जानिए लौंग के चमत्कारी टोटके, जिनसे लाइफ में बनी रहती है सकारात्मकता

आम तौर पर लौंग का प्रयोग सेहत और स्वाद के लिए किया जाता है लेकिन साथ ही इसका इस्तेमाल पूजा पाठ के लिए भी किया जाता है। मान्यता है कि इससे देवी-देवता प्रसन्न होकर अपनी असीम कृपा बरसाते हैं। वास्तु के अनुसार लौंग से जुड़े कुछ उपाय करने से घर व जीवन में मौजूद नकारात्मकता दूर हो जाती है।

आज इस पोस्ट में जानेंगे लौंग के चमत्कारी टोटकों के बारे में,तो चलिए जानते हैं:-

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दिया हुआ पैसा वापिस पाने के लिए

अक्सर लोगों को अपना उधार दिया पैसा वापिस पाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे छुटकारा पाने के लिए पूर्णिमा या अमावस्या की रात को 1 कपूर और 21 लौंग माता लक्ष्मी के सामने जलाएं। इससे उधार दिया पैसा वापिस पाने में मदद मिल सकती है।

अगर बार-बार काम बिगड़ जाएं

अक्सर कई बार मेहनत करने पर भी पूरा फल नहीं मिलता है, ऐसे में आप लौंग से जुड़ा एक उपाय कर सकते हैं। इसके लिए मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर उसमें एक जोड़ा लौंग डालें।

उसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करके अपनी परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें। कुछ दिनों तक ऐसा करने से आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे। जीवन की समस्याएं दूर होकर सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होगी।

इंटरव्यू या किसी जरूरी काम पर जाने से पहले

किसी खास काम या इंटरव्यू में जाने से पहले मुंह में एक जोड़ा लौंग डालकर ही घर से निकलें। फिर उस जगह पर पहुंचकर लौंग को मुंह से निकाल दें। मन में तरक्की व सफलता की कामना करते हुए इंटरव्यू दें। मान्यता है कि इससे सफलता व तरक्की के रास्ते खुलते हैं।

घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए

अक्सर लोग घर के सदस्यों का बार-बार बीमार होने से परेशान रहते हैं। वास्तु के अनुसार, इसके पीछे का कारण घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है।

इससे बचने के लिए 7-8 लौंग तवे पर जलाकर घर के किसी कोने पर रख दें। इसका धुआं पूरे घर पर पड़ने से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी।

आर्थिक परेशानी से बचने के लिए

पैसों की किल्लत से परेशान लोग 7-7 काली मिर्च और लौंग को अपने सिर से वार किसी सुनसुान जगह पर फेंक दें। ध्यान रखें इस उपाय को करने के बाद बिना पीछे देखे सीधा घर आ जाएं। मान्यता है कि इससे धन संबंधी समस्याएं दूर होने में मदद मिलती है।

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ये हैं दुनिया की 6 रहस्य्मयी झीलें!

दुनिया के कई हिस्सों में आज भी कुछ ऐसी झीलें मौजूद हैं जो इंसानों के लिए रहस्य बनी हुई हैं। विज्ञान भी इन्हें लेकर अंधेरे में ही है। कहा जाता है कि इनकी गहराइयों में ऐसा कुछ है जिससे 21वीं शताब्दी में कदम रखने के बाद भी दुनिया अनजान है।

दुनिया की इन रहस्यमयी झीलों के नाम हैं लोच नेस (इंगलैंड), हानास (चीन), जेगरजिनाकी (पौलैंड), लाबिनकोर (रूस), कोलकोल (कजाखस्तान) और चैम्पलैन (अमरीका)।

सवाल यह पैदा होता है कि आखिर क्यों ये सारी झीलें रहस्यमयी बनी हुई हैं? वास्तव में यह सारी झीलें इसलिए रहस्यमयी हैं क्योंकि उनमें ऐसे दैत्याकार जीवों को देखा जा चुका है जिनसे हमारी यह दुनिया एकदम अनजान है।

चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से

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लोच नेस झील

पहला मामला 3 युवतियों का है जो लोच नेस झील के पास ही बने एक होटल की सबसे ऊपरी मंजिल पर स्थित एक कमरे में ठहरी हुई थीं। कैटरीना मरै, शैरन बालटेन और सेलिना नामक ये लड़कियां घूमने के लिए वहां आई हुई थीं।

चांदनी रात में तीनों सहेलियों की आंखों ने जो कुछ देखा वह यकीन करने वाला नहीं था। पहले तो तीनों को भ्रम हुआ कि लोच नेस झील में से कोई नया टापू उभर रहा है किन्तु कुछ ही क्षणों में तीनों को लगा कि झील की गहराइयों से निकल कर जो बाहर आ रहा था वह कोई वेजान चट्टानी टापू नहीं था बल्कि कोई प्राणवान वस्तु थी।

तीनों सहेलियों ने जो देखा था वैसा ही देखने का दावा पहले भी कई लोग कर चुके थे। लौच नेस में देखे जाने वाले विशाल दैत्य जैसे जीव को एक नाम भी दिया जा चुका था और वह था नेस्साई।

नेस्साई नामक यह रहस्यमयी जीव आज भी पहेली बना हुआ है। इस जीव की खोज में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से कई बार व्यापक अभियान भी चलाया गया मगर इससे कुछ हासिल नहीं हुआ।

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चीन की हासान झील

लोच नेस जैसे विशालकाय विचित्र जीव को देखने का दावा चीन की हानास झील के आसपास बसने वाले लोग भी करते हैं। यह झील चीन के चिनजियांग प्रांत में कई सौ मील के दुर्गम जंगली क्षेत्र में फैली है।

1980 में हालास झील में कभी-कभी दिखने वाले डायनासोर जैसे जीव की खोज में जिनजियांग यूनिवर्सिटी के टैक्नीशियनों ने एक बड़ा अभियान चलाया था।

इस अभियान के अंतर्गत यूनिवर्सिटी के टैक्नीशियनों ने सघन और दुर्गम जंगली क्षेत्र में फैली झील में करीब 500 मील की यात्रा एक स्टीमर पर तय की और कई जगह शक्तिशाली दूरबीनों से लैस उपकरणों को झील की गहराइयों में उतारा।

आखिर झील की गहराइयों में डाली गई दूरबीन की श्रेणी में वह चीज आ गई जिस चीज की तलाश में चीनी टैक्नीशियन जुटे थे। वह सब स्तब्ध करने वाला था। उस विशाल जीव का आकार किसी बड़े समुद्री जहाज जितना था।

वह विशाल जीव केवल कुछ क्षण के लिए झील में डाली गई दूरबीन की श्रेणी में रहा और फिर तेजी से डुबकी लगाकर अनंत गहराइयों में कहीं गुम हो गया। इस विशाल विचित्र जीव को चीनी टैक्नीशियनों के दल ने पुनः ढूंढने की बेहद कोशिश की मगर वह नहीं मिला।

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पोलैंड की जेगरजिनाकी झील

चीन के बाद अब पोलैंड की जेगरजिनाकी झील में नजर आने वाले विचित्र जीव की बात करते हैं। यह झील राजधानी वारसा के करीब है और अपने अंदर अनेक रहस्य समेटे है।

इसमें डायनासोर जैसे जीवों को देखने की बात लम्बे समय से सुनने में आती रही है। चश्मदीदों के अनुसार बहुत बड़े काले सिर वाले इस विशाल जीव के कान किसी गिलहरी जैसे थे।

1982 में तो जेगरजिनाकी झील में नहाने के लिए उतरे दो छात्रों का बाकायदा इस जीव में आमना-सामना हो गया था। छात्रों को ऐसा लगा जैसे अचानक कोई दानव जेगरजिनाकी झील में से बाहर निकल आया हो।

काले सिर और गिलहरी जैसे कानों वाले उस विशालकाय जीव की गर्दन की ऊंचाई ही कम से कम 60 फुट से ज्यादा थी।

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रूस की लाबिनकोर झील

रूस के एक खोजी लेखक अनोनोले पानकोव ने तो लाबिनकोर झील में दिखने वाले जीवों पर लम्बी रिसर्च की थी। उनके अनुसार 1959 के आसपास झील में एक विशाल जीव को देखे जाने की घटनाएं बहुत बड़ी संख्या में रिकार्ड की गई थीं।

वह जीव अपने मुख से किसी बच्चे के रोने जैसी तेज आवाज निकालता था और उसकी गर्दन किसी मीनार सी थी और रंग स्लेटी था। उनके अनुसार यह जीव करोड़ों साल पहले धरती से गायब हो चुके डायनासोरों की ही किसी नस्ल का हो सकता था।

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कोलकोल झील

कजाखस्तान के अलमायटा शहर में मौजूद कोलकोल झील में भी डायनासोर जैसे जीव को दर्जनों बार देखा गया है। झील की गहराई में उतरे गोताखोर उस जीव को भले ही नहीं जीव का ढूंढ सके लेकिन उन्होंने इस पहेली को काफी क चित्र हद तक सुलझा लिया कि वह आखिर गायब कहां हो गया था?

गोताखोर उसके तल में बड़ी दरारों को तलाशने में सफल रहे थे। इनके नीचे ही कहीं अंधेरी दुनिया में ही शायद उस जीव ने अपने छिपने की जगह बना रखी थी। वहां तक पहुंचना काफी मश्किल था।

अमरीका की झील चैम्पलेन

अमरीका की रहस्यमय झील चैम्पलेन भी एक दैत्य जैसे जीव का घर है। इस विशाल दैत्य जैसे जीव को अमेरिका लोगों ने चैम्प का नाम दे रखा है।

इसकी मौजूदगी को लेकर लेखक जोसफ जारिनाकी ने बाकायदा पुस्तक ‘चैम्प दी लीजैंड‘ लिखी जिसमें चैम्प को देखे जाने के लगभग 200 मामलों का विवरण दिया गया।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए बासी चावल खाने के चमत्कारी फायदों के बारे में!!

चावल खाना भला किसे अच्छा नहीं लगता? चावल खाना सबको पसंद है। कई बार हमारे घर में रात के पके चावल बच जाते हैं और हम उन्हें बेकार समझकर या तो जानवरों को खिला देते हैं या फिर फेंक देते हैं। लेकिन ये बासी चावल शरीर के लिए अत्यंत फायदेमंद होते है।

दरअसल बासी चावल माइक्रो-न्यूट्रीएंट्स और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। इसमें बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके इस्तेमाल से कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी दूर किया जा सकता है।

चलिए जानते इस पोस्ट के माध्यम से बासी चावल खाने के चमत्कारी फायदों के बारे में:-

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जब आपका चावल खाने का मूड नहीं हो तो उसे फ्रिज में स्टोर कर के रख दें। ध्यान रखें कि आप चावल को मिट्टी के बर्तन में ढक कर रख दें और फिर अगले दिन उसका सेवन करें।

  • बासी चावल का उपयोग करने से डाइजेस्टिव सिस्टम स्वस्थ रहता है। साथ ही इससे शरीर का तापमान भी नियंत्रण में रहता है। एक दिन पहले के बने चावल का इस्तेमाल आप दोपहर तक कर सकते हैं।
  • फाइबर की मात्रा चावल में अधिक पाई जाती है। इसके सेवन से पेट से जुड़ी समस्या जैसे कब्ज, गैस, पेट दर्द आदि से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • बासी चावल के उपयोग से आप फ्रेश फील करेंगे। साथ ही आपके शरीर को भरपूर एनर्जी मिलेगी।
  • बासी चावल खाने से आप अल्सर की प्रॉब्लम से निजात पा सकते है। ये घाव को सही करने में भी बहुत फायदेमंद होता है।
  • प्रातः चावल का इस्तेमाल करने से आपको चाय और कॉफी पीने की इच्छा नहीं होगी। अगर आपको चाय और कॉफी की लत है तो सुबह उठकर चावल खाने से आपकी ये लत कुछ ही दिनों में कंट्रोल हो जाएगी।

एक स्टडी के अनुसार, इसमें माइक्रो-न्यूट्रीएंट्स और कई जरूरी मिनरल्स होते हैं। ऐसे में हर रोज सुबह बासी चावल खाना फायदेमंद है।

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आखिर क्यों कुत्तों को चॉकलेट नहीं खिलानी चाहिए?

चॉकलेट का नाम सुनते ही हमारे मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि यही चॉकलेट कुत्तों के लिए हानिकारक हो सकती है। आज की हमारी इस पोस्ट में हम जानेंगे कि आखिर कुत्तों को चॉकलेट क्यों नहीं खिलनी चाहिए। तो चलिए जानते हैं:-

दरअसल चॉकलेट में थियोब्रोमाइन नाम का रसायन पाया जाता हैं। यह कैफीन की तरह ही होता है, जो कुत्ते के लिए बहुत नुकसानदेह होता है। यह मुख्य रूप से दिल, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और गुर्दे को प्रभावित करता है।

इसके लक्षणों का पता 4 से 24 घंटों के बाद पता चलता है और चॉकलेट की मात्रा के आधार पर असर होता है। थियोब्रोमाइन सामग्री चॉकलेट में कोको सामग्री से संबंधित है। चॉकलेट जितनी डार्क होगी, उतनी ही नुकसानदायक होगी।

इसीलिए चॉकलेट खाने के बाद कुत्ते को बहुत ज्यादा प्यास लग सकती है, पेट खराब हो सकता है, उसके दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है, उसे दौरे भी पड़ सकते हैं। खासतौर से डार्क चॉकलेट से कुत्ते की मृत्यु भी हो सकती है।

क्या करें यदि कुत्ता चॉकलेट खा ले?

यदि आपका कुत्ता किसी भी प्रकार का चॉकलेट खाता है तो उपचार आवश्यक हो सकता है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके अपने पशुचिकित्सा से संपर्क करें।

यदि आप उसे बता सकते हैं कि आपके कुत्ते ने कितना चॉकलेट खाया है, यह किस तरह का चॉकलेट था (जैसे रैपर बहुत उपयोगी हो सकते हैं) तो यह जानने में आसानी होगी कि कुत्ते किस तरह के उपचार की आवश्यकता है। ज्यादातर मामलों में पशुचिकित्सक कुत्ते को उल्टी करवा देता है।

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अपने कुत्ते के खाने में आप ये चीज़े दे सकते हैं:- पीनट बटर, चीज़, चिकन, योगर्ट , गाजर , कददू, हरी सेम(बीन्स), अंडे, सैलमन, शकरकंदी, सेब, ओटमील।

जानिए सर्दी में रेल की पटरी पर क्यों लगाया जाता है डेटोनेटर?

आपने अक्सर सर्दी के मौसम में देखा होगा कि रेल की पटरी पर कहीं-कहीं बटन के जैसी कोई चीज लगी होती है, इसे ‘डेटोनेटर‘ कहते हैं। दरअसल जब भी सर्दी का मौसम आता है तो सर्दी के साथ कोहरे का आगमन भी हो जाता है।

कोहरे के साथ ही ट्रेन के लेट होने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। इस मौसम में रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर का इस्तेमाल भी शुरू हो जाता है, जिससे लोको पायलट को काफी मदद मिलती है। आज हम इस पोस्ट में जानेगें डेटोनेटर क्या होते हैं और इसका क्या इस्तेमाल होता है, तो आइए जानते हैं :-

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क्या होते हैं डेटोनेटर?

डेटोनेटर एक तरह के विस्फोटक होते हैं और इन्हें ट्रेन के लिए इस्तेमाल होने वाली माइंस भी कहा जाता है। यह एक छोटे बटन की तरह होते हैं और जैसे ही उस पर से ट्रेन गुजरती है तो यह जोर से आवाज़ करते हैं। एक तरह से इनमें विस्फोट होता है, लेकिन सिर्फ आवाज़ ही होती है।

अब सवाल यह है कि आखिर रेलवे इन विस्फोटक का इस्तेमाल क्यों करती है और क्या इससे ट्रेन को कोई नुकसान नहीं होता? इसका जवाब ये है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल करता है और यह दुर्घटना से बचने के लिए या फिर कोहरे आदि में इस्तेमाल किया जाता है।

कैसे होता है उपयोग

जैसे ही रेलवे कर्मचारियों को रेलवे ट्रैक में कुछ खराबी का पता चलता है और ट्रेन को रोकना जरूरी हो जाता है, ऐसे में डेटोनेटर का उपयोग किया जाता है और खराब ट्रैक से कुछ मीटर पहले ही इसे लगा दिया जाता है।

ये डेटोनेटर्स माइंस की तरह काम करते हैं और जैसे ही ट्रेन का पहिया इससे गुजरता है तो आवाज़ होती है, जैसे माइंस में ब्लास्ट होता है।

इस आवाज को सुनकर ट्रेन का ड्राइवर समझ जाता है कि आगे कुछ खतरा है और ट्रेन के ब्रेक लगा देता है। इस स्थिति में एक के बाद दो-तीन डेटोनेटर्स लगाए जाते हैं, जिससे लोको पायलट पहले से सतर्क हो जाता है और ट्रेन की स्पीड को कम कर देता है। इस तरह खराब टैक से पहले गाड़ी रोक दी जाती है। आम स्थिति में इसे 600 मीटर पहले ही लगा दिया जाता है।

जब ज़्यादा कोहरा होता है तब भी इसका उपयोग किया जाता है। क्योंकि ज्यादा कोहरे में लोकोपायलट को बोर्ड आदि देखने में दिक्कत होती है। ऐसी स्थिति में जब भी कोई स्टेशन आता है तो इससे पहले ये डेटोनेटर्स लगा दिए जाते हैं।

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जानिए सूखे मेवों के चमत्कारी फायदों बारे में !!

मेवा या ख़ुश्क मेवा एक खाद्य श्रेणी है जिसमें सूखे हुए फल और फलों की गिरियां आती हैं। ड्राई फ्रूट किसी एक फल का नही होता बल्कि ऐसे कई सारे फल हैं जिनको हम सूखे मेवों के रूप में खाते हैं जिनमें काजू, बादाम, पिस्ता आदि प्रमुख हैं।

सूखे मेवों में विटामिन, प्रोटीन फाइबर, फाइटो न्यूट्रियंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट और बहुत से जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। आज के इस लेख में हम जानेगें सूखे मेवों के चमत्कारी फायदों के बारे में

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पिस्ता

पिस्ता हमारे लिए बहुत फायदेमंद होता है। पिस्ता के बीज पोषक तत्वों और फाइबर आहार का स्रोत होते हैं। इन छोटे मेवों में कई विटामिन, खनिज, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और जरूरी फैटी एसिड होते हैं।

अन्य सूखे मेवों की तुलना में पिस्ता में फैट और कैलोरी की मात्रा कम होती है। पिस्ता में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है। फाइबर से हमें लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास होता है।

इस वजह से हम अधिक नहीं खा पाते और कम खाने की आदत से हमारा वजन नियंत्रित रहता है। पिस्ता वजन को नियंत्रित रखता है। इससे कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुडी परेशानियों से बचा जा सकता है।

बादाम

बादाम को भिगो कर खाने से दिमाग तेज होता है। इससे दांत और हड्डियों को ताकत मिलती है। भीगे हुए बादाम खाने से इसें मौजूद विटामिन ई एक एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर काम करता है।

बादाम में मौजूद यह तत्व उम्र और सूजन को रोकता है जो कि फ्री रेडिकल से होता है। सूखे हुए बादाम के मुकाबले भिगे हुए बादाम एंजाइम रिलीज करने में मदद करते हैं, जो कि पाचन प्रकिया के लिए अच्छे होते हैं।

बादाम सबसे हेल्दी मिड-मील स्नैक्स होते हैं। बादाम के अंदर मोनोसैचुरेटेड फैट्स मौजूद होते हैं जो कि भूख पर रोक लगाते हैं और भर हुआ रखते हैं। इसके साथ आप वजन बढ़ने पर भी रोक लगा सकते हैं।

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काजू

काजू, दुनियाभर में सबसे लोकप्रिय सूखे मेवे में से एक है। काजू में प्रोटीन, खनिज, आयरन, फाइबर, फोलेट, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम, एंटी-ऑक्सीडेंट, मिनरल और विटामिन के गुण पाए जाते हैं, जो सेहत को कई तरह की परेशानियों से बचाने में मददगार हैं।

काजू को डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। काजू में पॉलीफेनोल्स और कैरोटेनॉयड्स नामक एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए कई मामलों में बेहद फायदेमंद होते हैं।

अखरोट

फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर अखरोट यानी वॉलनट सिर्फ ब्रेन हेल्थ और मेमोरी के लिए ही नहीं बल्कि हमारी संपू्र्ण हेल्थ के लिए लाभकारी है। अपने गुणों की बदौलत इसे विटामिन्स का राजा कहा जाता है।

आप अगर अखरोट को भिगोकर खाते हैं तो यह और भी अधिक फायदेमंद होता है अखरोट का सेवन हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है।

जो ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और आपके हार्ट को स्वस्थ रखता है। अखरोट मधुमेह, मोटापा और दिल की बीमारियों को दूर करता है। नींद न आने की परेशानी है तो रोजाना अखरोट का सेवन जरूर करें।

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जानिए क्या है पोंगल का महत्व और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य!!

पोंगल दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय त्यौहार है, जिसे 14 से 17 जनवरी के बीच मनाया जाता है। लोहड़ी की तरह इसे भी किसानों द्वारा फसल के पक जाने की खुशी में मनाया किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि ये त्यौहार संपन्नता को समर्पित है। कहते हैं कि इस त्यौहार का इतिहास 1000 साल से भी पुराना है। आज इस पोस्ट में हम आपको इस त्यौहार के महत्व और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलए जानते है :-

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पोंगल का महत्व

जहां उत्तर भारत में लोहड़ी और मकर संक्रांति का महत्व है उसी तरह दक्षिण भारत में पोंगल का एक अलग ही महत्व है। कहा जाता है कि इसे दक्षिण भारत में नए साल के रूप भी मनाया किया जाता है।

क्योंकि खेती-बाड़ी करने वाले किसाने के लिए गाय-बैलों का भी बड़ा महत्व है, इसलिए पोंगल के त्यौहार पर इनकी भी पूजा की जाती है। किसान इस दिन अपनी बैलों को स्नान कराकर उन्हें सजाते हैं।

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कैसे मनाया जाता है यह त्यौहार?

चार दिन तक चलने वाले इस त्यौहार को तमिलनाडु में नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्यौहार तमिल महीने ‘तइ’ की पहली तारीख पहली तारीख से शुरू होता है। इस त्यौहार में  इंद्र देव और सूर्य की उपासना की जाती है।

पोंगल का त्यौहार संपन्नता को समर्पित है। इसके पहले दिन लोग सुबह उठकर स्नान करके नए कपड़े पहनते हैं और नए बर्तन में दूध, चावल, काजू और गुड़ की चीजों से पोंगल नाम का भोजन बनाते हैं।

सूर्य को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद को “पगल” कहते हैं पूजा के बाद लोग एक दूसरे को पोंगल की बधाई देते हैं।

भोगी पंडिगाई – पहला दिन

इस त्यौहार के पहले दिन को भोगी पंडिगाई कहते हैं। इस दिन घरों की साफ-सफाई की जाती है और जो चीजें पुरानी या टूटी-फूटी होती है उसे बाहर कर दिया जाता है। फिर इसके बाद घरों सजाया जाता है।

आंगन और घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाई जाती है। इस दिन रात के समय घर के सभी सदस्य अलाव जलाकर एकत्रित होते हैं और रातभर भोगी कोट्टम बजाते हैं जो एक तरह का ढोल होता है। इसमें भगवान का आभार व्यक्त किया जाता है।

थाई पोंगल – दूसरा दिन

इस त्यौहार का दूसरा दिन ही सबसे खास माना जाता है। इस दिन मिट्टी के नए बर्तन में नई फसल से पैदा होने वाले चावल को दूध, गुड़ और मेवे के साथ मिलाकर खीर तैयार करते हैं। फिर इसे सूर्य भगवान को भोग के रूप में अर्पण किया जाता है। जिसे बाद में प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

मट्टू पोंगल – तीसरा दिन

इसके तीसरे दिन खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले गाय और बैलों को स्नान कराकर सजाया और संवारा जाता है। रंग बिरंगे फूल और मालाओं से बैलों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है। तमिल मान्यताओं के मुताबिक मट्टू भगवान शिव की सवारी है।

कानुम पोंगल – चौथा दिन

कानुम पोंगल का आखिरी दिन होता है। इस दिन पर घर को आम और नारियल के पत्तों से घर पर तोरण बनाया जाता है। महिलाएं रंगोली बनाती हैं और नए-नए कपड़े पहनकर एक दूसरे को पोंगल की शुभकामनाएं देती हैं।

ये है दुनिया भर की 20 रचनात्मक मूर्तियां, जिन्हें देखकर आप अपने दाँतों तले उँगलियाँ दबा लेंगें !!

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ख़ूबसूरती के मामले में दुनिया में इतनी चीज़े है कि हमारा जीवन कम पड़ जाएगा पर ये लिस्ट ख़तम नहीं होगी। अब इसमें से बहुत सी जगह कुदरती है और कुछ इंसानों द्वारा निर्मित की गयी है। आज हम इस लेख में आपको दिखाने जा रहे हैं दुनिया की ऐसी 20 रचनात्मक मूर्तियां, जो क्रीएटिविटी और बौद्धिक क्षमता का अनूठा नमूना है।

तो चलिए देखते हैं :-

1) सैल्मन स्कल्पचर, पोर्टलैंड, ओरेगन, यूएसए

यह एक ओरेगोनियन मूर्तिकार कीथ जेलम (Keith Jellum) द्वारा निर्मित की गई है।

2) एक्सपेंशन, न्यूयॉर्क, यूएसए

इस मूर्ति को पेज ब्रेडले (Paige Bradley) द्वारा चित्रित किया गया है।

3) शार्क, ऑक्सफोर्ड, यूके

इसे मूर्तिकार जॉन बकली (John Buckley) द्वारा डिजाइन किया गया था।

4) द अननोन ऑफिसियल , रेकजाविक, आइसलैंड

इस अद्वितीय प्रतिमा का निर्माण 1994 में Magnús Tómasson द्वारा किया गया था।

5) केल्पी, ग्रेंजमाउथ, यूके

इसका निर्माण मूर्तिकार एंडी स्कॉट (Andy Scott) द्वारा किया गया है।

6) मैन हैंगिंग आउट, प्राग, चेक रिपब्लिक

इसे मूर्तिकार David Černý द्वारा निर्मित किया गया है।

7) हिप्पो मूर्तियां, ताइपे, ताइवान

इसे बोरेडपांडा (Boredpanda) द्वारा बनाया गया है ।

8) लाइफ साइज स्टैटूज़ पोर्ट्रे सीन फ्रॉम द वर्ल्ड वॉर, इसाबात, तुर्की

9) मैन एट वर्क, ब्रातिस्लावा, स्लोवाकिया

इस का निर्माण Viktor Hulík ने किया है।

10) इगुआना पार्क, एम्स्टर्डम, नीदरलैंड्स

इन प्रतिमाओं को हंस वैन हाउवेलिंगन (Hans van Houvelingen) द्वारा बनाया है।

11) स्पाइडर, टेट मॉडर्न, लंदन, यूके

इस कलाकृति का निर्माण 1994 में अमेरिकी कलाकार लुईस बुर्जुआ ( Louise Bourgeois) द्वारा बनाई गई थी जोकि 9 मीटर ऊँची है।

12) लेस वोयाजर्स, मार्सिले, फ्रांस

इस मूर्ति को फ्रांसीसी कलाकार ब्रूनो कैटलानो (Bruno Catalano) बनया है।

13) डी वार्तकापोएन, ब्रुसेल्स, बेल्जियम

1985 में बेल्जियम के कलाकार टॉम फ्रैंटजेन (Tom Frantzen) द्वारा बनाई गई थी।

14) द नॉटेड गन, टर्टल बे, न्यूयॉर्क, यूएसए

इस का निर्माण कार्ल फ्रेड्रिक रॉयटर्सवार्ड और रिंगो स्टार (Carl Fredrik Reuterswärd and Ringo Starr) द्वारा किया गया है

15) कैटल ड्राइव, डलास, टेक्सास, यूएसए

इसे रॉबर्ट समर्स (Robert Summers) द्वारा बनाया गया था।

16) रुंडल मॉल पिग्स, एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया

इसे दक्षिण अफ्रीका में जन्मे कलाकार मार्गुराइट डेरिकोर्ट (Marguerite Derricourt) द्वारा बनाया गया था

17) ब्लैक घोस्ट, क्लेपेडा, लिथुआनियाई

कांस्य की मूर्ति सवाजुनास जर्कस और सर्गेजस प्लॉटनिकोवा (Svajunas Jurkus and Sergejus Plotnikovas) द्वारा बनाई गई है।

18) ब्रेक थ्रू फ्रॉम योर मोल्ड, फिलाडेल्फिया, पेनसिल्वेनिया, यूएसए

इस प्रतिमा का निर्माण ज़ेनोस फ्रूडाकिस (Zenos फ्रूडकीस) ने किया था ।

19) द मौनमेंट ऑफ़ एन एनोनिमस पस्सर्बी, व्रोकला, पोलैंड

इसे जेरजी कलीना (Jerzy Kalina) द्वारा बनाया गया है।

20) पीपल ऑफ़ द रिवर, सिंगापुर

इसका निर्माण चोंग फाह चोंग (Chong Fah Cheong) द्वारा किया गया है

Top 20 Most Creative Statues Around the World 6

जानिए पढ़ाई को मज़ेदार बनाने के कुछ टिप्स!!

पढ़ाई करते समय अक्सर ऐसा होता है कि पढ़े हुए शब्द याद नहीं रहते या फिर हम पढ़ाई से बोर होने लगते हैं जिससे पढ़ाई से मन ऊब जाता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहें हैं कि आखिर कैसे हम पढ़ाई को मज़ेदार बना सकते हैं, चलिए जानते हैं:-

स्टडी करते समय म्युजिक सुनिए

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जब भी बच्चे स्टडी शुरू करते हैं तो जल्दी ही उनका माइंड अपनी स्टडीज़ में कंसन्ट्रेट नहीं कर पाता है। ऐसे में आप पढ़ते समय अपना मनपसंद म्यूजिक सुन सकते हैं।

ऐसा करने पर आपका कंसंट्रेशन लेवल काफी बढ़ सकता है। यदि आपको लगता है कि म्युजिक सुनने से आपका ध्यान भटकता है, तो ब्रेक के समय में म्युजिक सुनें।

अपने पास स्नैक्स रखें

पढ़ाई के दौरान स्नैक्स खाने से आपका मोटीवेशन बढ़ता है और आपके अंदर ऊर्जा भी बनी रहती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि स्नैक्स हेल्दी हों।

ये कुछ टिप्स हैं जो स्टडी को रोचक बना सकते हैं

  • आप ग्रुप में या पार्टनर के साथ बैठकर स्टडी कर सकते हैं।
  • नए शब्दों को समझने और उन्हें दिमाद में बनाए रखने के लिए स्क्रैबल खेलें।
  • लिखने या हाईलाइट करने के लिए कलरफुल स्टेशनरी का इस्तेमाल करें।
  • पढ़ाई के लिए एक अलग जगह खोजें।
  • डिफरेंट कॉन्सेप्ट सीखने के लिए वीडियो देखें।
  • एक नए आइडिया या कॉन्सेप्ट को समझकर खुद को एक्सप्लेन करें और सुनें।
  • 30 से 45 मिनट के छोटे-छोटे टाइम स्लॉट में पढ़ाई करें।
  • नए कॉन्सेप्ट को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर देखें और जहां संभव हो उन्हें अप्लाई करें।
  • कोई सब्जेक्ट बोरिंग लगने लगे तो दूसरे सब्जेक्ट पर स्विच करें और ब्रेक के बाद वापस उस टॉपिक पर आएं।
  • खुद को याद दिलाते रहें कि आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना है।

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जानिए किसने उड़ाई सबसे पहली पतंग!!

मकर संक्रांति पर भारत में पतंग उड़ाने का रिवाज है। कहीं-कहीं सामूहिक पतंग उत्सव आयोजित किए जाते हैं तो कहीं लोग अपने घरों की छतों पर ही पतंग उड़ाना पसंद करते हैं।

आसमान रंग-बिरंगी खूबसूरत पतंगों से भर जाता है। भारत में प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव भी मनाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली बार पतंग आई कहाँ से?

वैसे तो पतंगों की उत्पत्ति या इतिहास के बारे में अधिक लिखित जानकारी नहीं है। माना जाता है पतंग उड़ाने के सबसे पहले लिखे गए लेख चीनी हान राजवंश के सेनापति हान हसिन से संबंधित थे।

हालांकि, इसके आविष्कार को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। यह भी कहते हैं कि सबसे पहले इसका आविष्कार चीन में किया गया था और पूर्वी चीन के प्रांत शानडोंग को पतंग का घर कहा जाता है।

एक पौराणिक कथा से पता चलता है कि एक चीनी किसान अपनी टोपी को हवा में उड़ने से बचाने के लिए उसे एक रस्सी से बांध कर रखता था और इसी दौरान किसी तरह से पतंगें बना कर उड़ाने की शुरूआत हुई।

Know who flew first kite

रेशम के कपड़े से बनती थी पतंग

एक और मान्यता के अनुसार 5वीं सदी ईसा पूर्व में चीनी दार्शनिक मोझी और लू बान (गोंगशु बान) ने इसका आविष्कार किया था। तब पतंगों को बनाने के लिए बांस तथा रेशम के कपड़े का इस्तेमाल किया जाता था।

प्राचीन और मध्ययुगीन चीनी स्रोतों में वर्णित है कि पतंगों को दूरी मापने, हवा का परीक्षण, सिग्नल भेजने और सैन्य अभियानों में संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

सबसे पहली चीनी पतंग फ्लैट यानी चपटी और आयताकार हुआ करती थी। फिर बाद में पतंगों को कई रूपों तथा आकारों में तैयार करने तथा तरह-तरह से सजाया जाने लगा था और कुछ में तो सीटी को भी लगाया जाता था ताकि उड़ते वक्त संगीत सुनाई दे।

भारत में कब आई पतंग

ज्यादातर लोगों का मानना है कि चीनी यात्री फा हियान और स्यून त्सांग पतंग भारत में लाए। यह कागज और बांस के ढांचे से बनी होती थी। लगभग सभी पतंगों का आकार एक जैसा ही होता था। आज पतंग उड़ाना भारत में काफी लोकप्रिय है।

बड़े और बच्चे समान रूप से इसे पसंद करते हैं। देश के विभिन्न भागों में तो कुछ विशेष त्यौहार एवं वर्ष के कुछ महीनों में पतंगबाजी या काइट उड़ाने की प्रतियोगिता में भी लोग हिस्सा लेते हैं।

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भारत के प्रसिद्ध पतंग उत्सव

गुजरात : गुजरात का काइट उत्सव विश्व प्रसिद्ध है। मकर संक्रांति को इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग घर की छतों पर तरह-तरह के आकार की पतंगें उड़ाते हैं।

जनवरी में ही हर साल वहां अंतर्राष्ट्रीय काइट फेस्टिवल का आयोजन भी होता है। इसे देखने के लिए जापान, मलेशिया, सिंगापुर, रूस आदि जगहों से बड़ी संख्या में पर्यटक भी आते हैं।

जयपुर : जयपुर में काइट उत्सव को बड़े जश्न से मनाया जाता है। यह महोत्सव मकर संक्रांति से शुरू होता है जो आगामी 3 दिन तक चलता है। जयपुर के पोलो ग्राऊंड में दुनियाभर के सबसे अच्छे पतंगबाज बारी-बारी पतंगों को उड़ाकर आपना कौशल प्रदर्शित करते हैं।

तेलंगाना : तेलंगाना में भी पतंग महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है। जनवरी में आयोजित इस पतंग महोत्सव में 40 से अधिक देशों के लोग हिस्सा लेते हैं।

साथ ही यहां पर खाने-पीने के स्टॉल और प्रदर्शनियां भी लगती हैं। इस आयोजन में एक से बढ़कर एक आकृति की पतंग से आसमान अद्भुत दिखने लगता है।

पंजाब : पंजाब में काइट फैस्टिवल वसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है और इस दिन सभी लोग एक से बढ़कर एक रंगीन पतंग उड़ाते हैं और पेंच भी लड़ाते हैं।

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