बरसात के मौसम में खाने पीने का रखें खास ध्यान, जानिए कुछ जरूरी बातें

बरसात का मौसम चल रहा है। बरसात के मौसम में लोगों को खुद को स्वस्थ रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। लाइफस्टाइल से लेकर खान-पान तक, इसका ख्याल रखने की जरूरत है।

जानकारों के मुताबिक बरसात के मौसम में ज्यादा देर तक रखा हुआ खाना नहीं खाना चाहिए। इससे आपकी सेहत खराब हो सकती है और आप परेशानी का शिकार हो सकते हैं। आज इस पोस्ट में हम जानेंगे बरसात के मौसम में क्या खाएं और क्या न खाएं, तो चलिए जानते हैं :-

बरसात के मौसम में ज्यादा देर तक रखा हुआ खाना खाने से बचना चाहिए। कुछ ऐसी चीजें हैं, जो इस मौसम में जल्दी खराब हो जाती हैं और इन्हें खाने से पेट में संक्रमण समेत कई बीमारियां हो सकती हैं।

इस मौसम में लोगों को ताजा और घर का बना खाना ही खाना चाहिए। खाना बनाते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए और फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। आप सब्जियों को गर्म पानी में नमक डालकर साफ कर सकते हैं।

ऐसे फलों का सेवन करना चाहिए

बारिश में फल खाते वक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। कोशिश करें कि कटे हुए फल न खरीदें। जिन फलों को छीलकर खाया जा सकता है, उनका सेवन करना चाहिए।

इसके अलावा पैकेट्स जूस की जगह ताजा जूस पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। स्ट्रीट फूड से भी दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि यह हाइजीन की दृष्टि से बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।

इम्युनिटी कैसे मजबूत करें

इस मौसम में लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और अगर हम इसे मजबूत करें तो बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए आपको अपनी डाइट में अदरक, लहसुन और नींबू को शामिल करना होगा। इसके साथ ही हेल्दी डाइट लेनी होती है।

साफ-सफाई का ध्यान रखना होगा और बाहर के खाने से परहेज करना होगा। अगर इन सभी बातों का ध्यान रखा जाए तो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।

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एकाग्रता और कौशल का बेहतरीन उदाहरण है यह वीडियो

ऐसा कहा जाता है कि कोई भी व्यक्ति जीवन में एकाग्रता से सब कुछ हासिल कर सकता है। कड़ी मेहनत और प्रशिक्षण के कारण लोग हर मंजिल को हासिल कर सकते हैं।

लेकिन यह बात तो सभी जानते हैं कि एकाग्रता हासिल करना इतना आसान नहीं है। एक शांत और एकाग्र चित्त पाना कठिन है। इन दिनों एक वीडियो चर्चा में है जिसमें व्यक्ति की कुशलता, मेहनत और एकाग्रता दिखाई दे रही है।

हाल ही में IPS ऑफिसर दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया है। इस वीडियो की खास बात यह है कि इसमें एक शख्स जिस तरह से अपने शरीर पर तलवार के बैलेंस के साथ स्टंट कर रहा है और उससे तरह-तरह के करतब करता दिख रहा है, वह काबिले-ए-तारीफ है।

इसमें एक शख्स हाथों में बड़ी तलवार लिए नजर आ रहा है। वह इसे घुमाते हुए अपने कंधे पर नाचने लगते हैं, कभी अपने हाथों पर और फिर इसे अपने पैरों से संतुलित करने लगते हैं। वह तलवार को शरीर पर इस तरह से संतुलित करता है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं।

इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है- ”एकाग्रता, कौशल और वर्षों के अभ्यास का उदाहरण। मानो तलवार भी उन्हीं के शरीर का अंग हो…”

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जानिए पुत्रदा एकादशी की कथा और पूजा विधि के बारे में

हिंदू कैलेंडर में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पुत्रदा एकादशी, जिसे पवित्रा एकादशी और पवित्रोपन एकादशी के रूप में भी जाना जाता है, अंग्रेजी कैलेंडर पर जुलाई से अगस्त के बीच में आती है।

हमारी पिछली पोस्ट में हमने आपको पुत्रदा एकादशी के शुभ महूर्त और महत्व के बारे में बताया था और इस पोस्ट में हम जानेगें पुत्रदा एकादशी की कथा और पूजा विधि के बारे में तो चलिए जानते हैं।

शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाने वाला यह व्रत दशमी तिथि से शुरू हो जाता है। प्रत्येक एकादशी व्रत की एक विशिष्ट कथा होती है जोकि एक पौराणिक कथा भी जुड़ी होती है।

व्रत कथा

किंवदंती द्वापर युग की है महिष्मति नाम की एक नगरी थी, जिसमें महीजित नाम का राजा राज्य करता था। वह उन सबसे अच्छे शासकों में से एक थे जिन्हें लोगों ने कभी देखा था। वह एक परोपकारी, दयालु, जिम्मेदार और उदार शासक था। उनके नेतृत्व में, उनकी प्रजा सुरक्षित महसूस करती थी।

लेकिन पुत्रहीन होने के कारण राजा को राज्य सुखदायक नहीं लगता था। उसका मानना था कि जिसके संतान न हो, उसके लिए यह लोक और परलोक दोनों ही दु:खदायक होते हैं। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने अनेक उपाय किए परंतु राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई।

वृद्धावस्था आती देखकर राजा ने प्रजा के प्रतिनिधियों को बुलाया और कहा- हे प्रजाजनों! मेरे खजाने में अन्याय से उपार्जन किया हुआ धन नहीं है। न मैंने कभी देवताओं तथा ब्राह्मणों का धन छीना है।

किसी दूसरे की धरोहर भी मैंने नहीं ‍ली, प्रजा को पुत्र के समान पालता रहा। मैं अपराधियों को पुत्र तथा बाँधवों की तरह दंड देता रहा। कभी किसी से घृणा नहीं की। सबको समान माना है। सज्जनों की सदा पूजा करता हूँ। इस प्रकार धर्मयुक्त राज्य करते हुए भी मेरे पु‍त्र नहीं है। सो मैं अत्यंत दु:ख पा रहा हूँ, इसका क्या कारण है?

राजा महीजित की इस बात को विचारने के लिए मं‍त्री तथा प्रजा के प्रतिनिधि वन को गए। वहाँ बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों के दर्शन किए। राजा की उत्तम कामना की पूर्ति के लिए किसी श्रेष्ठ तपस्वी मुनि को देखते-फिरते रहे।

एक आश्रम में उन्होंने एक अत्यंत वयोवृद्ध धर्म के ज्ञाता, बड़े तपस्वी, परमात्मा में मन लगाए हुए निराहार, जितेंद्रीय, जितात्मा, जितक्रोध, सनातन धर्म के गूढ़ तत्वों को जानने वाले, समस्त शास्त्रों के ज्ञाता महात्मा लोमश मुनि को देखा, जिनका कल्प के व्यतीत होने पर एक रोम गिरता था।

सबने जाकर ऋषि को प्रणाम किया। उन लोगों को देखकर मुनि ने पूछा कि आप लोग किस कारण से आए हैं? नि:संदेह मैं आप लोगों का हित करूँगा। मेरा जन्म केवल दूसरों के उपकार के लिए हुआ है, इसमें संदेह मत करो।

लोमश ऋषि के ऐसे वचन सुनकर सब लोग बोले- हे महर्षे! आप हमारी बात जानने में ब्रह्मा से भी अधिक समर्थ हैं। अत: आप हमारे इस संदेह को दूर कीजिए। महिष्मति पुरी का धर्मात्मा राजा महीजित प्रजा का पुत्र के समान पालन करता है। फिर भी वह पुत्रहीन होने के कारण दु:खी है।

उन लोगों ने आगे कहा कि हम लोग उसकी प्रजा हैं। अत: उसके दु:ख से हम भी दु:खी हैं। आपके दर्शन से हमें पूर्ण विश्वास है कि हमारा यह संकट अवश्य दूर हो जाएगा क्योंकि महान पुरुषों के दर्शन मात्र से अनेक कष्ट दूर हो जाते हैं। अब आप कृपा करके राजा के पुत्र होने का उपाय बतलाएँ।

यह वार्ता सुनकर ऋषि ने थोड़ी देर के लिए नेत्र बंद किए और राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत जानकर कहने लगे कि यह राजा पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य था।

निर्धन होने के कारण इसने कई बुरे कर्म किए। यह एक गाँव से दूसरे गाँव व्यापार करने जाया करता था। एक समय ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन मध्याह्न के समय वह जबकि वह दो दिन से भूखा-प्यासा था, एक जलाशय पर जल पीने गया। उसी स्थान पर एक तत्काल की ब्याही हुई प्यासी गौ जल पी रही थी।

राजा ने उस प्यासी गाय को जल पीते हुए हटा दिया और स्वयं जल पीने लगा, इसीलिए राजा को यह दु:ख सहना पड़ा। एकादशी के दिन भूखा रहने से वह राजा हुआ और प्यासी गौ को जल पीते हुए हटाने के कारण पुत्र वियोग का दु:ख सहना पड़ रहा है।

ऐसा सुनकर सब लोग कहने लगे कि हे ऋषि! शास्त्रों में पापों का प्रायश्चित भी लिखा है। अत: जिस प्रकार राजा का यह पाप नष्ट हो जाए, आप ऐसा उपाय बताइए।

इस पर लोमश ऋषि ने मंत्रियों से कहा कि अगर आप लोग चाहते हैं कि राजा को पुत्र की प्राप्ति हो तो श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत रखें और द्वादशी के दिन अपना व्रत राजा को दान कर दें।

मंत्रियों ने ऋषि के बताए विधि के अनुसार व्रत किया और व्रत का दान कर दिया। इससे राजा को पुत्र की प्राप्ति हुई। इस कारण पवित्रा एकादशी को पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी विष्णु पूजा विधि

  • एकादशी तिथि पर, नहाने के पानी में कुछ बूंदें गंगा जल की अवश्य मिला लें।
  • स्नान करने के पश्चात साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत करने का संकल्प लें ।
  • अपने घर के पूजा कक्ष में पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं और सामने एक लकड़ी की चौकी रखें। अब इस चौकी पर थोड़ा सा गंगाजल छिड़क कर इसे शुद्ध करें। अब चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना करें।
  • भगवान गणेश की पूजा करें और उनका आशीर्वाद लें। फिर, भगवान विष्णु का आह्वान करें।
  • भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाएं। भगवान विष्णु को जल, पुष्पम, गंधम, दीप, धूप और नैवेद्य चढ़ाते समय ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय‘ का जाप करें।
  • फिर, पान, सुपारी, दो टुकड़ों में टूटा हुआ एक भूरा नारियल, केले या अन्य फल, चंदन, कुमकुम, हल्दी, अक्षत और दक्षिणा अर्पित करें। इस वस्तु के संग्रह को तंबूलम के नाम से भी जाना जाता है।
  • संध्याकाल में श्रावण पुत्रदा एकादशी की व्रत की कथा सुने और फलाहार करें। यदि आप पूरा दिन व्रत करने में सक्षम नहीं है तो आप दिन में भी फलहार कर सकते हैं।
  • अगले दिन सुबह स्नान करने के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद उन्हें दान दक्षिणा दें और व्रत का पारण करें।
    श्रावण पुत्रदा एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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पुत्रदा एकादशी 2022:- सावन के महीने में इस दिन करें यह व्रत शिव एवं विष्णु दोनों की होगी कृपा,जानिए शुभ मुहूर्त व महत्व

पुत्रदा एकादशी 2022: सावन का महीना भक्ति और आराधना का महीना होता है। लोग इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा और आराधना करते हैं। लेकिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी सावन के महीने में एक खास दिन आता है जिसे पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।

हर महीने एकादशी दो बार आती है, और प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष महत्व होता है। लेकिन इनमें से कुछ को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। इन्हीं में से एक है पुत्रदा एकादशी

हिंदू कैलेंडर में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पुत्रदा एकादशी, जिसे पवित्रा एकादशी और पवित्रोपन एकादशी के रूप में भी जाना जाता है, अंग्रेजी कैलेंडर पर जुलाई से अगस्त के बीच में आती है।

सभी एकादशी की तरह, यह एकादशी भी भगवान विष्णु को समर्पित है और यह एकादशी व्रत पति-पत्नी द्वारा एक साथ किया जाता है, ताकि पुत्र की प्राप्ति हो सके। यह दिन वैष्णवों के लिए विशेष रूप से अनुकूल है, जो विष्णु के अनुयायी हैं।

पुत्रदा‘ शब्द का अर्थ है ‘पुत्रों का दाता’ और इसलिए यह माना जाता है कि श्रावण के महीने में इस एकादशी का व्रत करने से पुत्र की इच्छा पूरी हो सकती है।

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पुत्रदा एकादशी 2022: तिथि व शुभ मुहूर्त

श्रावण पुत्रदा एकादशी 08 अगस्त 2022 सोमवार को है। पुत्रदा एकादशी कामिका एकादशी के बाद और अजा एकादशी (भद्र कृष्ण पक्ष) से ​​पहले आती है। इसकी शुरुआत – 7 अगस्त, रविवार रात 11 बजकर 50 मिनट पर होगी और 8 अगस्त, सोमवार को रात 9 बजे तक रहेगी।

महत्व

हमारे हिंदू समाज में बेटे का होना महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वह बुढ़ापे में अपने पिता और मां की देखभाल करता है। यहां तक ​​​​कि पूर्वज संस्कार केवल पुरुष बच्चे द्वारा ही किया जाता है।

हिंदू धर्म में मनाई जाने वाली 26 एकादशियों में से प्रत्येक का अपना विशिष्ट महत्व होता है। श्रावण शुक्ल पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकादशी में निःसंतान दंपति को पुरुष संतान देने की शक्ति होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी के महत्व का उल्लेख ‘भविष्य पुराण‘ में राजा युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण के बीच चर्चा के रूप में किया गया है। यहां भगवान कृष्ण ने स्वयं इस पवित्र व्रत को करने के अनुष्ठानों और लाभों के बारे में बताया।

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मंत्र:-

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

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माधुरी दीक्षित के लोकप्रिय गाने ‘घाघरा’ पर कोरियाई छात्रों का डांस देखकर हैरान रह जायेंगे आप, वीडियो देखें

गाने सूनना किसे पसंद नहीं है खासकर बालीवुड के गानों की बात करें तो इनका क्रेज इतना बढ़ता जा रहा है कि इनकी चर्चा दूर-दूर तक होती है। बालीवुड के गानों की धूम भारत ही नहीं विदेशों तक मची है।

ऐसा देखने को तब मिला जब कुछ कोरियाई छात्रों को बालीवुड के गानों पर डांस करते देखा गया। एक वायरल वीडियों  में कोरियाई छात्र बालीवुड फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ के माधुरी दीक्षित के गाने पर डांस करते दिख रहे हैं। इस वीडियो को काफी पसंद भी किया जा रहा है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में, कोरियाई छात्रों के एक समूह को हिट आइटम नंबर ‘घाघरा’ की धुन पर थिरकते देखा जा सकता है।

सभी छात्र गाने के हर लाइन पर ऐसे डांस कर रहे हैं मानों उन्हें गाना समझ आ रहा हो। 2013 की फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी‘ के गाने घागरा पर माधुरी दीक्षित और रणबीर कपूर ने अभिनय किया था जो लोगों ने काफी पसंद किया था।

इस गाने में कोरियाई छात्रों न केवल अच्छा डांस कर रहे हैं बल्कि उन्हें पारंपरिक भारतीय पोशाक में भी देखा जाता सकता है, जहां लड़कियों ने घाघरा पहना हुआ है और लड़कों ने कुर्ता-पायजामा।

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देश के प्रसिद्ध प्राचीन घरोहरों में से एक है कोणार्क सूर्य मंदिर, जानिए कुछ रोचक तथ्य

भारत में ऐसी कई अद्भुत जगह हैं जहां हमें प्रकृति और मानव निर्मित दुर्लभ और बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। इन्हीं अद्भुत और खूबसूरत जगहों में से एक है “कोनार्क सूर्य मंदिर“।

कोणार्क मंदिर हिंदू धर्म के अनुसार भगवान सूर्य को समर्पित है। वैदिक काल में मंत्रों द्वारा सूर्य देवता की पूजा की जाती थी। फिर राजाओं द्वारा इनके मंदिर का निर्माण शुरू हो गया।

ओडिशा स्थित कोणार्क का सूर्य मंदिर देश के प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह भारत में निर्मित कुछ सूर्य मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध है।

आज हम इस पोस्ट आपको इस अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं :-

  • कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के ओड़िशा के पुरी जिले में समुद्र तट पर पुरी शहर से लगभग 35 किलोमीटर उत्तर पूर्व में कोणार्क में में स्थित है।
  • गंग वंश के महान शासक राजा नरसिंहदेव ने अपने शासनकाल 13वीं शताब्दी में करीब 1200 कारीगरों की मदद से इस मंदिर का निर्माण कराया था। गंग वंश के शासक सूर्य की पूजा करते थे।

  • यहाँ के स्थानीय निवासी सूर्य देव को बिरंची नारायण के नाम से पुकारते है। साथ ही इस मंदिर को यूरोपियन्स ब्लैक पैगोडा के नाम से पुकारते है।
  • यह मंदिर एक बेहद विशाल रथ के आकार में बना हुआ है, जिसमें 24 पहिये लगे हैं और इसको सात घोड़ों द्वारा सूर्य भगवान को ले जाते दिखाया गया है। यह धार्मिक वास्तुकला का एक आश्चर्यजनक स्मारक है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना जाता है।
  • कोणार्क‘ शब्द ‘कोण‘ और ‘अर्क‘ से मिलकर बना है, जहां कोण का अर्थ कोना या किनारा एवं अर्क का अर्थ सूर्य से है अर्थात सूर्य का कोना जिसे कोणार्क कहा जाता है।
  • सूर्य मंदिर कोणार्क को यूनेस्को ने 1984 में विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया था।
  • माना जाता है कि कोणार्क मंदिर में सूर्य की पहली किरण सीधे मुख्य द्वार पर पड़ती है। सूर्य की किरणें मंदिर से पार होकर मूर्ति के केंद्र से प्रतिबिंबित (Reflact) होकर चमकदार दिखाई देती हैं।
  • भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए इसके महत्व को दर्शाने के लिए भारतीय 10 रुपये का नोट के पीछे कोणार्क सूर्य मंदिर को दर्शाया गया है।

  • इसका निर्माण लाल रंग के बलुआ पत्थरों तथा काले ग्रेनाइट के पत्थरों से हुआ है।
  • मंदिर के ये 24 पहिए दोनों ओर 12-12 की दो पंक्तियों में लगे हैं। माना जाता है कि ये 24 पहिए दिन के 24 घंटों के प्रतीक हैं।
  • अपनी अद्भभुत खूबसूरती की वजह से कोणार्क सूर्य मंदिर को भारत के 7 अजूबों  में शामिल किया गया है।

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जानें नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त और कैसे करें नाग देवता की पूजा!

नाग पंचमी का त्यौहार प्रत्येक वर्ष सावन माह की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक करना फलदायी माना गया है। इस मौके पर शिव मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की तैयारी की जाती है।

नाग पंचमी पर नागों की पूजा की जाती है। सावन के महीने मे पड़ने वाला यह त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती को अत्यंत ही प्रिय होता है।

इसके साथ सर्प महादेव के गले की शोभा है और यह देवो के देव महादेव को बहुत प्रिय है। नाग पंचमी पर शिवजी के साथ सांपों को भी पूजा जाता है।

मान्यता है जो भी व्यक्ति नाग पंचमी के दिन सांपों की पूजा करता है उसकी कुंडली में अगर कालसर्प या पितृ दोष है तो वह खत्म हो जाता है।

8 नाग देवताओं की पूजा का विधान

इस दिन नाग देवता की विशेष-पूजा करने के साथ ग्रह शांति, काल सर्प दोष के निवारण के लिए अनुष्ठान भी करें और व्रत भी रखें। हर साल नाग पंचमी सावन के शुक्ल की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

शास्त्रों में 12 प्रकार के नाग बताए गए हैं। इनमें वासुकी, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय नामक अष्टनाग की पूजा करना काफी फलदायी होता है। इनकी पूजा से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है।

ऐसे करें पूजा

इस दिन भगवान शिव व नागों की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। सावन में नागों की पूजा करने से भगवान भोलेनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।

हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार मिथुन, तुला, कुंभ और कर्क राशि वालों के लिए नागपंचमी विशेष लाभकारी साबित हो सकती है। नागों की पूजा करते समय चावल, हल्दी, रोली, फूल, अक्षत, कच्चा दूध और घी का प्रयोग करना चाहिए।

इस दौरान नाग देव से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें कभी क्षति न पहुंचाएं। पूजा करते समय कथा का विशेष महत्व होता है। कथा पढ़ने के बाद आरती कर नाग देवता का आशीर्वाद लेना चाहिए।

नाग पंचमी अवधि

पंचांग के अनुसार, इस बार नाग पंचमी मंगलवार, 02 अगस्त यानी आज है। श्रावण मास की पंचमी तिथि 2 अगस्त को सुबह 5 बजकर 14 मिनट से लेकर 03 अगस्त को सुबह 5 बजकर 42 मिनट तक रहेगी।

इस बीच नाग पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 02 अगस्त को सुबह 5 बजकर 14 मिनट से लेकर 8 बजकर 24 मिनट तक ही रहेगा। यानी नागपंचमी पर पूजा के लिए आपको सिर्फ 2 घंटे 42 मिनट का ही समय मिल पाएगा।

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प्रकृति की सुंदरता है ‘रेनफॉरेस्ट’ जानिए कुछ रोचक तथ्य

पृथ्वी पर इंसान के साथ कई तरह के जीव-जंतु और पेड़-पौधे भी पाए जाते हैं, जिनके लिए पर्यावरण का होना बेहद जरूरी है। पर्यावरण संतुलन के लिए जंगल भी बहुत जरूरी हैं। आइए जानते हैं, दुनिया के कुछ प्रसिद्ध वर्षावनों के बारे में:-

रेनफॉरेस्ट क्या होते हैं :-

वर्षावन उन जंगलों को कहते हैं, जहां बहुत ज्यादा बारिश होती है। यहां साल में लगभग 250 से 450 सेंटीमीटर तक बारिश होती है। दो प्रकार के वर्षावन होते हैं

  • उष्णकटिबंधीय वर्षावन
  • समशीतोष्ण वर्षावन।

पृथ्वी के करीब 2 प्रतिशत भाग पर रेनफॉरेस्ट हैं, लेकिन दुनिया की लगभग 28 प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन इन्हीं वर्षावनों से होता है। पूरी दुनिया में लगभग 50 से 75 प्रतिशत तक पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं। कुछ प्रसिद्ध रेनफॉरेस्ट:-

अमेजन वर्षावन

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अमेजन रेनफॉरेस्ट दुनिया का सबसे बड़ा वर्षावन है। यह अनगिनत जीव-जंतुओं और कीट-पतंगों का घर है और इसकी खूबी है, यहां पाए जाने वाले अनोखे पेड़-पौधे

धरती की कुल ऑक्सीजन का करीब 17 प्रतिशत भाग अकेले इस जंगल से ही मिलता है। इसे एमजोनिया या अमेजन वन भी कहते हैं। यह दक्षिण अमेरिका के अमेजन बेसिन के एक बड़े भू-भाग पर लगभग 60 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

22 जून को हर साल ‘वर्ल्ड रेनफॉरेस्ट डे’ मनाया जाता है। अमेजन के जंगलों में दुनिया की 10 फीसदी से ज्यादा प्रजातियों के जीव-जंतु और 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं।

यहां पर कहीं-कहीं पर जमीन तक सूर्य की किरणें भी नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे वन का अधिकतर धरातल अंधेरे में डूबा रहता है।

कांगो रेनफॉरेस्ट

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यह अफ्रीका में स्थित है, जिसका अधिकांश भाग कांगो देश में फैला है। यह लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है।

कहते हैं कि इस जंगल के कई हिस्से ऐसे भी हैं, जहां इंसान आज तक नहीं पहुंच पाए हैं। इस जंगल के बीच से कांगो नदी निकलती है। जिसकी लंबाई करीब 4700 किलोमीटर है। यह अफ्रीका की दूसरी सबसे लंबी नदी है तथा दुनिया की सबसे गहरी नदी है।

यह जंगल भी इतना घना है कि कई जगहों पर सूर्य की रोशनी भी जमीन तक नहीं पहुंच पाती है। इस जंगल में एक-दो नहीं, बल्कि कुल पांच नेशनल पार्क हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।

डेंट्री वर्षावन

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डेंट्री रेनफॉरेस्ट दुनिया के सबसे पुराने वर्षावनों में से एक हैं। ऑस्ट्रेलियाई फोटोग्राफर व भू-विज्ञानी रिचर्ड डेंट्री के नाम पर इसका नाम रखा गया है।

डेंट्री वर्षावन ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप का सबसे बड़ा वर्षावन है और इसमें कीटों की करीब 12,000 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं। यह लगभग 1200 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह जंगल खासकर ट्री कंगारुओं के लिए प्रसिद्ध है।

बोर्नियो तराई रेनफॉरेस्ट

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बोर्नियो तराई रेनफॉरेस्ट इंडोनेशिया के ब्रुनेई में स्थित है। यह करीब 4 लाख वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला हुआ है। बोर्नियो तराई वर्षावन दुनिया के सबसे पुराने जंगलों में से एक है।

इसमें लगभग 15,000 पौधों की प्रजातियां, 380 पक्षी प्रजातियां और कई स्तनपायी प्रजातियां पाई जाती हैं इसे सबसे समृद्ध वर्षावनों में गिना जाता है।

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Health Tips: बासी चपाती खाने के होते हैं हैरान करने वाले फायदे, आज से ही खाना शुरू कर दें

ज्यादातर लोगों को ताजी गर्म गर्म चपाती खाना पसंद होता है लेकिन जब भी घर में खाना बनता है तो एक-दो रोटी ज्यादा बन ही जाती है। जिसे आमतौर पर लोग खाना पसंद नहीं करते हैं। बासी चपाती का नाम सुनते ही लोग मुंह बना लेते हैं।

इसीलिए जब कभी भी रोटी बच जाये तो इन बची हुई रोटियों को या तो गाय और कुत्ते को डाल दिया जाता है या फिर फेंक दिया जाता है। लेकिन आप ये नहीं जानते कि ये बासी रोटी कई गुणों से भरपूर होती है।

बासी रोटी खाने से सेहत को भी कई फायदे मिलते हैं। आज हम आपको बासी रोटी खाने से होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहें हैं। जिन्हें जानने के बाद आप खाने के लिए बासी चपाती ही मांगेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं :-

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बासी चपाती के फायदे

शुगर और बीपी रहता है कंट्रोल

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि बासी रोटी खाने से शुगर और बीपी कंट्रोल में रहता है। जी हां, इसे दूध के साथ खाना और भी फायदेमंद होता है। जब चपाती बासी हो जाती है तो उसमें कुछ अच्छे बैक्टीरिया आ जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

कब्ज से राहत

इसमें ग्लूकोज की मात्रा भी कम होती है। फाइबर से भरपूर बासी चपाती पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। दूध के साथ बासी चपाती खाने से आपकी डाइट बेहतर रहती है। इसे खाने से अपच, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी दूर रहती हैं।

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शरीर का तापमान सामान्य रहता है

बासी रोटी खाने से आपके शरीर का तापमान भी सामान्य बना रहता है क्योंकि सुबह बासी रोटी को ठंडे दूध के साथ सेवन करने से आपको राहत मिलती है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

गर्मी के दिनों में अगर बासी चपाती खाई जाए तो लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है। अगर आप बासी चपाती नहीं खाते हैं तो इसे खाना शुरू कर दें क्योंकि इसे खाने से दुबलापन भी दूर हो जाता है।

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ब्लैक सैंड बीच: पानी में खींचकर इंसानों को मार देता है ये समुद्र

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दुनिया में कई बीच हैं जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं और इन्हीं में शामिल है आइसलैंड का ब्लैक सैंड बीच, जो पर्यटकों को अपनी ओर तरफ आकर्षित करता है। लेकिन जियोलॉजी और ‘समुद्र की ताकत‘ मिलकर इसे ‘जानलेवा‘ बनाते हैं।

दरअसल हम बात कर रहे हैं रेनिस्फजारा बीच की। काली रेत और तेज लहरें इस आइसलैंड पर आने वाले लोगों को अपना दीवाना बना देती हैं। लेकिन इस खूबसूरत बीच को जानलेवा भी कहा जाता है क्योंकि यहां उठने वाली स्नीकर वेव्स की वजह से कई लोगों की जान चली गई है।

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स्नीकर तरंगें लोगों को अपने साथ समुद्र में खींचती हैं। खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन इस जगह को सुरक्षित करने की योजना तैयार कर रहा है। इस बीच को देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको इस खतरनाक ब्लैक सैंड बीच के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं…

स्नीकर वेव्स उन बड़ी और शक्तिशाली लहरों को कहते हैं जो कई छोटी-छोटी लहरों की ताकत के एक साथ मिलने से बनती हैं। यह समुद्र के बहाव के कारण भी हो सकता है या रेनिस्फजारा के मामले में लहरों में खींचने की शक्ति के पीछे एक भूमिगत चट्टान भी हो सकती है।

रेनिस्फजारा बीच पर स्नीकर लहरें अन्य लहरों की तुलना में बहुत आगे तक आती हैं जो बेहद शक्तिशाली होती हैं और एक वयस्क को अपने साथ समुद्र के भीतर खींच सकती हैं।

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अगर कोई व्यक्ति स्नीकर वेव की चपेट में आ जाता है, तो उसका वापस आना बेहद मुश्किल होता है। पानी का तापमान बर्फ जमने के स्तर से थोड़ा ही ऊपर होता है, तत्काल हाइपोथर्मिया का कारण बनता है जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है।

अब इस बात पर बहस तेज हो गई है कि समुद्र तट को बंद किया जाए या और सुरक्षा मानकों को लागू किया जाए। रेनिस्फजारा बीच पर लहरों के खतरे के बारे में लोगों को चेतावनी देने वाले बोर्ड लगे हैं।

आइसलैंडिक रोड एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा पार्किंग क्षेत्रों में फुटपाथों और बोर्डों पर लाइटें लगाई जाएंगी। निगरानी के लिए कैमरा भी लगाया जाएगा।

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