ताप्ती नदी (संस्कृत : तापी) पश्चिमी भारत की मुख्य नदी है। यह मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से निकलकर सतपुड़ा पहाड़ियों के मध्य से पश्चिम की ओर बहती है. महाराष्ट्र के खानदेश के पठार एवं सूरत के मैदान को पार करती हुई यह अरब सागर में गिरती है।

ताप्ती नदी का उद्गगम् स्थल मुल्ताई है। यह भारत की उन मुख्य नदियों में है जो पूर्व से पश्चिम की तरफ बहती हैं। अन्य दो जो पूर्व से पश्चिम की तरफ बहती हैं – नर्मदा नदी और माही नदी। यह नदी पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 740 किलोमीटर की दूरी तक बहती है और खम्बात की खाड़ी में जाकर मिलती है। सूरत बन्दरगाह इसी नदी के मुहाने पर स्थित है।

ताप्ती नदी का सफर

यह नदी मध्य प्रदेश राज्य के बैतूल जिले से निकलती है जो कि 762 मीटर की उचाई पर स्थित है। अंत में यह नदी खम्बात की खाड़ी में गिरती है। इस नदी की लम्बाई 724 किमी है। इसकी प्रधान उपनदी का नाम पूर्णा है। तापी नदी को सूर्यपुत्री भी कहा जाता है।

मूल नाम मूलतापी

यह नदी मध्‍यप्रदेश, गुजरात, महाराष्‍ट्र से होकर गुजरती है। जहां से यह नदी निकलती है, उसका मूल नाम मूलतापी है। इस नदी पर बने दो मुख्य बॉध काकडापार और उकाई बॉध है। सूरत शहर इसी नदी के किनारे बसा हुआ है।

विस्तार और सहायक नदियाँ

ताप्ती नदी की घाटी का विस्तार कुल 65,145 कि.मी² में है, जो भारत के कुल क्षेत्रफ़ल का २ प्रतिशत है। यह घाटी क्षेत्र महाराष्ट्र में 51,504 कि.मी², मध्य प्रदेश में 9,804 कि.मी² एवं गुजरात में 3,837 कि.मीm² है। ये घाटी महाराष्ट्र उत्तरी एवं पूर्वी जिलों जैसे अमरावती, अकोला, बुल्ढाना, वाशिम, जलगांव, धुले, नंदुरबार एवम नासिक में फ़ैली है, साथ ही मध्य प्रदेश के बैतूल और बुरहानपुर तथा गुजरात के सूरत एवं तापी जिलों में इसका विस्तार है। इसके जलग्रहण क्षेत्र का 79% गुजरात शेष मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्य में पड़ता है. पूर्णा, बल्‍गुर, गिर्ना, बोरो, पंजरा और ओनर मुख्य सहायक नदियाँ है।

तापी नदी के सात कुण्ड

तापी नदी पर सूर्यकुण्ड, ताप्ती कुण्ड, धर्म कुण्ड, पाप कुण्ड, नारद कुण्ड, शनि कुण्ड, नागा बाबा कुण्ड यह सात कुण्ड बने हुए है, जिनकी अपनी अलग-अलग  धार्मिक कहानियां प्रचलित है।

हिन्दू मान्यता में

हिन्दू मान्यता अनुसार तापी को सूर्य की पत्नी छाया की पुत्री माना जाता है और ये शनि की बहन है। इसको ताप्ती नदी के नाम से भी जाना जाता है। तापी नदी का विवाह संवरण नामक राजा के साथ हुआ था जो कि वरुण देवता के अवतार थे।

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