कावेरी नदी दक्षिण भारत की नदी है, जिसे दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है। दक्षिण भारत में इस नदी को ‘कावेरी अम्मा’ के नाम से भी जाना जाता हैं, यह नाम उनका भगवान गणेश जी ने रखा था। इस नदी को भी गंगा की तरह ही पवित्र माना जाता है। पुराणों में कावेरी को अग्नि देवता की 16 नदी पत्नियों में से एक बताया गया है।

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कावेरी नदी का सफर

यह नदी कर्नाटक के कुर्ग के पास ब्रह्मगिरि पर्वत की 1320 मीटर की उचाई से निकलती है। इस नदी की लम्बाई 765 किलोमीटर है। अपने इस सफर में यह नदी अपने अनेक रूप धारण करती है। कहीं छोटे झरने के रूप में तो कहीं विशाल नदी के रूप में।

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अन्य जानकारी

यह नदी कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश से बहती हुई बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। मैसूर नगर से क़रीब 56 कि.मी. पर पहाड़ की बनावट के कारण इसका जल विशाल झील की तरह दिखाई देता है। मैसूर में स्थित वृंदावन गार्डन इसी नदी के किनारे पर स्थित है।

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कावेरी नदी की सहायक नदियाँ

हरंगी, हेमवती, नोयिल, अमरावती, सिमसा, लक्ष्मण तीर्थ, भवानी, काबिनी इसकी मुख्य सहायक नदियाँ है।

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कावेरी नदी से जुड़ी धार्मिक भावनाएं

पुराणों के अनुसार इस नदी का जन्म तुला संक्रांति के दिन हुआ था। इसके उदगम-स्थान पर हर साल अक्टूबर में सक्रांति के दिन श्रद्धालु कावेरी की पूजा करते है। इस नदी के तट पर बसा हुआ कुंभकोणम् शहर दक्षिण भारत का प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है। यहां 12 वर्ष बाद कुम्भ का मेला लगता है।

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