पुत्रदा एकादशी 2022:- सावन के महीने में इस दिन करें यह व्रत शिव एवं विष्णु दोनों की होगी कृपा,जानिए शुभ मुहूर्त व महत्व

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पुत्रदा एकादशी 2022: सावन का महीना भक्ति और आराधना का महीना होता है। लोग इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा और आराधना करते हैं। लेकिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी सावन के महीने में एक खास दिन आता है जिसे पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।

हर महीने एकादशी दो बार आती है, और प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष महत्व होता है। लेकिन इनमें से कुछ को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। इन्हीं में से एक है पुत्रदा एकादशी

हिंदू कैलेंडर में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पुत्रदा एकादशी, जिसे पवित्रा एकादशी और पवित्रोपन एकादशी के रूप में भी जाना जाता है, अंग्रेजी कैलेंडर पर जुलाई से अगस्त के बीच में आती है।

सभी एकादशी की तरह, यह एकादशी भी भगवान विष्णु को समर्पित है और यह एकादशी व्रत पति-पत्नी द्वारा एक साथ किया जाता है, ताकि पुत्र की प्राप्ति हो सके। यह दिन वैष्णवों के लिए विशेष रूप से अनुकूल है, जो विष्णु के अनुयायी हैं।

पुत्रदा‘ शब्द का अर्थ है ‘पुत्रों का दाता’ और इसलिए यह माना जाता है कि श्रावण के महीने में इस एकादशी का व्रत करने से पुत्र की इच्छा पूरी हो सकती है।

पुत्रदा एकादशी 2022: तिथि व शुभ मुहूर्त

श्रावण पुत्रदा एकादशी 08 अगस्त 2022 सोमवार को है। पुत्रदा एकादशी कामिका एकादशी के बाद और अजा एकादशी (भद्र कृष्ण पक्ष) से ​​पहले आती है। इसकी शुरुआत – 7 अगस्त, रविवार रात 11 बजकर 50 मिनट पर होगी और 8 अगस्त, सोमवार को रात 9 बजे तक रहेगी।

महत्व

हमारे हिंदू समाज में बेटे का होना महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वह बुढ़ापे में अपने पिता और मां की देखभाल करता है। यहां तक ​​​​कि पूर्वज संस्कार केवल पुरुष बच्चे द्वारा ही किया जाता है।

हिंदू धर्म में मनाई जाने वाली 26 एकादशियों में से प्रत्येक का अपना विशिष्ट महत्व होता है। श्रावण शुक्ल पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकादशी में निःसंतान दंपति को पुरुष संतान देने की शक्ति होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी के महत्व का उल्लेख ‘भविष्य पुराण‘ में राजा युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण के बीच चर्चा के रूप में किया गया है। यहां भगवान कृष्ण ने स्वयं इस पवित्र व्रत को करने के अनुष्ठानों और लाभों के बारे में बताया।

मंत्र:-

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

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