हैरतअंगेज अनोखे रोचक तथ्य जो आपने पहले नहीं सुने होंगे

दुनिया में कुछ ऐसे हैरतअंगेज अनोखे रोचक तथ्य हैं। जिनके बारे में आप नहीं जानते। आज इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रह हैं कुछ ऐसे ही हैरतअंगेज अनोखे रोचक तथ्यों के बारे में, जो आपने पहले नहीं सुने होंगे, तो चलिए जानते हैं:-

  • दुनिया की सबसे बड़ी गुफा वियतनाम में है और यह इतनी बड़ी है कि इसकी अपनी नदी है, जंगल है और अपना मौसम है। वियतनाम के ‘फोंग न्हा-के बैंग नेशनल पार्क’ में स्थित इस गुफा की अपनी अलग दुनिया है। इसे ‘वियतनाम की महान दीवार’ भी कहा जाता है।
  • कार्बन डेटिंग टेस्ट से पता चला है कि राजस्थान और कश्मीर में 8 से 9 हजार साल पहले भी खेती बाड़ी होती थी।
  • अमेरिका के शिकागो शहर में एक सड़क का नाम स्वामी विवेकानंद जी के नाम पर है उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था।
  • एक वैज्ञानिक शौध से पता चला है कि आलसी लोगों को बियर ज्यादा पसंद होती है।
  • पुरुष, महिलाओं की तुलना में ज्यादा अच्छा खाना बनाते है, इसी लिए बड़े-बड़े रेस्टोरेंट् में पुरुष ही कुक होते हैं।
  • लिओनार्दो दा विंची, जिन्होनें मशहुर पेंटिंग मोनालिसा बनाई थी। वे एक ही समय में एक हाथ से लिख सकते थे और दुसरे हाथ से पेंटिंग भी बना सकते है।
  • (18+) movies देखना गलत है। यह आपके सोच, विचार, शारीरिक और मानसिक समस्याएं उत्पन्न करती है। फिर भी 60-70% लोग (18+) मूवीज देखते हैं। जानते हैं क्यों क्योंकि उस समय हमारे दिमाग का फोकस पूरी तरह से उसी पर होता है और बाकी सारी चीजों को इग्नोर कर देता है।

  • हम में से कुछ लोग बहुत खुश होने से डरते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि कुछ बुरा हो जायेगा।
  • क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में डेनमार्क ही एक ऐसा देश है, जिसका राष्ट्रीय झंडा सबसे पुराना है जोकि 13वीं सदी से चला आ रहा है।
  • अगर आप किसी के घर में मेहमान बन कर जाएं, और वह आपको अपनी जीभ दिखाएं तो आपको कैसा लगेगा? शायद आपको बहुत बुरा लगेगा है ना। लेकिन, क्या आपको पता है कि दुनिया में एक ऐसी जगह भी है, जहां अपने घर में आए मेहमान को जीभ दिखाकर स्वागत किया जाता है और उस जगह का नाम है तिब्बत।
  • क्या आप जानते हैं कि “एप्पल कंपनी” ने फिल्मों में विलेन को आई फ़ोन उपयोग करने की अनुमति नहीं दी है।
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि केलिफोर्निया के एक फायर स्टेशन में एक ऐसा बल्ब है जो 1901 से अब तक लगातार जल रहा है।
  • पूरी दुनिया में डेनमार्क एक ऐसा देश है जहाँ लोग अपने बच्चों के नाम अपने मुताबिक नहीं रख सकते।
  • जापानी लोग समय के सबसे ज्यादा पाबंद होते है, यहां तक कि जापान की ट्रेने भी 30 सेकंड से ज्यादा लेट नहीं होती है।
  • क्या आप समंदर में मछली पकड़ने शौक़ीन हैं तो एक बात जरूर जान लें कि अगर आप समंदर में कोई जुर्म करते हो तो आपको भी समुद्री डाकू मान लिया जायेगा।
  • पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जिस के पास हॉस्पिटल ट्रेन है। उस हॉस्पिटल का नाम लाइफ लाइन एक्सप्रेस है।
  • जेरेमी बेन्थम के कंकाल को अभी भी लन्दन यूनिवर्सिटी की सभी महत्वपूर्ण मीटिंग्स में रखा जाता है। जेरेमी बेन्थम एक ब्रिटिश दार्शनिक, विधिवेत्ता और समाज सुधारक थे। उनकी मौत 6 जून, 1832 को हुई थी ।
  • क्या आप जानते हैं मिस्त्र देश में जो पिरामिड पाए जाते है उनका रंग पहले सफेद था।
  • विश्व में सेब की इतनी प्रजातियां है कि अगर रोजाना एक सेब खाएं तो हर प्रकार का सेब खाने के लिए 20 साल लगेंगे।
  • जापानी भाषा में sorry को 20 तरह से कहा जा सकता है।
  • आज तक दुनिया में कोई भी कुत्ता 29 साल से ज्यादा नहीं जीया है।

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भारत की ये 8 रहस्यमयी जगहें बना सकती हैं आपको रातों-रात अरबपति, छिपे हैं कई रहस्यमयी ख़ज़ाने

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भारत को ‘सोने की चिड़िया‘ के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है ‘सोने की गौरैया‘। ऐसा इसलिए था, क्योंकि  उस समय हमारा देश आर्थिक रूप से समृद्ध था और दुनिया के सबसे धनी देशों में से एक था।

उस वक़्त के राजा-महाराजा अपने ख़ज़ाने से जुड़ी जानकारियां गुप्त रखते थे। ऐसे में हमलावर भले ही राजाओं को हरा दें, मगर उनके ख़ज़ानों तक नहीं पहुंच पाते थे। भारत में ऐसे कई छिपे हुए ख़ज़ाने हैं, जिन्हें आज तक कोई नहीं ढूंढ पाया है।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं भारत की कुछ ऐसी जगहों के बारे में जहाँ छिपे हैं कई रहस्यमयी ख़ज़ाने, तो चलिए जानते हैं:-

चारमीनार सुरंग, हैदराबाद

सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा निर्मित, यह सुरंग चारमीनार और गोलकुंडा किले को जोड़ती है। यह गुप्त मार्ग अत्यावश्यकता के दौरान शाही परिवार के लिए एक आपातकालीन निकास के रूप में कार्य करता था।

ऐसा कहा जाता है कि इस सुरंग में राजा ने अपना खजाना छिपा दिया था। माना जाता है कि यह खजाना आज भी वहां पर है लेकिन आज तक इसे कोई ढूंढ नहीं पाया।

किंग कोठी पैलेस, हैदराबाद

हैदराबाद के अंतिम निज़ाम, मीर उस्मान अली को फोर्ब्स पत्रिका द्वारा 210.8 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ ‘पांचवें सबसे धनी व्यक्ति’ के रूप में नामित किया गया था, जबकि टाइम पत्रिका ने उन्हें 1937 में दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था।

ऐसा कहा जाता है कि राजा का खजाना आज भी उसी पैलेस में दबा हुआ है। उनके विशाल महल में, हीरे, माणिक, नीलम, मोती और रत्न जैसे कीमती आभूषण स्टील की संदूकों में जमा हैं।

अलवर किला, राजस्थान

मुग़ल सम्राट जहांगीर के निर्वासन के दौरान, सम्राट ने राजस्थान के अलवर किले में शरण ली थी। ऐसा माना जाता है कि उसने यहां बहुत सारा खजाना छुपाया था। इसमें से कुछ खजाना मिल गया था लेकिन अभी भी इसका काफी बड़ा हिस्सा यहीं पर है।

जयगढ़ किला, जयपुर

जब मान सिंह प्रथम अफगान विजय से अपने रास्ते पर था, तो उसके पास खजाने का एक विशाल संदूक था। मान सिंह अकबर के नवरत्नों में एक और जयपुर और सेनापति था कहा जाता है कि उन्होंने अक़बर को लूट का हिस्सा नहीं दिया और ख़ज़ाने के जयगढ़ के किले में छिपा दिया।

ऐसा भी कहा जाता है कि तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने खजाने की तलाशनें का आदेश दिया था लेकिन यह कितना सफल रहा यह कोई नहीं जनता।

पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल

भारत के केरल राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम के पूर्वी किले के भीतर स्थित श्री पद्मनाथ स्वामी मंदिर भगवान विष्णु का मंदिर है। यह मंदिर केरल और द्रविड़ वास्तुशिल्प शैली का अनुपम उदाहरण है। इसे दुनिया का सबसे धनी मंदिर माना जाता है।

2011 में कोर्ट के आदेश के बाद इस मंदिर के तहखाने को खोला गया था. सभी यह देखकर चौंक गए कि इसमें ज्‍वेलरी, मूर्तियां, क्राउन, सोने के सामान और बेशकीमती रत्‍न पाए गए थे। ऐसा अनुमान लगाया गया था कि इस तहखाने में रखे इन सामानों की कुल कीमत 22 अरब यानी करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये होगा।

इसके दूसरे तहखाने को भी खोलने का आदेश दिया था लेकिन इस मंदिर के पुजारियों ने कहा कि इस खजाने की रक्षा भगवान विष्‍णु के अवतार नाग कर रहे हैं। इसे खोलने पर भारी तबाही आ सकती है।

कृष्णा नदी खजाना, आंध्र प्रदेश

कृष्‍णा नदी को दुनिया के सबसे कीमती और मशहूर कोहीनूर हीरे के लिए जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस नदी को पवित्र माना जाता हैं। माना जाता है कि यह चौथी सबसे बड़ी नदी हीरे की खान है।

यह नदी आंध्र प्रदेश से बहती है और चार राज्‍यों के लिए पानी का मुख्‍य स्‍त्रोत है। एक समय में दुनियाभर के लिए यह नदी हीरे की प्रमुख स्रोत थी। दुनिया के हर 10 में 7 हीरे इस नदी से आते थे।

सोन भंडार गुफाएं, बिहार

सोन भंडार – जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘सोने का भंडार‘, उसमें सुरक्षित रूप से छिपे हुए सुनहरे खजाने की छाती की ओर इशारा करता है। ये बिहार के राजगीर की एक बड़ी चट्टान में मौजूद दो गुफाएं हैं।

ईसा पूर्व तीसरी या चौथी सदी इन गुफ़ाओं में मगध के राजा बिंबिसार ने अपना ख़ज़ाना छिपाया था। किंवदंती है कि यदि आप गुफा पर उकेरी गई लिपियों को समझ सकते हैं, तो गुफा का द्वार जादुई रूप से खुल जाएगा।

अलादीन के दिनों की तरह, है ना? इस ख़ज़ाने को पाने के लालच में अंग्रेज़ों ने गुफ़ा के प्रवेश द्वार को तोप से तोड़ने की कोशिश की थी, मगर वे असफ़ल रहे।

श्री मूकाम्बिका मंदिर, कर्नाटक

पश्चिमी घाट की तलहटी में स्थित श्री मूकाम्बिका मंदिर कर्नाटक के कोल्लूर जिले में स्थित है। यह मंदिर करीब 1200 साल पुराना मंदिर है। बेदनोर के नायक, जिन्होंने शुरू में विजयनगर साम्राज्य के अधीन शासन किया था, ने इस मंदिर को अपना राज्य मंदिर घोषित किया।

ऐसा माना जाता है कि राजाओं ने यहां एक गुप्त रूप से बंद कक्ष में बहुत सारा खजाना छिपा दिया था, जिसकी रक्षा एक सर्प की आकृति करती है।

कहा जाता है की यह सर्प आकृति मंदिर को बाहरी ताकतों से बचाती है। इसके अलावा यहां की मूर्तियों को जो भी गहने पहनाए गए हैं, उनकी क़ीमत क़रीब 100 करोड़ रुपये है।

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इस देश में सफाई कर्मचारियों की सैलरी है डॉक्टर-इंजीनियर से ज्यादा, सैलरी जानकर हैरान रह जाएंगे आप

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भले ही हमारे देश में सफाई का काम निम्न स्तर का माना जाता है, लेकिन एक देश ऐसा भी है जहाँ सफाई कर्मचारियों की मांग इतनी अधिक है कि उनका वेतन भारतीय डॉक्टरों और इंजीनियरों से भी ज्यादा है।

आपको जानकर यकीन नहीं होगा, लेकिन यह सच है और इसकी वजह यह है कि इस देश में सफाई कर्मचारियों की भारी कमी है। मोटी तनख्वाह मिलने के बाद भी सफाईकर्मी नहीं मिल रहे हैं।

दरअसल ऑस्ट्रेलिया में सफाई कर्मचारियों की इतनी ज्यादा मांग है कि उनको डॉक्टर-इंजीनियर से भी अधिक सैलरी मिल रही है। सफाईकर्मियों की सैलरी कंपनियां घंटे के हिसाब से बढ़ा रही हैं।

सफाईकर्मियों को औसतन 8 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके बावजूद भी सफाईकर्मियों की कमी हो गई है। अब कपंनियां सालाना एक करोड़ तक सैलरी देने को तैयार हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिडनी में स्थित क्लीनिंग कंपनी Absolute Domestics की मैनेजिंग डायरेक्टर जोए वेस का कहना है कि सफाई के लिए लोग नहीं मिल पा रहे हैं जिसकी वजह से उनकी सैलरी बढ़ानी पड़ रही है। अब क्लीनिंग डिपार्टमेंट की सैलरी बढ़ाकर 45 डॉलर यानि 3600 रुपये/घंटा कर दी गई है।

ऑस्ट्रेलिया में साल 2021 से सफाई कर्मचारियों की कमी है। करीब साल भर पहले जहां उन्हें 2700 रुपये/घंटा मिलता था, वहीं अब उन्हें 3500-3600 रुपये ऑफर किए जा रहे हैं।

कुछ कंपनियों ने 4700 रुपये प्रति घंटे से ज्यादा वेतन देने को तैयार है, जिससे उनका वेतन साल में 98 लाख रुपये से भी आगे पहुंच जाएगा लेकिन इसके बाद भी सफाईकर्मी नहीं मिल रहे हैं।

सफाई कर्मचारियों को खिड़कियां और गटर की सफाई के लिए 82 लाख रुपये सालाना तक देने के लिए तैयार हैं। ब्रिटेन ने भी कर्मचारियों की कमी हो गई थी। वहां सिर्फ गोभी तोड़ने के लिए 65 लाख रुपये सालाना दिया जा रहा था। तो वहीं कई देशों में रोजगार की भारी कमी है।

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एक ऐसा गांव जहां हिंदू भी रखते हैं मुस्लिम सरनेम, परंपरा ऐसी जिसे आज भी निभा रहे हैं लोग

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आज के बदलते परिवेश में भी बिहार में एक ऐसा गांव है, जहां हिंदू हो या मुसलमान सभी अपना उपनाम एक ही रखते हैं। वह भी खासकर मुस्लिम सरनेम। यह गांव नालंदा जिले का “गिलानी” है। माना जाता है कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा को लोग आज भी निभा रहे हैं।

यहाँ के लोगों को अपने नाम के साथ यह सरनेम जोड़ने पर गर्व महसूस होता है। कई ऐसे लोग हैं जो दशकों से दूसरे राज्यों में रह रहे हैं। इसके बाद भी उन्होंने अपना सरनेम नहीं बदला।

दरअसल यह सरनेम उनके गांव के नाम पर है उनका कहना है कि उनके नाम से ही पता चलता है कि वे किस गांव से ताल्लुक रखते हैं।

इसी प्रकार अस्थानी की अस्थानवी, हरगवां की हरगंवी, डुमरांव की डुमरांवी, उगावां की उगानवी, चकदीन की चकदीनवी और देसना गांव के लोग देसनवी उपनाम का इस्तेमाल करते हैं।

सबसे खास है ‘गिलानी’

इन सब में गिलानी सबसे खास हैं। अन्य छह गांवों में केवल मुस्लिम धर्म के लोग ही इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। वहीं गिलानी में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। गांव के सबा आजम गिलानी के मुताबिक यह परंपरा मुगल काल से चली आ रही है।

ऐसा माना जाता है कि ‘गिलानी‘ नाम इस्लाम के अनुयायी हजरत अब्दुल कादिर जिलानी के नाम पर रखा गया है। अरबी भाषा में ‘G’ अक्षर नहीं होता, इसलिए लोग उन्हें जिलानी कहते हैं। इस वजह से गांव का पूरा नाम मोहिउद्दीनपुर गिलानी है।

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मौलाना मुजफ्फर गिलानी की किताब ‘मजमीन‘ के मुताबिक गिलान एक जगह का नाम है। जहां बड़े पीर के अनुयायी रहते थे। वहां से कुछ लोग किसी कारणवश मोहिउद्दीनपुर गिलानी आए थे। उन लोगों के उपनामों में गिलानी भी थे। यहां के उन लोगों के प्रभाव और आपसी सौहार्द को देखकर लोग अपने सरनेम में गांव का नाम रखने लगे।

गांव में 5000 की आबादी है, जहां आधा दर्जन जातियां रहती हैं

गिलानी गांव की कुल आबादी 5000 है। जहां मुस्लिम समुदाय के अलावा पासवान, कोईरी, यादव, नई, रविदास, कहार, कुम्हार पंडित जाति के लोग रहते हैं। दोनों धर्मों के लोग अपने-अपने नामों के पीछे गिलानी उपनाम का प्रयोग करते हैं।

यहां के निवासी इमदाद अहसान गिलानी का कहना है कि उन्हें अपने नाम के बाद गिलानी शब्द का इस्तेमाल करने पर गर्व महसूस होता है। यहां सभी हिंदू और मुसलमान अपने नाम के आगे गिलानी लगाते हैं। पुराने से अब तक नए लोग भी इस परंपरा का पालन कर रहे हैं।

एक अंतर यह आ गया है कि पुरानी पीढ़ी के लोग जाति की उपाधि लगाने के बाद गिलानी शब्द का प्रयोग करते थे। युवा पीढ़ी जाति को हटाकर सीधे नाम के साथ गिलानी लगा देती है।

उदाहरण के लिए, अनिल कुमार गिलानी, इमरान गिलानी, मसूद अजहर गिलानी, डोमन गिलानी, अभिषेक गिलानी नाम के लोग गाँव में रहते हैं और उपनाम का उपयोग करते हैं।

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सदियों पुराना गांव है गिलानी

गांव के लोगों ने बताया कि मोहिउद्दीनपुर गिलानी सदियों पुराना गांव है। यहाँ एक नहीं, कई विद्वान, साहित्यकार, कई आईएएस, इंजीनियर, डॉक्टर हुए हैं। इतना ही नहीं यहां के कई लोगों ने विदेशों में भी झंडा फहराया है।

यह गांव आम के लिए भी काफी मशहूर है। यहां आम के बड़े-बड़े बाग हैं। अन्य जिलों से भी लोग यहां आम खरीदने आते हैं।

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भरपूर गुणों की खान है ‘गाय का दूध’

गाय का दूध, मक्खन, घी स्वर्ण आभा वाला है जो सर्वरोगनाशक और विषविनाशक होता है। गाय के दूध में जो तत्व पाए जाते हैं, वे मां के दूध के अतिरिक्त दुनिया के किसी भी पदार्थ में नहीं मिलते।

गाय के दूध में स्वर्णतुल्य ‘कैरोटीन‘ पदार्थ होता है, जो आंखों की ज्योति बढ़ाता और हृदय को पुष्ट करता है। साथ ही ‘सेरीब्रामाइड‘ तत्व है, जो दिमाग एवं बुद्धि के विकास में सहायक है।

गाय के दूध से व्यक्ति खुशमिजाज रहता है। इसमें ‘ट्रिप्टोफेन‘ सबसे अधिक पाया जाता है, जो ‘सैरीटोनिक‘ हार्मोंस की कमी नहीं होने देता। इन हार्मोंस की कमी से ही आदमी का मूड खराब रहता है। गाय के दूध में ‘केजूगटिड लिनोलिक एसिड‘ (सी.एल.ए.) यौगिक सर्वाधिक पाया जाता है, जो कैंसर रोधी है।

गाय के दूध में अमीनो एसिड पर्याप्त मात्रा में मिलता है। इससे शरीर बढ़ता है तथा कोशिकाओं की टूट-फूट की क्षतिपूर्ति होती है। आज के वैज्ञानिक विश्लेषण से भी यह स्पष्ट हो चुका है कि इसमें पौष्टिकता और रोगों से लड़ने की अद्भुत शक्ति है।

इसे पीने से मूत्र भी अधिक आता है, इसलिए मूत्राशय के रोग पथरी आदि दूर हो जाते हैं। स्त्रियों में गर्भाशय एवं मासिक धर्म की खराबी दूर हो जाती है। प्रमेह तथा मिर्गी में गाय का दूध लाभकारी होता है।

बुद्धिजीवी मनुष्य की रोज की उचित खुराक में गांधी जी ने गाय का दूध भी प्रमुख माना है। अमरीकन पत्र ‘फिजिकल कल्चर’ के संपादक और प्रसिद्ध दुग्धाहार चिकित्सक मेकफेडन का कथन है कि इस जगत में गाय के दूध से बने मक्खन के समान सर्वगुण सम्पन्न पौष्टिक खाद्य पदार्थ कोई दूसरा नहीं है।

गाय के दूध में ‘स्ट्रोन्शियम‘ पाया जाता है जिससे होमियोपैथिक दवा स्ट्रेन्शिया बनती है, जो पुरानी चोटों में काम आती है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार ‘स्ट्रोन्शियम’ तत्व अणु विकिरण प्रतिरोधक भी है, इसलिए गोदुग्ध में मनुष्य में पहुंचे रेडियोधर्मी कणों का प्रभाव नष्ट करने की असीम क्षमता है।

रूसी वैज्ञानिक शिरोविच ने आणविक विकिरण से रक्षा पर अपने प्रयोग के दौरान पाया कि गोघृत अग्नि में आहुति देने पर उससे निकली हवा जहां तक फैलती है। वहां तक का सारा वातावरण प्रदूषण एवं आणविक विकिरण से मुक्त हो जाता है।

रूस में ही गाय के घी का हवन करके उसके बारे में अनुसंधान किया गया था। जहां-जहां और जितनी दूरी में उस हवन के धुएं का प्रभाव फैला, उतना क्षेत्र कीटाणु और बैक्टीरिया के प्रभाव से मुक्त हो गया।

गाय का घी मस्तिष्क तथा हृदय की सूक्ष्मतम नाड़ियों में पहुंच कर शक्ति प्रदान करता है। नासिका में गोघृत के उपयोग से मस्तिष्क कोशिकाओं में स्थिरता बनी रहती है जिससे हमारा व्यवहार शांत तथा ठंडा रहता है।

गाय का घी कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाता नहीं बल्कि कम या नियंत्रण में रखता है। अमरीकी वैज्ञानिक प्रो. जार्ज शीमन के अनुसार गाय के दूध का दही हृदय रोग की रोकथाम में भी कारगार है।

पंजाब केसरी से साभार

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किडनी को स्वस्थ रखने के लिए करें इन खाद्य पदार्थों का सेवन

नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, दुनिया की लगभग 10 प्रतिशत आबादी किडनी की समस्या से पीड़ित है। किडनी हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। किडनी समय-समय पर शरीर में जमा होने वाले कचरे को बाहर निकाल देती है।

गुर्दे मूत्र के रूप में शरीर से अशुद्धियों को दूर करते हैं। गुर्दे रक्त में पानी, लवण और खनिजों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। इसमें जरा सी भी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के साथ गुर्दा कार्य धीमा हो जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि हम जो भोजन और पानी लेते हैं, उससे किडनी की रक्षा करना संभव है। गुर्दे रक्त में पानी, लवण और खनिजों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। किडनी स्वस्थ होगी तो हम स्वस्थ रहेंगे। अगर किडनी में कोई समस्या है.. दूसरे अंगों पर भी इसका असर होगा।

मधुमेह और उच्च रक्तचाप के कारण किडनी की समस्या होने का खतरा रहता है। अधिक वजन होना, धूम्रपान और आनुवंशिक कारक भी किडनी खराब होने के जोखिम को बढ़ाते हैं। किडनी को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है।

डॉक्टरों का कहना है कि हम जो भोजन और पानी लेते हैं, उससे किडनी की रक्षा करना संभव है। इसके लिए आपको अपने आहार में सोडियम, प्रोटीन, पोटैशियम और फास्फोरस की कम मात्रा वाला भोजन करना चाहिए।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं कि आपके गुर्दे के लिए कौन से खाद्य पदार्थ अच्छे हैं तो चलिए जानते हैं:-

लाल शिमला मिर्च

एक अध्ययन से पता चला है कि लाल शिमला मिर्च में पोटैशियम की मात्रा कम होती है। यह विटामिन ए, सी, बी6, फोलिक एसिड और फाइबर से भरपूर होता है।

ये पोषक तत्व आपके किडनी के स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। यह लाइकोपीन से भरपूर होता है। यह कैंसर से बचाव करता है। लाल शिमला मिर्च का उपयोग सलाद और करी में किया जा सकता है।

सेब

बहुत से लोग जानते हैं कि अगर आप रोजाना एक सेब खाएंगे तो आप स्वस्थ रहेंगे। सेब एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होते हैं। यह फाइबर और विटामिन से भरपूर होता है।

रोजाना सेब खाने से कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर होगी, कब्ज की समस्या दूर होगी और किडनी भी स्वस्थ रहेगी। अगर आप सेब और सेब का जूस लेते हैं तो यह आपकी किडनी के लिए अच्छा होगा।

क्रैनबेरी

एक शोध में सामने आया है कि क्रैनबेरी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के लिए एक प्राकृतिक उपचार की तरह काम करता है। क्रैनबेरी यूरिन में एसिड के स्तर को बढ़ाते हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म करने का काम करता है।

क्रैनबेरी को अगर नियमित रूप से खाया जाए तो किडनी की समस्याओं से बचा जा सकता है। क्रैनबेरी में कैंसर रोधी गुण होते हैं। वे कैंसर कोशिकाओं से लड़ते हैं।

मोटी मछली

फैटी फिश ओमेगा 3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। ये किडनी की सेहत के लिए अच्छे होते हैं। अगर हम हफ्ते में तीन बार मछली खाते हैं तो हमारा कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहेगा। यह शरीर में सूजन को कम करता है और कैंसर से लड़ता है।

लहसुन

क्रोनिक किडनी प्रॉब्लम (सीकेडी) से पीड़ित लोगों को लहसुन खाना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किडनी की समस्या से जूझ रहे लोगों को नमक और सोडियम का कम सेवन करना चाहिए।

नमक की जगह लहसुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। लहसुन मैंगनीज, विटामिन सी और विटामिन बी6 से भरपूर होता है। लहसुन सल्फर से भरपूर होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

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जानिए आदिकवि वाल्मीकि के डाकू से संत बनने की कहानी और कुछ रोचक तथ्य 

ऋषि वाल्मीकि जयंती हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस साल वाल्मीकि जयंती 9 अक्टूबर के दिन मनाई जाएगी। महर्षि वाल्मीकि को महान भारतीय महाकाव्य रामायण की रचना के लिए जाना जाता है।

महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि‘ या प्रथम कवि के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि रामायण को पहली महाकाव्य कविता माना जाता है। माना जाता है कि वाल्मीकि ‘श्लोक‘ के प्रारूप के साथ आए थे – एक संस्कृत कविता रूप जिसका उपयोग महाभारत और पुराणों जैसे विभिन्न अन्य ग्रंथों की रचना के लिए किया गया है।

प्रारंभिक जीवन

प्रचेता ऋषि से पैदा हुए लड़के को उनके माता-पिता ने रत्नाकर नाम दिया था। ऐसा कहा जाता है कि जब रत्नाकर कुछ वर्ष के थे, तब वे एक जंगल में खो गए और एक शिकारी को मिल गए।

जिसने उसे गोद लिया और उसका पालन-पोषण किया। अपने पालक पिता के मार्गदर्शन में रत्नाकर भी बड़े होकर एक कुशल शिकारी बन गए।

रत्नाकर जब विवाह योग्य आयु तक पहुँचे तो उनका विवाह शिकारी परिवार की एक लड़की से हो गया। समय के साथ रत्नाकर के परिवार की संख्या भी बढ़ती गई और वे कई बच्चों के पिता बने।

उनके परिवार के विस्तार का मतलब था कि शिकारी रत्नाकर के लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया था। नतीजतन, हताशा में उन्होंने डकैती शुरू कर दी और अपने क्षेत्र से गुजरने वाले यात्रियों को लूटना शुरू कर दिया।

रत्नाकर से कैसे बने वाल्मीकि

एक दिन देवऋषि नारद उस जंगल से गुजर रहे थे जहाँ रत्नाकर रहते थे। एक अच्छा अवसर भांपते हुए, रत्नाकर ने नारद को लूटने के इरादे से हमला किया। हालांकि नारद बेफिक्र रहे। इससे रत्नाकर आश्चर्यचकित रह गए।

नारद ने रत्नाकर से प्रश्न किया कि वे दूसरों को लूटने का पाप क्यों कर रहे हैं। रत्नाकर ने उत्तर दिया, “मेरे परिवार का पालन पोषण करने के लिए।” इस पर नारद ने कहा, “रत्नाकर, जाओ और अपने परिवार से पूछो कि क्या वे भी उन पापों को साझा करेंगे जो आप उनके पालन-पोषण के लिए कर रहे हैं।”

ऐसा सुनकर रत्नाकर ने देव-ऋषि नारद को एक पेड़ से बांध दिया और अपने परिवार के पास गए। उन्होंने घर के प्रत्येक सदस्य से पूछा कि क्या वे उसके पापों को साझा करने के लिए तैयार हैं। कोई भी रत्नाकर के पापों के बोझ को सांझा करने के लिए तैयार तैयार नहीं था।

अपने परिवार की प्रतिक्रिया से दुखी होकर, रत्नाकर नारद के पास लौट आए और उनसे सत्य का का मार्ग पूछा। जिस पर नारद ने उन्हें भगवान राम के नाम का जाप करने के लिए कहा।

रत्नाकर ने नारद के निर्देशानुसार जप करके अपनी तपस्या शुरू की। वर्षों बीत गए और एक दिन भगवान ब्रह्मा उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया।

जब रत्नाकर वर्षों से ध्यान कर रहे थे तब चींटियों ने अपना घोंसला बनाने के लिए उनके शरीर को मिट्टी से ढक दिया। जब भगवान ब्रह्मा उन्हें आशीर्वाद देने के लिए प्रकट हुए, तो उन्होंने रत्नाकर को एंथिल या ‘वाल्मिका’ से ढका हुआ देखा और तब उन्हें वाल्मीकि नाम दिया।

वाल्मीकि ने प्रथम श्लोक की रचना की

एक बार ऋषि तमसा नदी में स्नान करने गए। नहाते समय उसकी नजर नदी किनारे बगुलों के एक जोड़े पर पड़ी। जैसे ही वाल्मीकि पक्षियों को देख रहे थे एक शिकारी के तीर ने नर को मार डाला।

मादा पक्षी अपने मृत साथी को देखकर दुःख से चिल्ला उठी। पक्षियों के साथ जो हुआ उससे दुखी और क्रोधित होकर वाल्मीकि ने पहला श्लोक बोला।

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः ।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम् ॥

अर्थात्: हे निषाद! तुमको अनंत काल तक प्रतिष्ठा और शांति न मिले, क्योंकि तुमने प्रणय-क्रिया में लीन असावधान क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक की हत्या कर दी। वाल्मीकि के क्रोध और दुःख से निकला हुआ यह संस्कृत का पहला श्लोक माना गया।

रामायण की रचना

महर्षि वाल्मीकि ने जो पहला श्लोक पढ़ा उसका रामायण से कोई लेना-देना नहीं था। वास्तव में, यह उस शिकारी के लिए एक अभिशाप था जिसने इतने क्रूर तरीके से उस पक्षी को मार दिया था। हालाँकि, श्लोक व्याकरणिक रूप से परिपूर्ण था।

श्लोक का पाठ करने के बाद जब महर्षि अपने आश्रम में लौटे, तो भगवान ब्रह्मा ने उनसे मुलाकात की। भगवान ने वाल्मीकि को आशीर्वाद दिया और उन्हें रामायण लिखने का काम दिया। और इस प्रकार, वाल्मीकि ने महान महाकाव्य रामायण की रचना की ।

रामायण की रचना करते समय, राम की पत्नी सीता और उनके पुत्र, लव और कुश, वाल्मीकि के आश्रम में रहने आए। वाल्मीकि ने रामायण की रचना समाप्त करने के बाद, इसे लुव और कुश को पढ़ाया, जिन्होंने महाकाव्य कविता को गाया और इसकी महिमा को दूर-दूर तक फैलाया।

वाल्मीकि रामायण से कुछ रोचक तथ्य

  • इसमें 24000 श्लोक हैं।
  • भगवान राम 27 वर्ष के थे जब उन्हें उनके पिता राजा दशरथ ने निर्वासित कर दिया था।
  • जटायु के पिता अरुण को सीता को बचाने की कोशिश करने का श्रेय दिया जाता है न कि जटायु को।
  • वाल्मीकि रामायण में लक्ष्मण रेखा की अवधारणा का उल्लेख नहीं है।
  • लंका तक पुल बनने में पांच दिन लगे।
  • लंका का राज्य रावण के बड़े भाई कुबेर के पास था। हालाँकि, रावण ने उसे उखाड़ फेंका और सिंहासन पर कब्जा कर लिया।
  • रावण वेदों में पारंगत होने के साथ-साथ एक कुशल वीणा वादक भी था।
  • भगवान राम और सीता के साथ वनवास में बिताए 14 वर्षों के दौरान लक्ष्मण कभी नहीं सोए।
  • वनवास के समय सीता का नाम वैदेही पड़ा।

वाल्मीकि की अन्य कृतियाँ

यद्यपि वाल्मीकि को रामायण की रचना के लिए याद किया जाता है, उनकी कविता और दर्शन इस प्रतिष्ठित महाकाव्य से बहुत आगे तक फैले हुए हैं। योग वशिष्ठ, भगवान राम और ऋषि वशिष्ठ के बीच संवादों का संकलन, वाल्मीकि को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है।

वाल्मीकि की कहानी आंतरिक परिवर्तन में से एक है। एक डाकू से ब्रह्मर्षि बनने तक की यात्रा, सही और गलत में अंतर करने की मानवीय क्षमता और खुद को छुड़ाने के लिए दिए गए अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का एक वसीयतनामा है।

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हर शुभ काम की शुरुआत होती है इन पंचदेवों की पूजा के साथ, इन्हीं में शामिल हैं दुर्गा मां भी

आश्विन मास की नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू हो रही है। कभी-कभी तिथियों की भिन्नता के कारण नवरात्रि आठ दिनों तक चलती है, लेकिन इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी और महानवमी 4 अक्टूबर को है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा की जाएगी।

नवरात्रि और देवी दुर्गा के बारे में जानने के लिए उज्जैन के ज्योतिषी पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि ‘पंचदेवों का उल्लेख शास्त्रों में किया गया है, इन पंचदेवों में गणेश जी, शिव जी, विष्णु जी, सूर्य देव और देवी दुर्गा शामिल हैं।

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इन पांच देवताओं की पूजा से होती है। ऐसी मान्यता है कि इन पूजाओं को करने से कठिन से कठिन कार्य भी बिना किसी रुकावट के पूरे हो जाते हैं और यदि कोई बाधा हो तो उसका सामना करने का साहस हमें मिलता है।

नवरात्रि में दुर्गा जी से पहले करनी चाहिए गणेश पूजा

गणेश जी प्रथम पूज्य देवता हैं और शिव जी ने उन्हें यह वरदान दिया था। इसलिए किसी भी देवता की पूजा से पहले गणेश पूजा की जाती है। नवरात्रि भले ही दुर्गा भक्ति का पर्व है, लेकिन दुर्गा पूजा से पहले गणेश पूजा जरूर कर लेनी चाहिए। अन्यथा पूजा अधूरी मानी जाती है।

माँ दुर्गा की पूजा में आप इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं

दुर्गा मां को लाल फूल, लाल वस्त्र आदि अर्पित करें। मिठाई, चावल, नारियल अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं, आरती करें। आप देवी मां के दू दुर्गायै नमः मंत्र का जाप कर सकते हैं। आप चाहें तो इस मंत्र का जाप भी कर सकते हैं-

सर्वमंगल मंगलये शिवसरार्थ साधिके।

शरयेत्रयंबके गौरी नारायणी नमस्ते।

इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। जाप के बाद पूजा में हुई गलतियों के लिए देवी मां से क्षमा मांगनी चाहिए।

नवरात्रि में देवी मंदिरों के दर्शन करें

नवरात्रि में देवी मां के शक्तिपीठों के दर्शन करने की परंपरा है। देवी मां के कुल 51 शक्तिपीठ हैं। हमें अपने समय और क्षमता के अनुसार नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में जाना चाहिए।

यदि आप लंबे समय तक यात्रा नहीं कर सकते हैं, तो आप अपने शहर के आसपास के शक्तिपीठ में देवी मां के दर्शन कर सकते हैं। यदि शहर के पास कोई शक्तिपीठ नहीं है तो कोई अन्य देवी मंदिर जा सकते हैं।

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जानिए राशि के अनुसार कैसे करें माँ दुर्गा की पूजा

नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें‘। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।

नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। माघ, चैत्र, आषाढ,अश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों – महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और महाकाली के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिनके नाम और स्थान क्रमशः इस प्रकार है :-

नन्दा देवी योगमाया (विंध्यवासिनी शक्तिपीठ), रक्तदंतिका (सथूर), शाकम्भरी (सहारनपुर शक्तिपीठ), दुर्गा (काशी), भीमा (पिंजौर) और भ्रामरी (भ्रमराम्बा शक्तिपीठ) नवदुर्गा कहते हैं। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि का आरंभ 26 सितंबर, दिन सोमवार से हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि को घट स्थापना किया जाता है, इसे कलश स्थापना भी कहते हैं।

पंचांग गणना के अनुसार 26 सितंबर को देवी आराधना की पूजा और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर सुबह 07 बजकर 51 मिनट तक ही रहेगा।

वहीं अगर आप इस मुहूर्त में किसी कारण से कलश स्थापना न कर पाएं तो दूसरा शुभ मुहूर्त अभिजीत होगा जो सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा।

इस पोस्ट में हम जानेगें कि राशि के अनुसार कैसे करें माँ दुर्गा की पूजा, तो चलिए शुरू करते हैं :-

मेष राशि

लाल रंग मां दुर्गा को बहुत प्रिय है। साथ ही, मंगल मेष राशि का स्वामी ग्रह है। यह लाल रंग को आपके लिए बेहद भाग्यशाली है। इस प्रकार, माँ शक्ति को लाल गुड़हल, फल और वस्त्र अर्पित करने से आपके और आपके परिवार के लिए शुभ फल प्राप्त होगा।

वृषभ राशि

वृष राशि के लोग इस नवरात्रि में सफेद चीजें चढ़ाकर महागौरी की पूजा करें, वृष राशि वालों के लिए यह बेहद शुभ रहेगा। इस नवरात्रि में सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करने से आपकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि का स्वामी ग्रह बुध है। इसलिए हरा रंग आपके जीवन में सकारात्मकता लाता है। इस नवरात्रि में हरे रंग की साड़ी चढ़ाकर माँ को प्रसन्न करें। बता दें कि नवरात्रि में लाल रंग का बहुत महत्व होता है। इसलिए मां दुर्गा के आसन को लाल फूलों से सजाएं।

कर्क राशि

चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है, कर्क राशि की मां शैलपुत्री को दही, चावल और बताशा चढ़ाएं और आशीर्वाद प्राप्त करें। इससे आपको शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलेगी। मां दुर्गा के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा करनी चाहिए।

सिंह राशि

सिंह का प्रतिनिधित्व देवी दुर्गा के वाहन – सिंह द्वारा किया जाता है। यदि शुद्ध हृदय और निस्वार्थ भाव से माँ की पूजा की  जाए तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। इस नवरात्रि में, वे देवत्व को बूंदी के लड्डू लाल गुड़हल का भोग लगा सकते हैं।

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए भक्ति भाव से ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करना विशेष फलदायी हो सकता है। इसके लिए देवी को दूध और चावल का हलवा अर्पित करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

तुला राशि

इस राशि वाले जातक दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद मां महागौरी को लाल वस्त्र अर्पित करें। इससे आपके परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

वृश्चिक राशि

इस राशि के जातकों के लिए मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करना शुभ रहेगा। नवरात्रि में 9 दिनों तक सुबह-शाम देवी की आरती करना न भूलें और जसवद के फूल और गुड़ भी चढ़ाएं।

धनु राशि 

यदि आप एक धनु राशि के जातक हैं, तो आपके सभी प्रसाद पीले या सुनहरे (लाल के अलावा) रंगों में होने चाहिए। आपकी राशि पर बृहस्पति का शासन है। इसलिए, इस नवरात्रि के लिए पीले फूल, तेल और कपड़ा सबसे अच्छा विकल्प है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और धन प्राप्ति के लिए नवरात्रि के दौरान देवी को पीली मिठाई और तिल का तेल अर्पित करें।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों की मनोकामना पूरी करने के लिए उन्हें माता कात्यायनी को नारियल का भोग लगाना चाहिए। नवरात्रि में इस उपाय को करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

कुंभ राशि

देवी भगवती के कालरात्रि रूप को शीरा अर्पित करने और देवी कवच ​​के जाप से आर्थिक वृद्धि होती है, इसी तरह नवरात्रि में तेल का दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

मीन राशि

इस राशि के लोगों को नवरात्रि के नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए और मां चंद्रघंटा को केले और पीले फूल चढ़ाएं। इससे आपकी सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

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