समुद्र का पानी इतना खारा क्यों होता है जाने क्या है कारण

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समुद्र तो वैसे बहुत विशाल होते है लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि समुद्र का पानी खारा क्यों होता है। अगर ऐसा नहीं होता तो पीने के पानी की कोई कमी नहीं होती।

तो आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि समुद्र का पानी किस तरह से खारा हो जाता है या बोला जाये तो नमकीन हो जाता है।

यह है कारण पानी के खारा का

नदियों का पानी समुद्र में आकर मिलता है और आपने देखा होगा कि कई नदियों का पानी मीठा होता है तो कई नदियों का पानी खारा होता है और इस तरह समुद्र में कई तरह का पानी आकर मिलता है।

जब यह पानी वाष्पीकृत होता है तो ऊपर जाकर बादल का रूप ले लेता है और यही बादल बारिश के रूप में नीचे गिरता है।

बरसते समय यह पानी हवा में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों के संपर्क में आकर अम्लीय हो जाता है ।

जब यह पानी जमीन, चट्टानों और पहाड़ों पर गिरता है तो बारिश के पानी में मौजूद लवण इसमें घुल जाते हैं। जब इन सतहों से नदी का संपर्क होता है तो ये लवण नदियों में घुल जाते हैं और यह नदियां समुद्र में जाकर मिलती है।

नदियों में यह लवणीय पानी बहुत कम मात्रा में होता है इसलिए नदियों का पानी खारा नहीं लगता, लेकिन जब कई  नदियां समुद्र में जाकर मिलती है तो इनका लवण समुद्र में भारी मात्रा में चला जाता है और धीरे-धीरे समुद्र का पानी खारा हो जाता है।

दूसरा कारण समुद्र की तल पर पाई जाने वाली चट्टानें और ज्वालामुखी होतें है । यह समुद्र जल में लवण बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण होता है, जिससे समुद्र का पानी खारा होता है ।

एवं समुद्र में मौजूद क्लोरीन तथा सोडियम जब एक दुसरे से रासायनिक क्रिया करके सोडियमक्लोराइड अर्थात नमक का निर्माण करते हैं जोकि समुद्र के पानी को खारा बनाते है

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि इस तरह तो समुद्र का पानी निरंतर और ज्यादा खराब होता जा रहा होगा, परन्तु ऐसा नहीं होता।

दरसअल समुद्र में मौजूद लवण का इस्तेमाल सालकधारी समुद्री जीव जंतु अपनी खोल बनाने में इस्तेमाल कर लेते हैं और इन जीवों के मरने पर ये खोल चुने के पत्थर का रूप लेकर समुद्र की सतह पर आ जाते हैं और समुद्र से बाहर निकल जाते हैं।

यह वही चुना होता है जिसका खनन करके घरों में काम में इस्तेमाल किया जाता है। यही प्रक्रिया चलते रहने से करोड़ों सालों से समुद्र का पानी खारा वैसा ही बना हुआ है।

समुद्र के जल में औसतन 3.5 प्रतिशत लवण पाया जाता है यानी प्रति 100 ग्राम जल में करीब साढ़े तीन ग्राम लवण मौजूद होता है।

समुद्र में पाए जाने वाला यह लवण ही नमक रूपी लवण होता है। ऐसा माना जाता है कि अगर पूरी दुनिया के सभी समुद्र से उसके ऊपर का नमक निकाल कर उसे सुखाया जाए तो उससे 288 किलोमीटर ऊँची 1.6 किलोमीटर मोटी और पृथ्वी की परिधि के जितनी लम्बाई वाली एक दिवार बनाई जा सकती है।