बॉलीवुड में आने से पहले इन अभिनेत्रियों ने बदला अपना नाम, जानें किसका क्या है असली नाम !!

हर व्यक्ति अपने नाम से जाना जाता है लेकिन कई बार लोगों को अपनी पहचान बनाने के लिए अपना नाम बदलना पड़ता है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण हमारी बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में मिल जाता है।

फिल्म इंडस्ट्री में अनेकों ऐसे सितारे मौजूद हैं जिनका पहले तो नाम कुछ और था लेकिन फिल्मों में आने के लिए उन्होंने अपना नाम बदल लिया और आज यह पूरी दुनिया में अपने नए नाम से मशहूर हैं।

तो आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे सितारों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने फिल्मों में आने के लिए अपना नाम बदल लिया है और आज दुनिया उन्हें उनके बदले हुए नामों से जानती है तो चलिए जानते हैं :-

प्रीति जिंटा

प्रीति जिंटा बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्रियों में से एक है। प्रीति जिंटा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1998 में फिल्म ‘दिल से’ से की थी। फिल्मों में आने से पहले उनका नाम प्रीतम सिंह जिंटा था।

प्रीति ने 2016 में अमेरिकी बिजनेसमैन जेन गुडइनफ से शादी की थी। प्रीति आईपीएल में “किंग्स 11 पंजाब” टीम की मालकिन हैं।

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श्रीदेवी

श्रीदेवी बॉलीवुड की पहली महिला सुपरस्टार थीं। वह न केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री थीं, बल्कि एक बेहतरीन डांसर भी थीं।

श्रीदेवी ने कई फिल्मों में अपने अभिनय के लिए पुरस्कार जीते थे, लेकिन फिल्मों में आने से पहले उनका नाम अम्मा येंगर अय्यपन था लेकिन बाद में उन्होंने बदलकर श्रीदेवी रख लिया।

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तब्बू

तब्बू बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री हैं। तब्बू अब तक कई हिट फिल्में दे चुकी हैं और उनके अभिनय कौशल के बारे में सभी जानते हैं। उनकी गिनती बॉलीवुड की सबसे ताकतवर अभिनेत्रियों में होती है।

तब्बू ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1985 में “हम नौजवान” से की थी। तब्बू का असली नाम तबस्सुम हासिम खान है। बॉलीवुड में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘तब्बू’ रख लिया।

शिल्पा शेट्टी

शिल्पा शेट्टी बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस हैं जो अपनी चाल से पुरे यूपी बिहार को लूटती हैं। शिल्पा ने 90 के दशक में कई हिट फिल्मों में काम किया। शिल्पा शेट्टी ने मशहूर बिजनेसमैन राज कुंद्रा से शादी की है।

बहुत कम लोगों को पता होगा कि शिल्पा शेट्टी का असली नाम “अश्विनी शेट्टी” है। फिल्म में आने से पहले उन्होंने अपना नाम बदलकर शिल्पा शेट्टी कर लिया था।

सनी लियोन

सनी लियोन को सबसे पहले लोगों ने बिग बॉस में देखा था। इस शो ने उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल दी। बिग बॉस के बाद सनी को फिल्मों के ऑफर मिलने लगे।

सनी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 2012 में फिल्म ‘जिस्म’ से की थी। आज सनी बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियों में से एक हैं और उनका असली नाम “करनजीत कौर वोहरा” है।

कैटरीना कैफ

कैटरीना कैफ दुनिया की सबसे खूबसूरत और मशहूर अभिनेत्रियों में से एक हैं। सलमान खान ने कैटरीना को बॉलीवुड में बड़ा ब्रेक दिया था। वह वर्तमान में बॉलीवुड में सबसे अच्छी और सबसे अधिक भुगतान पाने वाली अभिनेत्री हैं।

बॉलीवुड का आज हर हीरो और डायरेक्टर उनके साथ काम करना चाहता है लेकिन बहुत कम ही लोग जानते हैं कि कैटरीना कैफ का असली नाम “कैटरीना तुर्कोटे” है।

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OMG: इस “किले” में छुपा कर रखा है “पारस पत्थर”, जिन्न करते हैं रखवाली!!

पारस पत्थर से जुड़ी कहानियां सबने सुनी ही होगी, लेकिन क्या कभी किसी ने पारस पत्थर देखा है? ऐसा माना जाता है कि पारस पत्थर वह पत्थर होता है जिसे छूते ही लोहा सोना बन जाता है.

जी हाँ, दुनिया में एक ऐसा किला है जहाँ यह मौजूद हैं. जिसके कारण यहाँ हर साल लोग खुदाई करने के लिए पहुंच जाते हैं.
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भारत में भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक ऐसा किला है जहां ऐसा माना जाता है कि वहां पारस पत्थर मौजूद है. इस किले की खास बात यह भी है कि इस किले में स्थित कीमती पारस पत्थर की रखवाली जिन्न करते हैं.

भोपाल में स्थित इस किले का नाम रायसेन किला है. रायसेन किला पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यह किला लगभग 1200 ईस्वी पहले बनाया गया था.

इस किले को बनाने में बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है. भोपाल के रायसेन किले में दुनिया का सबसे पुराना वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rainwater harvesting) मौजूद है.

इतिहास

ऐसा माना जाता है कि किले के राजा रायसेन के पास एक पारस पत्थर था. इस पत्थर को पाने के लिए कई युद्ध हुए. ऐसे ही एक युद्ध में राजा रायसेन हार गया और हार के डर से उसने वह पत्थर तालाब में फेंक दिया.

बाद में एक युद्ध के दौरान राजा की मौत हो गई. मरने से पहले राजा रायसेन ने इस पत्थर के बारे में किसी को नहीं बताया. राजा के मरने के बाद यह किला वीरान हो गया.

philosophers-stoneवैसे तो अब तक पत्थर और जिन्न को लेकर कोई ऐसा सबूत हाथ नहीं लगा है जिससे यह सत्य हो की वाकई इस किले में वह पत्थर मौजूद हैं. लेकिन लोग सुनी-सुनाई बातों के आधार पर ही इस पत्थर की खोज कर रहे हैं. इसका प्रमाण वहां मौजूद गड्ढे हैं.

अभी भी पारस पत्थर और किले के खज़ाने को ढूंढने के लिए तांत्रिकों की मदद ली जा रही है, लेकिन किसी को कुछ नहीं मिलता.

बल्कि कई लोग इस किले में आ के अपना मानसिक संतुलन भी खो देते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि रायसेन किले में स्थित पारस पत्थर की रक्षा जिन्न करते है. पुरातत्‍व विभाग पत्थर और किले के खज़ाने के बारे में खोज कर रहा है.

अंत में सब के मन में एक ही सवाल उठता है क्या वाकई रायसेन के इस किले में पारस मौजूद है? आप रायसेन किले में मौजूद पारस के बारे में क्या सोचते हैं अपनी राय जरुर बताएं…..

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ब्रह्मांड में पाया गया ‘छिपा हुआ ब्रिज’!

दुनिया बहुत सारे अजीब रहस्यों से भरी है, आकाशगंगा भी उनमें से एक है। तमाम वैज्ञानिक समय-समय पर इससे जुड़े रहस्यों पर रिसर्च करते रहते हैं।

उन्होंने एक नई रिसर्च में पाया है कि ब्रह्मांड को जोड़ने और बनाने में 80 प्रतिशत ‘डार्क मैटर’ का उपयोग हुआ है जो एक रहस्यमयी पदार्थ है। इसका नक्शा बनाते समय उन्हें ऐसी जानकारी मिली है जो वाकई हैरान करने वाली है।

अमेरिका की पैंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बताया कि आकाशगंगाओं के बीच कुछ रहस्यमयी और छिपे हुए ‘ब्रिज’ यानी पुल देखने को मिले हैं जो किसी मकड़ी के जाल जैसे हैं।

इन ब्रिज और ‘डार्क मैटर’ की वजह से ही ‘ब्रह्मांडीय जाल’ बना है। इसका मतलब यह है कि हमारी आकाशगंगा और किसी दूसरी आकाशगंगा के बीच भी ऐसा ब्रिज हो सकता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दो आकाशगंगाओं के बीच बनने वाली गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह से ‘ब्रिज’ बनता है यानी अगर आप एक ‘ब्रिज’ पर पहुंचते हैं तो एक आकाशगंगा से दूसरी में खींचे या वापस भेजे जा सकते हैं।

जैसे-जैसे ब्रह्मांड बढ़ता जा रहा है, वैसे वैसे इसकी जटिलता भी बढ़ती जा रही है।

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कहां से आए ‘बैक्टीरिया’?

बैक्टीरिया यानी जीवाणु धरती पर ही उत्पन्न हुए हैं। डायनासौरों की तरह जीवाणु अपने पीछे जीवाश्म छोड़ गए। इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) की जरूरत पड़ती है।

जीवाणु अरबों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर दिखाई देने वाली जीवन की प्रारंभिक किस्मों में से एक हैं। वैज्ञानिकों का विचार है कि उन्होंने हमारे ग्रह की युवावस्था में इसके वातावरण को बनाने और बदलने में मदद की, जिससे अंततः वातावरणीय ऑक्सीजन का निर्माण हुआ, जिससे जीवन की अधिक पेचीदा किस्में विकसित हुई।

बहुतों का मानना है कि स्वतंत्र जीवित बैक्टीरिया के अन्य कोशिकाओं में आवास बनाने के बाद अधिक पेचीदा कोशिकाएं विकसित हुई जो अंतत: आधुनिक पेचिदा कोशिकाओं के अंग बनीं।

मिटोकांड्रियन, जो आपको शरीर की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा बनाता है, ऐसे ही एक अंग का उदाहरण है। बैक्टीरिया मात्र एक कोशिका से बने होते हैं।

बैक्टीरिया हर कहीं पाए जाते हैं, उनमें से अधिकतर हानिरहित तथा उनमें से भी कुछ बहुत उपयोगी होते हैं मगर कुछ जीवाणु बीमारियों का कारण बन सकते हैं क्योंकि या तो वे हमारे शरीर के गलत हिस्से में पहुँच जाते हैं अथवा वे हमारे शरीर पर हमला करने के लिए ही बने होते हैं।

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जानें क्यों कभी नहीं सूखता “खजाना वैल” !!

भारत की एक ऐसी जल विरासत है जो आस-पास सूखा पड़ने पर भी नहीं सूखती। इसका नाम है ‘खजाना वैल’ या ‘खजाना विहीर’। यह महाराष्ट्र के बीड जिले में स्थित है। इसमें लगभग 2 से 3 मीटर तक पानी हमेशा रहता है।

निर्माण में लगा सारा खजाना

मराठवाड़ा पर 16वीं  शताब्दी में निज़ामों का शासन था। इसका निर्माण वर्ष 1572 में तत्कालीन सरदार सलाबत खान ने करवाया था।

लोगों का मानना है कि उस समय राजा मुर्तुजा ने सलाबत खान को एक खजाना दिया था जो पूरा का पूरा इस कुएं के निर्माण में ही लग गया इसीलिए इसे ‘खजाना वैल’ के नाम से जाना जाता है।

इलाके में कई बार सूखा पड़ा है परंतु यह कुआं कभी नहीं सूखा। यह प्राचीन कुआं शहर से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

दरअसल उस समय खेतों में जल की आपूर्ति के संसाधन कम थे और इसलिए ही अहमदनगर के राजा मुर्तुजा खान ने बीड के तत्कालीन सरदार सलाबत खान को इस स्थान पर कुआं बनवाने के लिए कहा था। इसके सुंदर वास्तुशिल्प और स्थापत्य को सुप्रसिद्ध वास्तुकार राजा भास्कर के निर्देशानुसार बनाया गया था।

तीन सुरंगों वाला कुआं

इसकी कुल गहराई जमीनी स्तर से 7 मीटर है। इसके निर्माण के लिए चूने और पत्थर का प्रयोग किया गया है। इस कुएं में 3 सुरंगें हैं।

इनमें से 2 सुरंगें पानी को कुएं तक पहुंचाने यानी जल के प्रवेश द्वार के रूप में बनाई गई हैं और तीसरी सुरंग एकत्रित किए गए जल को बाहर ले जाने यानी जल निकासी मार्ग के रूप में बनाई गई है।

जल प्रवेश मार्ग वाली सुरंगें दक्षिण पश्चिम और दक्षिणपूर्व दिशा में स्थित हैं और जल निकासी मार्ग वाली सुरंग उत्तर दिशा में स्थित है।

ये एक प्रकार से छोटी नहरें जिनके माध्यम से खेतों में पानी की आपूर्ति की जाती थी। ये अभी भी बीड़ शहर के बालगुजर क्षेत्र में पानी पहुंचाती हैं। इन भूमिगत नहरों में हवा की आवाजाही के लिए 53 ‘वाल्व’ बनाए गए हैं।

यह ‘खजाना वैल’ वाकई इस बात को सिद्ध करता है कि भारत में पुराने समय से ही जल प्रबंधन अव्वल स्तर का रहा है और हम भारतवासियों को जल संरक्षण और ऐसी अद्भुत तकनीकें भी विरासत में मिली हैं।

(पंजाब कैसेरी से साभार)

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ये है दुनिया का पहला सोने का होटल !!

दुनिया में ऐसे कई होटल हैं, जो अपने अजीबोगरीब बनावट की वजह से मशहूर हैं लेकिन दुनिया में एक ऐसा होटल भी है सोने से बना है। कहाँ है ये सोने का होटल, कैसा है आइये जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से :-

दुनिया का सोने का पहला होटल वियतनाम की राजधानी हनोई में खुला है। इस होटल का नाम ‘डोल्से हनोई गोल्डन लेक’ (Dolce Hanoi Golden Lake) है।

इस होटल को दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे लग्जरी होटल का खिताब दिया गया है। इसे होआ बिन ग्रुपएंड विनधम ग्रुप ने बनाया है। ये दोनों मिलकर 2 सुपर 6 स्टार होटल मैनेज कर रहे हैं।

यह एक फाइव स्टार होटल है। 25 मंजिला बने इस होटल में 400 कमरे हैं। होटल की बाहरी दीवारों पर करीब 54 हजार वर्गफीट गोल्ड की प्लेटेड टाइल्स लगाई गई हैं।

होटल के ऊपरी फ्लोर पर फ्लैट्स भी बनाए गए हैं ताकि जो खरीदना चाहें वो खरीद सकते हैं। इस होटल का निर्माण साल 2009 में शुरू हुआ था और 2 जुलाई 2020 को इस होटल का शुभारंभ किया गया।

इस होटल में गेट से लेकर कॉफी कप तक सोने से बने हैं। यहां दरवाजे, खिड़कियां, टेबल, खाने के बर्तन, नल, वॉशरूम और यहां तक कि टॉयलेट सीट तक सब कुछ सोने का है। लॉबी में फर्नीचर और साज-सज्जा में भी सोने की कारीगरी की गई है।

होटल के स्टाफ का ड्रेस कोड भी रेड और गोल्डन रखा गया है। कहते हैं कि सोना टेंशन को कम करने में मदद करता है ताकि आप रिलैक्स रह सकें, इसलिए होटल मैनेजमेंट ने सोने की प्लेटिंग का इतना ज्यादा इस्तेमाल किया है।

डोल्से हनोई गोल्डन लेक होटल में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां मेहमानों को सोने की उपस्थिति नहीं दिखाई देगी और यह सौंदर्य भोजन और पेय पर भी लागू होता है। यहां तक कि होटल में परोसे जाने वाले व्यंजन भी सुनहरे वर्क में परोसे जाते हैं।

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OMG: सबसे तेजी से बनी कुछ इमारतें, जिन्हें देखकर सब सोचने पर मजबूर हो जाते हैं!!!

आम व्यक्ति को जहाँ एक बसेरा बनाने में सालों-साल लग जाते हैं लेकिन विश्व में कुछ ऐसे घर और इमारतें हैं जो सालों, महीनों, हफ़्तों नहीं बल्कि दिनों और यहाँ तक कि घंटो में तैयार हो जाते हैं ।

विज्ञान और तकनीक ऐसे अस्त्र हैं जिनका इस्तेमाल करके कंस्ट्रक्शन कंपनियां कुछ घंटों में इमारत को बना कर मालिक के सुपुर्द कर देती हैं। यहाँ पेश है कुछ-एक ऐसे ही घर और इमारतों का व्यौरा। सावधान! इसमें भारत में बनी इमारत भी शामिल हैं 🙂

 मिनी स्काई सिटी : चांग्शा, चाइना

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चीन के मिनी स्काई सिटी में 57 मंजिला इमारत को सिर्फ 19 दिनों में तैयार करके चीन के इंजिनियरों ने कमाल कर दिया था।

यह इमारत चीन के चांग्शा शहर के बीच में स्थित है। इस इमारत को 1200 कारीगीरों द्वारा बनाया गया। इसमें 800 घर हैं। इस इमारत में 4000 लोग रहते हैं।

 हेजिमंस वन

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हेइज्मंस वन नाम के घर को एक दिन में ही बनाया है। इस इमारत को ठोस लकड़ी के फ्रेम और सोलर पैनलों से बनाया गया है। यह ईमारत वातावरण अनुकूलित भी है। इस घर में एक रसोई, एक बाथरूम, एक बेडरूम, एक लिविंग रूम और बाहर वाले हिस्से में एक आँगन है।

इन्सटाकोन (INSTACON): मोहाली, भारत

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इस 10 मंजिला इमारत को सिर्फ 48 घंटों में बनाया गया था। भारतीय वास्तुकारों और Synergy Thrislington के इंजिनियरों ने इस इमारत को 3 दिसम्बर, 2012 से शुरू कर के 4 दिसम्बर 2012 को पूरा कर दिया था। ऐसा करके उन्होंने एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।

 अर्चिब्लोक्स: मेलबोर्न, ऑस्ट्रेलिया

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दुनिया में इमारत को वातावरण अनुकूलित बनाना एक बड़ी परम्परा बनती जा रही है और ऐसी इमारतों को बनाना  मुश्किल होता है। कुछ कम्पनीज अब ऐसी इमारतों को बनाती भी हैं।

सबसे मुख्य उदाहरण है। अर्चिब्लोक्स घर जो ऑस्ट्रेलिया में है। इस घर को इंजिनियर 12 हफ्तों में बना देते हैं जिसमें सब कुछ होता है और इस घर की कीमत $205,000 होती है।

 30 मंजिला होटल: चांग्शा, चाइना

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चांग्शा में एक ओर 30 मंजिला इमारत को बहुत कम समय में तैयार कर लिया गया। इस इमारत को बनाने का काम इतनी तेजी से हुआ कि इस 30 मंजिला इमारत को बनाने में सिर्फ 15 दिनों का समय लगा।

कार्यकर्ता एक दिन में 2 मंजिला बना लेते थे। इस इमारत में लगने वाली 93% सामग्री पहले से ही तैयार कर रखी थी।

होमशेल: लन्दन, इंग्लैंड

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इस इमारत को भी वातारण अनुकूलित बनाया गया है। इस तरह की इमारतों को बहुत कम खर्चे मं बना दिया बना दिया जाता हैं। होमेशेल एक 3 मंजिला इमारत होती है जिसकी बनावट रिचर्ड रॉजर द्वारा तैयार की गई है। इन इमारतों को 1 दिन से भी कम समय में तैयार कर दिया जाता है।

 आर्क होटल: चांग्शा, चाइना

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अब आपने अंदाजा तो लगा ही लिया होगा चाइना के ब्रॉड सस्टेनेबल बिल्डिंग कंपनी को तेजी से इमारत बनाने में महारत हासिल है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है चाइना का अर्क होटल जिसको इसी कंस्ट्रक्शन कम्पनी द्वारा तैयार किया गया और इस होटल को मात्र 48 घंटों में तैयार कर लिया गया था।

 3-डी प्रिंटेड हाउस: चाइना

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3-डी प्रिंटर ने अपना प्रभाव पूरी दुनिया में छोड़ा है। चाइना की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने एक बड़े 3-डी प्रिंटिंर की मदद से 10 छोटे घर मात्र 24 घंटों में बना कर तैयार कर दिए। इन घरों की कीमत $5000 से भी कम है और ये घर आप दुनिया के किसी भी हिस्से पर भी लेकर जा सकते हैं।

 डॉम अप: मोबाइल ट्री हाउस

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कोई भी जो अपना जीवन शहरों के शोर-गुल से दूर रह कर जीना चाहता है उनके लिए मोबाइल ट्री हाउस एक अच्छा विकल्प है। इस वृक्ष पर बने घर की बनावट ब्रूनो डे ग्रुन्ने ने तैयार की। इस घर के ढांचे को 2 पेड़ों के बीच में बनाया जाता है जो इस घर को आधार प्रधान करता है।

द हैबिटैट फॉर ह्यूमैनिटी हाउस: मोंटेवालो, अलबामा

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यह हमारे शीर्ष 10 में सबसे कम समय में बनी इमारतों में पहले नंबर पर है। इस घर को दिसम्बर 2002 में 3 घंटे, 26 मिनट्स और 34 सेकंड्स में तैयार किया गया था जो दुनिया का सबसे तेजी बनाया जाने वाला घर था। इससे पहले वाला रिकॉर्ड न्यूज़ीलैण्ड की कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास था।

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पृथ्वी में सबसे ज्यादा प्रदूषित जगह

प्रदूषित जगह : रूस में स्थित “कराचय” (Karachay) झील  को 1960 के दशक में रेडियोधर्मी पदार्थों की डंपिंग के लिए उपयोग किया जाता था। अब यह जगह दुनिया की सबसे अधिक रेडियोधर्मी प्रदूषण से ग्रसित जगह है।

इस स्थान पर यदि कोई व्यक्ति या प्राणी एक घंटे तक रहे तो उसकी मौत होना निश्चित है। यह झील रूस के यूराल पर्वतों में है, लेकिन आप इस जगह के ज्यादा नजदीक जाने की कोशिश भी मत कीजिएगा, क्योंकि यह जगह एक ‘साइलेंट किलर’ है। यह जगह पिछले 60 सालों से घातक विकिरण का उत्सर्जन कर रही है।

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1951 के बाद सोवियत संघ द्वारा इस जगह को परमाणु कचरे या वेस्ट के डंपिंग ग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल किया गया, जब यहाँ पास के शहर में परमाणु हथियार तैयार किये जाते थे।

1948 में यहां एक परमाणु रिएक्टर तैयार किया गया था। उत्पादन से निकलने वाले बेकार परमाणु पदार्थों को पास की नदी में फेंकना शुरू कर दिया गया।

यहां पर पायी जाने वाली टेका नदी में सबसे ज्यादा बेकार पदार्थ फेंके गये। यह नदी 39 कस्बों को पानी की सप्लाई कराती थी। कुछ समय के बाद यह नदी पूरी तरह से दूषित हो गयी थी।

अब इस नदी पर बाँध बना दिया गया है ताकि रेडियोधर्मिता को ज्यादा फैलने से रोका जा सके। अगर यह बाँध टूटता है तब इस नदी में जमां रेडियोधर्मी पूरे अन्टार्टिक महासागर में फैल जायेगा और पूरे अन्टार्टिक को रेडियोधर्मी से दूषित कर देगा।

जानिए दुनिया के 5 सबसे अमीर ऑटोमोबाइल बैंड और किस कार कंपनी के पास कितना पैसा?

Toyota ने Mercedes-Benz को सबसे वैल्यूएबल ऑटोमोबाइल कंपनी के मामले में पीछे छोड़ दिया है। मर्सेडीज को पीछे छोड़ अब टोयोटा दुनिया की सबसे अमीर ऑटोमोबाइल कंपनी बन गई है।

Automotive Industry 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक टोयोटा की ब्रैंड वैल्यू 2020 में 58,076 मिलियन डॉलर हो गई थी जो अब बढ़कर 59,479 मिलियन डॉलर हो गई है।

यहां हम आपको दुनिया की 5 सबसे अमीर ऑटोमोबाइल कंपनियों की ब्रैंड वैल्यू के बारे में बता रहे हैं तो चलाये जानते हैं :-

टोयोटा (Toyota)

Toyota ने दुनिया की सबसे अमीर ऑटोमोबाइल कंपनी की लिस्ट में पहले नंबर पर कब्जा किया है। कंपनी मर्सेडीज बेंज को पीछे छोड़ नंबर 1 पोजीशन पर कब्जा किया और दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी बन गई है।

मर्सेडीज बेंज (Mercedes-Benz)

मर्सेडीज बेंज की कुल ब्रैंड वैल्यू 2021 में घटकर 58,225 मिलियन डॉलर हो गई है। इस कंपनी की पिछले साल यानी 2020 में ब्रैंड वैल्यू 65,041 मिलियन डॉलर थी।

फॉक्सवैगन (Volkswagen)

फॉक्सवैगन की साल 2021 में ब्रैंड वैल्यू बढ़कर 47,020 मिलियन डॉलर हो गई। वहीं 2020 में कंपनी बैंड वैल्यू 33,897 मिलियन डॉलर थी। इस लिस्ट में यह कंपनी तीसरे स्थान पर रही।

बीएमडब्ल्यू (BMW)

बीएमडब्ल्यू लग्जरी ऑटोमोबाइल बनाने के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस कंपनी की ब्रैंड वैल्यू 2021 में 40,447 मिलियन डॉलर रही। वहीं पिछले साल यह वैल्यू 40,483 मिलियन डॉलर थी।

पोर्श  (Porsche)

इस कंपनी ने भी साल 2021 में अपनी ब्रैंड वैल्यू में इजाफा किया। 2021 में 34,326 मिलियन डॉलर के साथ यह कंपनी टॉप 5 में जगह बनाने में कामयाब रही। वहीं 2020 में यह वैल्यू 33,911 मिलियन डॉलर थी।

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अगर बात-बात पर आता है गुस्सा, तो जानें कैसे करें कंट्रोल?

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गुस्सा आना सुनने में बड़ी छोटी सी बात लगती है, लेकिन यह एक बड़ी गंभीर समस्या है। आजकल हर किसी को बड़ी जल्दी गुस्सा आ जाता है, यहां तक कि सबसे शांत व्यक्ति को भी कभी-कभी गुस्सा आ जाता है।

गुस्सा आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और हम इसे कंट्रोल भी कर लेते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे कंट्रोल नहीं कर पाते। ज्यादा गुस्सा आने से आपकी मानसिक स्थिति पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है और शरीर में नई बीमारी भी पैदा होती है, जैसे चिंता, अवसाद, सिरदर्द, नकारात्मकता और बीपी की समस्या आदि।

यदि आप इस आदत से तंग आ चुके हैं और इससे निजात पाना चाहते हैं तो आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ बेहद आसान तरीके बताने जा रहे हैं जो आपको गुस्सा कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं, तो चलिए जानते हैं

अपना मन पसंद गाना सुनें

अच्छा संगीत आपके गुस्से और मन दोनों को शांत करता है। म्यूजिक थेरेपी मन में पनपने वाले नकारात्मक विचारों को रोक सकता है। अच्छा संगीत सुनने से आपका ध्यान उस बात से हट जाएगा जिससे आपका गुस्सा और कम जायेगा।

अपने दोस्त से बात करें

इसी तरह, अगर आपका कोई भरोसेमंद दोस्त है, जिससे आप हमेशा अपनी भावनाओं को उनके सामने व्यक्त कर सकते हैं तो उससे बात करें। आप कैसा महसूस करते हैं, इस बारे में किसी को बताने या बात करना हमेशा आपके गुस्से को बाहर निकालने का एक सहायक तरीका है।

इन शब्दों से खुद को शांत करें

जब आपका दिमाग परेशान करने वाले विचारों से भर जाता है और आप कुछ नहीं कर सकते हैं, तो संभावना है कि आप बहुत क्रोधित होंगे।

ऐसे समय में आप शब्दों में सुकून ढूंढ सकते हैं। रिलैक्स, टेक-इट-इजी, और यू-विल-बी ओके, जैसे शब्द या वाक्यांश सभी अच्छे उदाहरण हैं।

कुछ समय अकेले बिताएं

यदि आपकी किसी से अभी-अभी व्यक्तिगत रूप से या किसी कॉल पर झगड़ा हुआ है, तो यह जरूरी है कि आप अकेले रहने के लिए कुछ समय निकालें।

एक शांत कमरे में 15 सोएं और लोगों के आसपास रहने से कुछ समय के लिए बचें । इससे आपको वह शांति मिलेगी जिसकी आपको आवश्यकता है और इसके बारे में सोचने का समय भी मिलेगा।

टहलने निकल जाएं

पैदल चलने से आप अपने गुस्से को नियंत्रित कर सकते हैं। यह न केवल आपकी सभी मांसपेशियों को आराम देता है बल्कि आपको शांत करने में भी मदद करता है।

इसके अलावा यह आपको प्रक्रिया के बारे में सोचने का अधिक समय भी देता है। जब भी गुस्सा आए, तो बिना ज्यादा बात किए वहां से उठना और थोड़ा टहल कर आना बेहतर विकल्प है।

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