एक रहस्यमयी मंदिर जिसका दरवाज़ा खुलता है सिर्फ महाशिवरात्रि पर !!!!

भारत में कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक शिव मंदिर है, जिनके दर्शन करने हर साल लाखों की तादाद में भक्त पहुंचते हैं। भारत में कई शिव मंदिर ऐसे भी हैं,जहां तक पहुँचने के लिए भक्तों को काफी दुर्गम यात्रा भी करनी होती है। आज हम आपको भगवान शिव के ऐसे रहस्यमयी मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां मत्था टेकने के लिए पूरे साल इंतजार करना पड़ता है। एक ऐसा मंदिर जो साल में सिर्फ एक बार खुलता है।

हम बात कर रहे हैं, जयपुर स्थित एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर की, जो साल में सिर्फ शिवरात्रि के दिन ही खुलता है। इसे शंकर गढ़ी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

जयपुर में मोतीडूंगरी शंकरगढ़ की पहाड़ी स्थित एकलिंगजी और चांदनी चौक के राज-राजेश्वर मंदिर ऐसे दो मंदिर है जो वर्ष में सिर्फ एक बार खुलते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर ही यहां श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन होते हैं। यही कारण है कि यहां अलसुबह से भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है।

जयपुर का यह मंदिर बिरला मंदिर के पीछे मोती डूंगरी के पास शिवडूंगरी पर स्थित है। इस मंदिर के पुजारी ने बताया कि इसकी स्थापना बहुत पुरानी है। यह जयपुर की स्थापना से भी पहले बनाया गया था। शिवरात्रि के दिन ही इसके पट आम भक्तों के लिए खुलते हैं। यह महादेव मंदिर जयपुर राज परिवार का निजी मंदिर है और इस मंदिर में खुद जयपुर के महाराजा और महारानियां पूजा-अर्चना करने आते थे। खुद जयपुर की राजमाता गायत्री देवी तक कई बार यहाँ महादेव की पूजा करने पहुँचती थीं। आमजन को सालभर शिवरात्रि का ही इंतजार करना पड़ता है जब मंदिर के पट खुलते हैं और उन्हें एकलिंग जी के दर्शन होते है।

इस मंदिर में पहले शिव भगवान के साथ माता पार्वती और उनके पुत्र गणेश की मूर्ति की स्थापना की गयी थी, लेकिन कुछ समय बाद वह मूर्तियां अपने आप गायब हो गयी थी, लेकिन फिर से मूर्तियों की स्थापना की गयी, जो एक बार फिर से विचित्र तरीके से विलुप्त हो गयीं। जिसके बाद किसी ने भी दुबारा मंदिर में भगवान शंकर के अलावा किसी भी मूर्ति की स्थापना करने का साहस नहीं किया।

सावन के महीने में या किसी बड़े पारिवारिक कार्यक्रम में राज परिवार के सदस्य यहां पूजा-पाठ करने पहुंचते हैं। इस मंदिर से जुड़े सभी खर्च शाही परिवार द्वारा वहन किए जाते हैं। चूंकि यह मंदिर साल में एक ही बार खुलता है इसलिए शिवरात्रि के दिन इसके प्रति श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण होता है। करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ कर एवं कई घंटों तक लाइन में खड़े होकर लोग यहां भगवान के दर्शन करते हैं।

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