जानिए हमारे राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में !!

किसी भी राष्ट्र की पहचान के लिए कुछ प्रतीक अवश्य ही नियत किए जाते हैं। इन प्रतीकों के माध्यम से उस राष्ट्र को सारे संसार में जाना जाता है। राष्ट्रीय प्रतीक हमारी राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के पोषक है। ये देशवासियों में राष्ट्रीय भावना का संचार करते हैं, साथ ही मातृभूमि के लिए सदैव मरमिटने की प्रेरणा देते हैं।

हमारे देश के कुछ प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीक निश्चित किए गए हैं- राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय चिन्ह, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय पशु-पक्षी-पुष्प। इनके बारे में तो सभी को पता ही है परंतु कई अन्य प्रतीक ऐसे भी हैं जिनके बारे में कम ही जानकारी है। तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से:-

Know about our National Emblem

राष्ट्रीय ध्वज : 22 जुलाई, 1947 को भारत की संविधान सभा ने तिरंगे को देश का राष्ट्रीय ध्वज अपनाया था। तिरंगे में केसरिया रंग त्याग और बलिदान का, सफेद रंग सत्य, शांति और पवित्रता का और हरा रंग देश की सम्रद्धि का प्रतीक होता है।

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राष्ट्रीयचिन्ह: यह सारनाथ स्थित अशोक स्तम्भ में शीर्ष की सत्य अनुकृति है जो सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। भारत सरकार ने 26 जनवरी, 1950 को इसे राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में मान्यता प्रदान की।

राष्ट्र गान : बंगाल की पावन धरा में जन्मे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव पाने वाले प्रथम भारतीय प्रख्यात विश्व कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्र गान ‘गन गण मन’ की रचना की। इसके गायन में 52 सैकेंड लगते हैं।

राष्ट्रीय गीत : ‘वन्दे मातरम्‘ की रचना ‘बंकिम चन्द्र चटर्जी’ ने की थी। उन्होंने स्वधीनता महासंग्राम का वर्णन अपने सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘आनन्द मठ‘ में किया और इसी में उन्होंने ‘वन्दे मातरम्‘ गीत लिखा था।

राष्ट्रीय पशु, पक्षी तथा पुष्प : राष्ट्रीय पशु के रूप में ‘सिंह’ तथा राष्ट्रीय पक्षी के रूप में ‘मोर’ एवं राष्ट्रीय पुष्प के रूप में ‘कमल’ को स्वीकार किया गया है।

सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार : भारत रल सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार और सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इसकी शुरूआत 2 जनवरी, 1954 को हुई।

राष्ट्रीय फल : आम का वैज्ञानिक नाम ‘मैनजीफेरा इंडिका‘ है। इसे सभी फलों में राजा का दर्जा प्राप्त है।

राष्ट्रीयखेल : हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल तब से माना जाता है जब से भारत ने ओलिम्पिक्स में हॉकी के खेल में लगातार 6 स्वर्ण पदक जीते थे।

राष्ट्रीय जलचर : गंगा की डॉलफिन को राष्ट्रीय जलचर के रूप में स्वीकार किया गया है। यह पावन गंगा की शुद्धता को प्रदर्शित करती है क्योंकि ये केवल साफ और शुद्ध पानी में ही जिन्दा रह सकती है।

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राष्ट्रीय वृक्ष : भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के पेड़ को माना गया है। यह एकता और दृढ़ता का प्रतीक है। जिस प्रकार भारत के विभिन्न धर्म व जाति के लोग एक साथ निवास करते हैं, उसी प्रकार बरगद के पेड़ की शाखाओं पर छोटे या बड़े जन्तु निवास करते हैं। इस वृक्ष का हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है और इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।

राष्ट्रीयनदी : गंगा नदी भारत की सबसे लम्बी और पवित्र नदी है जो पहाड़ी, घाटी और मैदानी इलाकों तक फैली है। प्राचीन समय से ही भारतवासियों के लिए इसका बड़ा महत्व रहा है। गंगा की उत्पत्ति, हिमालय में गंगोत्री ग्लेशियर के हिम क्षेत्र में भगीरथी नदी के रूप में होती है।

राष्ट्रीय दिवस : भारत के राष्ट्रीय दिवस के रूप में स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और गणतंत्र दिवस को घोषित किया गया है।

राष्ट्रीय लिपि : संविधान के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी गई हिन्दी को आधिकारिक लिपि कहा गया है।

राष्ट्रीय कैलेंडर: यह दर्जा शक कैलेंडर को प्राप्त है। 1957 में इसे कैलेंडर कमिटी द्वारा बनाया गया था, जिसे भारतीय पंचाग की मदद से तैयार किया गया है। इसमें हिन्दू धार्मिक कैलेंडर के अलावा खगोल डाटा, समय भी लिखित है।

राष्ट्रीय शपथ : भारत हमारा देश है। हम सब भारतवासी भाई-बहन हैं…’-कोतेलुगू में ‘प्यिदीमर्री वेंकट सुब्बाराव’ द्वारा 1962 में लिखा गया था। इसे 26 जनवरी, 1965 से सभी स्कूलों में निर्धारित रूप से गाए जाने का प्रावधान बनाया गया है।

कुछ अन्य राष्ट्रीय प्रतीक

  • राष्ट्रीय सरिसृप : किंग कोबरा
  • राष्ट्रीय विरासत पशु : हाथी।
  • राष्ट्रीय सब्जी : कद्दू।
  • राष्ट्रीय सूक्ष्म जीव (माइक्रोब): लैक्टोबैसिलस डेलबएकी जो एक प्रकार का बैक्टीरिया है ।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए सर्दी के मौसम में एलर्जी से बचने के उपाय!!

सर्दी के मौसम में एलर्जी की समस्या अक्सर परेशान करती है और यदि रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो तो बार-बार छींक आना, सर्दी-जुकाम आदि लक्षण बढ़ जाते हैं। यूं तो धूल-मिट्टी आदि हमेशा वातावरण में मौजूद रहते हैं, फिर भी सर्दी के मौसम में सेहत पर इसका दुष्प्रभाव जल्दी पड़ता है।

आमतौर पर हमारे घरों में धूलमिट्टी के बारीक कण पाए ही जाते हैं, जोकि नजर नहीं आते। यही धूल कण छींक, नाक बंद होना, खांसी आदि की वजह बनते हैं।

how to avoid seasonal allergies

इसके साथ ही घरों में बाथरूम आदि नमी वाले स्थानों में भी फंगल इंफैक्शन आसानी से पनपता है, जिसकी वजह से एलर्जिक सिम्पटम्स बढ़ जाते हैं। इसी प्रकार पालतू जानवर भी एलर्जी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। अतः इन सबसे बचाव को लेकर जागरूक होना जरूरी है।

मौसमी एलर्जी से बचाव के लिए कुछ उपयोगी सुझाव इस प्रकार हैं

  • सबसे पहले एलर्जी के लिए जिम्मेदार वजह को ढूंढें व उससे दूरी बनाएं।
  • अपने लाइफ स्टाइल में सुधार लाएं और एक्टिव रहें।
  • घर में ताजी हवा आए, इसका इंतजाम करें।
  • अदरक, तुलसी, शहद, लहसुन, लौंग, दालचीनी, गुड़ आदि का प्रयोग करते रहें।
  • गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर रोजाना पिएं।
  • एलर्जी की स्थिति में गर्म पानी से भांप लें।
  • तनाव से दूर रहें और पूरी नींद लें।
  • गर्म पानी में कपड़े धोएं और धूप में सुखाएं। बिस्तर, कंबल, रजाई आदि भी सप्ताह में एक बार धूप में रखें।
  • यदि कोई भी एलर्जिक लक्षण 5-6 दिन तक बना रहे तो डाक्टर से उपचार कराएं।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए देश और दुनिया से जुड़े 15 मज़ेदार तथ्य!

देश और दुनिया से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं जो बेहद मज़ेदार हैं और हमारा ज्ञान भी बढ़ाते है, तो चलिए जानते इस पोस्ट के माध्यम से:-

  1. आपके आसपास हरा रंग किसी भी रूप में, चाहे वह प्राकृतिक हो या दीवार पर हरे रंग से पुताई की गई हो, आपकी रचनात्मकता (Creativity) को बढ़ाता है।
  2. क्या आप जानते हैं, कुत्तों के सिर्फ पंजे और नाक में पसीना आता है।
  3. दुनिया का सबसे छोटा जानवर Whitetoothed Pygmy Shrew है।
  4. परीक्षा के दिनों में भी अपनी नींद से समझौता मत कीजिए। दिमाग और शरीर के सही संचालन में नींद बेहद जरूरी है। कम नींद लेने से आपके शरीर के कार्य करने की क्षमता घटती है।
  5. दुनिया की सबसे जहरीली मछली Stone Fish है, जो पत्थर की तरह दिखाई देती है।
  6. फिलीपींस ईगल बन्दरों का शिकार करता है। यह भारी, लंबा-चौड़ा होता है।
  7. रोड के किनारे लगी इन लाइटों को Road Stud कहते हैं।
  8. गूंगे व्यक्ति सपनों में भी इशारों की भाषा में बात करते हैं।
  9. मोबाइल का चार्जर हमेशा छोटा बनाया जाता है, क्योंकि चार्जिंग पर लगे मोबाइल के इस्तेमाल से बैटरी जल्दी खराब हो जाती है।
  10. हमारे शरीर में पाए जाने वाले कुल कैल्शियम का 99 प्रतिशत हमारी हड्डियों और दांतों में पाया जाता है।
  11. यदि हमारे शरीर में एक प्रतिशत पानी की कमी होती है, तो हमें प्यास लगती है और अगर ये कमी 10 प्रतिशत तक बढ़ जाए तो हमारी मौत भी हो सकती है।
  12. Giant Anteater की जीभ काफी लंबी होती है, जो लगभग 2 फीट तक लंबी होती है।
  13. छिपकलियों की प्रजाति में एक सींग वाली छिपकली (Horned Lizard) होती है, जो अपने शिकारी से बचने के लिए अपनी आंखों से खून की तेज धार फेंकती है।
  14. दुनिया में सबसे तीखी मिर्च ड्रैगन ब्रेथ चिली पीपर को माना जाता है और कहा जाता है कि यह इंसान को मार भी सकती है।
  15. कोलंबिया के तट पर स्थित सैन बर्नार्डो के द्वीपसमूहो में सांता क्रूज़ नामक द्वीप दुनिया की सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला द्वीप है। मगर सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस द्वीप का आकार सिर्फ दो फुटबॉल मैदानों के जितना ही है।

ये है दुनिया के सबसे खुशहाल जानवर, जाने कुछ रोचक तथ्य!!

दुनिया में कई तरह के जानवर पाए जाते हैं जिनमें कई खतरनाक, बड़े या छोटे आकार और कई बहुत प्यारे होते हैं लेकिन क्या आपने कभी सबसे खुशहाल जानवर के बारे में सुना है ! अगर नहीं तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से :-

  • क्वॉक्का (Quokka) नामक यह जानवर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के दलदली इलाकों में पाया जाता है। यह ऑस्ट्रेलिया के रॉटनेस्ट द्वीप (Rottnest Island) पर ये बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं। इसे दुनिया का सबसे खुशहाल जानवर भी कहते हैं।

  • इसके चेहरे की बनावट कुछ ऐसी है कि यह हमेशा मुस्कराता हुआ नजर आता है। इसकी मुस्कराहट काफी मनमोहक है और इसीलिए इसे दुनिया का सबसे खुश जानवर कहा जाता है।
  • यह शाकाहारी जानवर है। यह पत्ते, नरम तना, घास आदि खाना पसंद करते हैं। खाने के लिए ये कभी-कभी छोटे पेड़ों पर भी चढ़ जाते हैं और पेड़ पर आराम करना भी इन्हें बहुत पसंद है।
  • ये मासुपियल्स (Marsupials) की कैटेगरी में आते हैं यानी कि वे जानवर जो कंगारू की तरह पाउच में अपना बच्चा रखते हैं।
  • क्वॉक्का के बेबी को ‘जॉ‘ कहा जाता है और फीमेल क्वॉक्का एक बार में एक ही बच्चे को जन्म देती है।
  • ये एनिमल इंसानों से नहीं डरते और आराम से उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं।
  • ये सेल्फी भी बहुत प्यार से खिंचवाते हैं, जब भी कोई इनके साथ सेल्फी क्लिक करता है तो ये मुस्कराते हुए पोज देते हैं।
  • ये आमतौर पर अपने परिवार के साथ या ग्रुप में रहना पसंद करते हैं और ज्यादातर रात में ही बाहर निकलते हैं।
  • दुनिया के सबसे खुशहाल जानवर की उपाधि हासिल कर चुका क्वॉक्का यहां आने वाले टूरिस्ट के बीच काफी लोकप्रिय है।
  • यह कंगारू की प्रजाति का ही जीव है, लेकिन इसका आकार एक पालतू बिल्ली के बराबर होता है।

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ये हैं दुनिया टॉप 10 अजीबोगरीब नौकरियां!!

बचपन में कई बार आपसे पूछा गया होगा कि आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हो? तो इस पर अधिकतर डॉक्टर, इंजीनियर या आर्किटेक्ट जैसे नाम ही लेते हैं। क्योंकि प्रत्येक इंसान एक अच्छी और आरामदायक जॉब पाना चाहता है। लेकिन आपको कुछ नौकरियों के बारे में नहीं पता होगा जो आज-कल दुनिया में लोग करते हैं जो एक से बढ़ कर एक अतरंगी और अजीबोगरीब नौकरियां हैं, तो चलिए जानते हैं इस लेख के माध्यम से:-

किराए का बॉयफ्रेंड

टोक्यो में अगर आप चाहो तो किराए पर बॉयफ्रेंड बन सकते हो। अधिकांश लड़कियां अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए किराए पर बॉयफ्रेंड लेती हैं, जो उनके साथ समय बिताते हैं और उनसे प्यार जताते हैं। इसके बदले में किराए के बॉयफ्रेंड को पैसे मिलते हैं।

पेशेवर सोने वाला

सपना सा लगता है न? सोने के लिए भी कोई पैसा दे सकता है! लेकिन ये सच है। वैज्ञानिक अपनी रिसर्च के लिए पेशेवर सोने वालों को सैलरी देते हैं। उन्हें बस आराम से सोना होता है और वैज्ञानिक नींद से सम्बंधित बीमारियों की रिसर्च उन पर करते हैं।

धक्का देने का जॉब

जापान में कई लोग धक्का देने का जॉब करके मोटी सैलरी लेते हैं। दरअसल, जापान में समय पर काम पर पहुंचने के लिए अधिकांश लोग मेट्रो से सफर करते हैं।

ऐसे में मेट्रो में काफी भीड़ होती है, इसलिए यहां बकायदा लोगों को धक्का मारने की नौकरी पर रखा गया है, जो मेट्रो में यात्रियों को धक्का देने का काम करते हैं।

लाइन स्टैंडर

इंतज़ार करना और खासतौर पर किसी चीज़ के लिए लाइन में खड़े होकर इंतज़ार करना बहुत ही इरिटेटिंग हो सकता है।आपकी इस परेशानी का समाधान कुछ पैसे देकर मिल सकता है। लाइन स्टैंडर आपकी जगह पर जितनी देर आप चाहोगे उतनी देर खड़ा हो जाएगा, जब तक आप उसे पैसे दे रहे हैं।

शादी में मेहमान बनने की नौकरी

हिंदुस्तान में होने वाली अधिकांश शादियों में बिन बुलाए ही कई मेहमान पहुंच जाते हैं, लेकिन जापान में शादी में मेहमान बनकर जाने की पार्ट-टाइम नौकरी मिलती है। इस नौकरी को करने वाले पेशेवर शादी में जाते हैं और खाना खाते हैं। इसके बदले उन्हें सैलरी दी जाती है।

झटका देने वाला

आपको जानकर हैरानी होगी कि मेक्सिको में कुछ लोग दूसरों को बिजली का झटका दे कर पैसे कमाते हैं। अब आप सोच रहे होगे कि ऐसा करने के पैसे कौन देता होगा? दरअसल मेक्सिको के पब या बार में जो लोग कुछ ज़्यादा ही मदहोश हो जाते हैं, उनकी उतारने के लिए इन पेशेवर झटका देने वालों को बुलाया जाता है।

पेट फ़ूड टेस्टर

दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो जानवरों से बेइंतेहा प्यार करते हैं और ये बहुत अच्छी बात है। लेकिन इनमें से कुछ लोग जानवरों की देखभाल को ही अपनी प्रोफेशनल लाइफ भी बना लेते हैं।

ऐसी ही एक नौकरी है पेट फूड टेस्टर की, जिसमें शख्स को कुत्तों और दूसरे पालतू जानवरों के लिए बनाए गए खाने को टेस्ट करना पड़ता है और इसके लिए उसे अच्छी खासी सैलरी मिलती है।

वॉटर स्लाइड टेस्टर

आप वॉटर पार्क में तो ज़रूर गए होगे। कितना मज़ा आता है न उन बड़ी-बड़ी स्लाइड्स से नीचे आने में? लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग ये काम अपनी रोज़ी-रोटी के लिए करते हैं। वॉटर स्लाइड टेस्टर्स का काम होता है, ये देखना कि वाटर पार्क की स्लाइड्स ठीक से काम कर रही हैं कि नहीं और लोगों को उस पर खतरा तो नहीं है।

चिकन का लिंग पता करने वाला

दुनिया के अजीबो-गरीब जॉब में एक ऐसा भी जॉब शामिल है, जिसमें पेशेवर को सिर्फ चिकन का लिंग पता करना होता है। जी हां, इन लोगों का काम सिर्फ यह पता लगाना होता है कि मुर्गी के चूजे का लिंग क्या है। इसके लिए उन्हें सैलरी दी जाती है।

पेपर टॉवल सूंघने वाला

कुछ पेपर टॉवल बनाने वाले ये सुनिश्चित करते हैं कि मार्किट में जाने से पहले कहीं उनकी पेपर टॉवेल्स में से बदबू तो नहीं आ रही है। इसके लिए पेपर टॉवल सूंघने वाले काम कर रखे जाते हैं।

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अजीब परम्परा :- विधवाओं की तरह रहती हैं यहाँ विवाहित महिलाएं

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भारतीय परम्परा में विवाहित महिलाओं के लिए श्रृंगार का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में शादी के बाद एक सुहागिन स्त्री के जीवन में सिंदूर, बिंदी, मेहंदी जैसी चीजें बहुत मायने रखती हैं।

ये सभी चीजें एक सुहागिन स्त्री के सुहाग का प्रतीक होती हैं। स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए ही सोलह श्रृंगार करती है व्रत रखती हैं लेकिन एक समुदाय ऐसा भी है जहां की महिलाएं पति के जीवित होते हुए भी हर साल कुछ समय के लिए विधवाओं की तरह रहती हैं।

इस समुदाय का नाम है ‘गछवाहा समुदाय‘। इस समुदाय की महिलाएं लंबे समय से इस रिवाज का पालन करती आ रही हैं। बताया जाता है कि यहां की महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए हर साल कुछ समय के लिए विधवाओं की तरह रहती हैं।

आज के इस लेख में हम इसी अजीब परम्परा के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं :-

श्रंगार का सामान कुलदेवी को अर्पित करती हैं

गछवाहा समुदाय में तरकुलहा देवी को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। जिस दौरान पुरुष ताड़ी उतारने का काम करते हैं तो उनकी पत्नियां अपना सारा श्रंगार देवी के मंदिर में रख देती हैं।

गछवाहा समुदाय के लोग मुख्यतः पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहते हैं। यहां के आदमी लगभग पांच माह तक पेड़ों से ताड़ी उतारने (एक तरह का पेय पदार्थ) का काम करते हैं।

जिन पेड़ों (ताड़ के पेड़) से ताड़ी उतारी जाती है वे बहुत ही ऊंचे होते हैं और जरा सी भी चूक व्यक्ति की मौत की वजह बन सकती है, इसलिए यहां की महिलाएं कुलदेवी से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं और श्रंगार को उनके मंदिर में रख देती हैं।

5 महीने के लिए विधवाओं की तरह रहती हैं महिलाएं

गछवाहा समुदाय की महिलाएं हर साल विधवा जैसी जिंदगी जीती हैं, जिसका कारण यह है कि इससे उनके पति की लंबी उम्र होगी।

ये महिलाएं पुरे साल में करीब 5 महीने के लिए विधवाओं की तरह रहती हैं। ये परम्परा काफी समय से चलता आ रहा है, जिसे वहां की औरतें आज तक निभा रहीं हैं। इसमें शामिल कोई भी महिला करीब 5 महीने तक न तो कोई श्रृंगार करती हैं।

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जानिए चीकू के 10 जबरदस्त फायदों के बारे में!!

चीकू स्वाद के साथ ही सेहत का खजाना भी समेटे हए हैं। इसे खाने से शरीर की कई समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और फाइबर शरीर की बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

इसमें विटामिन ‘ए’, ‘सी’, जीवाणुरोधी, सूजनरोधी तथा एंटी वायरल गुण मौजूद होते हैं। चीकू के गूदा के अतिरिक्त इसकी बाहरी खाल तथा पत्ते खांसी और जुकाम के उपचार में लाभकारी हैं। इसमें पोयशियम, सोडियम, कॉपर, आयरस और मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

आज इस लेख में हम आपको चीकू खाने के 10 जबरदस्त फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं :-

10 amazing benefits of chikoo

1. चीकू में विटामिन ‘ए’ भरपूर मात्रा में पाया जाता है और यह आंखों को सेहतमंद बनाए रखने में सहायता करता है।

2. चीकू में ग्लूकोज पाया जाता है जो शरीर को तुरन्त एनर्जी देने का काम करता है। जो लोग रोज एक्सरसाइज करते हैं, उन्हें ऊर्जा की बहुत आवश्यकता होती है इसलिए उन लोगों को चीकू रोज खाना चाहिए।

3. इसमें विटामिन ‘ए’ और ‘बी’ अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो कैंसर के खतरे से बचाता है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट, फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं जो कैंसर कोशिकाओं को बनने से रोकते हैं।

4. अगर आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाना चाहते हैं तो चीकू आज ही से खाना शुरू कर दें। इसमें कैल्शियम फास्फोरस और आयरन की भरपूर मात्रा होती है जो हड्डियों के लिए आवश्यक होती है।

5. कब्ज से राहत पाने के लिए चीकू खाना सबसे अच्छा उपाय है। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज से राहत दिलाता है और अन्य संक्रमण से लड़ने की शक्ति देता है।

6. चीकू में कई एंटी-वायरल, एंटी-परसिटिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो शरीर में बैक्टीरिया को आने से रोकते हैं।

7. यह फल दिमाग को शांत रखने और तनाव को कम करने में भी मदद करता है।

8. सर्दी और खांसी के लिए चीकू रामबाण का काम करता है और यह पुरानी खांसी से भी राहत देता है।

9. चीकू के फल के बीज को पीस कर खाने से गुर्दे की पथरी पेशाब के साथ निकल जाती है। साथ ही यह गुर्दे के रोगों से भी बचाता है।

10. चीकू में ‘लेटेक्स‘ भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है जिसका इस्तेमाल दांतों की कैविटी को भरने के लिए भी किया जाता है।

पंजाब केसरी से साभार

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5 रोचक जानकारियां जो आपको शायद ही पता हो!

आज इस पोस्ट में हम देश विदेश से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियों के बारे में जानेगें, तो चलिए जानते हैं :-

1) 800 गोल करने वाले पहले फुटबॉलर

पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो, क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में 800 से ज्यादा गोल करने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर हैं। ३ दिसम्बर 2021 को मैनचेस्टर यूनाइटेड बनाम आर्सेनल मैच के दौरान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने करियर का 800वां गोल किया था। अब तक उनके कुल 817 गोल हो चुके हैं। (31 दिसंबर 2022 तक)

2) देश की पहली ‘पॉड’ कॉन्सेप्ट

रिटायरिंग रूम सर्विस आईआरसीटी ने मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर देश की पहली ‘पॉड‘ कॉन्सेप्ट रिटायरिंग रूम सर्विस शुरू की है। यह एक एसी रूम कंपार्टमेंट की तरह है और इस तरह के 48 पॉड रूम तैयार किए गए हैं।

यहां यात्री 12 से 24 घंटे तक ठहर सकते हैं। इसका किराया 999 रुपए से लेकर 1999 रुपए के लगभग है, वहीं प्राइवेट पॉड का किराया 1249 से लेकर 2499 रुपए तक होगा।

इनमें प्राइवेट पॉड और क्लासिक पॉड शामिल हैं। महिलाओं और दिव्यांगों के लिए अलग से पॉड बनाए गए हैं। अमेरिका-जापान में पॉड काफी प्रचलित हैं।

‘पॉड’ कॉन्सेप्ट

क्या है ‘पॉड’ कॉन्सेप्ट?

एक पॉड या कैप्सूल होटल, जिसे सबसे पहले जापान में विकसित किया गया था, में बड़ी संख्या में छोटे, बिस्तर के आकार के कमरे होते  हैं जिन्हें कैप्सूल के रूप में जाना जाता है। ये होटल उन मेहमानों के लिए किफायती, बुनियादी, रात भर रहने की जगह प्रदान करते हैं, जिन्हें पारंपरिक होटलों द्वारा पेश किए जाने वाले बड़े, अधिक महंगे कमरों की आवश्यकता नहीं होती है या वे वहन नहीं कर सकते हैं।

3) पराग अग्रवाल बने ट्विटर के नए सीईओ

पराग अग्रवाल ट्विटर (Twitter) के नए सीईओ बन गए हैं। वे अब तक ट्विटर में सीटीओ के पद पर थे। पराग ट्विटर के सह संस्थापक और सीईओ जैक डोर्सी की जगह लेंगे।

यह खुशी की बात है कि सत्या नडेला (माइक्रोसॉफ्ट), सुंदर पिचाई (गूगल), शांतनु नारायण(एडोब), अरविंद कृष्णा(आईबीएम), अजयपाल सिंह बंगा(मास्टरकार्ड) और इंदिरा नूई (पूर्व सीईओ पेप्सीको) के बाद इतनी बड़ी कंपनी का प्रमुख कोई भारतीय बना है।

4) सबसे छोटी कार

ब्रिटेन के 31 वर्षीय अलेक्स ओर्चिन ने पिछले दिनों दुनिया की सबसे छोटी कार से 1400 किलोमीटर की यात्रा की। यह कार 134 सेंटीमीटर लंबी, 98 सेंटीमीटर चौड़ी और 100 सेंटीमीटर ऊंची है।

इसकी अधिकतम रफ्तार 35 किलोमीटर प्रतिघंटे है। ओर्चिन ने जरूरतमंद बच्चों की मदद हेतु फंड जुटाने के लिए यह सफर किया।

5) जानवरों को गोद लेने की शुरुआत

कोलकाता में अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन ने जानवरों के प्रति जन-जागरूकता पैदा करने के लिए जानवरों को गोद लेने की शुरुआत की है।

चिड़ियाघर के अधिकारियों के अनुसार गोद लेने की फीस कम कर दी गई है और लोगों को हिरण, बाघ और चिम्पैंजी जैसे लोकप्रिय जानवरों के अलावा कम लोकप्रिय पक्षियों और जानवरों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

6) स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन

Magdalena Andersen, the first female prime minister of Sweden

मैग्डेलेना एंडरसन स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। उनके पक्ष में 117 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 174 वोट डाले गए। इस दौरान 57 सांसदों ने मतदान नहीं किया, जबकि सदन का एक सदस्य अनुपस्थित रहा।

खास बात यह है कि पक्ष में कम वोट होने के बावजूद उन्हें जीत मिली, क्योंकि स्वीडन के सिस्टम के मुताबिक प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को संसद में बहुमत हासिल करने की जरूरत नहीं होती है।

पक्षियों की अद्भुत कलाकारी, जानिए कैसे बनाते हैं अपने खूबसूरत घोंसले

दुनियाभर में अनगिनत पक्षी पाए जाते हैं जिसमें हजारों किस्म के पक्षी सामिल है। इनके रहने के अलग-अलग तरीके हैं। इनके घोंसले एक तरह का नहीं बल्कि कई तरह का होते हैं। हर पक्षी अपना घोंसला बनाने के लिए हजार बार उड़ती है चीजें इकट्ठा करके घर बनाने के लिए पूरा ताकत लगा देता है।

आज के इस लेख में हम जानेंगे पक्षियों की अद्भुत कलाकारी से घोंसलों के बारे में:-

छोटा घोंसला

दुनिया का सबसे छोटा पक्षी हमिंग बर्ड अपना घोंसला मकड़ी के जाले, छोटे पत्ते और अपने टूटे हुए पंखों से बनाते हैं। यह घोंसला लचीला होता है। अंडे से बच्चे निकलकर जैसे-जैसे बड़े होने लगते हैं, यह घोंसला भी थोड़ा बड़ा हो जाता है।

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जमीन पर घोंसला

बतख, शतुरमुर्ग, एमू आदि पक्षी जमीन पर घोंसला बनाते हैं। ये पत्ते और झाड़ियों का इस्तेमाल कर अपना घोंसला बनाते हैं। शतुरमुर्ग तो अपना घोंसला रेत पर बनाता है और अपने अंडों की सुरक्षा खुद ही करता है।

गुहा घोंसला या कोटर

पेड़ के मोटे तने को चोंच से कुरेदकर बनाए गए घोंसले को गुहा घोंसला कहा जाता है। तोता, उल्लू, मैना, कठफोड़वा आदि प्रजाति पेड़ के कोटर में अपना घोंसला बनाते हैं।

बड़ा घोंसला

चील, सारस जैसे बड़े पक्षी बड़ा घोंसला बनाते हैं। ये पेड़ की छोटी-छोटी टहनियों और झाड़ियों का इस्तेमाल करके अपना घोंसला बनाते हैं। यह आकार में काफी बड़ा होता है। चील पक्षी अपना घोंसला ऊंची पहाड़ियों या ऊंचे पेड़ों पर बनाते हैं।

तैरने वाला घोंसला इस तरह के घोंसले पानी में तैरने वाले पक्षी बनाते हैं। हंस और बटेर की सारी प्रजातियां इसी तरह से अपना घोंसला बनाती हैं।

Sociable Weaver bird सोशिएबल वीवर बर्ड, इस पक्षी का यह नाम इसलिए रखा गया है, क्योंकि ये झुंड में अपना घोंसला बनाते हैं। एक बड़े-से घोंसले में कई होल्स होते हैं, जिनमें सैंकड़ों पक्षी एक साथ रह सकते हैं।

ये पेड़ की ऊंचाई पर घास की तीलियों और छोटी-छोटी टहनियों से अपना घोंसला बनाते हैं और सालों-साल एक ही घोंसले का इस्तेमाल करते हैं। कई बार दूसरे पक्षी भी इनके घोंसले का उपयोग कर लेते हैं।

लटकता हुआ घोंसला

बया या बुनकर पक्षी समुदाय का सदस्य है। इसका वैज्ञानिक नाम Ploceus philippinus है। यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है। यह सबसे आकर्षक घोंसला बनाने में माहिर होते हैं।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये घोंसला मादा पक्षी (Female Bird) नहीं, बल्कि नर (Male) बनाते हैं। घोंसला बनाने के लिए ये घास की लंबी-लंबी पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं।

जब मेल पक्षी घोंसले का बैसिक स्ट्रक्चर बना लेता है, तब फीमेल बर्ड उसे चेक करती है। अगर उसे सही लगा तो वो आगे का घोंसला बनाने में उसकी मदद करती है।

मिट्टी से बना घोंसला

अबाबील (Clay swallow) पक्षी अपना घोंसला मिट्टी से बनाता है। यह मिट्टी के साथ छोटी झाड़ियां और पत्तों को मिलाकर अपना घोंसला बनाता है। इस तरह बने घोसले का बारिश और तूफान में भी कुछ बिगड़ता नहीं है।

खाया जा सकने वाला घोंसला

स्विफ्टलेट (Swiftlet) एक ऐसा पक्षी है, जो एडिबले नेस्ट (edible nest) बनाता है, जिसे खाया जा सकता है। यह घोंसला ये पक्षी अपने ही (Saliva) यानी लार से बनाते हैं।

चीन के लोग स्विफ्टलेट पक्षी के घोंसले को बड़े शौक से खाते हैं और इसका सूप बनाकर भी पीते हैं। यह पक्षी भारत के अंडमान-निकोबार इलाकों में पाए जाते हैं। इनके घोंसले की कीमत भारत में लगभग 3 लाख रुपए प्रति किलो होती है।

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