भारत में माँ नवदुर्गा से जुड़े 9 खास मंदिर

नवदुर्गा के सभी रूप माता पार्वती से जुड़े हुए हैं। माता पार्वती के इन रूपों में उनके पुरे जीवन और चरित्र समाया हुआ है। उन्हें अम्बा और दुर्गा भी कहा जाता है। वैसे तो उनके इन 9 रूपों के देशभर में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन इनमे से कुछ खास और प्राचीन मंदिर हैं। जिनका वर्णन इस प्रकार है।

ज्वाला जी मंदिर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश (Maa Jwala Ji Temple, Kangra, Himachal Pradesh)

हिमाचल के इस मंदिर में मां नवदुर्गा के नौ रूपों की ज्योति जलती रहती है।  इन नौ ज्योतियों के नाम हैं l महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजीदेवी. इन सभी माताओं के दर्शन ज्योति रूप में होते हैं। इस मंदिर को जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। यहां माता सती की जीभ गिरी थी।

मनसा देवी, हरिद्वार, उत्तराखंड  (Mansa Devi Temple, Haridwar, Uttarakhand)

इस मंदिर में मान्यता है कि यहाँ भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, इसीलिए इस मंदिर का नाम मनसा देवी पड़ा। इस मंदिर में मौजूद पेड़ की शाखा पर भक्त पवित्र धागा बांधते है। मन्नत पूरी होने के बाद वो भक्त यहां वापस आकर धागे को खोलते हैं।

पाटन देवी, बलरामपुर, उत्तर प्रदेश (Devi Patan Temple, Uttar Pradesh)

इस स्थान पर माता सती का दायां कंधा गिरा था। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सीता धरती मां की गोद में समाकर पाताल लोक चली गईं। इसीलिए इस स्थान का नाम पावालेश्वरी देवी पड़ा। इस मंदिर को कोई प्रतिमा नहीं है, सिर्फ एक चांदी का चबूतरा है, जिसके नीचे सुरंग ढकी हुई है।

नैना देवी मंदिर, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश (Naina Devi, Bilaspur, Himachal Pradesh)

मां नवदुर्गा के इस प्रसिद्ध मंदिर में यह मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती के नेत्र गिरे थे।  यहां शेरा वाली माता के अलावा काली माता और भगवान गणेश की प्रतिमा भी विराजमान है। मंदिर के पास ही एक गुफा भी है, जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है।

करणी माता मंदिर, बिकानेर, राजस्थान (Karni Mata Temple, Bikaner, Rajasthan)

मां नवदुर्गा का यह प्रसिद्ध मंदिर भी 51 शक्ति पीठों में से एक है। इस मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर के बारे में टीवी में सुना और देखा होगा।  इस मंदिर में करीब 20 हज़ार के आस-पास चूहे रहते हैं।  चूहों के अलावा यहां करणी माता की प्रतिमा स्थापित है। इन्हें मां जगदम्बा का अवतार माना जाता है।

अम्बाजी मंदिर, बनासकांठा, गुजरात (Ambaji Temple, Banaskantha, Gujarat)

अम्बाजी मंदिर में माता सती का दिल गिरा था। लेकिन यहां  कोई भी प्रतिमा नहीं रखी हुई है, बल्कि यहां मौजूद श्री चक्र की पूजा की जाती है।  यह मंदिर माता अम्बाजी को संर्पित है और यह गुजरात का सबसे प्रमुख मंदिर है।

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी, असम (Kamakhya Temple, Guwahati)

इस स्थान पर माता सती की योनी गिरी थी, इसीलिए यहां रक्त में डूबे हुए कपड़े का प्रसाद दिया जाता है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि तीन दिन जब मंदिर के दरवाजे बंद किए जाते हैं, तब मंदिर में एक सफेद रंग का कपड़ा बिछाया जाता है जो मंदिर के दवार खोलने तक लाल हो जाता है। यह मंदिर रजस्वला माता की वजह से ज़्यादा प्रसिद्ध है।

महागौरी मंदिर, लुधियाना (Mahagauri Temple, Ludhiana)

माता की आठवीं शक्ति महागौरी का मंदिर पंजाब के लुधियाना और यूपी के वाराणसी में स्थित है। माता का वर्ण पूर्णत: गौर अर्थात गौरा (श्वेत) है, इसीलिए वे महागौरी कहलाती हैं। ऐसा भी कहा जाता है, कि तप से उनका शरीर काला पड़ गया था, तो शिवजी ने उन्हें गौर वर्ण का वरदान दिया था।

सिद्धिदात्री मंदिर, सतना (Siddhidatri Temple, Satna)

माता की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री का मंदिर मध्यप्रदेश के सागर जिले में स्थित है। माता के अन्य प्रसिद्ध मंदिर यूपी- वाराणसी, सतना- मध्यप्रदेश और देवपहाड़ी- छत्तीसगढ़ में भी हैं। देवी अपने समर्पित भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि दे देती हैं, इसीलिए उन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है।

चाणक्य नीति: यह है व्यक्ति के लिए सबसे कीमती आभूषण

ज्ञान व्यक्ति का सबसे कीमती धन है, इस विषय को आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से समझाया है। आचार्य चाणक्य को ज्ञान का मंदिर माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चाणक्य नीति के कारण कई युवाओं ने अपने जीवन में एक बड़ा बदलाव महसूस किया है।

आचार्य चाणक्य की गिनती दुनिया के उन सर्वश्रेष्ठ विद्वानों में होती है जिन्हें सभी विषयों का विस्तृत ज्ञान था। राजनीति, अर्थशास्त्र, कूटनीति में कुशल आचार्य जी ने यह भी बताया था कि मनुष्य का सबसे कीमती आभूषण क्या है, जिसकी सहायता से वह विश्व का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति बन सकता है।

आज हम इस पोस्ट में जानेगें कि चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति के लिए सबसे कीमती आभूषण क्या है तो आइए जानते हैं:-

अधमा धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमाः।
उत्तमा मानमिच्छन्ति मानो हि महतां धनम्॥

इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने बताया है कि निम्न स्तर का व्यक्ति हमेशा धन की कामना करता है, मध्यम वर्ग धन और सम्मान की कामना करता है। वहीं, उच्च स्तर के व्यक्ति को केवल सम्मान की चिंता रहती है।

इसलिए सम्मान सबसे कीमती आभूषण है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को पैसा कमाने से ज्यादा सम्मान अर्जित करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक सम्मानित व्यक्ति को कभी भी पैसे की चिंता नहीं होती है।

हस्तस्य भूषणं दानं सत्यं कण्ठस्य भूषणम् ।
श्रोत्रस्य भूषणं शास्त्रं भूषणैः किं प्रयोजनम् ॥

चाणक्य नीति के इस श्लोक में बताया गया है कि व्यक्ति के हाथ का आभूषण दान है, गले का आभूषण सत्य है और कान केवल शास्त्रों को सुनने से ही सुशोभित होते हैं, इन आभूषणों के होने पर अन्य आभूषणों की क्या आवश्यकता है।

इसलिए आचार्य चाणक्य कह रहे हैं कि ऐसे गहनों के पीछे नहीं भागना चाहिए जिनमें खो जाने का भय हो या हमेशा खो जाने का खतरा बना रहता हो।

बल्कि उसे अपने व्यावहारिक आभूषण को और परिष्कृत करना चाहिए। उसे खोने का डर नहीं होता और जो ज्यादा पाता है वही इंसान को दुनिया का सबसे अच्छा इंसान बनाता है।

यह भी पढ़ें :-

आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोग धनवान बनते हैं, जो जीवन में रखते हैं इन बातों का ध्यान!

जानिए नींबू के पत्तों से होने वाले चमत्कारी फायदे!!

नींबू विटामिन-सी से भरपूर होता है जो सेहत के लिए अच्छा होता है। हम जानते हैं कि रोजाना नींबू पानी पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नींबू के पत्ते औषधीय गुणों के मामले में भी नींबू से कम नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नींबू के पत्तों का सेवन और पत्तियों को सूंघने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

नींबू के पत्ते आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन बी1, प्रोटीन, वसा, फ्लेवोनोइड, राइबोफ्लेविन, एल्कलॉइड, टैनिन, फेनोलिक तत्व, साइट्रिक एसिड जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें एंटीवायरल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीहेल्मिंटिक, एंटी-फ्लैटुलेंट, एंटीमाइक्रोबायल, एंटी-कैंसर, एंटी-इंफ्लैमेटरी गुण शामिल हैं।

किडनी स्टोन

किडनी में स्टोन की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो नींबू के पत्ते का सेवन बहुत ही ज्यादा फ़ायदेमन्द साबित हो सकता है। इसके पत्ते में सिट्रिक एसिड की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो स्टोन की समस्या को दूर करने में असरदार होती है। इसके लिए रोजाना नींबू के पत्ते तो खाएं हीं वहीं इसके पत्तों से बना काढ़ा भी फ़ायदेमन्द साबित हो सकता है।

माइग्रेन की दवा

एक स्टडी के मुताबिक, माइग्रेन के मरीजों के लिए नींबू के पत्ते अच्छे होते हैं। नींबू के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं और माइग्रेन से राहत दिलाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नींबू के पत्तों को सूंघने से माइग्रेन और मानसिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

सिर दर्द की समस्या हो जाती है दूर

नींबू के पत्ते के रोजाना सेवन से सिरदर्द की समस्या दूर होने में बहुत ही ज्यादा मदद मिलती है। ये एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी इन्फ्लामेट्री के जैसे कई सारे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसलिए स्ट्रेस को कम करना चाहते हैं या दूर करना चाहते हैं तो इसके पत्तों का रोजाना सुबह के खाली पेट सेवन कर सकते है। रोजाना सुबह खाली पेट नींबू के 4-5 पत्तों का गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।

अनिद्रा दूर होगी

एक शोध से पता चला है कि नींबू के पत्ते अनिद्रा के मरीजों के लिए दवा का काम करते हैं। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड और एल्कलॉइड अनिद्रा को दूर कर सकते हैं। ऐसे में आप भी यदि अनिद्रा की समस्या से ग्रसित रहते हैं तो इसके पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं नींबू के पत्तों से बना हुआ तेल से यदि सिर में मसाज करते हैं तो भी आपको जल्दी नींद आने में मदद मिलती है। वहीं इसका सेवन करते हैं तो शरीर को भरपूर मात्रा में अल्कालॉइड मिलता है जो नींद न आने की समस्या को दूर करता है।

वजन कम करना

जानकारों का कहना है कि अगर आप नींबू के पत्ते का सेवन करेंगे तो आपका वजन कम होगा। नींबू के पत्तों में पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर होता है। यह वजन घटाने में असरदार तरीके से काम करता है। अगर आप पानी में नींबू के पत्ते डालकर उबाल लें, चाय बनाकर पी लें, तो आपका वजन तेजी से कम होगा।

पेट के कीड़ों को मारने में कारगर

नींबू के पत्तों में कृमिनाशक गुण होते हैं। नींबू के पत्ते पेट के कीड़ों को मारने में कारगर होते हैं। नींबू के पत्तों की चाय बनाकर शहद के साथ पीने से पेट के कीड़े मर जाएंगे।

कैसे करें इस्तेमाल?

नींबू के पत्ते सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। लेकिन, उन्हें सीधे चबाया नहीं जाना चाहिए। इन्हें पानी में उबालकर चाय बनानी चाहिए। चार ताजे नींबू के पत्तों को एक गिलास उबलते पानी में तीन घंटे तक भिगोकर पिया जा सकता है।

यह भी पढ़ें :-

मानसिक तनाव बढ़ा सकते हैं ये खाद्य पदार्थ

0

आज के समय में मानसिक तनाव व्यक्ति के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। डिप्रेशन के कारण व्यक्ति कई तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन चीजों का सेवन करने से व्यक्ति की यह समस्या बढ़ सकती है। मानसिक तनाव से बचने के लिए इन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

मानसिक तनाव की समस्या से बचने के लिए व्यक्ति को फास्ट फूड का सेवन नहीं करना चाहिए। अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग अधिक फास्ट फूड का सेवन करते हैं उनमें अवसाद के शिकार होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए फ्राई मोमोज, बर्गर और पिज्जा जैसी चीजों से दूर रहना चाहिए।

विशेषज्ञ सभी लोगों को रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से परहेज करने की सलाह देते हैं। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का ज्यादा सेवन हृदय के रोग, मधुमेह या मोटापे के जोखिम को बढ़ाने के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य संगठनों द्वारा किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने वालों में चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है।

डिप्रेशन को बढ़ाने के लिए शराब भी जिम्मेदार है। शराब व्यक्ति का मूड खराब करती है क्योंकि यह शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है।

मीठे खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव का कारण बनने के साथ ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करते हैं। कई लोगों में ऐसे खाद्य पदार्थ मूड संबंधी समस्याओं का भी कारण बन सकते हैं।

ऐसे में उन सभी खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए जिसमें एडेड शुगर की मात्रा अधिक हो। संरक्षित फलों के रस, जैम, कैचप और सॉस ऐसे ही खाद्य पदार्थों का श्रेणी में आते हैं। इनका ज्यादा समय तक सेवन करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

यह भी पढ़ें :-

किंग कोबरा को इसलिए सांपों का किंग माना जाता है, जानिए 10 बातें!

किंग कोबरा एक लम्बे माप और बड़े आकार का सांप है। संभवत: यह धरती पर पाए जाने वाले सभी सांपों में सबसे डरावना सांप है। किंग कोबरा अपने आकार और जानलेवा डंक के लिए जाना जाता है।

इस अद्वितीय सांप की कुछ खासियत हैं जैसे कि इसकी अलग तरह की आवाज, घोंसला बनाने की कला और एक अद्वितीय रंग और आकार जो कि इसे अन्य सांपों से अलग मुकाम में स्थान दिलाता है।

किंग कोबरा दुनिया का सबसे लम्बा ज़हरीला सांप है

किंग कोबरा दक्षिणी एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया (भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया आदि) में पाया जाता है। आमतौर पर १० फ़ीट से लेकर १३ फ़ीट तक लम्बा होता है लेकिन कभी-२ इससे ज्यादा लम्बा भी पाया जाता है।

२० सदी के मध्य में ब्रिटेन के लंदन जू में एक किंग था जिसे कि मलेशिया में पकड़ा गया था। सिर से लेकर पूँछ की नोक तक यह किंग कोबरा 18 फुट 9 इंच लम्बा था।था न सच में किंग!

तकनीकी रूप से, यह “कोबरा” है ही नहीं

अपने नाम के बावजूद किंग कोबरा को वास्तव में कोबरा (नाग, English: Naja) प्रजाति का सांप नहीं माना जाता है। किंग कोबरा वास्तव में Ophiophagus प्रजाति का सांप है जो असली कोबरा प्रजाति से तकनीकी रूप से भिन्न है।

अनुवांशिक प्रमाणों से पता चलता है कि यह विशाल सांप दरअसल असली कोबरा सांप के बजाये उप-सहारा अफ्रीका में पाए जाने वाले खतरनाक माम्बा सांप से अधिक मेल खाता है।

शरीर की बनावट के हिसाब से जो चीज़ किंग कोबरा को असली कोबरा से अलग करती है वो है इसका संकरा(narrow) फन। Naja प्रजाति  के कोबरा का फन अधिक फैला हुआ होता है।

किंग कोबरा का सिर इसके शरीर के अनुपात में लम्बा होता है, और इसकी गर्दन के आधार में दो फैले हुए शल्क(scales) होते हैं जो कि असली कोबरा में नहीं पाए जाते।

किंग कोबरा गुर्राता है

खतरे की स्थिति में यह अपने हुड यानी फन को फैला लेता है ताकि वह खुद को बड़ा दिखा सके और यह अपने आप को जमीन से 6 फीट तक ऊंचा उठा लेता है। कई बार यह अपनी आवाज से भी चेतावनी दे सकता है।

अधिक खतरे की स्थिति में यह लम्बी सांस खींच कर उसे तेजी से अपने मुँह और नथुने से बाहर निकालता है जिससे एक भयभीत करने वाली भयंकर फुंफकार सुनाई देती है। सांपों के द्वारा की गयी सामान्य फुंफकार से बिलकुल अलग होती है।

इसका ज़हर तंत्रिका प्रणाली पर असर करता है

किंग कोबरा का ज़हर काटे गए जीव की तंत्रिका प्रणाली(nervous system) पर असर करता है जिससे शीघ्र बेहोशी, आखों की रौशनी धुँधलाना और शरीर को लकवा मारना जैसे प्रभाव दिखाता है ।

इसके एक दंश में लगभग 2 छोटे चम्मच ज़हर जितना ज़हर अपने शिकार के शरीर में छोड़ता है जो कि एक सामान्य व्यक्ति को 30 मिनट में और 5400 किलोग्राम वज़न के एक हाथी को 3 घंटे में मौत की नींद सुला सकता है।

यह ज्यादातर दूसरे सांपों को खाता है

असली कोबरा के भोजन में मुख्यत: मेंढक, छिपकलियां, टिड्डे, चूहे, पक्षी और मछली शामिल होते हैं। इसके विपरीत किंग कोबरा के भोजन का मुख्य भाग दूसरे सांप ही होते हैं।

यह विष-रहित रैट-स्नेक (rat snake) से लेकर ज़हरीले क्रेटस, असली कोबरा की विभिन्न प्रजातियों और अपने ही प्रजाति के किंग कोबरा तक को अपना शिकार बनाते हैं। दरअसल इसकी प्रजाति Ophiophagus का अर्थ ही सांपों को खाने वाली प्रजाति होता है।

नर किंग कोबरा मादा के लिए लड़ते हैं

बहुत सारी अन्य पशुओं की तरह नर किंग कोबरा भी मादा किंग कोबरा के लिए झगड़ते हैं. वे एक दूसरे के सामने जमीन से 4-6 फुट तक खड़े हो जाते हैं और एक दूसरे पर लिपट कर, दूसरे को ज़मीन पर गिरा कर बाजी मारने की कोशिश करते हैं. हालाँकि ये एक दूसरे को डसते नहीं हैं क्योंकि इन पर एक दूसरे किंग के ज़हर का असर नहीं होता।

किंग कोबरा दिन के दौरान मुख्य रूप से सक्रिय होते हैं

जहाँ दूसरे सांप रात के समय अधिक सक्रिय होते हैं किंग दिन के समय सक्रिय होते हैं रात के समय विश्राम करते हैं

एकमात्र सांप जो घोंसला बनाता है

एक और जहाँ दूसरे सांप कहीं भी अंडे दे देते हैं, किंग कोबरा एक मात्र सांप है जो घोंसला बनाता है. मादा कोबरा को घोंसला बनाने में ही ३-४ दिन लग जाते हैं. मादा कोबरा इस घोंसले में २० -३० अंडे देती है और बिना कुछ खाये-पिए इन्हे अगले २-३ महीने तक सेकती है जब तक कि ये फूटने वाले नहीं हो जाते।

२० साल तक जीते हैं

देख-रेख और सुरक्षा में किंग कोबरा का औसत जीवनकाल १७.१ साल का है. एक किंग कोबरा की प्रमाणित आयु २२ साल रिकॉर्ड की गयी है.

अच्छे क्लाइम्बर्स और तैराक

किंग ऊंचाई पर चढ़ने में माहिर होते हैं. एक किंग कोबरा को एक पिट-वाईपर सांप का ६५ फ़ीट की खड़ी चढ़ाई पर पीछा करते देखा गया है. ये तैरने में भी माहिर होते हैं.

(Special thanks to this post)

नयी पोस्ट की जानकारी के लिए हमारे फेसबुक पेज को LIKE करें।

मिलती जुलती पोस्ट्स:
भारत में 5 जगह जहां पाया जाता है कोबरा
दुनिया के 10 सबसे ख़तरनाक और जहरीले सांप!!!
सांपों से जुड़े रोचक और जानने योग्य तथ्य!
भारत के 6 सबसे विषैले और घातक सांप

दुनिया के कुछ ख़तरनाक रेल रूट – कहीं है 4,220 मीटर ऊंचाई तो कहीं है गहरी खाई

आप सब ने रेल में सफ़र तो किया ही होगा। बहुत से लोगों को रेल में सफ़र करना बहुत अच्छा लगता है। कुछ लोग तो बाहर का नज़ारा देखने के लिए खिड़की वाली सीट पर ही बैठना पसंद करते है। रेल का सफ़र करते समय रास्ते में खेत, नदियाँ, झरने, पहाड़ आदि ये सब देखने को मिलते है।

19वीं शताब्दी में आई रेल क्रांति ने दुनिया का चेहरा बदल कर रख दिया है। एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में बहुत ख़तरनाक रेल रूट बनाये जा चुकें है। लेकिन ये रूट आज इंजीनियरिंग की मिसाल भी है। आज हम आपको दुनिया के सबसे ख़तरनाक ट्रेन रूट्स के बारे में बताने जा रहे है।

चेन्नई रामेश्वरम् रूट, इंडिया

2.06 लम्बा यह पुल दक्षिण भारतीय महानगर चेन्नई को रामेश्वरम से जोड़ता है और इस को तमिलनाडु का पामबान रेलवे ब्रिज कहते है। यह पुल समुद्र पर 1914 में बनाया गया था। यह पुल बीच में से खुलता भी है और इसे जहाजों को निकालने के लिए खोला जाता है। समुद्र पर बना होने के कारण ये ट्रैक भारत का सबसे खतरनाक ट्रैक है।

कंक्रीट के 145 स्तंभों पर टिके इस पुल को समुद्री लहरों और तूफानों से हमेशा खतरा बना रहता है। यह भारत का पहला सी ब्रिज है। इस सफ़र के दौरान सब कुछ नीला दिखाई देता है, ऊपर आसमान नीला, नीचे समुद्र में बहता पानी भी नीला। जिस वक़्त इस पुल से ट्रेन पानी को चिरती हुई जाती है, तो देखने में बहुत ही भयानक लगता है, लेकिन उतना खूबसूरत भी लगता है।

ट्रेन अ लास न्यूब्स, अर्जेंटीना

इस ट्रेन रूट को ट्रेन ऑफ क्लाउड्स भी कहा जाता है। इस पुल की लम्बाई 217 किमी है। एंडीज पर्वतमाला से गुज़रने वाला ये रास्ता उत्तर पश्चिमी अर्जेंटीना से होकर चिली की सीमा तक जाता है। इस पुल के नीचे हजारों फीट गहरी खाई है और ऊपर चलती ट्रेन में डर तो लगता ही है, लेकिन लोगों को आंनद भी आता है। यह रेल ट्रैक कुल 21 सुरंगों और 13 पुलों से होकर गुज़रता है। 4,220 मीटर की ऊंचाई पर काम करना इंजीनियरों और कारीगारों के लिए बहुत मुश्किल था।

यह पुल बनने में 27 साल लगे थे। बहुत मेहनत के बाद यह रेल रूट 1948 में बनकर तैयार हुआ था। इस रेलवे लाइन को सामाजिक और आर्थिक उद्देश्य से बनाया गया था। लेकिन अब ये टूरिस्ट ट्रेन के नाम से मशहूर हो गया है। इस ट्रेन रूट में इतने घुमाव आते हैं कि जैसे पटरियों पर ट्रेन नहीं सांप घूम रहा हो।

असो मिनामी, जापान

ये रेल रूट जापान के सबसे बड़े सक्रिय ज्वालामुखी, कुमामोटो के इलाके से होकर गुज़रता है। यह ज्वालामुखी कभी भी फट सकता है। इसी कारण इस ट्रेन रूट पर सफ़र करने वालों के लिए यहां हमेशा ख़तरा बना रहता है। कुछ साल पहले  ज्वालामुखी से जहरीली गैस निकलती थी, जो रेलवे ट्रैक तक भी पहुँच जाती थी। यह जहरीली गैस ट्रेन में सफ़र करने वालों के लिए ख़तरनाक साबित हो रही थी। इसीलिए इस ट्रैक को बंद कर दिया गया था। थोड़े टाइम के बाद फिर इस ट्रैक को शुरू कर दिया गया, क्योंकि जोखिम भरा यह ट्रैक लोगों को बहुत पसंद आया था।

कुरांडा सीनिक रेलरोड, ऑस्ट्रेलिया

यह ट्रैक 1882 से 1891 के बीच बना था। 34 किलोमीटर का यह रास्ता विश्व धरोहर बैरन नेशनल पार्क और मैकएलिस्टर रेंज को जोड़ता है। यह ट्रैक घने उष्णकटिबंधीय वर्षावन से होकर गुज़रता है। इस ट्रैक के पास एक बड़ा झरना बहता है। जब ट्रेन इस ट्रैक से गुज़रती है, तो झरने का पानी ट्रेन में बैठे लोगों को जमकर भिगोता है। इस ट्रेन रूट पर कई झरने, तीखे मोड़ और गहरी खाइयां आती हैं।

द डेथ रेलवे ट्रैक, थाईलैंड

जब इस ट्रेन रूट का निर्माण हो रहा था, उस वक़्त 90 हज़ार कर्मचारियों और 16 हज़ार कैदियों की मौत हो गई थी। जिस कारण इस ट्रैक का नाम “दी डेथ रेलवे” पड़ गया था। उन सब कर्मचारियों की मौत नदी में गिरने से हुई थी। इस  ट्रैक की लंबाई 415 किलोमीटर है। इस ट्रैक का रास्ता बहुत ही ज़्यादा ख़तरनाक है। इस ट्रैक की चौड़ाई बहुत कम है और बहुत से मोड़ों पर ऐसा लगता है कि ट्रेन हवा में उड़ रही हो। इतना खतरनाक होने के कारण इस ट्रैक को 1947 में बंद कर दिया गया था।

कम्ब्रेस एंड टोलटेक सीनिक रेलरोड, न्यू मेक्सिको

यह ट्रैक अमेरिका के न्यू मेक्सिको में दो पहाड़ों के बीच में है। यह ट्रैक 1880 में बनाया गया था। इस ट्रैक की ऊंचाई बहुत ज़्यादा है। अमेरिका के कॉलोराडो में बने जॉर्जटाउन लूप इस रेल रूट को दो पहाड़ों को जोड़ने के लिए बनाया गया था। यह अमेरिका की सबसे ऊंची रेलवे ट्रैक है। रॉकी पर्वतमाला से गुज़रने वाले इस रूट पर आज भी कोयले और भाप इंजन की मदद से ट्रेनें चलती हैं।

यह भी पढ़ें :-

कंप्यूटर की C Language के बारे में रोचक तथ्य

वास्तु टिप्स: पैसों की तंगी से छुटकारा पाने के लिए आज घर लाएं ये चीजें!

वास्तु टिप्स: हर व्यक्ति की यही ख्वाहिश होती है कि वह बहुत अमीर हो और उसे किसी चीज की कमी न हो। इस सपने को पूरा करने के लिए वह लगातार मेहनत करता है। एक बेहतर जीवन जीने और पैसे कमाने के लिए वह सम्भव प्रयास करता है।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर कोई इन चीजों में सफल हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में दोषों के कारण भी धन की हानि होती है। इसलिए लोग जितनी मेहनत कर सकते हैं उतनी मेहनत करते हैं लेकिन उसे वांछित सफलता और धन नहीं मिलता है।

ऐसे में वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कुछ ऐसी चीजें रखने के बारे में बताया गया है। जिन्हें रखने से वास्तु दोषों से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।

इस पोस्ट के माध्यम से जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में किन वस्तुओं को रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

भगवान गणेश की तस्वीर

वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार के दोनों ओर गणेश जी के चित्र लगाएं। आप चाहें तो एक मूर्ति भी रख सकते हैं। ऐसा करने से घर का वास्तु दोष कम होता है, जिससे सुख-समृद्धि आती है।

तुलसी का पौधा

वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी का पौधा धन और समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए तुलसी का पौधा घर के ईशान कोण में लगाना चाहिए। इसे शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इससे घर में धन की प्राप्ति होगी।

कुबेर यंत्र

भगवान कुबेर को धन और समृद्धि का देवता माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के उत्तर पूर्व कोने पर भगवान कुबेर का शासन होता है इसलिए इस दिशा में शौचालय, जूते की रैक या भारी फर्नीचर जैसी चीजें नहीं रखनी चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। समृद्धि के लिए उत्तर की दीवार में कुबेर यंत्र स्थापित करना चाहिए।

तिजोरी या अलमारी

वास्तु के अनुसार घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में पैसों के अलावा सभी कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज रखें। इसके साथ ही घर या ऑफिस में लॉकर इस तरह रखें कि उसका दरवाजा उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर खुले। ऐसा करने से आपको पैसों की कमी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मंदिर में प्रतिदिन दीप जलाएं

वास्तु के अनुसार रोज सुबह शाम घर के मंदिर में दीपक जलाएं। ऐसा करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है। मंदिर में देवी लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति भी अवश्य रखें। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

यह भी पढ़ें :-

देखिए बिल्ली और मछली के अनोखे रिश्ते का खूबसूरत वीडियो

जानवरों और पक्षियों के वीडियो और फोटो अक्सर लोगों को खूब लुभाते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसी कई वीडियो वायरल होती रहती हैं। इनमें से कई हैरान कर देने वाली हैं। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो के शुरू होते ही एक बिल्ली एक खूबसूरत तालाब के किनारे बैठी नजर आ रही है और उसे देखकर मछलियां उसके पास आने लगती हैं। फिर यह बिल्ली मछलियों को प्यार करने लगती है।

मछलियां भी बिल्ली से डरे बिना उसके करीब आती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे मछलियां बारी-बारी से बिल्ली के पास आती हैं और उसे प्यार करने लगती हैं।

इस इमोशनल और खूबसूरत वीडियो को फॉरेस्ट ऑफिसर सुशांत नंदा (IFS Officer Susanta Nanda) ने ट्विटर पर पोस्ट किया है। उन्होंने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा- ‘प्यार बांटने का यह बेहतर तरीका है’ ।

इस वायरल वीडियो को अब तक पांच हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है। लोग मछलियों और बिल्ली की इस बॉण्डिंग  को काफी पसंद कर रहे हैं।

यह भी देखें :-

दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली 10 भाषाएं

कोई भी भाषा या बोली एक व्यक्ति द्वारा अपनी बात को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने का एक माध्यम है। इस धरती पर मानव सभ्यताओं के फलने-फूलने के साथ ही साथ असंख्य भाषाएँ व बोलियाँ आस्तित्व में आयीं। इनमें से कई भाषाएँ सभ्यताओं के पतन के साथ ही खत्म हो गई लेकिन कई सभ्यताएं और भाषाएँ आज भी खूब फल-फूल रही हैं।

अब प्रश्न यह है कि दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा कौन सी है? इसका जबाव प्रमाणिक तौर पर किसी के पास नहीं है. हालांकि यूएन (संयुक्त राष्ट्र) के अनुसार दुनिया भर में बोली जाने वाली कुल भाषाएँ 6809 है और इनमें से सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा मंडारिन है जोकि चीन की राजकीय भाषा भी है।

इसके साथ ही इस लेख में हम आपके लिए दुनिया भर में सबसे अधिक बोले जाने वाली 10 भाषाओं के बारे में जानकारी लेकर आए हैं। तो ये रही सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषाएँ (ऊपर से नीचे के क्रम में)

स्टैंडर्ड चायनीज अथवा मैंडरिन/मंडारिन

मानक चीनी (Standard Chinese) या मैंडरिन भाषा पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सिनो-तिब्बतीयन (Sino-Tibbetean) भाषा-परिवार की मैंडरिन दरअसल उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी चीन के अधिकांश क्षेत्रों में बोली जाने वाली चाईनीज़ भाषा की अलग-2 शाखाओं का एक समूह है।

देशी वक्ता (बोलने वाले स्थानीय निवासी): 91 करोड़ (910 मिलियन)
गैर-देशी वक्ता (विदेश में बोलने वाले): 20 करोड़ (200 मिलियन)
कुल वक्ता: 1.11 बिलियन
भाषा का नाम: 普通话 (पुंटोंघूआ;Putonghua)
भाषा परिवार: सिनो-तिब्बतीयन (Sino-Tibetan)
संबन्धित भाषाएँ: केंटोनीज़ (Cantonese), तिब्बतीयन (Tibetan), बर्मीज(Burmese)

मैंडरिन सीखें अब आसानी सेचूंकि चीनी मैंडरिन विश्व में सबसे अधिक बोली जाती है इसे सीखना एक शानदार अनुभव और कौशल साबित हो सकता है। यह किताब चीनी पढ़ना और लिखना आसान बना सकती है। इसमें 2,349 चीनी अक्षर और 5,000+ युग्म दिये गए हैं।

अंग्रेजी

मूल रूप से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में बोली जाने वाली अंग्रेजी भाषा लगभग 983 मिलियन लोगों के बातचीत का जरिया है। अंग्रेजी दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।

हिंदी

दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी तीसरे नंबर पर है। दुनिया में तकरीबन 55 करोड़ लोग इस भाषा को समझ सकते हैं। हिंदुस्तान में लगभग 45 करोड़ नागरिकों की बातचीत का जरिया हिन्दी भाषा ही है।

स्पेनिश

अंग्रेजी की तरह यह भाषा भी काफी देशों में प्रचलित है। स्पेनिश भाषा को लगभग 527 मिलियन (52 करोड़ 70 लाख) लोग बोलते हैं। स्पेनिश भाषा इन देशों की मुख्य या राजभाषा है: स्पेन, अर्जेंटीना, चिली, बोलीविया, पनामा, परागुए, पेरू, मेक्सिको, कोस्टा रिका, एल सैल्वाडोर, क्यूबा, उरुग्वे, वेनेजुएला, आदि।

रूसी भाषा

रूसी भाषा, पूर्वी स्लाविक भाषाओं में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। रूस क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा देश है। रूस की कुल जनसंख्या 14.3 करोड़ है। रूसी यूरोप की एक प्रमुख भाषा तो है ही, विश्व की प्रमुख भाषाओं में भी इस का विशेष स्थान है। रूसी भाषा लगभग 20 करोड़ से भी ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती हैं।

अरबी

अरबी भाषा, सामी भाषा परिवार की एक भाषा है। यह भाषा इब्रानी भाषा से सम्बन्धित है। अरबी भाषा, अरबी इस्लाम धर्म की बोली है, जिसमें क़ुरान-ए-शरीफ़ लिखी गयी है। अरबी भाषा सऊदी अरब, कुवैत, यूएई, ओमान, यमन, बहरीन, सीरिया, जॉर्डन, लेबनॉन, इराक और इजिप्ट (मिस्र) में बोली जाती हैं। इस भाषा को बोलने वालों की संख्या लगभग 246 मिलियन है।

बंगाली भाषा :

बंगाली भाषा बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत के त्रिपुरा तथा असम राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। इस भाषा को 211 मिलियन लोग बोलते हैं।

पुर्तगीज़ भाषा :

पुर्तगाली भाषा, ब्राजील, अंगोला, वेनेजुएला, मोजाम्बिक आदि जगहों पर भी बोली जाती है। यह भाषा दुनिया में लगभग 191 मिलियन लोग बोलते हैं।

[adinserter block=”10″]

मलय-इंडोनेशियन :

भारत के दक्षिण-पूर्व में बसने वाले एशियाई देशों में मलय भाषा ज्यादा लोकप्रिय है। इस भाषा को मूल रूप से मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ब्रुनेई में बोला जाता है। मलय-इंडोनेशियन भाषा, मलय बोधगम्यता के प्रत्येक बिंदु के आधार पर पारस्परिक रूप से निकट भाषाओं का एक समूह है।

[adinserter block=”11″]

फ्रेंच भाषा :

फ्रांसीसी भाषा एक रोमांस भाषा है जो विश्व भर में लगभग 9 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है। इस भाषा को बोलने वाले अधिकतर देश कनाडा, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, अफ्रीकी फ्रैंकोफोन, लक्ज़म्बर्ग और मोनाको हैं। विश्व के 54 देशों में इस भाषा को बोला जाता है।

अगर आप फोन को बगल में रखकर सोते हैं तो हो जाएँ सतर्क..?

आज कल बिना मोबाइल फोन के एक भी पल नहीं गुजरता। अगर हाथ में फोन न हो, तो इसके बिना समय बिताना बहुत मुश्किल हो जाता हैं। फोन हर समय साथ रहता है चाहे आप सो रहे हों या जाग रहे हों, बाथरूम में या बाहर हों।

जब हम सोते हैं तब भी फ़ोन हमारे बगल ही होता है और जानकारों के अनुसार यह आदत सेहत के लिए अच्छी नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 65% वयस्क और 90% किशोर अपने फोन चालू रखकर सोते हैं।

जब वे सुबह उठते हैं तो वे मूडी, थका हुआ और परेशान महसूस करते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि फोन भी इसकी एक वजह है।

इससे मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता, मोटापा, हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा होता है। अगर आप अपने फोन को बगल में रखकर सोते हैं तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा होता है।

दिमाग को खतरा

मोबाइल फोन से हानिकारक रेडिएशन निकलता है। ये हमारे दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा

मोबाइल फोन रेडिएशन के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा सेल फोन से निकलने वाली नीली किरणें नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को बाधित करती हैं। यह सर्कैडियन रिदम (बॉडी क्लॉक) को बाधित करता है। इससे अनिद्रा हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने फोन से आरएफ विकिरण को ‘मानव के लिए कार्सिनोजेनिक‘ के रूप में वर्गीकृत किया है। इससे ग्लियोमा, ब्रेन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

फोन को कितनी दूर रखना चाहिए?

यदि आप फोन को दूर रखते हैं, तो रेडियो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड एनर्जी कम हो जाती है। गंभीर परिणामों से बचने के लिए कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

सोने से पहले फोन का इस्तेमाल न करें..

हम मनोरंजन के नाम पर रात को सोने से पहले फोन के साथ समय बिताते हैं। अगर हम ऐसा करते हैं तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है। रात को सोने से आधा घंटा पहले स्मार्टफोन को पूरी तरह से एक तरफ रख दें..

यह भी पढ़ें :-