जानें दवाई के बिना उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के उपाय

उच्च रक्तचाप की समस्या आज के समय में बेहद आम हो गई है। सिर्फ बढ़ती उम्र में ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग को भी हाई बीपी या लो बीपी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

उच्च रक्तचाप कई गंभीर समस्या का कारण बनता है। यह दिल पर गंभीर प्रभाव डालता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में वैसे तो दवाएं फायदेमंद हैं परन्तु कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिससे आप उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण पा सकते  हैं ।

उच्च रक्तचाप क्या है?

उच्च रक्तचाप जिसे हाइपरटेंशन भी कहते है, जब धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है तो दबाव की इस वृद्धि के कारण धमनियों में खून का प्रभाव बनाए रखने के लिए दिल को समान्य से अधिक काम करने की जरूरत पड़ती है।

रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं:- सिस्टोलिक और डायस्टोलिक, जो इस बात पर निर्भर करती है कि हृदय की मांसपेशियों में संकुचन (सिस्टोल) हो रहा है या धड़कनों के बीच में तनाव मुक्तता (डायस्टोल) हो रही है।

आराम के समय पर सामान्य रक्तचाप 100-140 mmHg सिस्टोलिक (उच्चतम-रीडिंग) और 60-90 mmHg डायस्टोलिक (निचली-रीडिंग) की सीमा के भीतर होता है। उच्च रक्तचाप तब होता है यदि यह 90/140 mmHg पर या इसके ऊपर लगातार बना रहता है।

कितना होना चाहिए रक्‍तचाप

आमतौर पर आपका ब्‍लड प्रेशर 120 से कम और 80 (120/80) से ज्‍यादा होना चाहिए। अगर आपका ब्‍लड प्रेशर इतना है तो घबराने की जरूरत नहीं है। अगर इससे ज्‍यादा तो आपको तुरंत डॉक्‍टर की सलाह लेनी चाहिए, क्‍योंकि उच्‍च रक्‍तचाप हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाता है।

लक्षण

हाई ब्‍लड प्रेशर के लक्षणों में सिरदर्द, चक्‍कर आना और दिल की धड़कने बढ़ जाना आदि शामिल हैं। हाई बीपी के रोगियों को अपने खाने में बहुत ही हल्‍का या फिर नाम मात्र का नमक डालना चाहिए।

आइये जानते हैं उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के कुछ उपाय

आहार

यदि आप दवा के बिना अपने रक्तचाप को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो अच्छे आहार का पालन करें। आहार में फल, सब्जियां, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद और नमक का सेवन कम करें।

मांस कम खाएं

हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए बोनलेस चिकन, मछली, रेड मीट, समुद्री मछली से बचना फायदेमंद है। आहार में ताजे फल और सब्जियों का सेवन अधिक फायदेमंद होता है।

रोज व्‍यायाम करें

रोजाना व्‍यायाम, खासतौर पर कार्डियो करने से ब्‍लड प्रेशर हमेशा नियंत्रित रहता है। आपको रोजाना दौड़ लगानी चाहिए। व्यायाम आपको कई बीमारियों से बचने में मदद करेगा।

आपको शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की आवश्यकता है। उच्च रक्तचाप वाले रोगियों के लिए सप्ताह में कम से कम 5 दिन आधा घंटा टहलना बहुत ही आवश्यक है।

वजन कम करें

यदि आप रक्तचाप कम करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आप अपने वजन को कम करें। हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अधिक वज़न बहुत तकलीफदेह होता है।

नमक का सेवन कम करें

आहार में नमक की मात्रा बढ़ाना उच्च रक्तचाप में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है इसलिए ऊपर से नमक वाले नमकीन भोजन, नमकीन खाद्य पदार्थ खाने से बचें।

आपको पैकेट वाले फूड जिनमें ढेर सारा नमक होता है, उससे दूर रहना चाहिए, क्‍योंकि इनमें ढेर सारा नमक रहता है। नमक आपका बीपी बढ़ा सकता है। इसके बजाय पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं जैसे:- केला, कद्दू के बीज।

शराब और धूम्रपान से बचें

शराब आपके ब्‍लड प्रेशर को तेजी से बढ़ाती है इसलिए शराब पीने वालों को हार्ट स्‍ट्रोक ज्‍यादा होता है। जिन लोंगो को हाई बीपी है उन्‍हें ना तो शराब पीनी चाहिए और ना ही धूम्रपान करना चाहिये।

डार्क चॉकलेट खाएं

आपको चॉकलेट खाने के लिए कहने की बात सुनकर काफी अजीब लग रहा होगा, लेकिन 2010 के एक अध्ययन में पाया गया कि डार्क चॉकलेट उच्च रक्तचाप को कम करने में बहुत फायदेमंद है।

डार्क चॉकलेट को कोकोट पेड़ के बीज से बनाया जाता है, जिसमें ढेर सारे एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं। इसमें फ्लेवानॉल होता है जो कि ब्‍लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है।

क्या है रहस्य दुनिया भर में पाए जाने वाले मोनोलिथ का ?

दुनिया में कई जगहों पर धातु के चमकीले मोनोलिथ (Monolith) देखे जा रहे हैं जिसके बारे में किसी को नहीं पता है कि वे कैसे आते हैं और कैसे गायब हो जाते हैं।

यह रहस्यमय धातु “मोनोलिथ” जो पश्चिमी संयुक्त राज्य के रेगिस्तान में पाए गए है, उन्हें देखकर लोग समझ रहे हैं कि कहीं एलियंस या यूएफओ (unidentified flying object) तो धरती पर नहीं आए।

मोनोलिथ कोई नया शब्द नहीं है, लेकिन पिछले एक महीने से यह शब्द सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। हालांकि, कुछ समय के लिए चमकदार मोनोलिथ पाए गए हैं। रोमानिया, अमेरिका, ब्रिटेन और बेल्जियम जैसे कई देशों में इस तरह के रहस्यमय चमक वाले आंकड़े लोगों को हैरान कर रहे हैं।

क्या है मोनोलिथ

पहाड़ या चट्टान का एक बड़ा टुकड़ा या फिर एक इमारत के एक विशाल पत्थर या चट्टान को मोनोलिथ कहा जाता है। पुराने समय में ये किसी खास जगह पर रखे जाते थे।

इतिहासकारों को इस तरह के पाषाणयुगीन पत्थर बहुत मिले हैं, लेकिन आजकल जो पत्थर दिख रहे हैं वे धातु के और चमकीले हैं।

पहली बार अमेरिका में देखा गया

सबसे पिछ्ले यह अमेरिका के यूटा रेगिस्तान में 18 नवंबर 2020 एक हेलिकॉप्टर चालक दल ने देखा था। हेलीकॉप्टर चालक को दूर से देखकर ये एक अजीब मूर्ति सा लगा।

उसके कुछ दिन बाद इसी तरह के मोनोलिथ को रोमानिया की पहाड़ों में देखा गया और फिर आइल ऑफ व्हाइट में भी देखा गया।

ये चमकदार स्तंभ कई स्थानों पर पाए गए हैं । हैरान करने वाली बात तो यह है कि कुछ समय के बाद ये मोनोलिथ गायब हो जाते हैं।

इस बीच पेट्रॉडवा डेकीयन किले के पास देखा गया मोनोलिथ गायब हो गया। इसी तरह का एक नया मोनोलिथ बाद में दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक पहाड़ी क्षेत्र में पाया गया था और यह अचानक गायब हो गया।

इन सभी विवादों के बाद न्य मेक्सिको के एक आर्ट कलेक्टिव The Most Famous Artist ने दावा किया है कि यूटा और कैलिफोर्निया में दिखे मोनोलिथ उसने लगाए थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसने अपने इंस्टाग्राम पेज पर 3 तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें से 2 उनके बनाए खंबे की हैं और एक कैलिफोर्निया में मिले खंबे की है। आर्ट कलेक्टिव The Most Famous Artist के वेबसाइट से पता चलता है कि वो इस खंबे को 45 हजार डॉलर में बेचे जा रहे हैं।

 

जानिए नई शिक्षा नीति और उससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलाव के बारे में

नई शिक्षा नीति 2020 :- भारत की शिक्षा नीति को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। सन 1986 में जारी हुई शिक्षा नीति के बाद भारत की शिक्षा नीति में यह पहला नया परिवर्तन है। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।

नया शिक्षा आयोग

केंद्रीय जनशक्ति विकास मंत्रालय और मानव संसाधन का नाम एक बार फिर बदल दिया गया है। इसका नाम बदलकर “शिक्षा मंत्रालय” कर दिया गया है।

यह देश में स्कूल और उच्च शिक्षा प्रणालियों में परिवर्तनकारी सुधार लाएगा। यह 21 वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है और 34 वर्षीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 की जगह लेगी।

इस नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल स्तर से लेकर ग्रेजुएशन तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं । साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में नई शिक्षा नीति का विषय शामिल था।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

1986 में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार की गई थी और इसे 1992 में संशोधित किया गया था। इस अवधि के दौरान हमारे देश में समाज की अर्थव्यवस्था और बड़े पैमाने पर दुनिया सहित कई बदलाव हुए हैं, इसलिए 21 वीं सदी में लोगों की जरूरतों और देश के अनुसार शिक्षा क्षेत्र को बदलना या उसमें बदलाव करना आवश्यक है।

काफी गहन परामर्श के बाद, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तैयार की गई है और इसमें 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक, 6000 ULB, 676 जिलों से लगभग 2 लाख सुझाव शामिल हैं।

नई शिक्षा नीति में कई बड़े बदलाव

स्कूलों में 10 +2 फार्मेट के स्थान पर 5 +3+3+4 फार्मेट को शामिल किया जाएगा, जोकि इस प्रकार होगा ।

  • पहले चरण में यानी पहले पांच साल में तीन साल की प्री-प्राइमरी और क्लास I से II की शिक्षा दी जाएगी।
  • द्वितीय चरण कक्षा III से V तक की शिक्षा होगी।
  • तीसरे चरण में छठी से आठवीं तक पढ़ाया जाएगा।
  • चौथे चरण में शेष चार साल नौवीं से बारहवीं तक की शिक्षा होगी।

परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। परीक्षा सेमेस्टर पैटर्न में होगी, साथ ही कॉलेज प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा लेने का विचार होगा।

NCERT द्वारा तय किया जाने वाला पाठ्यक्रम

NCERT पाठ्यक्रम तय करेगा। शिक्षा प्रणाली में पहली बार पूर्व-प्राथमिक विद्यालय के लिए पाठ्यक्रम तय किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम देश के सभी प्री-प्राइमरी स्कूलों पर लागू होगा।

तीसरी तक पढ़ने में सक्षम छात्रों पर अधिक जोर दिया जाएगा। पढ़ने-लिखने और जोड़-घटाव (संख्यात्मक ज्ञान) की बुनियादी योग्यता पर ज़ोर दिया जाएगा । नई शिक्षा नीति के अनुसार, पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

साथ ही, अगर नौवीं से बारहवीं कक्षा में शिक्षा के लिए एक भी शाखा नहीं है, तो छात्रों के पास विभिन्न विषयों को चुनने का अवसर होगा, उदाहरण के लिए विज्ञान विषयों का अध्ययन करते समय संगीत सीख सकता है।

छात्र विज्ञान, वाणिज्य, कला के साथ-साथ संगीत, खेल, लोक कला को अपने अध्ययन के विषयों के रूप में चुन सकेंगे।

छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे । इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी। इसके अलावा म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा।

स्कूल रिपोर्ट कार्ड बदल जाएगा

पहली से 12 वीं कक्षा में अध्ययन करते समय, छात्र के रिपोर्ट कार्ड पर अंक, ग्रेड और शिक्षक की टिप्पणी का उल्लेख किया जाता था।

अब इस रिपोर्ट कार्ड में छात्रों, सहपाठियों और शिक्षकों की टिप्पणियां भी होंगी। शिक्षा के अलावा यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि छात्र ने क्या सीखा है। जब कोई छात्र बारहवीं कक्षा में स्कूल से बाहर जाएगा, तो उसे बारह साल का रिपोर्ट कार्ड दिया जाएगा।

उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव

कॉलेज की शिक्षा में, कला, वाणिज्य और विज्ञान नाम की तीन शाखाएँ प्रवेश की प्रक्रिया में हैं लेकिन नए मसौदे के अनुसार छात्र कला और विज्ञान के कुछ विषयों को चुनकर डिग्री हासिल कर सकेंगे।

इसमें विज्ञान, कला, खेल, व्यावसायिक पाठ्यक्रम जैसे विकल्प होंगे। यह विकल्प उन छात्रों के लिए पेश किया जाएगा जो कई विषयों में रुचि रखते हैं उदाहरण के लिए एक इंजीनियरिंग छात्र कॉलेज में पढ़ते हुए संगीत सीख सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण

नयी शिक्षा नीति 2020 का सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम लागू होना। अभी यदि कोई छात्र तीन साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे की पढाई नहीं कर पाता है तो उसको कुछ भी हासिल नहीं होता है ।

लेकिन अब मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद पढाई छोड़ने पर सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढाई छोड़ने के बाद डिग्री मिल जाएगी । इससे देश में ड्राप आउट रेश्यो कम होगा ।

जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे, लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं । उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी।

 

‘कीवी फल’ बढ़ाता है इम्यून सिस्टम, जानिए इसके जबरदस्त फायदों के बारे में

‘कीवी फल’ बढ़ाता है इम्यून सिस्टम, जानिए इसके जबरदस्त फायदों के बारे में

आहार में फलों को शामिल करना बहुत जरूरी होता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से एक या दो फल खाने चाहिए। सेहत से जुड़ी कई समस्याओं के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में फल खाना फायदेमंद होता है।

यह हमें विभिन्न बीमारियों से भी बचाता है इन्हीं फलों में से एक है “कीवी”। इस फल से स्वास्थ्य पोषक तत्वों की भारी मात्रा होती है। डेंगू से संक्रमित मरीजों को कीवी खाने की सलाह दी जाती है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि डेंगू रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या को बहुत कम कर देता है। इसके औषधीय गुण रक्त में प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मदद करते हैं।

डॉक्टर भी आहार में कीवी फल को शामिल करने की सलाह देते हैं। कीवी फल का सेवन न केवल स्वास्थ्य बल्कि आपकी त्वचा को पोषक तत्व प्रदान करता है। आइए जानें खट्टे-मीठे कीवी फल खाने के स्वास्थ्य लाभ।

आँखों की रोशनी बढ़ाता है

कीवी फल में ल्यूटिन नामक पोषक तत्व होता है। यह कारक नेत्र स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। रेटिना की सुरक्षा के अलावा, ल्यूटिन नेत्र रोगों से बचाता है।

आँखों की बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए कीवी को आहार में शामिल करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार कीवी का सेवन करना फायदेमंद होता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है

कीवी के पोषक तत्व आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करते हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें विटामिन सी से भरपूर होता है।

ये तत्व प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और हानिकारक वायरस से लड़ने की शरीर की क्षमता को बढ़ाने के लिए काम करते हैं।

इसके अलावा इस में विटामिन ई, कैरोटीनॉइड, पॉलीफेनोल्स और फाइबर अधिक होता है। यह हमें कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

डायबिटीज के खतरे को कम करता है

मधुमेह की समस्या को रोकने के लिए कीवी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें मधुमेह विरोधी गुण होते हैं। इसमें ऐसे तत्व भी हैं जिनका उपयोग ब्लड शुगर को कम करने के लिए किया जा सकता है।

डायबिटीज से बचाव के लिए अपने आहार में कीवी को शामिल करें। कम ग्लाइसेमिक सूचकांक के कारण कीवी रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) में तेजी से वृद्धि नहीं करता है। इसकी कुल खपत रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करती है।

कैंसर

कैंसर हर साल हजारों लोगों को मारता है। यह एक गंभीर बीमारी है। अपने खाने की आदतों पर पूरा ध्यान देना महत्वपूर्ण है, ताकि हम ऐसी घातक बीमारियों से ग्रसित न हों।

कीवी फलों का सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद करता है क्योंकि इसमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं। सप्ताह में तीन से चार बार कीवी फल खाने से निश्चित रूप से कैंसर से बचाव होगा।

मुहांसों की समस्या से छुटकारा

यदि आप मुंहासों की समस्या से परेशान हैं तो फिर कीवी फल जरूर खाएं, ऐसा इसलिए क्योंकि यह विटामिन सी से भरपूर होता है।

विटामिन सी त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ऐसा इसलिए है क्योंकि यह त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है।

कीवी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट चेहरे पर मुंहासों की समस्या को भी कम करता है और त्वचा को एक प्राकृतिक चमक देता है।

बालों की समस्या से छुटकारा

बालों का झड़ना, डैंड्रफ जैसी समस्याएं सिर्फ महिलाओं में ही नहीं बल्कि पुरुषों में भी देखी जाती हैं। बालों से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने के लिए कीवी फल खाना फायदेमंद है, क्योंकि इसमें विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘बी’ शामिल हैं।

ये पोषक तत्व बालों की सेहत के लिए अच्छे होते हैं। ये तत्व रूसी से बालों के झड़ने की समस्या को कम करने में भी मदद करते हैं।

रक्तचाप की समस्या नियंत्रण में रहती है

अपने रक्तचाप को नियंत्रण में रखने से आपको कई प्रकार के हृदय रोग से बचाने में मदद मिल सकती है। यह स्ट्रोक के जोखिम को भी कम करता है।

इसमें बायोएक्टिव नामक एक यौगिक होता है। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में बहुत मदद करता है। उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों को नियमित रूप से सुबह कीवी फल का सेवन करना चाहिए।

कीवी फल भी आपके वजन को नियंत्रण में रखता है। थकान और लगातार थकान के बाद वजन कम होगा क्योंकि इसमें बहुत सारा फाइबर होता है।

सर्दियों में गुड़ खाने से होते हैं ये गजब के फायदे

सर्दी के दिनों में या सर्दी होने पर गुड़ का प्रयोग आपके लिए अमृत के समान होता है। इसकी तासीर गर्म होने के कारण यह सर्दी, जुकाम और खास तौर से कफ से आपको राहत देने में मदद करता है।

ठंड के मौसम में शरीर के लिए इसके कई फायदे हैं इसीलिए डॉक्टर भी गुड़ का सेवन करने की सलाह देते हैं। इसके लिए दूध या चाय में गुड़ का प्रयोग किया जा सकता है, और आप इसका काढ़ा भी बनाकर ले सकते हैं।

इसके अलावा, क्यूंकि गुड़ गर्म होता है, इसलिए सर्दियों में इसका सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। तो आइये जानते हैं सर्दियों में गुड़ खाने के इन कमाल के फायदों के बारे में :-

ठंड से बचाए

हर साल हजारों लोग भीषण ठंड के कारण अपनी जान गंवा देते हैं इसलिए सर्दियों में विशेषकर गुड़ का सेवन करना बहुत जरूरी है। ठंड के मौसम में गुड़ का सेवन शरीर को गर्मी देता है और ठंड से बचाता है।

महामारी को रोकने में भी गुड़ फायदेमंद है। ठंड के दिनों में शरीर में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। जो उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का कारण बनता है।

जिन लोगों की इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है उन्हें गुड़ से बहुत फायदा होता है। गुड़ में कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है जो थकान दूर करने में मदद करता है।

गले और फेफड़ों के संक्रमण को रोकने के लिए गुड़ का सेवन करना भी फायदेमंद होता है। जिन लोगों को मधुमेह है, वे चीनी के बजाय गुड़ का सेवन कर सकते हैं । गुड़ के सेवन से पाचन में भी सुधार होता है।

श्वसन क्रिया को बेहतर बनाता है।

यह सुनकर आपको आश्चर्य हो सकता है, लेकिन कई वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि गुड़ श्वसन क्रिया को बेहतर बनाता है।

गुड़ के सेवन से श्वास प्रणाली मजबूत होती है। गुड़ को क्लींजिंग एजेंट भी कहा जाता है क्योंकि यह श्वसन प्रणाली, फेफड़े, अन्नप्रणाली, पेट और आंतों को साफ करता है। गुड़ का सेवन भी संचार प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाता है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है

जो लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं उन्हें सर्दियों में गुड़ का सेवन करना चाहिए। गुड़ के सोडियम और पोटेशियम गुण रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं।

जो लोग दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद नियमित रूप से गुड़ का सेवन करना चाहिए। गुड़ शरीर में एसिड की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। तो रक्तचाप को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

जुकाम और खांसी के लिए रामबाण है

अत्यधिक ठंड और फ्लू के कारण सर्दियों के दौरान प्रकोप बढ़ जाता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी की जानकारी के अनुसार गुड़ सर्दी और खांसी से राहत देता है।

गुड़ का सेवन शरीर को गर्म करने में मदद करता है, भोजन का पाचन जल्दी करता है और शरीर को आर्यन प्राप्त करने में मदद करता है। गले की खराश के लिए गुड़ बहुत उपयोगी है। गुड़ और अदरक को एक साथ खाने से फर्क पड़ सकता है।

अगर आपको जुकाम है, तो सिर्फ गुड़ न खाएं, इसे चाय या लड्डू में गुड़ के साथ खाएं। गुड़ शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा एंटी-एलर्जी गुणों के कारण भी अस्थमा के रोगियों के लिए गुड़ फायदेमंद है।

हड्डी और जोड़ों के दर्द से राहत

अगर आपको जोड़ो, हड्डियों में दर्द या सूजन की समस्या रहती है तो गुड़ इसमें भी आपको लाभ दे सकता है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द वाले लोगों में जुकाम होने की संभावना अधिक होती है।

अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम युक्त आहार लें। शरीर को कैल्शियम की पर्याप्त आपूर्ति से हड्डी संबंधी रोग नहीं होंगे। इसके लिए गुड़ और जीरे का सेवन करें।

इसमें मौजूद पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करेंगे। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी की जानकारी के अनुसार जीरा और गुड़ में हड्डियों के लिए पोषक तत्व होते हैं इसीलिए बुजुर्गों और एथलीटों को जीरे और गुड़ का सेवन करना चाहिए।

स्किन के दाग-धब्बों से दिलाता है राहत

स्किन से दाग-धब्बों को दूर करने के लिए गुण का इस्तेमाल किया जा सकता है इसके लिए एक चम्मच गुड़ पाउडर लें और उसमें 1 चम्मच टमाटर का रस, नींबू का रस और हल्दी की एक चुटकी मिक्स कर लें । इसे अपने चेहरे पर लगाएं । बेहतर परिणाम के लिए हफ्ते में दो बार लगाएं ।

अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम, जानें कुछ खास बातें

दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम अहमदाबाद शहर के मोटेरा इलाके में बनाया गया है। इसका नाम सरदार पटेल गुजरात स्टेडियम रखा गया है।

1 लाख 10 हजार दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड से भी बड़ा है। यह पूरा स्टेस्डियम 63 एकड़ जमीन पर बनाया गया है।

अहमदाबाद में मोटेरा स्‍टेडियम को वर्ष 1982 में बनाया गया था जिसमें 49,000 दर्शकों की बैठने की क्षमता के थी। वर्ष 2006 में इसकी मरम्‍मत की गई थी।

साबरमती नदी के तट पर बना यह स्‍टेडियम 50 एकड़ इलाके में फैला हुआ है। इसका विस्तार 2015 और 2020 के बीच किया गया था। 24 फरवरी, 2020 को इसका उद्घाटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा किया गया था।

आइये जानतें हैं मोटेरा स्‍टेडियम के बारे में कुछ खास बातें :-

 

  • मोटेरा स्टेडियम जो 63 एकड़ में फैला है, इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं और 76 कॉरपोरेट बॉक्स हैं, जिसमें प्रत्येक की बैठने की क्षमता 25 है।
  • एक ओलंपिक आकार का स्विमिंग पूल और चार ड्रेसिंग रूम, एक पार्किंग क्षेत्र जो लगभग 3000 कारों और 10,000 दोपहिया वाहनों को समायोजित कर सकता है।
  • स्टेडियम में मुख्‍य ग्राउंड के अलावा, स्‍टेडियम के अंदर दो अन्‍य छोटे ग्राउंड भी हैं।
  • स्टेडियम का स्ट्रक्चर ऐसा है कि जब भी कोई खिलाड़ी बाउंड्री मारे तो स्टेडियम में बैठने वाला हर क्रिकेट प्रेमी उस बाउंड्री को देख पाएगा।
  • स्टेडियम में 55 कमरों, व्यायामशाला, इनडोर अभ्यास पिचों और फूड कोर्ट के साथ एक क्लब हाउस भी है। मोटेरा स्टेडियम में एलईडी लाइट्स का प्रयोग किया गया है।
  • स्टेडियम में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं ।
  • इस स्‍टेडियम का आर्किटेक्‍ट पॉपुलस ने तैयार किया है और एलऐंडटी ने इसे बनाया है। मोटेरा स्‍टेडियम में बनाए गए अत्‍याधुनिक ड्रेसिंग रूम खिलाड़‍ियों को एक अलग ही अहसास देंगे। हर स्‍टैंड के अंदर एक फूड कोर्ट और हॉस्पिटलटी एरिया बनाया गया है।
  • इसी मैदान पर सुनील गावस्‍कर ने टेस्‍ट मैचों में 10 हजार रन बनाए थे और इसी मैदान पर कपिल देव ने सर रिचर्ड हेडली के 431 विकेट के रेकॉर्ड को तोड़ा था। मोटेरा मैदान पर ही सचिन ने अपना टेस्‍ट का पहला दोहरा शतक लगाया था।

 

बारिश के बाद मिट्टी से सौंधी-सौंधी खुशबू क्यों आती है ?

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बारिश अधिकतर सबको अच्छी लगती है और जब बारिश की बूंदें सूखी धरती पर पड़ती हैं तो एक अलग प्रकार सौंधी सी खुशबू सबका मन मोह लेती है लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि बारिश के बाद मिट्टी से खुशबू क्यों आती है, इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?

तो आज हम बताने जा रहें कि मिट्टी से ये खुशबू क्यों आती है:-

दरअसल बारिश के बाद जो सुगंध हम लोग महसूस करते हैं उसे “पेट्रिकोर” कहा जाता है। पेट्रिकोर शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1964 में मौसम का अध्ययन कर रहे दो ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने किया था।

पेट्रिकोर शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। पेट्रा और ऐकोर। जिसमें से पेट्रा का अर्थ स्टोन यानी रॉक और ऐकोर का मतलब है लिक्विड फ्रॉम द गॉड।

मिट्टी से आने वाली इस खुसबू के पीछे कई कारण हो सकते हैं,जिनमें से एक कारण है वायुमंडल में ओजोन गैस की उपस्थिति है ।

जब कभी आंधी आती है, तो आंधी के दौरान वायुमंडल में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के अणु विभाजित हो जाते हैं, और वे फिर से जुड़कर नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाते हैं।

यही ओज़ोन गैस वायुमंडल में उपस्थित रहती है और बारिश के समय इसकी कुछ मात्रा पानी के साथ मिल जाती है और एक खास तरह की खुशबू पैदा करती है। यह खुशबू थोड़ी तीखी होती है, जिसमें कि क्लोरीन की बेहद गहरी सुगंध पाई जाती है।

दूसरा कारण है मिट्टी में एक खास तरह के बैक्टीरिया का होना। इस बैक्टीरिया का नाम है “actinomycetes” ।

ये बैक्टीरिया मिट्टी में तब ग्रो करते हैं जब मिट्टी गीली और नमी से भरपूर होती है । यह मिट्टी की ऊपरी सतह पर कुछ छिद्र छोड़ देते हैं और जैसे ही बारिश की बुँदे छिद्रयुक्त मिट्टी की सतह पर गिरती है तो वह हवा के छोटे-छोटे बुलबुलों में बदल जाती है।

ये बुलबुलें फूटने से पहले ऊपर की ओर बढ़ते हैं और हवा में बहुत छोटे-छोटे कणों को बाहर निकाल देते हैं जिन्हें “एरोसोल” कहा जाता है। यही एरोसोल इस सौंधी-सौंधी खुशबू को बिखेरते हैं।

पेड़- पौधे

मिट्टी से आने वाली खुशबू का एक अन्य कारण पेड़ पौधों से निकलने वाला तेल भी है। पेड़-पौधे लगातार तेल स्त्रावित करते रहते हैं और जब बारिश होती है तो यह तेल तेजी से बारिश की बूंदों के साथ मिल कर आसपास के वातावरण में फैल जाता है।

फिर मिट्टी, बारिश के पानी के साथ मिलकर कुछ रिएक्शन करती है जिससे खास तरह की खुशबू निकलती है जो कि हम सभी के मन को खुश कर देती है और ताजगी से भर देती है।

वजन कम करने के लिए बहुत फायदेमंद है नींबू जानें कैसे करे सेवन

वजन कम करने के लिए बहुत फायदेमंद है नींबू जानें कैसे करें सेवन

नींबू एक रसदार और खट्टा फल है। इसके शरीर के लिए कई फायदे हैं। इसमें बड़ी मात्रा में विटामिन C होता है। हमारे दैनिक आहार में नींबू की एक या दो बूंदें भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

नींबू पाचन के लिए बहुत अच्छा है इसका रस गर्मियों में लिया जाने वाला सबसे अच्छा पेय है। नींबू न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है बल्कि वजन कम करने के लिए भी बहुत अच्छा है।

आप अपने दैनिक आहार में नींबू को कई तरह से शामिल कर सकते हैं। वजन कम करने के लिए कई तरह के हेल्दी ड्रिंक्स आप पीते होंगे, जैसे नींबू-पानी, शहद पानी, गर्म पानी आदि।

नींबू से बने पेय पदार्थ पीने से वजन बहुत जल्दी कम होता है। इसमें कई ऐसे गुण मौजदू होते हैं, जो वजन कम करने के साथ ही सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं से भी बचाते हैं।

नींबू में मौजूद पोषक तत्व

इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, अम्लीय तत्व होता है, जिसके कारण वजन तेजी से कम होता है। ये सभी पोषक तत्व शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट को कम करते हैं।

नींबू पानी

नींबू पानी के कई फायदे हैं। यह न केवल शरीर को डिटॉक्स करता है बल्कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट पाचन से जुड़ी कई बीमारियों का इलाज करते हैं। बेहतर त्वचा और बेहतर पाचन के लिए सुबह गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर पिएं।

नींबू की चाय

वजन कम करने के लिए नींबू की चाय भी बहुत फायदेमंद है। एक कप चाय में 2-3 बूंद नींबू का रस पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

सलाद में नींबू का रस

नींबू के रस की सही मात्रा को अपने सलाद में शामिल करें। यह न केवल आपके सलाद को स्वादिष्ट और मसालेदार बना देगा, बल्कि आपको तेजी से वजन कम करने में भी मदद करेगा।

गर्म पानी के साथ नींबू

यदि आप कुछ ही दिनों में पेट की चर्बी और वजन कम करने का सोच रहे हैं, तो नींबू के रस को एक गिलास गर्म  पानी में मिलाकर पिएं।

वजन कम करने के लिए इससे अच्छा कोई और विकल्प नहीं है। गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर डिटॉक्स होता है।

शरीर का फैट तेजी से बर्न होता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इससे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है, जिससे शरीर में मौजूद फैट बर्न होने की प्रक्रिया में आ जाता है।

भुनी हुई सब्जी में नींबू का रस

सब्जियां पोषक तत्वों से भरी होती हैं और इसमें थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर आपकी सब्जियों को और भी  स्वादिष्ट बना सकते हैं । सब्जियों में नींबू का रस वजन घटाने और आपके स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए ये बहुत फायदेमंद है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर कहाँ होना चाहिए ? जानें कुछ महत्वपूर्ण नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर कहाँ होना चाहिए? जाने कुछ नियम

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले ईश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। प्रत्येक घर में भगवान के मंदिर की अपनी एक विशेष जगह होती है।

सभी घर के मंदिर को अपनी श्रद्धा और भक्तिभाव से सजाते हैं, लेकिन आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे वास्तु शास्त्र के मुताबिक पूजा घर कहाँ होना चाहिए, और कौन से नियम का पालन करना चाहिए ।

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर कहाँ होना चाहिए:

वास्तु शास्त्र के अनुसार  नॉर्थ-ईस्ट दिशा का स्वामी बृहस्पति होता है। इसे ईशान कोण भी कहा जाता है। ईशान यानी ईश्वर या भगवान।

इसी वजह से यह भगवान या बृहस्पति की दिशा कहलाता है। माना जाता है कि मंदिर इसी दिशा में रखना चाहिए। इसके अलावा पृथ्वी का झुकाव उत्तर-पूर्व दिशा में भी है और धरती उत्तर-पूर्व के शुरुआती बिंदु के साथ घूमती है।

उदाहरण के लिए यह कॉर्नर रेल के इंजन की तरह है जो पूरी रेलगाड़ी को खींचता है। घर के इस एरिया में मंदिर होना भी कुछ ऐसा ही है। यह पूरे घर की ऊर्जा को खुद की ओर खींचकर उसे आगे ले जाता है।

पूजा के समय व्यक्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए

पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा ( East or North Direction ) में ही होना चाहिए। इस दिशा में मुख करके पूजा करने से पूजा का फल उत्तम तथा शत-प्रतिशत प्राप्त होता है।

पूजा स्थान से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बातें

  • पूजा घर के पूर्व या पश्चिम दिशा में देवताओं की मूर्तियां होनी चाहिए।
  • मूर्तियों का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।
  • देवताओं की दृष्टि एक-दूसरे पर नहीं पड़नी चाहिए।
  • पूजा घर के खिड़की व दरवाजे पश्चिम दिशा में न होकर उत्तर या पूर्व दिशा में होने चाहिए।
  • पूजा घर के दरवाजे के सामने देवता की मूर्ति रखनी चाहिए।
  • पूजा घर में बनाया गया दरवाजा लकड़ी का नहीं होना चाहिए।
  • घर के पूजा घर में गुंबज, कलश इत्यादि नहीं बनाने चाहिए।
  • वास्तु के अनुसार जिस जगह भगवान का वास रहता है, उस दिशा में शौचालय, स्टोर इत्यादि नहीं बनाए जाने चाहिए।
  • पूजा घर के ऊपर या नीचे भी शौचालय नहीं बनाना चाहिए।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार बेडरूम में पूजा घर नहीं बनाना चाहिए।
  • पूजा घर के लिए प्राय: हल्के पीले रंग को शुभ माना जाता है, अतः दीवारों पर हल्का पीला रंग किया जा सकता है।
  • फर्श हल्के पीले या सफेद रंग के पत्थर का होना चाहिए। इन कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर पूजा घर बनाया जाना चाहिए। जो हमें सुख-समृ‍द्धि के साथ-साथ हमारे जीवन को खुशहाल और हमें हर तरह से संपन्न बनाते है।

जानिए फेस स्टीमिंग के फायदे, चुटकियों में पाएं चमकदार त्वचा

जानिए फेस स्टीमिंग के फायदे, चुटकियों में पाएं चमकदार त्वचा

चेहरे की त्वचा को साफ और सुंदर बनाए रखने के लिए त्वचा के छिद्रों को साफ करना बहुत जरूरी होता है, दरअसल चेहरे को भाप देने से रोम या छिद्र खुल जाते है, साथ ही चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा हो जाता है।

फेस स्टीमिंग करने से आपकी त्वचा साफ और चमकदार हो जाती है। आईए आपको बताते हैं फेस स्टीमिंग के क्या फायदे हैं और कैसे घर पर आप आसानी से इसे ले सकते हैं।

स्टीमिंग के फायदे

• स्टीमिंग त्वचा के रोमछिद्रों को खोलने में मदद करती है और स्किन को साफ करती है।
• चेहरे पर मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया भी मिट जाते हैं।
• ब्लैकहेड्स को आसानी से हटाने में मदद करती है।
• चेहरे के पोर्स में छुपी गंदगी भी बड़ी आसानी से निकल जाती है

रक्त संचार बेहतर

जब चेहरे पर हीट पड़ती है तो हमारा ब्रेन, रक्त धमनियों को संकेत देता है कि वे चेहरे पर खून के फ्लो को बढ़ाएं। फेस में ब्लड का सर्क्युलेशन बढ़ने से ऑक्सिजन और न्यूट्रिएंट्स ज्यादा मात्रा में चेहरे तक पहुंचते हैं और चेहरा ग्लो करने लगता है।

• चेहरे पर गर्म पानी की भाप लेने से रक्त संचार प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इससे ऑक्सीजन स्किन की कोशिकाओं तक आसानी से पहुंच सकती है और चेहरे को एक प्राकृतिक चमक भी मिलती है।
• स्टीमिंग आपकी त्वचा को हाइड्रेट रखती है। नियमित उपयोग से त्वचा पर झुर्रियां भी कम होती हैं।
• यह उपकरण न केवल आपकी स्किन की जरूरतों का ख्याल रखेगा बल्कि सर्दियों और गर्मियों में आपकी त्वचा की रक्षा भी करेगा। आपको बस कुछ मिनटों के लिए अपने चेहरे को भाप देना है।

डेड स्किन से छुटकारा

चेहरे पर गर्म पानी की भाप लेने से डेड स्किन की समस्या गायब हो जाती है। साथ ही स्किन पर जमा धूल, गंदगी के कण और गंध साफ हो जाते हैं। गहरी सफाई के बाद, त्वचा खूबसूरत और मुलायम दिखती है।

थकान दूर होती है

जो लोग घंटों तक कंप्यूटर के सामने काम करते हैं, उन्हें चेहरे की थकान दूर करने के लिए फेस स्टीमिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे चेहरे की त्वचा को आराम मिलता है। गर्म पानी का भाप लेना स्किन को संक्रमण से भी बचाता है।

स्टीमर कैसे चुनें?

पुराने समय में बड़े आकार स्टीमर का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब बाजार में स्टीमर छोटे और बड़े दोनों आकार में उपलब्ध हैं। इस उपकरण की कीमत भी सस्ती है।

आप ऑनलाइन भी आसानी से फेस स्टीमर मंगवा सकते हैं। सप्ताह में एक या दो बार आप चेहरे पर गर्म पानी की भाप ले सकते हैं।