नवंबर की इस तारीख को लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानिए ग्रहण के दौरान क्या करें

इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को लग रहा है। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब कोई खगोलीय पिण्ड या अंतरिक्ष यान अस्थायी रूप से किसी अन्य पिंड की छाया में आता है या उसके और दर्शक के बीच कोई अन्य पिंड आ जाता है।

इस दौरान चंद्रमा पर पूरी तरह से पृथ्वी की परछाई आ जाती है। कभी कभी पृथ्वी की यह छाया चंद्रमा पर एकदम लाल रंग की होती है।

चंद्र ग्रहण का समय

प्रारंभ : 3 बजकर 46 मिनट पर
समाप्त 6 बजकर 19 मिनट पर

जानें कहां कहां दिखेगा चंद्रग्रहण

ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक यह चंद्र ग्रहण भारत में थोड़े समय के लिए ही दिखेगा। भारत के साथ ही यह ग्रहण यूरोप, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पश्चिम एशिया सहित कई देशों में दिखेगा।

भारत में चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारत के भू-भाग पर भी पड़ेगा और उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी गोरखपुर, लखनऊ मुरादाबाद, बरेली, आगरा, मुजफ्फरपुर पर देखा जा सकेगा। इन जगहों पर सूतक काल भी मान्य होगा।

ग्रहण के दौरान करें ये काम

ग्रहण काल के दौरान हमारे आसपास सब कुछ प्रभावित होता है। चंद्र ग्रहण के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण के दौरान गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए, ऐसा कहा जाता है कि गुरु ग्रह के बीज मंत्र ‘ओम ग्रां ग्रीन ग्रुन्स: गुरुवे नमः‘ का जाप फलदायी होता है।

साथ ही ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना फलदायी होता है ग्रहण के समय तुलसी का एक पत्ता मुंह में रखना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण से पहले और ग्रहण समाप्त होने के बाद व्यक्ति को स्नान करना चाहिए, जबकि ग्रहण समाप्त होने के बाद दान-पुण्य करना चाहिए, इसके अलावा ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर को गंगाजल से शुद्ध करें।

असम की ये 5 सबसे खूबसूरत जगहें, किसी स्वर्ग से कम नहीं 

असम उत्तर पूर्वी भारत में एक राज्य है। यह भारत का एक सीमान्त राज्य है जो चतुर्दिक, सुरम्य पर्वतश्रेणियों से घिरा है। असम में घूमने के लिए कई अद्भुत जगहें हैं जो प्राकृतिक सुंदरता से भरी हुई हैं।

इस राज्य के उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, पूर्व में नागालैंड तथा मणिपुर, दक्षिण में मिजोरम, मेघालय तथा त्रिपुरा एवं पश्चिम में पश्चिम बंगाल स्थित है। यहाँ लुभावने दृश्यों के अलावा, आगंतुक राज्य के धार्मिक इतिहास के बारे में भी जान सकते हैं। असम भारत में सबसे अच्छा और बड़ा चाय उत्पादक राज्य है।

चलिए इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं असम के खूबसूरत जगहों के बारे में :-

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम का एक राष्ट्रीय उद्यान है जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। असम के गोलाघाट, कार्बी आंगलोंग और नागांव जिलों में स्थित, यह राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाला गैंडे के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यही कारण है कि काजीरंगा पूरी दुनिया में इतना प्रसिद्ध है।

यह राष्ट्रीय उद्यान लगभग 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और बाघ, जंगली भैंस, गौर, तेंदुआ, हिरण, सूअर और जंगली सूअर सहित विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के साथ-साथ बड़ी संख्या में वन्यजीवों का घर है।

मानस राष्ट्रीय उद्यान

मानस राष्ट्रीय उद्यान भारत के असम राज्य में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है जो राष्ट्रीय उद्यान के साथ-साथ भारत का एक महत्वपूर्ण वन्यजीव अभ्यारण्य है।

इस राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को द्वारा एक प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई है इसके साथ ही यह राष्ट्रीय उद्यान एक बाघ और हाथी आरक्षित जीवमंडल क्षेत्र भी है। हिमालय की तलहटी क्षेत्र में स्थित यह मानस राष्ट्रीय उद्यान, भूटान के रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान के निकट स्थित है ।

यह पार्क अपने दुर्लभ और लुप्तप्राय स्थानिक वन्यजीव के लिए जाना जाता है जैसे असम छत वाले कछुए, हेपीड खरगोश, गोल्डन लंगुर और पैगी हॉग। मानस जंगली भैंसों की आबादी के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ एक सींग का गैंडा और बारहसिंघा के लिए विशेष रूप से पाये जाते है।

कामाख्या मंदिर

असम एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल और एक अनूठा मंदिर है। कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। कामाख्या मंदिर असम का एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है।

यह व्यक्तिगत मंदिरों के परिसर में मुख्य मंदिर है जो शक्ति तारा के दस महाविद्याओं जैसे काली तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमलात्मिका का सबसे व्यापक प्रतिनिधित्व करता है।

कामाख्या मंदिर के मुख्य द्वार को सरल सुंदर नक्काशी के साथ रंगीन फूलों से सजाया गया है। अंबुबाची मेला इस मंदिर का मुख्य वार्षिक उत्सव है जब दुनिया भर के हजारों पर्यटक आते है।

यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है। देश भर मे अनेकों सिद्ध स्थान है जहाँ माता सुक्ष्म स्वरूप मे निवास करती है प्रमुख महाशक्तिपीठों मे माता कामाख्या का यह मंदिर सुशोभित है हिंगलाज की भवानी, कांगड़ा की ज्वालामुखी, सहारनपुर की शाकम्भरी देवी, विन्ध्याचल की विन्ध्यावासिनी देवी आदि महान शक्तिपीठ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र एवं तंत्र- मंत्र, योग-साधना के सिद्ध स्थान है।

सुआलकुची

अगर आप असम में घूमने के लिए किसी अनोखी जगह की तलाश में हैं तो आपको सुआलकुची जरूर जाना चाहिए। सुआलकुची को “बुनकर के गांव” के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह राज्य में सबसे अच्छा रेशम पैदा करता है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर गुवाहाटी से 35 किमी उत्तर में है।

जब आप इस खूबसूरत गांव में पहुंचेंगे तो आपको कई बांस और मिट्टी के घर दिखाई देंगे। MUGA सिल्क और पैट सिल्क के साथ-साथ एरी सिल्क और एंडी फैब्रिक की प्रसिद्ध गुणवत्ता पूरे असम और भारत में उच्च मांग में है।

माजुली द्वीप

आदिवासियों द्वारा बसाये गए माजुली की संस्कृति अद्वितीय और काफी रोचक है यही कारण है कि लोग इस जगह को बहुत पसंद करते हैं।

माजुली ब्रह्मपुत्र नदी में एक पर्यावरण के अनुकूल और प्रदूषण रहित ताजे पानी का द्वीप है, जो जोरहाट शहर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यह लगभग 880 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, माजुली भारत का सबसे बड़ा नदी द्वीप है और दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है।

यहां मनाए जाने वाले त्यौहार सभी पर्यटक को आकर्षण करता हैं। माजुली का मुख्य त्यौहार को “रास” कहा जाता है और उस समय एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

द्वीप का दक्षिणी भाग एक पक्षी प्रेमी का स्वर्ग है। माजुली में घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च के बीच है। यह असम के सबसे सुन्दर पर्यटन स्थल में से एक है।

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दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है चारकोल उत्पादों का इस्तेमाल, जानिए इसके फायदों के बारे में

चारकोल युक्त स्किन प्रॉडक्ट से स्किन को काफी फायदा होता है। इससे त्वचा क्लीन और शाइनी बनती है। यही वजह है कि आजकल बड़े ब्रैंड्स भी अपने प्रॉडक्ट्स में चारकोल का इस्तेमाल करने लगे हैं।

चारकोल को चेहरे पर फेस मास्क, पीलिंग मास्क, फेस वाश आदि के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। चेहरे के लिए चारकोल का उपयोग करने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह त्वचा से विषाक्त पदार्थों को निकालता है और त्वचा को कोमल बनाता है। चारकोल किस तरह स्किन को फायदा पहुंचाता है चलिए जानते हैं।

प्रदूषण को दूर करता है

अगर आप शहरी क्षेत्र में रहते हैं तो आप बाहर अधिक धूल के संपर्क में रहते हैं, जिसका मतलब है कि प्रदूषण के कारण चेहरे पर टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं।

रोजाना चारकोल फेस मास्क लगाने से त्वचा से विषाक्त पदार्थ निकल जाएंगे और चेहरे की अच्छी तरह सफाई हो जाएगी। यह विषाक्त पदार्थों के लिए एक चुंबक के रूप में कार्य करता है। इसलिए रात को सोने से पहले चारकोल से चेहरा धोकर सो जाएं। यह त्वचा को जवां और ताजा रखता है।

ब्लैकहेड्स को हटाता है

अगर आप ब्लैकहेड्स से परेशान हैं तो आपको चारकोल का इस्तेमाल करना चाहिए। चारकोल पाउडर का लेप लगाने से ब्लैकहेड्स दूर हो जाते हैं। साथ ही चेहरे के काले दाग धब्बे भी दूर हो जाते हैं।

चेहरे की सफाई

चेहरे को ठीक से साफ करने के लिए हर हफ्ते सक्रिय रूप से चारकोल फेस मास्क का इस्तेमाल करें। ऑयली फेस की समस्या वालों को इस मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में दो बार करना चाहिए। वहीं रूखी त्वचा वाले लोगों को इस फेस पैक का इस्तेमाल करने के बाद कोई अच्छा मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए।

मुंहासों को दूर करता है

चारकोल के डिटॉक्सिफिकेशन और बेहतरीन क्लींजिंग गुणों के कारण हर दिन चारकोल मास्क लगाने से चेहरे पर मुंहासों से छुटकारा मिल सकता है।

यह त्वचा को साफ करने के अलावा रोमछिद्रों को भी साफ करता है और त्वचा की चमक बरकरार रखता है। इसके अलावा चारकोल के पेस्ट का इस्तेमाल सीधे पिंपल्स पर किया जा सकता है। ऐसा करने से पिंपल्स साफ हो जाएंगे।

छिद्रों को कम करता है

कई बार चेहरे के रोम छिद्र भी खुल जाते हैं। इससे चेहरा अच्छा नहीं लगता। इस दौरान चेहरे पर चारकोल मास्क लगाने से चेहरे के खुले रोम छिद्र फिर से बंद हो जाते हैं। इसके साथ ही अंदर से सफाई करने से खुले रोमछिद्र भी कम हो जाते हैं।

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‘पेट’ से ही शुरू होती हैं सारी बीमारियां 

एक स्वस्थ इंसान की सिर्फ आंत में ही करीब 100 खरब बैक्टीरिया पाए जाते हैं। ये अलग-अलग किस्म के होते हैं और उनके हितों के बीच टकराव पैदा होने से बीमारियां उपजती हैं।

पिछले दो दशकों में हुई रिसर्च से पता चला है कि पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए आंतों का स्वस्थ रहना कितना जरूरी है। आंतों की सेहत पर लाइफस्टाइल का जबरदस्त असर होता है।

ज्यादा कैलोरी वाले जंक फूड और शराब का अधिक सेवन करने और इसके अलावा रेशेदार भोजन और हरी सब्जियां न खाने से पाचन तंत्र के रोगों का खतरा बढ़ जाता है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है।

आंतों की सेहत पर लाइफस्टाइल का जबरदस्त असर होता है। ज्यादा कैलोरी वाले जंक फूड आर शराब का अधिक सेवन करने और इसके अलावा रेशेदार भोजन और हरी सब्जियां न खाने से पाचन तंत्र के रोगों का खतरा बढ़ जाता है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है।

गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग, इरिटेबलबावेल सिंड्रोम, फंक्शनल डिस्पेप्सिया, मोटापा, लिवर में फैट जमना और अल्सर जैसे पेट के रोग लाइफस्टाइल से जुड़े हैं। तनाव होने पर आमतौर पर एड्रिनल ग्रंथियों से एड्रेनलिन और कार्टिसोल नामक हार्मोनों का स्राव होता है।

तनाव की वजह से पूरे पाचन तंत्र में जलन होने लगती है जिससे पाचन नली में सूजन आ जाती है और इस सबका नतीजा होता है कि पोषक तत्वों का शरीर के काम आना कम होने लगता है।

लम्बे समय तक जारी रहने पर तनाव की वजह से इरिटेबल बावेल सिंड्रोम और पेट में अल्सर जैसी पाचन संबंधी तकलीफें हो सकती हैं।

जांच के लिए डाक्टरों के पास जाने वाले रोगियों की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि गैस्ट्रोइसोफेगल रीफ्लक्स (जी.ई.आर.डी.) अब पाचन संबंधी सामान्य रोग बन गया है।

जी.ई.आर.डी. में पेट के अंदर अम्ल यानी एसिड इसोफेगल (भोजन नली) में वापस चले जाते हैं। इससे सीने में जलन तो होती ही है, उल्टी की शिकायत भी होती है। इसके अलावा फेफड़े, कान, नाक या गले की भी कई तकलीफें आ पड़ती हैं। इसके साथ कई परेशानियां जुड़ी हैं।

मसलन, ग्रासनाल में छाले और संकुचन जैसी परेशानियां भी हो जाती हैं। जी.ई.आर.डी. लम्बे समय तक रह गया तो एक नई अवस्था आ सकती है, जिसका नाम है “बैरेट्स ईसोफैगस” और इसका अगर समय पर इलाज न दिया गया तो ग्रासनाल का कैंसर भी हो सकता है।

पेट की हल्की लेकिन बार-बार शिकायतें होने पर डॉक्टर को अवश्य दिखाएं। इसके साथ ही जीवनशैली में थोड़ा-बहुत बदलाव खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है।

इनमें बिस्तर पर सिर ऊंचा रख कर सोना, तंग कपड़े न पहनना, वजन ज्यादा होने पर उसे घटाना, शराब और सिगरेट का इस्तेमाल कम करना, खुराक में बदलाव करना, भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचना और सोते समय खाने से बचना शामिल है।

पंजाब केसरी साभार

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वर्षा के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी – बारिश क्या है?

रिमझिम बारिश में भीगना और बरसात के पानी में कागज की नाव को तैराना हर बच्चे को अच्छा लगता है। वर्षा हमारी धरती और पर्यावरण को पानी की आपूर्ति ही नहीं करती, यह मानव, पशु- पक्षियों और पेड़- पौधों के लिए कई तरह से लाभदायक भी है।

बारिश को बरसात, बरखा, वर्षा, वृष्टि, मेह आदि नामों से भी जाना जाता है। परंतु क्या आप जानते हैं कि वर्षा कितने तरह की होती है? अथवा यह क्यों और कैसे होती है?

वैसे इस बारे में कई लोग जानते हैं कि बादल कैसे बनते हैं और कब उससे वर्षा होती है लेकिन अगर इस पूरी प्रक्रिया को बताने के लिए कहा जाए तो कम ही लोग बता पाएंगे।

वर्षा ऋतु में बच्चे अक्सर काग़ज़ की नाव चलाते हैं

पहले समझें पानी को

पृथ्वी पर पानी के तीन रूप हैं। भाप, तरल पानी और ठोस बर्फ। जब पानी गर्म होता है तो वह भाप बनकर या गैस बनकर हवा में ऊपर उठता है। ऐसी भाप बहुत अधिक मात्रा में ऊपर जमा हो जाती है तो वह बादलों का रूप ले लेती है।

इस पूरी प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। जब बादल ठंडे होते हैं तो गैसीय भाप तरल पानी में बदलने लगती है और ज्यादा ठंडक होने पर बर्फ में भी बदलने लगती है।

वाष्प के घने होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं लेकिन वर्षा होने के लिए केवल यही काफी नहीं है पहले तरल बूंदें जमा होती हैं और बड़ी बूंदों में बदलती हैं। जब ये बूंदें भारी हो जाती हैं तब कहीं जा कर वर्षा होती है।

अनेक रूप में गिरता है वर्षा का पानी

बादलों से वर्षा के अलावा ओले गिरना, हिमपात आदि के रूप में पानी धरती तक पहुंच सकता है। जब पानी तरल रूप में न गिर कर ठोस रूप में गिरता है तो उसे हिमपात कहते हैं।

वहीं वर्षा के साथ बर्फ के टुकड़े गिरना ओलों का गिरना कहलाता है। इसके अलावा सर्दियों में ओस भी नजर आती है।

मानसून जैसे ‘सिस्टमों’ के कारण होती है वर्षा

बात अगर केवल बारिश की करें तो यह हर जगह नहीं होती और एक-सी भी नहीं होती है। पृथ्वी पर बहुत सारी प्रक्रियाएं हैं जिनके कारण किसी स्थान पर बारिश होती है।

इनमें भारत में सबसे जानी-मानी प्रक्रिया है मानसून जिसकी वजह से एक ही इलाके में एक से तीन-चार महीने तक लगातार या रुक-रुक कर वर्षा होती है।

वहीं कई बार बेमौसम बारिश होती है जिसे स्थानीय वर्षा कहा जाता है। कई बार समुद्र से चक्रवाती तूफान बारिश लाकर तबाही तक ला देते हैं। वहीं लम्बे समय तक बारिश न होना सूखा ला सकता है।

वर्षा रिमझिम

वर्षा की अलग-अलग वजहें

वर्षा की वजह एक नहीं होती है। समुद्र स्थल से दूरी, इलाके में पेड़-पौधों की मात्रा, पहाड़ों से दूरी, हवा के बहने का पैटर्न और जलवायु के अन्य तत्व मिल कर यह तय करते हैं कि किसी जगह पर बारिश कैसी, कब-कब और कितनी होगी।

वर्षा के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • रंगीन वर्षा भी होती है जिसमें काफी मात्रा में धूल होती है। केरल के कोट्टयम क्षेत्र में दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में लाल वर्षा सबसे अधिक होती है।
  • रेगिस्तान में बारिश होती है तो सम्भावना है कि आप गीले नहीं होंगे। इसे फंटम बारिश कहा जाता है। यह जानना मुश्किल है कि वर्षा हुई है या नहीं क्योंकि गर्म हवा के प्रभाव के कारण बूंदों का असर मिट जाता है।
  • अधिकांश को लगता है कि बारिश की बूंदें आंसू की बूंदों की तरह दिखती हैं लेकिन वे वास्तव में चॉकलेट चिप की तरह होती हैं।
  • गिरने वाली बारिश की अधिकतम गति 18 से 22 मील प्रति घंटे होती है। यह वायुमंडलीय घर्षण के वजह से कम हो जाती है। ऐसा न हो तो प्रत्येक बूंद बहुत ज्यादा गति से नीचे आ जाएगी और बहुत नुक्सान हो सकता है।
  • एक निश्चित समय दौरान एक विशेष क्षेत्र में वर्षा के माप को मापने के लिए ‘रेन गेज’ नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि भारत में इसका उपयोग कई सौ साल पहले से किया जा रहा है। कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र में इसके उपयोग के बारे में लिखा मिलता है।
  • सौरमंडल के अन्य ग्रहों पर भी वर्षा होती है। हालांकि, यह धरती पर होने वाली बारिश से अलग है। वहां यह मिथेन, नीयन औरसत्ययूरिक एसिड आदि से हो सकती है। शुक्र ग्रह पर बारिश सल्फ्यूरिक एसिड की होती है और शनि के चंद्रमा टाइटन पर मीथेन वर्षा होती है।
  • दुनिया में कई तरह की जगह हैं जहां साल भर वर्षा होती है। जैसे हवाई के कुछ इलाकों में 350 दिन बारिश होती है।
  • कृत्रिम वर्षा करना भी संभव है। इसके लिए बादलों पर विशेष कैमिकल छिड़का जाता है।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए इतिहास किताबों का और कुछ रोचक तथ्य !!

किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होने के साथ हमारी टीचर भी होती हैं। जिंदगी के हर पड़ाव में किताबें हमारा मार्गदर्शन करती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगभग हजारों वर्ष पहले लोग लिखने के लिए मिट्टी की पट्टिकाएं काम में लाते थे। इस लेख में हम आपको किताबों से जुड़े दिलचस्प इतिहास के बारे में रहे हैं तो चलिए जानते हैं :-

मिट्टी और घास से बना करती थीं किताबें

मिट्टी की पट्टिकाएं तथा पैपीरस हमारी आज की पुस्तकों की पूर्वज हैं। पुस्तक छापने की कला का जन्म तब हुआ जब अलग-अलग अक्षर काटकर उनसे ठप्पा लगाने की बात सोची गई। पुस्तक का अपना एक लम्बा इतिहास है।

सबसे पहले पुस्तकें मिट्टी की पट्टिकाओं पर लिखी जाती थीं। बाद में घास से बने एक प्रकार के कागज पैपीरस का उपयोग आरंभ हुआ। आज से लगभग 2000 वर्ष पहले लोगों ने चर्म पत्रों तथा भेड़ों या बछड़ों की विशेष रूप से तैयार की गई खालों पर लिखना शुरू किया। इसके बाद उनके पन्ने बनवा कर और उन्हें बांध कर पुस्तकें तैयार कर ली जाती थीं।

किसी पुस्तक की सभी प्रतियां हाथ से ही लिखी जाती थीं इसलिए पुस्तकें संख्या में कम तथा बहुत मूल्यवान होती थीं किन्तु लगभग 500 वर्ष पूर्व यूरोप में गुटनबर्ग नामक वैज्ञानिक ने छपाई की कला का आविष्कार किया। वह अलग-अलग अक्षर ढालता और उन्हें जोड़कर शब्द बना लेता।

इस तरह तैयार पंक्तियों तथा पन्नों की कई प्रतियां छापाखाने में छाप ली जाती थी। इसके साथ ही चर्मपत्र की जगह कागज का इस्तेमाल भी किया जाने लगा।

समय के साथ छपाई यानी प्रिंटिंग के लिए नई मशीनों को तैयार किया जाने लगा जिससे छपाई आसान और काफी सस्ती हो गई। आज इस काम के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें हैं तथा इन्हें तैयार करने में अधिक से अधिक ऑटोमैटिक तरीकों का उपयोग होता है। बदलते समय के साथ अब किताबें ‘ई-बुक्स’ का रूप भी ले चुकी हैं जिन्हें आप मोबाइल का ई-बुक्स डिवाइसों पर पढ़ सकते हैं।

रोचक तथ्य

  • जोहान्स गुटेनबर्ग (Johannes Gutenberg) ने 1439 में प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया था, इनके द्वारा छापी गयी बाइबल “गुटेनबर्ग बाइबल” के नाम से प्रसिद्ध है।
  • इतिहासकारों के अनुसार पूरी तरह टाइपराइटर पर टाइप कर किसी प्रकाशक को भेजी गई पहली पांडुलिपि मार्क ट्वेन की ‘लाइफ ऑन दि मिसिसिपी’ (Life on the Mississippi) थी, जो 1883 को प्रकाशित हुई थी इसमें 624 पेज थे।
  • यदि आप प्रतिदिन 20 मिनट पढ़ते हैं, तो आप एक वर्ष में 1.8 मिलियन शब्द पढ़ लेते हैं।
  • एक समय था जब हमारे पास केवल पढ़ने के लिए किताबें होती थीं लेकिन अब आप ई-बुक और ऑडियोबुक सहित कई अलग-अलग तरीकों से किताबें पढ़ सकते हैं।
  • गुटेनबर्ग बाइबिल ने दुनिया की सबसे महंगी किताबों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज किया हुआ है। 1987 में गुटेनबर्ग बाइबिल की नीलामी 4.9 मिलियन डॉलर में की थी। दुनिया की पहली मूवेवल प्रिंटिंग मशीन में केवल 48 प्रतियां छापी गई थीं।
  • उत्तरी हंगरी के छोटे से गांव सिनपेत्री के रहने वाले बेला वर्गा ने अपने हाथों से एक किताब बनाई है। ऐसा माना जा रहा है कि यह दुनिया की सबसे बड़ी किताब है। 71 साल के बेलाने इसे बनाने के लिए पारंपरिक बुक बाइंडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। 4.18 मीटर लंबी और 3.77 मीटर चौड़ी किताब में 346 पेज हैं।
  • 868 ईसवी में चीन में छपी “डायमंड सूत्रा” को दुनिया की सबसे पुरानी प्रिंटेड किताब माना जाता है। इसमें बुद्ध और उनके शिष्यों के बीच का संवाद है। इस पुस्तक में शब्दों और तस्वीरों को पहले लकड़ी पर उकेरा गया फिर रंग चढ़ाकर उन्हें कागज पर छापा गया।
  • दुनिया सबसे छोटी किताब का आकार चार गुणा चार एमएम और मोटाई 8 एमएम है। जापानी किताब “शिकी नो कुसाबाना” के नाम दुनिया की सबसे छोटी किताब होने का रिकॉर्ड है। इसे नोट छापने वाली तकनीक से प्रिंट किया गया।

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19 पुस्तकें जो आपको बना सकती हैं अमीर

क्या आप जानते है इन 12 रोचक तथ्य के बारे में ???

प्रकृति  बहुत  सुंदर  और  अद्भुत  है।  इसके  रंग  निराले  है।  प्रकृति  में बहुत  कुछ  रोचक  है। आइए जानते  है  कुछ  ऐसे  रोचक तथ्य  के  बारे  में:

  • आधे चांद से पूरा चांद नौ गुना ज्यादा चमकदार होता है।
  • घोंघा बिना घायल हुए ब्लेड़ की धार पर भी चल सकता है।
  • कटल फिश के तीन दिल होते हैं। दो दिल तो उसके गलफड़ों के आधार पर स्थित होते हैं और तीसरा दिल शरीर के केंद्र में होता है।
  • मंगोलों के राजा कुबलई खान ने सन 1230 में पहली बार बारूद से भरा हुआ हथगोला बनाया था।
  • एक औसत पैंसिल के सीसे से 35 मील लम्बी रेखा खींची जा सकती है।
  • मनुष्य की खोपड़ी में 22 हड्डियां आपस में संधियों द्वारा जुड़ी हुई हैं लेकिन उनमें केवल एक जबड़े की संधि ही गति कर सकती है जिसकी वजह से हम बात कर पाते हैं, हंस सकते हैं और भोजन चबा सकते हैं।
  • खगोलशास्त्रियों का अनुमान है कि सूर्य के चारों ओर 10 करोड़ धूमकेतु चक्कर लगाते हैं।
  • पृथ्वी का 70 प्रतिशत हिस्सा समुद्र से ढका हुआ है।
  • रूसी वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बास्कुनचाक नामक झील में इतना नमक है कि सारा विश्व दो हजार वर्ष से भी अधिक समय तक उसका उपयोग कर सकता है।
  • समुद्र में रहने वाले कुछ सांप ही ऐसे सरीसृप हैं, जो स्थायी रूप से पानी में रह सकते हैं। अन्य सभी सरीसृप अपने अंडे देने के लिए जमीन पर आते हैं।
  • 15 वर्ष की आयु होते ही मस्तिष्क के आकार का विकास रूक जाता है।
  • हमारे मांस पेशी 300 फुट प्रति सैकंड की दर से संदेशों का संचार करते हैं।

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जानिए दीपावली पर राशियों पर कैसा रहेगा असर

दीपावली दीपों का त्यौहार है। आध्यात्मिक रूप से यह ‘अन्धकार पर प्रकाश की विजय‘ को दर्शाता है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है।

दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप‘ अर्थात ‘दिया‘ व ‘आवली’ अर्थात ‘लाइन‘ या ‘श्रृंखला‘ के मिश्रण से हुई है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के “मोक्ष दिवस” के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।

आज इस पोस्ट हम जानेगें कि राशि के अनुसार कैसा रहेगा दिवाली का त्यौहार

मेष

इस दिवाली मेष राशि के जातकों को अपनी सेहत पर थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत है। इस राशि की कोई महिला यदि प्रेग्नेंट हैं तो उन्हें बिल्कुल स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए। आपको इस दिवाली पर अच्छा बोनस या प्रमोशन भी मिल सकती है।

वृषभ

ये दिवाली वृषभ राशि के जातकों के लिए शुभ होने वाली है। धन की देवी लक्ष्मी की आपके ऊपर कृपा हो सकती है और रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। हालांकि इस दिवाली पर कुछ लोग आपसे नाराज हो सकते हैं, इसलिए थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत है।

मिथुन

मिथुन राशि के जातकों के लिए ये दिवाली मिली जुली रहने वाली है। आपका अच्छा व्यवहार आपको सम्मान दिला सकता है। वहीं आपका बुरा व्यवहार लड़ाई झगड़े भी करवा सकता है। इसलिए दिवाली पर अच्छा व्यवहार बनाए रखें।

कर्क

इस दिवाली कर्क राशि वालों को कोई अच्छी खबर मिल सकती है, जिसका आप लंबे समय से इतंजार कर रहें है। कई खुशियां भी आपकी जिंदगी में दस्तक दे सकती हैं। कार्यक्षेत्र में काम ज्यादा होगा, लेकिन फिर भी आप अपने लिए समय निकाल लेंगे।

सिंह

सिंह राशि वालों को अपनी बेटी की तरफ से कुछ अच्छी खुशखबरी मिल सकती है। साथ ही इस दिन धन की देवी लक्ष्मी भी आपके ऊपर मेहरबान हो सकती हैं।

कन्या

राशि वालों के जीवन में जिस भी तरह की कठिनाई चल रही है वो खत्म होने वाली है। दिवाली पर आपके खर्चें बढ़ा सकते हैं, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि मां लक्ष्मी आपके साथ हमेशा रहने वाली हैं।

तुला

दिवाली पर आपका प्रमोशन हो सकता है और सैलरी बढ़ सकती है। साथ ही मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आपके ऊपर बना रहेगा।

वृश्चिक

वृश्चिक राशि वाले इस दिवाली सेहत और अपने खानपान पर ध्यान दें। दिवाली पर आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है और लक्ष्मी माता की कृपा भी बनी रहेगी।

धनु

धनु राशि वाले यदि नौकरी बदलने के बारे में सोच रहे हैं तो ये समय शुभ है। पैसो के संबंध में कम खर्च करें और किसी से पैसे उधार न लें।

मकर

मकर राशि के जातकों के लिए दिवाली शुभ होने वाली है। दिवाली पर परिवार का साथ मिलेगा और पैसो से संबंधित दिक्कतें कम होंगी।

कुंभ

कुंभ राशि वालों को दिवाली पर कोई भी काम सोच समझ कर करना होगा। ध्यान रखें आपके एक गलत फैसले की वजह से कई लोगों को परेशानी हो सकती है।

मीन

ज्योतिष के अनुसार मीन राशि के जीवन में खुशियां आएंगी। साथ ही दिवाली का त्यौहार भी अच्छा जाने वाला है। दिवाली के दिन आपके घर में कोई बड़ा सामान भी आ सकता है।

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रात के भोजन में इन खाद्य पदार्थों के सेवन से हो सकती है आपकी नींद गायब

ऐसा लगता है कि आजकल हर कोई पर्याप्त नींद लेने के लिए संघर्ष कर रहा है। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद न आना एक आम बात हो गई है। नींद न आने के कई कारण हो सकते हैं उन्हीं में से एक कारण हमारा रात का भोजन भी हो सकता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन रात के भोजन में नहीं करना चाहिए, तो चलिए शुरू हैं :-

अत्यधिक मसालेदार भोजन का सेवन न करें

बहुत से लोग मसालेदार खाना खाना पसंद करते हैं। लेकिन, सोने से पहले इस मसालेदार भोजन को न खाना ही बेहतर है। इसे खाने से अनिद्रा की समस्या हो सकती है। मसालेदार खाना खाने से पेट में एसिड बनता है। कुछ मामलों में अपच और कब्ज की समस्या हो जाती है।

मीठे का सेवन कम करें

मीठे के सेवन से भी व्यक्ति को बचना चाहिए। जी हां, अगर व्यक्ति रात को सोने से पहले मीठे का सेवन करता है तो उसके रक्त में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है।

ऐसे में व्यक्ति खुद को ज्यादा एक्टिव महसूस करने लगता है, जिसके कारण व्यक्ति की नींद भी डिस्टर्ब होती है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि मीठे के सेवन से व्यक्ति को अनिद्रा की समस्या हो सकती है।

कैफीन से करें परहेज़

कॉफी और चाय में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। इनका बहुत अधिक सेवन मस्तिष्क में एडेनोसाइन रिसेप्टर्स को प्रभावित और अवरुद्ध कर सकता है। यह अनिद्रा का प्रमुख कारण है इसलिए बेहतर होगा कि सोने से पहले कॉफी, चाय न पिएं।

बहुत अधिक वसा युक्त भोजन न करें

वसायुक्त भोजन भी अनिद्रा का कारण बन सकता है। एक अध्ययन के अनुसार, वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से नींद की गुणवत्ता कम हो जाती है। ये नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इस वजह से रात को नींद अच्छी नहीं आती।

सोने से पहले के कुछ टिप्स

सोने से एक घंटे पहले मोबाइल और गैजेट्स से दूर रहना ही बेहतर है। इससे उन गैजेट्स से आने वाली ब्लू लाइट का ज्यादा असर नहीं होता है। आराम से नींद लेने के लिए सोने से पहले योग और मेडिटेशन करने से तनाव दूर होगा और आप जल्दी आएगी।

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सीखिए खेल-खेल में ‘इंटरनेट’ पर सुरक्षित रहना

इंटरनेट हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। जैसे हवा बिना हम एक पल भी नहीं जी सकते, ठीक वैसे ही आज इंटरनेट के बिना एक कदम उठाना भी मुश्किल हो रहा है। इंटरनेट एक विशाल नेटवर्क सिस्टम का कनेक्शन है जो दुनिया भर में फैला है।

इंटरनेट का उपयोग करके हम दुनिया भर के लोगों के सम्पर्क में आ सकते हैं, किसी भी देश या किसी भी विषय के बारे में अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं, नए दोस्त बनाने और विभिन्न संस्कृतियों को जानने, जानकारी खोजने, अध्ययन करने आदि के लिए भी इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं।

बेशक इंटरनेट ने हमारे जीवन को आसान और अधिक सुविधाजनक बना दिया है लेकिन जहां इसके फायदे हैं तो वहीं कुछ नुक्सान भी हैं।

इंटरनेट पर सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वहां पर कई खलनायक भी होते हैं – जैसे कि हैकर्स, फिशर्स, साइबर बुलीज या फिर स्कैमर्स।

ये तुम्हें अपना शिकार न बना सकें, इसके लिए गूगल का एक गेम है जिससे खेल-खेल में आप इंटरनेट सेफ्टी टिप्स जान सकते हैं। बच्चों को इंटरनेट के सेफ यूज के लिए और जागरूक करने के लिए गूगल ने एक गेम डिजाइन कर रखा है, जो है ‘इंटरलैंड‘।

यह एक ऐसी यात्रा है जिसमें आपको हैकर्स, फिशर्स, वन-अपसाइबर बुलीज से बचते हुए एक खोजी बनना होता है। इस गेम में चार देशों की एक काल्पनिक दुनिया है, जहां समय समय पर प्रत्येक लैवल के अंत में आवश्यक जानकारी मिलती है। इस गेम को आकर्षक ढंग से डिजाइन किया गया है, जहां तुम्हें अच्छा डिजीटल यूजर बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।

पहला लैवल : ‘काइंड किंगडम’

‘इंटरलैंड‘ को चार मिनी गेम्स में बांटा गया है, जिनमें से पहला है ‘काइंड किंगडम‘, यानी ऐसी जगह जहां पर साइबर बुलीज का आतंक है। यहां आपको उनको रोकना है साथ में अन्य इंटरनॉट्स की हैल्प भी करनी है।

आपको यहां ऐसे इंटरनॉट्स मिलेंगे, जो दुखी और रो रहे हैं और आपको उन्हें ‘हार्ट‘ या ‘लिटिल लव‘ देकर दया फैलाने का काम करना है। काइंड किंगडम में तीन अचीवमैंट्स हैं।

एक बार जब आप पर्याप्त दयालुता फैला लेते हो और खतरों को रोक लेते हो तो राज्य पर तुम्हारी जीत हो जाती है और आप ‘इंटरनैट काइंड‘ बन जाते हो।

सीख : इंटरनेट की व्यापक पहुंच वाली ताकत का सहारा ‘सकारात्मकता’ फैलाने में लेना चाहिए।

दूसरा लैवल : ‘रियलिटी रिवर’

इसके बाद ‘रियलिटी रिवर’ लैवल आएगा जो सच और सुनी-सुनाई बातों से भरी एक नदी है। यहां आपको अपनी सही निर्णय क्षमता का इस्तेमाल करते हुए रैपिड्स को पार करना है। इस दौरान फिशर्स की हरकतों से खुद को बचाना भी है।

यहां प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनके तीन विकल्प होंगे, जैसे फिशर्स कौन लोग हैं। आपके कजिन से आपको कोई अटैचमैंट मिला है, क्या आप उस पर भरोसा करेंगे? हर सही उत्तर से आप रैपिड्स को पार करते जाओगे और ‘इंटरनेट अलर्ट‘ बन जाओगे।

सीख : इस लैवल की सीख है कि कैसे हो फिशिंग की पहचान?

तीसरा लैवल : ‘माइंडफुल माऊंटेन’

तीसरा चरण ‘माइंडफुल माऊंटेन‘ है। यहां आपको बताया जाएगा कि किस तरह की चीजें, कैसे लोगों के साथ शेयर करनी चाहिएं?

जैसे स्कूल में होने वाले किसी डांस प्रोग्राम की जानकारी दोस्तों के साथ शेयर करने, खुद को लगी किसी चोट की जानकारी अपने घर वालों के साथ शेयर करने, अपने ई-मेल खाते का पासवर्ड लॉक बाक्स में रखना आदि।

सीख : इस लैवल से किसी भी सूचना को उसके सही गंतव्य तक पहुंचाने की सीख मिलती है।

चौथे लैवल में ‘पासवर्ड बनाने की सीख’

‘टावर आफ ट्रैजर‘ अंतिम चरण होता है। इसमें एक टाऊन टावर है, जो खुला है। कुछ कीमती सामान खतरे में हैं। उन सामानों को सेफ (सुरक्षित) करने के लिए आपको अपर केस, लोअर केस, नम्बर्स, सिंबल्स का उपयोग करते हुए एक मजबूत पासवर्ड बनाना है।

यहां भी तीन अचीवमैंट्स होंगे, जिनको आनलॉक करना है। जब आपको यहां सारे ब्लॉक्स प्राप्त हो जाएंगे और हैकर की पहुंच से दूर वाला पासवर्ड बना लेंगे तो आप एक ‘स्ट्रांग इंटरनेट’ यूजर बन जायेंगे।

सीख : इस लैवल की सीख है कि पासवर्ड कम से कम 8 लैटर्स का होना चाहिए। वह याद रहने लायक और अक्षर, संख्याओं, प्रतीकों, सबसे मिल कर बना हो।

सर्टीफिकेट मिलता है

गेम के अंत में मिले प्वाइंट्स के आधार पर ‘सर्टीफिकेट आफ ऑसमनैस‘ दिया जाता है। यह गेम खेलने के लिए लैपटॉप या मोबाइल के ब्राऊजर से ‘इंटरलैंड‘ की वैबसाइट पर जाना होगा।

पंजाब केसरी से साभार

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