‘लिवर’ को स्वस्थ रखने के लिए रखें इन बातों का ध्यान

हमारे शरीर में जाने वाले टॉक्सिन यानी विषैले तत्व लिवर को भेज दिए जाते हैं। वह इन्हें प्रोसैस कर शरीर से बाहर निकालता है। लिवर न सिर्फ हमारे शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है, बल्कि नाजुक भी है।

यह टॉक्सिनों को फिल्टर करने और पित्त बनाने समेत जरूरी कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, मिनरल्स, विटामिन्स आदि तैयार करने में शरीर की मदद करता है।

अपने लिवर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए रखें इन बातों का ध्यान :-

ऑयली फूड से रहें दूर

लिवर के डिटॉक्सीफिकेशन‘ यानी उसे विषैले तत्वों से मुक्त रखने के लिए हमें फैट-फ्री और चिकनाई रहित भोजन लेना चाहिए। कॉलेस्ट्रोल एक ऐसा फैट है जिसे हमारा लिवर सिंथेसाइज करता है, जिसे हमारा शरीर ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम लेता है।

यह हमारे भोजन का अहम हिस्सा तो है, मगर अधिक कॉलेस्ट्रोल वाले भोजन से बचना चाहिए। अधिक कॉलेस्ट्रोल वाले भोजन में लाल मांस, चिकनाई वाला भोजन, शक्कर और नमक आदि शामिल हैं।

ज्यादा कॉलेस्ट्रोल वाला भोजन करने से लिवर की कई बीमारियां हो सकती हैं। इसमें फैटी लिवर, जोकि वर्ल्ड हैल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली बीमारियों में से एक है, शामिल है।

ज्यादा कॉलेस्ट्रोल वाले भोजन की जगह हम रेशेदार सब्जियां और अनाज इस्तेमाल कर सकते हैं। सुबह का नाश्ता जरूर करने के साथ देर से सोना और देर से जागना बंद करना होगा।

कम और समय पर खाएं

भोजन की गलत आदतों का बुरा असर हम पर एक उम्र के बाद पड़ता है, इसलिए कम और समय से भोजन करना जरूरी है। जो लोग लिवर सिरोसिस से पीड़ित रहे हैं, उन्हें ज्यादा प्रोटीन वाला फूड लेना चाहिए।

इससे लिवर खुद को हैल्दी रखेगा और भविष्य में कोई नुक्सान नहीं होगा। लिवर तभी खराब होता है, जब हम कम पोषक तत्वों वाली डाइट लेते हैं। यह सामान्य बात है कि ज्यादा शराब पीने से लिवर खराब हो जाता है।

अल्कोहोलिक ड्रिंक्स ज्यादा लेने से अल्कोहोलिक हैपेटाइटिस और अल्कोहोलिक सिरोसिस जैसी बीमारियां होती हैं। इनसे लिवर डैमेज होता है और उसका साइज बिगड़ जाता है।

प्रोसैस्ड फूड से बचें

हमारा लिवर खराब भोजन को लेकर बहुत संवेदनशील होता है। ज्यादा शुगर के चलते लिवर में फैट जमा होता है, जो इसे डैमेज करता है। यह लिवर सिरोसिस का सबसे बड़ा कारण है। दुर्भाग्य से प्रोसैस्ड और डिब्बाबंद खाने में शुगर ज्यादा और फाइबर न के बराबर होता है।

जहां तक हो सके इससे बचना चाहिए, क्योंकि जो फैट इससे हमारे शरीर में पहुंचता है, वह पेट में जमा होता रहता है और लिवर तक पहुंच जाता है इसीलिए मोटापा और लिवर की बीमारियां आपस में जुड़ी हुई हैं।

कुछ लोग सुबह जल्दबाजी में उठकर काम पर चले जाते हैं, न तो सही से फ्रैश होते हैं और न सुबह का नाश्ता ठीक से लेते हैं, ऐसे में उनका डेली रूटीन बिगड़ जाता है। पेशाब को रोकना लिवर को नुक्सान पहुंचाने के साथ-साथ किडनी को भी नुक्सान पहुंचाता है।

पंजाब केसरी से साभार

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अफ्रीकी बच्चों के समूह का यह प्रदर्शन, आपका दिल छू जाएगा, वीडियो देखें

बच्चों को उनकी मासूमियत और प्रफुल्लता के लिए जाना जाता है, उनकी सरल मुस्कान किसी के भी दिन को रोशन कर सकती है। हाल ही में, मासाका किड्स अफ़्रीकाना नामक एक संगठन, जो युगांडा में स्थित है और उन बच्चों का समर्थन करता है जो अनाथ हैं, अत्यधिक गरीबी में रहते हैं, और दशकों से गृहयुद्ध के शिकार हैं, ने तीन अफ्रीकी बच्चों का एक वीडियो अपलोड किया, जिसने सबका ध्यान आकर्षित किया।

वे विभिन्न लोकप्रिय गीतों पर बच्चों के डांस और लिप-सिंकिंग के वीडियो भी पोस्ट करते हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 4.3 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं।

इस वीडियो में, मसाका बच्चों को एक गाने पर थिरकते देखा जा सकता है। जहां एक बच्चा माइक की तरह अपने सामने स्टिक पकड़कर इम्प्रूव कर रहा है, वहीं दूसरा लड़का पेंट की बाल्टियों से बने ड्रम बजा रहा है। बच्चों को कुछ किलर डांस मूव्स भी करते हुए देखा जाता है जो देखने में काफी दिलचस्प लग रहा है।

 पोस्ट को साझा करते हुए, संगठन ने इसके कैप्शन में लिखा “गुड वाइब्स ऑल द वे हैप्पी संडे!”।

एक इंस्टाग्राम यूजर ने कमेंट किया, ये बच्चे इतने टैलेंटेड हैं और हमेशा मेरे चेहरे पर मुस्कान लाते हैं”। वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘लव इन किड्स

जब मैं इन्हें डांस करते देखता हूँ तो मेरा दिल खिल उठता है। ‘एक तीसरे यूजर ने कमेंट किया, ‘दिस वन इन द बीच में बिल्ट-इन सिंगर है’।

मसाका किड्स अफ़्रीकाना 2 वर्ष और उससे अधिक आयु के अफ़्रीकी बच्चों से बना है। एनजीओ की वेबसाइट का कहना है कि इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिन्होंने युद्ध, अकाल या बीमारी के कारण माता-पिता को खो दिया है।

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इंग्लैंड का अनोखा निर्वस्त्र गांव जहाँ कोई भी कपड़े नहीं पहनता

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आमतौर पर लोग कपड़े पहनकर ही घर से बाहर कहीं जाते हैं। लेकिन जब हमें कोई ऐसा मिल जाता है जिसने फटे-पुराने कपड़े पहने हों या बिना कपड़े पहने हुए हों तो हम उन्हें गरीब समझते हैं। लेकिन आज हम आपको ब्रिटेन के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आधुनिक लोग बिना कपड़ों के रहते हैं और अजीबोगरीब परंपरा का पालन करते हैं।

बड़े-बड़े बंगलों में रहने और आधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करने के बावजूद यहाँ के लोग नंगे रहते हैं। इस गांव की अनूठी परंपरा के बारे में दुनिया भर से कई लोगों ने डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में बनाई हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के इस गांव में लोग सालों से बिना कपड़ों के रह रहे हैं। गांव में रहने वाले लोगों के पास तमाम सुविधाएं हैं, लेकिन यहां के लोग मान्यताओं और परंपराओं के कारण कपड़े नहीं पहनते हैं।

यह गांव ब्रिटेन के हर्टफोर्डशायर(Hertfordshire) में स्थित है जिसका नाम स्पीलप्लाट्ज(Spielplatz) है। इस गांव में बच्चों से लेकर बूढ़े तक कोई भी कपड़े नहीं पहनता है।

जर्मन में स्पीलप्लाट्ज का मतलब है खेल का मैदान। हर्टफोर्डशायर में स्थित यह अनोखा गांव ब्रिटेन की सबसे पुरानी कॉलोनियों में से एक है।

यहां उनके पास खूबसूरत घरों, स्विमिंग पूल आदि की सभी सुविधाएं हैं। कहा जाता है कि लोग इस अनोखे गांव में 93 साल से भी अधिक समय से ऐसे ही रह रहे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस समुदाय की स्थापना वर्ष 1929 में स्पीलप्लाट्ज गांव में रहने वाले 85 वर्षीय आइसेल्ट रिचर्डसन के पिता ने की थी। उनका कहना है कि प्रकृतिवादियों और सड़क पर रहने वाले लोगों में कोई अंतर नहीं है।

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ये है दुनिया की सबसे छोटी नदी

दुनिया की सबसे लंबी नील नदी के बारे में तो आप जानते ही होंगे लेकिन क्या आप दुनिया की सबसे छोटी नदी के बारे में जानते हैं अगर नहीं जानते तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से, कि आखिर कहाँ है ये नदी और कितनी लंबी है

यह अमेरिका के मोंटाना में बहती है। इस नदी का नाम ‘रो’ है। कुछ दूर चलने के बाद यह मिसौरी नदी में मिल जाती है। इस नदी रो लंबाई हैरान करने वाली है। रो नदी की औसत लंबाई 201 फीट है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी नदी मिसौरी के साथ कुछ दूरी तक बहती है, फिर इसमें मिल जाती है।

इसे दुनिया की सबसे छोटी नदी का खिताब दिलाने में 1987 में लिंकन स्कूल की शिक्षिका सूसी नर्डलिंगर का योगदान है। सूसी ने अपने छात्रों के साथ गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में प्रवेश करने के लिए अभियान चलाया और सफल रही।दुनिया की सबसे छोटी नदी के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज रो नदी की गहराई 201 फीट तक है।

इस छोटी सी नदी में चूना-पत्थरों से निकलने वाला पानी नदी का रूप ले लेता है। खास बात यह है कि इस नदी का पानी सर्दियों में गुनगुना रहता है और गर्मियों में ठंडा रहता है।

इससे पहले सबसे छोटी नदी का रिकॉर्ड ओरेगॉन की ‘डी’ नदी के नाम था। इसकी लंबाई 440 फीट थी। रो नदी को सबसे छोटी नदी का दर्जा दिलाने के लिए सूसी में लगातार अभियान चलाया। रो नदी को नदी मानने का कारण इसकी चौड़ाई और गहराई थी। इसी आधार पर इसे नदी घोषित किया गया।

अरवरी

भारत की सबसे छोटी नदी राजस्थान के अलवर जिले में बहने वाली अरवरी नदी भारत की सबसे छोटी नदी मानी जाती है। यह अरावली पहाड़ियों से निकलती है।

नदी 1960 के दशक में सूख गई थी लेकिन लोगों के अथक प्रयास से वर्ष 1995 आते-आते पूरी नदी फिर से जिंदा हो गई। तब से अब तक यह नदी बारहमासी बन चुकी है। यह 45 किलोमीटर लम्बी है जो आगे चल कर सरसा नदी में मिल जाती है।

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वायरल वीडियो : बिल्ली के बच्चों का ये डांस देखकर दंग रह जाएंगे आप!

आपने इंटरनेट पर कई पालतू जानवरों के वीडियो देखे होंगे। उनकी प्यारी हरकतों का सोशल मीडिया पर एक अलग फैनबेस है।

लोग इन वीडियो को देखने का आनंद लेते हैं जहां विभिन्न जानवरों को कुछ अनोखा करते देखा जा सकता है और ये तुरंत सबका ध्यान खींच लेते हैं।

इसी तरह, अमेरिकी गायक चार्ली पुथ के गाने के साथ नृत्य करते हुए तीन प्यारे बिल्ली के बच्चों का एक वीडियो आजकल खूब वायरल हो रहा हैं।

वीडियो को इंस्टाग्राम पर ‘कैट्सडूइंगथिंग्स‘ नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है, जो सोशल मीडिया पर कैट से संबंधित कंटेंट अपलोड करता है।

वीडियो में, तीन बिल्ली के बच्चे चार्ली पुथ के गीत के साथ उचित समन्वय में थिरकते हुए देखे जा सकते हैं। वीडियो इतना मनमोहक है कि कोई भी इसे देखे बिना नहीं रह सकता। वीडियो के कैप्शन में लिखा हैं, “डांसर्स फर्स्ट , किटन्स सेकंड”

 

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जब से यह क्यूट वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया है, तब से इसे हर तरफ से ढेर सारे व्यूज और कमेंट्स मिल रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं।

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OMG :10 बच्चे पैदा करो लाखों का ईनाम और सम्मान पाओ

दुनिया भर के अलग-अलग देशों की अपनी अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां हैं। कहीं जनसंख्या अधिक है तो कहीं कम। सरकारें तय करती हैं कि देश की प्रगति और आर्थिक तंत्र के अनुसार उन्हें इसे कब बढ़ाने और कब घटाने की नीति लानी है।

इस समय रूस की एक ऐसी ही नीति चर्चा में है, जो देश में जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देने वाली है। इससे पहले चीन की जनसंख्या नीति दुनिया भर में सुर्खियां बटोरती रही है।

वहां सालों तक ‘वन चाइल्ड पॉलिसी‘ (एक बच्चा नीति) के जरिए जनसंख्या को कम किया गया। हालांकि, अब एक बार फिर इसे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भले ही बहस हो रही हो, लेकिन रूस में 10 बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को सम्मानित किए जाने की योजना लागू की जा रही है।

रूस में लौटी 1944 में बनी नीति

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने देश में सोवियत युग की ‘मदर हीरोइन पॉलिसी‘ एक बार फिर से लाग कर दी है। रूस में गिर रही जन्म दर से निपटने के लिए उन्होंने इस पॉलिसी को लागू किया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार साल 1944 में रूसी नेता जोसेफ स्टालिन ने यह नीति लागू की थी। दूसरे विश्व युद्ध में देश की अच्छी-खासी जनसंख्या खत्म होने के बाद ‘मदर हीरोइन‘ नामक नीति लाई गई थी, जिसे सोवियत यूनियन के खत्म होने के बाद बंद कर दिया गया था।

इस टाइटल को पाने वाली महिला को ‘हीरो ऑफ रशिया‘ और ‘हीरो ऑफ लेबर‘ जितना ही सामाजिक सम्मान मिलेगा।

ये महिलाएं होंगी ‘मदर हीरोइन’

मदर हीरोइन‘ का टाइटल उन माताओं को दिया जाएगा, जिन्होंने 10 बच्चों को जन्म दिया और पाला हो। इसके लिए उन्हें ईनाम के तौर पर 1 मिलियन रूबल यानी 13 लाख रुपए से अधिक दिए जाएंगे।

यह अवॉर्ड उन्हें 10वें बच्चे के एक साल पूरा करने के बाद मिल जाएगा। उन माताओं को भी यह टाइटल मिलेगा, जो युद्ध या आतंकी हमले में अपना कोई बेटा या बेटी खो चुकी हैं। रूसी राष्ट्रपति ने यह फैसला रूस की गिरती जन्म दर की वजह से लिया है।

साल 2021 और 2022 में रूस की मृत्यु दर, जन्म दर के मुकाबले काफी अधिक रही है। इससे पहले फिनलैंड और चीन में भी लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए लुभावने ऑफर्स दिए जा चुके हैं क्योंकि उनके यहां भी जन्म दर तेजी से कम हो रही है।

पंजाब केसरी से साभार

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हैरतअंगेज महिला, आंख पर पट्टी बांध बनाती हैं गणेश मूर्तियाँ, तोड़े कई रिकार्ड

रमा शाह मुंबई की एक ऐसी हैरतअंगेज महिला का नाम है जो ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज करवा चुकी हैं. रमा आंखों पर पट्टी बांध पिछले 17 सालों से गणेश की प्रतिमाएं बना रही हैं। शुक्रवार को उन्होंने आंखों में पट्टी बांध यह कारनामा फिर से किया।

रमा शाह मूर्तिकला में अपनी प्रतिभा का दुनियाभर में लोहा मनवा चुकीं हैं. बता दें कि यह महिला अब तक तीन लाख से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं बना चुकी हैं। रमा के नाम पर कई रिकॉर्ड हैं जिनमें से कुछ ये हैं:

  • रमा शाह ने सिर्फ तीन मिनट में गणेश की सबसे छोटी प्रतिमा बना रिकॉर्ड बनाया था।
  • रमा अजबगजब कारनामों को दिखाने वाले अमेरिका के मशहूर शो ‘रिप्‍लीज बिलीव इट ऑर नॉट’ के पैनल में भी आ चुकी हैं।
  • केवल 99 दिनों में आंख पर पट्टी बांध गणेश की रिकॉर्ड 9,999 प्रतिमाएं बनाने के कारण वह शो में नजर आईं थीं।
  • अपने हाथों से बनाई 18 हजार से ज्यादा प्रकार की गणेश प्रतिमाओं को एक जगह प्रदर्शित कर रमा ने ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज करवाया था।

रमा शाह के बारे में कुछ और बातें

  • रमा एक हाउसवाइफ हैं और वे बच्‍चों को आर्ट ऐंड क्राफ्ट की ट्रेनिंग देती हैं। वे नियमित तौर पर मूर्तियां नहीं बनाती हैं।
  • रमा का मानना है कि ईश्वर ने हर व्यक्ति को इस दुनिया में कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है।
  • वे पिछले 17 साल से अब तक हर साइज की करीब तीन लाख से ज्यादा प्रतिमाएं बना चुकी हैं।
  • इनमें से एक हजार से ज्‍यादा प्रतिमाएं उन्‍होंने आंखों पर पट्टी बांधकर बनाई हैं।
  • रमा ने 2004 में गुजरात के भावनगर में आंखों पर पट्टी बांधकर एक गणेश प्रतिमा बनाई थी। इसे उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री  नरेंद्र मोदी को गिफ्ट भी किया था।
  • रमा की इस सफलता में उनकी फैमिली और हसबैंड का काफी योगदान है। उनके तीन बच्‍चे इस काम में उनका काफी सहयोग देते हैं।
  • रमा शाह की अपनी वेबसाइट है और फेसबुक पेज भी है.

जानिए अलसी के बीज से होने वाले चमत्कारी फायदें!!

अलसी के बीज का उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता रहा है। औषधीय गुणों के अलावा, अलसी के बीज में कई पोषक तत्व होते हैं। ये लिग्नान, एंटीऑक्सिडेंट, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन बी, मैग्नीशियम, मैंगनीज, अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA), और ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं।

इन पोषक तत्वों के सेवन से खतरनाक बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। यदि नियमित रूप से सेवन किया जाए तो कब्ज, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हृदय की समस्याओं और कैंसर से बचा जा सकता है।

कोलेस्ट्रॉल पिघलता है

अध्ययनों से पता चला है कि अलसी के बीज एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को घोलते हैं और एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) बढ़ाते हैं। अलसी के बीज ओमेगा-3 फैट से भरपूर होते हैं। दीनी रक्त में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करती है।

अलसी रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में बेहतर काम करती है। जो लोग नियमित रूप से अलसी का सेवन करते हैं उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी कम हो जाता है।

बीपी कंट्रोल में रहता है।

अलसी के बीज रक्तचाप को भी कम करते हैं। अलसी के बीज मधुमेह से पीड़ित लोगों में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इन्हें अपने आहार में शामिल करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। यह हमारे शरीर को कई तरह के संक्रमणों से बचाता है।

कैंसर कोशिकाओं से लड़ता है

अलसी के बीज एस्ट्रोजन और एंटीऑक्सीडेंट दोनों से भरपूर होते हैं, जो महिलाओं के लिए आवश्यक हैं। अलसी के बीज में किसी भी अन्य सब्जी की तुलना में अधिक लिग्नान होते हैं।

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि इन बीजों में मौजूद ओमेगा-3 एसिड में ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसी चीजों को नियंत्रित करने का गुण होता है।

प्रोटीन स्टोर हाउस

अगर आप शाकाहारी हैं तो आपको पता होना चाहिए कि अलसी एक सुपर फूड है। ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं। अगर आप इसे रोजाना अपने आहार में शामिल करेंगे तो प्रोटीन की कमी दूर हो जाएगी।

बाल मजबूत होते हैं

इसमें मौजूद ओमेगा फैटी एसिड कोलेजन के उत्पादन में मदद करता है जो त्वचा और बालों के रोम को स्वस्थ रखता है। अगर फॉलिकल्स स्वस्थ रहेंगे तो बाल मजबूत और घने होंगे। अलसी के बीज बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं।

इन बीजों में विटामिन-बी भी प्रचुर मात्रा में होता है। यह बालों को मजबूत बनाता है और रूखेपन को रोकता है और बालों को रेशमी और चमकदार बनाता है।

कैसे करें इस्तेमाल?

इन्हें कच्चा खाने से बेहतर है कि इन्हें भूनकर सुखा लें। अगर ये तले हुए हैं। इसमें हानिकारक फाइटिक एसिड निकल जाएगा। अंकुरित होने के बाद खाना भी अच्छा होता है। ये बीज थोड़े फूल जाते हैं और पानी में डालने पर जेली बन जाते हैं।

इसका मतलब है कि वे अधिक पानी अवशोषित करते हैं। इसलिए आपको एक चम्मच या आधा चम्मच खाने के बाद ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। नहीं तो कब्ज की समस्या होने का खतरा रहता है।

अगर ये सावधानियां बरती जाएं तो अलसी के फायदे पूरी तरह से प्राप्त किए जा सकते हैं। अगर आप इन्हें सूखे रूप में खाना चाहते हैं तो आपको इन्हें फ्रिज में जरूर रखना चाहिए। अन्यथा पोषक तत्व जल्दी खत्म हो जाएंगे।

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जानिए बारिश के मौसम में कैसे रखें पाचन शक्ति को दुरुस्त

बारिश के मौसम में पेट दर्द, गैस, फूड इंफेक्शन की समस्याएं बढ़ जाती हैं जिससे हमारी पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है। इस तरह की समस्या के होने का कारण एवं उपचार हमारे प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में विस्तृत रूप से वर्णित किये गए है।

आयुर्वेद में एक वर्ष को छह ऋतुओं में बांटा गया है, जो दो काल में विभाजित है। अदन काल और विसर्ग काल। अदन काल में शिशिर, बसंत और ग्रीष्म ऋतु होती हैं, इन ऋतुओं में क्रमशः मनुष्य की शक्ति क्षीण होती जाती है और गर्मी के मौसम में मनुष्य का बल सबसे कम होता है। इस समय जठराग्नि (गैस्ट्राइटिस) भी कमजोर होती है।

वर्षा ऋतु के आगमन से विसर्ग काल प्रारंभ होता है। इसमें वर्षा, शरद और हेमंत ऋत हैं। विसर्ग काल में मनुष्य का बल क्रमशः बढ़ता है। ग्रीष्म और वर्षा ऋतु में मनुष्य का बल सबसे कम होता है और उसके अनुसार जठराग्नि ग्रीष्म ऋतु में दुर्बल होती है, इसलिए वर्षा ऋतु में भी जठराग्नि (गैस्ट्राइटिस) अधिक कमजोर हो जाती है।

वर्षा ऋतु में भूमि से भाप निकलने, आकाश से जल बरसने तथा जल का अम्लीकरण होने के कारण पाचन शक्ति और भी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण मनुष्य के खान-पान में थोड़ी भी लापरवाही उसे फूड इंफेक्शन का शिकार बना देती है।

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आयुर्वेद आचार्यों ने वर्षा ऋतु में तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) का शमन (कम) करने वाली क्रिया करने का उल्लेख किया है। अर्थात् तीनों दोषों को दवाओं और दिनचर्या के माध्यम से शरीर में संतुलित रखना चाहिए।

खाने में क्या शामिल करें

पुराने जौ, गेहूं, चावल का संभव हो तो उपयोग करें, क्योंकि नया अन्न पचने में भारी होता है। मूंग दाल का सेवन अधिक करें। सब्जियों में परवल, कद्, करेला, लौकी, बैंगन आदि का अधिक प्रयोग करें।

क्या शामिल न करें

फास्ट फूड, तले हुए खाद्य पदार्थ आलबड़ा, समोसा, कचौरी और लड्डू, सत्तू आदि न खाएं। इस मौसम में दही को आयुर्वेद में वर्षा ऋतु में निषेध किया गया है, क्योंकि दही तासीर से गर्म होता है और पचने में भारी होता है।

बारिश के मौसम ऐसे करें उपचार

उल्टी होने पर

• एक बर्तन में 20 ग्राम तुअर (अरहर) की दाल धोकर उसमें 50 मिलीग्राम पानी में मिलाएं। एक घंटे बाद पानी को छान लें और 15-15 मिनट पर एक-एक चम्मच सेवन करें।

• पुदीने की पत्ती-40, कालीमिर्च-5 ग्राम, काला नमक-2 ग्राम, इमली-4 ग्राम इन सभी को मिलाकर पीसकर 15-15 मिनट के अंतर से आधा-आधा चम्मच लें।

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दस्त होने पर

आम और जामुन या दोनों में से किसी एक के पत्ते को छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी में उबालें। जब एकचौथाई पानी बचे तब उस काढ़े को आंच से उतार लें। 50 से 100 एमएल की मात्रा में इसका सेवन करने से उल्टी और दस्त दोनों ही समस्या से राहत मिलती है।

पेट दर्द होने पर

  • हॉट वॉटर बैग या बॉटल में गर्म पानी भरकर सिकाई करने से आराम मिलेगा।
  • एक चम्मच अजवाइन का गर्म पानी के साथ सेवन करें।
  • पुदीने के रस की दो-चार बूंदें बताशे में या पानी में डालकर लें।

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क्या करना चाहिए

  • खाने में ऐसी वस्तुओं का सेवन करें, जो आपकी पाचन शक्ति को बल दें जैसे पिप्पली, काली मिर्च, अदरक, अजमोदादि चूर्ण, पंचकोल चूर्ण आदि।
  • भोजन में भारतीय मसाले जो सामान्यतः हम अपने किचन में प्रयोग करते है, जैसे अजवाइन, जीरा, हींग, हल्दी आदि का प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें।
  • भोजन अदरक का प्रयोग जरूर करें।
  • पानी उबालकर ठंडा करके पिएं।
  • हरड़, जिसे हरीतकी भी कहते हैं, वर्षा ऋतु में इसका सेवन सेंधा नमक के साथ करना चाहिए। इसके सेवन से वर्षा ऋतु में होने वाले विभिन्न रोगों से रक्षा होती है।
  • खाने में शुद्ध घी का भी प्रयोग करें। रोटी में घी लगाकर खाएं या दाल, खिचड़ी में घी डालकर खाएं।

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भारत के इस बटरफ्लाई फॉरेस्ट में उड़ती हैं लाखों तितलियां, बारिश में दिखता है अद्भुत नजारा

जब भी आप घूमने का प्लान बनाते हैं तो सबसे पहली पसंद पहाड़ और समुद्र तट के बीच होते हैं। लोगों को पहाड़ों पर प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है, वहीं समुद्र के किनारे आराम करने और मस्ती करने को मिलता है।

अगर आप प्रकृति से प्रेम करते हैं और प्रकृति को देखकर आपका मन खुश हो जाता है तो आपको कर्नाटक के बटरफ्लाई फॉरेस्ट को जरूर देखना चाहिए। यहां हजारों तरह की तितलियां हैं। इसके अलावा पक्षियों की चहचहाहट और हरियाली के बीच समय बिताने का मौका मिलता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको इसी खूबसूरत “बटरफ्लाई फॉरेस्ट” के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं:-

यह जंगल भारत के घने जंगलों में से एक है, दक्षिण भारत में कर्नाटक में मौजूद “तितली वन”। यह जंगल कर्नाटक के कोडागु, मलनाड और दक्षिण कन्नड़ से घिरा हुआ है।

क्या है इस तितली वन का नाम

कर्नाटक के इस प्रसिद्ध तितली वन का नाम ‘बिसले घाट‘ है। बिसले घाट के जंगल की खासियत यह है कि यहां लाखों तितलियां पाई जाती हैं। बारिश में इस घने जंगल में प्रवासी तितलियां नजर आती हैं।

इस जंगल में तितलियों की किस्में हैं जैसे कॉमन कैस्टर, कॉमन ग्लास येलो, कॉमन जे, प्लेन टाइगर, स्पॉटेड तोता, लाइन ब्लू, बाल्का तोता, डिंगी स्विफ्ट आदि। इसके अलावा इस जंगल में हजारों तरह के पक्षी देखने को मिलते हैं।

तितली वन तक कैसे पहुंचे

यह जंगल कर्नाटक के हासन जिले के सकलेशपुर में मौजूद है। यहां पहुंचने के लिए आप सकलेशपुर बस या ट्रेन की मदद से आ सकते हैं। सकलेशपुर से बिसले घाट तक टैक्सी और बसें भी चलती हैं, जो 250 किलोमीटर दूर है।

बिसले घाट जाने का सबसे अच्छा समय

अगर आप प्रकृति से प्यार करते हैं, तो आप इस हरे भरे जंगल में आराम के कुछ पल बिताने के लिए आ सकते हैं। बिसले घाट घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून के मौसम के दौरान होता है। बारिश में आप इस घाटी पर न केवल तितलियां बल्कि प्रवासी पक्षी भी देख सकते हैं।

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