वायरल वीडियो : बिल्ली के बच्चों का ये डांस देखकर दंग रह जाएंगे आप!

आपने इंटरनेट पर कई पालतू जानवरों के वीडियो देखे होंगे। उनकी प्यारी हरकतों का सोशल मीडिया पर एक अलग फैनबेस है।

लोग इन वीडियो को देखने का आनंद लेते हैं जहां विभिन्न जानवरों को कुछ अनोखा करते देखा जा सकता है और ये तुरंत सबका ध्यान खींच लेते हैं।

इसी तरह, अमेरिकी गायक चार्ली पुथ के गाने के साथ नृत्य करते हुए तीन प्यारे बिल्ली के बच्चों का एक वीडियो आजकल खूब वायरल हो रहा हैं।

वीडियो को इंस्टाग्राम पर ‘कैट्सडूइंगथिंग्स‘ नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है, जो सोशल मीडिया पर कैट से संबंधित कंटेंट अपलोड करता है।

वीडियो में, तीन बिल्ली के बच्चे चार्ली पुथ के गीत के साथ उचित समन्वय में थिरकते हुए देखे जा सकते हैं। वीडियो इतना मनमोहक है कि कोई भी इसे देखे बिना नहीं रह सकता। वीडियो के कैप्शन में लिखा हैं, “डांसर्स फर्स्ट , किटन्स सेकंड”

 

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जब से यह क्यूट वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया है, तब से इसे हर तरफ से ढेर सारे व्यूज और कमेंट्स मिल रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं।

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OMG :10 बच्चे पैदा करो लाखों का ईनाम और सम्मान पाओ

दुनिया भर के अलग-अलग देशों की अपनी अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां हैं। कहीं जनसंख्या अधिक है तो कहीं कम। सरकारें तय करती हैं कि देश की प्रगति और आर्थिक तंत्र के अनुसार उन्हें इसे कब बढ़ाने और कब घटाने की नीति लानी है।

इस समय रूस की एक ऐसी ही नीति चर्चा में है, जो देश में जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देने वाली है। इससे पहले चीन की जनसंख्या नीति दुनिया भर में सुर्खियां बटोरती रही है।

वहां सालों तक ‘वन चाइल्ड पॉलिसी‘ (एक बच्चा नीति) के जरिए जनसंख्या को कम किया गया। हालांकि, अब एक बार फिर इसे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भले ही बहस हो रही हो, लेकिन रूस में 10 बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को सम्मानित किए जाने की योजना लागू की जा रही है।

रूस में लौटी 1944 में बनी नीति

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने देश में सोवियत युग की ‘मदर हीरोइन पॉलिसी‘ एक बार फिर से लाग कर दी है। रूस में गिर रही जन्म दर से निपटने के लिए उन्होंने इस पॉलिसी को लागू किया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार साल 1944 में रूसी नेता जोसेफ स्टालिन ने यह नीति लागू की थी। दूसरे विश्व युद्ध में देश की अच्छी-खासी जनसंख्या खत्म होने के बाद ‘मदर हीरोइन‘ नामक नीति लाई गई थी, जिसे सोवियत यूनियन के खत्म होने के बाद बंद कर दिया गया था।

इस टाइटल को पाने वाली महिला को ‘हीरो ऑफ रशिया‘ और ‘हीरो ऑफ लेबर‘ जितना ही सामाजिक सम्मान मिलेगा।

ये महिलाएं होंगी ‘मदर हीरोइन’

‘मदर हीरोइन‘ का टाइटल उन माताओं को दिया जाएगा, जिन्होंने 10 बच्चों को जन्म दिया और पाला हो। इसके लिए उन्हें ईनाम के तौर पर 1 मिलियन रूबल यानी 13 लाख रुपए से अधिक दिए जाएंगे।

यह अवॉर्ड उन्हें 10वें बच्चे के एक साल पूरा करने के बाद मिल जाएगा। उन माताओं को भी यह टाइटल मिलेगा, जो युद्ध या आतंकी हमले में अपना कोई बेटा या बेटी खो चुकी हैं। रूसी राष्ट्रपति ने यह फैसला रूस की गिरती जन्म दर की वजह से लिया है।

साल 2021 और 2022 में रूस की मृत्यु दर, जन्म दर के मुकाबले काफी अधिक रही है। इससे पहले फिनलैंड और चीन में भी लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए लुभावने ऑफर्स दिए जा चुके हैं क्योंकि उनके यहां भी जन्म दर तेजी से कम हो रही है।

पंजाब केसरी से साभार

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हैरतअंगेज महिला, आंख पर पट्टी बांध बनाती हैं गणेश मूर्तियाँ, तोड़े कई रिकार्ड

रमा शाह मुंबई की एक ऐसी हैरतअंगेज महिला का नाम है जो ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज करवा चुकी हैं. रमा आंखों पर पट्टी बांध पिछले 17 सालों से गणेश की प्रतिमाएं बना रही हैं। शुक्रवार को उन्होंने आंखों में पट्टी बांध यह कारनामा फिर से किया।

रमा शाह मूर्तिकला में अपनी प्रतिभा का दुनियाभर में लोहा मनवा चुकीं हैं. बता दें कि यह महिला अब तक तीन लाख से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं बना चुकी हैं। रमा के नाम पर कई रिकॉर्ड हैं जिनमें से कुछ ये हैं:

  • रमा शाह ने सिर्फ तीन मिनट में गणेश की सबसे छोटी प्रतिमा बना रिकॉर्ड बनाया था।
  • रमा अजबगजब कारनामों को दिखाने वाले अमेरिका के मशहूर शो ‘रिप्‍लीज बिलीव इट ऑर नॉट’ के पैनल में भी आ चुकी हैं।
  • केवल 99 दिनों में आंख पर पट्टी बांध गणेश की रिकॉर्ड 9,999 प्रतिमाएं बनाने के कारण वह शो में नजर आईं थीं।
  • अपने हाथों से बनाई 18 हजार से ज्यादा प्रकार की गणेश प्रतिमाओं को एक जगह प्रदर्शित कर रमा ने ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज करवाया था।

रमा शाह के बारे में कुछ और बातें

  • रमा एक हाउसवाइफ हैं और वे बच्‍चों को आर्ट ऐंड क्राफ्ट की ट्रेनिंग देती हैं। वे नियमित तौर पर मूर्तियां नहीं बनाती हैं।
  • रमा का मानना है कि ईश्वर ने हर व्यक्ति को इस दुनिया में कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है।
  • वे पिछले 17 साल से अब तक हर साइज की करीब तीन लाख से ज्यादा प्रतिमाएं बना चुकी हैं।
  • इनमें से एक हजार से ज्‍यादा प्रतिमाएं उन्‍होंने आंखों पर पट्टी बांधकर बनाई हैं।
  • रमा ने 2004 में गुजरात के भावनगर में आंखों पर पट्टी बांधकर एक गणेश प्रतिमा बनाई थी। इसे उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री  नरेंद्र मोदी को गिफ्ट भी किया था।
  • रमा की इस सफलता में उनकी फैमिली और हसबैंड का काफी योगदान है। उनके तीन बच्‍चे इस काम में उनका काफी सहयोग देते हैं।
  • रमा शाह की अपनी वेबसाइट है और फेसबुक पेज भी है.

जानिए अलसी के बीज से होने वाले चमत्कारी फायदें!!

अलसी के बीज का उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता रहा है। औषधीय गुणों के अलावा, अलसी के बीज में कई पोषक तत्व होते हैं। ये लिग्नान, एंटीऑक्सिडेंट, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन बी, मैग्नीशियम, मैंगनीज, अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA), और ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं।

इन पोषक तत्वों के सेवन से खतरनाक बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। यदि नियमित रूप से सेवन किया जाए तो कब्ज, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हृदय की समस्याओं और कैंसर से बचा जा सकता है।

कोलेस्ट्रॉल पिघलता है

अध्ययनों से पता चला है कि अलसी के बीज एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को घोलते हैं और एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) बढ़ाते हैं। अलसी के बीज ओमेगा-3 फैट से भरपूर होते हैं। दीनी रक्त में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करती है।

अलसी रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में बेहतर काम करती है। जो लोग नियमित रूप से अलसी का सेवन करते हैं उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी कम हो जाता है।

बीपी कंट्रोल में रहता है।

अलसी के बीज रक्तचाप को भी कम करते हैं। अलसी के बीज मधुमेह से पीड़ित लोगों में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इन्हें अपने आहार में शामिल करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। यह हमारे शरीर को कई तरह के संक्रमणों से बचाता है।

कैंसर कोशिकाओं से लड़ता है

अलसी के बीज एस्ट्रोजन और एंटीऑक्सीडेंट दोनों से भरपूर होते हैं, जो महिलाओं के लिए आवश्यक हैं। अलसी के बीज में किसी भी अन्य सब्जी की तुलना में अधिक लिग्नान होते हैं।

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि इन बीजों में मौजूद ओमेगा-3 एसिड में ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसी चीजों को नियंत्रित करने का गुण होता है।

प्रोटीन स्टोर हाउस

अगर आप शाकाहारी हैं तो आपको पता होना चाहिए कि अलसी एक सुपर फूड है। ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं। अगर आप इसे रोजाना अपने आहार में शामिल करेंगे तो प्रोटीन की कमी दूर हो जाएगी।

बाल मजबूत होते हैं

इसमें मौजूद ओमेगा फैटी एसिड कोलेजन के उत्पादन में मदद करता है जो त्वचा और बालों के रोम को स्वस्थ रखता है। अगर फॉलिकल्स स्वस्थ रहेंगे तो बाल मजबूत और घने होंगे। अलसी के बीज बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं।

इन बीजों में विटामिन-बी भी प्रचुर मात्रा में होता है। यह बालों को मजबूत बनाता है और रूखेपन को रोकता है और बालों को रेशमी और चमकदार बनाता है।

कैसे करें इस्तेमाल?

इन्हें कच्चा खाने से बेहतर है कि इन्हें भूनकर सुखा लें। अगर ये तले हुए हैं। इसमें हानिकारक फाइटिक एसिड निकल जाएगा। अंकुरित होने के बाद खाना भी अच्छा होता है। ये बीज थोड़े फूल जाते हैं और पानी में डालने पर जेली बन जाते हैं।

इसका मतलब है कि वे अधिक पानी अवशोषित करते हैं। इसलिए आपको एक चम्मच या आधा चम्मच खाने के बाद ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। नहीं तो कब्ज की समस्या होने का खतरा रहता है।

अगर ये सावधानियां बरती जाएं तो अलसी के फायदे पूरी तरह से प्राप्त किए जा सकते हैं। अगर आप इन्हें सूखे रूप में खाना चाहते हैं तो आपको इन्हें फ्रिज में जरूर रखना चाहिए। अन्यथा पोषक तत्व जल्दी खत्म हो जाएंगे।

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जानिए बारिश के मौसम में कैसे रखें पाचन शक्ति को दुरुस्त

बारिश के मौसम में पेट दर्द, गैस, फूड इंफेक्शन की समस्याएं बढ़ जाती हैं जिससे हमारी पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है। इस तरह की समस्या के होने का कारण एवं उपचार हमारे प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में विस्तृत रूप से वर्णित किये गए है।

आयुर्वेद में एक वर्ष को छह ऋतुओं में बांटा गया है, जो दो काल में विभाजित है। अदन काल और विसर्ग काल। अदन काल में शिशिर, बसंत और ग्रीष्म ऋतु होती हैं, इन ऋतुओं में क्रमशः मनुष्य की शक्ति क्षीण होती जाती है और गर्मी के मौसम में मनुष्य का बल सबसे कम होता है। इस समय जठराग्नि (गैस्ट्राइटिस) भी कमजोर होती है।

वर्षा ऋतु के आगमन से विसर्ग काल प्रारंभ होता है। इसमें वर्षा, शरद और हेमंत ऋत हैं। विसर्ग काल में मनुष्य का बल क्रमशः बढ़ता है। ग्रीष्म और वर्षा ऋतु में मनुष्य का बल सबसे कम होता है और उसके अनुसार जठराग्नि ग्रीष्म ऋतु में दुर्बल होती है, इसलिए वर्षा ऋतु में भी जठराग्नि (गैस्ट्राइटिस) अधिक कमजोर हो जाती है।

वर्षा ऋतु में भूमि से भाप निकलने, आकाश से जल बरसने तथा जल का अम्लीकरण होने के कारण पाचन शक्ति और भी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण मनुष्य के खान-पान में थोड़ी भी लापरवाही उसे फूड इंफेक्शन का शिकार बना देती है।

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आयुर्वेद आचार्यों ने वर्षा ऋतु में तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) का शमन (कम) करने वाली क्रिया करने का उल्लेख किया है। अर्थात् तीनों दोषों को दवाओं और दिनचर्या के माध्यम से शरीर में संतुलित रखना चाहिए।

खाने में क्या शामिल करें

पुराने जौ, गेहूं, चावल का संभव हो तो उपयोग करें, क्योंकि नया अन्न पचने में भारी होता है। मूंग दाल का सेवन अधिक करें। सब्जियों में परवल, कद्, करेला, लौकी, बैंगन आदि का अधिक प्रयोग करें।

क्या शामिल न करें

फास्ट फूड, तले हुए खाद्य पदार्थ आलबड़ा, समोसा, कचौरी और लड्डू, सत्तू आदि न खाएं। इस मौसम में दही को आयुर्वेद में वर्षा ऋतु में निषेध किया गया है, क्योंकि दही तासीर से गर्म होता है और पचने में भारी होता है।

बारिश के मौसम ऐसे करें उपचार

उल्टी होने पर

• एक बर्तन में 20 ग्राम तुअर (अरहर) की दाल धोकर उसमें 50 मिलीग्राम पानी में मिलाएं। एक घंटे बाद पानी को छान लें और 15-15 मिनट पर एक-एक चम्मच सेवन करें।

• पुदीने की पत्ती-40, कालीमिर्च-5 ग्राम, काला नमक-2 ग्राम, इमली-4 ग्राम इन सभी को मिलाकर पीसकर 15-15 मिनट के अंतर से आधा-आधा चम्मच लें।

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दस्त होने पर

आम और जामुन या दोनों में से किसी एक के पत्ते को छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी में उबालें। जब एकचौथाई पानी बचे तब उस काढ़े को आंच से उतार लें। 50 से 100 एमएल की मात्रा में इसका सेवन करने से उल्टी और दस्त दोनों ही समस्या से राहत मिलती है।

पेट दर्द होने पर

  • हॉट वॉटर बैग या बॉटल में गर्म पानी भरकर सिकाई करने से आराम मिलेगा।
  • एक चम्मच अजवाइन का गर्म पानी के साथ सेवन करें।
  • पुदीने के रस की दो-चार बूंदें बताशे में या पानी में डालकर लें।

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क्या करना चाहिए

  • खाने में ऐसी वस्तुओं का सेवन करें, जो आपकी पाचन शक्ति को बल दें जैसे पिप्पली, काली मिर्च, अदरक, अजमोदादि चूर्ण, पंचकोल चूर्ण आदि।
  • भोजन में भारतीय मसाले जो सामान्यतः हम अपने किचन में प्रयोग करते है, जैसे अजवाइन, जीरा, हींग, हल्दी आदि का प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें।
  • भोजन अदरक का प्रयोग जरूर करें।
  • पानी उबालकर ठंडा करके पिएं।
  • हरड़, जिसे हरीतकी भी कहते हैं, वर्षा ऋतु में इसका सेवन सेंधा नमक के साथ करना चाहिए। इसके सेवन से वर्षा ऋतु में होने वाले विभिन्न रोगों से रक्षा होती है।
  • खाने में शुद्ध घी का भी प्रयोग करें। रोटी में घी लगाकर खाएं या दाल, खिचड़ी में घी डालकर खाएं।

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भारत के इस बटरफ्लाई फॉरेस्ट में उड़ती हैं लाखों तितलियां, बारिश में दिखता है अद्भुत नजारा

जब भी आप घूमने का प्लान बनाते हैं तो सबसे पहली पसंद पहाड़ और समुद्र तट के बीच होते हैं। लोगों को पहाड़ों पर प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है, वहीं समुद्र के किनारे आराम करने और मस्ती करने को मिलता है।

अगर आप प्रकृति से प्रेम करते हैं और प्रकृति को देखकर आपका मन खुश हो जाता है तो आपको कर्नाटक के बटरफ्लाई फॉरेस्ट को जरूर देखना चाहिए। यहां हजारों तरह की तितलियां हैं। इसके अलावा पक्षियों की चहचहाहट और हरियाली के बीच समय बिताने का मौका मिलता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको इसी खूबसूरत “बटरफ्लाई फॉरेस्ट” के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं:-

यह जंगल भारत के घने जंगलों में से एक है, दक्षिण भारत में कर्नाटक में मौजूद “तितली वन”। यह जंगल कर्नाटक के कोडागु, मलनाड और दक्षिण कन्नड़ से घिरा हुआ है।

क्या है इस तितली वन का नाम

कर्नाटक के इस प्रसिद्ध तितली वन का नाम ‘बिसले घाट‘ है। बिसले घाट के जंगल की खासियत यह है कि यहां लाखों तितलियां पाई जाती हैं। बारिश में इस घने जंगल में प्रवासी तितलियां नजर आती हैं।

इस जंगल में तितलियों की किस्में हैं जैसे कॉमन कैस्टर, कॉमन ग्लास येलो, कॉमन जे, प्लेन टाइगर, स्पॉटेड तोता, लाइन ब्लू, बाल्का तोता, डिंगी स्विफ्ट आदि। इसके अलावा इस जंगल में हजारों तरह के पक्षी देखने को मिलते हैं।

तितली वन तक कैसे पहुंचे

यह जंगल कर्नाटक के हासन जिले के सकलेशपुर में मौजूद है। यहां पहुंचने के लिए आप सकलेशपुर बस या ट्रेन की मदद से आ सकते हैं। सकलेशपुर से बिसले घाट तक टैक्सी और बसें भी चलती हैं, जो 250 किलोमीटर दूर है।

बिसले घाट जाने का सबसे अच्छा समय

अगर आप प्रकृति से प्यार करते हैं, तो आप इस हरे भरे जंगल में आराम के कुछ पल बिताने के लिए आ सकते हैं। बिसले घाट घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून के मौसम के दौरान होता है। बारिश में आप इस घाटी पर न केवल तितलियां बल्कि प्रवासी पक्षी भी देख सकते हैं।

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जन्माष्टमी 2023: राशि के अनुसार लगाएं कान्हा जी को भोग, और पहनाएं वस्त्र !!

भगवान श्रीकृष्ण जन्म-उत्सव भादौ कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन रात्रि 12 बजे मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का पूजन विधि-विधानपूर्वक करना चाहिए। इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 18 अगस्त को मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी तिथि को रोहिणी नक्षत्र और वृष लग्न में हुआ था। यह पर्व देशभर में मनाया जाता है। इस दिन बाल गोपाल के लिए पालकी सजाई जाती है। उनका शृंगार किया जाता है।

वहीं इस दिन नि:संतान दंपत्ति विशेष तौर पर जन्माष्टी का व्रत रखते हैं। वे बाल गोपाल कृष्ण जैसी संतान की कामना से यह व्रत रखते हैं और मुरलीवाले को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाते हैं।

ज्योतिषीय मान्यता है कि इस दिन राशि के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का शृंगार और भोग लगाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था और व्रत हमेशा उदया तिथि में रखना ही उत्तम माना जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी 2023 कब है? 

पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर 2023 को दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 7 सितंबर 2023 शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा।

आज हम आपको हम बताने जा रहे हैं जन्माष्टमी पर राशि के अनुसार लगाएं भोग और पहनाएं वस्त्र:-

मेष राशि

इस राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार लाल रंग के कपड़े से करने के बाद उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिए।

वृषभ राशि

जन्माष्टमी के दिन वृषभ राशि के जातकों को कान्हा को माखन का भोग लगाना चाहिए।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों को जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण भगवान का चंदन से तिलक करके दही अर्पण करना चाहिए।

कर्क राशि

इस राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण का सफेद वस्त्र से श्रृंगार करना चाहिए और फिर उन्हें दूध और केसर का भोग लगाना चाहिए।

सिंह राशि

जन्माष्टमी के दिन सिंह राशि के लोगों को कान्हा जी का श्रृंगार गुलाबी रंग के कपड़ों से करना चाहिए। इसके बाद अष्टगंध का तिलक लगाना चाहिए। प्रसाद में माखन-मिश्री चढ़ाएं।

कन्या राशि

कन्या राशि के लोग जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को हरे रंग के वस्त्रों से सजाएं। इसके बाद उन्हें मावे का भोग लगाएं।

तुला राशि

तुला राशि के जातक भगवान श्रीकृष्ण को गुलाबी रंग के वस्त्र पहनाएं और इसके बाद उन्हें घी का भोग लगाएं।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातक भगवान श्रीकृष्ण को जन्माष्टमी पर लाल वस्त्र पहनाएं और साथ ही उन्हें माखन या दही जरूर चढ़ाएं।

धनु राशि

धनु राशि वालों को भगवान श्रीकृष्ण को पीले परिधान पहनाने चाहिए। पीले रंग से बनी मिठाई जरूर चढ़ाएं।

मकर राशि

कान्हा जी का हल्के नीले रंग के वस्त्रों से श्रृंगार करना चाहिए और पूजा में मिश्री का भोग लगाना चाहिए।

कुंभ राशि

कुभ राशि के जातक जन्माष्टमी पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को गहरे नीले रंग का वस्त्र पहनाएं। फिर कान्हा को बालूशाही का भोग लगाएं।

मीन राशि

जन्माष्टमी पर मीन राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण को सुनहरे पीतांबरी वस्त्र और पीले ही रंग के कुंडल पहनाएं। फिर भोग में केसर और बर्फी चढ़ाएं।

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रहस्यों से भरा है स्टोनहेंज

विश्वभर में ऐसी कई महान कलाकृतियां हैं, जो अपने विचित्र कारणों की वजह से हमेशा चर्चा में रहती हैं। इन्हें देखने के बाद दिमाग में कई तरह के सवाल उठते हैं कि आखिर इनका निर्माण कैसे किया गया होगा?

वह भी उस समय, जब किसी प्रकार की उत्तम तकनीक का विकास नहीं हुआ था, तो भारी-भरकम पत्थरों की मदद से इन्हें कैसे बनाया गया?

पूरे ब्रिटेन में पत्थरों के घेरे फैले हुए हैं जिन्हें हजारों साल पहले बनाया गया था, लेकिन आज भी इनके बनाए जाने की वजह एक रहस्य बनी हुई है।

इनमें सबसे प्रसिद्ध है ‘स्टोनहेंज‘, जोकि 3000 ईसा पूर्व से 1600 ईसा पूर्व के बीच में बनाई गई एक विशाल संरचना है। इन पत्थरों में कई राज दफन हैं, जिनका रहस्य अब तक उजागर नहीं हो पाया है।

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विश्व धरोहर स्थल

इस जगह को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल किया गया है। यह ब्रिटेन के सबसे लोकप्रिय पर्यटन आकर्षणों में से एक है। कई देशों से पर्यटक स्टोनहेंज’ के अद्भुत पत्थरों को देखने के लिए आते हैं।

यह हजारों ऐसे लोगों के लिए एक तरह का आध्यात्मिक केंद्र भी है जो मानव समझ से परे की वास्तविकताओं में विश्वास रखते हैं। ये लोग गर्मियों और सर्दियों में ‘सोल्स्टिस‘ पर यहां आते हैं।

रहस्यमयी इतिहास

‘स्टोनहेंज‘ की इन चट्टानों के पीछे एक रहस्यमयी इतिहास छिपा हुआ है, जिसे लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं। वैसे ‘स्टोनहेंज’ की इन चट्टानों को ‘मैगालिथ‘ के नाम से भी जाना जाता है।

कई लोगों का कहना है कि इसका निर्माण प्रागैतिहासिक काल में हुआ था। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इन रहस्यमयी चट्टानों के इतिहास को कांस्य युग से भी जोड़ कर देखते हैं। ‘स्टोनहेंज’ की विशालकाय चट्टानों की ऊंचाई करीब 23 फुट तक है।

इन चट्टानों को एक गोलाकार आकृति में ऊंचा खड़ा किया गया है। बड़ा सवाल है कि जब उस दौरान किसी प्रकार की वैज्ञानिक उन्नति नहीं हुई थी तो इन विशालकाय चट्टानों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर कैसे इस संरचना को बनाया गया होगा?

इन विशालकाय चट्टानों में कुछ चट्टानों का वजन करीब 50 टन तक है। इस संरचना को बनाने में ब्ल्यू स्टोन्स का इस्तेमाल किया गया था।

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हीलिंग प्रॉपर्टीज

मान्यता है कि ‘स्टोनहेंज’ के पत्थरों के अंदर ‘हीलिंग प्रॉपर्टीज‘ यानी इलाज करने की शक्ति भी पाई जाती है। एक समय यह स्थान ‘हीलिंग प्लेस‘ हुआ करता था, जहां बीमार लोग आया करते थे। कहा जाता है कि इन पत्थरों को छूने से वे ठीक हो जाते थे।

कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार इन्हें एलियंस यानी दुसरे ग्रह के जीवों के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें इंसानों ने नहीं बल्कि एलियंस ने बनाया था। उनके अनुसार जिस तरह से पत्थरों को एक सुनियोजित ढंग से लगाया गया है, उसके पीछे काफी गणित छुपा हुआ है।

यह काम उस समय के लोगों के लिए करना नामुमकिन था। अगर ‘स्टोनहेंज’ के इन पत्थरों को ऊपर से देखा जाए तो ये बिल्कुल हमारे सौरमंडल की तरह दिखते हैं।

पंजाब केसरी से साभार

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, बनेंगे बिगड़े काम!!

हिंदू धर्म पंचांग के मुताबिक हर साल भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता हैं। इस बार जन्माष्टमी 6 सितम्बर 2023 को मनाई जाएगी। ये त्यौहार देशभर में धूम धाम के साथ मनाया जाता है लेकिन मथुरा और वृंदावन में इस त्यौहार की विशेष धूम होती है।

इस खास दिन बाल गोपाल के लिए पालकी सजाई जाती है वही जन्माष्टमी के दिन निसंतान दंपत्ति व्रत रखते हैं और बालगोपाल जैसे सुंदर बच्चे की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन विशेष उपायों को करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ विशेष उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं:

जन्माष्टमी से जुड़े उपाय

  • अगर आप आर्थिक परेशानियों से गुजर रहे हैं तो जन्माष्टमी के दिन घर में गाय और बछड़े की मूर्ति लेकर आएं। ऐसा करने से आपकी आर्थिक समस्या कम हो जाएगी। इसके अलावा संतान से जुड़ी परेशानियां भी दूर होंगी। इस दिन श्रीकृष्ण जी को चांदी की बांसुरी अर्पित करनी चाहिए। पूजा के बाद इस बांसुरी को अपने धन रखने वाली जगह या पर्स में रखना चाहिए।
  • मान्यताओं के मुताबिक जन्माष्टमी के दिन भगवान को 56 भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी इच्छा पूरी करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए परिजात के पुष्प अर्पित करें। ये फूल कृष्ण जी को बेहद प्रिय हैं। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन इन फूलों को अर्पित करने से इच्छा पूरी होती है।
  • जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जी की बाल रूप में पूजा की जाती है। जन्माष्टमी के दिन शंख में दूध लेकर भगवान श्रीकृष्ण के बालस्वरूप का अभिषेक करें। इस खास दिन पर श्रीकृष्ण को मोरपंख अर्पित करें।
  • भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी को परिजात के पुष्प बेहद प्रिय हैं और कृष्ण जी विष्णु जी का अवतार हैं, इसलिए जन्माष्टमी के दिन पूजा में परिजात के फूल अवश्य शामिल करें।

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रोचक तथ्य: लोगों की आंखें नीली, हरी, भूरी या काली क्यों होती हैं, यहां जानिए कारण?

आपने देखा होगा कि हर व्यक्ति की आंखों का रंग अलग-अलग होता है। किसी की भूरी, किसी की काली और इसके अलावा कई लोगों की आंखें हरी, नीली और गहरे भूरे रंग की होती हैं।

ऐसी अलग आंखें लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींचती हैं। कई लोग आकर्षक दिखने के लिए अपनी आंखों का रंग भी बदल लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अलग-अलग आंखों के रंग वाले लोगों के पीछे क्या कारण होते हैं? आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं :-

मेलेनिन की मात्रा आंखों का रंग निर्धारित करती है

हमारी आंखों का रंग पुतली में मेलेनिन की मात्रा से निर्धारित होता है। इसके अलावा प्रोटीन का घनत्व और आंखों का रंग भी आसपास की रोशनी पर निर्भर करता है। हमारी आंखों के रंग को 9 कैटेगरी में बांटा गया है, जबकि 16 जीन्स हैं। ये हमारी आंखों के रंग से जुड़े होते हैं।

आंखों के रंग के लिए जिम्मेदार दो प्रमुख जीन OCA2 और HERC2 हैं। ये दोनों क्रोमोसोम 15 पर मौजूद होते हैं। दरअसल, HERPC2 जीन OCA2 की अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने का काम करता है। HERC2 को कुछ हद तक नीली आंखों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। जबकि, OCA2 का संबंध नीली और हरी आंखों से है।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि दुनिया में ज्यादातर लोगों की आंखें भूरी होती हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि इसे विकसित करने वाले जीन ज्यादातर लोगों में मौजूद होते हैं। वहीं, नीली आंखों वाले लोगों की संख्या दुनिया में सबसे कम है।

नीली आंखों का संबंध इनसे है

भूरी आंखों वाले लोग आपको दुनिया में हर जगह आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन नीली आंखों वाले लोगों को ढूंढना बहुत मुश्किल होता है। माना जाता है कि नीली आंखों वाले लोगों के पूर्वज एक ही होते हैं। करीब 6 हजार से 10 हजार साल पहले मानव जीन में बदलाव के कारण लोगों की आंखों का रंग नीला पड़ने लगा था।

आपको जानकर हैरानी होगी कि वैज्ञानिकों के अनुसार जीवन के शुरूआती दौर में हमारी आंखों का रंग बहुत तेजी से बदल सकता है। कभी-कभी ऐसा होता है कि बच्चा नीली आंखों के साथ पैदा होता है, लेकिन बाद में आंखों का रंग भूरा हो जाता है।

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