ये हैं दुनिया के सबसे अजीबोगरीब और रहस्यमयी पेड़

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पेड़ों के बिना धरती पर जीवन की कल्पना करना बेहद डराने वाला विचार है। केवल पेड़-पौधे ही पृथ्वी पर हमारे जीवन को समृद्ध करते हैं। पेड़ न केवल हमारे लिए प्राण-वायु आक्सीजन को बनाते हैं बल्कि हमारे लिए पानी, खाने-पीने और जीने की पूरी व्यवस्था को भी सम्भालते हैं।

पेड़-पौधों का इतिहास मानव इतिहास से भी पुराना है। हमारी धरती पर हज़ारों तरह के पेड़-पौधे पाए जाते हैं। हालाँकि सभी पेड़-पौधे खूबसूरत होते हैं, फिर भी कुछ पेड़ बेहद ख़ास, अजीबोगरीब और रहस्यमयी होते हैं। इस पोस्ट में हम कुछ ऐसे पेड़ों के बारे में चर्चा करेंगे जो अपने आप में बेहद ख़ास और रहस्यमयी हैं।

जबुटिकाबा – दक्षिण अमेरिका

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आमतौर पर फल पेड़ों की टहनियों पर लगते हैं, लेकिन दक्षिणी अमेरिका में एक ऐसा पेड़ है जिसके फल शाखाओं पर नहीं बल्कि पेड़ के तनों पर उगते हैं।

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अजीब और रहस्यमय दिखने वाले इस पेड़ को ‘जबुटीकाबा’ के नाम से जाना जाता है। वास्तव में यह अंगूर की ही एक प्रजाति का पेड़ है, जिसका फल ब्राजील, अर्जेंटीना, पेरू और बोलीविया जैसे देशों में लोगों द्वारा खाया जाता है। इसका उपयोग शराब बनाने में भी किया जाता है।

ड्रैगन ब्लड ट्री – यमन

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यमन के सोकोट्रा ​​द्वीप पर पाए जाने वाले पेड़ को “ड्रैगन ब्लड ट्री” कहा जाता है इन्हें ‘एलियन आइलैंड’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इससे खून की तरह दिखने वाला लाल रंग का पदार्थ निकलता है। यह पेड़ अपनी अजीब आकृतियों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।

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ग्रेट सिकुआ ट्री – यूएसए

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किसी दानव की तरह दिखने वाला ये अजीब सा पेड़ अमेरिका में पाया जाता है। इसे ‘ग्रेट सिकुआ ट्री’ के नाम से भी जाना जाता है।

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इस पेड़ का वजन लगभग 2.7 मिलियन पाउंड है। यह पेड़ 275 फीट लम्बा है। बताया जाता है कि इस विशालकाय पेड़ की उम्र करीब 2300-2700 साल है।

विस्टरिया – जापान

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‘विस्टेरिया’ नामक यह पेड़ जापान में पाया जाता है। इसे दुनिया का सबसे खूबसूरत पेड़ माना जाता है। ये पेड़ पूरी तरह से फूलों से ढके होते हैं। इस पेड़ में गुलाबी और नीले रंग फूल लगते हैं । इन फूलों को पूरी तरह से खिलने में 5 से 15 साल लगते हैं।

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बॉटल ट्री- ऑस्ट्रेलिया

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ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला यह पौधा अपनी बोतल जैसी संरचना के कारण ‘बॉटल ट्री’ के नाम से जाना जाता है।इस पेड़ को जहरीला भी माना जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में शिकारी अपने तीरों पर इसी के ज़हर का प्रयोग करते थे।

1200 साल पुराना जिंजी किला : जानिए कुछ रोचक तथ्य

भारत में ऐसे कई किले हैं जो सदियों से इतिहास की कहानियां बयां कर रहे हैं, उन्हीं में से एक है जिंजी किला, जिसे जिंजी दुर्ग या सेंजी दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है।

जिंजी दुर्ग दक्षिण भारत के उत्‍कृष्‍टतम किलों में से एक है। इस किले का निर्माण नौंवी शताब्दी में चोल राजवंशों द्वारा कराया गया था।

यह किला तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में पुद्दुचेरी के पास स्थित है। इस किले की खूबसूरती यह है कि यह सात पहाड़ियों पर निर्मित कराया गया है, जिनमें कृष्णगिरि, चंद्रागिरि और राजगिरि प्रमुख पहाड़ियां हैं।

यह इस प्रकार निर्मित है कि छत्रपति शिवाजी ने इसे भारत का सबसे ‘अभेद्य दुर्ग’ कहा था। वहीं अंग्रेजों ने इसे ‘पूरब का ट्रॉय’ कहा था।

आइए जानते हैं कुछ रोचक तथ्य

यह किला लगभग 11 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है, जिसकी दीवारों की लंबाई लगभग 13 किलोमीटर है।

इस किले पर कई शासकों ने राज किया है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर मुगलों, कर्नाटक के नवाबों, फ्रांसीसियों और अंग्रजों के अधीन रहा है।

17वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठों द्वारा इस किले को किसी भी हमलावर सेना से बचाने के लिए पुननिर्मित किया गया था।

इस किले का मुख्य आकर्षण राजगिरि है, जहां एक पिरामिडनुमा शीर्ष से सजी बहुमंजिला कल्याण महल है। इसके अलावा राजगिरि पहाड़ी के निचले हिस्से में महल, अन्नागार और एक हाथी टैंक भी है। यह ग्रेनाइट किलेबंदी की अंतरतम रेखा से घिरा हुआ है, और सभी शाही संरचनाओं को घेरता है।

ऊंची दीवारों से घिरा हुआ यह किला रणनीतिक रूप से इस प्रकार बनाया गया था कि दुश्मन इस पर आक्रमण करने से पहले कई बार जरूरत सोचते थे, क्योंकि यह किला पहाड़ियों पर स्थित है, इसलिए आज भी यहां के राज दरबार तक दो घंटे की चढ़ाई के बाद ही पहुंचा जा सकता है।

जिंजी से जुड़ा सबसे दिलचस्प चरित्र राजा तेज सिंह है, जिसे स्थानीय रूप से राजा देशसिंह या देसिंग राजा के रूप में जाना जाता है। मुग़ल आधिपत्य के दौरान, औरंगज़ेब ने जिंजी को बुंदेलखंड के अपने सेनापति राजा स्वरूप सिंह को जागीर के रूप में दे दिया था।

स्वरूप सिंह की मृत्यु के बाद आर्कोट के नवाब (कर्नाटक क्षेत्र के मुगल गवर्नर) ने उनके बेटे राजा तेज सिंह पर अपना अधिकार जताने की कोशिश की। उन्होंने मांग की कि तेज सिंह करों का भुगतान करें भले ही वह मुगल सम्राट के सामंत थे।

जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो नवाब ने उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया, और जिंजी पर युद्ध की घोषणा की। 22 वर्षीय तेज सिंह, जो उस समय बुंदेलखंड में थे, ने अपनी छोटी सेना के साथ नवाब के पराक्रमी सैनिकों के खिलाफ जिंजी की रक्षा करते हुए अपनी जान की बाज़ी लगा दी।

यह किला तमिलनाडु पर्यटन क्षेत्र का एक सर्वाधिक रोचक स्थल है। जहां हर साल हजारों की संख्या में लोग घूमने आते हैं क्योंकि इस समय भारत समेत दुनिया भर में कोरोना वायरस फैला हुआ है इसीलिए इस पर्यटन स्थल को फिलहाल बंद कर दिया गया है ।

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क्या आप जानते हैं कुछ दवाओं बीच में लाइन क्यों होती है ?

क्या आप जानते हैं कुछ दवाओं बीच में लाइन क्यों होती है ?

आज के समय में अनियमित खानापान, अनियमित सोने के कारण हमें कई बीमारियों से हो कर गुजरना पड़ता है। जिसके कारण हर किसी को कभी न कभी दवाओं की जरुरत पड़ती हैं, और हमें दवाओं और डॉक्टर का सहारा लेना ही पड़ता है।

वैसे तो प्रत्येक दवाइयां अलग अलग होती हैं अलग रंग, आकार और प्रत्येक दवाई का अपना असर होता है लेकिन आपने देखा होगा कि दवाईयों की कुछ टेबलेट्स पर बीच में एक सीधी लाइन बनी होती है जबकि कुछ टेबलेट्स पर वो लाइन नहीं होती।

आपने कभी यह सोचा है कि आखिर दवाईयों पर ये सीधी लाइन क्यों बनी होती है? इसका कारण है। अगर नहीं, तो आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं कि आखिर दवा की कुछ टेबलेट पर सीधी लाइन क्यों होती है?

दरअसल, कुछ दवाओं पर दी हुई इस सीधी लाइन को Debossed Line कहा जाता है। जो लाइन आमतौर पर हाई पॉवर की दवाओं पर देखने को मिलती है, ताकि इसे बीच में से तोड़ कर पूरी टेबलेट की आधी खुराक ली जा सके।

उदाहरण के लिए ,अगर आपके पास 500mg की एक गोली है और डॉक्टर के अनुसार आपको खुराक में 250mg दवा लेनी है, तो आप उस टेबलेट को बीच से तोड़ कर आधा ले सकते हैं।

एक खास बात यह भी है कि सभी दवाइयाँ ऐसे बीच में से तोड़ कर हाफ डोज़ में नहीं ले सकते। केवल वही दवाइयाँ बीच में तोड़ कर ले सकते हैं जिन पर Debossed Line हो और जिन दवाओं पर ये लाइन ना हो उन्हें आधा तोड़ कर नहीं खाना चाहिए।

जानिए वर्ष 2020 के उन शीर्ष 10 क्षणों की सूची, जो हर भारतीय को गर्वित करते हैं

हालांकि वर्ष 2020 कठिन रहा है परन्तु भारतीय और भारतीय मूल के लोगों के लिए ऐसे कई क्षण थे जिन्होंने हमें किसी न किसी तरह से उनके साथ जुड़ने में गर्व महसूस कराया।

आइये जानते हैं वर्ष 2020 की कुछ ऐसी उपलब्धियों की सूची के बारे में जो प्रत्येक भारतीय को गर्वित करती है।

पहली महिला नेवी पायलट “सब लेफ्टिनेंट शिवांगी”

सब लेफ्टिनेंट शिवांगी भारतीय नौसेना के अभियानों में शामिल होने वाली पहली महिला पायलट बनीं। शिवांगी बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं।

उन्होंने मुजफ्फरपुर के डीएवी पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की है। 27 एनओसी कोर्स के तहत उन्होंने एसएसी (पायलट) परीक्षा पास की और नेवी में कमिशन हुईं।

शुरुआती ट्रेनिंग के बाद शिवांगी ने जून 2018 में ही नेवी जॉइन की है। पिछले साल जून में वाइस एडमिरल एके चावला द्वारा उन्हें औपचारिक रूप से कमीशन दिया गया था।

भारत सह-चैंपियन बना शतरंज ओलंपियाड 2020 का

भारत ने विश्व शतरंज ऑनलाइन ओलंपियाड जीतकर इतिहास रच दिया। हालांकि, भारत और रूस को इंटरनेट और सर्वर की खराबी के कारण 2020 ऑनलाइन शतरंज ओलंपियाड में संयुक्त विजेता घोषित किया गया।

फाइनल में भारत के दो खिलाड़ियों निहाल सरीन और दिव्या देशमुख के सर्वर के साथ कनेक्शन नहीं बन पाने से समय गंवाया, जिसके चलते पहले रूस को विजेता घोषित किया गया था।

भारत ने इस विवादास्पद फैसले पर विरोध व्यक्त किया जिसके बाद इसकी समीक्षा की गई। हालाँकि, इंटरनेट कनेक्शन के परिणामस्वरूप, दोनों खिलाड़ियों को एक कनेक्टिविटी समस्या का सामना करना पड़ा।

लेकिन भारतीय पक्ष द्वारा दर्ज शिकायत के बाद, अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ ने भारत और रूस को स्वर्ण का संयुक्त विजेता घोषित किया।

सुमित नागल यूएस ओपन के दूसरे दौर में पहुंचे

भारतीय टेनिस स्टार सुमित नागल ने 1 सितंबर को इतिहास रच दिया क्योंकि वह 2013 के बाद से यूएस ओपन के दूसरे दौर में प्रवेश करने वाले पहले भारतीय बन गए।

टूर्नामेंट में आगे खेलने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के ब्रैडली क्लैन को 6-1, 6-3, 3-6, 6-1 से हराकर नागल ने ग्रैंड स्लैम के दूसरे दौर में प्रवेश किया।

इसके अलावा, 23 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी पिछले सात वर्षों में एक ग्रैंड स्लैम में एकल मुख्य ड्रॉ मैच जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।

‘दिल्ली क्राइम’ ने एमी अवार्ड जीता

23 नवंबर, 2020 को आयोजित 48वें इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स  में नेटफ्लिक्स की भारतीय सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’  को बेस्ट ड्रामा सीरीज का अवार्ड मिला है ।

रिची मेहता द्वारा निर्देशित इस वेबसीरीज में एक्ट्रेस शेफाली शाह ने डिप्टी कमिशनर ऑफ पुलिस का किरदार निभाया है, जिसे 2012 में हुए दिल दहला देने वाले निर्भया गैंग रेप और हत्या के आरोपियों को खोजने का काम सौंपा जाता है l

एमी में शो की जीत देश के लिए ऐतिहासिक है। दिल्ली क्राइम के कलाकारों में शेफाली शाह, रसिका दुगल, यशस्विनी दयामा, आदिल हुसैन, राजेश तैलंग, जया भट्टाचार्य और डेन्ज़िल स्मिथ शामिल हैं।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर

अहमदाबाद के एक छह साल के लड़के ने दुनिया की सबसे कठिन प्रोग्रामिंग का खिताब हासिल किया है। कक्षा 2 के छात्र, अरहम ओम तल्सानिया ने गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में रैंक हासिल की है।

इस नन्हें प्रोग्रामिंग जीनियस ने Pearson VUE टेस्ट सेंटर में मिक्रोसॉफ़्ट सर्टिफिकेशन एग्जाम को भी क्रैक किया है। छह वर्षीय कोडर अरहम पायथन प्रोग्रामिंग भाषा में माहिर है।

छह साल के अरहम ओम तल्सानिया ने अपने पिता से कोडिंग सीखी और 2 साल की उम्र में टैबलेट और 3 साल की उम्र में आईओएस और विंडोज के साथ अन्य गैजेट्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

कमला हैरिस अमेरिका की पहली अश्वेत महिला उपराष्ट्रपति बनी

भारतीय मूल की कमला हैरिस ने अमेरिका की पहली अश्वेत महिला उपराष्ट्रपति बनकर इतिहास रच दिया है। वो पहली ऐसी महिला हैं जो अमेरिका के उप-राष्ट्रपति पद पर आसीन होंगी।

यह भारत के लिए भी गर्व की बात है कि भारतीय मूल की एक महिला अमेरिकी उप-राष्ट्रपति का पद संभालेंगी।हैरिस का जन्म एक जमैका पिता और एक भारतीय माँ से हुआ था। उनकी माँ श्यामला गोपालन चेन्नई से थी और उनके पिता डोनाल्ड जे. हैरिस जमैका से थे।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दुनिया की सबसे बड़ी मसाला पेंटिंग

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की एक और युवा छात्रा नेहा सिंह ने मसाले और प्राकृतिक रंगों के साथ बनाई गई सबसे बड़ी पेंटिंग का विश्व रिकॉर्ड बनाया है, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है।

नेहा सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के कोटवारी गाँव की रहने वाली है। वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में वैदिक विज्ञान की छात्रा हैं, उन्होंने उसी विश्वविद्यालय से ललित कला का भी अध्ययन किया है।

सचिन तेंदुलकर ने लॉरियस बेस्ट स्पोर्टिंग मोमेंट का पुरस्कार जीता

सचिन तेंदुलकर को बर्लिन में लॉरियस स्पोर्टिंग मोमेंट अवॉर्ड 2000-2020 से सम्मानित किया गया। मुंबई में 2 अप्रैल 2011 को वर्ल्ड कप जीतने के बाद सचिन तेंदुलकर को उनके साथी खिलाड़ियों ने कंधों पर उठा लिया था। इसी ऐतिहासिक क्षण को पिछले 20 वर्षों में ‘लॉरियस बेस्ट स्पोर्ट मोमेंट’ माना गया।

इसी की वजह से सचिन तेंदुलकर को ये अवॉर्ड मिला है l भारतीय क्रिकेट टीम और खासकर सचिन तेंदुलकर के फैंस ने उनके समर्थन में वोट किए, जिससे सचिन इस अवॉर्ड को जीतने में सफल हुए।

बर्लिन में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ ने सचिन तेंदुलकर को लॉरियस स्पोर्टिंग मोमेंट अवॉर्ड 2000-2020 के विजेता बनने की घोषणा की और टेनिस दिग्गज बोरिस बेकर ने उनको ट्रॉफी सौंपी।

पृथ्वी के निकट क्षुद्रग्रह-HLV2514 की खोज

गुजरात के सूरत शहर के पीपी सवानी चैतन्य विद्या संकुल स्‍कूल में कक्षा 10 में पढ़ने वाली दो लड़कियों ने हाल ही में पृथ्वी के निकट क्षुद्रग्रह की उपस्थिति की दुर्लभ खोज की।

इन दो लड़कियों द्वारा ढूढ़े गए दुर्लभ क्षुद्रग्रह को अब नासा द्वारा HLV2514 का नाम दिया है। सूरत की ये दो लड़कियां वैदेही वेकारिया संजयभाई और राधिका लखानी प्रफुल्लभाई हैं।

“मैरीगोल्ड डायमंड रिंग” वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई

उत्तर प्रदेश में मेरठ के एक ज्वेलर ने अब तक की सबसे ज्यादा हीरों वाली एक अंगूठी बनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाई है l

‘द मैरीगोल्ड रिंग’ को रिंग ऑफ प्रॉस्पेरिटी’ के रूप में जाना जाता है, इस अंगूठी में कुल 12,638 प्राकृतिक हीरे हैं और इसे फूल के आकार में उकेरा गया है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का खिताब हासिल करना रेनी ज्वेल और हर्षित बंसल का सपना था और उन्हें हीरे की अंगूठी के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद थी जो उन्होंने बनाई है।

वह पांच बड़े बदलाव जो हम सबके जीवन में हुए !

कोरोना वायरस के चलते कई बड़े संकट हमारे सामने आए कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा परन्तु साथ हमारे जीवन में कुछ बदलाव भी हुए है जैसे:-

मास्क बना जिंदगी का हिस्सा

जब तक कोरोना की दवाई नहीं आ जाती है तब तक लोगों ने यह मान लिया है कि मास्क ही जिंदगी है। अब तो लोगो ने इसे अपने पहनावे में भी शामिल कर लिया है।

सुरक्षा में भी स्टाइल जरुरी

सुरक्षा के दौरान भी लोगो ने स्टाइल के साथ कोई समझौता नहीं किया। यही वजह है कि एक से बढ़कर एक स्टाइलिश मास्क बाजार में मिलने लगे।

घर बने ऑफिस

कोरोना की वजह से देशभर में 24 मार्च को लॉकडाउन लगा दिया गया।  जिसके बाद कंपनियों ने कर्मचारियों के घरों को ही ऑफिस बना दिया।

वर्क फ्रॉम होम का यह कल्चर तब तक जारी रहेगा जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती। वर्क फ्रॉम होम के कल्चर ने ये साबित किया कि घरों से भी दफ्तर चलाया जा सकता है।

घर में क्लास

लॉकडाउन लगने के बाद देश में शिक्षा से जुड़े सभी संस्थानों को बंद कर दिया गया जिनमें से अधिकांश अभी भी बंद हैं। ऐसे में ऑनलइन शिक्षा की व्यवस्था की गई और तब जाकर शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौटी।

ऑडिट और मार्केटिंग की शीर्ष एजेंसी के पी एम जी और गूगल ने ‘भारत में ऑनलाइन शिक्षाः 2021′ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें 2016 से 2021 की अवधि के दौरान भारत में ऑनलाइन शिक्षा के कारोबार में आठ गुना की अभूतपूर्व वृद्धि आंकी गयी हैं l

2016 में ये कारोबार करीब 25 करोड़ डॉलर का था और 2021 में इसका मूल्य बढ़कर करीब दो अरब डॉलर हो जाएगा l

शिक्षा के पेड यूजरों की संख्या 2016 में करीब 16 लाख बताई गयी थी, 2021 में जिनके करीब एक करोड़ हो जाने की संभावना है l

मानव स्वभाव में बदलाव

कोरोना की वजह से जब लॉकडाउन लगा तो लोगों को यह एहसास हुआ कि समाज कितना जरुरी है।

मदद :- सब कुछ पाने की होड़ में लगे लोग इतने व्यस्त हो गए है कि उन्हें यह भी मालूम नहीं रहता कि उनके आसपास क्या हो रहा है। ऐसे वक्त में वे लोग भी मदद के लिए आगे आए जिन्हें समाज से कोई मतलब नहीं रहता था।

डर :- कोरोना की वजह से लोग इतने डर गए है कि वे अपने माता- पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए।

बचत :- जरुरी सामानों की दुकानों को छोड़ दिया जाये तो लॉकडाउन के दौरान लगभग सभी दुकानें बंद पड़ी थी। साथ ही लोगों के बाहर निकलने पर भी पाबन्दी थी।

लोग चाह कर भी घर से बाहर नहीं निकल पाए। लॉकडाउन के दौर में मॉल, सनेमाहॉल, रेस्टोरेंट जैसे सेवाएं बंद हो गई जिससे लोगों का पैसा बचने लगा।

कैशलैस ट्रांजैक्शन

पहले 21 डे लॉक डाउन पीरियड में 42 प्रतिशत भारतियों ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम का उपयोग किया। यूजर्स ने आवश्यक चीज़े खरीदने और मोबाइल रिचार्ज के लिए ज़्यादातर पेमेंट्स ऑनलाइन की। पेमेंट के लिए सबसे ज़यादा इस्तेमाल पे.टी.एम.और गूगल पे का किया गया।

इस दौरान 33 % यूजर्स ने पे.टी.एम., 14 % गूगल पे, 4 % फ़ोन पे, 10 % ऐमज़ॉन पे, 6 % भीम का उपयोग किया है। वहीं 33 % अन्य एप्प का उपयोग हुआl

कॉफ़ी से मिलती है चेहरे को प्राकृतिक चमक, ऐसे बनाएँ फेस मास्क

कॉफ़ी से मिलती है चेहरे को प्राकृतिक चमक, ऐसे बनाएँ फेस मास्क

कॉफी सबसे लोकप्रिय पेय पदार्थों में से एक है जो लोग खुद को ऊर्जा देने के लिए पीते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कॉफी आपकी त्वचा की सुंदरता को बढ़ा सकती है।

कॉस्मेटिक उद्योग में कॉफी भी सबसे लोकप्रिय घटक है। बाजार में ऐसे कई उत्पाद हैं जिनमें चेहरे की क्रीम, लोशन, स्क्रब, साबुन आदि में मुख्य रूप से कॉफी होती है।

कॉफी में पाए जाने वाले  क्लोरोजेनिक एसिड, कंडेंस्ड प्रोंटोसायनिडिन, क्विनिक एसिड और फ्यूरिक एसिड जैसे पॉलीफेनॉल्स त्वचा के लिए उपयोगी होते हैं।

यह त्वचा पर झुर्रियों की समस्या को भी कम करता है और महत्वपूर्ण रूप से कॉफी पैक चेहरे के रक्त प्रवाह में सुधार करती हैं। जिससे आपको खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा मिलती है।

क्लियरिंग

सबसे पहले चेहरे की सफाई करना आवश्यक है । यह अतिरिक्त तेल को हटाता है और त्वचा को साफ करता है। चेहरे को साफ करने के लिए कॉफी पाउडर और एलोवेरा का मिश्रण बनाएं।

इसके लिए एक कटोरी में एक बड़ा चम्मच कॉफी पाउडर और एलोवेरा जेल लें। इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं और पूरे चेहरे पर लगाएं। लगभग दो मिनट तक चेहरे की गोलाकार मालिश करें। फिर अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।

स्क्रबिंग

क्लीयरिंग के बाद स्क्रबिंग बहुत जरुरी है। स्क्रबिंग डेड स्किन को ख़त्म कर देती है और त्वचा को मुलायम बनाती है। इसके लिए आप चीनी का एक बड़ा चमच, कॉफी पाउडर और उसमें दो चम्मच नारियल का तेल डालें।

लगभग पांच से छह मिनट के लिए इस मिश्रण से गोलाकार मुद्रा में चेहरे को धीरे-धीरे स्क्रब करें। पांच मिनट के बाद, अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। नारियल का तेल चेहरे को एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र देता है।

फेस मास्क

चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक लाने के लिए प्राकृतिक उपचार का उपयोग करना अच्छा होता है। इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। फेस मास्क चेहरे को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके लिए आप कॉफी फेस मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं । कॉफी फेस मास्क बनाना बहुत आसान है। आइए जानें कैसे बनाएं कॉफी का फेस :-

कॉफी और शहद का फेस मास्क

एक कटोरी में एक चम्मच कॉफी पाउडर और एक चम्मच शहद मिलाएं। इस मास्क को चेहरे पर लगाएं और कुछ देर मसाज करें।

फिर अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। शहद त्वचा को एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र देता है और कॉफी चेहरे को चमक प्रदान करती है।

कॉफी और दूध का फेस मास्क

एक चम्मच कॉफी पाउडर और एक चम्मच कच्चे दूध को मिलाकर फेस मास्क बनाएं। इस मास्क को 20 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं। फिर अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।

दूध के पोषक तत्व आपके चेहरे की प्राकृतिक चमक को बढ़ाने का काम करते हैं और कॉफी पाउडर आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है।

कॉफी मास्क का उपयोग करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • यदि कॉफ़ी फेस मास्क मिश्रण उपयोग के बाद बचता है, तो उसे दोबारा उपयोग न करें क्योंकि यह बैक्टीरिया पैदा करता है। जिससे त्वचा को नुकसान हो सकता है।
  • सूखे फेसपैक को हटाते समय चेहरे को रगड़ें नहीं। इससे त्वचा पर लाल घाव हो सकते हैं जिससे चेहरे पर मुंहासे भी हो सकते हैं।
  • यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो डॉक्टर से परामर्श करने के बाद कॉफ़ी फेस मास्क का इस्तेमाल करें।
  • यदि आप पहली बार कॉफी फेस पैक का उपयोग कर रहे हैं, तो पहले हाथ पर पैक का प्रयास करें। अगर आपको त्वचा पर जलन महसूस हो तो इस उपाय का इस्तेमाल न करें।
  • कॉफी फेस मास्क के कारण खुजली, चिढ़ या एलर्जी होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

त्वचा को कॉफी मास्क के लाभ

कॉफी मास्क त्वचा के रंग और बनावट में सुधार करने में मदद करता है। कॉफी में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह चेहरे पर झुर्रियों की उपस्थिति को कम करता है और चेहरे की सुंदरता बढ़ाने में मदद करता है।

रक्त प्रवाह में सुधार करता है

कॉफी पाउडर चेहरे पर स्क्रब की तरह काम करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन सबसे छोटी रक्त वाहिकाओं के कार्य को बेहतर बनाने का काम करता है। यह त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है।

त्वचा मुलायम होती है

कॉफी फेस मास्क चेहरे पर चमक के साथ-साथ त्वचा को मुलायम भी बनाता है। कॉफी में मौजूद पोषक तत्व आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाते हैं।

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सुंदर त्वचा के लिए उपाय

जानें दवाई के बिना उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के उपाय

उच्च रक्तचाप की समस्या आज के समय में बेहद आम हो गई है। सिर्फ बढ़ती उम्र में ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग को भी हाई बीपी या लो बीपी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

उच्च रक्तचाप कई गंभीर समस्या का कारण बनता है। यह दिल पर गंभीर प्रभाव डालता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में वैसे तो दवाएं फायदेमंद हैं परन्तु कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिससे आप उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण पा सकते  हैं ।

उच्च रक्तचाप क्या है?

उच्च रक्तचाप जिसे हाइपरटेंशन भी कहते है, जब धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है तो दबाव की इस वृद्धि के कारण धमनियों में खून का प्रभाव बनाए रखने के लिए दिल को समान्य से अधिक काम करने की जरूरत पड़ती है।

रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं:- सिस्टोलिक और डायस्टोलिक, जो इस बात पर निर्भर करती है कि हृदय की मांसपेशियों में संकुचन (सिस्टोल) हो रहा है या धड़कनों के बीच में तनाव मुक्तता (डायस्टोल) हो रही है।

आराम के समय पर सामान्य रक्तचाप 100-140 mmHg सिस्टोलिक (उच्चतम-रीडिंग) और 60-90 mmHg डायस्टोलिक (निचली-रीडिंग) की सीमा के भीतर होता है। उच्च रक्तचाप तब होता है यदि यह 90/140 mmHg पर या इसके ऊपर लगातार बना रहता है।

कितना होना चाहिए रक्‍तचाप

आमतौर पर आपका ब्‍लड प्रेशर 120 से कम और 80 (120/80) से ज्‍यादा होना चाहिए। अगर आपका ब्‍लड प्रेशर इतना है तो घबराने की जरूरत नहीं है। अगर इससे ज्‍यादा तो आपको तुरंत डॉक्‍टर की सलाह लेनी चाहिए, क्‍योंकि उच्‍च रक्‍तचाप हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाता है।

लक्षण

हाई ब्‍लड प्रेशर के लक्षणों में सिरदर्द, चक्‍कर आना और दिल की धड़कने बढ़ जाना आदि शामिल हैं। हाई बीपी के रोगियों को अपने खाने में बहुत ही हल्‍का या फिर नाम मात्र का नमक डालना चाहिए।

आइये जानते हैं उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के कुछ उपाय

आहार

यदि आप दवा के बिना अपने रक्तचाप को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो अच्छे आहार का पालन करें। आहार में फल, सब्जियां, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद और नमक का सेवन कम करें।

मांस कम खाएं

हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए बोनलेस चिकन, मछली, रेड मीट, समुद्री मछली से बचना फायदेमंद है। आहार में ताजे फल और सब्जियों का सेवन अधिक फायदेमंद होता है।

रोज व्‍यायाम करें

रोजाना व्‍यायाम, खासतौर पर कार्डियो करने से ब्‍लड प्रेशर हमेशा नियंत्रित रहता है। आपको रोजाना दौड़ लगानी चाहिए। व्यायाम आपको कई बीमारियों से बचने में मदद करेगा।

आपको शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की आवश्यकता है। उच्च रक्तचाप वाले रोगियों के लिए सप्ताह में कम से कम 5 दिन आधा घंटा टहलना बहुत ही आवश्यक है।

वजन कम करें

यदि आप रक्तचाप कम करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आप अपने वजन को कम करें। हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अधिक वज़न बहुत तकलीफदेह होता है।

नमक का सेवन कम करें

आहार में नमक की मात्रा बढ़ाना उच्च रक्तचाप में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है इसलिए ऊपर से नमक वाले नमकीन भोजन, नमकीन खाद्य पदार्थ खाने से बचें।

आपको पैकेट वाले फूड जिनमें ढेर सारा नमक होता है, उससे दूर रहना चाहिए, क्‍योंकि इनमें ढेर सारा नमक रहता है। नमक आपका बीपी बढ़ा सकता है। इसके बजाय पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं जैसे:- केला, कद्दू के बीज।

शराब और धूम्रपान से बचें

शराब आपके ब्‍लड प्रेशर को तेजी से बढ़ाती है इसलिए शराब पीने वालों को हार्ट स्‍ट्रोक ज्‍यादा होता है। जिन लोंगो को हाई बीपी है उन्‍हें ना तो शराब पीनी चाहिए और ना ही धूम्रपान करना चाहिये।

डार्क चॉकलेट खाएं

आपको चॉकलेट खाने के लिए कहने की बात सुनकर काफी अजीब लग रहा होगा, लेकिन 2010 के एक अध्ययन में पाया गया कि डार्क चॉकलेट उच्च रक्तचाप को कम करने में बहुत फायदेमंद है।

डार्क चॉकलेट को कोकोट पेड़ के बीज से बनाया जाता है, जिसमें ढेर सारे एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं। इसमें फ्लेवानॉल होता है जो कि ब्‍लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है।

क्या है रहस्य दुनिया भर में पाए जाने वाले मोनोलिथ का ?

दुनिया में कई जगहों पर धातु के चमकीले मोनोलिथ (Monolith) देखे जा रहे हैं जिसके बारे में किसी को नहीं पता है कि वे कैसे आते हैं और कैसे गायब हो जाते हैं।

यह रहस्यमय धातु “मोनोलिथ” जो पश्चिमी संयुक्त राज्य के रेगिस्तान में पाए गए है, उन्हें देखकर लोग समझ रहे हैं कि कहीं एलियंस या यूएफओ (unidentified flying object) तो धरती पर नहीं आए।

मोनोलिथ कोई नया शब्द नहीं है, लेकिन पिछले एक महीने से यह शब्द सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। हालांकि, कुछ समय के लिए चमकदार मोनोलिथ पाए गए हैं। रोमानिया, अमेरिका, ब्रिटेन और बेल्जियम जैसे कई देशों में इस तरह के रहस्यमय चमक वाले आंकड़े लोगों को हैरान कर रहे हैं।

क्या है मोनोलिथ

पहाड़ या चट्टान का एक बड़ा टुकड़ा या फिर एक इमारत के एक विशाल पत्थर या चट्टान को मोनोलिथ कहा जाता है। पुराने समय में ये किसी खास जगह पर रखे जाते थे।

इतिहासकारों को इस तरह के पाषाणयुगीन पत्थर बहुत मिले हैं, लेकिन आजकल जो पत्थर दिख रहे हैं वे धातु के और चमकीले हैं।

पहली बार अमेरिका में देखा गया

सबसे पिछ्ले यह अमेरिका के यूटा रेगिस्तान में 18 नवंबर 2020 एक हेलिकॉप्टर चालक दल ने देखा था। हेलीकॉप्टर चालक को दूर से देखकर ये एक अजीब मूर्ति सा लगा।

उसके कुछ दिन बाद इसी तरह के मोनोलिथ को रोमानिया की पहाड़ों में देखा गया और फिर आइल ऑफ व्हाइट में भी देखा गया।

ये चमकदार स्तंभ कई स्थानों पर पाए गए हैं । हैरान करने वाली बात तो यह है कि कुछ समय के बाद ये मोनोलिथ गायब हो जाते हैं।

इस बीच पेट्रॉडवा डेकीयन किले के पास देखा गया मोनोलिथ गायब हो गया। इसी तरह का एक नया मोनोलिथ बाद में दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक पहाड़ी क्षेत्र में पाया गया था और यह अचानक गायब हो गया।

इन सभी विवादों के बाद न्य मेक्सिको के एक आर्ट कलेक्टिव The Most Famous Artist ने दावा किया है कि यूटा और कैलिफोर्निया में दिखे मोनोलिथ उसने लगाए थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसने अपने इंस्टाग्राम पेज पर 3 तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें से 2 उनके बनाए खंबे की हैं और एक कैलिफोर्निया में मिले खंबे की है। आर्ट कलेक्टिव The Most Famous Artist के वेबसाइट से पता चलता है कि वो इस खंबे को 45 हजार डॉलर में बेचे जा रहे हैं।

 

जानिए नई शिक्षा नीति और उससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलाव के बारे में

नई शिक्षा नीति 2020 :- भारत की शिक्षा नीति को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। सन 1986 में जारी हुई शिक्षा नीति के बाद भारत की शिक्षा नीति में यह पहला नया परिवर्तन है। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।

नया शिक्षा आयोग

केंद्रीय जनशक्ति विकास मंत्रालय और मानव संसाधन का नाम एक बार फिर बदल दिया गया है। इसका नाम बदलकर “शिक्षा मंत्रालय” कर दिया गया है।

यह देश में स्कूल और उच्च शिक्षा प्रणालियों में परिवर्तनकारी सुधार लाएगा। यह 21 वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है और 34 वर्षीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 की जगह लेगी।

इस नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल स्तर से लेकर ग्रेजुएशन तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं । साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में नई शिक्षा नीति का विषय शामिल था।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

1986 में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार की गई थी और इसे 1992 में संशोधित किया गया था। इस अवधि के दौरान हमारे देश में समाज की अर्थव्यवस्था और बड़े पैमाने पर दुनिया सहित कई बदलाव हुए हैं, इसलिए 21 वीं सदी में लोगों की जरूरतों और देश के अनुसार शिक्षा क्षेत्र को बदलना या उसमें बदलाव करना आवश्यक है।

काफी गहन परामर्श के बाद, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तैयार की गई है और इसमें 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक, 6000 ULB, 676 जिलों से लगभग 2 लाख सुझाव शामिल हैं।

नई शिक्षा नीति में कई बड़े बदलाव

स्कूलों में 10 +2 फार्मेट के स्थान पर 5 +3+3+4 फार्मेट को शामिल किया जाएगा, जोकि इस प्रकार होगा ।

  • पहले चरण में यानी पहले पांच साल में तीन साल की प्री-प्राइमरी और क्लास I से II की शिक्षा दी जाएगी।
  • द्वितीय चरण कक्षा III से V तक की शिक्षा होगी।
  • तीसरे चरण में छठी से आठवीं तक पढ़ाया जाएगा।
  • चौथे चरण में शेष चार साल नौवीं से बारहवीं तक की शिक्षा होगी।

परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। परीक्षा सेमेस्टर पैटर्न में होगी, साथ ही कॉलेज प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा लेने का विचार होगा।

NCERT द्वारा तय किया जाने वाला पाठ्यक्रम

NCERT पाठ्यक्रम तय करेगा। शिक्षा प्रणाली में पहली बार पूर्व-प्राथमिक विद्यालय के लिए पाठ्यक्रम तय किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम देश के सभी प्री-प्राइमरी स्कूलों पर लागू होगा।

तीसरी तक पढ़ने में सक्षम छात्रों पर अधिक जोर दिया जाएगा। पढ़ने-लिखने और जोड़-घटाव (संख्यात्मक ज्ञान) की बुनियादी योग्यता पर ज़ोर दिया जाएगा । नई शिक्षा नीति के अनुसार, पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

साथ ही, अगर नौवीं से बारहवीं कक्षा में शिक्षा के लिए एक भी शाखा नहीं है, तो छात्रों के पास विभिन्न विषयों को चुनने का अवसर होगा, उदाहरण के लिए विज्ञान विषयों का अध्ययन करते समय संगीत सीख सकता है।

छात्र विज्ञान, वाणिज्य, कला के साथ-साथ संगीत, खेल, लोक कला को अपने अध्ययन के विषयों के रूप में चुन सकेंगे।

छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे । इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी। इसके अलावा म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा।

स्कूल रिपोर्ट कार्ड बदल जाएगा

पहली से 12 वीं कक्षा में अध्ययन करते समय, छात्र के रिपोर्ट कार्ड पर अंक, ग्रेड और शिक्षक की टिप्पणी का उल्लेख किया जाता था।

अब इस रिपोर्ट कार्ड में छात्रों, सहपाठियों और शिक्षकों की टिप्पणियां भी होंगी। शिक्षा के अलावा यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि छात्र ने क्या सीखा है। जब कोई छात्र बारहवीं कक्षा में स्कूल से बाहर जाएगा, तो उसे बारह साल का रिपोर्ट कार्ड दिया जाएगा।

उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव

कॉलेज की शिक्षा में, कला, वाणिज्य और विज्ञान नाम की तीन शाखाएँ प्रवेश की प्रक्रिया में हैं लेकिन नए मसौदे के अनुसार छात्र कला और विज्ञान के कुछ विषयों को चुनकर डिग्री हासिल कर सकेंगे।

इसमें विज्ञान, कला, खेल, व्यावसायिक पाठ्यक्रम जैसे विकल्प होंगे। यह विकल्प उन छात्रों के लिए पेश किया जाएगा जो कई विषयों में रुचि रखते हैं उदाहरण के लिए एक इंजीनियरिंग छात्र कॉलेज में पढ़ते हुए संगीत सीख सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण

नयी शिक्षा नीति 2020 का सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम लागू होना। अभी यदि कोई छात्र तीन साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे की पढाई नहीं कर पाता है तो उसको कुछ भी हासिल नहीं होता है ।

लेकिन अब मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद पढाई छोड़ने पर सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढाई छोड़ने के बाद डिग्री मिल जाएगी । इससे देश में ड्राप आउट रेश्यो कम होगा ।

जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे, लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं । उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी।

 

‘कीवी फल’ बढ़ाता है इम्यून सिस्टम, जानिए इसके जबरदस्त फायदों के बारे में

‘कीवी फल’ बढ़ाता है इम्यून सिस्टम, जानिए इसके जबरदस्त फायदों के बारे में

आहार में फलों को शामिल करना बहुत जरूरी होता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से एक या दो फल खाने चाहिए। सेहत से जुड़ी कई समस्याओं के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में फल खाना फायदेमंद होता है।

यह हमें विभिन्न बीमारियों से भी बचाता है इन्हीं फलों में से एक है “कीवी”। इस फल से स्वास्थ्य पोषक तत्वों की भारी मात्रा होती है। डेंगू से संक्रमित मरीजों को कीवी खाने की सलाह दी जाती है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि डेंगू रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या को बहुत कम कर देता है। इसके औषधीय गुण रक्त में प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मदद करते हैं।

डॉक्टर भी आहार में कीवी फल को शामिल करने की सलाह देते हैं। कीवी फल का सेवन न केवल स्वास्थ्य बल्कि आपकी त्वचा को पोषक तत्व प्रदान करता है। आइए जानें खट्टे-मीठे कीवी फल खाने के स्वास्थ्य लाभ।

आँखों की रोशनी बढ़ाता है

कीवी फल में ल्यूटिन नामक पोषक तत्व होता है। यह कारक नेत्र स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। रेटिना की सुरक्षा के अलावा, ल्यूटिन नेत्र रोगों से बचाता है।

आँखों की बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए कीवी को आहार में शामिल करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार कीवी का सेवन करना फायदेमंद होता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है

कीवी के पोषक तत्व आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करते हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें विटामिन सी से भरपूर होता है।

ये तत्व प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और हानिकारक वायरस से लड़ने की शरीर की क्षमता को बढ़ाने के लिए काम करते हैं।

इसके अलावा इस में विटामिन ई, कैरोटीनॉइड, पॉलीफेनोल्स और फाइबर अधिक होता है। यह हमें कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

डायबिटीज के खतरे को कम करता है

मधुमेह की समस्या को रोकने के लिए कीवी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें मधुमेह विरोधी गुण होते हैं। इसमें ऐसे तत्व भी हैं जिनका उपयोग ब्लड शुगर को कम करने के लिए किया जा सकता है।

डायबिटीज से बचाव के लिए अपने आहार में कीवी को शामिल करें। कम ग्लाइसेमिक सूचकांक के कारण कीवी रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) में तेजी से वृद्धि नहीं करता है। इसकी कुल खपत रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करती है।

कैंसर

कैंसर हर साल हजारों लोगों को मारता है। यह एक गंभीर बीमारी है। अपने खाने की आदतों पर पूरा ध्यान देना महत्वपूर्ण है, ताकि हम ऐसी घातक बीमारियों से ग्रसित न हों।

कीवी फलों का सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद करता है क्योंकि इसमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं। सप्ताह में तीन से चार बार कीवी फल खाने से निश्चित रूप से कैंसर से बचाव होगा।

मुहांसों की समस्या से छुटकारा

यदि आप मुंहासों की समस्या से परेशान हैं तो फिर कीवी फल जरूर खाएं, ऐसा इसलिए क्योंकि यह विटामिन सी से भरपूर होता है।

विटामिन सी त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ऐसा इसलिए है क्योंकि यह त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है।

कीवी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट चेहरे पर मुंहासों की समस्या को भी कम करता है और त्वचा को एक प्राकृतिक चमक देता है।

बालों की समस्या से छुटकारा

बालों का झड़ना, डैंड्रफ जैसी समस्याएं सिर्फ महिलाओं में ही नहीं बल्कि पुरुषों में भी देखी जाती हैं। बालों से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने के लिए कीवी फल खाना फायदेमंद है, क्योंकि इसमें विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘बी’ शामिल हैं।

ये पोषक तत्व बालों की सेहत के लिए अच्छे होते हैं। ये तत्व रूसी से बालों के झड़ने की समस्या को कम करने में भी मदद करते हैं।

रक्तचाप की समस्या नियंत्रण में रहती है

अपने रक्तचाप को नियंत्रण में रखने से आपको कई प्रकार के हृदय रोग से बचाने में मदद मिल सकती है। यह स्ट्रोक के जोखिम को भी कम करता है।

इसमें बायोएक्टिव नामक एक यौगिक होता है। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में बहुत मदद करता है। उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों को नियमित रूप से सुबह कीवी फल का सेवन करना चाहिए।

कीवी फल भी आपके वजन को नियंत्रण में रखता है। थकान और लगातार थकान के बाद वजन कम होगा क्योंकि इसमें बहुत सारा फाइबर होता है।