ऐसे अजीबोगरीब गांव जिनके बारे में जानकर आप भी कहेंगे, क्या यह सच है !!

दुनिया में अजीबोगरीब चीजें देखने को मिलती हैं। इतना ही नहीं बल्कि इन अजीबोगरीब चीजों में लोगों के साथ-साथ कुछ जगहें भी आती है।

आज हम कुछ ऐसे ही गांव के बारे में बात कर रहें है, जो अन्य जगहों से काफी अलग है। इन गांव के बारे में जान कर शायद हर कोई हैरानी में पड़ जाएंगा और सोचने पर मजबूत हो जाएगा कि ऐसा भी कभी होता है।

आइये जानते हैं :-

एक किडनी वाला गांव

नेपाल मेें एक गांव इसलिए मशहूूर है क्योंकि इस गांव में हर इंसान एक किडनी के सहारे है। यहां के लोग अपनी एक किडनी अपना पेट पालने के लिए केवल 2000 में बेच देते हैं। तब से इस गांव का नाम अब ‘किडनी वैली’ पड़ गया है। पहले इस गांव का नाम ‘होकसे’ हुआ करता था।

यह भी पढ़ें :-मुर्दों के शहर के नाम से जाना जाता है ये रहस्यमयी गांव

बिना दरवाज़े वाला गांव

महाराष्ट्र में शनि सिंगनापुर को बिना दरवाजे का गांव कहा जाता है। यहां रहने वाले लोगों का मानना है कि इस जगह पर शनिदेव की विशेष कृपा है, जिसके चलते इस गांव में कोई चोरी नहीं होती। इसीलिए यहां कोई अपने घर में दरवाजा भी नहीं लगवाता।

यह भी पढ़ें :- दुनिया का सबसे लम्बा गांव बसा है पोलैंड में

ये गांव है पूरा नीला

दुनिया में सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है स्पेन और यहाँ पर है जुज़कार गांव स्पेन में मौजूद ‘जुज़कार’ जोकि पूरा का पूरा नीला है। यहां रहने वाले हर निवासी का घर नीला है।

2011 में सोनी पिक्चर्स की ओर से एक थ्रीडी फिल्म के लिए यहां 12 युवाओं ने अपने घरों को नीले रंग से नहला दिया। उसके बाद धीरे-धीरे सभी ने अपने घरों को नीला कर दिया।

यह भी पढ़ें :- बिठूर गाँव जोकि ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह है l

गांव का अपना सूरज

इटली में बना यह गांव ‘विगानेला’ एक गहरी घाटी में बसा हुआ है जिसके चलते यहां सूरज नहीं दिखाई देता और न ही धूप आती है।

इस समस्या को दूर करने के लिए यहां के इंजीनियर्स और आर्किटेक्‍ट्स ने एक बहुत बड़ा आइना लगाया ताकि धूप रिफ्लेक्‍ट होकर गांव तक पहुंच सकें।

यह भी पढ़ें :- जानिए रहस्य एक रात में गायब हो गए गांव का 

बिना सड़क का गांव

ये है नीदरलैंड का गिएथ्रून गांव है। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आने-जाने के लिए कोई सड़क नहीं है बल्कि लोग नहरों और नाव से इस गांव तक पहुंचते है।

यह भी पढ़ें :- मलाणा गाँव- रहस्यमयी व सबसे पुराना गणतंत्र

सोने वाला गांव

यह गांव कज़ाकिस्तान में है। इस गांव की अजीबोगरीब बात यह है कि यहां पर रहने वाले लोगों को अधिक सोने की बीमारी है जिसके चलते पूरा गांव सोता ही रहता है।

यह भी पढ़ें :- उत्तराखंड का एक गांव, जहां इंसान नहीं सिर्फ भूत रहते है!!

हर कोई है यहां बौना

चीन के ‘सीच्वान’ राज्य में एक ऐसा गावं हैं जहां के लगभग आधे निवासियों का क़द, लोगों के औसत क़द की तुलना में बहुत कम है। इस गांव में रहने वाले 80 में से 36 लोगों के कद ‘तीन फीट दस इंच’ से लेकर ‘दो फीट एक इंच’ के बीच है।

यह भी पढ़ें :-

इटली का गायोला आइलैंड है सबसे खूबसूरत और शापित

दुनिया भर में इटली की पहचान खूबसूरत और बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट के रूप में होती है लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि यहां एक ऐसा शापित द्वीप भी है, जिसे खरीदने वाले की या तो मौत हो जाती है या फिर उनके परिवार के साथ कुछ बहुत बुरा होता है। उस द्वीप का नाम है ‘गायोला’।

आज इस  पोस्ट में हम आपको इसी शापित द्वीप के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइये जानते हैं :-

इटली के नेपल्स की खाड़ी में स्थित इस छोटे द्वीप की कहानी कितनी भयानक है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे खरीदने वाले सभी लोगों की दुनिया ही उजड़ गई। इस द्वीप की प्राकृतिक खूबसूरती किसी को भी अपना दीवाना बना सकती है।

इसकी खूबसूरती को देखने के लिए काफी संख्या में सैलानी यहां आते हैं हालांकि इसकी डरावनी कहानियों के करण कोई यहां रात में नहीं रुकता और अंधेरा होने से पहले वापस लौट जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो इस द्वीप को जिसने भी खरीदा है, उसके साथ हमेशा बुरा हुआ।

कहा जाता है कि इसके मालिकों की मौत हो जाती है या फिर कई अपने बिजनस में भारी नुकसान होता है। एक के बाद एक लगातार होने वाली ‘घटनाओं के कारण इस द्वीप का शापित कहा जाने लगा है और यहां रात में कोई रुकने की हिम्मत नहीं दिखा पाता।

17वीं शताब्दी में यह द्वीप रोमन कारखानों से भरा पड़ा था। बाद में इस द्वीप का उपयोग नेपल्स की खाड़ी की रक्षा करने के लिए किया जाता था। 19वीं सदी की शुरुआत द्वीप पर मछुआरों की मदद करने वाला एक पुजारी रहता था, जिसे लोग जादूगर भी कहते थे।

1871 में एक फिशिंग कंपनी के मालिक लुइगी नेग्री ने इस द्वीप को खरीदा और इस पर एक विला बनवाया लेकिन जब उनकी कंपनी दिवालिया हो गई तो उस व्यक्ति ने इसे बेच दिया।

20वीं शताब्दी के दौरान इस द्वीप का स्वामित्व अलग-अलग लोगों के पास रहा। इस सभी को अलग-अलग परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद द्वीप को शापित कहा जाने लगा।।

1920 के दशक में द्वीप के एक स्विस मालिक हैंस ब्राउन को मृत पाया गया और उनकी लाश एक कालीन में लिपटी हुई थी। कुछ दिन बाद ही ब्राउन की पत्नी की मौत भी समुद्र में डूबने से हो गई थी।

बाद में एक अन्य मालिक ओटो ग्रुनबैक जब विला देखने गए, तब उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हो गई। इस द्वीप के अगले मालिक लेखक और दवा व्यापारी मौरिस-यवेस सैंडोज ने 1958 में स्विट्जरलैंड के मेंटल हॉस्पिटल में आत्महत्या कर ली।

जब द्वीप को जर्मन उद्योगपति बैरन कार्ल पॉल लैंगहैम ने खरीदा तो उनकी कंपनी दिवालिया हो गई। तब उन्होंने इसे प्रसिद्ध कार निर्माता कंपनी फिएट के मालिक जियानी अग्नेल्ली को बेच दी।

इसके बाद अग्नेल्ली के परिवार के कई लोगों की दुखद मौत हो गई। इस द्वीप के एक और मालिक अमेरिकी उद्योगपति जीन पॉल गेट्टी थे।

उनके बड़े बेटे ने आत्महत्या कर ली, उनके सबसे छोटे बेटे की मौत हो गई और एक अपराधियों ने उनके पोते का अपहरण कर लिया था।

द्वीप के अंतिम मालिक गियानपसक्वाले ग्रेपोन थे, जिनकी मौत जेल में हुई और उनकी पत्नी कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई। 1978 में यह द्वीप सरकार की संपत्ति बन गया और तब से यह वीरान पड़ा है।

हालांकि अभिशाप ने इसका पीछा नहीं छोड़ा है। साल 2009 में द्वीप के सामने स्थित एक विला के मालिकों की हत्या कर दी गई थी।

यह भी पढ़ें :-

कब बना था इंसान का दिमाग ? क्या आप जानते हैं आज के इंसानों के दिमाग से आधा था आकार!!

15 से 17 लाख वर्ष पूर्व अफ्रीकी होमो आबादी में आधुनिक मानव मस्तिष्क की संरचना विकसित हुई थी। इन लोगों ने पहले ही अपने पैरों पर चलना शुरू कर दिया था और यहां तक की अफ्रीका से बाहर जाना भी शुरू कर दिया था। यह दावा हाल ही में की गई एक स्टडी में किया गया है।

स्विट्जरलैंड में ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने कहा है कि अफ्रीका में जीनस होमो से पहले के पूर्वज करीब 25 लाख साल पहले उभरे थे।

तब यह सीधे भी चलते थे। लेकिन उनका दिमाग आदिम वानर जैसा ही था। तब उनका दिमाग आज के मनुष्यों से आधे आकार का होता था।

रिसर्चर टीम में बताया कि आकार के अलावा और भी कई चीजें थीं जो आधुनिक मानव मस्तिष्क से अलग थीं जैसे उनका स्थान और व्यक्तिगत मस्तिष्क क्षेत्रों का ऑगेर्नाइजेशन।

यूनिवर्सिटी के मानव विज्ञान से मार्या पोंस डी लियोन ने बताया कि मानव के मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्र वो हैं जो विचार और काम के जटिल पैटर्न की योजना और उसे लागू करने में मदद करते है।

भाषा के लिए भी यही अहम होता है। उन्होंने कहा चूंकि ये क्षेत्र मानव मस्तिष्क में काफी बड़े हैं, इसलिए आसन्न (एडजसेंट) मस्तिष्क क्षेत्र अपने स्थान से आगे चले गए हैं या आसान भाषा में कहें तो यह क्षेत्र अपने स्थान से सरव गए हैं।

रिसर्चर टीम ने 10 से 20 लाख साल पहले अफ्री जॉर्जिया और जावा में रहने वाले होमो जीवाश्मों की खोपड़ी की जांच की हैं। इनकी गणना के लिए रिसर्चर्स ने टोमोग्राफी का इस्तेमाल किया है।

इसके बाद उन्होंने जीवाश्म डाटा की तुलना वानरों और मनुष्यों के रेफरेंस डाटा से की। इसमें उन्होंने पाया कि अफ्रीका के बाहर पहली होमो आबादी जो अभी जॉर्जिया है, में वो दिमगा था जो उनके अफ्रीकी रिश्तेदारों में था। ​उनके दिमाग लगभग 17 लाख साल पहले तक विशेष रूप से बड़े या आधुनिक नहीं थे।

इसके वाबजूद भी ये लोग कई तरह के उपकरण बनाने में पूरी तरह सक्षम थे। ये यूरेशिया की नई पर्यावरणीय परिस्थितियों यानी एनवायरोमेंटल कंडीशन्स के अनुकूल थे।

सिर्फ यही नहीं, ये पशु खाद्य स्रोतों को भी विकसित कर सकते थे। इनके समूह के दूसरों सदस्यों की मदद भी ये किया करते थे। मानवविज्ञानी डी लियोन ने कहा कि मानव भाषा का शुरूआती रूप इस अवधि के दौरान विकसित होने की संभावना है।

यह भी पढ़ें :-

विटामिन डी की कमी होगी पूरी, जाने कैसे ?

विटामिन डी की कमी होने पर हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा भी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं है जो इसकी  कमी से हो सकती है। आज इस पोस्ट में जानेंगे कि विटामिन डी की कमी को कैसे पूरा कर सकते हैं।

तो चलिए जानते हैं :-

हमारा शरीर जब सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है तो यह स्वाभाविक रूप से इसका उत्पादन करता है। अगर शरीर को पर्याप्त विटामिन डी न मिले तो हड्डियों की असामान्यताएं जैसे कि ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा हो सकता है।

लेकिन गर्मी में चिलचिलाती धूप और हवा में संक्रमण होने के भय के कारण घर से बाहर नहीं जा सकते। गर्मी की धूप त्वचा जला सकती है। ऐसे में शरीर को विटामिन डी मिले भी तो कैसे?

सुबह की धूप लें

सुबह की धूप हल्की गर्माहट लिए होती है इसलिए बालकनी में बैठकर 20 मिनट धूप लें। घर की खिड़कियों के पर्दे खोल दें ताकि सुबह की धूप घर के अंदर तक आए।

खिड़की के पास बैठकर भी धूप सेंक सकते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से पर सीधी धूप न पड़े, इसका ध्यान रखें। शीशों के जरिए या बादलों वाली धूप लेना फ़ायदेमंद नहीं होता।

आहार से मिले पोषण

नियमित रूप से धूप लेने के अलावा अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें जिनसे विटामिन डी मिल सके। ऐसे आहारों में वसायुक्त मछली, नट्स, बीज, दही, मशरूम, अंडे, दलिया और दूध शामिल हैं।

खासतौर पर दूध और दही, पनीर विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं। दही या पनीर घर पर जमा हुआ ही लें। सलाद या सब्जी के तौर पर रोजाना पनीर को आहार में शामिल करने की कोशिश करें क्योंकि यह इसके साथ-साथ विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी 12, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। वहीं सब्जियों में पालक विटामिन डी का अच्छा स्रोत है।

कसरत है फ़ायदेमंद

शोध की मानें तो जो लोग हफ्ते में तीन या इससे ज्यादा घंटे दौड़ना, तैरना या बास्केटबॉल या फुटबॉल खेलने जैसा गतिभरा, चुस्त-फुर्त खेल खेलते हैं उनमें हार्ट अटैक का खतरा 22 फीसदी तक कम हो सकता है।

वहीं जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं उनमें विटामिन डी का स्तर ज्यादा रहता है। इसके साथ-साथ एचडीएल (अच्छे) कोलेस्ट्रॉल का भी स्तर अधिक रहता है।

हालांकि इस समय बाहर दोड़ना या खेलना सुरक्षित नहीं है इसलिए घर पर ही योग या एक्सरसाइज करें जैसे रस्सी कूदना, जंपिंग, पुशअप्स आदि। अध्ययन के मुताबिक हफ्ते में दो से तीन घंटे कसरत करने से विटामिन डी का स्तर बढ़ता है। चाहें तो नृत्य भी कर सकते हैं।

इस खूबसूरत वर्साय महल को बनने में लगे थे पुरे 100 साल, जाने कुछ रोचक तथ्य !!

पेरिस के निकट वर्साय पैलेस यूरोप के सबसे बड़े महलों में से एक है। इसमें 1800 कमरे हैं। इस भव्य इमारत को फ्रांस के राजा लुई चौदहवें ने अपने निवास के रूप बनावाया था। वर्साय के तर्ज पर यूरोप के कई शासकों ने अपने महलों का निर्माण करवाया था।

सेंट पीटर्सबर्ग के पश्चिम में मौजूद पीटरहोफ महल को रूसी वर्साय के रूप में जाना जाता है। फिनलैंड की खाड़ी पर स्थित इस महल का उद्घाटन रूसी जार पीटर द ग्रेट ने 1723 में किया था।

यह महल पीटर द ग्रेट के ग्रीष्मकालीन निवास के रूप में इस्तेमाल होता था। पीटरहोफ महल सैमसन फाउंटेन समेत अपने कई पानी के झरनों के लिए जाना जाता है।

इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं इस खूबसूरत महल के बारे में, तो आइये जानते हैं :-

  • इसका पहला आर्कीटैक्ट लुईस ली वाड था लेकिन जूल्स हादोंइन मानसार्ट ने 1676 में इसका काम संभाल लिया तथा इसमें दूसरी मंजिल बनाई।
  • इसकी भीतरी साजसज्जा चार्ल्स ली ब्रा की थी। इसका ‘हाल ऑफ मिरर्स’ नाम का एक लम्बा हाल है जिसके दोनों तरफ दर्पण लगे हुए हैं। बहुत खूबसूरती से चित्रित एक छत लुईस चौदहवें की उपलब्धियों को दर्शाती है।
  • सारे वर्साय में ऊंची छतें तथा बड़े-बड़े दरवाजे सोने से सजाए गए हैं जिनमें सूर्य देवता अपोलो तथा राजा लुईस के भी चिन्ह हैं जिन्हें सूर्य राजा के नाम से जाना जाता है।
  • पेड़ों की कतारों वाले विशाल बगीचे तथा तालाबों को आंद्रे ली नोत्रे ने 1400 फव्वारों, 400 नई प्रतिमाओं तथा 40 लाख ट्यूलिप्स से सजाया था।
  • फव्वारा जादुई रूप से ‘स्थिर’ दिखाई देता था जो राजा की प्रकृति के ऊपर ताकत का प्रतीक था।
  • महल में एक अत्याधुनिक थिएटर है जिसे 1769 में जैक्स-एंगे गैब्रिएल ने डिजाइन किया था।
  • फ्रांसीसी क्रांति के दौरान 6 अक्तूबर 1789 को भीड़ महल में घुस गई तथा इसकी भीतरी सज्जा को नष्ट कर दिया। इसके पुनर्निर्माण का कार्य 1837 में शुरू हुआ और तब से निरंतर जारी है।
  • वाशिंगटन डी.सी. के चौड़े रास्तों को वर्साय की नकल पर एक फ्रांसीसी आकीटैक्ट ने बनाया था।
  • वर्साय के बगीचों को कई बार बड़ा किया गया तथा अब यह 250 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में फैले हैं। पौधों, फव्वारों तथा मूर्तियों को ज्यामितीय पैटर्न्स में व्यवस्थित किया गया है।
  • यह दुनिया में सबसे बड़ा आवासीय महल और यूरोप में सबसे लंबे समय से इस्तेमाल होने वाला महल है। हेनरी प्रथम के शासन के समय से यह शाही आवास की तरह इस्तेमाल हो रहा है। इसकी आधारशिला 1078 में रखी गई। पूर्व में विंडसर कासल का इस्तेमाल एक चौकी और जेल के रूप में भी किया गया। इन दिनों यह ब्रिटिश महारानी का मुख्य निवास है। जब महारानी इस महल में निवास करती हैं तो संकेत के रूप में इसके टावर पर झंडा लहराता है।
  • वर्साय संभवतः अब तक का बना सर्वाधिक लागत वाला महल है।

यह भी पढ़ें :-

इन लोगों ने बनाये हैं अजीबोगरीब वर्ल्ड रिकॉर्ड, जिन पर यकीन करना है मुश्किल!!

दुनिया में कई तरह के लोग रहते हैं जो अपने फैशन और शौंक को पूरा करने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना अजीबोगरीब हरकतें करते रहते हैं।

वैसे तो आमतौर महिलाएं ईयररिंग्स डालने के लिए कान छिदवाती हैं, लेकिन फैशन के नाम पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने शरीर के कई हिस्सों में छेद करवा रखें हैं और इन लोगों को देख कर डर लगता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे ही कुछ अजीब लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने फैशन के नाम पर अपना चेहरा ही बदलवा दिया। आइए जानिए ऐसे ही कुछ अजीब लोगों के बारे में:-

जोएल मिग्लर

जर्मनी के रहने वाले 23 साल के जोएल मिग्लर नाम के इस शख्स ने कान में छेद करवाया और उसे ऐसा करवा कर इतना अच्छा लगा कि जोएल ने अपने पूरे चेहरे पर करीब 11 छेद करवा लिए।

उनके चेहरे पर सबसे बड़ा छेद 34 मिलीमीटर का है जिसे देखकर अच्छे अच्छे लोगों को भी डर लगने लगता है। उनके इस शौंक के लिए 2014 में जोएल का नाम फ्लैश टनल श्रेणी में रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

रॉल्फ बुचोलज़

रॉल्फ बुचोल्स जर्मनी के डोर्टमंड शहर के रहने वाले हैं। ये पेशे से आईटी प्रोफेशनल हैं, लेकिन दुनिया भर में इनकी पहचान गिनीज बुक में दर्ज इनके वर्ल्ड रिकॉर्ड की वजह से है।

इनके नाम 453 पियर्सिंग कराने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है जिसमें अकेले उनके होंठ पर करीब 158 थे। इनमें से ज्यादातर पियर्सिंग इनके चेहरे और गुप्तांगों में हैं।

बुकोज ने 40 साल की उम्र में अपने शरीर में पहला टैटू और पियर्सिंग कराई थी तब से 20 साल तक लगातार उन्होंने अपने होंठ, भौं, नाक पर पियर्सिंग कराते आ रहे हैं, इतना ही नहीं उन्होंने अपने सिर पर दो छोटे सींग पर लगा लिए हैं।

इलैन डेविडसन

ऐलेन डेविडसन नाम की यह महिला ब्राजील की रहने वाली है और इन्होंने अपने शरीर पर करीब 6725 छेद करवा रखे हैं।

उनके शरीर पर इतने सारे पियर्स देखकर हर कोई हैरान रह जाता हैं। अपने इसी शौंक के कारण ऐलेन का नाम गिनीज बुक में दर्ज है।

एक्सल रोजलेस

एक्सल रोजलेस नाम के व्यक्ति ने अपने पूरे चेहरे पर करीब 280 पियर्सिंग लगवा रखे हैं, जिस कारण इनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है। उसका चेहरा इतने सारे पियर्सिंग लगवाने के बाद बेहद डरावना नज़र आता है।

यह भी पढ़ें :-

आज है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें कुछ जरुरी बातें

इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून यानी आज लगेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल के पहले सूर्य ग्रहण के दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी है ऐसा योग करीब 148 साल बाद बन रहा है जोकि बहुत खास माना जाता है।

इससे पहले शनि जयंती पर सूर्य ग्रहण 26 मई 1873 को हुआ था। इसके साथ ही इस दिन धृति और शूल योग भी बनेगा। सूर्य ग्रहण के दौरान शुभ कार्यों की मनाही होती है और इस दौरान मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं लेकिन पूजा आराधना चलती रहती है।

इसके अलावा सूर्य ग्रहण का सेहत पर भी असर पड़ता है। सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण घटना है । जिसमें हमें अपने खान-पान और सेहत का भी खास ध्यान रखना होता है।

कब और कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण 10 जून को दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 41 मिनट खत्म होगा। इस बीच आपको सूर्य ग्रहण के नेगेटिव प्रभाव से अपना बचाव करना होगा।

ये ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, लेकिन उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में, उत्तरी कनाडा, यूरोप और एशिया में, ग्रीनलैंड और रूस के अधिकांश हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा।

कनाडा, ग्रीनलैंड तथा रूस में वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। वहीं, उत्तर अमेरिका के अधिकांश हिस्सों, यूरोप और उत्तरी एशिया में आंशिक सूर्य ग्रहण दृश्य होगा।

भारत में साल का पहला सूर्यग्रहण अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में देखा जा सकेगा। अरुणाचल प्रदेश में दिबांग वन्यजीव अभयारण्य के पास से शाम करीब 5 बजकर 52 मिनट पर देखा जा सकेगा।

वहीं लद्दाख के उत्तरी हिस्से में सूर्य ग्रहण शाम 06 बजे देखा जा सकेगा। यहां सूर्यास्त शाम को करीब 06 बजकर 15 मिनट पर होगा।

कैसे होता है सूर्य ग्रहण

जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है तब सूर्य ग्रहण लगता है और वो घड़ी आ चुकी है। इस दिन सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती है, लेकिन हल्का प्रकाश हमेशा रहता है क्योंकि चंद्रमा की वजह से सूर्य पूरी तरह से छिपने लगता है और इसे ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

ऐसी स्थिति में चंद्रमा केवल सूर्य के केंद्र को कवर करता है, तो इसके बाहरी किनारे दिखाई देता है जो चंद्रमा के चारों ओर एक ‘रिंग ऑफ फायर’ बनाते हैं।

10 जून को 9 सूर्य ग्रहण के दौरान रिंग ऑफ फायर का दृश्य दिखाई दे रहा है। देखने में तो ये नजारा काफी आकर्षक लग सकता है लेकिन इसका मानव स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

इस गलती से जा सकती हैं आंखों की रोशनी

वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण को सीधे नंगी आंखों से देखना उचित नहीं माना जाता है, ऐसा करने पर आपकी आंखों की रोशनी जा सकती है। सूर्य ग्रहण का हल्का प्रकाश आपके रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है और इस स्थिति में आप अंधेपन का शिकार हो सकते हैं।

नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के अनुसार, सूर्य ग्रहण को देखने के लिए चश्मा पहनना चाहिए। नंगी आंखों से आपको सूरज तो स्पष्ट दिखेगा नहीं, बल्कि आपकी सेहत संबंधी समस्याएं और हो जाएंगी।

क्या हैं सूतक के नियम

सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार सूतक के नियम वहीं माने जाते हैं, जहां ये ग्रहण दिखाई देता है।

इस सूर्य ग्रहण के नियम अरुणाचल प्रदेश के उस हिस्सों में ही लागू होंगे जहां ये ग्रहण दिखाई देगा। बाकी भारत में सूतक के कोई नियम मान्य नहीं होंगे।

डायबिटीज रोगी के लिए बेहद फायदेमंद हैं ये 5 ड्राई फ्रूट्स !

नट्स यानी मेवा कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए रोजाना एक मुट्ठी नट्स खाने की सलाह दी जाती है। अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो सभी प्रकार के नट्स आपके लिए फायदेमंद नहीं सकते।

लेकिन कुछ नट्स हैं, जिन्हें आहार में शामिल करन से ब्लड शुगर लेवल अंडर कंट्रोल रहता है और दूसरे फूड्स की तुलना में ये बहुत अच्छे साबित होते हैं।

बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका में 30.3 मिलियन वयस्क डायबिटीज से ग्रसित हैं। लेकिन स्वस्थ आहार ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

नट्स उन खाद्य पदार्थों में से एक है, जिन्हें अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (American Diabetes Association) ने डायबिटीज वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद बताया है।

यहां हम आपको बताएंगे कि डायबिटीज वाले लोगों को अपने आहार में किन-किन नट्स को शामिल करना चाहिए?

मधुमेह के लिए ड्राई फ्रूट्स क्यों उपयोगी हैं

  • मेवा में खासतौर से बादाम टाइप -2 डायबिटीज वाले लोगों में हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए जाना जाता है।
  • नट्स में पाए जाने वाले अनसैचुरेटेड फैट हृदय सहित शरीर के अन्य अंगों की रक्षा करते हैं।
  • इतना ही नहीं, ये प्रोटीन से भरपूर होने के चलते शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। पबमेड 5 सेंट्रल (Pub Med Central ) में छपी एक स्टडी के र अनुसार नट्स में विटामिन, थायमिन, कैरोटीनॉयड, एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोस्टेरॉल अच्छी मात्रा में होते

मधुमेह वाले खाएं बादाम

इस स्थिति वाले लोगों के लिए बादाम के ढेरों फायदे हैं। 2011 में Metabolism Clinical and Experimental में छपे एक अध्ययन में पाया गया कि 12 सप्ताह तक टाइप -2 डायबिटीज वाले लोगों के आहार में बादाम को शामिल करने पर ब्लड शुगर कंट्रोल में रहा और दिल के रोग का खतरा भी कम हो गया।

बता दें, कि बादाम शरीर के लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है, जो धमनियों को ब्लॉक करने के लिए जिम्मेदार है।

बादाम एचडीएल की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे धमनियों से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद मिलती है और हृदय रोग की संभावना भी बहुत कम हो जाती है।

कैसे खाएं– अन्सॉल्टेड और कच्चे बादाम सबसे अच्छे होते हैं। आप इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाने का विकल्प चुन सकते हैं।

यह भी पढ़ें :-बादाम खाने से होने वाले फायदे!!

डायबिटीज रोगी रोज खाएं पिस्ता

पिस्ता खाने से मतलब है शरीर को भरपूर ऊर्जा देना। इसमें फाइबर और फैट्स अच्छी मात्रा में होते हैं, जिसके बाद पेट काफी देर तक भरा हुआ रहता है।

2015 में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 4 सप्ताह में टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों को पिस्ता युक्त आहार दिया। चार सप्ताह के बाद इन लोगों में एलडीएल और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का अनुपात देखने लायक था।

इतना ही नहीं, पिस्ता खाने वालों में ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी काफी कम हो गया था, जो बेहतर हृदय स्वास्थ्य का संकेत है।

कैसे खाएं- नमकीन पिस्ता खाने से बचें। एक कटोरी फ्रूट सलाद के साथ 30 पिस्ता रोज खा सकते हैं। ज्यादा खाने पर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

दिल के रोग से बचाए काजू

काजू एचडीएल से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के अनुपात को बेहतर बनाने और दिल के रोग के जाखिम को कम करने के लिए बहुत अच्छा है। 2018 के एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 300 लोगों को काजू युक्त आहार दिया।

12 सप्ताह के बाद टाइप-2 डायबिटीज वाले इन प्रतिभागियों के ब्लड प्रेशर में न केवल कमी आई बल्कि एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ा हुआ दिखा।

कैसे खाएं– डायबिटीज के मरीजों एक मुठ्ठी काजू रोज खाने चाहिए।

यह भी पढ़ें :-दिल से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

डायबिटीज को बढ़ने से रोके अखरोट

बहुत कम लोग जानते हैं लेकिन अखरोट डायबिटीज को बढ़ने से रोकने का माना गया उपचार है। इनमें कैलोरी बहुत होती है। BMJ Open Diabetes Research & Care में हुई एक स्टडी में पाया गया कि अखरोट खाने से न तो शरीर के वजन पर कोई असर पड़ता है और न ही इसकी संरचना पर।

यह देखने के लिए शोधकर्ताओं ने 112 प्रतिभागियों को 9 6 महीने के लिए अखरोट से भरपूर आहार दिया। इसमें
अखरोट युक्त आहार लेने से शरीर की संरचना पर कोई भी असर डाले बिना एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के अनुपात में आश्चर्यजनक सुधार हुआ।

मूंगफली

कई अध्ययनों में मूंगफली को डायबिटीज पेशेंट्स के लिए अच्छा माना गया है। 2013 में Purdue University में हुए एक अध्ययन में टाइप-2 डायबिटीज की संभावित खतरे वाली मोटापे से ग्रस्त महिलाओं के आहार पर मूंगफली के प्रभाव को देखा गया।

मूंगफली को अनाज में शामिल करने के बाद ओवरवेट वाली महिलाओं के लिए ब्लड शुगर लेवल और भूख पर कंट्रोल पाना काफी आसान हो गया।

कैसे खाएं– शुगर पेशेंट्स हर दिन 28 -30 मूंगफली रोज सकते हैं।

मधुमेह रोगी ज्यादा कैलोरी के सेवन से बचने के लिए एक छोटी मुठ्ठी ही नट्स का सेवन करें। इन मेवों को आप कच्चा भी खा सकते हैं, लेकिन मधुमेह वाले लोगों को स्वाद में नमकीन मेवों को खाने से बचना चाहिए।

यह भी पढ़ें :-जानिए सर्दियों में मूंगफली खाने के फायदे

ये हैं भारत के 5 सबसे स्वच्छ शहर!!

भारत दुनिया के सबसे बड़े विकासशील देश के रूप में जाना जाता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान के तहत किए गए कार्यों के कारण, देश में स्वच्छता अभियान जोरों पर है।

इस अभियान के तहत देशवासियों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई है। इसके तहत हर कोई अपने शहर को साफ रखने की कोशिश कर रहा है।

आज इस पोस्ट में हम जानेंगें भारत के 5 सबसे स्वच्छ शहरों के बारे में तो आइए जानते हैं इस लिस्ट में शामिल 5 स्वच्छ शहरों के बारे में:-

इंदौर

इंदौर शहर को मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी के रूप में जाना जाता है और इस सूची में इंदौर सबसे ऊपर है। इंदौर अब भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में जाना जाता है।

लगभग 20 लाख की जनसँख्या वाला यह शहर समुद्र तल से 550 मीटर पर बसा हुआ है। आपको बता दे कि इंदौर को मिनी मुंबई भी कहते है क्योंकि इस शहर की ग्रोथ रेट काफी अच्छी है और यहाँ पर ज्यादातर अमीर और मिडिल क्लास के लोग रहते हैं। इंदौर को सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित भी किया गया था।

भोपाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इस सूची में दूसरे स्थान पर है। शहर को भारत के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित किया गया है।

इस शहर की जनसँख्या भी इंदौर के बराबर लगभग 20 लाख है यह समुद्र तल से 527 मीटर ऊंचाई पर बसा हुआ है। सफाई के मामले में यहां की नगरपालिका और यहाँ के लोग काफी जागरूक हैं इस वजह से ये काफी स्वच्छ शहर है।

विशाखापत्तनम

आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है क्योंकि यह एक समुद्र तटीय शहर है  भारत का तीसरा सबसे साफ शहर जाना जाता है। विशाखापत्तनम आंध्र प्रदेश की वित्तीय राजधानी है और राज्य का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है।

समुद्र तल से 45 मीटर की ऊंचाई में बसे विशाखापट्टनम में करीब 18 लाख लोग रहते हैं। समुद्र के किनारे बसा होने के कारण इस शहर का मौसम ज्यादातर समय में सुहाना बना रहता हैं।

इस शहर का तापमान हमेशा संतुलित रहता है। वहीं साफ सफाई की बात करे तो यहां के लोग इस बात का काफी ख्याल रखते हैं।

सूरत

सूरत शहर गुजरात के सबसे मुख्य और सबसे बड़े औधोगिक शहर में से एक है। यह भारत के सबसे साफ शहरों की सूची में चौथे स्थान पर आता है सूरत भी विशाखापट्टनम की तरह समुद्र के किनारे बसा हुआ है और इसकी समुद्र तल से ऊंचाई करीब 13 मीटर है।

हालाकि औधोगिक शहर होने की वजह से यहां की फैक्ट्रीयों से काफी प्रदूषण होता है फिर भी यहाँ के लोग साफ सफाई का खास ख्याल रखते हैं।

मैसूर

मैसूर अब पूरी दुनिया में अपनी साफ-सफाई के लिए जाना जाता है। इस सूची में पांचवे स्थान पर मैसूर को रखा गया है. यह कर्नाटक राज्य के प्रमुख शहरों में से एक है जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 763 मीटर है

यह भी पढ़ें :-

सोने से भी ज्यादा महंगी है ये कीड़ाजड़ी, कीमत जानकर रह जायेंगे दंग !!!

कीड़ाजड़ी उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाती है इसे दुनिया का सबसे महंगा फंगस भी कहा जाता है। बाजार में यह 10 लाख रुपए किलो तक बिकता है। दुनिया के इस सबसे महंगे फंगस को भारत के हिमालयी क्षेत्र में ‘कीड़ाजड़ी’ और ‘यारशांगुबा’ कहते हैं।

क्या है कीड़ाजड़ी

यह एक तरह का जंगली मशरूम है, जो एक खास कीड़े की इल्लियों यानी कैटरपिलर्स को मारकर उसके ऊपर पनपता है। इस जड़ी का वैज्ञानिक नाम कॉर्डिसेप्स साइनेसिस है।

जिस कीड़े के कैटरपिलर्स पर यह उगता है, उसे हैपिलस फैब्रिकस कहते हैं। स्थानीय लोग इसे कीड़ाजड़ी कहते हैं, क्योंकि यह आधा कीड़ा और आधा जड़ी है। चीन और तिब्बत में इसे यारशागुंबा भी कहा जाता है।

कई बीमारियों में असरदार

कीड़ा जड़ी का इस्तेमाल प्राकृतिक स्टीरॉयड की तरह किया जाता है। इसके सेवन से यौन स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। साथ ही कई तरह के शारीरिक विकार भी ठीक हो सकते हैं।

इसी वजह से इसे हिमालयन वायग्रा के नाम से जाना जाता है। जहां अंग्रेजी वायग्रा के इस्तेमाल से दिल के कमजोर होने का खतरा रहता है, वहीं इस जड़ी के इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर कोई खराब असर नहीं पड़ता है।

कैंसर जैसी बीमारी के इलाज में भी इस जड़ी को काफी असरदार माना जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक, सांस और गुर्दे की बीमारी को सही करने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही यह जड़ी शरीर में रोगरोधी क्षमता को भी बढ़ाती है।

यह है वजह महंगे होने की

इसके इतने महंगे होने की एक वजह यह है कि कीड़ा जड़ी हिमालय में समुद्र तल से 3,500 से लेकर 5,000 मीटर तक की ऊंचाई पर ही मिलती है। उत्तराखंड में कुमाऊं के धारचुला और गढ़वाल के चमोली में कई परिवारों के लिए यह आजीविका का साधन है।

वह इन जड़ी को इकट्ठा करके बेचते हैं। भारत के उत्तराखंड के अलावा यह जड़ी चीन, नेपाल और भूटान के हिमालयी क्षेत्रों में भी मिलती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह जड़ी करीब 18 लाख रुपये किलो बिकती है।

सिर्फ स्थानीय लोगों को निकालने का अधिकार

कीड़ाजड़ी निकालने का अधिकार संबंधित पर्वतीय इलाके के वन पंचायत क्षेत्र से जुड़े लोगों को होता है। कीड़ाजड़ी निकालने के बाद लोग उसे भेषज संघ या वन विभाग में पंजीकृत ठेकेदारों को बेचते हैं। उत्तराखंड के तीन जिलों में इसके जरिए करीब सात-आठ हजार लोगों की आजीविका चलती है।