्से पर काबू कैसे पाएं

गुस्सा आजकल हर किसी के लिए बड़ी समस्या है। किसी को गुस्सा बहुत ज़्यादा आता है, तो किसी को गुस्सा बर्दाश्त करना पड़ता है। गुस्से में अक्सर लोग ऐसा काम कर जाते हैं जिससे उन्हें बाद में बहुत पछताना पड़ता है। गुस्से में लोग अपनी नौकरी छोड़ देते हैं, किसी के साथ मारपीट कर देते हैं, घर का सामान तोड़ देते हैं। अगर आपको भी बात-बात पर गुस्सा आता है और आप इस आदत से तंग आ चुके हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस पर कैसे काबू पाएं :-

व्यायाम और योग करें

हर दिन कम से कम 45 मिनट का व्यायाम करना चाहिए। सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम जैसे योगाआसन करने चाहिए। व्यायाम करने से दिमाग और मन शांत रहते हैं। इसके साथ-साथ तनाव को कम करने के लिए तैराकी (स्विमिंग) भी कर सकते हैं जिससे आपका ध्यान बंटा रहेगा और गुस्सा कम आएगा।

टहलने निकल जाएं

जब भी आपको गुस्सा आये तो आप वह स्थान छोड़ कर कहीं टहलने निकल जाएं। गुस्सा पैदा करने वाली स्थिति से दूर हो जाने से आप शांत महसूस करेंगे और इससे चीजों को समझने में भी मदद मिलेगी। बाहर निकलकर प्रकृति पर ध्यान दें। टहलकर आप तुरंत उस नकारात्मक ऊर्जा से बच सकते हैं और अपने गुस्से पर काबू पा सकते हैं।

गहरी साँसें लें

जब भी आपको बहुत गुस्सा आता है तो एक लंबी और गहरी सांसे लेनी चाहिए जिससे आपके मस्तिष्क में अधिक से अधिक ऑक्सीजन जा सके। गहरी साँसे लेना वैसे भी एक बहुत बढ़िया आदत है जो हमारे शरीर के लिए सही होता है इससे हमारा दिमाग शांत होता है और बाकी की फ़ालतू की चीज़ें हमसे दूर चली जाती है l

बोलने से पहले सोच लें

यदि आपको गुस्सा आये तो सामने वाले व्यक्ति से जो भी बोले, वो बोलने से पहले सोचे लें कि आप कहीं गलत तो नहीं बोलने जा रहे हैं, यदि आपको लगता है कि आप सही हैं तो बोल दें और आराम से बात करें, तेज आवाज़ में बात न करें।  इस तरीके से आप गलत बोलने से बच जायगें और सामने खड़े व्यक्ति से आपके रिश्ते भी ख़राब नहीं होंगे।

संगीत सुनें

जब भी आपको लगे कि आपको गुस्सा आ रहा है तो अपने पसंदीदा संगीत को सुने इससे आपका मन शांत होगा और आपका मूड भी अच्छा होगा। संगीत को सुनकर आप निश्चित रूप से अच्छा महसूस करेंगे, भले ही आपको जितना भी गुस्सा हो परन्तु संगीत सुनने से आपको अच्छा लगेगा।

किसी एकांत स्थान पर चले जाएं

अलग-अलग लोग अलग-अलग तरह से अपना गुस्सा दिखाते हैं। कुछ लोग अपने कपड़ो को फाड़ देते हैं, कुछ लोग अपना फोन उठा कर ज़मीन पर पटक देते हैं, कुछ लोग घर का सामान तोड़ डालते हैं और कुछ लोग घर के सदस्यों के साथ मारपीट करते हैं और अपने साथ-साथ दुसरो को भी नुकसान पहुंचाते हैं। यह सभी तरीके नकारात्मक हैं। जब भी आपको गुस्सा आये तो आप तुरंत वह स्थान छोड़ कर कहीं एकांत में कुछ पल बिताए, ऐसा करने से आपका गुस्सा जल्दी शांत होगा।

राजस्थान के दिल जैसलमेर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

राजस्थान के दिल जैसलमेर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

राजस्थान में स्थित जैसलमेर किला विश्व के सबसे बड़े किलों में से एक है। इस किले को ‘सोनार किला’ या ‘स्वर्ण किला’ भी कहा जाता है। राजस्थान की शान में सदियों से खड़ी ऐतिहासिक धरोहर जैसलमेर का किला भारत ही नहीं अपितु विश्व भर में प्रसिद्ध है। “वर्ल्ड हेरिटेज साइट” की शृंखला में शुमार यह किला राजस्थान के प्राचीन इतिहास को अपने में समेटे हुए है।

  • इस किले को गोल्डन किला या सोनार किला भी कहा जाता है क्योंकि दिन के समय सूरज की रौशनी में इस किले की दीवारें हल्के सुनहरे रंग की दिखाई देती हैं। यह किला विश्व में सबसे बड़े किलों में से एक है।
  • जैसलमेर किले का निर्माण सन 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक रावल जैसल द्वारा किया गया था।
  • इस किले को बनाने में बेहद ही खूबसूरत पीले और सुनहरे पत्थरों का प्रयोग किया गया था, पूरे किले में कहीं भी चूना या गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया था।
  • किले के अन्दर एक शानदार जलनिकासी सिस्टम भी है जिसे “घुट नाली” नाम दिया गया है जो बरसात के पानी को किले से आसानी से बाहर निकाल देता है।
  • यह किला 1500 फीट लंबा, 750 फीट चौड़ा और 250 फीट ऊँचे पर्वत पर बना हुआ है। किले में एक तहखाना भी है जो 15 फीट लंबा है।
  • इस किले में एक भव्य लाइब्रेरी भी बनाई गई है जिसमें प्राचीन किताबें और दुर्लभ कलाकृतियां हैं l
  • जून 2013 को “नोम पेन्ह” में विश्व धरोहर समिति की 37वीं बैठक के दौरान जैसलमेर किले को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया गया था।
  • राजस्थान के अन्य किलों की भांति इस किले में भी अखाई पोल, हवा पोल, सूरज पोल और गणेश पोल जैसे कई द्वार हैं सभी द्वार अपनी शानदार स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है।
  • 16वीं सदी के दौरान महवालजीत सिंह ने “बड़ा बाग़” का निर्माण शुरू किया था। उनके निधन के बाद उनके बेटे लुणकरण ने इसके निर्माण को पूरा किया। इस बाग़ को एक स्मारक के रूप में बनाया गया है जहां पर श्रेष्ठ लोग और उनके परिवार को दफनाया गया था।
  • इस किले से एक किलोमीटर की दूरी पर “गड़ीसर नदी” स्थित है। इस नदी को राजा रावल जैसल ने बनवाया था और बाद में इसे दुबारा साल 1367 ऐ.डी. में महारावल जर्सी ने बनवाया था। यहाँ के लोग अपनी पानी की ज़रूरतों के लिए इसके टैंक पर निर्भर रहते हैं।
  • इस किले में राजपूत और मुगल वास्तुकला शैली का मिश्रण देखने को मिलता है।
  • जैसलमेर किले के अंदर स्थित जैन मंदिरों की एक श्रृंखला है जो जैन तीर्थंकारों को समर्पित है।
  • इस किले के भीतर बहुत ही सुन्दर महल, मंदिर, सैनिकों व व्यापारियों के आवासीय परिसर बने हुए हैं, जो इसे अन्य किलों से अलग बनाते हैं। यह किला जैसलमेर के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।

तितलियों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

तितलियों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

तितली एक बहुत ही सुन्दर जीव है। रंग बिरंगी तितलियां सभी का मन मोह लेती हैं और लोग इन्हें काफी पसंद भी करते हैं लेकिन खूबसूरत दिखने वाली इन तितलियों से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में आपको पता नहीं होगा। आज हम आपको तितलियों से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं तितलियों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-

  • पूरी दुनिया में 24,000 से भी ज़्यादा प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं। अंटार्टिका को छोड़कर बाकी सभी महाद्वीपों में तितलियां पाई जाती हैं।
  • तितली, कीटों की श्रेणी में आने वाला एक जीव है जो भिन्न-भिन्न रंगों में पाया जाता है। इसके रंग बिरंगे पंख बहुत ही आकर्षक होते हैं। भारत में लगभग 1500 विभिन्न प्रजातियों की तितलियां पाई जाती हैं।
  • आपने तितली को फूलों पर बैठते तो देखा ही होगा दरअसल वो फूलों के रस को पीती है लेकिन क्या आपको यह पता है कि तितलियां किसी भी चीज का स्वाद पैरों से चखती हैं।
  • क्या आप जानते हैं तितलियों का जीवनकाल बेहद छोटा होता है और यह लगभग 2 से 4 सप्ताह तक ही जीवित रह सकती हैं लेकिन कुछ ऐसी प्रजातियां भी हैं जो 9 महीने तक जिंदा रहती हैं
  • तितली में सुनने की क्षमता नहीं होती लेकिन यह वाइब्रेशन को महसूस कर सकती हैं।
  • अमेज़न (Amazon) के जंगलों में पाई जाने वाली तितलियों के शरीर में सोडियम की कमी होती है और वे इस कमी को पूरा करने के लिए कछुओं के आंसू को पीती हैं।
  • तितली के पंखों के आर पार देखा जा सकता है इसके चार पंख होते हैं। सबसे बड़ी तितली के 12 पंख होते हैं ।
  • दुनिया की सबसे बड़ी तितली 12 इंच की है और दुनिया की सबसे छोटी तितली का साइज आधे इंच के बराबर है।
  • तितली की आंख में 6000 से ज़्यादा लेंस होते हैं जिसके कारण वह अल्ट्रावॉयलेट किरणें भी देख सकती हैं ।
  • तितलियां भी मधुमक्खियों की तरह फूलों से नेक्टर चुस्ती हैं और जिंदा रहती हैं।
  • तितलियां किसी भी चीज का स्वाद उस पर खड़े हो कर लेती हैं क्योंकि इनके चखने वाले सेंसर पैरों में पाए जाते हैं।
  • क्या आप जानते हैं तितलियां भविष्य भी देख सकती है तितलियां अगले दिन के मौसम का अंदाजा एक दिन पहले ही लगा सकती हैं l
  • तितली भोजन के रूप में फूल,पत्तियां इत्यादि खाती हैं और अधिकांश तितलियां शाकाहारी होती है।
  • तितलियां पराबैंगनी किरणों को देख सकती हैं जिन्हें इंसान नहीं देख सकते।
    आपको जानकर हैरानी होगी कि तितलियां अपनी उड़ान से 3000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती हैं।
  • धरती के ऊपर एक “89’98” नाम की तितली मौजूद है इस तितली का यह नाम इसलिए रखा गया है क्यूंकि इस तितली के पंख के एक तरफ देखने पर 89 और दूसरी तरफ देखने पर 98 दिखाई देता है l
  • आमतौर पर तितलियां 17 फीट/सेकंड की स्पीड से उड़ने में सक्षम होती हैं, लेकिन ‘स्किपर’ नाम की तितली इतनी तेजी से उड़ती है कि यह एक घोड़े को भी पीछे छोड़ सकती हैl
  • तितलियों का हम मनुष्यों के साथ पुराना रिश्ता रहा है प्राचीन मिस्र के लगभग 3500 साल पुरानी चित्रकला में भी तितलियों की आकृति छपी हुई पाई गई है l

खूबसूरत नहीं बल्कि डरावने दिखाई देते हैं कुछ पौधे

इस धरती पर पेड़-पौधे, फूल पत्तियां सब प्रकृति की देन है और इन्हीं से हमारी पृथ्वी खिल उठती है। घर के आसपास फूल, पेड़-पौधों को लगा कर नकारात्मकता दूर की जाती है। प्रकृति की हर रचना अद्भुत है, वैसे तो सभी पेड़-पौधे और उनके फूल देखने में खूबसूरत होते है लेकिन आपको बता दें कि हमारी इस प्रकृति में कुछ पौधे और फूल ऐसे भी है जो देखने में बहुत ही डरवाने हैं। आज हम आपको ऐसे ही पौधों और फूलों के बारे में बताने जा रहे हैं जो दिखने में बहुत ही डरावने होते हैं:-

स्नेप ड्रैगन

स्नेप ड्रैगन एक प्रकार का फूल है परन्तु देखने में ये मानव कंकाल की खोपड़ी जैसा लगता है। इस फूल की एक खासियत यह है कि यदि आप इस फूल के पक्षों को निचोड़ते हो तो यह किसी ड्रैगन के मुंह खुलने तथा बंद करने जैसा दिखाई पड़ता है। प्राचीन लोगों का इस पौधें के बारे में ऐसा विश्वास था कि यह पौधा लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है।

पॉदोस्ट्रोमा कॉर्न डुमा

यह पौधा देखने में बहुत ही डरावना लगता है और यह काफी कम जगहों पर देखने को मिलता है। इसको देखने पर ऐसा लगता है कि जैसे किसी भूत प्रेत का हाथ जमीन से बाहर की ओर निकल रहा हो। आपको बता दें कि इसका किसी भी प्रकार से प्रयोग करना हमारे शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक हो सकता है।

मंकी फेस ऑर्चिड

मंकी फेस ऑर्चिड फूल भी देखने में बहुत ही अजीब लगता है यह फूल देखने में ऐसा लगता है कि जैसे ये किसी बंदर का फेस हो। आपको यह जानकर हैरानी होंगी कि यह दक्षिण इक्वाडोर तथा पेरू के बादल वन में करीब 3 हजार फिट की ऊंचाई पर पाया जाता है और सबसे खास बात है कि यह फूल पूरे वर्ष खिलता है। इसमें से पके हुए संतरे के जैसी गंध आती है।

डेविल्स टूथ

डेविल्स टूथ दिखने में तो बिल्कुल मशरूम की तरह लगता है, लेकिन इसका इस्तेमाल खाने में नहीं किया जाता। दरअसल इस पौधे की ऊपरी सतह सफेद रंग की होती है और उस पर लाल रंग के धब्बे बने होते हैं। इस पौधे की विचित्र बात यह है कि इन लाल धब्बों से लाल रंग का द्रव्य निकलता रहता है, जिसको देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इस पौधे से खून निकल रहा हो।

ऑक्टोपस स्टिंकहॉर्न

इस पौधे को ‘ऑक्टोपस स्टिंकहॉर्न’ के नाम से जाना जाता है। यह लाल रंग का पौधा दिखने में बिल्कुल ऑक्टोपस की तरह लगता है, जिसके आठ पैर होते हैं। यह पौधा काफी बदबुदार होता है, जिस वजह से तरह-तरह के कीड़े इसकी ओर आसानी से आकर्षित हो जाते हैं।

बुद्धास् हैंड

बुद्धास् हैंड नाम का यह पौधा दिखने में बिल्कुल ही अजीबो-गरीब है। इस पौधे को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इसकी कई सारी ऊंगलियां निकली हुई हों। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह अजीबो-गरीब पौधा नींबू की प्रजातियों में से एक है।

इस पौधे पर गोल नींबू तो नहीं उगते, लेकिन इसकी खुशबू बिल्कुल नींबू के जैसी होती है, इसलिए इस पौधे को लोग रूम फ्रेशनर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

डॉल्स आईज

डॉल्स आईज नामक पौधे को देखने पर ऐसा लगता है कि इसकी टहनियों पर बहुत सारी आंखें लटकी हुई हैं। अजीबो-गरीब दिखने वाला यह पौधा एक तरह की बेरी है लेकिन इसे खाया नहीं जा सकता क्योंकि यह विषैला पौधा है।

ब्लैक बैट

थाईलैंड और मलेशिया में मिलने वाला यह पौधा काले चमगादड़ जैसा लगता है। इसकी पत्तियों का आकार 12 इंच तक होता है जो इसको हर जगह से घेरे रखती हैं। अंधेरे में इसे देख कर कोई भी चकरा जाएगा। इस पौधे की अजीबो-गरीब खूबी यह है कि अगर इस पौधे को अंधेरे में देखा जाए तो यह बिल्कुल चमगादड़ की तरह ही नज़र आता है।

नकारात्मक सोच से कैसे छुटकारा पाएं!

परिस्थितियां सोच की जननी होती है, फिर वही सोच आगे चलकर सकारात्मक एवं नकारात्मक परिस्थितियों को जन्म देती है। नकारात्मक सोच की शुरूआत किसी विपरीत परिस्थिति से होती है। नकारात्मक विचार हमारे मानसिक और शारारिक स्वास्थ्य के दुश्मन है। नकारात्मक विचारों से डर और तनाव पैदा होता है। यदि नकारात्मक विचार दिमाग में अपना घर बना ले तो उससे जीवन नरक बन जाता है। तो आइये जानते हैं कि ‘नकारात्मक विचारों से छुटकारा कैसे पाएं’:-

सुबह जल्दी उठें

सुबह की शुरुआत अगर अच्छी हो तो पूरा दिन सकरात्मक रहता है इसलिए सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। सुबह जल्दी उठना और एक नियमित दिनचर्या का पालन करना आपको बुद्धिमान बनाता है। सुबह जल्दी उठने से आपके पास अपने पूरे दिन की तैयारी के लिए काफ़ी समय होता है।

योगा करें

योगा करने से न सिर्फ हमारा शरीर स्वस्थ होता है बल्कि इससे हमारे मानसिक विकास में भी बदलाव आता है। रोजाना 30 मिनट योगा करना अच्छा रहता है। इससे आपके दिमाग में सकारात्मक विचार आते हैं, मानसिक शांति मिलती है और साथ ही पूरा दिन शरीर में एक नयी उमंग रहती हैl

ईश्वर में ध्यान लगाएं

सुबह के समय कुछ देर ईश्वर में ध्यान लगाएं इससे आपका मन शांत रहेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। भगवान से प्रार्थना करें इससे आपको बहुत अच्छा महसूस होगा।

गलत संगत से दूर रहें

सबसे जरुरी है ऐसे लोगों को पहचानना जो नकारात्मक सोच वाले हों। ऐसे लोगों के संपर्क में रहने से हमारे जीवन में  नकारात्मकता हावी होने लगती है क्यूंकि हमारी सोच पर संगत का बहुत असर होता है।

अगर आप कुछ अच्छा काम करने की सोचते हो तो बुरी संगत में आप वह काम नहीं कर पाएंगे । बुरी संगत से आदमी न सिर्फ नकारात्मक बनता है बल्कि गलत आदतों का शिकार भी हो जाता है इसलिए गलत संगत से हमेशा दूर रहना चाहिए।

म्यूजिक सुनें

जब भी आप अकेलापन महसूस करें या जीवन में नकारात्मकता बढ़ने लगे तो संगीत सुने। इससे आपके दिमाग में नकरात्मक विचार नहीं आएंगे और आपका मूड भी फ्रेश हो जायेगा। संगीत सुनने से आपको एक नए जोश के साथ आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।

अपनों के साथ समय बिताएं

जितना हो सके अपने पेरेंट्स, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय बिताएं, उनके साथ खाना खाएं, टीवी देखें, गेम्स खेलें। ऐसा करने से आपके मन में आने वाले नकारात्मक विचार दूर होंगे और आपको पॉज़िटिव एनर्जी मिलेगी। वर्तमान के बारे में सोचें l ज़्यादातर लोग पुरानी बातों और ग़लतियों के कारण नकारात्मक सोच का शिकार होते हैं लेकिन अगर आप आज के बारे में सोचेंगे तो आप ख़ुश रहेंगे।

नए दोस्त बनायें

महिला हो या पुरुष अगर जीवन में दोस्तों की कमी हो तो जीवन में अकेलापन बढ़ता है और हम किसी से भी सुख दुःख शेयर नहीं कर पाते जिससे नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। जहाँ तक हो सके नए दोस्त बनायें और उनके साथ हंसी मजाक करें और हमेशा सकारात्मक बाते करें।

हमेशा खुश रहें

ज़िन्दगी में खुश रहना मतलब सकारात्मकता का होना है। अक्सर आदमी के दिमाग में नकारात्मक सोच तब आती है जब वह दुखी या परेशान होता है। अगर आपको किसी काम से असफ़ल होने पर दुःख हो रहा है तो ये नहीं सोचें की आपको उससे कुछ नहीं मिला बल्कि ये सोचें कि आपने वहां से बहुत कुछ सीखा है और आगे आप उसे बेहतर ढंग से कर सकते हो इसलिए जितना हो सके खुश रहें।

जानिए कोरोना वायरस से बचने के लिए कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

जानिए कोरोना वायरस से बचने के लिए कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

कोरोना वायरस के प्रकोप ने दुनिया भर के देशों को प्रभावित किया है। इस खतरनाक वायरस के संक्रमण को कम करने के लिए प्रत्येक देश संभव कोशिश कर रहा है। फिलहाल इस वायरस से बचने के लिए केवल सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र उपाय है। इसके साथ ही यदि मानव शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो वो किसी भी बीमारी से लड़ सकता है। मजबूत इम्यून सिस्टम इंफेक्शन से लड़ने में मदद कर सकता है।

प्रोटीन से भरपूर चीज़े खाएं

प्रोटीन से हमारे शरीर को अमीनो एसिड मिलता है, जो हमारे शरीर में हेल्पर टी-सेल्स को जनरेट करने में मदद करता है। ये टी-सेल्स हमारी इम्युनिटी क्षमता बढ़ाने वाले सेल्स को एनर्जी देते हैं। इसके लिए आप  दलिया, उबली हुई दालों की सलाद, साबुत अनाज और (स्प्राउट्स) खा सकते हैं।

कुछ देर धूप में जरूर बिताएं

धूप में कुछ समय जरूर बिताएं। धूप में वक्त बिताना इसलिए जरूरी है क्योंकि धूप हमारे शरीर में मौजूद इंफेक्शन से फाइट में मदद करने वाली टी-सेल्स को एनर्जी देने का काम करती है।

अदरक और लहसुन का सेवन करें

अदरक में कई एंटी-वायरल तत्व मौजूद होते हैं। आप इसे सौंफ या शहद के साथ ले सकते हैं। उसी प्रकार एंटिऑक्सीडेंट्स के गुणों से भरपूर लहसुन शरीर में वायरस इंफेक्शन या बैक्टीरिया को रोकने में मदद करता है। इनके नियमित रूप से सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

विटामिन सी युक्त चीजों का सेवन करें

विटामिन सी शरीर में न सिर्फ हड्डियों को मजबूत करती है बल्कि इम्यूनिटी क्षमता को भी बढ़ाती है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। आप शिमला मिर्च, पालक, आंवला, पपीता, संतरा, नीम्बू ,और अमरूद जैसी चीजों का सेवन कर विटामिन सी प्राप्त कर सकते हैं।

मैडिटेशन करें

मैडिटेशन करने से हमारा दिमाग शांत रहता है और हैपी हॉर्मोन्स का उत्पादन बढ़ता है। ये हॉर्मोन्स हमारे शरीर की अन्य कोशिकाओं को स्ट्रेस फ्री करने में मदद करते हैं, जिससे हमारा शरीर अंदर से मजबूत बनता है।

व्यायाम करें

जो लोग सप्ताह में 5 से 6 दिन व्यायाम करते हैं, उन्हें सर्दी और गले में खराश होने के चांस उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं, जो लोग व्याया नहीं करते हैं। व्यायाम से हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बूस्ट होता है और तेजी से ब्लड सेल्स बनाता है। ये ब्लड सेल्स शरीर में पहुंचे वायरस को मारने का काम करता है।

खुश रहने का प्रयास करें

स्ट्रेस फ्री रहना कई तरीकों से हमारी इम्युनिटी बढ़ाता है। इसके लिए आप डांस, म्यूजिक, मेडिटेशन, भजन-कीर्तन और पसंदीदा किताबों की मदद ले सकते हैं। खुश रहने की अधिक से अधिक कोशिश करें, क्योंकि खुश रहने से हमारे शरीर को रिलैक्सेशन मिलती है। जब शरीर रिलैक्स होता है तो इम्यूनिटी अपने आप बढ़ जाती है।

पर्याप्त नींद लें

नींद हमारे शरीर को इम्यून सेल्स के फैलाव में मदद करती है यानी नींद के वक्त हमारे इम्यूनिटी सिस्टम के लिए इंफेक्शन वाली जगह खोजकर वहां इम्यून सेल्स को पहुंचाना आसान हो जाता है। फिर ये इम्यून सेल उन वायरस को खत्म करने का काम करती हैं। इस तरह से नींद शरीर की इम्यूनिटी क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।

सुंदरवन के बारे में कुछ रोचक तथ्य

सुंदरवन के बारे में कुछ रोचक तथ्य

सुंदरवन लंबे समय से अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। सुंदरवन भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित एक डेल्टा क्षेत्र हैं जो वन्यजीवों में खासकर रॉयल बंगाल टाइगर के लिए पूरी दूनिया में प्रसिद्ध है। यहां रहने वाले जीव-प्रजातियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया है।

यहां पर वन्य जीवों के अलावा वनस्पतियों की कई अनोखी और दुलर्भ प्रजातियां पाई जाती है। यहां सुंदरी नाम के पेड़ भारी संख्या में पाए जाते हैं, जिसके नाम पर इस डेल्टाई क्षेत्र का नाम “सुंदरवन” पड़ा। आइए जानते हैं सुंदरवन के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • सुंदरवन का नाम इस जंगली इलाके में भारी संख्या में पाए जाने वाले “सुन्दरी” पेड़ो से लिया गया है और साथ ही बंगाली भाषा के शब्द “शुंदोर” का प्रयोग करके इसका नाम सुंदरवन रखा गया l आम भाषा में लोग इस वन को सुंदरबन या सुंदरवन के नाम से जानते है l
  • सुंदरवन में मौजूद मैनग्रोव जंगल यहाँ के रॉयल बंगाल टाइगर का घर माना जाता है जो दलदली जमीन पर बना हुआ है।
  • सुंदरवन का इतिहास 200-300 ईस्वी के आसपास का माना जाता है इसका प्रमाण बागमरा फारेस्ट ब्लाक में मिले अवशेषों से मिलता हैं |
  • सुंदरवन में तरह-तरह की वनस्पतियां पाई जाती है जो पूरी दुनिया में सिर्फ यहाँ पर ही मिलती है l
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि सुंदरवन में भारत का सबसे बड़ा फिशरी बोर्ड है जहां सुंदरवन डेवलपमेंट बोर्ड 50 हेक्टेयर के इलाके में फिशरी प्रोजेक्ट चलाता है l
  • सुंदरवन में स्तनधारियों की 50 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती है। इसके अलावा 60 से ज़्यादा रेंगने वाले जीवों की प्रजातियाँ, 300 से ज़्यादा पक्षियों और वनस्पतियों की प्रजातीयाँ पाई जाती है l
  • सुंदरवन 10,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें से 6000 वर्ग किमी बांग्लादेश में आता है और भारत के हिस्से में 4110 वर्ग किमी आता है |
  • पश्चिम बंगाल में सुंदरवन क्षेत्र, रॉयल बंगाल बाघों के लिए प्रसिद्ध है।
  • सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है | गंगा और ब्रह्मपुत्र दोनों नदियों के एकीकरण से बने इस डेल्टा को बंगाल डेल्टा या ग्रीन डेल्टा भी कहा जाता है |
  • सुंदरवन को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है जिसकी वजह से इसका संरक्षण काफी बड़े स्तर पर हो रहा है |
  • सुंदरवन डेल्टा बंगाल बेसिन से जुड़ा विश्व का सबसे चौड़ा, गहरा और सबसे सक्रिय डेल्टा है l
  • सुंदरवन सर्वाधिक हराभरा रहने वाला वन है इसका कारण यहाँ पर होने वाली सर्वाधिक वर्षा है। सुंदरवन को वर्षावन भी कहा जाता है।
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि सुंदरवन के विशाल डेल्टा में 5-6 द्वीप नहीं बल्कि 54 छोटे छोटे द्वीपों का समूह है l

विश्व से जुड़े कुछ ऐतिहासिक रोचक तथ्य !

विश्व से जुड़े कुछ ऐतिहासिक रोचक तथ्य !

  • प्राचीन रोमन कैलेंडर में जनवरी और फरवरी के महीने नहीं होते थे। अतः उनका नव वर्ष 1मार्च को मनाया जाता था।
  • भारत का सबसे पहला ग्रंथ वेद हैं। वेदों की कुल संख्या चार है – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद।
  • वेदों को अच्छी तरह से समझने के लिए वेदांगो की रचना की गई है जिनकी संख्या 6 है– शिक्षा, ज्योतिष, कल्प, व्याकरण, निरूक्त और छंद।
  • हिंदु महाकाव्यों और पुराणों में भारत को ‘भारतवर्ष’ कहा गया है जिसका अर्थ है – ‘भरत का देश’। इन्हीं ग्रंथों में यहां के निवासियों को ‘भारत संतति’ कहा गया है अर्थात् ‘भरत की संतान’।
  • क्या आप जानते हैं सबसे पहले मिले कंकाल का नाम ‘लूसी’ रखा गया था।
  • मैक्सिको के राजा सैंटा एना का युद्ध के दौरान पैर कट गया था, पर क्या आपको पता है कि उस पैर का क्या हुआ? उस पैर का बाकायदा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया l
  • हमारे प्राचीन विद्वानों ने हिमालय से लेकर समुद्र तक फैली हुई भूमि को चक्रवर्ती सम्राट की निजी जागीर बताया है।
  • प्राचीन मिश्र में मधुमक्खियों के हमलों से बचने के लिए नौकरों के शरीर पर शहद लगाकर उन्हें शहर से बाहर कर दिया जाता था , ताकि मधुमक्खियां राजमहल में न जाकर किले से बाहर ही रहें।
  • 19वीं शताब्दी से पहले जानवरों पर भी मुकदमे चलाए जाते थे।
  • संसार का सबसे पुराना बबलगम 9000 साल पुराना है।
  • 1811 में एक जबरदस्त भूचाल के कारण उत्तरी अमेरिका की मिसिसीपी नाम की नदी उल्टी दिशा में बहने लगी थी।
  • किसी समय तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे भारत में प्राकृत भाषा का उपयोग होता था l
  • हिमालय के पर्वत साल के ज़्यादातर समय बर्फ से ढके रहते हैं इसी कारण किसी भी भारतीय राजा ने उत्तरी क्षेत्रों को  जीतने के लिए अभियान नहीं चलाया।
  • वैदिक काल में पत्नी को इस प्रकार सम्मान दिया गया है – ‘वो अर्धांगिनी और सच्ची मित्र है। वो गुणों का स्रोत है। वो खुशी और लक्ष्मी का रूप है। जब आप उसके साथ अकेले होते हैं, तो वो आपकी मित्र होती है, जब आप उसके साथ विचार-विमर्श करते हैं, तो वो पिता के समान होती है।’
  • डॉक्टर स्मिथ के अनुसार ‘विष्णु पुराण’ मौर्य वंश की और ‘मत्स्य पुराण’ आन्ध्र एवं शिशुनाग वंश के संबंध में जानकारी प्रदान करते हैं।
  • क्या आप जानते हैं यूरोप में कुछ जगहों पर 15वीं शताब्दी में मृतकों के शवों को खाया जाता था। इसके पीछे यह मान्यता थी कि ऐसा करने से वे रोगो से बच सकेंगे।
  • 755 ईस्वी के आसपास चीन के लुसान में हुए विद्रोह में 30 मिलियन के करीब लोगों की मौतें हुई थी, जो उस समय  दुनिया की आबादी का 1/6 हिस्सा था।
  • प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत में अमेरिकी एयरफोर्स में महज 18 पायलट थे।
  • क्या आप जानते हैं कि इंग्लैड और जंजीबार में युद्ध हुआ था जो केवल 38 मिनट तक ही चला था।
  • क्या आपको पता है कि मध्यकाल में नकली दांतों को कैसे लगाया जाता था? मध्यकाल में जो लोग युद्ध में मारे जाते थे उनके दांतों को निकाल लिया जाता था, ताकि वो किसी और को लगाए जा सके l

विलुप्त हो रही प्रजातियाँ जिनके बारे में आपको नहीं पता

पृथ्वी आकर्षक वन्य प्रजातियों से भरी हुई है. पृथ्वी पर ऐसी भी बहुत सी विलुप्त हो रही प्रजातियाँ हैं जिनके बारे में शायद ही आपको को पता होगा. आइए जानें ऐसी प्रजातियों के बारे में जो विलुप्त हो रही हैं.

सिल्की (Silkie)

silkieसिल्की एक मुर्गे की नस्ल है जिसके पखं बहुत ही मुलायम होते हैं. सिल्की नस्ल की त्वचा और हड्डियाँ काले रंग की होती हैं और उनके पैर में पांच उगलियाँ होती हैं. जबकि दूसरी प्रजातियों में केवल चार ही उगलियाँ होती हैं. ऐसे ही कई और अन्य असामान्य गुणों के कारण यह प्रजाति सबसे अलग है. इनकी विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं के अलावा सिल्की प्रजाति शांत और दोस्ताना स्वभाव के लिए भी जानी जाती है.

सुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया (Sunda Flying Lemur)

sunda-flying-lemurसुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया को मलायी कोलुगो भी कहा जाता है. दरसल कोलुगो एक प्रजाति है जो इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया में पाई जाती है. सुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया प्रजाति रात को ही जागती है. इस प्रजाति के जीव केवल पत्तियां, फूल, फल और टहनियों के मुलायम भाग ही खाते हैं. सुण्डा फ्लाइंग लेमुरीया एक कुशल पर्वतारोही है लेकिन जमीन पर असहाय है.

सोनकुत्ता (Dhole)

dholeसोनकुत्ता, वनजुक्कुर कुत्तों के कुल का जंगली प्राणी है जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है. यह अपनी प्रजाति का इकलौता जीवित नस्ल है. इस प्रजाति को अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा विलुप्त प्रजाति घोषित कर दिया है क्योंकि इनके आवास क्षेत्र और शिकार की कमी के कारण इनकी संख्या तेज़ी से घट रही है. हालाँकि वनजुक्कुर कुत्ते मनुष्यों से डरते हैं लेकिन इनके झुण्ड बड़े और खतरनाक होते हैं यहां तक की जंगली सुअर, जंगली भैंसा तथा बाघ पर आक्रमण करने से भी नहीं हिचकिचाते हैं. यह अपने शिकार को भगा-भगा के मारते हैं.

मारखोर (Markhor)

markhorमारखोर जंगली बकरी की एक बड़ी प्रजाति है जोकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कश्मीर, तजाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान में पाई जाती है. IUCN की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रजाति लुप्त हो रही है. मारखोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु है. मारखोर नाम थोड़ा अजीब है. फ़ारसी में इसका मतलब एक साँप खाने वाला पहाड़ी जानवर है.

चपटी नाक वाला बंदर (Snub-nosed Monkey)

snub-nosed-monkeyकाफ़ी समय पहले से चपटी नाक वाले बंदरों का समूह पाया जाता है. इनकी पूंछ 55 से 97 सेमी तक लंबी होती है. चपटी नाक वाले बंदर विशेष रूप से दक्षिणी चीन, तिब्बत, सिचुआन, युन्नान, वियतनाम और म्यांमार के उत्तरी भागों में पाये जाते हैं. ये बंदर ज्यादातर पेड़ों पे ही रहते हैं. यह समूह बना कर रहते हैं जिसमें 600 से अधिक बंदर होते हैं. सर्दियों में भोजन की कमी की वजह से ये छोटे छोटे समूहों में बंट जाते हैं.

रकून कुत्ता (Raccoon Dog)

raccoon-dogरकून कुत्ते या तनुकी (tanuki) पूर्व एशिया में पाए जाते हैं. यह बहुत ही अनोखे कुत्ते होते हैं. यह न्य्क्टेरयूतेस (Nyctereutes) की प्रजाति है.

मानेद वुल्फ (Maned Wolf)

maned-wolfमानेद वुल्फ दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी प्रजाति है. यह लोमड़ी की तरह है जिसके पतले पैर और लंबी टागें हैं. यह दक्षिण अमेरिका के घास के मैदानों में पाया जाता है. इसके लम्बें पैर घास के मैदानों के लिए अनुकूल हैं.

गेरेनुक (Gerenuk)

gerenukगेरेनुक एक हिरन की प्रजाति है. लेकिन इनकी आँखें और कान अनुपात में बड़े होते हैं. यह प्रजाति पूर्वी अफ्रीका में पाई जाती है. गेरेनुक हिरन की गर्दन लंबी होती है.

अमेजन रॉयल फ्लाईकैचर (Amazonian Royal Flycatcher)

amazonian royal flycatcherअमेजन रॉयल फ्लाईकैचर तानाशाह फ्लाईकैचर परिवार का एक गौरैया पक्षी है. वे अमेजन घाटी के वनों में पाए जाते हैं. इनकी लंबाई 6 इंच तक होती है. बर्ड लाइफ इंटरनेशनल (BirdLife International) के अनुसार यह प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है.

ज़ेबरा दुइकर (Zebra Duiker)

zebra-duikerज़ेबरा दुइकर एक छोटा हिरन होता है जो की अफ्रीका में पाया जाता है. इनके शरीर पर काले रंग की धारियाँ, पैर पर काले निशान और चेहरे पर लाल-भूरे रंग के बाल होते हैं. इनकी लंबाई 90 सेमी और ऊंचाई 45 सेमी तक होती है. ज़ेबरा दुइकर का बजन 20 किलो तक होता है. इनके सींग 4.5 सेमी लंबे होते हैं. ज़ेबरा दुइकर तराई वर्षावन में रहते हैं और ज्यादातर पत्तियां व फल ही खाते हैं.