काले जादू के लिए मशहूर है मायोंग गांव, यहां बच्चा-बच्चा जानता है काला जादू!!

जादू एक अद्वितीय कला है। जादू के बारे में कहा जाता है कि यह हाथ की सफ़ाई है। कई बार इसे सम्मोहन, दृष्टि भ्रम, छलावा आदि भी कहा जाता है। चमत्कार, इन्द्रजाल, टोना या तन्त्र-मन्त्र जैसे शब्द भी जादू कि श्रेणी में आते हैं। जादू हाथ की सफाई है, भ्रम है या सच में चीजें होती हैं नहीं होती हैं, कहना मुश्किल है।

लेकिन आज हम बात करेंगे एक ऐसे गाँव की जिसका बच्चा-२ जादू जानता है। इस गाँव को काले जादू का गांव भी कहा जाता है। कहा जाता है कि यहां के लोग अपने बच्चों को छोटी उम्र में ही काले जादू का ज्ञान दे देते हैं।

मायोंग नाम का यह गाँव भारत के असम राज्य की राजधानी गुवाहाटी शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है।  जिला मोरिगांव में पबित्रा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी(Pobitora Wildlife Sanctuary) के पास स्थित है काले जादू का यह गांव। ‘मायोंग‘ शब्द संस्कृत शब्द ‘माया‘ से बना है जिसका अर्थ होता है भ्रम।

कहते हैं कि यहां के लोग भ्रम पैदा करने में उस्ताद हैं। यहां के लोग गायब करने और गायब होने का जादू जानते हैं। यहां तक भी कहा जाता है कि लोग खुद को जानवरों में भी बदलने की शक्ति रखते हैं। और तो और, कहा जाता है कि यहां पर जंगली जानवरों को अपनी जादू की शक्ति से पालतू बना लिया जाता है।

यहाँ पर लोग मंत्र से दर्द दूर करते हैं, चोर पकड़ते हैं और कई तरह के जादू के प्रदर्शन भी करते हैं। यहां के लोग वैसे हैं तो किसान लेकिन किसानी के साथ ही ये अपने बच्चों को जादू भी सिखाते हैं। यहां पर काला जादू और जादूटोना पीढ़ियों से किया जाता रहा है।

काले जादू का केंद्र गांव

मायोंग गांव को काला जादू का केंद्र माना जाता है। यहां के लोगों को इंसान से जानवर बनाने की कला मालूम है। यही नहीं ऐसा भी कहा जाता है कि अपनी जादुई शक्ति से लोगों को यहां हवा में गायब कर दिया जाता है।

एडवेंचर के शौकीन लोग इस जगह को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। हालांकि, इस जगह को काला जादू के अलावा प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से काफी पसंद किया जाता हैं। इन्हीं रहस्यमय बातों के कारण यात्री यहां आना पसंद करते हैं।

पौराणिक कथाएं

कहा जाता है कि 1332 में असम पर मुग़ल बादशाह मोहम्मद शाह ने एक लाख घुड़सवारों के साथ चढ़ाई की थी। तब यहां हज़ारों तांत्रिक मौजूद थे, उन्होंने मायोंग को बचाने के लिए एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी थी जिसको पार करते ही सैनिक गायब हो जाते थे। उस सेना का क्या हुआ, किसी को पता नहीं चला।

प्रारंभिक आधुनिक काल तक इस गांव में शक्ति पूजा की जाती थी, जहां सदियों पहले नरबलि दी जाती थी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मायोंग में बूढ़ा मायोंग नाम की एक जगह है जिसे काले जादू का केंद्र माना जाता है। यहां 2 कुंड हैं – एक अष्टदल कुंड व दूसरा योनि कुंड।

योनि कुंड पर हिन्दू व अष्टदल कुंड पर बौद्ध अपनी तंत्र विद्या को सिद्ध करने के लिए साधना किया करते थे। इसके अलावा यहां पर भगवान शिव व पार्वती के अलावा गणेशजी की भी प्रतिमाएं हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि काले जादू की मंत्र शक्ति के कारण ये कुंड हमेशा पानी से भरा रहता है।

मायोंग गांव का इतिहास महाभारत से जुड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि ये गांव भीम के बेटे घटोत्कच का है। उसे इस गांव का राजा माना जाता है।

मायोंग अभी भी उन जादूगरों का घर है, जिन्हें मंत्रों के जरिए ना सिर्फ काला जादू बल्कि आयुर्वेद, हस्तरेखा और भविष्यवाणी का ज्ञान है। मायोंग के लोग अपनी इस कला पर गर्व करते हैं।

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आखिर क्यों नूरजहां हर वक़्त हाथ में छुरा और जहर की पुड़िया रखती थी?

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मलिका नूरजहां का नाम मुगलकाल की महत्वपूर्ण महिलाओं में शामिल है। वह एतिमातुद्दौला की बड़ी साहसी बेटी थी।सन् 1611 में जहांगीर से उसकी शादी हुई। राज-काज के मामलों में पूरी दिलचस्पी लेती थी। गरीबों की मददगार और कमजोरों को हौसला देती थी।

नूरजहां के नाम के सिक्के भी चलते थे सिक्कों पर बादशाह जहांगीर के साथ उसका नाम भी खुदा हुआ था। शाही फरमानों पर बादशाह के साथ उसके भी हस्ताक्षर होते थे।

किसी को भी सीधे उससे मिलने की इजाजत नहीं थी तथा पहले पैगाम भेजकर इजाजत लेनी पड़ती थी। इस काम के लिए नियुक्त किन्नर पैगाम ले जाने का काम करते थे।

 

जहांगीर की इकबुल नामक एक और बेगम भी थी। वह राजपूत घराने की औरत थी। उसी के गर्भ से शहजादा खुसरो का जन्म हुआ। शहंशाह ने इकबुल को भी शाह बेगम का खिताब दिया हुआ था।

नूरजहां का असली नाम मेहरुन्निसा था। शहजादा सलीम ने उसे एक बाग में देखा था। शहजादा ने उसे दो कबूतर पकड़ा कर कहा था कि वह थोड़ी देर में लौटकर आएगा और तब तक वह कबूतरों को काबू में रखे।

इस बीच एक कबूतर मेहरुन्निसा के हाथ से उड़ गया। जहांगीर ने लौटकर पूछा कि कबूतर कैसे उड़ गया? मेहरुन्निसा ने बड़ी मासूमियत के साथ दूसरा कबूतर भी उड़ाकर कहा कि ऐसे उड़ गया।

शहजादा सलीम यानी जहांगीर मेहरुन्निसा की मासूमियत और खूबसूरती पर फिदा हो गया। उसी दिन उसने नूरजहां को अपनी मलिका बनाने का फैसला कर लिया। जहांगीर के पिता अकबर इस शादी के विरुद्ध था।

मेहरुन्निसा के पिता ने भी शादी की इजाजत नहीं दी। वह मेहरुन्निसा की शादी अपने भतीजे अलीगुल से करना चाहता था जो आगे चल कर शेर अफगन के नाम से मशहूर हुआ क्योंकि उसने अपने हाथों से शेर को मार गिराया था।

मेहरुन्निसा से जब उसके बाप ने पूछा तो उसने भी अलीगुल से ही शादी करने की इच्छा प्रकट की। इस प्रकार शादी हो गई और दोनों बंगाल में जाकर रहने लगे। जहां अलीगुल की बहुत बड़ी जागीर थी।

अकबर की मौत के बाद जब जहांगीर तख्त पर बैठा तो उसने बहुत कोशिश की कि किसी तरह मेहरुन्निसा मान जाए और अपने पति को तलाक दे दे।

मगर जब-जब जहांगीर के आदमी मेहरुन्निसा को मनाने जाते वह साफ इंकार कर देती और बादशाह को संदेश भिजवाती कि उसे अपने राज्य की औरतों को अपने पतियों को तलाक देने के लिए नहीं उकसाना चाहिए।

किसी औरत को तलाक के लिए मजबूर करके उससे जबरदस्ती शादी करना कानून के भी विरुद्ध है।
जब कोई चारा न रहा तो जहांगीर ने साजिश करके मेहरुन्निसा के पति की हत्या करवानी चाही लेकिन जब वह इसमें सफल न हुआ तो बाद में जहांगीर ने बंगाल के गवर्नर कुतुबुद्दीन को कह कर शेर अफगन की हत्या करवा दी।

इस तरह मेहरुन्निसा विधवा हो गई और फिर उसे आगरा के शाही हरम में ले जाया गया। जहांगीर ने बहुत कोशिश की कि किसी तरह वह उसे शादी के लिए राजी कर ले लेकिन वह नहीं मानी।

वह हर समय अपने पास एक जहर की पुड़िया और एक छुरा रखती ताकि अगर कभी जहांगीर उसके साथ कुछ गलत करने की कोशिश करे तो वह छुरे से अपनी रक्षा करे और जहर खाकरमर जाए पर जहांगीर उससे प्यार की भीख मांगता रहा जिसे वह ठुकराती रही।

उसके प्यार में दीवाना जहांगीर अपने काम भी ठीक से नहीं देख पाता था। जब ऐसी स्थिति पैदा हो गई तो वजीरों ने मेहरुन्निसा से प्रार्थना की तो बड़ी मुश्किल से वह राजी हो पाई।

मेहरुन्निसा के साथ पहली भेंट के कई वर्ष बाद इन दोनों की शादी हुई। मेहरुन्निसा को ‘नूरजहां‘ का खिताब दिया गया। वह भारत की मलिका बनी और वास्तव में हुकूमत की बागडोर उसी के हाथ में थी, जहांगीर तो हमेशा शराब के नशे में धुत्त रहता था।

जब जहांगीर का दरबार लगा होता तो नूरजहां तख्त के पीछे उसकी पीठ पर हाथ रख कर बैठ जाती। जब तक वह नूरजहां का हाथ अपनी पीठ पर महसूस करता रहता तब तक हर मामले पर सही-सही फैसले सुनाता और जैसे ही वह हाथ सरक जाता, जहांगीर दरबार से उठ जाता।

नूरजहां की अंतिम इच्छा के अनुरूप उसकी मृत्यु के बाद उसे एक बहुत ही मामूली व्यक्ति की तरह दफनाया गया और कब्र पर बहुत ही मामूली किस्म का मकबरा बनवाया गया। उस मकबरे पर एक शे’र खुदा हुआ है जिसका अर्थ इस प्रकार है :

“एकांत में बनी मेरी इस कब्र पर कोई गुलाब न उगाए जाएं, कोई बुलबुल न गाए, कोई दीया न जले, कोई पतंगा न फड़फड़ाए।” और जहांगीर के मकबरे पर जो शब्द खुदे हुए हैं उनका अर्थ यह है : “हरी घास के सिवाय यहां कुछ न हो क्योंकि यह एक नश्वर निरीह प्राणी की कब्र है और सदा कब्र ही रहेगी।”

अक्तूबर 1627 में जहांगीर जब कश्मीर से दिल्ली लौट रहा था तो रास्ते में राजौरी नामक स्थान पर सहसा उसकी मृत्यु हो गई थी।
पंजाब केसरी से साभार

वायरल वीडियो:- क्रिकेटर डेविड वॉर्नर ने पुष्पा मूवी के गाने “श्रीवल्ली” पर किया जबरदस्त डांस!!

साउथ के सुपर स्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा का रंग इन दिनों हर किसी पर चढ़ा हुआ है। फिल्म के डायलॉग से लेकर डांस स्टेप तक सभी काफी वायरल हो रहे हैं।

वहीं फिल्म का एक गाना है “श्रीवल्ली” जिसका हिंदी वर्जन लगातार ट्रेंडिंग में है और खास बात है उस गाने में अल्लू अर्जुन का हुक स्टेप। उनके इस स्टेप को अब ऑस्ट्रेलियाई ओपनर डेविड वार्नर ने भी रिक्रिएट किया है।

ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर मैदान के अंदर और बाहर फैंस का मनोरंजन करने से नहीं चूकते हैं।

उन्होंने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर पुष्पा का यह हुक स्टेप करते हुए वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में वार्नर श्रीवल्ली गाने पर अल्लू अर्जुन स्टाइल में डांस कर रहे हैं।

 

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क्रिकेटर के इस पोस्ट पर भारत के कई क्रिकेटर्स ने कमेंट करते हुए अपने रिएक्शन दिए हैं। वहीं पुष्पा एक्टर अल्लू अर्जुन ने भी इस पर रिएक्ट किया है।

डेविड वॉर्नर ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी दोनों बेटियों का भी वीडियो शेयर किया है। वे भी इसी मूवी के गाने पर डांस करती नज़र आ रही है। वॉर्नर की बेटियों का यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है।

 

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ये हैं दुनिया के 10 सबसे खतरनाक हवाई अड्डे

किसी एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए हवाई जहाज ही परिवहन का सबसे तेज साधन है। इसके माध्यम से हजारों मिलों की दूरी बहुत कम समय में तय की जा सकती है। आज हम आपको विश्व के उन शीर्ष 10 खतरनाक हवाई अड्डों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन पर जहाज उतारना बहुत मुश्किल है।

इन हवाई अड्डों का अत्यधिक ऊंचाई पर या नीचे होना, जटिल लोकेशन या वातावरण और छोटे रनवे पर सही ऊंचाई पकड़ना आदि सब कुछ बेहद खतरनाक हैं। इन हवाई अड्डों या पट्टियों पर किसी भी जहाज को उड़ाना पायलटों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हैं।

सबा (Saba) हवाई अड्डा – दुनिया का सबसे छोटा रनवे।

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सबा हवाई अड्डा, नीदरलैंड्स के 28 मील दूर दक्षिण में सबा टापू पर स्थित है। सबा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का रनवे दुनिया के सभी हवाई अड्डो के रनवे से छोटा हैं। इसकी कुल लंबाई 400 मीटर (1300 फीट) है। इस हवाई अड्डे की लैंडिंग पट्टी अदभुत और चुनौतीपूर्ण है।

तोंकांतीं (Toncontin) हवाई अड्डा, होंडुरास।

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तोंकांतीं अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में सुरक्षित लैंडिंग के लिए पहाड़ों के बीच में से गुजरना पड़ता हैं। यह समुद्र तल से 3294 फीट (1,004 मीटर) ऊपर एक घाटी में स्थित है।

तोंकांतीं हवाई अड्डे पर विमानों को उतरने के लिए 45 डिग्री कोण पर 7,000 फुट नीचे घाटी में स्थित हवाई पट्टी तक पहुचना पड़ता हैं।

आसपास के पहाड़ी इलाके की वजह से यात्रियों को हवाई पट्टी पर उतरते समय मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं। लगातार तेज़ हवाओं के चलने से पायलट को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं।

लागार्डिया (LaGuardia) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, न्यूयॉर्क।

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लागार्डिया हवाई अड्डे में लैंडिंग करते समय बहुत ही खुबसुरत नज़ारा दिखाई देता हैं। लागार्डिया हवाई अड्डे का रनवे 7000 फुट लंबा है और इसको 196 फुट और अधिक बढ़ाया गया, जो पानी के ऊपर हैं।

हवाई अड्डे के स्थान पर तिरछी नज़र से देखे, तो पता चलता है कि यह मिडटाउन मैनहट्टन के शहर से सिर्फ आठ मील की दूरी पर स्थित है।

कुर्चेवेल (Courchevel) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, फ्रांस।

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कुर्चेवेल हवाई अड्डा सिर्फ 525 मीटर लंबा हैं। रनवे को 18.5% ढलान दी गईं हैं, जो कि हवाई अड्डे पर उतरने और उड़ान भरने के समय पायलट के सामने बहुत खतरनाक परिस्थिति पैदा करती हैं।

वेलिंगटन (Wellington) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, न्यूजीलैंड।

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वेलिंगटन हवाई अड्डा 6,351 फुट रनवे से शुरु होता है और नीले पानी में खत्म हो जाता हैं। वेलिंगटन हवाई अड्डा देखने के लिए बहुत खुबसुरत हैं, लेकिन उड़ान भरने के लिए बहुत ही मुश्किल हैं।

कई टक (Kai Tak) एयरपोर्ट हांगकांग।

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कई टक एयरपोर्ट में उतरने और टेक ऑफ करना खुद को जोखिम में डालने जैसा हैं। एयरपोर्ट के नज़दीक लोगों की भीड़ और आसपास की ऊँची बिल्डिंग यहां उतरने में सबसे बड़ी मुश्किलों पैदा करती हैं।

लुक्ला (Lukla) हवाई अड्डा, नेपाल।

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लुक्ला हवाई अड्डे को तेनजिंग-हिलेरी हवाई अड्डे के नाम से जाना जाता है। इस हवाई अड्डे का नाम दो पुरुषों के नाम पर रखा है, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर पहली बार विजय प्राप्त की थी।

अंटार्कटिका के बर्फ रनवे पर फिसलन लैंडिंग।

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अंटार्कटिका सबसे ठंडा स्थान है। अंटार्कटिका में कोई पक्का रनवे नही हैं। लैंडिंग करते समय सिर्फ बर्फ की लंबी पट्टी ही दिखाई देती हैं और उस पे लैंडिंग करना चुनौतीपूर्ण हैं।

प्रिंसेस जुलिअन (Princess Juliana) अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा,नीदरलैंड्स।

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यह हवाई अड्डा कैरेबियन के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है। इस हवाई अड्डे की लम्बाई 7,150 फीट से भी कम है। बड़े विमानों को उड़ान भरने के लिए कम से कम 10,000 फीट की आवश्यकता होती है। सुरक्षित लैंडिंग करने के लिए कम से कम 8,000 फुट की ज़रूरत होती है।

पारो (Paro) हवाई अड्डा, भूटान।

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यह हिमालय हवाई अड्डों में सबसे खतरनाक हवाई अड्डों में शीर्ष पर है। केवल आठ पायलट ही यहां विमान उतारने में सफल हो पाए है। समुद्र के स्तर से 1.5 मील की दूरी पर है और ऊपर से 18,000 फुट उचीं चोटियों से घिरा हुआ है।

रनवे सिर्फ 6,500 फुट लंबा है। पारो हवाई अड्डा दुनिया का सबसे खतरनाक लैंडिंग हवाई अड्डा हैं। पारो हवाई अड्डा हिमालय की खड़ी पहाड़ियों के बीच बसा दुनिया का सबसे खतरनाक हवाई अड्डा है।

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जानिए क्या थी वजह जो इस शख्स ने 9 महिलाओं के साथ रचाई शादी?

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शादी एक पवित्र बंधन होता है। यह हर इंसान के लिए एक यादगार लम्हां होता है। जिसमें दो लोग एक-दूसरे के लिए हमेशा साथ रहने का वादा करते है। शादी से होने वाली परम्पराओं के बारें मे तो सभी जानते ही है।

दुनिया के हर हिस्से में अलग-अलग रस्में और मान्यताएँ होती हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको एक ऐसे व्यक्ति बताने जा रहे हैं जिसने एकल विवाह प्रथा को खत्म करने के लिए 9 महिलाओं से की शादी।

तो चलिए जानते हैं :-

ब्राजील में रहने वाले एक शख्स ने पहली पत्नी समेत 9 महिलाओं से शादी की। इस व्यक्ति का नाम है- ऑर्थर ओ उसरो। ऑर्थर पेशेवर मॉडल हैं। वो कहते हैं- मेरे देश में एकल विवाह प्रथा (सिंगल मैरिज कॉन्सेप्ट) है। मैं इसे खत्म करना चाहता हूँ इसलिए मैंने अपनी पत्नी के साथ ही 8 और महिलाओं से शादी की।

ऑर्थर पहले से शादीशुदा हैं और उनकी पत्नी का नाम लुआना कजाकी है जोकि एक ब्लॉगर हैं। हाल ही में यह कपल हनीमून मनाकर लौटा था।

लेकिन हनीमून मनाकर लौटने के बाद इस कपल ने ऐसा अजीबोगरीब फैसला किया, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह गया। हनीमून से लौटने के बाद इस कपल ने फैसला किया कि आर्थर कई अन्य महिलाओं के साथ भी शादी करेगा। साओ पाओलो में आर्थर ने एक चर्च में पादरी की मौजूदी में 9 महिलाओं के साथ शादी की।

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बता दें कि यह कपल पहले भी सुर्खियों में रह चुका है। ऑर्थर और लुआना ने अपनी पहली शादी का हनीमून कैप डी’आग्डे (Cap d’Agde) में सेलिब्रेट किया था। यहां के निवासी बेहद आजादी से जिंदगी गुजारते हैं।

ऑर्थर और लुआना कहते हैं- हम पूरे यूरोप की यात्रा करना चाहते हैं और दुनिया के उन इलाकों को देखना चाहते हैं जहां हमारे शहर की तरह ही आजादी है।

महामारी के दौरान ये कपल लोगों के साथ सेक्स टिप्स भी शेयर करते रहते थे। इस बारे में दोनों कहते हैं- हम चाहते हैं कि हर कपल का वैवाहिक जीवन और बेहतर तरीके से बीते।

इस महीने की शुरुआत में लुआना को ऑर्थर के गले में पट्टा डाले हुए रेलवे स्टेशन पर घुमाते देखा गया। ऑर्थर ने मास्क पहना हुआ था। यह कपल स्टेशन से होते हुए एक मार्केट में पहुंचा। इस घटना को उन्होंने काफी रोमांचक अनुभव बताया था।

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इस वीडियो को देखकर आपकी सांसें थम जाएंगी!!

पहाड़ी इलाकों में वाहन चलाना कोई आसान काम नहीं। यहां जरा सी चूक, जिंदगी को मौत में बदल सकती है। हालांकि, इन रास्तों पर रोज चलने वाले ड्राइवर्स ड्राइविंग में इतने उस्ताद हो जाते हैं कि वे पतली सी सड़क पर भी वाहन को आराम से घुमा लेते हैं। सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर आपको हंसी नहीं, बहुत ज्यादा हैरानी होगी!

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो किसी पहाड़ी इलाके का है। इसमें आप सकते हैं कि एक कार वन लेन रोड पर फंसी हुई है। लेन में स्पेस भी बहुत कम है।

ड्राइवर कार को वापस मोड़ना चाह रहा है, लेकिन कार जिस तरह से फंसी हुई है, उसे देखकर लगता नहीं है कि ड्राइवर कार को घुमा पायेगा।

लेकिन ड्राइवर लगातार कोशिश करता रहता है। वह आराम-आराम से कार को पीछे टर्न करने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे वह कार को पूरी तरह से टर्न कर लेता है।

इसे देखकर हर कोई हैरान है। इसे देखकर कोई भी भरोसा नहीं कर पा रहा है कि क्या सच में इतने कम स्पेस में कोई कार को बैक कर सकता है। इस वीडियो को देखकर यूजर्स ड्राइवर की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

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जानिए हमारे राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में !!

किसी भी राष्ट्र की पहचान के लिए कुछ प्रतीक अवश्य ही नियत किए जाते हैं। इन प्रतीकों के माध्यम से उस राष्ट्र को सारे संसार में जाना जाता है। राष्ट्रीय प्रतीक हमारी राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के पोषक है। ये देशवासियों में राष्ट्रीय भावना का संचार करते हैं, साथ ही मातृभूमि के लिए सदैव मरमिटने की प्रेरणा देते हैं।

हमारे देश के कुछ प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीक निश्चित किए गए हैं- राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय चिन्ह, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय पशु-पक्षी-पुष्प। इनके बारे में तो सभी को पता ही है परंतु कई अन्य प्रतीक ऐसे भी हैं जिनके बारे में कम ही जानकारी है। तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से:-

Know about our National Emblem

राष्ट्रीय ध्वज : 22 जुलाई, 1947 को भारत की संविधान सभा ने तिरंगे को देश का राष्ट्रीय ध्वज अपनाया था। तिरंगे में केसरिया रंग त्याग और बलिदान का, सफेद रंग सत्य, शांति और पवित्रता का और हरा रंग देश की सम्रद्धि का प्रतीक होता है।

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राष्ट्रीयचिन्ह: यह सारनाथ स्थित अशोक स्तम्भ में शीर्ष की सत्य अनुकृति है जो सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। भारत सरकार ने 26 जनवरी, 1950 को इसे राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में मान्यता प्रदान की।

राष्ट्र गान : बंगाल की पावन धरा में जन्मे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव पाने वाले प्रथम भारतीय प्रख्यात विश्व कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्र गान ‘गन गण मन’ की रचना की। इसके गायन में 52 सैकेंड लगते हैं।

राष्ट्रीय गीत : ‘वन्दे मातरम्‘ की रचना ‘बंकिम चन्द्र चटर्जी’ ने की थी। उन्होंने स्वधीनता महासंग्राम का वर्णन अपने सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘आनन्द मठ‘ में किया और इसी में उन्होंने ‘वन्दे मातरम्‘ गीत लिखा था।

राष्ट्रीय पशु, पक्षी तथा पुष्प : राष्ट्रीय पशु के रूप में ‘सिंह’ तथा राष्ट्रीय पक्षी के रूप में ‘मोर’ एवं राष्ट्रीय पुष्प के रूप में ‘कमल’ को स्वीकार किया गया है।

सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार : भारत रल सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार और सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इसकी शुरूआत 2 जनवरी, 1954 को हुई।

राष्ट्रीय फल : आम का वैज्ञानिक नाम ‘मैनजीफेरा इंडिका‘ है। इसे सभी फलों में राजा का दर्जा प्राप्त है।

राष्ट्रीयखेल : हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल तब से माना जाता है जब से भारत ने ओलिम्पिक्स में हॉकी के खेल में लगातार 6 स्वर्ण पदक जीते थे।

राष्ट्रीय जलचर : गंगा की डॉलफिन को राष्ट्रीय जलचर के रूप में स्वीकार किया गया है। यह पावन गंगा की शुद्धता को प्रदर्शित करती है क्योंकि ये केवल साफ और शुद्ध पानी में ही जिन्दा रह सकती है।

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राष्ट्रीय वृक्ष : भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के पेड़ को माना गया है। यह एकता और दृढ़ता का प्रतीक है। जिस प्रकार भारत के विभिन्न धर्म व जाति के लोग एक साथ निवास करते हैं, उसी प्रकार बरगद के पेड़ की शाखाओं पर छोटे या बड़े जन्तु निवास करते हैं। इस वृक्ष का हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है और इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।

राष्ट्रीयनदी : गंगा नदी भारत की सबसे लम्बी और पवित्र नदी है जो पहाड़ी, घाटी और मैदानी इलाकों तक फैली है। प्राचीन समय से ही भारतवासियों के लिए इसका बड़ा महत्व रहा है। गंगा की उत्पत्ति, हिमालय में गंगोत्री ग्लेशियर के हिम क्षेत्र में भगीरथी नदी के रूप में होती है।

राष्ट्रीय दिवस : भारत के राष्ट्रीय दिवस के रूप में स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और गणतंत्र दिवस को घोषित किया गया है।

राष्ट्रीय लिपि : संविधान के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी गई हिन्दी को आधिकारिक लिपि कहा गया है।

राष्ट्रीय कैलेंडर: यह दर्जा शक कैलेंडर को प्राप्त है। 1957 में इसे कैलेंडर कमिटी द्वारा बनाया गया था, जिसे भारतीय पंचाग की मदद से तैयार किया गया है। इसमें हिन्दू धार्मिक कैलेंडर के अलावा खगोल डाटा, समय भी लिखित है।

राष्ट्रीय शपथ : भारत हमारा देश है। हम सब भारतवासी भाई-बहन हैं…’-कोतेलुगू में ‘प्यिदीमर्री वेंकट सुब्बाराव’ द्वारा 1962 में लिखा गया था। इसे 26 जनवरी, 1965 से सभी स्कूलों में निर्धारित रूप से गाए जाने का प्रावधान बनाया गया है।

कुछ अन्य राष्ट्रीय प्रतीक

  • राष्ट्रीय सरिसृप : किंग कोबरा।
  • राष्ट्रीय विरासत पशु : हाथी।
  • राष्ट्रीय सब्जी : कद्दू।
  • राष्ट्रीय सूक्ष्म जीव (माइक्रोब): लैक्टोबैसिलस डेलबएकी जो एक प्रकार का बैक्टीरिया है ।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए सर्दी के मौसम में एलर्जी से बचने के उपाय!!

सर्दी के मौसम में एलर्जी की समस्या अक्सर परेशान करती है और यदि रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो तो बार-बार छींक आना, सर्दी-जुकाम आदि लक्षण बढ़ जाते हैं। यूं तो धूल-मिट्टी आदि हमेशा वातावरण में मौजूद रहते हैं, फिर भी सर्दी के मौसम में सेहत पर इसका दुष्प्रभाव जल्दी पड़ता है।

आमतौर पर हमारे घरों में धूलमिट्टी के बारीक कण पाए ही जाते हैं, जोकि नजर नहीं आते। यही धूल कण छींक, नाक बंद होना, खांसी आदि की वजह बनते हैं।

how to avoid seasonal allergies

इसके साथ ही घरों में बाथरूम आदि नमी वाले स्थानों में भी फंगल इंफैक्शन आसानी से पनपता है, जिसकी वजह से एलर्जिक सिम्पटम्स बढ़ जाते हैं। इसी प्रकार पालतू जानवर भी एलर्जी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। अतः इन सबसे बचाव को लेकर जागरूक होना जरूरी है।

मौसमी एलर्जी से बचाव के लिए कुछ उपयोगी सुझाव इस प्रकार हैं

  • सबसे पहले एलर्जी के लिए जिम्मेदार वजह को ढूंढें व उससे दूरी बनाएं।
  • अपने लाइफ स्टाइल में सुधार लाएं और एक्टिव रहें।
  • घर में ताजी हवा आए, इसका इंतजाम करें।
  • अदरक, तुलसी, शहद, लहसुन, लौंग, दालचीनी, गुड़ आदि का प्रयोग करते रहें।
  • गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर रोजाना पिएं।
  • एलर्जी की स्थिति में गर्म पानी से भांप लें।
  • तनाव से दूर रहें और पूरी नींद लें।
  • गर्म पानी में कपड़े धोएं और धूप में सुखाएं। बिस्तर, कंबल, रजाई आदि भी सप्ताह में एक बार धूप में रखें।
  • यदि कोई भी एलर्जिक लक्षण 5-6 दिन तक बना रहे तो डाक्टर से उपचार कराएं।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए देश और दुनिया से जुड़े 15 मज़ेदार तथ्य!

देश और दुनिया से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं जो बेहद मज़ेदार हैं और हमारा ज्ञान भी बढ़ाते है, तो चलिए जानते इस पोस्ट के माध्यम से:-

  1. आपके आसपास हरा रंग किसी भी रूप में, चाहे वह प्राकृतिक हो या दीवार पर हरे रंग से पुताई की गई हो, आपकी रचनात्मकता (Creativity) को बढ़ाता है।
  2. क्या आप जानते हैं, कुत्तों के सिर्फ पंजे और नाक में पसीना आता है।
  3. दुनिया का सबसे छोटा जानवर Whitetoothed Pygmy Shrew है।
  4. परीक्षा के दिनों में भी अपनी नींद से समझौता मत कीजिए। दिमाग और शरीर के सही संचालन में नींद बेहद जरूरी है। कम नींद लेने से आपके शरीर के कार्य करने की क्षमता घटती है।
  5. दुनिया की सबसे जहरीली मछली Stone Fish है, जो पत्थर की तरह दिखाई देती है।
  6. फिलीपींस ईगल बन्दरों का शिकार करता है। यह भारी, लंबा-चौड़ा होता है।
  7. रोड के किनारे लगी इन लाइटों को Road Stud कहते हैं।
  8. गूंगे व्यक्ति सपनों में भी इशारों की भाषा में बात करते हैं।
  9. मोबाइल का चार्जर हमेशा छोटा बनाया जाता है, क्योंकि चार्जिंग पर लगे मोबाइल के इस्तेमाल से बैटरी जल्दी खराब हो जाती है।
  10. हमारे शरीर में पाए जाने वाले कुल कैल्शियम का 99 प्रतिशत हमारी हड्डियों और दांतों में पाया जाता है।
  11. यदि हमारे शरीर में एक प्रतिशत पानी की कमी होती है, तो हमें प्यास लगती है और अगर ये कमी 10 प्रतिशत तक बढ़ जाए तो हमारी मौत भी हो सकती है।
  12. Giant Anteater की जीभ काफी लंबी होती है, जो लगभग 2 फीट तक लंबी होती है।
  13. छिपकलियों की प्रजाति में एक सींग वाली छिपकली (Horned Lizard) होती है, जो अपने शिकारी से बचने के लिए अपनी आंखों से खून की तेज धार फेंकती है।
  14. दुनिया में सबसे तीखी मिर्च ड्रैगन ब्रेथ चिली पीपर को माना जाता है और कहा जाता है कि यह इंसान को मार भी सकती है।
  15. कोलंबिया के तट पर स्थित सैन बर्नार्डो के द्वीपसमूहो में सांता क्रूज़ नामक द्वीप दुनिया की सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला द्वीप है। मगर सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस द्वीप का आकार सिर्फ दो फुटबॉल मैदानों के जितना ही है।

ये है दुनिया के सबसे खुशहाल जानवर, जाने कुछ रोचक तथ्य!!

दुनिया में कई तरह के जानवर पाए जाते हैं जिनमें कई खतरनाक, बड़े या छोटे आकार और कई बहुत प्यारे होते हैं लेकिन क्या आपने कभी सबसे खुशहाल जानवर के बारे में सुना है ! अगर नहीं तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से :-

  • क्वॉक्का (Quokka) नामक यह जानवर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के दलदली इलाकों में पाया जाता है। यह ऑस्ट्रेलिया के रॉटनेस्ट द्वीप (Rottnest Island) पर ये बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं। इसे दुनिया का सबसे खुशहाल जानवर भी कहते हैं।

  • इसके चेहरे की बनावट कुछ ऐसी है कि यह हमेशा मुस्कराता हुआ नजर आता है। इसकी मुस्कराहट काफी मनमोहक है और इसीलिए इसे दुनिया का सबसे खुश जानवर कहा जाता है।
  • यह शाकाहारी जानवर है। यह पत्ते, नरम तना, घास आदि खाना पसंद करते हैं। खाने के लिए ये कभी-कभी छोटे पेड़ों पर भी चढ़ जाते हैं और पेड़ पर आराम करना भी इन्हें बहुत पसंद है।
  • ये मासुपियल्स (Marsupials) की कैटेगरी में आते हैं यानी कि वे जानवर जो कंगारू की तरह पाउच में अपना बच्चा रखते हैं।
  • क्वॉक्का के बेबी को ‘जॉ‘ कहा जाता है और फीमेल क्वॉक्का एक बार में एक ही बच्चे को जन्म देती है।
  • ये एनिमल इंसानों से नहीं डरते और आराम से उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं।
  • ये सेल्फी भी बहुत प्यार से खिंचवाते हैं, जब भी कोई इनके साथ सेल्फी क्लिक करता है तो ये मुस्कराते हुए पोज देते हैं।
  • ये आमतौर पर अपने परिवार के साथ या ग्रुप में रहना पसंद करते हैं और ज्यादातर रात में ही बाहर निकलते हैं।
  • दुनिया के सबसे खुशहाल जानवर की उपाधि हासिल कर चुका क्वॉक्का यहां आने वाले टूरिस्ट के बीच काफी लोकप्रिय है।
  • यह कंगारू की प्रजाति का ही जीव है, लेकिन इसका आकार एक पालतू बिल्ली के बराबर होता है।

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