वास्तु टिप्स: पैसों की तंगी से छुटकारा पाने के लिए आज घर लाएं ये चीजें!

वास्तु टिप्स: हर व्यक्ति की यही ख्वाहिश होती है कि वह बहुत अमीर हो और उसे किसी चीज की कमी न हो। इस सपने को पूरा करने के लिए वह लगातार मेहनत करता है। एक बेहतर जीवन जीने और पैसे कमाने के लिए वह सम्भव प्रयास करता है।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर कोई इन चीजों में सफल हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में दोषों के कारण भी धन की हानि होती है। इसलिए लोग जितनी मेहनत कर सकते हैं उतनी मेहनत करते हैं लेकिन उसे वांछित सफलता और धन नहीं मिलता है।

ऐसे में वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कुछ ऐसी चीजें रखने के बारे में बताया गया है। जिन्हें रखने से वास्तु दोषों से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।

इस पोस्ट के माध्यम से जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में किन वस्तुओं को रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

भगवान गणेश की तस्वीर

वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार के दोनों ओर गणेश जी के चित्र लगाएं। आप चाहें तो एक मूर्ति भी रख सकते हैं। ऐसा करने से घर का वास्तु दोष कम होता है, जिससे सुख-समृद्धि आती है।

तुलसी का पौधा

वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी का पौधा धन और समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए तुलसी का पौधा घर के ईशान कोण में लगाना चाहिए। इसे शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इससे घर में धन की प्राप्ति होगी।

कुबेर यंत्र

भगवान कुबेर को धन और समृद्धि का देवता माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के उत्तर पूर्व कोने पर भगवान कुबेर का शासन होता है इसलिए इस दिशा में शौचालय, जूते की रैक या भारी फर्नीचर जैसी चीजें नहीं रखनी चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। समृद्धि के लिए उत्तर की दीवार में कुबेर यंत्र स्थापित करना चाहिए।

तिजोरी या अलमारी

वास्तु के अनुसार घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में पैसों के अलावा सभी कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज रखें। इसके साथ ही घर या ऑफिस में लॉकर इस तरह रखें कि उसका दरवाजा उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर खुले। ऐसा करने से आपको पैसों की कमी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मंदिर में प्रतिदिन दीप जलाएं

वास्तु के अनुसार रोज सुबह शाम घर के मंदिर में दीपक जलाएं। ऐसा करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है। मंदिर में देवी लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति भी अवश्य रखें। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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देखिए बिल्ली और मछली के अनोखे रिश्ते का खूबसूरत वीडियो

जानवरों और पक्षियों के वीडियो और फोटो अक्सर लोगों को खूब लुभाते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसी कई वीडियो वायरल होती रहती हैं। इनमें से कई हैरान कर देने वाली हैं। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो के शुरू होते ही एक बिल्ली एक खूबसूरत तालाब के किनारे बैठी नजर आ रही है और उसे देखकर मछलियां उसके पास आने लगती हैं। फिर यह बिल्ली मछलियों को प्यार करने लगती है।

मछलियां भी बिल्ली से डरे बिना उसके करीब आती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे मछलियां बारी-बारी से बिल्ली के पास आती हैं और उसे प्यार करने लगती हैं।

इस इमोशनल और खूबसूरत वीडियो को फॉरेस्ट ऑफिसर सुशांत नंदा (IFS Officer Susanta Nanda) ने ट्विटर पर पोस्ट किया है। उन्होंने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा- ‘प्यार बांटने का यह बेहतर तरीका है’ ।

इस वायरल वीडियो को अब तक पांच हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है। लोग मछलियों और बिल्ली की इस बॉण्डिंग  को काफी पसंद कर रहे हैं।

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दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली 10 भाषाएं

कोई भी भाषा या बोली एक व्यक्ति द्वारा अपनी बात को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने का एक माध्यम है। इस धरती पर मानव सभ्यताओं के फलने-फूलने के साथ ही साथ असंख्य भाषाएँ व बोलियाँ आस्तित्व में आयीं। इनमें से कई भाषाएँ सभ्यताओं के पतन के साथ ही खत्म हो गई लेकिन कई सभ्यताएं और भाषाएँ आज भी खूब फल-फूल रही हैं।

अब प्रश्न यह है कि दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा कौन सी है? इसका जबाव प्रमाणिक तौर पर किसी के पास नहीं है. हालांकि यूएन (संयुक्त राष्ट्र) के अनुसार दुनिया भर में बोली जाने वाली कुल भाषाएँ 6809 है और इनमें से सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा मंडारिन है जोकि चीन की राजकीय भाषा भी है।

इसके साथ ही इस लेख में हम आपके लिए दुनिया भर में सबसे अधिक बोले जाने वाली 10 भाषाओं के बारे में जानकारी लेकर आए हैं। तो ये रही सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषाएँ (ऊपर से नीचे के क्रम में)

स्टैंडर्ड चायनीज अथवा मैंडरिन/मंडारिन

मानक चीनी (Standard Chinese) या मैंडरिन भाषा पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सिनो-तिब्बतीयन (Sino-Tibbetean) भाषा-परिवार की मैंडरिन दरअसल उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी चीन के अधिकांश क्षेत्रों में बोली जाने वाली चाईनीज़ भाषा की अलग-2 शाखाओं का एक समूह है।

देशी वक्ता (बोलने वाले स्थानीय निवासी): 91 करोड़ (910 मिलियन)
गैर-देशी वक्ता (विदेश में बोलने वाले): 20 करोड़ (200 मिलियन)
कुल वक्ता: 1.11 बिलियन
भाषा का नाम: 普通话 (पुंटोंघूआ;Putonghua)
भाषा परिवार: सिनो-तिब्बतीयन (Sino-Tibetan)
संबन्धित भाषाएँ: केंटोनीज़ (Cantonese), तिब्बतीयन (Tibetan), बर्मीज(Burmese)

मैंडरिन सीखें अब आसानी सेचूंकि चीनी मैंडरिन विश्व में सबसे अधिक बोली जाती है इसे सीखना एक शानदार अनुभव और कौशल साबित हो सकता है। यह किताब चीनी पढ़ना और लिखना आसान बना सकती है। इसमें 2,349 चीनी अक्षर और 5,000+ युग्म दिये गए हैं।

अंग्रेजी

मूल रूप से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में बोली जाने वाली अंग्रेजी भाषा लगभग 983 मिलियन लोगों के बातचीत का जरिया है। अंग्रेजी दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।

हिंदी

दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी तीसरे नंबर पर है। दुनिया में तकरीबन 55 करोड़ लोग इस भाषा को समझ सकते हैं। हिंदुस्तान में लगभग 45 करोड़ नागरिकों की बातचीत का जरिया हिन्दी भाषा ही है।

स्पेनिश

अंग्रेजी की तरह यह भाषा भी काफी देशों में प्रचलित है। स्पेनिश भाषा को लगभग 527 मिलियन (52 करोड़ 70 लाख) लोग बोलते हैं। स्पेनिश भाषा इन देशों की मुख्य या राजभाषा है: स्पेन, अर्जेंटीना, चिली, बोलीविया, पनामा, परागुए, पेरू, मेक्सिको, कोस्टा रिका, एल सैल्वाडोर, क्यूबा, उरुग्वे, वेनेजुएला, आदि।

रूसी भाषा

रूसी भाषा, पूर्वी स्लाविक भाषाओं में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। रूस क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा देश है। रूस की कुल जनसंख्या 14.3 करोड़ है। रूसी यूरोप की एक प्रमुख भाषा तो है ही, विश्व की प्रमुख भाषाओं में भी इस का विशेष स्थान है। रूसी भाषा लगभग 20 करोड़ से भी ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती हैं।

अरबी

अरबी भाषा, सामी भाषा परिवार की एक भाषा है। यह भाषा इब्रानी भाषा से सम्बन्धित है। अरबी भाषा, अरबी इस्लाम धर्म की बोली है, जिसमें क़ुरान-ए-शरीफ़ लिखी गयी है। अरबी भाषा सऊदी अरब, कुवैत, यूएई, ओमान, यमन, बहरीन, सीरिया, जॉर्डन, लेबनॉन, इराक और इजिप्ट (मिस्र) में बोली जाती हैं। इस भाषा को बोलने वालों की संख्या लगभग 246 मिलियन है।

बंगाली भाषा :

बंगाली भाषा बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत के त्रिपुरा तथा असम राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। इस भाषा को 211 मिलियन लोग बोलते हैं।

पुर्तगीज़ भाषा :

पुर्तगाली भाषा, ब्राजील, अंगोला, वेनेजुएला, मोजाम्बिक आदि जगहों पर भी बोली जाती है। यह भाषा दुनिया में लगभग 191 मिलियन लोग बोलते हैं।

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मलय-इंडोनेशियन :

भारत के दक्षिण-पूर्व में बसने वाले एशियाई देशों में मलय भाषा ज्यादा लोकप्रिय है। इस भाषा को मूल रूप से मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ब्रुनेई में बोला जाता है। मलय-इंडोनेशियन भाषा, मलय बोधगम्यता के प्रत्येक बिंदु के आधार पर पारस्परिक रूप से निकट भाषाओं का एक समूह है।

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फ्रेंच भाषा :

फ्रांसीसी भाषा एक रोमांस भाषा है जो विश्व भर में लगभग 9 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है। इस भाषा को बोलने वाले अधिकतर देश कनाडा, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, अफ्रीकी फ्रैंकोफोन, लक्ज़म्बर्ग और मोनाको हैं। विश्व के 54 देशों में इस भाषा को बोला जाता है।

अगर आप फोन को बगल में रखकर सोते हैं तो हो जाएँ सतर्क..?

आज कल बिना मोबाइल फोन के एक भी पल नहीं गुजरता। अगर हाथ में फोन न हो, तो इसके बिना समय बिताना बहुत मुश्किल हो जाता हैं। फोन हर समय साथ रहता है चाहे आप सो रहे हों या जाग रहे हों, बाथरूम में या बाहर हों।

जब हम सोते हैं तब भी फ़ोन हमारे बगल ही होता है और जानकारों के अनुसार यह आदत सेहत के लिए अच्छी नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 65% वयस्क और 90% किशोर अपने फोन चालू रखकर सोते हैं।

जब वे सुबह उठते हैं तो वे मूडी, थका हुआ और परेशान महसूस करते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि फोन भी इसकी एक वजह है।

इससे मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता, मोटापा, हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा होता है। अगर आप अपने फोन को बगल में रखकर सोते हैं तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा होता है।

दिमाग को खतरा

मोबाइल फोन से हानिकारक रेडिएशन निकलता है। ये हमारे दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा

मोबाइल फोन रेडिएशन के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा सेल फोन से निकलने वाली नीली किरणें नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को बाधित करती हैं। यह सर्कैडियन रिदम (बॉडी क्लॉक) को बाधित करता है। इससे अनिद्रा हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने फोन से आरएफ विकिरण को ‘मानव के लिए कार्सिनोजेनिक‘ के रूप में वर्गीकृत किया है। इससे ग्लियोमा, ब्रेन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

फोन को कितनी दूर रखना चाहिए?

यदि आप फोन को दूर रखते हैं, तो रेडियो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड एनर्जी कम हो जाती है। गंभीर परिणामों से बचने के लिए कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

सोने से पहले फोन का इस्तेमाल न करें..

हम मनोरंजन के नाम पर रात को सोने से पहले फोन के साथ समय बिताते हैं। अगर हम ऐसा करते हैं तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है। रात को सोने से आधा घंटा पहले स्मार्टफोन को पूरी तरह से एक तरफ रख दें..

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ड्रैगन फ्रूट है सेहत के लिए बेहद फायदेमंद, रहेंगे इन बीमारियों से दूर

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ड्रैगन फ्रूट शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए बाजार में ड्रैगन फ्रूट की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। क्योंकि इन फलों में कई तरह के पौष्टिक गुण होते हैं।

जो हमें कई तरह की बीमारियों से बचा सकता है। इसके साथ ही इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं।

ड्रैगन फ्रूट अन्य फलों से अलग है क्योंकि इसमें कई फायदे छिपे हैं। साथ ही कई लोग कोरोना के दौरान इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रहे थे।

इस पोस्ट में जानिए कैसे ड्रैगन फ्रूट शरीर के लिए फायदेमंद हैं :-

त्वचा को स्वस्थ रखने में उपयोगी ड्रैगन फ्रूट

त्वचा संबंधी विकारों को ठीक करने के लिए ड्रैगन फ्रूट बहुत अच्छे होते हैं। आप इस फल से एक प्राकृतिक फेस पैक भी बना सकते हैं, जो आपकी त्वचा को हाइड्रेट रखता है।

इससे त्वचा में निखार आता है। इस में मौजूद फैटी एसिड एक्जिमा, सोरायसिस जैसी समस्याओं को ठीक कर सकता है। इसमें विटामिन बी3 भी होता है जो त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करता है।

स्वस्थ बालों को बनाए रखने के लिए

इस फल इस्तेमाल त्वचा के साथ साथ बालों को स्वस्थ रखने के लिए भी किया जाता है। इस फल में मौजूद फैटी एसिड बालों में डैंड्रफ की समस्या को कम करने में मदद करता है।

शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है

यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें जैफ्लेवोनोइड्स, एस्कॉर्बिक एसिड, फेनोलिक एसिड और फाइबर जैसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शर्करा के स्तर को नियंत्रित करते हैं। इसके सेवन से आप मधुमेह को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मददगार

शरीर में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कई बीमारियों का कारण हो सकता है। खासतौर पर इससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करना चाहते हैं तो ड्रैगन फ्रूट खाएं।

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चेहरे पर प्राकृतिक सुंदरता और चमक लाने के लिए इस्तेमाल करें नींबू से बने फेस पैक्स!

चेहरे पर सामान्यत हर रोज किसी न किसी उत्पाद का इस्तेमाल किया ही जाता है, फिर मॉइश्चराइजर हो या अन्य कोई क्रीम व फाउंडेशन। ऐसे में त्वचा पर इनकी परतें जमती जाती हैं जो दिखाई नहीं पड़तीं, लेकिन हमारे चेहरे को बेजान बना देती है।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं चेहरे पर प्राकृतिक सुंदरता और चमक लाने के लिए आप नींबू फेस पैक्स का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं:-

नींबू में विटामिन-सी और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो त्वचा को साफ़ करने के साथ ही उम्र बढ़ने के संकेतों को भी कम करते हैं।

  • खीरे के पेस्ट में कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलाएं। इस पैक को चेहरे पर लगाएं और 10 से 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो दें। त्वचा साफ़ व चमकदार नजर आएगी। इस पैक को आज हर रोज इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • टमाटर के गूदे में आधा नींबू का रस और एक चम्मच दही मिलाएं। इस पैक को चेहरे पर लगाएं और 15-20 मिनट बाद ठंडे पानी से धो दें। इससे त्वचा से टैनिंग भी निकल जाएगी। इस पैक को हफ्ते में दो-तीन बार लगा सकते हैं।
  • एक चम्मच नींबू के रस में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दूध पाउडर मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट तक सूखने दें। फिर ठंडे पानी से धो दें। इस पैक को रोजाना इस्तेमाल कर चमकदार त्वचा पा सकते हैं।
  • आधा कप पपीते का गूदा, एक चम्मच शहद, आधा नींबू का रस और एक छोटा चम्मच चंदन पाउडर मिलाएं। इस पैक को चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद धो दें। हर दूसरे दिन इस पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • एक अंडे की जर्दी में एक नींबू का रस मिलाकर चेहरे और गर्दन पर पैक की तरह लगाएं। फिर 30 मिनट बाद सामान्य पानी से धो दें। सप्ताह में कम से कम एक बार इस पैक का इस्तेमाल करें। इससे त्वचा साफ़ होगी और खिल उठेगी।
  • दो बड़े चम्मच नारियल पानी में कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। नींबू और नारियल पानी त्वचा को चमकदार बनाते हैं और पोषण देते हैं। इस पैक को हफ्ते में दो से तीन बार लगा सकते हैं।
  • आधा नींबू का रस लें और उसमें दो बड़े चम्मच एलोवेरा का गूदा (पिसा हुआ) और एक चम्मच शहद को अच्छी तरह से मिलाएं। इस पैक को 10-15 मिनट चेहरे पर लगाएं और गुनगुने पानी से धो लें। इस पैक को सप्ताह में दो-तीन बार लगाएं।

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पैट गाइड: कुत्ते की देखभाल के लिए ज़रूरी बातें और सावधानियाँ

जब कभी आप एक डॉग को घर लाने के बारे में सोचें तो उसके लिए जरूरी है कि आप पहले उसकी केयर करने का तरीका जाने। आपको उसकी फिजिकल और इमोशनल दोनों ही जरूरतों का पता होना चाहिए।

इसका मतलब है कि पोषण से भरपूर खाना देना, पीने का साफ पानी देना, शेल्टर या उसे उसका घर देना और एक सेफ होम में रहने का मौका देना शामिल है।

डॉग की देखभाल करना एक बड़ी ज़िम्मेदारी होती है और डॉग पालने का निर्णय लेना, कोई ऐसा कदम नहीं है, जिसे आप बस यूं ही, बिना कुछ सोचे-समझे उठा लें।

आपके घर में आए इस नए फैमिली मेम्बर के साथ में आपके प्यार और भरोसे के बॉन्ड को बढ़ाने के लिए जरुरी है कि आपको उसके बारे में जानकारी हो।

आज हमारी इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं कुत्ते की देखभाल के लिए ज़रूरी बातें और सावधानियाँ, तो चकिए शुरू करते हैं :-

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सावधानियां:-

भोजन जो कुत्ते को नहीं देना चाहिए:-

कॉफी:-  यह पालतू जानवरों के लिए हानिकारक होती है क्योंकि इसके कारण कैफीन विषाक्तता हो सकती है। इस बीमारी के लक्षण हैं तेजी से सांस लेना, बेचैनी, मांसपेशियों में झटके और घबराहट।

आइस क्रीम:- मानवों की तरह ही कई कुत्ते लैक्टोस को सहन नहीं करते और परिणामस्वरूप उन्हें डायबिटीज़ हो जाती है।

चॉकलेट:- चॉकलेट में उच्च मात्रा में थियोब्रोमाइन नामक नुकसानदायक पदार्थ होता है। इसके कारण अत्याधिक प्यास लगती है, दौरे पड़ते हैं, दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है और फिर अचानक मौत हो जाती है।

शराब:- यह कुत्ते के लीवर और दिमाग को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है, कुत्ते कोमा में चले जाते हैं और यहां तक कि मौत भी हो जाती है।

प्याज:- यह कुत्ते के लाल रक्ताणुओं को नष्ट करके उसे नुकसान पहुंचाता है।

पिल्ले का चयन करते समय सावधानियां

पिल्ले का चयन आपकी जरूरत, उद्देश्य, उसके बालों, खाल, लिंग और आकार के अनुसार किया जाना चाहिए। पिल्ला वह खरीदें जो 8-12 सप्ताह का हो। पिल्ला खरीदते समय उसकी आंखे, मसूड़े, पूंछ और मुंह की जांच करें।

आंखे साफ और गहरी होनी चाहिए, मसूड़े गुलाबी होने चाहिए और दस्त के कोई संकेत नहीं होने चाहिए।

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पालतू कुत्ते की देखभाल

आश्रय – कुत्ते को रहने के लिए अच्छी तरह से हवादार, साफ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करें। आश्रय अत्याधिक बारिश, हवा और आंधी से सुरक्षित होना चाहिए। सर्दियों में कुत्तों को ठंड से बचाने के लिए कंबल दें और गर्मियों में छाया और ठंडे स्थानों की आवश्यकता होती है।

पानी – कुत्ते के लिए 24 घंटे साफ पानी उपलब्ध होना चाहिए। पानी को साफ रखने के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तन को आवश्यकतानुसार दिन में कम से कम दो बार या इससे अधिक बार साफ करना चाहिए।

बालों की देख रेख – सप्ताह में दो बार बालों की देख रेख की जानी चाहिए। कंघी करने से अच्छा है प्रतिदिन ब्रशिंग करें। छोटे बालों वाली नस्ल के लिए सिर्फ ब्रशिंग की ही आवश्यकता होती है और लंबे बालों वाली नस्ल के लिए ब्रशिंग के बाद कंघी करनी चाहिए।

नहलाना – कुत्तों को 10-15 दिनों में एक बार नहलाना चाहिए। नहलाने के लिए औषधीय शैंपू की सिफारिश की जाती है।

नवजात पिल्लों की देखभाल – पिल्लों के जीवन के कुछ हफ्तों के लिए उनकी प्राथमिक गतिविधियों में अच्छे वातावरण, आहार और अच्छी आदतों का विकास शामिल है।

कम से कम 2 महीने के नवजात पिल्ले को मां का दूध प्रदान करें और यदि मां की मृत्यु हो गई हो या किसी भी वजह से पिल्ला अपनी मां से अलग हो जाए तो शुरूआती फीड या पाउडर दूध पिल्ले को दिया जाता है।

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चिकित्सीय देखभाल

इंसानों की तरह, कुत्तों को भी हर 6-12 महीनों के बाद दांतों की जांच के लिए पशु चिकित्सक की आवश्यकता होती है। कुत्ते के दांतों को नर्म ब्रश के साथ ब्रश करें और एक ऐसे पेस्ट का चयन करें जो फ्लोराइड मुक्त हो क्योंकि फ्लोराइड कुत्तों के लिए बहुत ही जहरीला होता है।

पालतू जानवरों को नियमित टीकाकरण और डीवॉर्मिंग की आवश्यकता होती है ताकि उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं ना हों।
6 सप्ताह के कुत्ते को कैनाइन डिस्टेंपर, कैनाइन हेपेटाइटिस, कोरोना वायरल आंत्रशोथ (एन्टेरिटिस), कैनाइन पैरैनफ्लुएंजा, परवो वायरस संक्रमण, लेप्टोस्पायरोसिस का प्राथमिक टीकाकरण दें और फिर दूसरा टीकाकरण 2-3 सप्ताह से 16 सप्ताह के कुत्ते को दें और फिर वार्षिक टीकाकरण दें।

रेबीज़ बीमारी के लिए 3 महीने की उम्र के कुत्ते को प्राथमिक टीकाकरण दें, पहले टीके के 3 महीने बाद दूसरा टीका लगवाएं और फिर वार्षिक टीका लगवाना चाहिए।

हानिकारक परजीवियों से अपने पालतु जानवरों को बचाने के लिए डीवॉर्मिंग अवश्य करवानी चाहिए। 3 महीने और इससे कम उम्र के कुत्ते को प्रत्येक 15 दिनों के बाद डीवॉर्मिंग करवानी चाहिए।

6-12 महीने के बीच के कुत्ते को दो महीने में एक बार डीवॉर्मिंग करवानी चाहिए और फिर 1वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के कुत्ते को प्रत्येक 3 सप्ताह बाद डीवॉर्मिंग करवानी चाहिए। डीवॉर्मिंग कुत्ते के भार के अनुसार विभिन्न होती है।

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दुनिया में सबसे वफादार जानवर होता है “कुत्ता“। यह एक ऐसा जानवर है जिससे अगर एक बार आपसे लगाव हो जाए तो वो आपकी जिंदगी का एक अहम हिस्‍सा बन जाता है।

कुत्ता पालना बहुत जिम्मेदारी भरा काम होता है। इनकी सही तरीके से देखभाल करना पड़ती है। इसके साथ ही इनके खानपान और साफ सफाई का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन, कई बार लोग कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिस कारण उनके डॉगी की तबीयत खराब हो जाती है।

आपको बता दें कि कुत्ते के शरीर के एंजाइम और पाचन तंत्र इंसानी शरीर से बहुत अलग होता है। ऐसे में कुत्ते को हर वो चीज़ नहीं खिलाई जा सकती जो इंसान खाते हैं।

आज की इस पोस्ट में हम आपको उन चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो भूलकर भी कुत्तों को नहीं देनी चाहिए, तो चलिए जानते हैं:-

कुत्तों का खान पान

भोजन की मात्रा और किस्म, कुत्ते की उम्र और उनकी नस्ल पर निर्भर करती है। छोटी नस्लों को बड़ी नस्ल के मुकाबले भोजन की कम मात्रा की आवश्यकता होती है। भोजन उचित मात्रा में दिया जाना चाहिए नहीं तो कुत्ते सुस्त और मोटे हो जाते हैं।

संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स, फैट, प्रोटीन, विटामिन और ट्रेस तत्व शामिल हैं, पालतू जानवरों को स्वस्थ और अच्छे आकार में रखने के लिए आवश्यक होते हैं।

कुत्ते को 6 आवश्यक तत्व जैसे फैट, खनिज, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स, पानी और प्रोटीन की आवश्यकता होती है इसके साथ ही इन्हें सारा समय साफ पानी की आवश्यकता होती है।

पिल्ले को 29 प्रतिशत प्रोटीन और प्रौढ़ कुत्ते को आहार में 18 प्रतिशत प्रोटीन की जरूरत होती है। हम उन्हें ये सारे आवश्यक तत्व उच्च गुणवत्ता वाले सूखा भोजन देकर दे सकते हैं। इन्हें दिन में दो बार ½ -1 कप उच्च गुणवत्ता वाला सूखा भोजन देना चाहिए।

सावधानियां:-

भोजन जो कुत्ते को नहीं देना चाहिए:-

कॉफी:- यह पालतू जानवरों के लिए हानिकारक होती है क्योंकि इसके कारण कैफीन विषाक्तता हो सकती है। इस बीमारी के लक्षण हैं तेजी से सांस लेना, बेचैनी, मांसपेशियों में झटके और घबराहट

आइस क्रीम:- मानवों की तरह ही कई कुत्ते लैक्टोस को सहन नहीं करते और परिणामस्वरूप उन्हें डायबिटीज़ हो जाती है।

चॉकलेट:- चॉकलेट में उच्च मात्रा में थियोब्रोमाइन नामक नुकसानदायक पदार्थ होता है। इसके कारण अत्याधिक प्यास लगती है, दौरे पड़ते हैं, दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है और फिर अचानक मौत हो जाती है।

शराब:- यह कुत्ते के लीवर और दिमाग को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है, कुत्ते कोमा में चले जाते हैं और यहां तक कि मौत भी हो जाती है।

प्याज:- यह कुत्ते के लाल रक्ताणुओं को नष्ट करके उसे नुकसान पहुंचाता है।

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पग – कुत्ते की पालने योग्य सबसे पसंदीदा नस्ल, जाने कैसे करें देखभाल

पग – कुत्ते की पालने योग्य सबसे पसंदीदा नस्ल, जाने कैसे करें देखभाल

वैसे तो सभी कुत्ते बहुत प्यारे होते हैं परन्तु छोटे कद के कुत्तों की बात ही कुछ और होती है। यह कुत्ते बहुत प्यारे व सुन्दर होते हैं और इन्हें छोटे घरों या अपार्टमेंट में रखना भी आसान होता है। इन्हीं कुत्तों में सबसे ज्यादा पसंदीदा कुत्ता पग है l यह चार रंगों में पाया जाता है :- काला, गोल्डन, सिल्वर एवं एप्रीकॉटl

पग प्रजाति के कुत्ते चीन में विकसित हुए हैं और यह बच्चों को बहुत पसंद आते हैं l इस नस्ल के कुत्ते शांत स्वभाव और आलसी होते हैं इन्हें इंसानों की तरह सोना बहुत पसंद होता हैं l

ये अधिकतर समय सोते ही रहते हैं l पग नस्ल के कुत्तों की औसत आयु 12 से 15 साल तक होती है l पग को मिलनसार और सज्जन साथी के लिए जाना जाता है। 2004 में वर्ल्ड डॉग शो में पग को “बेस्ट इन शो” घोषित किया गया था।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं कि इनका रख-रखाव कैसे किया जा सकता है :-

 

खान पान

भोजन की मात्रा और किस्म, कुत्ते की उम्र और उसकी नस्ल पर निर्भर करती है। छोटी नस्लों को बड़ी नस्ल के मुकाबले भोजन की कम मात्रा की आवश्यकता होती है। भोजन उचित मात्रा में दिया जाना चाहिए नहीं तो कुत्ते सुस्त और मोटे हो जाते हैं।

संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स, फैट, प्रोटीन, विटामिन और ट्रेस तत्व शामिल हैं, पालतू जानवरों को स्वस्थ और अच्छे आकार में रखने के लिए आवश्यक होते हैं।

कुत्ते को 6 आवश्यक तत्व जैसे फैट, खनिज, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स, पानी और प्रोटीन की आवश्यकता होती है इसके साथ ही इन्हें सारा समय साफ पानी की आवश्यकता होती है।

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पिल्ले को 29 प्रतिशत प्रोटीन और प्रौढ़ कुत्ते को आहार में 18 प्रतिशत प्रोटीन की जरूरत होती है। हम उन्हें ये सारे आवश्यक तत्व उच्च गुणवत्ता वाले सूखा भोजन देकर दे सकते हैं। इन्हें दिन में दो बार ½ -1 कप उच्च गुणवत्ता वाला सूखा भोजन देना चाहिए।

देखभाल

  • इस नस्ल के कुत्ते अधिक गर्मी वाले वातावरण में ज्यादा अधिक देर तक नही रह सकते हैं गर्म स्थान पर ज्यादा देर तक रहने इसे समस्या होने लगती हैं। गर्मी से बचाने के लिए आपको विशेष रूप से इन पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। आप यदि ऐसे स्थान पर रहते हैं जहां अधिक गर्मी होती तो आपको पग की सुविधा अनुसार तापमान को नियंत्रित करना होगा।
  • ये खाने के मामले में थोड़े लालची होते है तथा स्वादिष्ट और पसंदीदा भोजन मिलने पर यह अपनी भूख से अधिक खा सकते हैं तथा इस कारण यह मोटे और भारी हो सकते है जिसके लिए आपको इसके भोजन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं।

पग डॉग का स्वास्थ्य

वैसे तो पग एक स्वस्थ्य नस्ल है लेकिन बाकी अन्य नस्लों की तरह ही इसे कुछ अनुवांशिक बीमारियों का खतरा बना रहता है तथा एक पग नस्ल को पालने से पहले आपको इन स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पता होना बेहद जरूरी हैं।

  • एलर्जी:- एलर्जी के प्रति भी पग एक स्वेदंशील नस्ल है तथा यह बहुत जल्दी भोज्य पदार्थों और पराग कणों के कारण एलर्जी का शिकार हो जाते हैं।
  • चेलेटिएला डर्मेटाइटिस:- चेलेटिएला डर्मेटाइटिस यह एक त्वचा रोग है जोकि बालो के बाहर वाली त्वचा को प्रभावित करता है। इस रोग के कारण बालो में डेंड्रफ की समस्या होने लगती है जोकि मुख्य रूप से पर पीट पर दिखाई देते हैं। चेलेटिएला डर्मेटाइटिस रोग के जिम्मेदार घुन के समान दिखने वाले परजीवी होती है।
  • पग डॉग एन्सेफलाइटिस:- पग डॉग एन्सेफलाइटिस (PDE) यह पग नस्ल में होने वाली एक बेहद खतरनाक और जानलेवा रोग है यह एक मस्तिस्क में होने वाली बीमार है इस रोग की वजह से मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। PDE एक लाईलाज बीमारी है इस रोग से अधिकतर व्यस्क पग डॉग प्रभावित होते हैं और इस रोग के दौरान दौरे, चक्कर आना, अंधापन जैसे लक्षण पग में देखने को मिलते है। अमेरिकी केनेल क्लब कैनाइन हेल्थ फाउंडेशन ने pde को पग नस्ल के लिए एक विनाशकारी बीमारी बताया है।
  • मिर्गी:- मिर्गी भी पग नस्ल में देखे जाने वाली एक अनुवांशिक बीमारियों में से एक है मिर्गी से सभी पग तो पीड़ित नहीं होते है लेकिन कुछ डॉग्स में यह समस्या देखने को मिल सकती हैं। पग नस्ल में मिर्गी के दौरे दिखने पर पशु चिकित्सक की सलाह से जरूरी उपचार करवाए।
  • कॉर्नियल अल्सर:- आपका प्यारा पग कार्नियल अल्सर से भी पीड़ित हो सकता है कॉर्नियल अल्सर के सबसे आम लक्षण स्क्विंटिंग, लालिमा और ओकुलर डिस्चार्ज हैं। उपयुक्त चिकित्सा के साथ ये आमतौर पर अपने प्रारंभिक आकार के आधार पर 3 से 5 दिनों में ठीक हो जाते हैं। 5 से 7 दिनों से अधिक समय तक बने रहने वाले अल्सर जिसमें चिकित्सा के बावजूद थोड़ा सुधार होता है, को दुर्दम्य माना जाता है।
यदि आपके पास पग है तो यह किताब इसके स्वभाव को समझने और इसे आपके और करीब लाने में मदद कर सकती है। यह किताब आपके पालतू पग की psychology यानि मनोविज्ञान को समझने में बहुत अधिक सहायक हो सकती है।

 

बेहद रहस्यमयी है यह मंदिर, भूख से दुबली हो जाती है भगवान कृष्ण की मूर्ति, जानिए क्या है रहस्य इसके पीछे

भारत विश्व में आस्था का केंद्र है। यहां कई चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर हैं। इनमें कई ऐसे मंदिर हैं जिनके रहस्य आज तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं।

भगवान कृष्ण का ऐसा ही एक मंदिर दक्षिण भारतीय राज्य केरल के थिरुवरप्पु में स्थित है। यह प्रसिद्ध मंदिर लगभग 1500 वर्ष पुराना माना जाता है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे क्या है रहस्य :-

दिन में 10 बार लगता है भोग

ऐसा माना जाता है कि यहां स्थित भगवान भूख को बर्दाश्त नहीं करते हैं, जिसके कारण उनके भोग के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। दिन में 10 बार भगवान को भोग लगाया जाता है।

यदि भोग नहीं लगाया जाता है तो उनका शरीर सूख जाता है। यह भी मान्यता है कि प्लेट में से थोड़ा-थोड़ा करके चढ़ाया गया प्रसाद गायब हो जाता है। यह प्रसाद भगवान श्रीकृष्ण खुद ही खाते हैं।

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ग्रहण काल ​​में भी बंद नहीं होता मंदिर

पहले यह मंदिर सामान्य मंदिरों की तरह ग्रहण के दौरान बंद रहता था, लेकिन एक बार जो हुआ उसे देख हर कोई हैरान रह गया। ग्रहण के अंत तक भगवान की मूर्ति सूख जाती है और कमर का पट्टा भी फिसल कर नीचे चला जाता है।

जब आदि शंकराचार्य को इस बात का पता चला तो वे इस स्थिति को देखने और समझने के लिए वहाँ पहुँचे। सच्चाई जानकर वह भी हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने कहा कि ग्रहण काल ​​में भी मंदिर खुला रहे और भगवान को समय पर भोजन कराया जाए।

सिर्फ 2 मिनट के लिए बंद होता है मंदिर

आदि शंकराचार्य के आदेश के अनुसार यह मंदिर 24 घंटे में सिर्फ 2 मिनट के लिए बंद होता है। मंदिर को 11.58 मिनट पर बंद किया जाता है और उसे 2 मिनट बाद ही ठीक 12 बजे खोल दिया जाता है।

मंदिर के पुजारी को ताले की चाबी के साथ कुल्हाड़ी भी दी गई है। पुजारी से कहा गया है कि अगर ताला खोलने में समय लगे तो वह कुल्हाड़ी से ताला तोड़ दे, लेकिन भगवान को चढ़ाने में देरी नहीं करनी चाहिए।

इसके अलावा, जब भगवान का अभिषेक किया जाता है, तो पहले देवता का सिर और फिर पूरा शरीर सूख जाता है। क्योंकि अभिषेक में समय लगता है और उस समय भोग नहीं लगाया जा सकता। इस घटना को देख लोग हैरान हैं।

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पौराणिक मान्यता

इस भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर से कई किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। बताया जाता है कि वनवास के दौरान पांडव, भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की पूजा करते और उन्हें भोग लगाते थे।

पांडवों ने वनवास समाप्त होने के बाद थिरुवरप्पु में ही इस भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को छोड़कर चले गए थे, क्योंकि यहां के मछुआरों ने मूर्ति को यही छोड़ने का अनुरोध किया था। मछुआरों ने भगवान श्रीकृष्ण की ग्राम देवता के रूप में पूजा करनी शुरू कर दी।

हालांकि मछुआरे एक बार संकट से घिर गए, तो एक ज्योतिष ने उनसे कहा कि आप सभी पूजा ठीक तरह से नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को एक समुद्री झील में विसर्जित कर दिया।

केरल के एक ऋषि विल्वमंगलम स्वामीयार नाव से एक बार यात्रा कर रहे थे, लेकिन उनकी नाव एक जगह अटक गई। लाख कोशिशों के बाद भी नाव आगे नहीं बढ़ पाई, तो उनके मन में सवाल खड़ा होने लगा कि ऐसा क्या है कि उनकी नाव आगे नहीं बढ़ रही है।

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इसके बाद उन्होंने पानी में नीच डुबकी लगाकर देखा तो वहां पर एक मूर्ति पड़ी हुई थी। ऋषि विल्वमंगलम स्वामीयार ने मूर्ति को पानी में से निकाली और अपनी नाव में रख ली। इसके बाद वह एक वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए रुके और मूर्ति वहीं रख दी।

जब वह जाने लगे तो मूर्ति को उठाने की कोशिश की, लेकिन वह वहीं पर चिपक गई। इसके बाद वहीं पर मूर्ति स्थापित कर दी गई। इस मूर्ति में भगवान कृष्ण का भाव उस समय का है जब उन्होंने कंस को मारा था तब उन्हें बहुत भूख लगी थी। इस मान्यता की वजह से उन्हें हमेशा भोग लगाया जाता है।

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