बच्चों की इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं

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सात दिन में बढ़ाये अपने बच्चों की इम्युनिटी

माँ अपने बच्चों के लिए हमेशा चिंतित रहती है। आज कल के बदलते मौसम में बच्चों  को बार बार जुखाम खांसी होती है। आजकल पेरेंट्स  कोरोना वायरस की वजह से भी बच्चों के प्रति चिंतित है। हम लोग अपने बच्चों को वायरल फीवर जैसे संक्रमणित बिमारियों से कैसे बचा सकते हैं। ये प्रश्न हम सबके मन में चलता रहता है। जब तक बच्चा  छोटा होता है तो माता पिता को उसे पालने में आसानी रहती है। लेकिन जैसे ही बच्चे थोड़ा बड़े होते हैं तो वो पूरा दिन कीटाणुओं और विषाणुओं से घिरे रहते हैं। जैसे  ही मौसम बदलता है। बच्चे सर्दी खांसी और अन्य संक्रमणित  बिमारियों की चपटे आ जाते है। इसका कारण है कि आपके बच्चे की इम्युनिटी कम है। आजकल के बदलते लाइफस्टाइल में हमारा खाना पीना और सोना आदि की रूटीन बदल गई है जिससे हमारे बच्चों पर भी असर पड़ रहा है। लेकिन हमें एक स्मार्ट पैरेंट की तरह सोच कर अपने बच्चों को बिमारियों से लड़ने के लिए उनके इम्युनिटी को बढ़ाना होगा।  जब हमारे बच्चे की इम्मुनिटी सिस्टम मजबूत होगा तो वे बार बार संक्रमणित बिमारिओं की चपेट में नहीं आएंगे । आप कैसे अपने बच्चों को स्वस्थ रख सकते हैं और उनके इम्युनिटी को कैसे बड़ा सकते हो आज हम उसके बारे में आपको बता रहे हैं।

आप इन आदतों तो अपनाये और बच्चों को इन आदतों को सिखाएं।

  1. स्तनपान कराने से बेहतर होती है बच्चों की इम्युनिटी :- हमारे बड़े बुजुर्ग कहते है कि बच्चों को माँ का दूध पिलाना चाहिए है क्यूंकि माँ का दूध बच्चों के लिए अमृत की तरह काम करता है। माँ का जो पहला पीला गाढा दूध होता है वो बच्चों को जरूर देना चाहिए क्यूंकि उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जो बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है। इसलिए बच्चों को 6 महीने तक माँ का दूध देना चाहिए जिससे बच्चों में संक्रमण, एलर्जी, निमोनिया, दिमागी बुखार, मूत्र मार्ग में संक्रमण की समस्या और बच्चों की दिमागी शक्ति बढ़ती है। जो बच्चा माँ का दूध पीता है वो फिजिकली स्ट्रांग और इंटेलीजेंट होता है।‘
  2. फल और सब्जियाँ :- गाजर, सेब, शकरकंद, सेम फली, ब्रोकली, कीवी, खरबूजे नारंगी और स्ट्रॉबेरी जैसे फल सब्जियां बच्चों के साथ साथ हम सब बड़ों के लिए भी बहुत उपयोगी है। फ्लू से लड़ने के लिए हमें विटामिन सी से युक्त फल आंवला,  नारंगी, संतरा नींबू आदि को बच्चों के भोजन में शामिल करना चाहिए। बच्चों को आप फल सब्जियों को जूस और सूप बना कर भी खिला सकते है। अगर आप का बच्चा सब्जियों को खाने में आना कानि करता है तो आप सब्जियों को chop  करके नमकीन दलिया बनाकर उसमें डाल सकते हैं। सब बच्चों को टेस्ट अलग अलग होता है इसलिए आप देखें की आप के बच्चे को आप कैसे फल सब्जी लिखा खिला सकते है। बच्चों के लिए हर भोजन में सब्जी को अलग अलग  तरीकों से डाल कर खिलायें।
  3. साफ सफाई का ध्यान रखना :- बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए आपको बच्चों की साफ सफाई का भी उचित ध्यान रखना चाहिए। सफाई की आदत बच्चों को बिमारियों से बचाती है। यह बच्चों की इम्युनिटी तो नहीं बढाती लेकिन बचपन से डाली गई सही आदत हमें सारी उम्र रहती है। बच्चों को कभी भी नीचे पड़ी चीजों को न खाने दें क्यूंकि इससे आप का बच्चा संक्रमनित हो सकता है और बीमार पड़ सकता है। बच्चों को खाने से पहले साबुन से हाथ धोना, बाहर से आने पर सबसे पहले बाथरूम का प्रयोग करना, दिन में दो बार ब्रश करना साफ कपड़े पहनना ,छींक खांसी आने पर रुमाल का इस्तेमाल करना  और उनको shake hand करने के बजाये नमस्कार करने को कहें। नमस्कार  हमारी संस्कृति का  अभिन अंग ही नहीं है बल्कि उसका  फायदा यह है कि आप लोगो के डायरेक्ट सम्पर्क में न आकर संक्रमणित बिमारियों से बच सकते हैं ।    इस प्रकार की आदतें आपके बच्चों को कीटाणुओं से दूर रखती है।
  4. एक्सरसाइज करने को प्रेरित करना:- प्राचीनकाल से ही ऋषि -मुनियों द्वारा चलाये जाने वाले गुरुकुलों में आपने देखा होगा कि बच्चों को अपना काम खुद करना होता था चाहे वह लकड़ी लाना हो या पानी भरना। ऋषि मुनियों का यह मानना था कि बच्चा इससे फिजिकल फिट होगा। बच्चे को हर प्रकार की ट्रैनिंग दी जाती थी। इसके पीछे एक मकसद बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी इम्मून सिस्टम को मजबूत करना भी था। हमें बच्चों को 30min के लिए डेली एक्सरसाइज करवानी चाहिए। तेज कदमों से चलना, साइकिल चलाना, स्विमिंग करना, स्पोर्ट्स के अन्य गेम्स खेलना और योगा करवाने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पढ़ना जितना जरूरी है उतना खेलना भी। इसलिए बच्चों को खेलने के लिए भी हमें प्रेरित करना चाहिए उन्हें घर पर बिठाकर नहीं रखना चाहिए।
  5. पर्याप्त नींद लेना :- जब बच्चा पूरी नींद और आराम लेता है तो उसका शरीर पूरी तरह से रिचार्ज हो जाता है। हमें बच्चों को अँधेरा करके कमरे में सुलाना चाहिए ताकि वह गहरी नींद ले सके। अँधेरे में सोने से हॉर्मोन मेलेटोनिन के उत्पाद को बढ़ावा मिलता है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी है और आपके शरीर में एक एंटीआक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है।
  6. विटामिन डी जरूर दें :- बच्चों को सुबह की धूप भी दें जिससे उनमें विटामिन डी की कमी न हो। विटामिन डी कमी से अस्थमा, कैंसर और प्रतिरक्षा प्रणाली संबधी कई बीमारियाँ हो सकती है। नवजात शिशु को प्रतिदिन सुबह धूप में ले जाएँ। परन्तु दिन की धूप से बच्चों को बचाये।