कुदरत के रहस्यों को आज तक ना कोई समझ पाया और ना ही शायद कभी समझ पाएगा

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कुदरत के रहस्यों को आज तक ना कोई समझ पाया और ना ही शायद कभी समझ पाएगा। प्रकृति ने हमारी पृथ्वी को बेशुमार खूबसूरत और रोमांचक चीज़े प्रदान की है जो दुनियाभर में हमें  देखने को मिलती है। उन्ही में से एक है “कैनो क्रिस्टल्स नदी”l

वैसे तो दुनिया में बहुत सी खूबसूरत नदियां हैं। लेकिन एक ऐसी नदी है जो मौसम के साथ अपना रंग बदलती है। इस नदी का नाम है “कैनो क्रिस्टल्स”।

कैनो क्रिस्टल्स (Caño Cristales) नदी दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप के  कोलंबिया के “सरानिया दी ला मैकरेना” (Serranía de la Macarena) इलाके में बहती है।  यह नदी आगे जाकर ग्वायाबैरो नामक बड़ी नदी में मिल जाती है।

कैनो क्रिस्टल्स नदी का रंग कभी पीला तो कभी हरा, कभी लाल और कभी नीला, कभी काला हो जाता है। इसलिए इसे “रिवर ऑफ फाइव कलर्स” भी कहा जाता है। इस नदी को ‘लिक्विड रेनबो’ के नाम से भी जाना जाता है।

यह नदी प्रकृति की एक अनूठी कला है जो हर किसी को आश्चर्यचकित कर देती है।

कैनो क्रिस्टल्स नदी की लंबाई करीब 100 किलोमीटर है, वहीं इसकी चौड़ाई करीब 20 मीटर है।

क्या है रंग बदलने का कारण

कुछ लोग नदी को देखकर ये सोचते हैं कि नदी का रंग किसी शैवाल या काई से के कारण बदल जाता है, परन्तु ऐसा नहीं है। दरअसल इस कैनो क्रिस्टल्स नदी में मैकारैनिया क्लैवीगैरा नाम का एक पौधा है, जिसके कारण इसका रंग बदलता रहता है।

इस पौधे को अगर निश्चित जल या निश्चित सूरज की रौशनी मिलती रहे तो इसका रंग हल्का या फिर गहरा लाल होता जाता है। ज़्यादातर दिनों में इस नदी का रंग हल्का या गहरा गुलाबी और हल्का या गहरा लाल होता है l कभी-कभी इसका रंग नीला, पीला, नारंगी और हरा भी हो जाता है।

कब बदलता है नदी का रंग

कैनो क्रिस्टल्स नदी के रंग बदलने की ये प्रक्रिया जून से लेकर नवंबर के बीच कुछ सप्ताह में दिखती है। प्रकृति का यह खूबसूरत नज़ारा बहुत ही अद्भुत होता है।

ऐतिहासिक रूप से इस नदी को विश्व की सबसे खूबसूरत नदी भी कहा जाता है। “नेशनल जिओग्राफिक” के अनुसार यह नहीं “गार्डन ऑफ एडेन”( The Garden of Eden) यानि देवताओं की नगरी में स्थित है।

यहाँ पर बड़ी संख्या में लोग घूमने आते है। यहां घूमने आने वाले ज़्यादातर लोग पास ही के टाउन ला मैकरेना और ट्रेक शहर के नेशनल पार्क से होते हुए यहां पहुंचते हैं।

प्रकृति की इस खूबसूरती के बरकरार रखने के लिए यहां कुछ नियम भी बनाए गए हैं, जैसे एक ग्रुप में 7 से ज़्यादा लोग यहां नहीं जा सकते और एक दिन में 200 से ज़्यादा लोगों को इस क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं है।

दुनिया भर में लॉकडाउन से धरती को हो रहा फायदा

कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर के ज़्यादातर देशों में लॉकडाउन चल रहा है। इस लॉकडाउन के चलते सड़कें खाली पड़ी हैं, हर दिन धुंआ उगलने वाली फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम धरती पर अब साफ नज़र आने लगा हैं। लॉकडाउन से पहले धरती में बहुत अधिक कंपन थी परन्तु जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है धरती में पहले से बहुत कम कंपन हो रही हैं। इन दिनों में हमारी धरती पहले से कहीं अधिक स्थिर हो गई हैं। सड़कों पर जानवरों को देखने से लेकर ताजी स्वच्छ हवा में सांस लेने तक पर्यावरण पर लॉकडाउन का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है l

स्वच्छ वायु

लॉकडाउन का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव वायु पर हो रहा है। दुनिया भर के शहरों में प्रदूषण के स्तर में गिरावट देखी जा रही है क्योंकि लोगों ने वाहनों, कार्यालयों और कारखानों में कम समय और घर पर अधिक समय बिताया है। हवा में मौजूद हानिकारक कण पदार्थ और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड में कमी पूरे ब्रिटेन के इलाकों में दर्ज की गई है, लंदन और कई अन्य प्रमुख शहरों में वायु में पाए जाने वाले सभी हानिकारक पदार्थों  में कमी  देखी गई  हैं। पिछले साल की तुलना में 14-25 मार्च तक नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का औसत स्तर घटा है।

साफ पानी

वेनिस घुमावदार नहरों के लिए जाना जाता है। कोरोनावायरस लॉकडाउन के चलते इटली में पानी की गुणवत्ता में  काफी सुधार हुआ है। शहर के निवासियों का मानना है कि हर साल आने वाले पर्यटकों की भीड़ द्वारा लाए जाने वाले नाव यातायात की कमी से जलमार्गों को फायदा हो रहा है।

मुक्त वन्यजीव

सार्वजनिक रूप से जिन जंगली जानवरों को जंगलों में देखा जाता था वे अब सड़कों पर देखे जा रहे है। यह परिवर्तन  ज्यादातर शहरों में शांति के कारण हुआ है, जिसने जानवरों को आवासीय क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया है। भारत के विभिन्न हिस्सों में हिरण, नीलगाय और तेंदुए जैसे जानवरों को सड़को पर देखा गया है।

ओजोन परत पर सकारात्मक प्रभाव

दुनिया भर में प्रदूषण के स्तर में अचानक गिरावट से ओजोन परत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सड़कों पर कम वाहनों और लोगों द्वारा अपनी गतिविधियों के बारे में सतर्कता के साथ, ओजोन परत को आखिरकार कुछ सांस लेने की जगह मिल गई है। एक वैज्ञानिक पत्र में प्रकाशित लेख के आधार पर पर्यावरण में आई गिरावट में अचानक सुधार हुआ है।

ध्वनि प्रदूषण में कमी

बेल्जियम में वैज्ञानिकों ने लॉकडाउन शुरू होने के बाद से व्यापक मानवीय शोर की मात्रा में कम से कम 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। जिससे शोर के बराबर वाली उच्च तरंगों की ध्वनि क्षमता का पता लगाने में सुधार हुआ है। धरती की सतह पर मौजूद साउंड वाइब्रेशन में कमी भी महसूस की गई है। इसे सीसमिक नॉइज भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लॉकडाउन के कारण मानव गतिविधियां कम हो गई है। सभी बड़े शहरों में लोगों का आना-जाना, मिलना-जुलना बंद है।

भूकंपीय गतिविधियों को मापने में सहायता

ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे ने सिस्मोमीटर जोकि एक भूकंप मापने वाला यंत्र है की मदद से जो डाटा एकत्रित किया गया है उसमे देखा गया कि इंसानी गतिविधियां कम होने के कारण पृथ्वी से आने वाली आवाज़ों में भी कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पृथ्वी से आने वाली कंपन की आवाज़ में कमी आने का सीधा कारण लॉकडाउन की वजह से लोगो का घर पर रहना है। वास्तव में लॉकडाउन होने के कारण भूकंप वैज्ञानिकों ने बताया कि धरती पर 24 घंटे होने वाली गतिविधियां बंद हो गई हैं। पूरी दुनिया इस समय ठहरी हुई है। इस समय दुनिया भर में कम हुए ध्वनि प्रदूषण के चलते उन्हें बहुत छोटे छोटे भूकंप को मांपने में भी कोई कठिनाई नहीं हो रही हैं, जबकि इससे पहले ये बड़ी मुश्किल से संभव हो पाता था ।

दुनिया के ऐसे विमान जो रहस्यमय तरीके से गायब हो गए

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बोइंग 727-223

बोइंग 727-223 विमान वाणिज्यिक विमानों में से एक था। मई 2003 को यह विमान एंगोला हवाई अड्डे से गायब हो गया था l गायब हो जाने के कुछ समय बाद अमेरिका की संघीय जांच ब्यूरो और सीआईए की ड्यूनिया में खोज शुरू गई, हालांकि उनके प्रयासों में विमान का कोई निशान नहीं मिला। यह एक अमेरिकी पायलट और फ्लाइट इंजीनियर बेन चार्ल्स पैडिल का बोर्ड था, जो कांगो गणराज्य के एक मैकेनिक थे।

फ्लाइंग टाइगर लाइन फ्लाइट 739

वर्ष 1962 में गुआम नाम की एक अमेरिकी सैन्य उड़ान भरी गई थी और विमान पर 90 से ज्यादा सैन्यकर्मी सवार थे। ये लोग फिलीपींस जा रहे थे, लेकिन इन लोगों की उड़ान कभी भी ‍फिलीपींस नहीं पहुंची। दुर्घटना का एक खास पहलू यह है कि विमान पायलटों ने किसी भी खतरे की कोई सूचना नहीं दी थी। अमेरिकी सेना के 1300 लोगों ने इस विमान की खोज की लेकिन उन्हें इसका भी कोई सुराग नहीं मिल सका। इस मामले में एक लाइबेरियन टैंकर शिप के चालक दल के सदस्यों का दावा है कि उड़ान के समय उन्होंने आसमान में ‘अत्यधिक चमकीली रोशनी’ देखी थी लेकिन अमेरिकन सिविल एयरोनॉटिक्स बोर्ड का मानना है कि वह इस दुर्घटना के संभावित कारणों का पता लगाने में सक्षम नहीं रहा।

एयर फ्रांस फ्लाइट 447

वर्ष 2009 में रियो डि जेनेरियो से पेरिस जा रहा एक विमान ए 330 अटलांटिक महासागर में गायब हो गया। इस दुर्घटना में सभी 228 यात्री और चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई। इस दुर्घटना में मारे गए लोगों के शवों और मलबे  की खोज करने में बहुत समय लग गया था।  दुर्घटना का कारण तीन वर्ष बाद सामने आया कि बर्फ के टुकड़ों के कारण ऑटोपायलट अलग हो गया था। इस दुर्घटना में 74 यात्रियों के शवों का आज तक पता नही चला है।

एमीलिया इअरहार्ट

सबसे प्रसिद्ध विमान के लापता होने की घटना एक महिला विमान चालक एमीलिया इअरहार्ट से जुड़ी हुई है जिनका विमान 1937 में गायब हो गया था। एमीलिया इअरहार्टहवाई जहाज से विश्व परिभ्रमण करना चाहती थी। लापता होने के वक़्त एमीलिया इअरहार्ट विमान के कप्तान फ्रेड नूनान के साथ प्रशांत महासागर के ऊपर उड़ान भर रही थी।  काफ़ी खोज-बीन करने के बाद भी दो-इंजन वाले इस विमान का पता लगाने में खोजकर्ता असफल रहे। एमीलिया इअरहार्ट को दो सालों के बाद मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन विमान की तलाश फिर भी जारी रही।

ब्रिटिश साउथ अमरीकन एयरवेज़ स्टार डस्ट

अगस्त 1947 में स्टार डस्ट नाम का ब्रिटिश एवरो लैंकासटरियन एयरलाइनर ब्यूनस एअर्स से सैंटिआगो, चिली  विमान गायब  हो गया था। इस विमान में  11 लोग सवार थे।  विमान को खोजने की उस वक़्त की कोशिशे नाकाम रही थी। लेकिन 50 साल के बाद 1998 में अर्जेंटीना के दो रॉक क्लाइम्बर्स को  एंडीज पर विमान के इंजन के कुछ टुकड़े मिले थे और इसके बाद सैन्य अभियान में लोगों के अवशेष भी मिले थे। कुछ लोगों का मानना  है कि  विमान माउंट तुपानगेटो से टकराया होगा और बर्फीले तूफान  की वजह से विमान के टुकड़े और लोगों की लाशें बर्फ में दब गई होगी।

मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान 370

इतिहास में सबसे बड़ी विमान रहस्यों में से एक, मलेशियन एयरलाइंस विमान का गायब होना। मलेशिया एयरलाइंस की M H  370 में 239 यात्रियों और 12 चालक दल के सदस्य थे। यह उड़ान सुबह 12 बजे शुरू हुई और सुबह 1:00 बजे से 19 मिनट में वायु यातायात नियंत्रण के साथ आखिरी बातचीत हुई । इसके  ठीक 49 मिनट बाद विमान का ट्रांसपॉन्डर ऑफ हो गया। ट्रांसपॉन्डर के बंद होते ही विमान रडार की नजरों से ओझल हो गया। एविएशन रेडियो टेक्नॉलॉजी में इसे पायरेसी भी कहा जाता है।

उरूग्वे एयर फोर्स फ़्लाईट 571

वर्ष 1972 में सांतियागो, चिली से एक विमान ने उड़ान भरी थी। इसमें 45 लोग सवार थे। खराब मौसम के कारण हुई इस दुर्घटना में 12 लोगों की मौत हो गई थी। 72 दिनों तक अधिकारियों को इस बात का पता नहीं था कि शेष लोग जिंदा हैं या नहीं । इसी बीच आठ लोगों की बर्फीले तूफान के कारण मौत हो गई।  शेष 16 लोगों को जीवित रहने के लिए अपने मृत साथियों का मांस खाना पड़ा। इन लोगों का पता विमान गायब होने की घटना के दो माह बाद चला था।

मानव इतिहास में दर्ज़ 10 महामारियाँ जिनमें लाखों-करोड़ों लोग मारे गए

दुनिया भर में कोविड19 यानि कोरोना वायरस का खौफ हावी है। दुनिया भर में इससे संक्रमित लोगों की संख्या लगभग 21.9 करोड़ तक पहुंच गई है। अब तक करीब 45.5 लाख लोग इस वायरस के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं।

स. रा. अमेरिका, भारत, ब्राज़ील, मेक्सिको इससे सबसे अधिक प्रभावित है। विश्व स्वास्थ संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित किया है।

हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी बीमारी ने दुनिया भर में इतनी अधिक दहशत फैलाई हो। हैजा, प्लेग, चिकनपॉक्स, इंफ्लूएंजा मानव इतिहास के सबसे बड़े वायरस में शामिल रहे हैं। इन बीमारियों ने करोड़ों लोगों की जान ली है।

आइए जानते हैं कुछ ऐसी वैश्विक महामारियों के बारे में जिन्होंनें लाखों-करोड़ों लोगों की जिन्दगी छीन ली।

स्पैनिश इंफ्लूएंजा 1918-19

मौतें : 5-10 करोड़ (अनुमानित)

किसी भी महामारी में इतनी जानें नहीं गई जितनी कि 1918-1919 में हुई स्पैनिश इन्फ्लुएंजा में गई थी। दुनिया भर में, लगभग 5 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई थी। वायरस से होने वाली इस बीमारी से कई शहरों का नामोनिशान मिट गया। पूरी दुनिया की एक तिहाई यानि 50 करोड़ आबादी इस महामारी की चपेट में आ गई थी।

सन 1918 में लॉरेंस, मास, कैलिफोर्निया, अमेरिका में टेंटों के बाहर ताजी हवा में इलाज के दौरान नर्सें स्पेनिश इन्फ्लूएंजा महामारी के शिकार लोगों की देखभाल करते हुए। (हॉल्टन आर्काइव / गेटी इमेजेज़)

इस महामारी से 50 वर्ष से कम तक के वयस्कों की मृत्यु दर सबसे ज्यादा थी। वर्ष 1918 की शरद ऋतु में स्पेन में हुए इस विनाशकारी फ्लू के कारण इसे स्पैनिश इन्फ्लुएंजा नाम दिया गया। अकेले भारत में ही करीब 1 से 2 करोड़ लोगों की मौत हुई थी।

द ब्लैक डेथ (प्लेग ) 1346-1353

मौतें : 7.5 करोड़ से 20 करोड़

1346 से 1353 की अवधि के अंदर यूरोप में प्लेग की महामारी फैली। प्लेग महामारी के कारण  अफ्रीका और एशिया में करोड़ों लोग मारे गए। अनुमान है कि इस महामारी से 7.5 करोड़ से 20 करोड़ लोग मारे गए। इसकी शुरुआत एशिया से हुई, ऐसा माना जाता है।

प्लेग चूहों से फैलता है और फिर कीड़ों के जरिए मनुष्य इससे संक्रमित होता है। यह समुद्री जहाजों के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंचा। इसका मुख्य वाहक जलपोत बने, जहां चूहों का पनपना आम बात है।

फ्ल्यू (1918 )

मौतें : 2 से 5 करोड़

1918 से 1920 की अवधि में इस जानलेवा इंफ्लूंजा ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया। दुनिया की आबादी का एक-तिहाई हिस्सा इसका शिकार बना और करीब 20 से 50 करोड़ लोगों की जान गई। इस बीमारी से 50 करोड़ लोग प्रभावित हुए और मरने वालों का आंकड़ा 10 से 20 फीसदी के बीच रहा।

इस बीमारी से पहले सप्ताह में ही 2.5 करोड़ लोग मारे गए। इस इंफ्लूंजा की ख़ास बात यह थी कि यह अधिकतर स्वस्थ य़ुवाओं की जान लेता था और जो बच जाते थे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता था। सामान्यत: इंफ्लूएंजा से उम्रदराज लोगों अधिक प्रभावित होते हैं।

एच आईवी एड्स, 1976 – से अब तक

मौतें: 3.6 करोड़

सन 1976 में एचआईवी(ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस) यानि एड्स (एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम) की शुरुआत अफ्रीकी देश कॉन्गो से हुई थी। बाद में यह वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। साल 1976 के बाद एड्स के कारण 3.6 करोड़ लोग इसका शिकार हो गए।

वर्तमान में लगभग 3.1 से 3.5 करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं। एचआइवी से संक्रमित अधिकतर लोग अफ्रीकी देशों में हैं।

2005 से 2012 की अवधि में एचआइवी का इसका प्रभाव सबसे ज्यादा रहा । इसके बाद प्रतिवर्ष मृत्यु का आंकड़ा 22 लाख से 16 लाख प्रति वर्ष तक कम हुआ है। इसका इलाज अभी तक नहीं खोजा जा सका है।

जस्टिनियन प्लेग (541 से 42 )

मौतें : 2.5 करोड़

जस्टिनियन प्लेग या बुबोनिक प्लेग नामक बीमारी ने यूरोप की आधी आबादी को समाप्त कर दिया था। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव बिजेटिनियन साम्राज्य और मेडिटेरिनियन पोर्ट पर पड़ा। केवल एक साल के अंदर ही इस बीमारी के कारण 2.5 करोड़ लोग मौत के मुहं में चले गए थे।

हालाँकि यह पता नहीं चल सका कि इस बीमारी की शुरुआत कहाँ से हुई। लेकिन इस बीमारी के कारण पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। शहर की 40 फीसदी आबादी को समाप्त कर दिया था। बुबोनिक प्लेग  से मृत्यु की औसतन दर 5,000 लोग प्रतिदिन थी।

एन्टोनाइन प्लेग 165

मौतें: 50 लाख

एन्टोनाइन प्लेग  ने उस समय के एशिया, मिस्र, यूनान (ग्रीस) और इटली को सबसे अधिक प्रभावित किया। इस बीमारी को गेलेने के नाम से भी जाना जाता है। कई लोगों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण चेचक या स्मॉलपॉक्स है। हालाँकि इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। इस बीमारी के कारण 50 लाख लोग मौत के मुहं में चले गए।

एशियन फ्ल्यू 1956 -58

मौतें: 20 लाख

एशियन फ्लू ए ग्रेड का इंफ्लूएंजा है, जो H2N2 से फैलता है। इसकी शुरुआत सन 1956 से के मध्य हुई और यह महामारी साल 1958 तक रही। यह महामारी सिंगापुर, हांगकांग और अमेरिका तक फैली । विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार इस बीमारी की वजह से 20 लाख लोग मौत के मुंह में चले गए जिसमें 69,800 लोग अमेरिकी थे।

हांगकांग फ्लू

मौतें: 10 लाख

इस दूसरी श्रेणी की फ्लू महामारी को हांगकांग फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। इसका महामारी का कारण H3N2 कीटाणु है जो इंफ्लूएंजा महामारी पैदा करने वाले H2N2 वायरस की एक प्रजाति है।

हांगकांग फ्ल्यू माहामारी का पहला मामला 13 जुलाई सन 1968 में हांगकांग में आया था और मात्र 17 दिनों के अंदर ही यह बीमारी सिंगापुर और वियतनाम तक फ़ैल गई। इसके बाद केवल तीन महीने के अंदर ही यह बीमारी फिलिपींस, भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में भी फैली और कई लोग इस बीमारी का शिकार हो गए।

इस बीमारी के शिकार होने वाले सिर्फ 5 फीसदी लोगों की मौत होती थी, मगर इसने तब हांगकांग के 5 लाख लोगों यानि उसकी तत्कालीन 15 फीसदी आबादी को मौत की नींद सुला दिया था।

फ्ल्यू 1889-90

मौतें: 10 लाख

फ्ल्यू महामारी को शुरु में एशियाई फ्लू या रूसी फ्लू नाम दिया गया था। यह भी ए ग्रेड का इंफ्लूएंजा है, जो H2N2 से फैलता है। हालांकि, कई शोध में इसकी वजह ए ग्रेड के H3N8 वायरस को भी माना गया है।

सन 1889 में मध्य एशिया के तुर्किस्तान में इस बीमारी का पहला मामला ध्यान में आया था। बाद में  उत्तर-पश्चिमी कनाडा, ग्रीनलैंड में बढ़ते शहरीकऱण के कारण यह बीमारी अधिक तेजी से फैली।

बाद में इस बीमारी की चपेट में पूरी दुनिया आ गई थी ।फ्ल्यू को बैक्टिरिया और वायरस से फैलने वाली पहली महामारी माना जाता है। 1890 तक इसने 10 लाख लोगों की जिन्दगी लील ली थी।

तीसरी श्रेणी का हैजा 1852-60

मौतें : 10 लाख

यह बीमारी हैजा(कॉलेरा) की सात श्रेणियों में से इसे सबसे अधिक जानलेवा माना जाता है। इस रोग की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी। इस बीमारी ने सबसे अधिक प्रभावित सन 1852 से 1860 के दौरान किया।

हैजा की शुरुआत भारत से हुई और फिर यह एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका तक फैल गया। हैजा के कारण  10 लाख लोगों की जान चली गई ।

ब्रिटिश डॉक्टर जॉन स्नो ने पिछड़े इलाकों में रहते हुए इस बीमारी की पहचान की थी। उन्होंने यह पता लगाया कि इस बीमारी की वजह दूषित जल था। साल 1854 में इस बीमारी ने ग्रेट ब्रिटेन में 23,000 लोगों को मौत नींद सुला दिया था।

हैजा (1910)

मौतें : 8 लाख से अधिक

हैजा के कारण फैली हैजा महामारी की शुरुआत भारत से हुई और इस बीमारी ने करीब 8 लाख से अधिक लोगों की जान ले ली। हैजा बीमारी की चपेट में मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पूर्वी यूरोप और रूस भी आ गए थे।

अमेरिका स्वास्थ विभाग इस महामारी के प्रति जल्दी एक्टिव हुए और वर्ष 1923 तक सिर्फ 11 अमेरिकियों की जान इस बीमारी की वजह से चली गई।

ब्रहमाण्ड का सबसे बड़ा ज्ञात अजूबा है हमारा सौर मंडल

हमारा सौर मंडल बहुत बड़ा है l सौर मंडल की उत्पति 5 अरब  साल पहले हुई थी, जिसमें 1 सूर्य, 8 ग्रह, 5 बौने ग्रह, 181 चंद्रमा, 555,300 उल्कापिंड और करीब 3 हजार धूमकेतु हैं। यह सभी चीज़े सूर्ये की ग्रेविटी के कारण बंधी हुई हैं और इसी की परिक्रमा करती हैं।

सूर्य सौर मंडल का मुखिया है l सूर्य का जन्म 4.6 अरब  साल पहले हुआ था। सूर्य पृथ्वी से लगभग 13 लाख गुना बड़ा है और पृथ्वी को इसके ताप का 2 अरब वां भाग मिलता है। पृथ्वी से सूर्य की दूरी लगभग 149 लाख किमी है।

सौर मंडल में ग्रहों को दो भागों में बांटा गया है :-आंतरिक ग्रह और बहरी गृह। इन  ग्रहो को दो भागो में बाँटने का कारण है क्षुद्रग्रह घेरा। यह घेरा मंगल और बृहस्पति के बीच में है इनकी संख्या हज़ारो लाखो की है।

आंतरिक ग्रह

बुध

बुध ग्रह सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है। अन्य ग्रहों की तुलना में बुध सूर्य के सबसे नज़दीक है। 180,000 किमी / घंटा की गति पर, यह अंतरिक्ष मे यात्रा करने वाला सबसे तेज़ ग्रह है। यह 88 दिनों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करता है। बुध का कोई उपग्रह नहीं है।

शुक्र

शुक्र  सौर मंडल  का सबसे गरम ग्रह है। इस ग्रह का तापमान 475 डि ग्री सेल्सिअस रहता है। यहाँ पर दिन और रात का तापमान एक समान रहता है  इसका कारण है कि  यहाँ के वातावरण में 96 % कार्बन डाइऑक्साइड है। शुक्र ग्रह को पृथ्वी की बहन भी कहा जाता है क्योंकि दोनों के आकार इस जैसा है। रात के समय यह सबसे ज़्यादा चमकने वाला ग्रह है और धरती से आसानी से पहचाना जा सकता है। सौर मंडल में यही एक मात्र ऐसा ग्रह है जो पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है। शुक्र ग्रह 225 दिनों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करता है।

पृथ्वी

पृथ्वी सूर्य से निकटतम तीसरा ग्रह और ब्रह्माण्ड में एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन का अस्तित्व है। अगर आप पृथ्वी की तस्वीरें देखें तो इसमें तीन रंग नज़र आते है :- नीला ,सफ़ेद और हरा।  ये नीला रंग महासागरों और सागरों का है।  सफ़ेद  रंग बादलों का और हरा रंग वनस्पति का है। धरती एक ऐसे वातावरण से घिरी हुई है जिसमें  नायट्रोजन,  आक्सीजन और कुछ मात्रा मे कार्बनडाईऑक्साइएड  और जल वाष्प  शामिल है। इसमें एक ओज़ोन परत  भी है जो  सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों को अपने अंदर सोख लेती है l पृथ्वी 365 दिनों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करती है।

मंगल

मंगल ग्रह को “लाल ग्रह”  के नाम से भी जाना जाता है। इसका कारण है इसका लाल रंग  होना। यह धरती से मिलता जुलता ग्रह है। हमारे सौरमंडल का सबसे अधिक ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स मंगल पर ही स्थित है। सौर मंडल के सभी ग्रहों में हमारी पृथ्वी के अलावा, मंगल ग्रह पर जीवन और पानी होने की संभावना सबसे अधिक है। मंगल के दो चन्द्रमा, फोबोस और डिमोज़ हैं। इस ग्रह को पृथ्वी से नंगी आँखों से देखा जा सकता है। मंगल ग्रह 687 दिनों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करता है।

बाहरी ग्रह

बृहस्पति

यह सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। शुक्र ग्रह के बाद कई बार यह ग्रह सबसे ज्यादा चमकता है। जिसका कारण है इसका विशाल आकार। इसका व्यास धरती से 11 गुना ज़्यादा है। यह ग्रह सूर्य की तरह ही हाइड्रोजन और हीलियम से बना हुआ है। इसके तेज गति से घूमने के कारण यहाँ अक्सर तूफान आते रहते हैं। बृहस्पति के कम से कम 64 चन्द्रमा है। इसमें गैनिमीड सबसे बड़ा चन्द्रमा है जिसका व्यास बुध ग्रह से भी बड़ा है। बृहस्पति 12 सालों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करता है।

शनि

शनि सूर्य से छठां ग्रह है तथा बृहस्पति के बाद सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह हैं। और यह इसके रिंग ( Ring ) के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि शनि ग्रह के कई पतले रिंग हैं जो बर्फ के कणों से बने हुए हैं। शनि के कुल 62 चंद्रमा हैं। इनमें सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन है जो बृहस्पति के गैनिमीड के बाद दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है। शनि ग्रह 29 सालों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करता है।

अरुण

अरुण हमारे सौर मण्डल में सूर्य से सातवाँ ग्रह है। व्यास के आधार पर यह सौर मण्डल का तीसरा बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर चौथा बड़ा ग्रह है। यह बृहस्पति और शनि ग्रह जैसा ही है परन्तु इसका तापमान बहुत ठंडा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह सूर्य से बहुत ज़्यादा दूरी पर है। इसके भी इर्द गिर्द रिंग हैं जिनका रंग काला है। अरुण ग्रह 84 सालों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करता है।

वरुण

वरुण हमारे सौर मण्डल में सूर्य से आठवाँ ग्रह है। व्यास के आधार पर यह सौर मण्डल का चौथा बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर तीसरा बड़ा ग्रह है। वरुण को नीला दैत्य भी कहा जाता है। यह धरती से बहुत दूर है । इस ग्रह के 11 चंद्रमा हैं। अरुण ग्रह की तरह इसके भी पतले रिंग हैं। यह सौर मंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है। यह सूर्य से पृथ्वी के मुकाबले तीस गुना अधिक है। वरुण ग्रह 165 सालों में सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करता है।

क्षुद्रग्रह

क्षुद्रग्रह घेरा कई छोटे चट्टानों से मिल कर बना है जोकि मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच में है। ये सब भी सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सीरीस क्षुद्रग्रह सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह है।

उल्का और उल्कापिंड

उल्का चट्टानों या धातु के छोटे टुकड़े होते हैं। जब क्षुद्रग्रह टूटते हैं तो उल्का बन जाते हैं। यह उल्का जब रफ़्तार से यात्रा करते हैं तो इनमें हवा के कारण से आग लग आती है और तब ये उल्का से उल्कापिंड बन जाते हैं। कई लोग इस गिरते हुए जलते उल्कापिंड को टूटता हुआ तारा कहते हैं।

धूमकेतु

धूमकेतु को कई लोग पुच्छल तारा भी कहते हैं। इसका कारण है इसके पीछे एक छोटी चमकदार पूँछ का होना। ये धूमकेतु पत्थर, धूल, बर्फ और गैस से बने होते हैं। जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा के दौरान गैस और धुल के कण पूँछ का आकार ले लेते हैं। सूर्य के पास आने पर उसके प्रकाश से ये भी चमक उठते हैं।

बौना ग्रह

हमारे सौरमण्डल में पाँच  बौने ग्रह है :- यम , सीरीस , हउमेया , माकेमाके , ऍरिस। यम को पहेल ग्रह ही माना जाता था परन्तु 2006 में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन के सम्मलेन में वैज्ञानिकों ने इसे बौने ग्रह में शामिल कर दिया।

ताजमहल से जुड़े कुछ मज़ेदार तथ्य

भारत के आगरा शहर में स्थित एक ऐतिहासिक इमारत है, जिसे ताजमहल के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसी इमारत है जिसे प्यार की निशानी भी कहा जाता है। इस इमारत को देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। इसका निर्माण17वीं शताब्दी में, मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा करवाया गया था। आइये जानते है इससे जुड़े कुछ मज़ेदार तथ्यों के बारे में :-

  • ताजमहल मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा बनवाया गया था। शाहजहां ने 7 शादियाँ की थी और ताज़महल का निर्माण अपनी चौथी बेगम मुमताज़ की याद में करवाया था।  मुमताज़ की मौत 14वें बच्चे को जन्म देते हुए हुई थी।
  • ताजमहल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ था और यह 1653 तक चला। ताज महल बनाने में 22 साल लगे थे l ताजमहल को पूरा करने के लिए 22 ,000 मज़दूरों ने काम  किया था, जिसमें भारत के अलावा फ्रांस और तुर्की के मज़दूर भी शामिल थे।
  • हिंदुओ के अनुसार ताजमहल में एक शिव मंदिर है जिसका असली नाम है “तेजोमहालय” क्योकिं किसी भी मुस्लिम देश में ऐसी कोई इमारत नही है जिसके नाम के अंत में महल आए। ‘महल’ मुस्लिम शब्द नही हैं।
  • ताजमहल का रंग दिन में सफेद शाम को सुनहरा और सुबह गुलाबी दिखाई देता है। ताजमहल हर बार अलग अलग रंगों में प्रतीत होता है।
  • 1632 में ताजमहल को बनाने में2 करोड़ रूपए खर्च हुए थे। लेकिन यदि आज ताज़महल बनाया जाता तो लगभग 6800 करोड़ रूपए खर्च होते।
  • इस स्मारक में एक मुख्य हॉलनुमा स्थल है जिसके चारों तरफ चार गुम्बदें हैं। पूरा ताजमहल संगमरमर से ही निर्मित है। 17 हेक्टेयर में बना यह स्मारक, बेहद सुंदर है जिसकी संरचना मुस्लिम धर्म के वास्तु के हिसाब बनाई गई है। कहा जाता है कि इसमें लगा हुआ संगमरमर  राजस्थान, चीन, अफगानिस्तान और तिब्बत से आया था। इसमें 28 तरह के बेशकीमती पत्थर जड़े हुए हैं।
  • ताज महल यमुना नदी के किनारे बना हुआ है। ताजमहल का आधार एक ऐसी लकड़ी पर बना हुआ है जिसे मजबूत बनाये रखने के लिए नमी की जरूरत होती है और इस नमी को यमुना नदी ही बनाये रखती है।
  • जिस तरह सफेद संगमरमर का ताजमहल शाहजहां ने अपनी बेगम के लिए बनवाया था, वैसा ही ताजमहल वह अपने लिए काले संगमरमर का बनवाना चाहते थे l लेकिन उनके बेटे ने उन्हे ऐसा करने से रोक दिया और न मानने पर उन्हे बंदी बना लिया।
  • ताज महल दुनिया की सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली इमारत है। हर रोज पूरी दुनिया से लगभग 12 ,000 लोग ताज महल देखने आते हैं।
  • ताजमहल के निर्माण के समय बादशाह शाहजहां ने इसके शिखर पर सोने का एक कलश लगवाया था। इसकी लंबाई 30 फीट 6 इंच थी। कलश करीब 40 हजार तोले (466 किलोग्राम) सोने से बनाया गया था।
  • ताजमहल के मुख्य मार्ग के बीच जो फव्वारें लगे हैं वह किसी पाइप से नहीं जुड़े है बल्कि हर फव्वारें के नीचे एक तांबे का टैंक है। ये सभी टैंक एक साथ भरते है और दबाव बनने पर एक साथ पानी छोड़ते हैं।
  • ताजमहल को 1857 में एक हमले के दौरान थोड़ा सा नुकसान हुआ था। लेकिन लॉर्ड कर्जन ने इसे 1908 में दुबारा ठीक करवा दिया था, क्योंकि तब तक इसे विश्व भर में ख्याति मिल चुकी थी।
  • ताजमहल में शाहजहां और मुमताज की कब्र के ठीक ऊपर एक खूबसूरत लैंप टंगा है। ये लैंप मिस्र के सुल्तान बेवर्सी द्वितीय की मस्जिद में लगे लैंप की तरह है।

चैत्र नवरात्रि का राशियों पर होने वाला प्रभाव

चैत्र नवरात्रि प्रति वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होते हैं, और इसी दिन से हिंदुओं का नव वर्ष भी प्रारंभ हो जाता है। नवरात्रि पर्व पर माता की पूजा के साथ ही व्रत-उपवास और पूजन का विशेष महत्व होता है।

नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नौ दिनों में मां दुर्गा के प्रत्येक दिन के अनुसार भोग अर्पित किया जाता है, जिससे मां दुर्गा प्रसन्न होकर सभी प्रकार के कष्ट दूर करती हैं।

नवरात्रि पर्व का राशियों पर होने वाला असर

नवरात्रि पर्व सभी के लिए बहुत-सी खुशियां लेकर आता है। प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में सुख-समृद्धि, यश-वैभव, आर्थिक-मानसिक एवं शारीरिक सुख की चाहत रखता है। जानिए चैत्र नवरात्रि का आपकी राशियों पर क्या प्रभाव होगा।

मेष

इस राशि के जातकों को नवरात्रि में करियर को लेकर बड़ी सफलता हासिल होगी। खर्चों पर नियंत्रण रखें। निवेश करते समय सावधानी बरतनी होगी। बेरोजगार जातकों को मां की कृपा से नौकरी मिलने के योग बन रहे हैं।

वृष

ये नवरात्रि आपके लिए काफी शुभ रहेंगी। विदेश जाने का अवसर प्राप्त होगा। कार्यों में आ रही अड़चन दूर होने लगेंगी। बिगड़े काम बनेंगे।

मिथुन

आपको अपने खर्चों पर कंट्रोल रखना होगा। पैसा आएगा तो सही लेकिन आप बेवजह की चीजों पर इसे खर्च भी कर देंगे। लव-लइफ के लिए समय शुभ है, जिंदगी के हर महत्वपूर्ण कदम पर आपका पार्टनर साथ खड़ा होगा।

कर्क

आपको अपने गुस्से पर काबू रखना होगा। नहीं तो आपके संबंध किसी करीबी व्यक्ति से खराब हो सकते हैं, जिससे न केवल आपके जीवन पर प्रभाव पड़ेगा बल्कि आपका कार्यक्षेत्र भी प्रभावित होगा। अगर किसी काम को शुरू करना चाहते हैं तो समय शुभ रहेगा।

सिंह

दुश्मनों से सतर्क रहना होगा। साझेदारी के काम में मुनाफा मिलेगा। वाहन सुख की प्राप्ति के आसार हैं। मां की कृपा से दांपत्य जीवन में खुशहाली आयेगी।

कन्या

मेहनत का अच्छा परिणाम देखने को मिलेगा। रूके हुए कार्य पूरे होंगे। घर में धार्मिक माहौल बना रहेगा। बीमार व्यक्तियों की सेहत में सुधार की संभावना है।

तुला

अगर किसी नये काम का प्रारंभ करना चाहते हैं,तो इसके लिए तीसरा नवरात्र शुभ रहेगा। पिता से आर्थिक सहयोग मिलेगा। तो वहीं इस राशि के विद्यार्थीयों को परीक्षा में भी सफलता मिलेगी।

वृश्चिक

पिछले समय से आप जिस काम को लेकर परेशान थे नवरात्रों  में मां की कृपा से आपका वो काम पूरा होगा। रोज़गार व्यवसाय को लेकर चल रही आपकी सारी परेशानियां दूर होने वाली हैं। करियर में जबरदस्त सफलता देखने को मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी।

धनु

किसी लंबी बीमारी से राहत मिलेगी। लेकिन अपने खान-पान के साथ जरा भी लापवाही न बरतें। दान पुण्य के काम में ज़्यादा मन लगेगा। लंबी यात्रा पर धन अधिक खर्च हो सकता है।

मकर

आपके लिए नवरात्र के नौ दिन काफी शुभ रहने के आसार हैं। आप संपत्ति की खरीदारी कर सकते हैं। परिवार वालों का सहयोग मिलेगा। छोटे भाई-बहनों की तरक्की होगी।

कुम्भ

कार्यस्थल पर आपको अपने हर काम को सावधानी से करना होगा। दुश्मन आपके काम बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। बॉस के द्वारा दिया गया हर काम अच्छे से पूरा करें। इससे आपको करियर में तरक्की मिलेगी।

मीन

नौकरी करने वालो का प्रमोशन हो सकता है। पैसा कमाने के अन्य मार्ग खुलेंगे। समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

भारत के शीर्ष 5 प्रेरक वक्ता

दुनिया में कई लोगो के जीवन में सेल्फ मोटिवेशन होता है। परन्तु कुछ लोग बाहरी प्रेरकों से, प्रेरित होकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं। आज हम ऐसे ही कुछ प्रेरकों के बारे में आपको बताने जा रहे है जिनकी वजह से बहुत से लोगो के जीवन में बदलाव आया है।

सिमरजीत सिंह

सिमरजीत सिंह एक युवा  प्रेरक वक्ता और सफल कोच हैं। सबसे पहले उन्होंने होटल उद्योग में काम करना शुरू किया और होटल प्रबंधन में डिग्री प्राप्त की। उन्होंने भारत, दुबई और यहां तक कि अमेरिका में भी काम किया।

परन्तु कुछ समय के बाद उन्होंने अपना रास्ता बदलने का फैसला किया और यात्रा शुरू कर दी एक प्रेरक वक्ता बनने की। उन्होंने100 से अधिक कंपनियों में 1000 से अधिक प्रेरित भाषण दिए हैं। एक प्रेरक वक्ता के रूप में उन्होंने वोडाफोन, नोवार्टिस और यहां तक कि टाटा जैसी कंपनियों के साथ भी काम किया है और दुबई, भारत के अलावा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में सेमिनार किए हैं।

डॉ विवेक बिंद्रा

डॉ विवेक बिंद्रा भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रेरक वक्ताओं में से एक हैं। वह एक सफल उद्यमी, बिजनेस कोच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित प्रेरक वक्ता हैं। वह भारत के एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व हैं l जब बड़े पैमाने पर लोगों को प्रेरित करने की बात आती है तो डॉ विवेक बिंद्रा का नाम सबसे पहले आता है। डॉ विवेक बिंद्रा बडा व्यापार के संस्थापक और सी ई ओ हैं। डॉ विवेक बिंद्रा 10 हाई पावर मोटिवेशनल बुक्स के लेखक भी हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर उनके लगभग 11 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं l

विवेक बिंद्रा के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वे नियमित रूप से यूट्यूब पर अद्भुत सामग्री और केस स्टडीज के साथ आते हैं। क्यूंकि  वह दुनिया के सबसे ज़्यादा सब्सक्राइबर एंटरप्रेन्योरशिप चैनल में से एक के मालिक है, वास्तव में वह दुनिया के सबसे अच्छे वक्ताओं में से एक है।

चेतन भगत

चेतन भगत एक भारतीय लेखक और प्रेरणादायक वक्ता हैं, जो अंग्रेजी भाषा में अपने बेहद ही प्रसिद्ध उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं। उनका जन्म 22 अप्रैल 1974 को हुआ था। चेतन ने प्राइमरी लेवल की पढ़ाई सेना पब्लिक स्कूल से की और इसके बाद 1995 में आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की डिग्री ली। चेतन ने 1997 में आईआईएम अहमदाबाद से MBA किया।

चेतन भगत सर्वाधिक बिकने वाले उपन्यासों के लेखक है, जिसमें फाइव पॉइंट समवन (2004), वन नाईट @ द कॉल सेंटर (2005), द 3 मिस्टेक्स ऑफ़ माय लाइफ (2008), 2 स्टेट्स (2009), रेवोलुशन 2020 (2011), व्हाट यंग इंडिया वांट्स (2012), हाफ गर्लफ्रेंड (2014) और मेकिंग इंडिया ऑसम (2015) शामिल है l

उनकी किताबों में से 4 पर तो बॉलीवुड फिल्म भी बनाई गयी है, उन फिल्मों के नाम 3 इडीयट्स, काई पो चे!, 2 स्टेट्स और हेल्लो है l

उनके प्रेरक सेमिनार आमतौर पर युवाओं को लक्षित करते हैं और उन्हें  प्रेरित करने के लिए होते हैं। उन्हें नियमित रूप से भारत में शीर्ष इंजीनियरिंग और प्रबंधन कॉलेजों के साथ-साथ उन कंपनियों द्वारा बोलने के लिए आमंत्रित किया जाता है जो अपने कर्मचारियों को प्रेरित करना चाहते हैं।

संदीप माहेश्वरी

यूट्यूब पर 13 मिलियन से अधिक फोल्लोवेर्स के साथ, संदीप माहेश्वरी भारत में शीर्ष प्रेरक वक्ताओं में से एक है। इस प्रेरक वक्ता की एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है l संदीप माहेश्वरी एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुए थे l संदीप माहेश्वरी ने कॉलेज में एक मॉडल के रूप में काम करना शुरू कर दिया। तब उन्होंने महसूस किया कि कैसे मॉडल का शोषण किया जाता है l संदीप माहेश्वरी उनकी मदद करना चाहते थे।

उन्होंने एक फोटोग्राफी सत्र शुरू किया जिसमें वे फ़ोटो शूट किया करते थे। उनके कई शुरुआती कारोबार विफल रहे l आखिरकार 26 साल की उम्र में उन्होंने इमेज बाजार की स्थापना करके सफलता हासिल की l इमेज बाजार भारतीय वस्तुओं और व्यक्तियों का चित्र सहेजने वाली सबसे बड़ी ऑनलाईन साइट है l

माहेश्वरी के जीवन संघर्ष ने उन्हें  दूसरों की मदद करने और एक प्रेरक वक्ता बनने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि जीवन में कुछ भी मुश्किल नहीं है, कठिनाई धीरे-धीरे  दूर जाती है, जैसे ही आप कार्य करना शुरू करते  हैं

डॉ दीपक चोपड़ा

दीपक चोपड़ा मूल रूप से दिल्ली के हैं  वे एक प्रशिक्षित डॉक्टर थे और उन्होंने अमेरिका में एक डॉक्टर के रूप में सफलता पाई। जैसे-जैसे समय बीतता गया, दीपक चोपड़ा को आध्यात्मिकता में अपनी रुचि पाई और महर्षि महेश योगी के साथ ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन (टीएम) का अभ्यास किया।

कुछ समय के बाद उन्होंने डॉक्टर के रूप में काम करना बंद कर दिया और प्रेरक वक्ता  के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया l दीपक चोपड़ा से ओपरा विनफ्रे, माइकल जैक्सन और हॉलीवुड में कई अन्य लोग बहुत प्रभावित हुए हैं। उनके विचारों, सेमिनारों और पुस्तकों से लाखों लोगो को लाभ हुआ है।

जानिए बच्चों को सर्दी खांसी से बचाने के कुछ उपाय

जानिए बच्चों को सर्दी खांसी से बचाने के कुछ उपाय

1-10 साल के बच्चों को सर्दी खांसी से बचाने के लिए आप दो मुहलथी के टुकड़े, हरड़, देशी अजवायन, हींग की एक छोटी डली लेके मिश्रण को पीस कर एक पतले कपड़े में डालकर धागे में बांध कर बच्चे के गले में डाल दें। जिससे उसकी छाती गर्म रहेगी और उसकी गंध नाक से जाती रहेगी और उसका नाक भी बंद नहीं होगा। इस उपाय को अपनाकर आप बच्चों को सर्दी -खांसी से बचा सकते हैं। इसका कोई दुष्प्रभाव (side effect) भी नहीं है। खास कर छोटे बच्चों पर ये उपाय आपको डॉक्टर के पास जाने से बचाएगा।

बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने से हम उन्हें कई बिमारियों से बचा सकते हैं। यह उपाय इतना सस्ता है कि आप बाज़ार में मिलने वाले bornvita, horlicks, इम्युनिटी बूस्ट जैसे उत्पादों को भूल जाओगे जो आपके बच्चों में शुगर लेवल को ही बढ़ाते हैं।

इम्युनिटी बूस्ट उपाय

  1. कथ का एक टुकड़ा, काली मिर्च 10 और काला नमक लेके उनको अच्छे से पीस लें। अब 25gm पनीर का टुकड़ा लेना है और रोज रात को सोने से पहले बच्चे को इस मिश्रित नमक के साथ देना है। आप हर रात को अपने बच्चों को इस नमक के साथ पनीर खिलाएं। आपके बच्चों की इम्यूनिटी सिस्टम धीरे धीरे मजबूत होता चला जायेगा और आप का बच्चा बार बार बीमार नहीं होगा।
  2. हल्दी वाला दूध – 1 कप दूध, 1 /4 हल्दी पाउडर, 2 काली मिर्च मिलाये और उस दूध को अब अच्छे से उबाले। स्वाद के लिए थोड़ा सा शहद भी मिला सकते है।
  3. बच्चों को हमेशा तुलसी की पत्तियां चबाने को दें।तुलसी एंटीवायरल और एंटी इंफ्लेमेटरी औषधी है। तुलसी बच्चों की इम्युनिटी को बढाती है।
  4. च्वनप्राश – बच्चों को दूध के साथ च्वनप्राश 2 बार खाने को दें। इसमें कई जड़ी -बूटियाँ होती है जो बच्चों के शरीर को गर्म रखती है।
  5. बच्चों को खजूर जरूर खिलाएं।
  6. अगर आप अंडा खाते हो तो उसे उबला हुआ अंडा हर दिन खिलाएं।
  7. बच्चों को पालक जरूर खिलायें। पालक में फॉलेट पाया जाता है जो शरीर में नई कोशिकाएं बनाने के साथ कोशिकाओं में मौजूद DNA की मुरमत भी करता है। आप बच्चों को पालक की रोटी बनाकर भी दे सकते हैं।
  8. त्रिफला -अगर आपका बच्चा बड़ा है तो आप उसे त्रिफला चूर्ण आधा चमच्च गुनगुने पानी के साथ शाम में लेने से इम्युनिटी बढ़ती है।
  9. गिलोय का रस – नियमित रूप से गिलोय का रस पिने से डायबटीज, शुगर, केलेस्ट्रॉल जैसी बिमारियों से बचा जा सकता है। साथ में गिलोय का रस इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करता है। चार इंच गिलोय के टुकड़े को छोटा छोटा करके काट लें। अब चार कप पानी में एक चौथाई चमच्च हल्दी के साथ पेस्ट को उबाल लें जब मिश्रण एक कप बच जाये तो उसमें एक चुटकी काली मिर्च मिला लें। अब सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में इस मिश्रण को डाल कर पीने से इम्युनिटी बढ़ती है।
    इसके साथ आप बच्चे को सर्दी, जुकाम, फ्लू , और गले में खराश होने पर डॉक्टर से हमेशा ऐंटीबायोटिक दवा के लिए सलाह न लें। ऐटीबॉयोटिक्स के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और वे इन दवाओं के आदि हो जाते हैं। एक माँ होने के नाते मैं आपको यह सलाह देती हूँ कि आप इन घरेलू उपाय को अपनाकर सर्दी खांसी से बच्चों को बचा सकते हैं। बच्चों को सर्दी जुकाम होने पर 2-3 दिन के बाद ही ऐंटीबायोटिक दें वो भी डॉक्टर के कहने पर। बच्चों को बाहर के खाना जंक फ़ूड पैकेट बंद ,मीठी चीजें और प्रोसेस्ड फ़ूड न दें। बच्चों के लिए सुपर फ़ूड बेस्ट होता है इसमें हम आंवला, अलसी के बीज, नींबू , गाजर, जामुन, जौ से बनी रोट, चने मशरूम शकरकंदी आदि खिलाएं। ” प्रोबायोटिक और अच्छे बैक्टीरया ” आंत के मार्ग के लिए बहुत उपयोगी होते है जो खराब बैक्टीरिया से बचाते हैं। ये इम्युनिटी पर धनात्मक प्रभाव डालते हैं। दही, छाछ और बेबी फ़ूड प्रोबायोटिक फ़ूड खाने में जरूर उपयोग करने चाहिए। बच्चा जितना फिजिकल एक्टिविटी करेगा उसका शारीरिक विकास और मानसिक विकास अच्छा होगा। ये सब बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है।

प्यार से जुड़े कुछ मज़ेदार रोचक तथ्य

प्यार एक बहुत ही खूबसूरत एहसास है। प्यार में पड़ना एक शानदार अनुभव है जिसे हम में बहुत से लोग महसूस करते हैं। यह व्यक्ति को ख़ुशी और ग़म दोनों देता है।

किसी से सच्चा प्यार करने पर आप ख़ुशनुमा महसूस करते हैं क्योंकि ऐसे में आपके दिमाग में ख़ुशी पैदा करने वाले केमिकल ज़्यादा पैदा होते हैं। आप इसमें थोड़ा आलसी भी हो जाते हैं।

प्यार को लेकर हम सभी की अपनी सोच और धारणाएं होती हैं लेकिन कई ऐसी बातें है जो आपको आश्चर्यचकित कर सकती हैं। एक बात तो तय है कि प्यार एक सकारात्मक भावना है जो इंसान को भी सकारात्मक रहने में मदद करता है।

आज हम आपको प्यार से जुड़े रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं:-

  • क्या आप जानते हैं कि  प्यार इंसान के दिमाग पर कोकीन के नशे की तरह काम करता है।
  • अगर आप किसी के बारे में बहुत ज्यादा सोच रहे हैं तो गारंटीड वो इंसान भी आपके बारे में ही सोच रहा है।
  • इन्टरनेट पर पहले LOL का मतलब “लोट्स ऑफ़ लव” होता था l
  • नवम्बर महीने में सबसे ज्यादा “I LOVE YOU” बोला जाता है l
  • जो कपल दिन में कम से कम 10 मिनट एक दूसरे के साथ हँसी मजाक करते हैं उनका रिलेशन हमेशा अच्छा बना रहता है।
  • सुबह अपनी बीवी को किस करने वाले लोग कम से कम 5 साल ज्यादा जीते हैं l
  • पूरी दुनिया में हर रोज़ लगभग 30 लाख लोग अपने पार्टनर के साथ डेट पर जाते हैं|
  • लगभग 18 वीं सदी से LOVE MARRIAGE की शुरुवात हुई थी|
  • Psychologically, अगर आप अपने प्यार की feelings को छुपाते हैं, तो आप इसे जितना ज्यादा छुपाएँगे, Love उतना ही बढ़ता चला जाएगा।
  • आपको जानकर ये हैरानी होगी की पूरी दुनिया में होने वाली Love Marriage में सिर्फ 25% ही सफल हो पाते हैं
  • क्या आपको पता है कि भूख लगने की तरह ही प्यार में पड़ना एक Biological Process है।
  • आमतौर पर देखा गया है कि लगभग 90% पुरुष अपने प्यार का इज़हार महिलाओं से पहले करते हैं।
  • यदि आप किसी भी अनजान व्यक्ति से लगभग 3 से 4 मिनट तक लगातार आई कांटेक्ट बनाये रखते हैं तो चार मिनट बाद आप एक दूसरे के अंदर एक इमोशनल फिलिंग महसूस करेंगे।
  • जब आप अपने प्रेमी या अपनी प्रेमिका का हाथ पकड़कर चलते हैं, तो आपकी थकान और टेंशन कम हो जाती है।
  • रिसर्च के अनुसार ज़्यादा handsome लड़के या तो सिंगल होते हैं या अपने प्यार मे fail हो जाते हैं।
  • प्यार में पड़े दो couples अगर एक दूसरे की आँखों मे भी देखें तो उन लोगों की धड़कनें भी आपस मे मिल जाती हैं और एक साथ ही धड़कने लगती हैं।
  • किसी इंसान के प्यार में पड़ने के लिए 4 मिनट ही काफी होते हैं।
  • दुनिया मे कोई भी ऐसा couple नहीं है जो आपस मे कभी लड़े ना हों या जिनके बीच लड़ाई नहीं होती हों, जाहिर सी बात है कि जहाँ प्यार होता है वहाँ लड़ाई भी होती है पर वो लड़ाई ज्यादा देर तक नहीं रहती है।
  • इंसानो की तरह हंस भी पूरी जिंदगी एक ही जीवन संगिनी के साथ रहते हैं, और अगर हंसो की जोड़ी मे से कोई एक भी मर जाता है तो दूसरे हंस के मर जाने की संभावना भी बहुत अधिक होती है।
  • शब्द “प्यार” संस्कृत लुभती से है, जिसका अर्थ “इच्छा” है।
  • लड़के अपने प्यार का इज़हार जल्दी कर देतें है जबकि लड़कियां इसमें बहुत टाइम लगाती हैं।
  • प्रेमी या प्रेमिका का हाथ पकड़कर चलने से थकान और टेंशन कम हो जाती हैl