75 साल तक जीता है यह विशालकाय पक्षी, जानिए इसके बारे में कुछ खास बातें

आपने बहुत से पक्षी देखे होंगे जिनमें रंग विरंगे, छोटे बड़े हर तरह के पक्षी होते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे पक्षी के बारे में बताने जा रहे हैं जो इतना विशाल है कि इसे उड़ने वाला जानवर भी कहा जाता है।

गिद्ध प्रजाति का ये पक्षी जब अपने पंखों को फैलाता है तो इसका फैलाव करीब 11 फीट तक होता है। साथ ही इसका वजन 15 किलो तक होता है। सबसे हैरानी की बात तो ये है कि इनकी उम्र भी लगभग इंसानों के बराबर ही होती है।

ये पक्षी 75 साल तक जीता है जिस एंडियन कंडोर (Andean condor) के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर यह अनोखा पक्षी लैटिन अमेरिका के देशों में एंडीज पर्वत श्रृंखला के आसपास ऊंचाई पर पाया जाता है।

एंडीज पर्वत श्रृंखला दुनिया में सबसे लंबी है और कई देशों तक फैली है, ये अपना घोंसला भी बहुत ऊंचाई पर ही बनाता है। कई बार ये अपने वजन से भी ज्यादा खा लेता है, ऐसे में ये आराम करता है।

नर और मादा एंडियन कोंडोर पक्षियों में केवल एक ही अंतर होता है। इसमें नर के गले में सफेद कॉलर होता है, जबकि मादा में नहीं होता। वे आमतौर पर अर्जेंटीना और पेरू में पाए जाते हैं। लेकिन तेजी से घटती संख्या को देखते हुए, उन्हें लगभग विलुप्त प्रजाति माना जाता है।

एंडीयन कोंडोर आमतौर पर ऊंचाई पर रहते हैं। वो समुद्र के किनारे आई मरी मछलियों को खाते हैं। वैसे वो दूसरे मृत जंतुओं को खा लेते हैं। इस लिहाज से उन्हें पर्यावरण को साफ रखने वाला पक्षी कहा जा सकता है।

वैसे दूरदराज के सन्नाटे वाले समुद्र तटों पर भी उन्हें लेटिन अमेरिका में देखा जाता है। खाने की तलाश में वो रोज तकरीबन 120 मील उड़ते हैं। हालांकि वो दूसरी पक्षियों के घोंसले में भी झपट्टा मारकर खाना खा लेते हैं।

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स्किन केयर टिप्स: ग्लोइंग स्किन के लिए आजमाएं ये किचन इंग्रीडिएंट्स!

लोग अपनी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए क्या कुछ नहीं करते मंहगी क्रीम्स, पार्लर, मेकअप, सीरम, फेसवॉश, स्क्रब न जाने कितना कुछ स्किन पर रोज लगाते हैं। इन सब उपायों से स्किन पर थोड़े समय के लिए ग्लो भले बढ़ जाए, लेकिन नैचुरल खूबसूरती नहीं मिलती है। त्वचा की नैचुरल खूबसूरती सिर्फ नैचुरल प्रोडक्ट्स से ही बढ़ सकती है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं खूबसूरत, ग्लोइंग और निखरी हुई हेल्दी स्किन पाने के लिए कुछ घरेलू इंग्रीडिएंट्स, जो आपको आपके किचन में ही उपलब्ध मिल जाएंगे।

कच्चा दूध

कच्चे दूध में लगभग सभी पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा को कोमल बनाने के लिए आवश्यक होते हैं। इसमें लैक्टिक एसिड होता है जो एक्सफोलिएटर का काम करता है। कच्चे दूध को रूई से अपने चेहरे पर लगाएं और लगभग 15 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर, इसे धो लें।

पपीता

पपीता बीटा-कैरोटीन से भरपूर होता है। यह शक्तिशाली एंजाइम और फाइटोकेमिकल्स से भरा हुआ है जो आपकी त्वचा के लिए बहुत अच्छा है। इनके अलावा पपीते में पपैन नामक पोषक तत्व भी होता है जिसमें त्वचा को गोरा करने के गुण होते हैं। इसके लिए आप पके हुए पपीते का गूदा लें और उसमें नींबू के रस के साथ शहद मिलाएं। इन्हें अच्छे से मिलाएं और अपनी त्वचा पर लगाएं।

दही

दही में लैक्टिक एसिड होता है जो मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं के लिए अवसर पैदा करने में मदद करता है। दही एक प्राकृतिक एक्सफोलिएटर के रूप में भी काम करता है जो आपको एक प्राकृतिक चमक प्राप्त करने और मुंहासों और फुंसियों को कम करने में मदद करता है।

एक बाउल में दही और ओटमील डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं और लगभग 10-15 मिनट तक प्रतीक्षा करें और फिर गुनगुने पानी से धो लें।

एलोविरा

एलोवेरा और इसके उपचार गुण किसी के लिए भी कोई नई बात नहीं है। यह एक बेहतरीन मॉइस्चराइजर के रूप में काम करता है, यह पिंपल्स, रूखी त्वचा आदि जैसी स्थितियों को कम करने में भी मदद करता है। इसमें दो हार्मोन, ऑक्सिन और जिबरेलिन होते हैं जो त्वचा की सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

शहद

शहद और इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण अद्भुत काम कर सकते हैं क्योंकि यह चेहरे पर दाग-धब्बों को रोकता है और एंटीऑक्सिडेंट का भी एक समृद्ध स्रोत है। यह आपकी त्वचा को मुलायम बनाता है। थोड़ा सा शहद और नींबू का रस मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। इसे करीब 20 मिनट के लिए छोड़ दें और पानी से धो लें।

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जब ज़िंदा रहने ये भी खाना पड़ा- सबसे “डरावने प्लेन क्रैश” की रौंगटे खड़े कर देने वाली कहानी!

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दुनिया में कोई इंसान कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, जिंदा रहने के लिए उसे भोजन की जरूरत पड़ती ही है। कई बार इंसान को जिंदगी के लिए कड़े संघर्ष करने पड़ते हैं। 50 साल पहले एक विमान हादसे में बचे 16 लोगों ने खुद को जिंदा रखने के लिए जो जद्दोजहद की, उसके बारे में जानकर आप सिहर उठेंगे। यह 72 दिनों के उस संघर्ष की कहानी है।

13 अक्तूबर, 1972 को उरुग्वे की रग्बी टीम को ओल्ड क्रिश्चियन क्लब की टीम के साथ चिली में मैच खेलना था। चिली जाने के लिए एक प्लेन में 12 अक्तबर को उरुग्वे के 19 खिलाड़ियों, मैनेजर, उनके मालिक और उनके दोस्तों ने उड़ान भरी। इनके साथ विमान में 5 क्रू सदस्य भी थे।

उरुग्वे एयरफोर्स के इस विमान को उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद मौसम खराब होने के कारण चिली की जगह अर्जेंटीना में उतारना पड़ा।

यहां पर रुक कर मौसम साफ होने का इंतजार किया गया और अगले दिन यहां से चिली के लिए उड़ान भरी गई। विमान ने दोपहर 2.18 मिनट पर उड़ान भरी।

विमान के पायलट को ग्लेशियर से 29 बार गुजरने का अनुभव था, लेकिन उनकी जगह को-पायलट विमान उड़ा रहा था और मौसम भी खराब था। विमान ऐंडीज पर्वतमाला की एक पहाड़ी की चोटी से टकरा गया और इसका पिछला हिस्सा टूट गया।

इसमें उड़ान के दौरान 45 लोग थे और हादसे के बाद 35 लोग जिंदा थे। अगले दिन 5 अन्य लोगों की मौत हो गई। पहाड़ी पर फंसे लोगों ने शून्य से कम तापमान और सर्द हवाओं से बचने के लिए टूटे विमान के टुकड़ों को इकट्ठा किया और उन्हें सील करने की कोशिश की।

धीरे-धीरे उन लोगों के पास खाना खत्म हो गया तो उन्होंने सीट के ऊपर लगे लैदर कवर को खाना शुरू कर दिया, टुथपेस्ट तक खाने की कोशिश की लेकिन इससे वे बीमार पड़ने और मरने लगे।

वहां मरने वाले लोगों की लाशें खराब नहीं हुई क्योंकि शून्य से कम तापमान होने के कारण वे जम चुकी थीं। विमान के टूटे कांचसे टुकड़े बनाकर लाशों के मांस को काट विमान तथा नक्शे में जहां हादसा हुआ (इन्सैट में) कर पहली बार खाया गया। इसके बाद इनमें समझौता हुआ कि जो भी मरता है, उसकी लाश को खाया जा सकता है।

इस घटना में बचे इंजीनियर हार्ले बताते हैं, “हम मर रहे थे, और जब आपके सामने दो ही चीजें हों कि या तो आप मर जाओ या जीने के लिए जो जरूरी हो वह करो, तो आप जीवन को चुनते हैं।”

हादसे की जानकारी मिलते ही उरुवे सरकार ने सक्रियता दिखाई और बचाव अभियान शुरू किया, लेकिन विमान कारंग सफेद होने के कारण बर्फ से ढंके सफेद एंडीज पर्वत पर उसे ढूंढना घास के ढेर में सुई ढूंढने के बराबर था।

लगातार 10 दिनों तक असफलता हाथ लगने पर 11वें दिन बचाव अभियान बंद कर दिया गया। सबका मानना था कि एंडीज के विषम मौसम में बिना भोजन-पानी के किसी का भी इतने दिनों तक जिंदा रहना नामुमकिन है।

दो खिलाड़ियों ने बचाई जान

हादसे को 60 दिन बीत चुके थे। मदद की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दी, तो दो खिलाड़ियों नैन्डो पैरेडो और रॉबर्ट केनेसा ने सोचा कि यहां पड़े-पड़े मरने से अच्छा है कि मदद की तलाश में निकला जाए।

60 दिनों में दोनों कमजोर हो चके थे, बर्फ पर ट्रैकिंग करने के लिए उनके पास साधन नहीं थे लेकिन दोनों खिलाड़ी थे और अंत तक हार नहीं मानने का जज्बा था।

दोनों जैसे-तैसे चिली के आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच गए, जहां दोनों ने रेस्क्यू टीम को अपने साथियों की लोकेशन बताई। जब विमान पर सवार हुए थे तब हालें 84 किलो के थे, लेकिन जब वह बचाए गए तो उनका वजन केवल 37 किलो रह गया था।

रिकॉर्ड के अनुसार औसतन हर बचे हुए व्यक्ति का 29 किलो वजन कम हुआ था। हादसे के 72 दिनों बाद 16 लोगों का बचना भी किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा था। इस हादसे पर एक संग्रहालय भी बनाया गया है।

पंजाब केसरी से साभार

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भारत का वो रहस्यमयी कुंड, जहां ताली बजाकर निकलता है पानी!

कुदरत की बनाई इस दुनिया में हजारों राज छिपे हैं। इनके बारे में आज तक कोई नहीं जान सका और न ही कोई इन्‍हें सुलझा पाया। कुदरत ने कई ऐसी रहस्यमयी जगहें बनाई हैं, जिन्हें देखने के बाद लोग आज भी दांतों के नीचे उंगलियां दबाते हैं। जी हाँ भारत में एक ऐसा तालाब है, जिसका रहस्य अभी तक सुलझा नहीं है।

भारत के इस रहस्यमयी तालाब का नाम दलाही कुंड है। झारखंड के बोकारो शहर से 27 किमी दूर स्थित इस तालाब के सामने ताली बजाने से पानी ऊपर की ओर उठने लगता है। यह एक बर्तन में उबलता पानी जैसा दिखता है। इस तालाब का रहस्य आज भी रहस्य बना हुआ है। इस तालाब को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

इस तालाब का पानी गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म होता है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी में सल्फर और हीलियम होता है, जो त्वचा के रोगों को ठीक करता है। हर साल मकर संक्रांति के दिन इस जगह पर एक विशाल मेला लगता है।

यह रहस्यमय तालाब देवता दलाही गोसाई का पूजा स्थल है। यहां हर रविवार को लोग पूजा करते हैं। कुंड के प्रति लोगों की काफी आस्था है। लोगों की मान्यता है कि इसमें स्नान करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कई वैज्ञानिकों ने इस तालाब पर शोध किया और पाया कि इसका पानी जमुई नामक नाले से गरगा नदी में मिल जाता है। ताली बजाने पर ध्वनि तरंगों के कंपन के कारण पानी ऊपर उठने लगता है।

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जानिए राशियों के अनुसार केसा रहेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण

साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को लगेगा। इस चरण को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। नासा का कहना है कि अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025 से पहले नहीं होने की संभावना है।

ज्योतिषीय भविष्यवाणी के अनुसार, यह आगामी चंद्र ग्रहण सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से राशियों को प्रभावित कर सकता है। आपकी राशि पर कैसा प्रभाव पड़ेगा, जानिए इस पोस्ट के माध्यम से:-

मेष राशि : ज्योतिष के अनुसार मेष राशि जिसके स्वामी मंगल देवता हैं, उनके लिए चंद्र ग्रहण अशुभ साबित होगा। इसके दुष्प्रभाव से उनके भीतर तमाम चीजों को लेकर भय पैदा होगा।

वृष राशि : ज्योतिष के अनुसार वृष राशि वालों के लिए यह ग्रहण अच्छा नहीं कहा जा सकता है। इसके दुष्प्रभाव के चलते उन्हें जीवन में अचानक से बड़े संकटों और धन हानि का सामना करना पड़ सकता है।

मिथुन राशि : ज्योतिष के अनुसार मिथुन राशि जिनके स्वामी स्वयं बुध देवता हैं, उनके लिए कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला चंद्र ग्रहण शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा। चंद्र ग्रहण से उन्हें करिअर-कारोबार आदि में विशेष लाभ होगा।

कर्क राशि : कर्क राशि जिसके स्वामी स्वयं चंद्रदेव हैं, उनके लिए लिए यह ग्रहण शुभ साबित होगा, करियर और प्रमोशन में अच्छी तरक्की के साथ-साथ आय में भी वृद्धि होगी।

सिंह राशि : सिंह राशि के जातकों के लिए चंद्रग्रहण के चलते मान-सम्मान पर संकट आ सकता है। ऐसे में सिंह राशि के लोगों को किसी भी ऐसे कार्य को करने से बचना चाहिए जिसके चलते उन्हें भविष्य में अपमानित होना पड़े।

कन्या राशि : कन्या राशि के स्वामी बुध देवता देवता हैं, जिन्हें ज्योतिष में ग्रहों का राजकुमार माना गया है। ज्योतिष के अनुसार इसके दुष्प्रभाव के चलते कन्या राशि के जातकों को भविष्य में कुछ एक बड़े कष्ट सहने पड़ सकते हैं।

तुला राशि : तुला राशि जिसके स्वामी स्वयं शुक्र देवता हैंं, उनके लिए यह चंद्रग्रहण अशुभ साबित हो सकता है। चंद्र ग्रहण के दुष्प्रभाव से तुला राशि के जातकों को पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

वृश्चिक राशि : ग्रहण का वृश्चिक राशि पर शुभ प्रभाव पड़ेगा, आपको करियर में तरक्की मिलेगी और अगर आप विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो इस दौरान आपको अच्छी नौकरी मिल सकती है।

धनु राशि : धनु राशि के जातकों की आय में अचानक वृद्धि होगी, पारिवारिक माहौल अच्छा रहेगा, साथ ही कार्यस्थल पर आपके काम की भी काफी तारीफ होगी।

मकर राशि : मकर राशि के जातकों के लिए कार्तिक पूर्णिमा पर लगने जा रहा यह चंद्र ग्रहण कष्ट और तमाम तरह की पीड़ा का कारक बनेगा। ऐसे में इस राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण देखने और उस दौरान घर से निकलने से बचना चाहिए।

कुंभ राशि : कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव माने जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार कुंभ राशि के जातकों के लिए शुभ समाचार मिलने के प्रबल योग हैं, करियर के लिए समय काफी अनुकूल है और रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों के लिए यह चंद्र ग्रहण अशुभ और अचानक से बड़े नुकसान कराने वाला साबित होगा।

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नवंबर की इस तारीख को लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानिए ग्रहण के दौरान क्या करें

सर्दियों में ऊनी कपड़ों को धोते समय न करें ये गलतियां, अपनाएं ये तरीका

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सर्दी दस्तक दे चुकी है और जल्द ही इसकी तीव्रता भी बढ़ेगी। ऐसे में ठंड के मौसम में ठंड से बचने के लिए सभी लोग ऊनी कपड़ों का सहारा लेंगे।

लेकिन सर्दियों में ऊनी कपड़े पहनना जितना अच्छा और आरामदायक लगता है, उन्हें साफ और बैक्टीरिया मुक्त बनाना भी अपने आप में काफी चुनौती भरा है।

अक्सर लोग गर्म कपड़े धोते समय कुछ सामान्य गलतियां करते हैं। इससे न सिर्फ ऊनी कपड़े जल्दी खराब हो जाते हैं बल्कि उनकी चमक भी फीकी पड़ जाती है।

इसलिए हम आपके साथ साझा करने जा रहे हैं गर्म कपड़े धोने के कुछ आसान टिप्स, जिनका पालन करके आप ऊनी कपड़ों को साफ, बैक्टीरिया मुक्त और चमकदार बना सकते हैं।

ऊनी कपड़े हाथ से ही धोएं

वॉशिंग मशीन कपड़ों को ट्विस्ट करके धोती है जिससे ऊनी कपड़े डैमेज हो सकते हैं या उनका साइज चेंज हो सकता है। इसलिए ऊनी कपड़ों को खासकर स्वेटर्स को हाथ से या बहुत ही सॉफ्ट मुलायम ब्रश से ही साथ साफ करें। ।

टिशू पेपर का इस्तेमाल करें

अगर ऊनी कपड़ों में दाग लग जाए तो एक टिश्यू पेपर लें। उसमें हल्का- सा साबुन लगाकर हल्के हाथों से पोंछ लीजिए। दाग हट जाएंगे। केवल दाग को हटाने के लिए कपड़े को पूरा धोना जरूरी नहीं है।

गर्म पानी से रखें दूर

सर्दियों में कुछ लोग गर्म पानी से कपड़े धोना पसंद करते हैं। लेकिन ऊनी कपड़ों को गर्म पानी में धोने से उनकी चमक चली जाती है। इसलिए ऊनी कपड़ों को धोने के लिए ताजे या गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना सही होता है।

ऊनी कपड़े धोने के टिप्स

ऊनी कपड़े धोने के लिए, हल्के सर्फ या ऊनी कपड़े वाले तरल साबुन का उपयोग करना सबसे अच्छा हो सकता है।

वहीं वॉशिंग मशीन में धोने से ऊनी कपड़ों में रेशे तो आ जाते हैं, साथ ही उनकी चमक भी खत्म हो सकती है। इसलिए हमेशा बेहतर होता है कि ऊनी कपड़े को माइल्ड सर्फ में भिगोकर हल्के हाथों से ही धोएं।

ऊनी कपड़े सुखाने के उपाय

कपड़ों को धोने के बाद उन्हें अच्छे से निचोड़ कर धूप में रख दें। लेकिन ध्यान रहे कि गर्म कपड़ों को तेज धूप में रखने से बचें।

साथ ही ऊनी कपड़ों को सुखाने के लिए ड्रायर का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें। इससे आपके गर्म कपड़ों की चमक चली जाती है।

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भगवान श्री कृष्ण की इन पसंदीदा चीजों में छिपे कुछ सन्देश

भगवान श्री कृष्ण, जगत के अनुयायी, श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। कृष्ण जी का मनमोहक रूप बहुत ही मंत्रमुग्ध कर देने वाला है। वे अपने भक्तों के प्रति बहुत स्नेह रखते हैं। श्री कृष्ण भक्त की रक्षा के लिए सदैव उपस्थित रहते हैं।

यह तो सभी जानते हैं कि भगवान कृष्ण को दूध, दही और माखन-मिश्री बहुत प्रिय थे लेकिन साथ ही भगवान श्रीकृष्ण अपने साथ ऐसी चीजें रखते है जो जनसाधारण के लिए कुछ न कुछ सन्देश अवश्य देती हैं। श्री द्वारकाधीश से संबंधित प्रतीक चिन्हों का भी विशेष महत्व है। इन्हें घर में रखना भी काफी शुभ माना जाता है।

आज की इस पोस्ट में हम जानेगें श्रीकृष्ण की पसंदीदा चीजों के छिपे उद्देश्य के बारे में,चलिए जानते हैं:-

बांसुरी

भगवान कृष्ण को बांसुरी बहुत प्रिय थी, इसलिए उनका एक लोकप्रिय नाम ‘मुरलीधर‘ है। बांसुरी एक मधुर वाद्य है। यह संदेश देता है कि हमारा जीवन भी बांसुरी की तरह सुरीला और मधुर होना चाहिए। परिस्थिति कैसी भी हो हमें हमेशा खुश रहना चाहिए और खुशियां फैलाने का प्रयास करना चाहिए।

माखन मिश्री

कृष्ण भगवन को माखन मिश्री बहुत प्रिय थी। गोपियों का माखन चुराकर खाने की वजह से उनका नाम “माखनचोर” भी पड़ा। मिश्री का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि जब इसे माखन में मिलाया जाता है, तो उसकी मिठास माखन के कण-कण में घुल जाती है।

माखन के प्रत्येक हिस्से में मिश्री की मिठास समा जाती है। मिश्री युक्त माखन जीवन और व्यवहार में प्रेम को अपनाने का संदेश देता है। यह बताता है कि प्रेम में किस प्रकार से घुल मिल जाना चाहिए।

मोर पंख

मोरपंख भी कृष्ण जी को बहुत भाता है, यही वजह है कि वे इसे अपने मुकुट पर धारण करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में मोरपंख का बड़ा महत्व बताया गया है। मोरपंख में कई तरह के रंग समाहित होते हैं। ये रंग जीवन के हालात को दर्शाते हैं।

मोरपंख का गहरा रंग दुख और कठिनाइयों, हल्का रंग सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक है। इसका मतलब है कि व्यक्ति को जीवन में सुख और दुख दोनों से गुजरना पड़ता है। लेकिन उसे दोनों ही स्थितियों में समान रहना चाहिए।

कमल फूल

शास्त्रों के अनुसार कमल के फूल को अत्यंत शुद्ध माना गया है। कीचड़ में उगने के बाद भी यह अपनी सुंदरता, कोमलता और शुद्धता नहीं खोता है। यह हमें सरल और सुंदर ढंग से जीने की सीख देता है।

वैजंती माला

श्री कृष्ण वैजंती माला पहनते हैं। यह माला कमल के बीज से तैयार की जाती है और ये बीज बहुत सख्त होते हैं। हमें वैजयंती माला से संदेश मिलता है कि जीवन भले ही कितनी भी कठनाईयों से घिरा हो लेकिन समझदारी से लिए गए निर्णय सख्त राहों को भी आसान बना देते हैं।

गाय

श्रीकृष्ण को गाय अति प्रिय थी। वो इसलिए क्योंकि गाय को गुणों की खान माना जाता है। ‘पंचगव्य‘ अर्थात गाय का दूध, गाय का दही, गोमूत्र, गाय का घी, गाय का गोबर शास्त्रों में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

‘गौसेवा‘ दुखों का नाश करती है और समृद्धि देती है। गाय के प्रति श्रीकृष्ण का प्रेम ये सिखाता है कि जीवन में आप चाहे कितने ही उच्च पद पर आसीन हों, कितने ही गुणवान हों, लेकिन अपने व्यक्तित्व में अहंकार को मत आने दें। हमेशा उदार रहें और दूसरों को स्नेह दें।

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डैंड्रफ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए करें एलोवेरा के साथ इन चीज़ों का इस्तेमाल

बालों में डैंड्रफ हो जाने के बहुत से कारण हो सकते हैं। कई बार धूल, गंदगी और बदलते मौसम के चलते बालों में रूसी हो जाती है तो कभी बालों की सही देखभाल नहीं करने से भी ये समस्या हो सकती है।

रूसी न केवल बालों को रूखा बना देती है बल्क‍ि इससे सिर में घाव भी हो जाते हैं। बालों में डैंड्रफ हो जाने पर सिर में खुजली होने लगती है। बहुत अधि‍क खुजली करने से सिर में घाव बन जाते हैं साथ ही बालों की जड़ें भी कमजोर हो जाती है।

ऐसे में घरेलू उपाय सबसे बेहतर हैं। घरेलू उपाय सुरक्षि‍त होते हैं और इससे बालों को कोई नुकसान भी नहीं होता। आप चाहें तो इन घरेलू उपायों को आजमाकर इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

एप्पल साइडर विनेगर और एलोवेरा का इस्तेमाल करें

बालों में डैंड्रफ की समस्या से राहत पाने के लिए आप एलोवेरा और एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इन दोनों चीजों में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो डैंड्रफ की समस्या को दूर करने में कारगर होते हैं।

इनके इस्तेमाल से बालों में डैंड्रफ की समस्या हो जाती है, इस उपाय को करने के लिए आप सबसे पहले एक बड़े कटोरे में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, इसमें आधा चम्मच एलोवेरा जेल और एक चम्मच शहद मिलाएं और उसके बाद कि इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें,

अब इस तैयार मिश्रण को अपने स्कैल्प और बालों पर लगाएं और 20 मिनट के लिए छोड़ दें, इसके बाद बालों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।

नींबू और एलोवेरा से बने हेयर मास्क का इस्तेमाल करें

बालों में डैंड्रफ की समस्या से राहत पाने के लिए आप नींबू और एलोवेरा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस उपाय को करने के लिए आप सबसे पहले एक बड़े कटोरे में आधा कप एलोवेरा जेल लें और उसमें दो चम्मच नींबू का रस मिलाएं।

इन दोनों चीजों को अच्छे से मिलाएं और इस तैयार मिश्रण को अपने स्कैल्प और बालों पर लगाएं और 30 मिनट के लिए छोड़ दें, इसके बाद अपने बालों को गुनगुने पानी से धो लें।

आपको हफ्ते में एक बार इस उपाय का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। यह उपाय बालों में होने वाली डैंड्रफ की समस्या को भी दूर करता है।

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यूँ बनाएं लहसुन का अचार बढ़ा देगा खाने का स्वाद, देखें वीडियो

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अचार लगभग हर घर में बनाया जाता है। खासतौर पर आम का अचार और मिर्च का अचार। लेकिन इसके अलावा भी कई चीजों का अचार बनाया जाता है। जो खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है।

अगर आपने अभी तक लहसुन का अचार नहीं बनाया है, तो इसे बनाकर देखें। इसे बनाना ज्यादा मुश्किल भी नहीं है और इसका स्वाद भी लाजवाब होता है। तो आइए जानते हैं लहसुन का अचार बनाने की विधि।

लहसुन का अचार सामग्री

एक सौ ग्राम लहसुन का अचार, 3 चम्मच सरसों का तेल, एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, दो चम्मच अमचूर पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, बारीक पिसा हुआ गुड़ और स्वादानुसार नमक। मसालों के लिए एक चम्मच राई, एक चौथाई चम्मच मेथी दाना, जीरा, एक चौथाई खड़ा धनिया और हींग।

लहसुन का अचार बनाने की विधि

लहसुन का अचार बनाने के लिए एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें। जब तेल गरम हो जाए तो उसमें लहसुन और हल्दी पाउडर डालकर धीमी आंच पर पकाएं।

इसे तब तक पकाएं जब तक कि लहसुन नरम न हो जाए। फिर अमचूर पाउडर डालकर मिला लें। इसे चमचे से चलाते हुए दो से तीन मिनट तक पकाएं। लहसुन में लाल मिर्च पाउडर, गुड़ और नमक भी डाल दें।

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नवंबर की इस तारीख को लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानिए ग्रहण के दौरान क्या करें

इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को लग रहा है। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब कोई खगोलीय पिण्ड या अंतरिक्ष यान अस्थायी रूप से किसी अन्य पिंड की छाया में आता है या उसके और दर्शक के बीच कोई अन्य पिंड आ जाता है।

इस दौरान चंद्रमा पर पूरी तरह से पृथ्वी की परछाई आ जाती है। कभी कभी पृथ्वी की यह छाया चंद्रमा पर एकदम लाल रंग की होती है।

चंद्र ग्रहण का समय

प्रारंभ : 3 बजकर 46 मिनट पर
समाप्त 6 बजकर 19 मिनट पर

जानें कहां कहां दिखेगा चंद्रग्रहण

ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक यह चंद्र ग्रहण भारत में थोड़े समय के लिए ही दिखेगा। भारत के साथ ही यह ग्रहण यूरोप, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पश्चिम एशिया सहित कई देशों में दिखेगा।

भारत में चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारत के भू-भाग पर भी पड़ेगा और उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी गोरखपुर, लखनऊ मुरादाबाद, बरेली, आगरा, मुजफ्फरपुर पर देखा जा सकेगा। इन जगहों पर सूतक काल भी मान्य होगा।

ग्रहण के दौरान करें ये काम

ग्रहण काल के दौरान हमारे आसपास सब कुछ प्रभावित होता है। चंद्र ग्रहण के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण के दौरान गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए, ऐसा कहा जाता है कि गुरु ग्रह के बीज मंत्र ‘ओम ग्रां ग्रीन ग्रुन्स: गुरुवे नमः‘ का जाप फलदायी होता है।

साथ ही ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना फलदायी होता है ग्रहण के समय तुलसी का एक पत्ता मुंह में रखना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण से पहले और ग्रहण समाप्त होने के बाद व्यक्ति को स्नान करना चाहिए, जबकि ग्रहण समाप्त होने के बाद दान-पुण्य करना चाहिए, इसके अलावा ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर को गंगाजल से शुद्ध करें।