सर्दियों में गुड़ खाने से होते हैं ये गजब के फायदे

सर्दी के दिनों में या सर्दी होने पर गुड़ का प्रयोग आपके लिए अमृत के समान होता है। इसकी तासीर गर्म होने के कारण यह सर्दी, जुकाम और खास तौर से कफ से आपको राहत देने में मदद करता है।

ठंड के मौसम में शरीर के लिए इसके कई फायदे हैं इसीलिए डॉक्टर भी गुड़ का सेवन करने की सलाह देते हैं। इसके लिए दूध या चाय में गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है, और आप इसका काढ़ा भी बनाकर ले सकते हैं।

इसके अलावा, क्यूंकि गुड़ गर्म होता है, इसलिए सर्दियों में इसका सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। तो आइये जानते हैं सर्दियों में गुड़ खाने के इन कमाल के फायदों के बारे में :-

ठंड से बचाए

हर साल हजारों लोग भीषण ठंड के कारण अपनी जान गंवा देते हैं इसलिए सर्दियों में विशेषकर गुड़ का सेवन करना बहुत जरूरी है। ठंड के मौसम में गुड़ का सेवन शरीर को गर्मी देता है और ठंड से बचाता है।

महामारी को रोकने में भी गुड़ फायदेमंद है। ठंड के दिनों में शरीर में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। जो उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का कारण बनता है।

जिन लोगों की इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है उन्हें गुड़ से बहुत फायदा होता है। गुड़ में कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है जो थकान दूर करने में मदद करता है।

गले और फेफड़ों के संक्रमण को रोकने के लिए गुड़ का सेवन करना भी फायदेमंद होता है। जिन लोगों को मधुमेह है, वे चीनी के बजाय गुड़ का सेवन कर सकते हैं । गुड़ के सेवन से पाचन में भी सुधार होता है।

श्वसन क्रिया को बेहतर बनाता है।

यह सुनकर आपको आश्चर्य हो सकता है, लेकिन कई वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि गुड़ श्वसन क्रिया को बेहतर बनाता है।

गुड़ के सेवन से श्वास प्रणाली मजबूत होती है। गुड़ को क्लींजिंग एजेंट भी कहा जाता है क्योंकि यह श्वसन प्रणाली, फेफड़े, अन्नप्रणाली, पेट और आंतों को साफ करता है। गुड़ का सेवन भी संचार प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाता है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है

जो लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं उन्हें सर्दियों में गुड़ का सेवन करना चाहिए। गुड़ के सोडियम और पोटेशियम गुण रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं।

जो लोग दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद नियमित रूप से गुड़ का सेवन करना चाहिए। गुड़ शरीर में एसिड की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। तो रक्तचाप को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

जुकाम और खांसी के लिए रामबाण है

अत्यधिक ठंड और फ्लू के कारण सर्दियों के दौरान प्रकोप बढ़ जाता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी की जानकारी के अनुसार गुड़ सर्दी और खांसी से राहत देता है।

गुड़ का सेवन शरीर को गर्म करने में मदद करता है, भोजन का पाचन जल्दी करता है और शरीर को आर्यन प्राप्त करने में मदद करता है। गले की खराश के लिए गुड़ बहुत उपयोगी है। गुड़ और अदरक को एक साथ खाने से फर्क पड़ सकता है।

अगर आपको जुकाम है, तो सिर्फ गुड़ न खाएं, इसे चाय या लड्डू में गुड़ के साथ खाएं। गुड़ शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा एंटी-एलर्जी गुणों के कारण भी अस्थमा के रोगियों के लिए गुड़ फायदेमंद है।

हड्डी और जोड़ों के दर्द से राहत

अगर आपको जोड़ो, हड्डियों में दर्द या सूजन की समस्या रहती है तो गुड़ इसमें भी आपको लाभ दे सकता है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द वाले लोगों में जुकाम होने की संभावना अधिक होती है।

अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम युक्त आहार लें। शरीर को कैल्शियम की पर्याप्त आपूर्ति से हड्डी संबंधी रोग नहीं होंगे। इसके लिए गुड़ और जीरे का सेवन करें।

इसमें मौजूद पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करेंगे। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी की जानकारी के अनुसार जीरा और गुड़ में हड्डियों के लिए पोषक तत्व होते हैं इसीलिए बुजुर्गों और एथलीटों को जीरे और गुड़ का सेवन करना चाहिए।

स्किन के दाग-धब्बों से दिलाता है राहत

स्किन से दाग-धब्बों को दूर करने के लिए गुण का इस्तेमाल किया जा सकता है इसके लिए एक चम्मच गुड़ पाउडर लें और उसमें 1 चम्मच टमाटर का रस, नींबू का रस और हल्दी की एक चुटकी मिक्स कर लें । इसे अपने चेहरे पर लगाएं । बेहतर परिणाम के लिए हफ्ते में दो बार लगाएं ।

अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम, जानें कुछ खास बातें

दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम अहमदाबाद शहर के मोटेरा इलाके में बनाया गया है। इसका नाम सरदार पटेल गुजरात स्टेडियम रखा गया है।

1 लाख 10 हजार दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड से भी बड़ा है। यह पूरा स्टेस्डियम 63 एकड़ जमीन पर बनाया गया है।

अहमदाबाद में मोटेरा स्‍टेडियम को वर्ष 1982 में बनाया गया था जिसमें 49,000 दर्शकों की बैठने की क्षमता के थी। वर्ष 2006 में इसकी मरम्‍मत की गई थी।

साबरमती नदी के तट पर बना यह स्‍टेडियम 50 एकड़ इलाके में फैला हुआ है। इसका विस्तार 2015 और 2020 के बीच किया गया था। 24 फरवरी, 2020 को इसका उद्घाटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा किया गया था।

आइये जानतें हैं मोटेरा स्‍टेडियम के बारे में कुछ खास बातें :-

 

  • मोटेरा स्टेडियम जो 63 एकड़ में फैला है, इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं और 76 कॉरपोरेट बॉक्स हैं, जिसमें प्रत्येक की बैठने की क्षमता 25 है।
  • एक ओलंपिक आकार का स्विमिंग पूल और चार ड्रेसिंग रूम, एक पार्किंग क्षेत्र जो लगभग 3000 कारों और 10,000 दोपहिया वाहनों को समायोजित कर सकता है।
  • स्टेडियम में मुख्‍य ग्राउंड के अलावा, स्‍टेडियम के अंदर दो अन्‍य छोटे ग्राउंड भी हैं।
  • स्टेडियम का स्ट्रक्चर ऐसा है कि जब भी कोई खिलाड़ी बाउंड्री मारे तो स्टेडियम में बैठने वाला हर क्रिकेट प्रेमी उस बाउंड्री को देख पाएगा।
  • स्टेडियम में 55 कमरों, व्यायामशाला, इनडोर अभ्यास पिचों और फूड कोर्ट के साथ एक क्लब हाउस भी है। मोटेरा स्टेडियम में एलईडी लाइट्स का प्रयोग किया गया है।
  • स्टेडियम में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं ।
  • इस स्‍टेडियम का आर्किटेक्‍ट पॉपुलस ने तैयार किया है और एलऐंडटी ने इसे बनाया है। मोटेरा स्‍टेडियम में बनाए गए अत्‍याधुनिक ड्रेसिंग रूम खिलाड़‍ियों को एक अलग ही अहसास देंगे। हर स्‍टैंड के अंदर एक फूड कोर्ट और हॉस्पिटलटी एरिया बनाया गया है।
  • इसी मैदान पर सुनील गावस्‍कर ने टेस्‍ट मैचों में 10 हजार रन बनाए थे और इसी मैदान पर कपिल देव ने सर रिचर्ड हेडली के 431 विकेट के रेकॉर्ड को तोड़ा था। मोटेरा मैदान पर ही सचिन ने अपना टेस्‍ट का पहला दोहरा शतक लगाया था।

 

बारिश के बाद मिट्टी से सौंधी-सौंधी खुशबू क्यों आती है ?

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बारिश अधिकतर सबको अच्छी लगती है और जब बारिश की बूंदें सूखी धरती पर पड़ती हैं तो एक अलग प्रकार सौंधी सी खुशबू सबका मन मोह लेती है लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि बारिश के बाद मिट्टी से खुशबू क्यों आती है, इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?

तो आज हम बताने जा रहें कि मिट्टी से ये खुशबू क्यों आती है:-

दरअसल बारिश के बाद जो सुगंध हम लोग महसूस करते हैं उसे “पेट्रिकोर” कहा जाता है। पेट्रिकोर शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1964 में मौसम का अध्ययन कर रहे दो ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने किया था।

पेट्रिकोर शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। पेट्रा और ऐकोर। जिसमें से पेट्रा का अर्थ स्टोन यानी रॉक और ऐकोर का मतलब है लिक्विड फ्रॉम द गॉड।

मिट्टी से आने वाली इस खुसबू के पीछे कई कारण हो सकते हैं,जिनमें से एक कारण है वायुमंडल में ओजोन गैस की उपस्थिति है ।

जब कभी आंधी आती है, तो आंधी के दौरान वायुमंडल में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के अणु विभाजित हो जाते हैं, और वे फिर से जुड़कर नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाते हैं।

यही ओज़ोन गैस वायुमंडल में उपस्थित रहती है और बारिश के समय इसकी कुछ मात्रा पानी के साथ मिल जाती है और एक खास तरह की खुशबू पैदा करती है। यह खुशबू थोड़ी तीखी होती है, जिसमें कि क्लोरीन की बेहद गहरी सुगंध पाई जाती है।

दूसरा कारण है मिट्टी में एक खास तरह के बैक्टीरिया का होना। इस बैक्टीरिया का नाम है “actinomycetes” ।

ये बैक्टीरिया मिट्टी में तब ग्रो करते हैं जब मिट्टी गीली और नमी से भरपूर होती है । यह मिट्टी की ऊपरी सतह पर कुछ छिद्र छोड़ देते हैं और जैसे ही बारिश की बुँदे छिद्रयुक्त मिट्टी की सतह पर गिरती है तो वह हवा के छोटे-छोटे बुलबुलों में बदल जाती है।

ये बुलबुलें फूटने से पहले ऊपर की ओर बढ़ते हैं और हवा में बहुत छोटे-छोटे कणों को बाहर निकाल देते हैं जिन्हें “एरोसोल” कहा जाता है। यही एरोसोल इस सौंधी-सौंधी खुशबू को बिखेरते हैं।

पेड़- पौधे

मिट्टी से आने वाली खुशबू का एक अन्य कारण पेड़ पौधों से निकलने वाला तेल भी है। पेड़-पौधे लगातार तेल स्त्रावित करते रहते हैं और जब बारिश होती है तो यह तेल तेजी से बारिश की बूंदों के साथ मिल कर आसपास के वातावरण में फैल जाता है।

फिर मिट्टी, बारिश के पानी के साथ मिलकर कुछ रिएक्शन करती है जिससे खास तरह की खुशबू निकलती है जो कि हम सभी के मन को खुश कर देती है और ताजगी से भर देती है।

वजन कम करने के लिए बहुत फायदेमंद है नींबू जानें कैसे करे सेवन

वजन कम करने के लिए बहुत फायदेमंद है नींबू जानें कैसे करें सेवन

नींबू एक रसदार और खट्टा फल है। इसके शरीर के लिए कई फायदे हैं। इसमें बड़ी मात्रा में विटामिन C होता है। हमारे दैनिक आहार में नींबू की एक या दो बूंदें भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

नींबू पाचन के लिए बहुत अच्छा है इसका रस गर्मियों में लिया जाने वाला सबसे अच्छा पेय है। नींबू न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है बल्कि वजन कम करने के लिए भी बहुत अच्छा है।

आप अपने दैनिक आहार में नींबू को कई तरह से शामिल कर सकते हैं। वजन कम करने के लिए कई तरह के हेल्दी ड्रिंक्स आप पीते होंगे, जैसे नींबू-पानी, शहद पानी, गर्म पानी आदि।

नींबू से बने पेय पदार्थ पीने से वजन बहुत जल्दी कम होता है। इसमें कई ऐसे गुण मौजदू होते हैं, जो वजन कम करने के साथ ही सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं से भी बचाते हैं।

नींबू में मौजूद पोषक तत्व

इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, अम्लीय तत्व होता है, जिसके कारण वजन तेजी से कम होता है। ये सभी पोषक तत्व शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट को कम करते हैं।

नींबू पानी

नींबू पानी के कई फायदे हैं। यह न केवल शरीर को डिटॉक्स करता है बल्कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट पाचन से जुड़ी कई बीमारियों का इलाज करते हैं। बेहतर त्वचा और बेहतर पाचन के लिए सुबह गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर पिएं।

नींबू की चाय

वजन कम करने के लिए नींबू की चाय भी बहुत फायदेमंद है। एक कप चाय में 2-3 बूंद नींबू का रस पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

सलाद में नींबू का रस

नींबू के रस की सही मात्रा को अपने सलाद में शामिल करें। यह न केवल आपके सलाद को स्वादिष्ट और मसालेदार बना देगा, बल्कि आपको तेजी से वजन कम करने में भी मदद करेगा।

गर्म पानी के साथ नींबू

यदि आप कुछ ही दिनों में पेट की चर्बी और वजन कम करने का सोच रहे हैं, तो नींबू के रस को एक गिलास गर्म  पानी में मिलाकर पिएं।

वजन कम करने के लिए इससे अच्छा कोई और विकल्प नहीं है। गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर डिटॉक्स होता है।

शरीर का फैट तेजी से बर्न होता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इससे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है, जिससे शरीर में मौजूद फैट बर्न होने की प्रक्रिया में आ जाता है।

भुनी हुई सब्जी में नींबू का रस

सब्जियां पोषक तत्वों से भरी होती हैं और इसमें थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर आपकी सब्जियों को और भी  स्वादिष्ट बना सकते हैं । सब्जियों में नींबू का रस वजन घटाने और आपके स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए ये बहुत फायदेमंद है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर कहाँ होना चाहिए ? जानें कुछ महत्वपूर्ण नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर कहाँ होना चाहिए? जाने कुछ नियम

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले ईश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। प्रत्येक घर में भगवान के मंदिर की अपनी एक विशेष जगह होती है।

सभी घर के मंदिर को अपनी श्रद्धा और भक्तिभाव से सजाते हैं, लेकिन आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे वास्तु शास्त्र के मुताबिक पूजा घर कहाँ होना चाहिए, और कौन से नियम का पालन करना चाहिए ।

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर कहाँ होना चाहिए:

वास्तु शास्त्र के अनुसार  नॉर्थ-ईस्ट दिशा का स्वामी बृहस्पति होता है। इसे ईशान कोण भी कहा जाता है। ईशान यानी ईश्वर या भगवान।

इसी वजह से यह भगवान या बृहस्पति की दिशा कहलाता है। माना जाता है कि मंदिर इसी दिशा में रखना चाहिए। इसके अलावा पृथ्वी का झुकाव उत्तर-पूर्व दिशा में भी है और धरती उत्तर-पूर्व के शुरुआती बिंदु के साथ घूमती है।

उदाहरण के लिए यह कॉर्नर रेल के इंजन की तरह है जो पूरी रेलगाड़ी को खींचता है। घर के इस एरिया में मंदिर होना भी कुछ ऐसा ही है। यह पूरे घर की ऊर्जा को खुद की ओर खींचकर उसे आगे ले जाता है।

पूजा के समय व्यक्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए

पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा ( East or North Direction ) में ही होना चाहिए। इस दिशा में मुख करके पूजा करने से पूजा का फल उत्तम तथा शत-प्रतिशत प्राप्त होता है।

पूजा स्थान से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बातें

  • पूजा घर के पूर्व या पश्चिम दिशा में देवताओं की मूर्तियां होनी चाहिए।
  • मूर्तियों का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।
  • देवताओं की दृष्टि एक-दूसरे पर नहीं पड़नी चाहिए।
  • पूजा घर के खिड़की व दरवाजे पश्चिम दिशा में न होकर उत्तर या पूर्व दिशा में होने चाहिए।
  • पूजा घर के दरवाजे के सामने देवता की मूर्ति रखनी चाहिए।
  • पूजा घर में बनाया गया दरवाजा लकड़ी का नहीं होना चाहिए।
  • घर के पूजा घर में गुंबज, कलश इत्यादि नहीं बनाने चाहिए।
  • वास्तु के अनुसार जिस जगह भगवान का वास रहता है, उस दिशा में शौचालय, स्टोर इत्यादि नहीं बनाए जाने चाहिए।
  • पूजा घर के ऊपर या नीचे भी शौचालय नहीं बनाना चाहिए।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार बेडरूम में पूजा घर नहीं बनाना चाहिए।
  • पूजा घर के लिए प्राय: हल्के पीले रंग को शुभ माना जाता है, अतः दीवारों पर हल्का पीला रंग किया जा सकता है।
  • फर्श हल्के पीले या सफेद रंग के पत्थर का होना चाहिए। इन कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर पूजा घर बनाया जाना चाहिए। जो हमें सुख-समृ‍द्धि के साथ-साथ हमारे जीवन को खुशहाल और हमें हर तरह से संपन्न बनाते है।

जानिए फेस स्टीमिंग के फायदे, चुटकियों में पाएं चमकदार त्वचा

जानिए फेस स्टीमिंग के फायदे, चुटकियों में पाएं चमकदार त्वचा

चेहरे की त्वचा को साफ और सुंदर बनाए रखने के लिए त्वचा के छिद्रों को साफ करना बहुत जरूरी होता है, दरअसल चेहरे को भाप देने से रोम या छिद्र खुल जाते है, साथ ही चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा हो जाता है।

फेस स्टीमिंग करने से आपकी त्वचा साफ और चमकदार हो जाती है। आईए आपको बताते हैं फेस स्टीमिंग के क्या फायदे हैं और कैसे घर पर आप आसानी से इसे ले सकते हैं।

स्टीमिंग के फायदे

• स्टीमिंग त्वचा के रोमछिद्रों को खोलने में मदद करती है और स्किन को साफ करती है।
• चेहरे पर मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया भी मिट जाते हैं।
• ब्लैकहेड्स को आसानी से हटाने में मदद करती है।
• चेहरे के पोर्स में छुपी गंदगी भी बड़ी आसानी से निकल जाती है

रक्त संचार बेहतर

जब चेहरे पर हीट पड़ती है तो हमारा ब्रेन, रक्त धमनियों को संकेत देता है कि वे चेहरे पर खून के फ्लो को बढ़ाएं। फेस में ब्लड का सर्क्युलेशन बढ़ने से ऑक्सिजन और न्यूट्रिएंट्स ज्यादा मात्रा में चेहरे तक पहुंचते हैं और चेहरा ग्लो करने लगता है।

• चेहरे पर गर्म पानी की भाप लेने से रक्त संचार प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इससे ऑक्सीजन स्किन की कोशिकाओं तक आसानी से पहुंच सकती है और चेहरे को एक प्राकृतिक चमक भी मिलती है।
• स्टीमिंग आपकी त्वचा को हाइड्रेट रखती है। नियमित उपयोग से त्वचा पर झुर्रियां भी कम होती हैं।
• यह उपकरण न केवल आपकी स्किन की जरूरतों का ख्याल रखेगा बल्कि सर्दियों और गर्मियों में आपकी त्वचा की रक्षा भी करेगा। आपको बस कुछ मिनटों के लिए अपने चेहरे को भाप देना है।

डेड स्किन से छुटकारा

चेहरे पर गर्म पानी की भाप लेने से डेड स्किन की समस्या गायब हो जाती है। साथ ही स्किन पर जमा धूल, गंदगी के कण और गंध साफ हो जाते हैं। गहरी सफाई के बाद, त्वचा खूबसूरत और मुलायम दिखती है।

थकान दूर होती है

जो लोग घंटों तक कंप्यूटर के सामने काम करते हैं, उन्हें चेहरे की थकान दूर करने के लिए फेस स्टीमिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे चेहरे की त्वचा को आराम मिलता है। गर्म पानी का भाप लेना स्किन को संक्रमण से भी बचाता है।

स्टीमर कैसे चुनें?

पुराने समय में बड़े आकार स्टीमर का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब बाजार में स्टीमर छोटे और बड़े दोनों आकार में उपलब्ध हैं। इस उपकरण की कीमत भी सस्ती है।

आप ऑनलाइन भी आसानी से फेस स्टीमर मंगवा सकते हैं। सप्ताह में एक या दो बार आप चेहरे पर गर्म पानी की भाप ले सकते हैं।

साल 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण जानिए तारीख, समय और सूतक काल

वर्ष 2020 महान वैश्विक प्रभाव (global impact) का वर्ष साबित हुआ है। इस वर्ष कुल छह ग्रहण थे। उनमें से चार चंद्र ग्रहण थे और दो सूर्य ग्रहण l

14 दिसंबर को लगने वाला ये ग्रहण 15 दिनों के अंदर लगने वाला दूसरा ग्रहण है। इससे पहले 30 नवंबर को पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा ग्रहण लगा था l

आइए जानते हैं कि ये सूर्य ग्रहण किस समय और कहां-कहां दिखाई देगा, भारत में इसका क्या असर होगा और क्या इस ग्रहण में सूतक माना जाएगा या नहीं।

सूर्य ग्रहण कब लगेगा?

वर्ष 2020 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर सोमवार को होगा। भारतीय मानक समय के अनुसार, ग्रहण 14 दिसंबर को शाम 7:03 बजे होगा और उसी दिन दोपहर 12:23 बजे समाप्त होगा। ग्रहण की अवधि लगभग 5 घंटे रहेगी।

सूर्य ग्रहण कहां देखा जाएगा?

ऐसा कहा जा रहा है कि दिसंबर में सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका कोई प्रभाव नहीं होगा। ज्योतिष के अनुसार, यह ग्रहण वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में लग रहा है।

इस ग्रहण काल के दौरान इस राशि वालों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है । यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक के कुछ हिस्सों में देखा जाएगा।

कब से लगेगा सूतक काल

14 दिसंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा इसलिए इस बार सूतक के नियम नहीं माने जाएंगे। साथ ही ग्रहण काल के दौरान मांगलिक कार्यों पर भी रोक नहीं लगेगी। सूतक काल मान्य ना होने की वजह से मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे और ना ही पूजा-पाठ वर्जित होगी।

ग्रहण के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

सूर्य ग्रहण आंखों पर बिना किसी सुरक्षा के देखने से आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है। ग्रहण के दौरान अपनी आंखों पर विशेष चश्मा जरूर लगाएं । इसके अलावा आप शीशे में भी ग्रहण देख सकते हैं।

ग्रहणकाल के दौरान चाकू, छुरी जैसे तेज किनारों वाली वस्तुओं का प्रयोग ना करें। इस दौरान भोजन और पानी का सेवन करने से भी बचें।

ग्रहणकाल के दौरान स्नान और पूजा ना करें ग्रहणकाल के दौरान इन कार्यों को शुभ नहीं माना जाता है। इस दौरान आप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।

जानिए सर्दियों में मूंगफली खाने के फायदे

मूंगफली को आप प्रोटीन और फाइबर का भंडार कह सकते हैं। इसे सस्ता बादाम भी कहा जाता है । इस बात से ही ये अनुमान लगाया जा सकता है कि इसमें लगभग वो सारे तत्व पाए जाते हैं जो बादाम में होते हैं ।

इसमें कई सारे ऐसे गुण मौजूद होते हैं जो कि हमारी बहुत सी शारीरिक समस्याओं का समाधान कर देते हैं।  ह्रदय की समस्या हो या फिर भूलने की बीमारी, मूंगफली का यदि संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए तो सब सही हो सकता है।

सर्दियों के मौसम में इसका सेवन अधिक किया जाता है। मुट्ठीभर मूंगफली में 426 कैलोरी, 5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 17 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें विटामिन ई, और बी 6  की भरपूर मात्रा होती है।

इसमें कई औषधीय गुण भी होते हैं। कुछ लोगों को तली हुई मूंगफली पसंद होती है जबकि कुछ लोगों को भुनी हुई मूंगफली पसंद होती है।

गुड़-मूंगफली को टाइमपास के रूप में भी खाया जाता है। ठंड के दिनों में मूंगफली खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

पोषक गुण

इसमें एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, बीटा कैरोटीन होते हैं। ये सभी पोषक तत्व शरीर को पोषण देते हैं और शरीर को अत्यधिक ठंड से भी बचाते हैं।

अगर आप भोजन के बाद 50 या 100 ग्राम मूंगफली का सेवन करते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। यह भोजन के पाचन में मदद करता है। ये शरीर में रक्त के प्रवाह को भी बढ़ाती है।

फायदे

इसमें मौजूद मैंगनीज रक्त में और कैल्शियम के अवशोषण, फैट और कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है। रोज खाना खाने बाद 50 ग्राम मूंगफली खाने आपकी बॉडी का ब्लड रेशो इनक्रीज हो सकता है

इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होते है। यह एनर्जी का भी अच्छा स्रोत हैं। अतः इसे खाने पर जल्दी भूख नहीं लगती।

ये दोनों पोषक तत्व भूख को कम करते हैं । जिससे वजन कम करने मे मदद मिल सकती है। मूगंफली के रोज सेवन से जल्द ही वजन कम किया जा सकता है।

सर्दियों में मूंगफली की आवश्यकता क्यों है?

सर्दियों में मूंगफली खाने से शरीर पर ठंड का प्रभाव कम हो जाता है। मूंगफली सर्दियों में महामारी के प्रसार को रोकने के लिए खाई जाती है, जैसे कि बुखार, सर्दी, और खांसी।

यह आपके इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में भी मदद करती है। सर्दियों में खांसी होना बहुत आम है, लेकिन अगर आप रोज एक या दो मुट्ठी मूंगफली खाते हैं, तो आप खांसी की समस्या से बच सकते हैं।

परन्तु अगर आपको खांसी शुरू हो जाती है, तो गलती से भी इसका सेवन न करें, नहीं तो खांसी खराब हो सकती है। खांसी रुकने पर आप मूंगफली खा सकते हैं।

हृदय रोग की रोकथाम

इन दिनों हार्ट अटैक, स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज बढ़ रहे हैं। यह स्थिति व्यक्ति की गलत जीवन शैली, खराब कोलेस्ट्रॉल स्तर के कारण होती है।

ये उपरोक्त बीमारियों के मुख्य कारण हैं लेकिन मूंगफली का नियमित और सीमित सेवन आपको इन बीमारियों से दूर रख सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें शरीर को गर्म करने वाले गुण होते हैं।

इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी होता है। यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने का काम करता है।

रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है

मूंगफली का सेवन आपके मेटाबॉलिज्म और मांसपेशियों को मजबूत रखने का काम करता है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन शरीर में हर कोशिका तक खून पहुंचाने का काम करता है।

इससे त्वचा कोमल और स्वस्थ रहती है। हर कोई अपनी त्वचा को प्राकृतिक और सुंदर बनाने के लिए कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करता है।

महंगे सौंदर्य उत्पादों का उपयोग करने के बजाय भीगी हुई मूंगफली का सेवन आपकी त्वचा को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है।

मूंगफली त्वचा को प्राकृतिक रूप से चमकदार बनाने में मदद करती है। इसमें त्वचा रोगों जैसे सोरायसिस और एक्जिमा के इलाज के लिए औषधीय गुण भी होते हैं।

रहस्य्मयी निधिवन – जहाँ आज भी रासलीला रचाते हैं कृष्ण

भारत एक ऐसा देश है, जहां पर कई रहस्यमय स्थान हैं, इन्हीं रहस्य्मयी स्थानों में से एक है निधिवन। यह वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण का बचपन बीता था। श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं। वे देवकी और वासुदेव के 8 वें पुत्र थे।

धार्मिक नगरी वृन्दावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, रहस्यमयी स्थान है। मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं।

रास के बाद वे निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। रंग महल में आज भी प्रसाद (माखन मिश्री) प्रतिदिन रखा जाता है।

निघिवन का अर्थ

‘निधि’ एक संस्कृत का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘खजाना’ वन अर्थात जंगल । स्थानीय लोगों के अनुसार निधिवन को गुरु हरिदास ने बसाया था, जिनकी गहरी भक्ति, तपस्या और ध्यान ने भगवान कृष्ण को इस स्थान पर जाने के लिए मजबूर कर दिया।

गोपियों का रूप ले लेते हैं तुलसी के पौधे

निधिवन में तुलसी के पौधे हैं। यहां तुलसी का हर पौधा जोड़े में है। मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण और राधा रासलीला करते हैं तो ये तुलसी के पौधे गोपियां बन जाती हैं और प्रात: होने पर तुलसी के पौधे में परिवर्तित हो जाते हैं। यहां लगे वृक्षों की शाखाएं ऊपर की ओर नहीं बल्कि नीचे की ओर बढ़ती हैं।

रंग महल

निधिवन के अंदर, एक छोटा सा मंदिर है जिसे रंग महल या राधा रानी का श्रृंगार-गृह कहा जाता है। लोककथाओं के अनुसार कृष्ण हर रात यहां आते हैं और राधा को अपने हाथों से सजाते हैं।

यहाँ रखे चन्दन के पलंग को 7 बजे से पहले सजा दिया जाता है। पलंग के पास एक लोटा जल, राधा जी के श्रृंगार का सामान और दातुन संग पान रख दिया जाता है।

सुबह 5 बजे जब ” रंग महल ” का दरवाजा खोला जाता है तो बिस्तर अस्त व्यस्त ,लोटे का पानी खाली, दातुन चबाई हुई और पान खाया हुआ मिलता है। रंग महल में भक्त केवल शृंगार का सामान ही चढ़ाते है और प्रसाद के रूप में उन्हें श्रृंगार का सामान ही मिलता है।

विशाखा कुंड

निधिवन में स्थित विशाखा कुंड के बारे में कहा जाता है कि जब भगवान श्री कृष्ण सखियों के साथ रास-लीला रचा रहे थे, तभी गोपियों में से एक सखी विशाखा को प्यास लगी।

कृष्ण ने अपनी बाँसुरी से एक छेद खोदा, जो पानी से भर गया, जिससे पानी पी कर विशाखा ने अपनी प्यास बुझाई। तब से इस कुंड का नाम विशाखा कुंड पड़ा।

राधा जी ने चुरा ली थी कन्हैया की बांसुरी

यहां के लोगों का कहना है कि देवी राधा ने जब यह महसूस किया कि कन्हैया हमेशा बंसी या बांसुरी ही बजाते रहते हैं और उनकी ओर ध्यान ही नहीं देते, तो राधा जी ने उनकी बांसुरी चुरा ली।

ऐसा कहा जाता है कि संगीत के स्वामी स्वामी हरिदास जी महाराज निधिवन में भक्ति गीत गाते थे, जिसमें वे इतने खो जाते थे कि उन्हें अपने तन – मन की कोई सुध नहीं रहती थी।  बांके बिहारी जी ने उनके भक्ति संगीत से प्रसन्न होकर उन्हें स्वप्न में कहा कि वह इस स्थान पर निवास करेंगे।

वन के आसपास बने मकानों में नहीं हैं खिड़कियां

जो लोग निधिवन के आस – पास रहते हैं, उनके घरों में बगीचे के किनारे खिड़कियां नहीं हैं, जिससे वे बगीचे के अंदर का नजारा नहीं देख पाते ।

वास्तव में निधि वन के आस पास के मकानों में खिड़कियां नहीं है और अगर किसी माकन में खिड़की हैं तो वे सात बजे मंदिर की आरती के साथ ही उन्हें बंद कर देते हैं। कोई भी खिड़कियों से निधि वन की ओर नहीं देखता।

5 बजे बंद हो जाता है मंदिर का दरवाज़ा

शाम को 5 बजे मंदिर बंद हो जाता है जिसके बाद किसी को भी पवित्र कुंज या मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है। जंगल जो पक्षियों, बंदरों की चहचहाहट से पूरे दिन चहकता रहता है रात में एक भयानक सन्नाटे में बदल जाता है।

यह माना जाता है कि जैसे ही रात होती है, भगवान कृष्ण रासलीला के लिए वन में आते हैं। सूर्यास्त के समय मंदिर परिसर का दरवाजा बंद रहता है और सभी लोग मंदिर से बाहर निकल जाते हैं।

जो भी रात में मंदिर में रहने का प्रयास करता है वह दृष्टि, सुनने और बोलने की क्षमता खो देता है। लगभग 10 साल पहले एक कृष्ण भक्त रासलीला देखने के लिए निधिवन में छिप गया था। जब अगली सुबह गेट खोला गया तो वह बेहोश अवस्था में पाया गया। उसका मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया था।

लहसुन में हैं ये विशेष गुण, खाली पेट इसका सेवन करने से कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है !

लहसुन में हैं ये विशेष गुण, खाली पेट इसका सेवन करने से कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है !

लहसुन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आमतौर पर भारतीय आहार में लहसुन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

चाहे वह सब्जी हो या दाल, इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए लहसुन का उपयोग किया जाता है। लहसुन में विभिन्न प्रकार के खनिज, विटामिन और प्रतिरक्षा बूस्टर पोषक तत्व होते हैं।

लहसुन का उपयोग कई गंभीर बीमारियों के लिए अमृत के रूप में किया जाता है। लहसुन शरीर में विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और रक्त को शुद्ध करता है।लहसुन खाने से डिप्रेशन की समस्या भी दूर होती है।

तो आइए जानते हैं  खाली पेट लहसुन खाने के क्या फायदें होते हैं ।

खाली पेट लहसुन खाने के फायदें

आयुर्वेद में लहसुन का विशेष महत्व है। इसमें कई औषधीय गुण हैं जो गंभीर बीमारियों को दूर करने में मदद करते हैं। अगर आप लिवर की सूजन या लीवर से जुड़ी किसी बीमारी से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आपको सीमित मात्रा में लहसुन का सेवन करना चाहिए।

कुछ लोग गैर-अल्कोहल फैटी लिवर से पीड़ित होते हैं, इसलिए आप एक उपाय के रूप में लहसुन खा सकते हैं। लेकिन समस्या गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

लहसुन पेट और आंतों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। इसके औषधीय गुण पेट में छोटी आंत को नुकसान से बचाती है। एंटी माइक्रोबियल गुण हानिकारक बैक्टीरिया से छोटी आंत की रक्षा करते है।

वजन कम करने के लिए

रोज सुबह खाली पेट लहसुन खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है। लहसुन में कुछ विशेष गुण शरीर की अतिरिक्त चर्बी को जलाने में मदद करते हैं।

इतना ही नहीं, लहसुन मेटाबोलिज्म को भी बढ़ाता है जिससे मोटापे की समस्या दूर होती है। लहसुन में मोटापा-रोधी गुण होते हैं जो आपको वजन कम करने में मदद करता है।

लहसुन शरीर की वसा को भी कम करता है। लहसुन के तेल में मोटापा-रोधी तत्व भी होते हैं, जो वजन घटाने के लिए बहुत प्रभावी हो सकता है। खाली पेट लहसुन खाने से पाचन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।

ब्लड शुगर को नियंत्रित करना

लहसुन में एलिसिन नामक तत्व होता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में फायदेमंद होता है। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल हाई है, तो आपको रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन खाने के अलावा कच्चे लहसुन और लौंग का सेवन करना चाहिए।

कच्चा लहसुन खाने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह शरीर को डिटॉक्सीफाई करने का एक शानदार तरीका है।

लहसुन में मधुमेह विरोधी गुण होते हैं। मधुमेह रोगियों के लिए लहसुन बहुत फायदेमंद है। एक से दो सप्ताह तक लहसुन का उचित सेवन रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी संतुलित रखता है।

अवसाद दूर करने के लिए और सुंदर त्वचा के लिए

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लहसुन बहुत फायदेमंद है। खाली पेट लहसुन के नियमित सेवन से मस्तिष्क के रसायन संतुलित रहते हैं। यह मूड को तरोताजा रखता है और अवसाद की समस्या को भी दूर करता है।

मुंहासों की समस्या के लिए लहसुन का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इससे चेहरे को एक प्राकृतिक चमक मिलती है।

लहसुन के एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा के लिए पौष्टिक होते हैं। लहसुन खराब सांस को कम करने में भी मदद करता है। आप लहसुन का उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में कर सकते हैं।

कैंसर और उच्च रक्तचाप के लिए रामबाण है

लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीबायोटिक और एंटीकार्सिनोजेनिक गुण होते हैं। रोज सुबह खाली पेट लहसुन खाने से कैंसर का खतरा कम होता है।

लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को कई प्रकार के कैंसर से बचाते हैं। लहसुन उच्च रक्तचाप को भी ठीक करता है। रोज सुबह कच्चे लहसुन की चटनी खाने से दोनों समस्याओं का समाधान होता है।

संक्रमण से लड़ने के लिए

लहसुन को एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक माना जाता है। लहसुन शरीर की कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता है। यह लंबे समय तक संक्रमण से लड़ता है जो शरीर को बीमारियों से बचाता है।

लहसुन औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर होता है इसलिए, यह शरीर को अवसाद, संक्रमण, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से बचाता है।

झुर्रियाँ और खिंचाव के निशान

जैसे-जैसे आप बड़े होते जाते हैं, आपके चेहरे पर झुर्रियों की उपस्थिति बढ़ती जाती है, लेकिन कुछ लोगों को बहुत कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां आ जाती हैं।

यह खराब खाने की आदतों, हानिकारक सूरज की किरणों और बदलती जीवनशैली के कारण हो सकता है लेकिन अगर आप अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार लहसुन को अपने आहार में शामिल करते हैं, तो आप झुर्रियों से छुटकारा पा सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान प्रसव के बाद या बढ़ती उम्र के साथ महिला के शरीर पर खिंचाव के निशान दिखाई देते हैं। अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आप लहसुन का सहारा ले सकते हैं।