जानें नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त और कैसे करें नाग देवता की पूजा!

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नाग पंचमी का त्यौहार प्रत्येक वर्ष सावन माह की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक करना फलदायी माना गया है। इस मौके पर शिव मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की तैयारी की जाती है।

नाग पंचमी पर नागों की पूजा की जाती है। सावन के महीने मे पड़ने वाला यह त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती को अत्यंत ही प्रिय होता है।

इसके साथ सर्प महादेव के गले की शोभा है और यह देवो के देव महादेव को बहुत प्रिय है। नाग पंचमी पर शिवजी के साथ सांपों को भी पूजा जाता है।

मान्यता है जो भी व्यक्ति नाग पंचमी के दिन सांपों की पूजा करता है उसकी कुंडली में अगर कालसर्प या पितृ दोष है तो वह खत्म हो जाता है।

8 नाग देवताओं की पूजा का विधान

इस दिन नाग देवता की विशेष-पूजा करने के साथ ग्रह शांति, काल सर्प दोष के निवारण के लिए अनुष्ठान भी करें और व्रत भी रखें। हर साल नाग पंचमी सावन के शुक्ल की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

शास्त्रों में 12 प्रकार के नाग बताए गए हैं। इनमें वासुकी, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय नामक अष्टनाग की पूजा करना काफी फलदायी होता है। इनकी पूजा से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है।

ऐसे करें पूजा

इस दिन भगवान शिव व नागों की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। सावन में नागों की पूजा करने से भगवान भोलेनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।

हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार मिथुन, तुला, कुंभ और कर्क राशि वालों के लिए नागपंचमी विशेष लाभकारी साबित हो सकती है। नागों की पूजा करते समय चावल, हल्दी, रोली, फूल, अक्षत, कच्चा दूध और घी का प्रयोग करना चाहिए।

इस दौरान नाग देव से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें कभी क्षति न पहुंचाएं। पूजा करते समय कथा का विशेष महत्व होता है। कथा पढ़ने के बाद आरती कर नाग देवता का आशीर्वाद लेना चाहिए।

नाग पंचमी अवधि

पंचांग के अनुसार, इस बार नाग पंचमी तिथि प्रारंभ गुरुवार को दोपहर 03 बजकर 24 मिनट से शुरू होगी और तिथि की समाप्ति शुक्रवार को दोपहर 01 बजकर 42 मिनट पर होगी।

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