साल 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण जानिए तारीख, समय और सूतक काल

वर्ष 2020 महान वैश्विक प्रभाव (global impact) का वर्ष साबित हुआ है। इस वर्ष कुल छह ग्रहण थे। उनमें से चार चंद्र ग्रहण थे और दो सूर्य ग्रहण l

14 दिसंबर को लगने वाला ये ग्रहण 15 दिनों के अंदर लगने वाला दूसरा ग्रहण है। इससे पहले 30 नवंबर को पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा ग्रहण लगा था l

आइए जानते हैं कि ये सूर्य ग्रहण किस समय और कहां-कहां दिखाई देगा, भारत में इसका क्या असर होगा और क्या इस ग्रहण में सूतक माना जाएगा या नहीं।

सूर्य ग्रहण कब लगेगा?

वर्ष 2020 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर सोमवार को होगा। भारतीय मानक समय के अनुसार, ग्रहण 14 दिसंबर को शाम 7:03 बजे होगा और उसी दिन दोपहर 12:23 बजे समाप्त होगा। ग्रहण की अवधि लगभग 5 घंटे रहेगी।

सूर्य ग्रहण कहां देखा जाएगा?

ऐसा कहा जा रहा है कि दिसंबर में सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका कोई प्रभाव नहीं होगा। ज्योतिष के अनुसार, यह ग्रहण वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में लग रहा है।

इस ग्रहण काल के दौरान इस राशि वालों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है । यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक के कुछ हिस्सों में देखा जाएगा।

कब से लगेगा सूतक काल

14 दिसंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा इसलिए इस बार सूतक के नियम नहीं माने जाएंगे। साथ ही ग्रहण काल के दौरान मांगलिक कार्यों पर भी रोक नहीं लगेगी। सूतक काल मान्य ना होने की वजह से मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे और ना ही पूजा-पाठ वर्जित होगी।

ग्रहण के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

सूर्य ग्रहण आंखों पर बिना किसी सुरक्षा के देखने से आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है। ग्रहण के दौरान अपनी आंखों पर विशेष चश्मा जरूर लगाएं । इसके अलावा आप शीशे में भी ग्रहण देख सकते हैं।

ग्रहणकाल के दौरान चाकू, छुरी जैसे तेज किनारों वाली वस्तुओं का प्रयोग ना करें। इस दौरान भोजन और पानी का सेवन करने से भी बचें।

ग्रहणकाल के दौरान स्नान और पूजा ना करें ग्रहणकाल के दौरान इन कार्यों को शुभ नहीं माना जाता है। इस दौरान आप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।

जानिए सर्दियों में मूंगफली खाने के फायदे

मूंगफली को आप प्रोटीन और फाइबर का भंडार कह सकते हैं। इसे सस्ता बादाम भी कहा जाता है । इस बात से ही ये अनुमान लगाया जा सकता है कि इसमें लगभग वो सारे तत्व पाए जाते हैं जो बादाम में होते हैं ।

इसमें कई सारे ऐसे गुण मौजूद होते हैं जो कि हमारी बहुत सी शारीरिक समस्याओं का समाधान कर देते हैं।  ह्रदय की समस्या हो या फिर भूलने की बीमारी, मूंगफली का यदि संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए तो सब सही हो सकता है।

सर्दियों के मौसम में इसका सेवन अधिक किया जाता है। मुट्ठीभर मूंगफली में 426 कैलोरी, 5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 17 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें विटामिन ई, और बी 6  की भरपूर मात्रा होती है।

इसमें कई औषधीय गुण भी होते हैं। कुछ लोगों को तली हुई मूंगफली पसंद होती है जबकि कुछ लोगों को भुनी हुई मूंगफली पसंद होती है।

गुड़-मूंगफली को टाइमपास के रूप में भी खाया जाता है। ठंड के दिनों में मूंगफली खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

पोषक गुण

इसमें एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, बीटा कैरोटीन होते हैं। ये सभी पोषक तत्व शरीर को पोषण देते हैं और शरीर को अत्यधिक ठंड से भी बचाते हैं।

अगर आप भोजन के बाद 50 या 100 ग्राम मूंगफली का सेवन करते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। यह भोजन के पाचन में मदद करता है। ये शरीर में रक्त के प्रवाह को भी बढ़ाती है।

फायदे

इसमें मौजूद मैंगनीज रक्त में और कैल्शियम के अवशोषण, फैट और कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है। रोज खाना खाने बाद 50 ग्राम मूंगफली खाने आपकी बॉडी का ब्लड रेशो इनक्रीज हो सकता है

इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होते है। यह एनर्जी का भी अच्छा स्रोत हैं। अतः इसे खाने पर जल्दी भूख नहीं लगती।

ये दोनों पोषक तत्व भूख को कम करते हैं । जिससे वजन कम करने मे मदद मिल सकती है। मूगंफली के रोज सेवन से जल्द ही वजन कम किया जा सकता है।

सर्दियों में मूंगफली की आवश्यकता क्यों है?

सर्दियों में मूंगफली खाने से शरीर पर ठंड का प्रभाव कम हो जाता है। मूंगफली सर्दियों में महामारी के प्रसार को रोकने के लिए खाई जाती है, जैसे कि बुखार, सर्दी, और खांसी।

यह आपके इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में भी मदद करती है। सर्दियों में खांसी होना बहुत आम है, लेकिन अगर आप रोज एक या दो मुट्ठी मूंगफली खाते हैं, तो आप खांसी की समस्या से बच सकते हैं।

परन्तु अगर आपको खांसी शुरू हो जाती है, तो गलती से भी इसका सेवन न करें, नहीं तो खांसी खराब हो सकती है। खांसी रुकने पर आप मूंगफली खा सकते हैं।

हृदय रोग की रोकथाम

इन दिनों हार्ट अटैक, स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज बढ़ रहे हैं। यह स्थिति व्यक्ति की गलत जीवन शैली, खराब कोलेस्ट्रॉल स्तर के कारण होती है।

ये उपरोक्त बीमारियों के मुख्य कारण हैं लेकिन मूंगफली का नियमित और सीमित सेवन आपको इन बीमारियों से दूर रख सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें शरीर को गर्म करने वाले गुण होते हैं।

इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी होता है। यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने का काम करता है।

रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है

मूंगफली का सेवन आपके मेटाबॉलिज्म और मांसपेशियों को मजबूत रखने का काम करता है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन शरीर में हर कोशिका तक खून पहुंचाने का काम करता है।

इससे त्वचा कोमल और स्वस्थ रहती है। हर कोई अपनी त्वचा को प्राकृतिक और सुंदर बनाने के लिए कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करता है।

महंगे सौंदर्य उत्पादों का उपयोग करने के बजाय भीगी हुई मूंगफली का सेवन आपकी त्वचा को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है।

मूंगफली त्वचा को प्राकृतिक रूप से चमकदार बनाने में मदद करती है। इसमें त्वचा रोगों जैसे सोरायसिस और एक्जिमा के इलाज के लिए औषधीय गुण भी होते हैं।

रहस्य्मयी निधिवन – जहाँ आज भी रासलीला रचाते हैं कृष्ण

भारत एक ऐसा देश है, जहां पर कई रहस्यमय स्थान हैं, इन्हीं रहस्य्मयी स्थानों में से एक है निधिवन। यह वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण का बचपन बीता था। श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं। वे देवकी और वासुदेव के 8 वें पुत्र थे।

धार्मिक नगरी वृन्दावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, रहस्यमयी स्थान है। मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं।

रास के बाद वे निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। रंग महल में आज भी प्रसाद (माखन मिश्री) प्रतिदिन रखा जाता है।

निघिवन का अर्थ

‘निधि’ एक संस्कृत का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘खजाना’ वन अर्थात जंगल । स्थानीय लोगों के अनुसार निधिवन को गुरु हरिदास ने बसाया था, जिनकी गहरी भक्ति, तपस्या और ध्यान ने भगवान कृष्ण को इस स्थान पर जाने के लिए मजबूर कर दिया।

गोपियों का रूप ले लेते हैं तुलसी के पौधे

निधिवन में तुलसी के पौधे हैं। यहां तुलसी का हर पौधा जोड़े में है। मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण और राधा रासलीला करते हैं तो ये तुलसी के पौधे गोपियां बन जाती हैं और प्रात: होने पर तुलसी के पौधे में परिवर्तित हो जाते हैं। यहां लगे वृक्षों की शाखाएं ऊपर की ओर नहीं बल्कि नीचे की ओर बढ़ती हैं।

रंग महल

निधिवन के अंदर, एक छोटा सा मंदिर है जिसे रंग महल या राधा रानी का श्रृंगार-गृह कहा जाता है। लोककथाओं के अनुसार कृष्ण हर रात यहां आते हैं और राधा को अपने हाथों से सजाते हैं।

यहाँ रखे चन्दन के पलंग को 7 बजे से पहले सजा दिया जाता है। पलंग के पास एक लोटा जल, राधा जी के श्रृंगार का सामान और दातुन संग पान रख दिया जाता है।

सुबह 5 बजे जब ” रंग महल ” का दरवाजा खोला जाता है तो बिस्तर अस्त व्यस्त ,लोटे का पानी खाली, दातुन चबाई हुई और पान खाया हुआ मिलता है। रंग महल में भक्त केवल शृंगार का सामान ही चढ़ाते है और प्रसाद के रूप में उन्हें श्रृंगार का सामान ही मिलता है।

विशाखा कुंड

निधिवन में स्थित विशाखा कुंड के बारे में कहा जाता है कि जब भगवान श्री कृष्ण सखियों के साथ रास-लीला रचा रहे थे, तभी गोपियों में से एक सखी विशाखा को प्यास लगी।

कृष्ण ने अपनी बाँसुरी से एक छेद खोदा, जो पानी से भर गया, जिससे पानी पी कर विशाखा ने अपनी प्यास बुझाई। तब से इस कुंड का नाम विशाखा कुंड पड़ा।

राधा जी ने चुरा ली थी कन्हैया की बांसुरी

यहां के लोगों का कहना है कि देवी राधा ने जब यह महसूस किया कि कन्हैया हमेशा बंसी या बांसुरी ही बजाते रहते हैं और उनकी ओर ध्यान ही नहीं देते, तो राधा जी ने उनकी बांसुरी चुरा ली।

ऐसा कहा जाता है कि संगीत के स्वामी स्वामी हरिदास जी महाराज निधिवन में भक्ति गीत गाते थे, जिसमें वे इतने खो जाते थे कि उन्हें अपने तन – मन की कोई सुध नहीं रहती थी।  बांके बिहारी जी ने उनके भक्ति संगीत से प्रसन्न होकर उन्हें स्वप्न में कहा कि वह इस स्थान पर निवास करेंगे।

वन के आसपास बने मकानों में नहीं हैं खिड़कियां

जो लोग निधिवन के आस – पास रहते हैं, उनके घरों में बगीचे के किनारे खिड़कियां नहीं हैं, जिससे वे बगीचे के अंदर का नजारा नहीं देख पाते ।

वास्तव में निधि वन के आस पास के मकानों में खिड़कियां नहीं है और अगर किसी माकन में खिड़की हैं तो वे सात बजे मंदिर की आरती के साथ ही उन्हें बंद कर देते हैं। कोई भी खिड़कियों से निधि वन की ओर नहीं देखता।

5 बजे बंद हो जाता है मंदिर का दरवाज़ा

शाम को 5 बजे मंदिर बंद हो जाता है जिसके बाद किसी को भी पवित्र कुंज या मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है। जंगल जो पक्षियों, बंदरों की चहचहाहट से पूरे दिन चहकता रहता है रात में एक भयानक सन्नाटे में बदल जाता है।

यह माना जाता है कि जैसे ही रात होती है, भगवान कृष्ण रासलीला के लिए वन में आते हैं। सूर्यास्त के समय मंदिर परिसर का दरवाजा बंद रहता है और सभी लोग मंदिर से बाहर निकल जाते हैं।

जो भी रात में मंदिर में रहने का प्रयास करता है वह दृष्टि, सुनने और बोलने की क्षमता खो देता है। लगभग 10 साल पहले एक कृष्ण भक्त रासलीला देखने के लिए निधिवन में छिप गया था। जब अगली सुबह गेट खोला गया तो वह बेहोश अवस्था में पाया गया। उसका मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया था।

लहसुन में हैं ये विशेष गुण, खाली पेट इसका सेवन करने से कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है !

लहसुन में हैं ये विशेष गुण, खाली पेट इसका सेवन करने से कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है !

लहसुन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आमतौर पर भारतीय आहार में लहसुन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

चाहे वह सब्जी हो या दाल, इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए लहसुन का उपयोग किया जाता है। लहसुन में विभिन्न प्रकार के खनिज, विटामिन और प्रतिरक्षा बूस्टर पोषक तत्व होते हैं।

लहसुन का उपयोग कई गंभीर बीमारियों के लिए अमृत के रूप में किया जाता है। लहसुन शरीर में विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और रक्त को शुद्ध करता है।लहसुन खाने से डिप्रेशन की समस्या भी दूर होती है।

तो आइए जानते हैं  खाली पेट लहसुन खाने के क्या फायदें होते हैं ।

खाली पेट लहसुन खाने के फायदें

आयुर्वेद में लहसुन का विशेष महत्व है। इसमें कई औषधीय गुण हैं जो गंभीर बीमारियों को दूर करने में मदद करते हैं। अगर आप लिवर की सूजन या लीवर से जुड़ी किसी बीमारी से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आपको सीमित मात्रा में लहसुन का सेवन करना चाहिए।

कुछ लोग गैर-अल्कोहल फैटी लिवर से पीड़ित होते हैं, इसलिए आप एक उपाय के रूप में लहसुन खा सकते हैं। लेकिन समस्या गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

लहसुन पेट और आंतों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। इसके औषधीय गुण पेट में छोटी आंत को नुकसान से बचाती है। एंटी माइक्रोबियल गुण हानिकारक बैक्टीरिया से छोटी आंत की रक्षा करते है।

वजन कम करने के लिए

रोज सुबह खाली पेट लहसुन खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है। लहसुन में कुछ विशेष गुण शरीर की अतिरिक्त चर्बी को जलाने में मदद करते हैं।

इतना ही नहीं, लहसुन मेटाबोलिज्म को भी बढ़ाता है जिससे मोटापे की समस्या दूर होती है। लहसुन में मोटापा-रोधी गुण होते हैं जो आपको वजन कम करने में मदद करता है।

लहसुन शरीर की वसा को भी कम करता है। लहसुन के तेल में मोटापा-रोधी तत्व भी होते हैं, जो वजन घटाने के लिए बहुत प्रभावी हो सकता है। खाली पेट लहसुन खाने से पाचन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।

ब्लड शुगर को नियंत्रित करना

लहसुन में एलिसिन नामक तत्व होता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में फायदेमंद होता है। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल हाई है, तो आपको रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन खाने के अलावा कच्चे लहसुन और लौंग का सेवन करना चाहिए।

कच्चा लहसुन खाने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह शरीर को डिटॉक्सीफाई करने का एक शानदार तरीका है।

लहसुन में मधुमेह विरोधी गुण होते हैं। मधुमेह रोगियों के लिए लहसुन बहुत फायदेमंद है। एक से दो सप्ताह तक लहसुन का उचित सेवन रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी संतुलित रखता है।

अवसाद दूर करने के लिए और सुंदर त्वचा के लिए

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लहसुन बहुत फायदेमंद है। खाली पेट लहसुन के नियमित सेवन से मस्तिष्क के रसायन संतुलित रहते हैं। यह मूड को तरोताजा रखता है और अवसाद की समस्या को भी दूर करता है।

मुंहासों की समस्या के लिए लहसुन का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इससे चेहरे को एक प्राकृतिक चमक मिलती है।

लहसुन के एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा के लिए पौष्टिक होते हैं। लहसुन खराब सांस को कम करने में भी मदद करता है। आप लहसुन का उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में कर सकते हैं।

कैंसर और उच्च रक्तचाप के लिए रामबाण है

लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीबायोटिक और एंटीकार्सिनोजेनिक गुण होते हैं। रोज सुबह खाली पेट लहसुन खाने से कैंसर का खतरा कम होता है।

लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को कई प्रकार के कैंसर से बचाते हैं। लहसुन उच्च रक्तचाप को भी ठीक करता है। रोज सुबह कच्चे लहसुन की चटनी खाने से दोनों समस्याओं का समाधान होता है।

संक्रमण से लड़ने के लिए

लहसुन को एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक माना जाता है। लहसुन शरीर की कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता है। यह लंबे समय तक संक्रमण से लड़ता है जो शरीर को बीमारियों से बचाता है।

लहसुन औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर होता है इसलिए, यह शरीर को अवसाद, संक्रमण, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से बचाता है।

झुर्रियाँ और खिंचाव के निशान

जैसे-जैसे आप बड़े होते जाते हैं, आपके चेहरे पर झुर्रियों की उपस्थिति बढ़ती जाती है, लेकिन कुछ लोगों को बहुत कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां आ जाती हैं।

यह खराब खाने की आदतों, हानिकारक सूरज की किरणों और बदलती जीवनशैली के कारण हो सकता है लेकिन अगर आप अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार लहसुन को अपने आहार में शामिल करते हैं, तो आप झुर्रियों से छुटकारा पा सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान प्रसव के बाद या बढ़ती उम्र के साथ महिला के शरीर पर खिंचाव के निशान दिखाई देते हैं। अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आप लहसुन का सहारा ले सकते हैं।

बच्चों को इस तरह से खिलाएं चुकंदर, कभी खून की कमी नहीं होगी !

चुकंदर को शरीर में खून बढ़ाने के लिए काफी अच्छा माना जाता है। ठंड के मौसम में चुकंदर आता है और इस लाल रंग की सब्जी को खाने से हीमोग्लोबिन बनता है।

खासकर यह बच्चों के लिए बहुत अच्छा होता है लेकिन अक्सर छोटे बच्चे स्वाद के कारण चुकंदर खाने से मना कर देते हैं जिसकी वजह से उन्‍हें चुकंदर में मौजूद पोषक तत्‍व नहीं मिल पाते हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिससे आप एक बच्चों को इसे आसानी खिला सकते हैं और बच्चे भी इसे को बड़े चाव से खाएंगें।

बच्चों को कब खिलाना है?

जन्म के बाद पहले 6 महीनों तक बच्चा पूरी तरह से अपनी मां के दूध पर निर्भर करता है। इस अवधि के दौरान बच्चे को दूध के अलावा और कुछ नहीं दिया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चा 8 से 10 महीने का हो जाए, तो आप उसे चुकंदर खिला सकते हैं। बच्चे को इसे खिलाने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बच्चे को 1 से 2 चम्मच चुकंदर खिलाएं क्योंकि इसमें नाइट्रेट होते हैं  जिससे बच्चे को इसे पचाने में मुश्किल हो सकती है। आप बच्चे को चुकंदर उबाल कर या सब्जियों में डालकर भी खिला सकते हैं।

सूप बनाकर पिलाएं?

आप बड़े बच्चों को सीधे चुकंदर खिला सकते हैं या उनके लिए अलग-अलग रेसिपी बनाकर आहार में शामिल कर सकते हैं लेकिन आप एक छोटे बच्चे को सीधे नहीं खिला सकते हैं।

तो बेहतर होगा आप चुकंदर सूप बनाएं । कई माता-पिता बच्चे को सेब के साथ चुकंदर मिलाकर और उसका दलिया बनाकर खिलाते हैं।

इससे बच्चे को पोषण मिलता है और यह पचाने में भी आसान होता है। आप आहार विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपने बच्चे के लिए अधिक पौष्टिक से भरा सूप भी बना सकती हैं।

इसके पोषक तत्व

100 ग्राम चुकंदर में 86.9 ग्राम पानी, 1.95 ग्राम प्रोटीन, 6.18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0.76 मिलीग्राम आयरन, 2.8 ग्राम फाइबर, 36.3 मिलीग्राम फाइबर, 69.4 मिलीग्राम सोडियम, 16 मिलीग्राम कैल्शियम, 33.2 मिलीग्राम मैग्नीशियम और 30.5 मिलीग्राम ज़िंक होता है। इसके अलावा, इसमें कई अन्य विटामिन और खनिज होते हैं।

बच्चे को चुकंदर खिलाने के फायदें

छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग करने के कई फायदे हैं। यह विटामिन ए और खनिजों में समृद्ध हैं, जिनमें विटामिन ए, बी, सी और ई शामिल हैं, साथ ही पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन भी शामिल हैं।

यह बच्चे में अपच और दस्त जैसी बीमारियों को रोकता है। यह आयरन में भी उच्च होता है, जो बच्चों में एनीमिया के खतरे को कम करता है।

आयरन लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाता है, जो शरीर के अंगों को ऑक्सीजन की उचित आपूर्ति में मदद करता है। इसमें फाइबर बच्चे के पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और अपच को रोकता है।

दुनिया के कुछ ऐसे अजीबो-गरीब रहस्य जो आज तक नहीं सुलझे

यह दुनिया जितनी बड़ी है उतनी ही अजीबो-गरीब रहस्यों से भरी पड़ी है। प्रकृति के कई रहस्य आज भी उलझे हुए हैं, जिन्हें सुलझाने की बहुत कोशिश की गई लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे ही कुछ अनसुलझे रहस्यों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

6 इंच का छोटा नरकंकाल

चिली में घोस्ट टाउन नाम से एक मशहूर जगह है जहाँ एक 6 इंच का नर कंकाल पाया गया था। इस नरकंकाल के दांत पत्थर जैसे मजबूत थे।

बहुत रिसर्च करने के बाद यह मान लिया गया था कि वह कंकाल इंसान का ही था लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इतने छोटे इंसान के दांत कैसे हो सकते हैं। इसी वजह से आज भी यह रहस्य उलझा हुआ है।

द एस एस ओरंग मेडान

सन 1947 को जून के महीने में “मलक्का की खाड़ी” से व्यापारिक मार्ग से कई जहाज गुजर रहे थे। तभी एक एस ओ एस संदेश पहुंचा, कि “जहाज के सभी क्रू सदस्यों की मौत हो गई है ” जब जहाज़ के सिग्नल का सोर्स पहचानते हुए क्रू जहाज की तरफ मर्चेन्ट शिप ‘द सिल्वल स्टार’ पहुंची तो नज़ारा हैरान करने वाला था ।

क्रू जहाज़ के सभी सदस्यों की मौत हो चुकी थी और सभी के शव जहाज़ पर इधर-उधर बिखरे पड़े थे । वो दृश्य इतना भयानक था, कि समझ नहीं आ रहा था कि हुआ क्या ? इंसानो के साथ-साथ उस जहाज़ पर सफर कर रहें कुत्तों की भी मौत हो गई थी ।

हैरानी वाली बात यह है कि किसी के भी शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले। यही कारण है कि उनकी मौत का कारण आज भी एक रहस्य बना है।

मिनेसोटा डेविल्स वॉटरफॉल

“द डेविल्स केटल” नामक इस झरने को रहस्यमयी माना जाता है। इस झरने में दो धाराएं गिरती है। एक धारा तो सामान्य धाराओं की तरह बहती है पर दूसरी धारा एक छेद में गिरकर कहीं गायब हो जाती है।

यह रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है कि यह पानी जाता कहां है। ‘द डेविल्स कैटल’ नाम के इस छेद में आधी नदी का पानी समा जाता है।

द डांसिंग प्लेग ऑफ 1518

1518 में गर्मियों के दिनों में स्ट्रासबर्ग शहर में एक महिला ने सड़क पर अचानक से नाचना शुरू कर दिया। दिन से रात हो जाती और रात से दिन पर उसका नाचना बंद नहीं होता।

एक सप्ताह के अंदर अंदर 34 अन्य महिलाओं ने भी उनके साथ नाचना शुरू कर दिया। उन्हें देखकर ऐसा लगता था जैसे कि उनके अंदर किसी आत्मा का वास हो गया हो, क्यूंकि नाचने की ना तो कोई वजह थी और ना ही कोई खास मौका।

एक महीने के अंदर नाचने वाली महिलाओं की संख्या 400 पहुंच गई। कई महिलाओं की हालत खराब होने लगी, यहां तक कि कई महिलाओं की नाचते-नाचते मौत हो गईं।

कई धार्मिक पुरोहितों और लोगों को स्थिति पर नियंत्रण लाने के लिए बुलाया गया l डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को भी बुलाया गया, परन्तु कोई असर नहीं हुआ।

इस घटना के पीछे कई वजह बताई गई जैसे:- जहर, एपिलेप्सी, सामूहिक मानसिक बीमारी। इस घटना को ठीक करने के लिए कई तरीके भी आजमाए गए लेकिन इस ऐतिहासिक घटना का आज तक संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है l

खिसकते हुए पत्थर, डेथ वैली, कैलिफोर्निया

डेथ वैली के नाम से जानी जाने वाली इस जगह पर सैकड़ों पत्थर मौजूद हैं। इस सूखे मरुस्थल पर अलग-अलग आकार के पत्थर हैं।

कुछ पत्थर ऐसे लगते हैं जैसे वे अपनी जगह से खिसकते हुए आगे बढ़ रहे हैं, परन्तु वहां पर किसी भी इंसान या जानवर के जरिए इन पत्थरों को घसीटने का कोई निशान नज़र नहीं आता।

जानिए एक ऐसी अनोखी महिला के बारे में जिसकी चार टाँगें थीं

जानिए एक ऐसी अनोखी महिला के बारे में जिसकी चार टाँगें थीं

अकसर लोग जब अपने बारे में किसी को बताते हैं तो वे अपने जीवन से जुड़ी कुछ बातों को सामने रखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि कोई व्यक्ति अपने परिचय में शरीर के अंगों का भी विवरण दे रहा हो?

जैसे; ‘मेरे दो हाथ, एक आंख और दो कान है’ ये कितना अजीब लगता है, लेकिन कोई है जिसे ऐसा भी कहने की जरूरत पड़ती है और वो है मर्टल कोर्बिन। उसे अपने परिचय में यह कहना पड़ता है कि ‘मेरे दो नहीं बल्कि चार पैर है’ l

आज हम आपको इस पोस्ट में चार टांगो वाली अनोखी महिला मर्टल कोर्बिन के बारे में बताने जा रहे हैं:-

मर्टल कोर्बिन का जन्म 12 मई, 1868 को यूनाइटेड स्टेट के टेनेसी में हुआ। मर्टल कोर्बिन को चार-पैर वाली महिला के रूप में जाना जाता था। उसके जन्म ने हर किसी को हैरान कर दिया था।

बेहद मासूम व प्यारी मर्टल बाकी लोगों की तुलना में केवल एक अंतर लेकर इस दुनिया में आई थी और वो था उसके चार पैर।

जी हां, मर्टल के दो नहीं बल्कि चार पैर थे, दो सामान्य उसी स्थान पर और बाकी दो टांगें उनके ठीक बीचोबीच थे जो मर्टल की कमर के बीच से आते थे।

डॉक्टरों के मुताबिक मर्टल के साथ जुड़ी वो दो अलग टांगें उसकी जुड़वा बहन की थी जो इस दुनिया में आ नहीं पाई।

डॉक्टरों का कहना है कि कई बार जो जुड़े हुए जुड़वा बच्चे होते हैं उनमें से एक के शरीर का तो पूरा आकार बन जाता है लेकिन दूसरे के शरीर के कुछ हिस्से पहले वाले बच्चे के साथ जुड़ जाते हैं।

कितनी अजब-गजब है ये दुनिया

कितनी अजीब और विचित्र बात है न कि आप अपने जन्म के साथ किसी दूसरे के शरीर के अंगों को साथ लेकर आए हो। डॉक्टरों के अनुसार मर्टल अपने अजन्मी बहन के इन्हीं अंगों को साथ लेकर आई थी l

मर्टल अपने अजन्मी बहन के अंगों पर काबू तो पा सकती थी, लेकिन चलते समय उनका उपयोग करना उसके लिए काफी चुनौतीपूर्वक था। यह भी कहा गया कि उन दो टांगों से जुड़े पैरों में केवल 3-3 उंगलियां ही थी।

मर्टल की इस विचित्र बात ने उसे दुनिया भर में मशहूर भी बनाया। जब वो केवल 13 साल की थी तब उसके जीवन पर एक जीवनी लिखी गई, ‘बायोग्राफी ऑफ मर्टल कॉर्बिन’ l

वह अपने अतिरिक्त शरीर को मैचिंग मोज़े और जूतों से सजाती थी, जो उसे एक बहुत ही सुंदर लुक देता था।

मर्टल की शादी

मर्टल की एक बहन और भी थी जिसका नाम विले ऐन था। उसकी शादी साल 1885 में लॉक बिन्नेल नाम के लड़के से हुई थी।

लॉक का एक भाई डॉक्टर जेम्स क्लिंटन बिकनेल था, जिसने अपने भाई की शादी के तुरंत बाद मर्टल से शादी का प्रस्ताव रखा।

19 साल की उम्र में मर्टल ने जेम्स क्लिंटन बिकनेल नाम के एक डॉक्टर से शादी की। मर्टल और जेम्स की शादी एक सच्चे प्यार को बयां करती है।

यहाँ एक और महत्वपूर्ण बिंदु है कि मर्टल के शरीर में एक नहीं बल्कि दो योनियां मौजूद थी। कहा जाता है कि मर्टल ने पांच बच्चों को जन्म दिया था जिनमें से तीन का बचपन में ही निधन हो गया था।

मर्टल के बच्चों के संदर्भ में यह भी कहा गया कि उसके तीन में से दो बच्चे एक योनि से पैदा हुए थे और बाकी दो दूसरी योनि से। अब यह तथ्य सच है या नहीं लेकिन चिकित्सकीय रूप से देखा जाए तो ऐसा होना संभव माना गया है।

जानिए तिल क्या बताते हैं आपके स्वभाव के बारे में

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हर व्यक्ति के शरीर के किसी न किसी अंग पर तिल होता है। तिल हमारे शरीर पर जन्म से ही होते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि तिल से भी हमारे स्वभाव के बारे में पता चलता है। इसे हम तिल, मस्सा एवं लाल मस्सा भी कहते हैं। आइए जानते हैं आपके शरीर के किस अंग का तिल, क्या कहता है।

  • आंख की पुतली पर तिल – ऐसा माना जाता है कि दायीं पुतली पर तिल हो तो व्यक्ति के विचार उच्च होते हैं। बायीं पुतली पर तिल वालों के विचार क्रोधित करने वाले होते हैं।
  • पलकों पर तिलआंख की पलकों पर तिल हो तो व्यक्ति संवेदनशील होता है। दायीं पलक पर तिल वाले बायीं वालों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • आंख पर तिल – दायीं आंख पर तिल स्त्री से मेल होने का एवं बायीं आंख पर तिल स्त्री से अनबन होने का आभास देता है।
  • कान पर तिलकान पर तिल व्यक्ति के अल्पायु होने का संकेत देता है।
  • नाक पर तिल – नाक पर तिल हो तो व्यक्ति प्रतिभासंपन्न और सुखी होता है। महिलाओं की नाक पर तिल उनके सौभाग्यशाली होने का सूचक होता है।
  • होंठ पर तिल – होंठ पर तिल वाले व्यक्ति बहुत प्रेमी हृदय होते हैं। यदि तिल होंठ के नीचे हो तो गरीबी छाई रहती है।
  • मुंह पर तिल – मुखमंडल के आसपास का तिल स्त्री तथा पुरुष दोनों के सुखी संपन्न एवं सज्जन होने के सूचक होते हैं। मुंह पर तिल व्यक्ति को भाग्य का धनी बनाता है। उसका जीवनसाथी सज्जन स्वभाव का होता है।
  • गाल पर तिल – गाल पर लाल तिल शुभ फल देता है। बाएं गाल पर कृष्ण वर्ण तिल व्यक्ति को निर्धन, किंतु दाएं गाल पर धनी बनाता है।
  • जबड़े पर तिल – जबड़े पर तिल हो तो स्वास्थ्य की अनुकूलता और प्रतिकूलता निरंतर बनी रहती है।
  • ठोड़ी पर तिल – जिस स्त्री की ठोड़ी पर तिल होता है, उसमें मिलनसारिता की कमी होती है।
  • कंधों पर तिल – दाएं कंधे पर तिल का होना दृढ़ता तथा बाएं कंधे पर तिल का होना चिड़चिड़े स्वभाव का सूचक होता है।
  • दाहिनी भुजा पर तिल – ऐसे तिल वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित व बुद्धिमान होता है। लोग उसका आदर करते हैं।
  • भौंहों पर तिल – यदि दोनों भौहों पर तिल हो तो व्यक्ति अकसर यात्रा करता रहता है। दाहिनी पर तिल सुखमय और बायीं पर तिल दुखमय दांपत्य जीवन का संकेत देता है।
  • बायीं भुजा पर तिल – बायीं भुजा पर तिल वाले व्यक्ति झगड़ालू स्वभाव के होते हैं।
  • कोहनी पर तिल – कोहनी पर तिल का पाया जाना विद्वता का सूचक है।
  • हाथों पर तिल – जिसके हाथों पर तिल होते हैं वह चालाक होते हैं। दायीं हथेली पर तिल हो तो बलवान और दायीं हथेली के पृष्ठ भाग में हो तो धनवान होता है। बायीं हथेली पर तिल हो तो व्यक्ति  खर्चीला तथा दायीं हथेली के पृष्ठ भाग पर तिल हो तो कंजूस होता हैं।
  • अंगूठे पर तिल – अंगूठे पर तिल हो तो व्यक्ति कार्यकुशल, अच्छा व्यवहार तथा न्यायप्रिय होता है।
  • तर्जनी पर तिल – जिसकी तर्जनी पर तिल हो, वह विद्यावान, गुणवान और धनवान किंतु शत्रुओं से पीड़ित होता है।
  • मध्यमा पर तिल – मध्यमा पर तिल उत्तम फलदायी होता है। व्यक्ति सुखी होता है। उसका जीवन शांतिपूर्ण होता है।
  • अनामिका पर तिल – जिसकी अनामिका पर तिल हो वह ज्ञानी, यशस्वी, धनी और पराक्रमी होता है।
  • कनिष्ठा पर तिल – कनिष्ठा पर तिल हो तो वह व्यक्ति संपत्तिवान होता है, किंतु उसका जीवन दुखमय होता है।
  • हथेली पर तिल – जिसकी हथेली में तिल मुठ्ठी में बंद होता है वह बहुत भाग्यशाली होता है ।
  • गले पर तिल – गले पर तिल वाला व्यक्ति आरामतलब होता है। गले पर सामने की ओर तिल हो तो व्यक्ति के घर मित्रों का जमावड़ा लगा रहता है। मित्र सच्चे होते हैं। गले के पृष्ठ भाग पर तिल होने पर जातक कर्मठ होता है।
  • छाती पर तिल – छाती पर दाहिनी ओर तिल का होना स्त्रियों के लिए शुभ होता है। ऐसी स्त्री पूर्ण अनुरागिनी होती है। पुरुष भाग्यशाली होते हैं। छाती पर बायीं ओर तिल रहने से पत्नी की ओर से असहयोग की संभावना बनी रहती है। छाती के मध्य का तिल सुखी जीवन दर्शाता है। यदि किसी स्त्री के हृदय पर तिल हो तो वह सौभाग्यवती होती है।
  • कमर पर तिल – यदि किसी व्यक्ति की कमर पर तिल होता है तो उस व्यक्ति की जिंदगी सदा परेशानियों से घिरी रहती है।
  • पीठ पर तिल – पीठ पर तिल हो तो व्यक्ति भौतिकवादी, महत्वाकांक्षी एवं रोमांटिक होता है। वह भ्रमणशील भी हो सकता है। ऐसे लोग खर्च भी खुलकर करते हैं।
  • पेट पर तिल – पेट पर तिल हो तो व्यक्ति चटोरा होता है। ऐसा व्यक्ति भोजन का शौकीन व मिष्ठान्न प्रेमी होता है। उसे दूसरों को खिलाने की इच्छा कम रहती है।
  • घुटनों पर तिल – दाहिने घुटने पर तिल होने से गृहस्थ जीवन सुखमय और बायें पर होने से दांपत्य जीवन दुखमय होता है।
  • पैरों पर तिल – पैरों पर तिल हो तो जीवन में भटकाव रहता है। ऐसा व्यक्ति यात्राओं का शौकीन होता है।

महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 में बिहार के रांची शहर में हुआ था। उनके के पिता का नाम पान सिंह वह माता का नाम श्रीमती देवकी हैl
  • बचपन में धोनी का ज़्यादा टाइम क्रिकेट खेलने में ही बीतता था क्योंकि उन्हें क्रिकेट खेलना सबसे अच्छा लगता था l
  • धोनी मिदनापुर में दक्षिण पूर्व रेलवे के तहत 2001 से 2003 तक खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर एक यात्रा टिकट परीक्षक (टीटीई) थे। हालांकि, वह ज्यादा देर तक काम नहीं कर सके और कुछ समय के बाद काम छोड़ दिया।
  • उनके पसंदीदा व्यंजन बटर चिकन और चिकन बिरयानी हैं, और उन्हें हॉट चॉकलेट फज भी बहुत पसंद है।
  • धोनी किशोर कुमार के बहुत बड़े फैन हैं और उन्हें पुराने गाने बहुत पसंद है। उनके पसंदीदा गानों में से एक है ” मैं पल दो पल का शायर हूं”।
  • 1998 में धोनी बिहार की अंडर-19 क्रिकेट टीम का हिस्सा थे। उनकी टीम पंजाब के खिलाफ हार गई, लेकिन उनका प्रदर्शन सराहा गया। इसी के आधार पर उन्हें बिहार रणजी टीम में शामिल कर लिया गया।
  • 2012 में फोर्ब्स पत्रिका ने धोनी को सबसे अमीर क्रिकेटर बताया। रईसी के मामले में वे दुनिया के टॉप 100 एथलीट में से 31वें स्थान पर थे। वे इंग्लैंड के फुटबॉलर रूनी, एथलीट उसैन बोल्ट, टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच से कहीं आगे थे। 2013 में इसी पत्रिका ने धोनी को इस सूची में 16वां स्थान दिया। उनकी सालाना कमाई 190 करोड़ रुपए बताई गई।
  • तीनों आईसीसी ट्रॉफी (टी 20 विश्व कप 2007, क्रिकेट विश्व कप 2011 और चैंपियंस ट्रॉफी 2013) जीतने वाले विश्व क्रिकेट में धोनी एकमात्र कप्तान हैं।
  • धोनी ने दो साल के अफेयर के बाद जुलाई 2010 में अपनी बचपन की दोस्त साक्षी सिंह के साथ देहरादून में स्थित फार्म हाउस पर सगाई और फिर अगले ही दिन शादी कर ली। दोनों रांची के डीएवी स्कूल में साथ पढ़ा करते थे।
  • धोनी ने 2005 में जयपुर में श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन बनाए, जो एकदिवसीय क्रिकेट में एक विकेटकीपर द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर है। सीएसके के कप्तान ने 299 के सफल पीछा करते हुए 145 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौके और 5 छक्के लगाए थे ।
  • धोनी को क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ और सबसे तेज विकेटकीपर के रूप में जाना जाता है। सीएसके (चेन्नई सुपर किंग्स) के कप्तान ने प्रारूप में 538 मैचों में 195 स्टंपिंग की है। उनके बाद कुमार संगकारा (139) दूसरे और रोमेश कालुविथाराना (101) तीसरे स्थान पर हैं।
  • उन्होंने अपने क्रिकेट करिअर में कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। वे 22 टेस्ट जीतकर सौरव गांगुली से आगे निकलकर भारत के सबसे सफल कप्तान बन गए है।  सौरव ने भी उन्हें भारत का सबसे सफल कप्तान बताया। वे एकदिवसीय मैचों के मामले में भारत के सबसे सफल कप्तान हैं।
  • धोनी जॉन अब्राहम के बहुत बड़े फैन थे और उनके जैसे ही लंबे बाल भी रखे थे। यहां तक कि जब बॉलीवुड अभिनेता जॉन ने अपने बाल कटवाए तो धोनी ने भी अपने बाल भी कटवा लिए थे।
  • धोनी ने कई पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं जैसे 2006 में आईसीसी वनडे प्लेयर ऑफ़ द इयर अवार्ड (प्रथम भारतीय खिलाड़ी जिन्हें ये सम्मान मिला) , राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार और 2001 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित है l
  • धोनी आईपीएल के आठ फाइनल में जगह बनाने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं। भारत के पूर्व कप्तान ने 2010, 2011 और 2018 में तीन बार सीएसके के साथ टूर्नामेंट जीता है।
  • वे इस समय 20 बड़े ब्रांड का विज्ञापन कर रहे हैं। इसमें रीबॉक, पेप्सी के प्रॉडक्ट शामिल हैं। वे शाहरुख खान के बाद सबसे ज़्यादा विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी हैं। शाहरुख के पास 21 ब्रांड हैं l
  • धोनी स्कूल टाइम में फुटबॉल भी खेलते थे। वे अपने  स्कूल की ओर से फुटबाल टीम में  गोलकीपर होते थे l
  • शीश महल टूर्नामेंट में सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड के लिए खेलते समय, धोनी अपने कोच “देवल सहाय” से प्रत्येक छक्के के लिए 500 रुपये लेते थे, जो उन्हें मैचों में मिलता था।
  • धोनी को मोटरसाइकिलों के शौक के लिए जाना जाता है। दोपहिया वाहनों के लिए उनका शौक बहुत कम उम्र से शुरू हो गया था। महेंद्र सिंह धोनी के पास (23) लाखों करोड़ों रुपए वाली बाइक्स का कलेक्शंस है क्योंकि उन्हें बाइक्स का बहुत शौक है l
  • धोनी ने कप्तान के रूप में सबसे अधिक अंतर्राष्ट्रीय छक्के मारे हैं वह अब तक 342 छक्के लगा चुके हैं और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी (476) के नेतृत्व वाली सूची में पांचवें स्थान पर हैं।
  • धोनी ने हमेशा कहा है कि सेना उनका पहला प्यार है और उन्हें 1 नवंबर 2011 को लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक प्रदान की गई।
  • उनकी जीवनी पर आधारित एम.एस.धोनी: “द अनटोल्ड स्टोरी ” फ्लिम भी बनी है। यह एक प्रमुख क्रिकेटर की जीवनी पर बनी पहली फिल्म थी और इसे बहुत पसंद भी किया गया । इस फिल्म में बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने एम.एस.धोनी का किरदार निभाया था।
  • धोनी की भारत और विदेश में फैन फॉलोइंग बहुत बड़ी है। पिछले कई वर्षों में उनसे मिलने वाले कई प्रशंसकों के बीच, रांची की एक लड़की भी थी जिसने अपने स्कूटर से धोनी की हमर का पीछा किया और हवाई अड्डे पर उनके साथ एक सेल्फी क्लिक की।

कुछ ऐसे पक्षी जो पृथ्वी से विलुप्त हो चुके हैं

विश्व में करीब 10,000 प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं इनमें से 1200 प्रजातियां ऐसी हैं जोकि लुप्त होने की कगार पर हैं, इन पक्षियों की प्रजातियों को संकटग्रस्त घोषित किया गया है।

पृथ्वी पर मानव की गतिविधियों और जंगलों के विनाश की वजह से कई पशु पक्षी विलुप्त हो चुके हैं। सन 1500 से लेकर अब तक पक्षियों की 190 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। विलुप्त होने की यह प्रकिया दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

इस लेख में हम जानेंगे विलुप्त हुए कुछ पक्षियों के बारे में :

डोडो पक्षी

विलुप्त पक्षियों में डोडो पक्षी सबसे प्रमुख है। यह पक्षी मॉरीशस का एक स्थानीय पक्षी था। यह पक्षी उड़ नहीं पाते थे और  बहुत बड़े आकार के होते थे। डोडो कबूतर का नज़दीकी रिश्तेदार माना जाता था। इस पक्षी की लम्बाई  3.3 फीट और इसका वजन 20 किलो तक हो सकता था।

Dodo Bird

सन 1598 में डच समुद्री यात्री इस द्वीप पर आए तो उन्होंने डोडो को उसके मांस के लिए शिकार करना शुरू कर दिया। डोडो पक्षी का शिकार करना बहुत आसान था, क्योंकि न तो ये उड़ पाते थे और अधिक वजन होने के कारण न ही भाग पाते थे। समुद्री यात्रियों ने इस द्वीप पर लगभग सभी डोडो पक्षियों को मार कर पूरी प्रजाति को ही नष्ट कर दिया था।

तस्मानियन इमु

तस्मानियन इमु, इमू पक्षी की ही एक प्रजाति थी जो कि तस्मानिया द्वीप में पाई जाती थीl यह पक्षी उड़ नहीं पाता थाl तस्मानिया में यह पक्षी काफी मात्रा में पाए जाते थे, परंतु किसानों ने इसे फसल को नष्ट करने वाला पक्षी मानते हुए इसका शिकार करना शुरू कर दिया और लगभग सारे पक्षियों को मार डाला।

tasmaniyam emu bird

कैरोलिना पैराकीट

कैरोलिना पैराकीट एकमात्र तोते की प्रजाति थी जो कि उत्तरी अमेरिका में पाई जाती थी। यह पक्षी अलाबामा रा ज्य में मुख्य रूप से पाया जाता था तथा यह प्रवास करके ओहायो, आयोवा, इलिनॉइस आदि अमेरिकी राज्यों में भी जाता था।

Carolina parakeet

इसका आकार 12 इंच का था तथा वजन 280 ग्राम हुआ करता था। मानव विकास के दौरान जंगलों का विनाश हो गया जिससे कि उत्तरी अमेरिका के इस इकलौते तोते के आवास नष्ट हो गए जिससे कि इसकी पूरी प्रजाति का ही विनाश हो गया।

अरबी शुतुरमुर्ग

शुतुरमुर्ग पक्षी अब केवल अफ्रीका में ही पाए जाते हैं l पहले यह अरब के रेगिस्तान में भी पाए जाते थे। इनकी कुछ संख्या जॉर्डन, इसराइल, कुवेत आदि देशों में भी पाई जाती थी। इन्हें मध्य पूर्व का शतुरमुर्ग  कहा जाता था। अरब के अमीर लोगों ने खेल के रूप में इस पक्षी का शिकार करना शुरू कर दिया।

Arabian_ostrich

इस पक्षी का शिकार मांस, अंडों उसके पंखों के लिए किया जाता था। इसके सुंदर पंखों से कई प्रकार के क्राफ्ट्स बनाए जाते थे।  प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बंदूक और राइफल के आ जाने से इनका शिकार और भी आसान हो गया और इन्हें केवल मनोरंजन के लिए ही मारा जाने लगा, और धीरे धीरे अरबी शतुरमुर्ग की पूरी प्रजाति ही खत्म हो गई।

संदेश वाहक कबूतर

संदेश वाहक कबूतर भारी मात्रा में उत्तरी अमेरिका में पाए जाते थे, उनके झुंड इधर-उधर उड़ते हुए देखे जा सकते थे। यह कबूतर उत्तरी अमेरिका के जंगलों में पाए जाते थे। जब अमेरिका में, अफ्रीका के लोगों को गुलाम बनाकर लाया गया तो उन्हें सस्ते भोजन के रूप में संदेशवाहक कबूतरों का मांस खिलाया जाता था, क्योंकि इनका शिकार आसानी से किया जा सकता था और यह काफी मात्रा में मौजूद थे।

carrier pigeon

शहरों को आबाद करने के लिए जंगलों का विनाश किया गया, जिससे कि इन संदेशवाहक कबूतरों का आवास ख़त्म हो गया। इन दोनों प्रमुख कारणों से उत्तरी अमेरिका में एक भी संदेशवाहक कबूतर नहीं बचा और यह प्रजाति पूरी तरह से विलुप्त हो गई।