युवती ने घर खरीदने के लिए अपनाया यह रास्ता, जान कर रह जायेंगे दंग!

एक घर खरीदना या बनाना लगभग हर व्यक्ति का सपना होता है। इस सपने को पूरा करने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन चीन की युवती ने ऐसा तरीका अपनाया जिसे सुनकर आप दंग रह जायेंगे।

चीन के शेनजेन की रहने वाली शिआयो ली (काल्पनिक नाम) ने 1,20,000 युआन का घर खरीदने के लिए एक ही समय में 20 बॉयफ्रेंडस बनाये और उन सभी से 1-1 आईफोन 7 गिफ्ट में ले लिया। बाद में इन 20 आईफोन्स को उसने एक वेबसाइट पर बेच दिया और इससे मिले पैसे से उसने एक घर खरीद लिया।

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इस बात का खुलासा तब हुआ जब इस लड़की की कहानी एक ब्लॉग फोरम के माध्यम से सामने आई जिसे उसके साथ काम करने वाली एक महिला ने शेयर किया था।

इसमें उसने लिखा कि उसके ऑफिस के लोग उस युवती के बारे में बातें कर रहे थे जिसने 20 बॉयफ्रेंडस को फंसा कर उनसे आईफोन बटोर कर ऑनलाइन बेच दिया।

उसने बताया कि वह लड़की गरीब परिवार से थी और उसकी माँ गृहणी है और पिता प्रवासी मजदूर। परिवार में सबसे बड़ी होने के नाते घर खरीदने की जिम्मेदारी उस पर थी लेकिन विश्वास नहीं होता कि घर खरीदने के लिए वह ऐसा तरीका अपनाएगी।

सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उसकी कहानी शेयर होने पर कुछ लोगों ने उसे बेशर्म कहा, हालाँकि कुछ लोगों ने उसकी प्रशंसा भी की।

एक महिला ने लिखा, “मैं एक बॉयफ्रेंड नहीं खोज पा रही हूँ और उसने एक साथ 20 बॉयफ्रेंड्स रखे। मैं चाहती हूँ कि वह मुझे ऐसे कौशल सिखाये”।

मेक्सिको में पानी के नीचे मिली दुनिया की सबसे अद्भुत और बड़ी गुफा !

दुनिया इतनी नायाब चीजों से भरी पड़ी हैं कि मनुष्य हर दिन एक नई जगह एक नई खोज से वाकिफ़ होता रहता है। मेक्सिको में गोताखोरों के एक ग्रुप ने मेक्सिको में पानी में डूबी दुनिया की सबसे अद्भुत गुफा खोजी है। यह गुफा 347 किलोमीटर लंबी हैं।

मेक्सिको को युकातान प्रायद्वीप के नीचे मिली ये गुफा पानी में डूबी दो गुफाओं को जोड़ती है। इस खोज में 14 साल की मेहनत और कई घंटों का समय लगा।

वैज्ञानिकों का मानना है कि 10,000 से 12,000 साल पहले इन गुफाओं का इस्तेमाल माया साम्राज्य किया करता था। इसी वजह से इस प्रोजेक्ट को ग्रेट माया एक्विफर नाम दिया गया है।

यह खोज ग्रैन एक्यूफेरो माया (GAM) के पुरातत्वविदों के नेतृत्व में 10 महीने के लंबे अभियान के परिणामस्वरूप हुई है। दोनों गुफा प्रणाली वास्तव में एक थीं।

वैसे अगर हम आकार की बात करें तो इसके हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी गुफा अमेरिका में “मैमथ कैव” कही जाने वाली गुफा 650 किलोमीटर लंबी है।

साक आक्तुन और दोस ओजोस को गुफा के बारे में पहले से ही पता था लेकिन तुलुम शहर के पास मौजूद ये गुफाएं आपस में जुड़ी हैं, यह किसी को पता नहीं था। अब इस पूरे तंत्र को साक आक्तुन सिस्टम नाम दिया गया है।

जर्मन गोताखोर रॉबर्ट श्मिटनर के अनुसार “यह 20 वर्षों से अधिक का प्रयास है, मुख्य रूप से इस विशालकाय साक आक्तुन सिस्टम को खोजने में 14 साल लग गए।

अब यह सबकी जिम्मेदारी है कि वे इसकी सुरक्षा करें। मेक्सिको के युकातान में ही सेनोते नामक एक और गुफा भी है। यह गुफा पर्यटकों में खासी लोकप्रिय है।

युकाटन प्रायद्वीप अपने समुद्र तटों, मायन खंडहरों और सेनोतों या बड़े पैमाने पर सिंकहोल्स के लिए जाना जाता है। क्विंटाना रो राज्य में, 300 से अधिक सेनोट हैं।

मेक्सिको के युकातान में ही सेनोते नाम की गुफा भी है। पर्यटकों में खासी लोकप्रिय यह गुफा साक आक्तुन सिस्टम से जुड़ी हैं। अब सेनोते में डुबकी लगाने वाले लोगों को पता चलेगा इस पानी के नीचे कितनी खूबसूरत दुनिया है।

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प्रदूषण का भयानक चेहरा देखना है? तो देखें इन 12 तस्वीरों को!!

विश्व की बढ़ती जनसंख्या का सीधा प्रभाव पर्यावरण और प्रकृति पर पड़ता है. इससे न केवल हमारा आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि समस्त जैवमण्डल और जीवन श्रृंखला प्रभावित हो रहे हैं.

यह केवल तेजी से बढ़ती जनसंख्या का ही दुष्परिणाम है कि प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है, जिससे प्राकृतिक आपदाएं, जलवायु परिवर्तन तथा  ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौतियां पैदा हो रही हैं.

पर्यावरण संरक्षण समय की जरुरत

महात्मा गांधी ने प्राकृतिक संसाधनों के अत्याधिक दोहन को देखते हुए ही यह बात कह दी थी कि मनुष्य की मूलभूत आवश्कयताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति के पास सब कुछ है लेकिन मनुष्य की महत्वकांक्षा और लालच के आगे कुछ भी नहीं है.

वहीँ 18वीं सदी के महान अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट माल्थस ने अपने एक लेख में चेतावनी दी थी कि यदि आत्म-नियंत्रण और कृत्रिम साधन से बढ़ती जनसंख्या को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो प्रकृति खुद अपने क्रूर हाथों से नियंत्रित करने का प्रयास करेगी.

इस लेख कुछ ऐसी ही भयावह तस्वीरें दिखने जा रहे हैं जो पर्यावरण की मौजूदा चिंताजनक हालत को खुद-ब-खुद बयान कर रही हैं.

  1. इंडोनेशिया का जावा द्वीप दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला द्वीप है. तस्वीर में आप देख सकते है कि कैसे लोग कचरे से भरी लहर पर सर्फिंग करने को मजबूर हैं.

    विश्व पर्यावरण दिवस, इंडोनेशिया

  2. विल्मेट नेशनल फॉरेस्ट अमेरिका के ओरेगन के कैसकेड रेंज के मध्य भाग में स्थित एक राष्ट्रीय वन है. इस वन का लगभग 99% भाग काट दिया गया है.

  3. अमेरिका के कैलिफोर्निया का केन नदी तेल क्षेत्र, जिसका 1899 के बाद से दोहन किया गया है.

    पर्यावरण को नुक्सान

  4. कनाडा के अल्बर्टा में तारकोल से भरी जगह, जोकि खनन और टॉक्सिक कचरे से बर्बाद हो चुकी है.

  5. नार्थ पैसिफिक के मिडवे आइलैंड में प्लास्टिक खाने से मरा हुआ एक अल्बाट्रोस(Albatross) पक्षी. हर साल 1 लाख समुद्री स्तनपाई जीव और 10 लाख पक्षी प्लास्टिक खाने से मारे जाते हैं.

  6. बांग्लादेश में कचरे से भरा विशाल क्षेत्र

  7. ग्लोबल वार्मिंग के कारण मालदीव आगामी 50 वर्षों में डूब जायेगा

  8. ग्लोबल वार्मिंग के कारण नॉर्वे में स्वाल्बार्ड द्वीप के पास विशाल हिमशैल पिघल रहा है.

  9. यह तस्वीर दिल्ली में पिछले साल नवंबर में आयोजित मैराथन “नई दिल्ली 10 हजार चैलेंज” की है, जिसमें भारी प्रदूषण के चलते लोग मास्क पहन कर दौड़ रहे हैं

  10. जकार्ता इंडोनेशिया की राजधानी एवं सबसे बड़ा नगर है. यह उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है. यह तस्वीर दिसंबर 2016 की है. यहाँ के लोग गंदे पानी और कूड़े से भरी इस नदी को देख कर भी अनदेखा करते है.

  11. ब्राजील का इपोजुका बीच में प्लास्टिक से लिपटा एक मरा हुआ कछुआ. तस्करों से लेकर प्रदूषण तक, समुद्री कछुओं को भारी खतरों का सामना करना पड़ रहा है. WWF ने कछुओं की लगभग प्रजातियों को विलुप्ति के कगार पर खड़ा घोषित किया है.

  12. रूस की मीर नामक हीरे की खान(Mir mine). 1200 मीटर व्यास वाली और 525 गहरी यह विशाल खान दुनिया की सबसे बड़ी हीरे की खान है.

भारत में बसा है दुनिया का सबसे बड़ा परिवार, जिसमें 181 सदस्य रहते हैं…

आज के महंगाई के दौर में चार-पांच लोगों के परिवार का पालन-पोषण करना भी एक बड़ी चुनौती है लेकिन मिजोरम में दुनिया का सबसे बड़ा परिवार एक साथ रहता है और खुश है। इस शानदार परिवार में 181 सदस्य हैं।

अपने बेटों के साथ बढ़ई का काम करने वाले जियोना चाना का परिवार मिजोरम में खूबसूरत पहाडि़यों के बीच बटवंग गांव में एक बड़े से मकान में रहता है। इस मकान में 100 कमरे हैं।

जिओना चाना मिजोरम के बटवंग में एक बड़े घर में 39 पत्नियों, 94 बच्चों, 14 बहुओं और 33 पोते-पोतियों के साथ रहती हैं। घर में कुल 100 कमरे हैं। जियोना कहते हैं कि उन्हें को दुनिया के सबसे बड़े परिवार का मुखिया होने पर गर्व है।

आम परिवार के महीने भर का राशन जिओना का परिवार एक दिन में खा जाता है। उन्हें एक दिन के खाना पकाने के लिए 40 किलो चावल, 40 किलो चिकन, 24 किलो दाल, 50 किलो सब्जियां चाहिए। डाइनिंग हॉल में 50 टेबल हैं। जियोना की पत्नियां खाना बनाती हैं, जबकि उनकी बेटियां घर का काम करती हैं।

जियोना खुद को महाराजा समझते हैं

जियोना खुद को महाराजा समझते हैं उन्होंने ग्राउंड फ्लोर पर अपनी कई बड़ी तस्वीरें लगाई है। 39 पत्नियों की देखभाल करने वाला जियोना सच में अनोखा है। जिओना खाने की टेबल पर अपनी सबसे युवा पत्नियों के साथ बैठते हैं।

दूसरी पंक्ति में उनकी बुजुर्ग पत्नियां बैठती हैं। उनकी सबसे छोटी पत्नी 33 साल की हैं। उसका नाम सिमथंगी है। इनकी शादी 2000 में हुई थी।

खास बात तो ये है कि 39 शादियां करने के बाद भी जियोना की ख्वाहिश है कि अगर भगवान ने चाहा तो वे 40वीं शादी भी कर लेंगे। जियोना के परिवार का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी शामिल है।

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जानिए कैसा था बचपन इन महापुरुषों का !!!

यह आवश्यक नहीं कि जो बच्चा बचपन में कुशाग्र बुद्धि होगा वही आगे चल कर महान और महापुरुष बनेगा। आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे महापुरुषों के बारे में बताने जा रहे हैं जो बचपन में सुस्त, मूर्ख या खिलाड़ी समझे जाते थे, वही आगे चल कर महान वैज्ञानिक, साहित्यकार और राजनीतिज्ञ बने।

तो चलिए जानते हैं :-

अल्बर्ट आइंस्टीन

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन जब म्यूनिख में पढ़ते थे, तब उन्हें बुद्धिमान बालक नहीं समझा जाता था। कक्षा में चुपचाप बैठते थे।

बोलते बहुत कम थे। शिक्षक उन्हें सुस्त और आलसी कहा करते थे। 26 वर्ष की आयु में ही उन्होंने एक नवीन प्रयोग कर दिखाया, जिससे वह रातों-रात चमक गए।

एक बार आइंस्टीन बस से कहीं जा रहे थे। कंडक्टर ने उनसे टिकट के पैसे लेकर शेष वापस कर दिए। उन्होंने दो-तीन बार शेष पैसे गिने पर ठीक प्रकार हिसाब न लगा सके। इस पर कंडक्टर ने उनके हाथ से रेजगारी लेकर झुंझलाते हुए कहा, “जनाब लगता है आप गणित में बहुत कमजोर हैं।”

बेचारे कंडक्टर को ज्ञान न था कि वह संसार के महान वैज्ञानिक से बात कर रहा है। कंडक्टर की इस बात पर वह हंस पड़े।

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विंस्टन चर्चिल

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाले विंस्टन चर्चिल का मन बचपन से पढ़ाई में नहीं लगता था परंतु वह बहुत उद्यमी थे। कई बार अनुत्तीर्ण होने के कारण उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा।

किसी तरह दूसरे स्कूल में प्रवेश मिला जो महिलाओं द्वारा संचालित किया जाता था। इस विद्यालय में भी वह मूर्ख, उदंड सिद्ध हुए।

स्थिति यहां तक पहुंची कि उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। बाद में उन्होंने अपना मन पढ़ाई में लगाया और आगे चल कर ब्रिटेन के चर्चित प्रधानमंत्री रहे।

न्यूटन

न्यूटन का बचपन, किशोरावस्था और युवापन खेलकूद में ही गुजरा। वह खेलने में मस्त रहा करते थे। गणित में बहुत कमजोर थे इसलिए उन्हें कम बुद्धि का विद्यार्थी समझा जाता था।

वह पतंग उड़ाते, लकड़ी की घड़ियां बनाते और जल चक्र आदि से खेलते। आगे चल कर उन्होंने कई महान आविष्कार किए और महान वैज्ञानिक कहलाए।

एक दिन न्यूटन अपने अनुसंधान में खोए हए थे। भोजन करने का समय हो गया था। उनकी नौकरानी भोजन का थाल चुपके से आकर पीछे रखी हुई मेज पर रख कर चली गई। इसी बीच एक बिल्ली आकर सारा भोजन चट कर गई।

बहुत देर बाद जब न्यूटन ने अपनी कुर्सी पर बैठे हुए ही पीछे की ओर देखा तो भोजन की थाली खाली मिली। तब उनके मुंह से अनायास निकल पड़ा, “चलो अच्छा हुआ आज मैंने समय पर खाना खा लिया”। इतना कह कर वह पुनः अपने काम में लग गए।

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चार्ल्स डार्विन

चार्ल्स डार्विन का विद्यार्थी जीवन में पढ़ने लिखने में बिल्कुल मन नहीं लगता था। उन्हें कक्षा में मूर्ख समझा जाता था। कक्षा में ही नहीं बल्कि उन्हें पूरे विद्यालय में ही वर्ष का सबसे कम बुद्धि का विद्यार्थी घोषित किया। यही डॉर्विन आगे चल कर महान वैज्ञानिक बने।

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बच्चों का आत्मविश्वास कम करती हैं माता पिता की यह आदतें

माता पिता बच्चों में बचपन से ही अच्छी आदतें डालना और उन्हें परफैक्ट बनाना चाहते हैं। इस दौरान वह अपने बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार कर जाते हैं, जिससे वह खुद परिचित नहीं होते।

ऐसे व्यवहार का बच्चों की पर्सनैलिटी पर उल्टा असर पड़ता है। आपका बच्चा सब जानते हुए भी कुछ नहीं कर पाता। एक शोध के मुताबिक, माता-पिता द्वारा हर बात पर उपेक्षा, मारना-पीटना, कमियां निकलना उनमें डर का भाव पैदा करता है।

बच्चों को लगता है कि उनके पेरेंट्स उन्हें पसंद नहीं करते। आज हम पेरेंट्स की कुछ ऐसी आदतों के बारे में बता रहे हैं जिससे बच्चों का कॉन्फिडेंस लूज़ हो सकता है:-

टोका टाकी

भले ही आप को बच्चों का बैड पर कूदना, दौड़ना -भागना और उल्टे सीधे काम करना अजीब लगे लेकिन बच्चों के लिए यह बड़ी बात होती है जब पेरेंट्स बच्चों को हर समय टोकते रहते हैं तो उनमें उस काम को लेकर डर बैठता है इसलिए जरूरी है बच्चों को टोकने की जगह प्यार से समझाएं कभी-कभी उनकी इन आदतों को इग्नोर करें।

तुलना करना

पेरेंट्स के अंदर सबसे बुरी आदत होती है कि वे अपने बच्चों की पड़ोसी या फिर रिश्तेदारों के बच्चों से तुलना करते हैं। ऐसा करने से बच्चों की मनोस्थिति पर बुरा असर पड़ता है।

उनमें हीन भावना जन्म लेती है, जो आगे चलकर खतरनाक रूप धारण कर सकती है। भूल कर भी बच्चे के सामने उसकी तुलना दूसरे बच्चों से ना करें।

मजाक बनाना

कुछ पेरेंट्स ऐसे हैं जो बिना सोचे समझे बच्चों की बचकानी बातों का मजाक उड़ाने रखते हैं। ऐसा आप भले ही मजाक में करते हो लेकिन भावुक बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है। वह इस बात को दिल में रखते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों की हर बात को ध्यान से और प्यार से सुने और जवाब दें।

छोटी-छोटी बातों पर पीटना

बचपन में बच्चों का गलती करना आम बात है। बचपन में उनकी कोई भी गलती इतनी बड़ी नहीं होती जिसे लेकर उन्हें मारा-पीटा जाए। अक्सर ऐसा होने से वह खुद को देख सुरक्षित महसूस नहीं करते।

उनमें असुरक्षा की भावना पैदा होगी। पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चे को मारने- पीटने की जगह प्यार से समझाएं या फिर हल्की सजा देकर छोड़ दें।

कमी निकालना

बचपन इम्परफैक्ट होता है जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है वह परफैक्शन की तरफ रुख करता है लेकिन कई माँ-बाप को अपने बच्चों में बचपन से ही परफैक्ट चीजें चाहिए होती हैं।

जैसे बच्चा पेंटिंग करता है लेकिन वह परफैक्ट न बने तो पेरेंट्स उसमें कमियां निकालने लगते हैं। ऐसा व्यवहार करने से बच्चे का उस काम के प्रति कॉन्फिडैंस लूज़ हो सकता है। पेरेंट्स को चाहिए कि वे समय-समय पर बच्चों की तारीफ करते रहें ।

ध्यान रखें यह बातें

  • समय-समय पर बच्चों की तारीफ करते रहें।
  • बाहरी व्यक्ति के सामने कभी भी बच्चे के कामों की बुराई न करें।
  • बात-बात पर बच्चों को टोकना और मारना बंद करें
  • बचपन में ही परफैक्ट बनाने का ख्याल मन से निकाल दें।
  • बच्चों की कुछ आदतों को इग्नोर करें।
  • गलती करने पर प्यार से समझाएं।

पंजाब केसरी से साभार

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लाखों बांसों से बनी है ये भूल-भुलैया, एक बार खो गये तो समझो…

उत्तरी इटली में पार्मा शहर के पास एक भूल-भुलैया है। यूं तो हर कहीं जगह -जगह पर मक्के के खेतों में भूल-भुलैया बनी मिल जाती हैं लेकिन बांसों से बनी इस भूल-भुलैया के रास्ते 3 किलोमीटर में फैले हैं और इसका क्षेत्रफल 70000 वर्ग मीटर है।

इस लिहाज से यह ‘लाबिरिंतो डेला मासोने’ यूरोप की सबसे बड़ी भूल-भुलैया है। पेशे से प्रकाशक रहे फ्रांको मारियो रिची ने इस भूलभुलैया का सपना 30 साल पहले देखा था जब वह नौजवान थे।

दरअसल पार्मा शहर के बाहर उनका एक वीक एंड हाउस हुआ करता था । वहां उनके दोस्त और उनके प्रकाशन गृह से जुड़े लेखक अर्जेटीना के खॉर्गे लुइस बोर्गेस भी आकर रहा करते थे।

बोर्गेस की रचनाओं का एक विषय लेवरिंथ भी था। 1899 में जन्मे बोर्गेस की 55 साल के होते होते आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई थी।

फोंटानेलाटो में अपने वीकेंड हाउस में उनका हाथ पकड़ इधर-उधर ले जाते रिकी को इस बात का अहसास हुआ कि जीवन में अनिश्चितआएं कितनी महत्वपूर्ण होती हैं, जब आप चीजों को देख ना सके या उनका आभास ना कर सके और इसी एहसास से फ्रांको मारियो रिची के उस अपने का जन्म हुआ जिसे उन्होंने बाद में अपनी जमीन पर साकार किया ।

हकीकत में बदला एक सपना

फ्रांको मारियो रिची अपने अनुभवों को दुनिया के बहुत से दूसरे लोगों के साथ सांझा करना चाहते थे, उन्हें जिंदगी की भूल भुलैया की याद दिलाने के लिए एक कृत्रिम भूल भुलैया में ले जाना चाहते थे तो अपनी जमीन पर उन्होंने बांस के लगभग 2 लाख पेड़ लगाए।

बाँस हमेशा हरे भरे रहते हैं और 15 मीटर तक बढ़ सकते हैं। जो लोग गांव में रहते हैं और उनके पास बांस के बगीचे हैं उन्हें पता है कि बांस के पेड़ बहुत तेजी से बढ़ते हैं, और बांस के पेड़ अगर बड़े इलाके में फैले तो उनके झुरमुट में कोई भी रास्ता भूल सकता है।

फ्रांको की भूल-भुलैया में घुसने का एक ही रास्ता है और निकलने का भी लेकिन उनके बीच इतने सारे रास्ते हैं कि आदमी उनमें खो ही जाता है।

सारे रास्ते एक जैसे लगते हैं और लोगों को लगता है कि उन्हें तो यह रास्ता पता है और फिर लगता है कि यह तो बिल्कुल ही अलग है जगह है। पता ही नहीं चलता कि वह कहां है और वहां से बाहर कैसे निकले ।

लबिरिंनतो डेला मासोने एक ज्योमैट्रिक डिजाइन पर आधारित है और रोमन दौर की याद दिलाती है। सीधे-सीधे रास्ते हैं जो 90 डिग्री के कोण पर मुड़ते हैं इसलिए उन्हें याद रखना और मुश्किल हो जाता है लेकिन यह भूल भुलैया इतनी भी बड़ी नहीं है कि उससे बाहर न निकाला जा सके और वह घबराने लगें। लोग यहां इतनी कंफ्यूज होते हैं उतने ही मंत्र मुग्ध भी।

इमरजेंसी की स्थिति में वे मदद मांग सकते हैं। भूलभुलैया में जगह-जगह पर पहचान के लिए पोजीशन मार्क लगे हैं। फोन करके खोये हुए लोग अपनी पोजीशन बताते हैं और उसके बाद भूल भुलैया के डायरेक्टर और एदुआर्दो पेपिनो उन्हें खुद लेने पहुंचते हैं और बाहर लेकर आते हैं।

वहां बताते हैं की इस “भूलभुलैया” का मूल अर्थ बहुत ही गंभीर और महत्वपूर्ण है, यह हमारे जीवन का प्रतीक है ऐसी ही मुश्किल चीजों से हमारा वास्ता अपने जीवन में पड़ता है और ऐसी ही मुश्किलों रास्तों से हम गुजरते हैं और आखिर में हमें अपनी मुक्ति का रास्ता मिल ही जाता है ।

भूल-भुलैया बीच है एक “संग्रहालय”

भूल भुलैया के केंद्र में एक इमारत है या यूं कहें नियो क्लासिकल इमारतें । इनमें एक म्यूजियम है जहां वह कलाकृतियां प्रदर्शित हैं जो फ्रेंको ने अपने जीवन में इकठ्ठी कीं। इसके अलावा उनका किताबों का संग्रह और वे सारी किताबें जो उनके प्रकाशन ने 50 सालों में छापीं,वहां देखी जा सकती हैं।

पक्षी ‘हजारों मील’ का सफर कैसे करते हैं?

कुछ पक्षी प्रत्येक मौसम में प्रवास करते हैं। वे हजारों मील की यात्रा करते हुए बहुत लंबी दूरियां तय करते हैं। सबसे लंबी दूरी तय करने वालों पक्षियों में ‘बार टेल्ड गॉडविट’ भी शामिल हैं।

वैज्ञानिकों ने इनका पीछा किया तो पाया कि ये न्यूजीलैंड से अलास्का तक का सफर 3 टुकड़ों में तय करते हैं। यह दूरी 30 हजार किलोमीटर है जिसे ये पक्षी 20 दिन में तय।करते हैं। न्यूजीलैंड या ऑस्ट्रेलिया से उड़कर ये एशिया तक आते हैं।

यंहा से उड़कर ये अमेरिका के अलास्का प्रान्त तक जाते हैं। अलास्का से घर वापसी का सफर ये बिना रुके करते हैं । यह दूरी भी करीब 11,800 किलोमीटर बैठती है।

लंबी दूरी तय करने वाले कई पक्षी बिना रुके पहाड़ों, जंगलों, शहरों तथा समुद्रों के ऊपर से उडा़न भरते हैं। वे विशेषज्ञ मार्ग निर्देशक (नेवीगेटर) होते हैं। मगर वे अपना रास्ता कैसे ढूंढ लेते हैं, यह अभी तक रहस्य बना हुआ है।

वे महाद्वीपों को पार करते हैं और उसी स्थान तथा उसी घोंसले पर लौट आते हैं, जहां से उन्होंने शुरुआत की थी। वे ऐसा कैसे कर लेते हैं?

कौन-सी चीज़ उन्हें अपना पिछले वर्ष वाला घोंसला तथा घर ढूंढने में मदद करती है? वे कैसे जाने और वापिस लौटने के लिये अपना मार्ग खोज लेते हैं?

हडसोनियन गॉडविट्स‘ पक्षी उत्तर अमेरिका में अलास्का से दक्षिण अमरीका के सुदूर चिलोई टापू तक लम्बा सफर करते हैं

यहां तक कि नवजात तथा कम आयु के पक्षी, जिन्होंने पहले कभी उस मार्ग पर यात्रा नहीं की थी, पूरी सटीकता से इसे अंजाम देते हैं? घर वापिस लौटने का उनका यह कौशल वास्तव में हैरानी जनक है।

एक अनुमान यह है कि अपने गतंव्य तक पहुंचने के लिए मार्ग खोजने हेतु पक्षियों की मदद प्रसिद्ध जमीनी पहचान स्थल (लैंडमार्क्स) करते हैं। मगर रात को वे क्या करते होंगे?

यह भी सोचा जा सकता है कि रात को अपनी उड़ान के लिए वे जाने- पहचाने सितारों व तारामंडलों की मदद लेते होंगें।मगर तब क्या, जब आसमान में बादलों तथा आंधी वगैरह के कारण तारे दिखाई नहीं देते?

फिर भी नवजात पक्षी कैसे अपना रास्ता खोज लेते होंगे, जिन्होंने न तो कभी जमीनी पहचान स्थल देखे होते हैं और न ही कभी माता- पिता के साथ उस मार्ग पर गए होते हैं?

एक अन्य सिद्धांत यह है कि यात्रा के दौरान पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उनकी मदद करता है। चुंबकीय बल की रेखाएं पृथ्वी के दो चुंबकीय ध्रुवों जोड़ती हैं। ऐसा बताया जाता है कि ये चुंबकीय रेखाएं ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रवास करने में उनकी मदद करती हैं।

जहां तक पक्षियों के प्रवास का प्रश्न है, सच यह है कि हम अभी तक अंधेरे में हाथ – पांव मार रहे हैं। इसका सटीक उत्तर अभी खोजा जाना है।

पंजाब केसरी से साभार।

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पानी में लगाए जाते हैं ये पौधे !!

सभी पौधे मिट्टी में उगाए जाते हैं, लेकिन कुछ पौधे ऐसे भी हैं जिन्हें पानी में भी उगा सकते हैं, खासतौर पर घर के अंदर यानी कि इनडोर प्लांट्स के तौर पर।

पानी में उगने वाले अधिकांश पौधों को कम धुप और देखभाल की जरूरत होती है। इन्हें पारदर्शी कांच की बोतल या जार में लगाकर घर सजा सकते हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे ही पौधों के बारे में बताने जा रहें है जिन्हें आप घर के अंदर पानी में लगा सकते हैं तो चलिए जानते हैं :-

बैम्बू

इसे घर के अंदर ड्राइंग-रूम में लगाना अच्छा माना जाता है। कांच के जार या बोल में पानी भरें और बांस का पौधा लगाएं। पौधे को स्थिर रखने के लिए जार या बोल में नीचे थोड़े पत्थर भर सकते हैं। इस पौधे का ऊपरी हिस्सा जब ज्यादा बढ़ जाए तो उसकी छंटाई कर दें।

पीस लिली

घर की फिजां को ख़ुशबूदार बनाने के लिए पीस लिली लगा सकते हैं। यह हवा को शुद्ध करने के साथ-साथ घर की सुंदरता बढ़ाता है।

इसे छांव में रखा जाता है। दूसरे पौधों की तुलना में पीस लिली को बार-बार नहीं छांटना पड़ता। हालांकि, अगर लिली का कोई हिस्सा या पत्ता मुरझाए, तब छंटाई कर सकते हैं।

ड्रेसिना

इस पौधे को धूप की जरूरत नहीं होती। इस पौधे को खिड़की के पास रखना अच्छा माना जाता है। यह पौधा अपने आस-पास की हवा की गुणवत्ता में सुधार करता है। इसे जार में पत्थर की मदद से टिकाकर, पानी में लगा सकते हैं।

स्पाइडर प्लांट

यह बारहमासी पौधा है। इसकी पत्तियां तलवार जैसी होती है और यह बहुत सुन्दर और आकर्षक दिखती है। इसे सीधे धूप से दूर रखना चाहिए।

इसे पानी में लगाते समय ध्यान रखें कि सिर्फ इसकी जड़ें ही पानी के अन्दर हों। अगर पत्तियां भी पानी में होंगी तो ख़राब हो जायगा।

मनी प्लांट

मनी प्लांट की लताओं का हरा रंग आंखों को सुकून देता है और घर की सुंदरता भी बढ़ाता है। इसे किसी भी कांच की बोतल या जार में लगा सकते हैं।

कोशिश करें कि मनी प्लांट को खिड़की के पास या फिर ऐसी किसी जगह पर रखें जहां इसे रोशनी और हवा मिलती रहे। हफ्ते में दो बार इसका पानी बदलिए।

कोलियस

अपनी रंग-बिरंगी पत्तियों के साथ यह आपके घर की खूबसूरती को अलग लुक देता है। अगर आप इस पौधे को पानी में कटिंग से उगाते हैं तो यह काफी समय लेता है लेकिन मिट्टी में यह जल्दी उगता है।

इस पौधे को अच्छे से विकसित होने के लिए थोड़ा गर्म तापमान चाहिए होता है इसलिए आप इसे खिड़की के पास रखेंगे तो यह खिल उठेगा।

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कैसे बने चांद-तारे – ब्रहमाँड के बारे में रोचक तथ्य

एक थाल मोतियों से भरा,
सबके सर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे,
मोती उससे एक न गिरे।

यह पहेली बचपन में आपने भी सुनी होगी, जिसका उत्तर है “आसमान”। साफ़ मौसम में रात के समय आपने भी आसमान को तो देखा होगा, जिसमें अनगिनत तारे नज़र आते हैं। वहीं शुक्ल यानि उज्ज्वल पक्ष में चाँद भी आसमान में नज़र आता है।

क्या आप जानते हैं अंतरिक्ष यानि आसमान में यह चाँद तारे कहाँ से आए? अगर नहीं, तो आज हम इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि यह चाँद-तारे कहाँ से आए या कैसे बनें।

क्या है अंतरिक्ष?

‘अंतरिक्ष ‘शब्द का इस्तेमाल संपूर्ण ब्रह्मांड को परिभाषित करने के लिए किया जाता है,अर्थात पृथ्वी व इसका वातावरण, चंद्रमा, सूर्य तथा बाकी सौर प्रणाली के अतिरिक्त अनंत आकाश में फैले ग्रह और उनके उपग्रह

‘बाह्य अंतरिक्ष’ यां आऊटर स्पेस का अर्थ पृथ्वी तथा इसके वातावरण के अलावा बाकी सारा अंतरिक्ष है।

बाह्य अंतरिक्ष वहां से शुरू होता है जहां पृथ्वी का वातावरण समाप्त होता है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने अंतरिक्ष को ‘परिमित (सीमित) लेकिन अबाध’ के तौर पर परिभाषित किया क्योंकि ब्रह्मांड निरंतर फैल रहा है।

इसका अर्थ यह हुआ कि ‘अंतरिक्ष’ शब्द का इस्तेमाल पृथ्वी व इसके वातावरण के अतिरिक्त हर चीज के लिए किया जाता है। सामान्य शब्दों में अंतरिक्ष का अर्थ ‘कुछ नहीं’ भी है। अर्थात, रिक्त या शून्य, जो खाली या निर्जन है।

ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रह्मांड का कुछ हिस्सा ‘मैटर ‘से भरा है’ बाकी खाली है। ग्रह, सूर्य, क्षुद्र, तारे तथा अन्य खगोलीय पिंड मिलकर ‘मैटर’ या पदार्थ बनाते हैं, जो अंतरिक्ष में बिखरा पड़ा है। दूसरे शब्दों में- सितारे, ग्रह, सूर्य, धूल के कण, गैस, मलबे के छोटे- बडे टुकड़े तथा बहुत अधिक खाली स्थान ब्रह्मांड बनाते हैं।

ब्रह्मांड में प्रकाश किसी भी अन्य चीज़ के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से यात्रा करता है। यह लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सैकंड की रफ्तार से यात्रा करता है।

ब्रह्मांड कैसे बना

ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड महा-विस्फोट (बिगबैंग) से लगभग 1.80 करोड वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया। एक विशाल गरम गोला अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा था।

इसके केंद्र में अंत्यत ताप तथा बहुत अधिक दबाव बन जाने के कारण इसमें बड़ा विस्फोट हो गया। इससे खाली अंतरिक्ष में मैटर या पदार्थ बिखर गया। समय के साथ मैटर ठंडा होता गया और इससे सितारे, ग्रह तथा चंद्रमा बने ।

जो पदार्थ विशाल खगोलिय पिंड नहीं बने, वे धूमकेतु अथवा उल्कापिंड बनकर अंतरिक्ष में रह गए। ये धूमकेतु तथा उल्कापिंड महा-विस्फोट के अवशेष हैं इसलिए उन्हें आमतौर पर महा -विस्फोट का मलबा कह दिया जाता है।

ब्रह्मांड कितना बड़ा है

यह एक कठिन प्रश्न है क्योंकि ऐसा देखा गया है कि ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है। अंतरिक्ष में दूरियां नापना असंभव है।

हम जानते हैं कि शुक्र (वीनस) पृथ्वी का सबसे नजदीकी ग्रह है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पृथ्वी से 4 करोड़ किलोमीटर दूर है ? प्लूटो हमसे 6 अरब किलोमीटर दूर है। सूर्य के अलावा सबसे नजदीकी सितारा प्रोक्सिमा सेंचुरी है। यह 402 खरब किलोमीटर दूर है।

( कुछ रोचक तथ्य )

  • ब्रह्मांड में सबसे दूर की चीजें अत्यंत विशाल खगोलीय वस्तुएं हैं, जिनमें से कई 10 अरब प्रकाश वर्ष दूर हैं।
  • प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो रोशनी या प्रकाश एक वर्ष में तय करता है।
  • एक प्रकाश वर्ष लगभग 94,60,00,00,00,000 किलोमीटर या 94 खरब किलोमीटर के बराबर है।
  • सूर्य की पृथ्वी से दूरी 14. 96 करोड़ किलोमीटर है।
  • 3 लाख किलोमीटर प्रति सैकंड की रफ्तार से सूर्य की रोशनी को हम तक पहुंचने में 8 मिनट लगते हैं
  • सूर्य के अलावा हमारे अगले सबसे नजदीकी सितारे तक पहुंचने में प्रकाश को 4 प्रकाश-वर्ष लगते हैं। किलोमीटर में यह दूरी 40,208,000,000,000 किमी यानी 402 ख़रब किमी बनती है।
  • सूर्य इतना विशाल है कि इसमें पृथ्वी के आकार के 13 लाख ग्रह समा सकते हैं।
  • ब्रह्मांड निरंतर फैल रहा है। यानी इसमें सारे ग्रह, क्षुद्र, तारे तथा अन्य खगोलीय पिंड एक दुसरे से लगातार दूर हो रहे हैं।
  • कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में मौजूद सारा मैटर या पदार्थ एक दिन सिकुड़ना शुरू हो जाएगा, जिस कारण एक बहुत बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा।