क्यों खास है इस साल का करवा चौथ, जाने अपनी राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहने

करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब 4 बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है।

क्यों खास है इस साल का करवा चौथ

इस बार करवाचौथ का व्रत और पूजन बहुत विशेष है। इस बार 70 साल बाद करवा चौथ पर ऐसा योग बन रहा है। इस बार रोहिणी नक्षत्र और मंगल का योग एक साथ आ रहा है। ज्योतिष के मुताबिक यह योग करवाचौथ को और अधिक मंगलकारी बना रहा है। इससे पूजन का फल हजारों गुना अधिक होगा।

करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना अपने आप में एक अद्भुत योग है। रविवार होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्यभामा योग बन रहा है।

यह योग चंदमा की 27 पत्नियों में सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होने से बन रहा है। पति के लिए व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए यह बेहद फलदायी होगा। ऐसा योग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलन के समय भी बना था।

राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहनें

मेष राशि

मेष राशि की सुहागिनें लाल रंग होता है, इसलिए इस राशि की सुहागिन महिलाओं का लाल और गोल्डन रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र हैं। इसलिए विशेष फल की प्राप्ति के लिए इस राशि की सुहागिनें सिल्वर और लाल रंग के कपड़े पहन सकती हैं।

मिथुन राशि

हरा रंग मिथुन राशि वाली महिलाओं को पहनने की सलाह दी जाती है। कहते हैं हरा रंग करवाचौथ के दिन पहनना शुभ होता है।

कर्क राशि

इस दिन कर्क राशि वाली महिलाओं के लिए लाल रंग की साड़ी और रंग बिरंगी चूड़ियां पहनना शुभ होगा। इस दिन भगवान को सफेद बर्फी का भोग लगाना लाभकारी होगा।

सिंह राशि

इस बार करवाचौथ पर सिंह राशि की महिलाओं को लाल, संतरी, गुलाबी या गोल्डन रंग के कपड़े पहने चाहिए। ये उनके लिए इस बार शुभ माना जा रहा है। कहते हैं कि इससे आपके और आपके पति के बीच प्यार हमेशा बना रहेगा।

कन्या राशि

करवाचौथ के दिन कन्या राशि की महिलाएं लाल, हरी या गोल्डन साड़ी पहनें। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी।

तुला राशि

इस बार करवा चौथ पर तुला राशि की महिलाएं लाल, गोल्डन या फिर सिल्वर रंग के कपड़े पहन सकती हैं। ये रंग इस उनके लिए शुभ माने जा रहे है।

वृश्चिक राशि

इस बार करवा चौथ पर वृश्चिक राशि की महिलाओं को लाल रंग के कपडे पहनने चाहिए। ये रंग इस राशि वाली महिलाओं के लिए सबसे अच्छे है। इतना ही नहीं इसके साथ ही महरून या गोल्डन रंग का लहंगा, साड़ी या सूट पहनकर भी पूजा कर सकती हैं।

धनु राशि

आसमानी या पीले रंग के कपड़े धनु राशि वाली महिलाओं को पहनने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस रंग के वस्त्र पहनने कर पूजा करने पर भगवान आपकी पूजा जरूर स्वीकार करेंगे।

मकर राशि

मकर राशि के स्वामी शनि हैं। इस राशि की महिलाओं को नीले रंग के कपड़े पहन कर करवा चौथ की पूजा करनी चाहिए। इससे आपको विशेष लाभ मिलेगा।

कुंभ राशि

इस राशि वाली महिलाएं नीले रंग के वस्त्र या फिर सिल्वर रंग के कपड़े पहनें। करवाचौथ पर इस रंग को धारण करना शुभ माना जाता है।

मीन राशि

मीन राशि वाली महिलाएं पीले या गोल्डन या दोनों रंग का मिला-जुला कर वस्त्र धारण करें। इससे आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी।

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अपने किरदार के लिए पूरी तरह बदल गए ये फिल्मी सितारे!!

फिल्मी सितारों की दुनिया देखने में जितनी चकाचौंध भरी लगती है, दरअसल उसके लिए उन्हें उससे कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

बहुत सी ऐसी फिल्में रही हैं, जिसमें अपने किरदार को निभाने के लिए इन कलाकारों ने कुछ ऐसे बॉडी ट्रांसफॉरमेशन दिखाए, जिसे देखकर सभी दंग रह गए। इन कलाकारों ने किसी किरदार के लिए वजन घटाया तो किसी के लिए काफी बढ़ाना भी पड़ा।

बॉलीवुड में अब तक कई सितारों ने ऐसा बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन किया है, जिसे देखकर उनके प्रशंसक आज भी उनकी तारीफ करते हैं।

तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही बॉलीवुड स्टार्स के बारे में जिन्होंने अपनी शानदार बॉडी और एक्टिंग के जरिए फिल्म के अपने किरदार में चार चांद लगा दिए…

आमिर खान (दंगल)

आमिर खान को बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहा जाता है और ये बात एक बार फिर आमिर खान ने फिल्म दंगल में साबित कर दी थी। आमिर खान हमेशा से ही जिस तरह अपने किसी भी फिल्मी किरदार में ढलने के लिए मेहनत करते हैं, वह किसी से छुपा नहीं है।

साल 2016 में आई आमिर ख़ान की दंगल फिल्म में उन्हें महावीर फोगाट के किरदार में देखकर तो दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां ही दबा ली थीं क्योंकि इस फ़िल्म की शूटिंग से पहले आमिर का वजन लगभग 70 किलो था और उन्होंने इस फिल्म के लिए 30 किलो वजन बढ़ाया था।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होंने 100 किलो वजन के साथ इस फिल्म की 90% शूटिंग करने के बाद आमिर खान को युवा महावीर, जो कि एक फिट रेसलर था, उसके लिए वापस अपना वजन करीब 28 किलो घटाकर सिक्स पैक एब्स भी बनाए।

फरहान अख्तर (भाग मिल्खा भाग)

साल 2013 में राकेश ओमप्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म भाग मिल्खा भाग रिलीज हुई थी। फिल्म धावक मिल्खा सिंह की जिंदगी पर आधारित थी।

फिल्म में फरहान अख्तर ने मिल्खा सिंह का किरदार निभाया था। फिल्म में फरहान की एक्टिंग के साथ ही साथ उनके ट्रांसफॉर्मेशन ने भी सभी का दिल जीत लिया था।

सलमान खान (सुलतान)

लमान खान जब फिल्म इंडस्ट्री में आए थे, वो बहुत दुबले पतले थे। लेकिन 90 का दशक खत्म होते-होते सलमान खान अपनी फिट और जबरदस्त बॉडी के लिए पहचाने जाने लगे।

फिर उन्होंने फिल्म सुलतान के लिए बहुत वजन बढ़ा लिया था। लेकिन उसके बाद तुरंत ही उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया और वजन घटा लिया।

राजकुमार राव (ट्रेप्ड)

साल 2017 में आई फिल्म ट्रेप्ड में राजकुमार राव ने भूखा-प्यासा दिखने के लिए 18 किलो वजन कम किया था, जिससे उनका पेट वाकई काफी कम हो गया था। राजकुमार 3 हफ्ते के लिए कठोर डाइट पर थे जहाँ वो ब्लैक कॉफी और दो गाजर पर पूरा दिन निकाल देते थे।

रणदीप हुड्डा (सरबजीत)

रणदीप हुड्डा अपनी फिट बॉडी और माचो लुक के लिए जाने जाते हैं। लेकिन साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म ‘सरबजीत’ के लिए उन्होंने अपनी फिजीक में ऐसा बदलाव कर दिया था, जिसे देखकर लोग हैरत में पड़ गए।

‘सरबजीत’ में लीड रोल के लिए उन्होंने महज 28 दिन में 18 किलो वजन कम किया था। फिल्म की शूटिंग के दौरान रणदीप की हालात ऐसी हो गई थी, कि एक बार प्रोडक्शन टीम के क्रू मेंबर भी उन्हें पहचान नहीं पा रहे थे।

इसके लिए रणदीप ने अपनी डाइट में जबरदस्त बदलाव किया। कई बार तो वे बिना खाना खाए सिर्फ कॉफी पीकर ही दिन गुजार देते थे।

रितिक रोशन (गुजारिश)

अपनी फिट बॉडी के लिए मशहूर बॉलीवुड के ग्रीक गॉड रितिक रोशन ने संजय लीला भंसाली की फिल्म गुजारिश के किरदार को निभाने के लिए बहुत ज़्यादा वजन बढ़ाया था और उसके तुरंत बाद अगली फिल्म क्रिस 3 के लिए 10 हफ्ते में ही अपना वजन कम किया था।

रणबीर कपूर (संजू)

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर सिनेमा के उन अभिनेताओं में शुमार हैं जिन्होंने काफी कम फिल्मों से ही अपनी एक्टिंग का लोहा साबित कर दिया है। साल 2018 में राजकुमार हिरानी निर्देशित फिल्म संजू रिलीज हुई थी।

फिल्म संजय दत्त के जीवन पर आधारित थी। फिल्म में संजय दत्त का किरदार रणबीर कपूर ने निभाया था। फिल्म में संजय दत्त के अलग अलग किरदार निभाने के लिए रणबीर ने खुद पर जमकर मेहनत की।

आदित्य रॉय कपूर (मलंग)

कुछ वक्त पहले ही आई आदित्य रॉय कपूर की मलंग फिल्म में उनकी बॉडी देखकर दर्शक भी चौंक गए थे। लेकिन उस तरह की बॉडी बनाना उनके लिए इतना आसान काम नहीं था।

क्या आप जानते हैं अपने किरदार के लिए आदित्य ने केरल के प्राचीन मार्शल आर्ट कलरीपयट्टू के साथ प्रतिदिन दौड़ना, योग आदि का सहारा लिया था।

इसके अलावा इस बॉडी ट्रांसफॉरमेशन के लिए आदित्य रॉय कपूर ने एक खास डाइट टेबल का शिद्दत से पालन भी किया था। यही नहीं फिल्म में बॉडी शूट से लगभग हफ्ते भर पहले ही आदित्य रॉय कपूर में नमक खाना बिल्कुल छोड़ दिया था।

विकी कौशल (ऊधम सिंह)

इन दिनों विकी कौशल का लीन एंड थिन लुक सबका ध्यान खींच रहा है। वजह है उनका बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन। विकी कौशल शूजित सरकार के डायरेक्शन में बन रही बायोपिक ‘ऊधम सिंह’ के लिए अपना वजन बेहद कम कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो उन्होंने 3 महीने में लगभग 13 किलो वजन घटाया है। बताया जा रहा है कि यह कड़ी मेहनत उन्होंने शहीद उधम सिंह के जवानी के दिनों के रोल में खुद को ढालने के लिए की है।

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बिना तकिए के सोने से होंगे शरीर में आश्चयर्जनक बदलाव!!

कुछ लोगों को आदत होती है कि वे बिना तकिए के नहीं सो सकते। जबकि कुछ लोग बहुत सॉफ्ट और हल्‍का तकिया लेना पसंद करते हैं। सबकी अपनी अलग-अलग आदतें हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका तकिया आपके लिए कई शारीरिक समस्याएं पैदा कर सकता है। वहीं ऐसा भी हो सकता है कि, कुछ समस्याओं से आप जूझ भी रहे हो, पर आपको पता ही ना हो कि, यह समस्या आपको आपके तकिए की वजह से है।

आइए जानते हैं, अगर आप बिना तकिए के सोते हैं तो आपको क्या फायदे हो सकते हैं।

गर्दन में दर्द नहीं होगा

हम अक्सर तकिए का उपयोग इसलिए करते हैं, ताकि गर्दन और सिर को सही सपोर्ट मिल सके। लेकिन एक गलत पोजीशन और गलत तकिए की वजह से आपको कई शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं।

इससे आपके गर्दन के मसल्स पर दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से आपकी गर्दन में दर्द हो सकता है। इसके बजाय अगर आप बिना तकिए के सोते हैं तो इससे आप गर्दन के दर्द से तो बचते ही हैं साथ ही आपके गर्दन और सिर तक का रक्त प्रवाह भी बेहतर रहता है।

शरीर का पोस्चर सही रहता है

अगर आप उन लोगों में से हैं जो पेट के बल सोते हैं, तो बिना तकिए के सोना आपके लिए लाभदायक हो सकता है। दरअसल हमारे शरीर का ज्यादातर वजह हमारी रीढ़ की हड्डी के बीच में होता है।

ऐसे में जब आप पेट के बल सोते हैं तो इससे आपकी रीढ़ की हड्डी की स्थिति बदल जाती है और इसका असर आपकी गर्दन पर भी पड़ता है।

यही नहीं इससे रीढ़ की हड्डी अपनी नेचुरल अवस्था से हटकर एक अलग पोस्चर में चली जाती है। जिसकी वजह से कई दिक्कतें भी हो सकती है। ऐसे में पेट के बल सोने वाले लोगों के लिए बिना तकिए के सोना बेहद जरूरी है।

चेहरे पर मुहांसे नहीं होंगे

हम सभी जानते हैं कि मुंहासे होने के पीछे के कारण कई हैं जैसे धूल, मिट्टी, तेल का स्किन पर जमाव आदि। वहीं जब मुंहासे होते हैं तो इसकी वजह से हमारे स्किन के पोर्स बंद हो जाते हैं और इनमें गंदगी जमा हो जाती है।

जिसकी वजह से स्किन डल और बेकार दिखने लगती है। ऐसा ही कुछ होता है जब आप तकिए के साथ सोते हैं। दरअसल इस दौरान आपका चेहरा ज्यादा समय के लिए तकिए पर ही होता है।

इसकी वजह से तकिए पर लगी धूल, मिट्टी और अन्य बैक्टीरिया आपकी स्किन पर चिपक जाते हैं। जिसकी वजह से स्किन पर मुंहासे होने लगते हैं। ऐसे में बिना तकिए के सोने से आप अपनी स्किन का भी ध्यान रख सकते हैं।

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खाना खाते समय याद रखें यह ज़रूरी बातें !

जब परहेज की बात आती है, तो आप में इच्छा शक्ति कम होने लगती है. कम वजन करने के लिए और अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में तब्दीली लानी होगी. हम आपको यहाँ पर खाना खाने पर अच्छे सुझाव देंगे. जिससे आप स्वस्थ भी रहेंगे और इन सुझावों को अपनाने से आपका वजन भी कम होगा.

  1. दिन में चार से छह बार हल्का भोजन करना चाहिए. हल्का भोजन करने से आपके शरीर में रक्त शर्करा का संतुलन बना रहता है और इससे आपके चायपचय (metabolism) में वृद्धि भी होती है. ऐसा करने से दिन में आपको भूख भी कम लगती है. सुबह का नाश्ता हमेशा करना चाहिए, अगर आप सुबह का नाश्ता नहीं करते, तो आपको दोपहर में बहुत ज़्यादा भूख लग जाएगी. नतीजतन, आप पहले से भी ज़्यादा मात्रा में भोजन करेंगे और आपका वजन भी बढ़ेगा.
  2. हमेशा पानी पीना चाहिए. आपको दिन में चार से छह गिलास पानी के पीने चाहिए. इससे आपका शरीर हमेशा हाइड्रेटेड रहेगा. पानी पीने से आपको भूख भी पहले से कम लगेगी. सुबह आपको नींबू पानी पीना चाहिए. आपको अल्कोहल का भी ज़्यादा सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि शराब में कोई कैलोरी नहीं होती और ना ही इसमें कोई पोषक तत्व होते हैं.
  3. अपने खाने वाले स्नैक्स को हमेशा साफ़ सुथरा रखें. आपको स्वच्छ भोजन की पैकिंग हमेशा पहले करवाकर रख लेनी चाहिए.
  4. आपको चीनी का भी ज़्यादा सेवन नहीं करना चाहिए. ज़्यादा चीनी वाले भोजन से आप में अतिरिक्त मोटापा, उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है. इसकी बजाए आपको फल खाने चाहिए.
  5. हमेशा शाकाहारी भोजन खाएं, क्योंकि सब्जियों में ज़रूरी पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर होते हैं, जो आपके शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है.
  6. ज़्यादा मात्रा में भोजन ना खाएं, क्योंकि ज़्यादा मात्रा में भोजन खाने से आपका वजन कम होने की बजाये बढ़ता जायेगा.
  7. खाना खाने से पहले आपको हमेशा यह योजना बनानी चाहिए कि खाना क्या है ? इससे आप अपने खाने की आदतों पर नियंत्रण पा सकेंगे. आपको एक हफ्ते पहले ही योजना बना लेनी चाहिए कि क्या खाना है और क्या नहीं ?

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ज़मीन पर बैठकर खाना खाने के फायदे

लोगों का कहना हैं कि वक्‍त के साथ खुद के तौर तरीको को बदलने में ही समझदारी होती है, लेकिन कुछ चीजें ऐसी भी होती है जमाने के साथ यूं ही नहीं चली आ रही हैं उनके पीछे कुछ वजह और महत्‍व होते हैं.

वर्तमान में हमारी दिनचर्या, खान-पान और कार्य करने के तरीकों में काफी बदलाव आ गया है. आजकल हम जमीन पर बैठकर खाने की भारतीय परंपरा को भूल से गये है. लेकिन क्या आपको पता है कि जमीन पर बैठकर खाने के क्या क्या फायदे होते है.

  • जब खाना खाने के लिए जमीन पर बैठते है तो उसे सुखासन कहते है. सुखासन दिमाग को शांत रखता है. यह खाना खाने की गति को धीमी रखता है. इससे आप जरूरत से ज्यादा खाना खाने से बचते है और आपका वजन नियंत्रण में रहता है.
  • नीचे बैठकर खाना खाने या पालथी मारकर बैठने से पेट की मांसपेशियों, पीठ, पेट के आसपास खिंचाव पड़ता है जिसके कारण डाइजेस्टिव सिस्टम अपना काम आराम से कर पाता है. जिसके कारण खाने को बेहतर ढंग से पचाने में मदद मिलती है.
  • नीचे बैठकर खाना खाने या पालथी मारकर बैठने से आपका डाइजेस्टिव सिस्टम भी सही रहता है.
  • पालथी मार कर बैठ कर खाना खाने से रीढ़ की हड्डी और पीठ से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं. यह पारंपरिक तरीका आपको समय से पहले बूढ़ा नहीं होने देता हैं. सोच लो अगर समय से पहले आप बूढे नही होना चाहते तो यह पारंपरिक तरीका जरूर अपनाएं 🙂
  • सुखासन मुद्रा पूरे शरीर को लाभ पहुंचाती है, सुखासन मुद्रा से आपके जोड़ों का दर्द और लचीला बनाए रखने में भी मदद करती है और साथ में यह गठिया व हड्डियों की कमजोरी जैसे रोगों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है.
  • पालथी मारकर बैठने से दिमाग तनाव रहित रहता है, जो कि दिमाग और तंत्रिकाओं को शांत करता है.
  • बैठ कर खाना खाने से ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) में सुधार आता है. इस तरह से शरीर के सभी अंगों तक खून पहुंचाता है.
  • इस आसन से हमारी छाती और पैरों को मजबूती प्राप्त होती है.
  • यदि दिनचर्या के कामों में इतने व्यस्त है की रोज योगा या व्यायाम नहीं कर सकते हैं तो कम से कम नीचे बैठकर खाना खाने से योग के कई लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
  • आयुर्वेद भी इस बात को मानता है कि मन को शांत रखकर खाना खाने से पाचन क्रिया को बेहतर किया जा सकता है.

जानिए सूर्य नमस्कार के 10 चमत्कारी फायदे!!

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सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। ‘सूर्य नमस्कार’ स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

सूर्य नमस्कार हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में बेहद फायदेमंद है। सदियों काल से लोग भगवान सूर्य की पूजा करते आ रहे है। शास्त्रों में भी इनकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए, तो सूर्य की किरणों से आने वाला विटामिन डी हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ गंभीर बीमारियों को भी दूर करने में मदद करता है।

सूर्य नमस्कार के लाभ

सूर्य नमस्कार से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत से लाभ है। सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक शरीर के सभी अंगो को बहुत लाभान्वित करता है। यही कारण है कि सभी योग विशेषज्ञ इसके अभ्यास पर विशेष बल देते हैं।

सूर्य नमस्कार के अभ्यास से शरीर, मन और आत्मा सबल होते हैं। पृथ्वी पर सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है। सूर्य नमस्कार के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कई लाभ हैं।

तो चलिए जानते हैं सूर्य नमस्कार करने से होने वाले फायदों के बारे में :-

ग्‍लोइंग स्किन

सूर्य नमस्कार आपके ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जिससे आपकी त्वचा और आपके चेहरे का ग्‍लो वापस आता है। यह झुर्रियों और जल्दी बुढ़ापा रोकने में भी मदद करता है।

तनाव और अवसाद को दूर रखता है

सूर्य नमस्कार चिंता और निराशा को दूर रखने में मदद करता है और शरीर की शिथिलता को बढ़ाता है। सूर्य नमस्कार करने से तंत्रिका तंत्र शांत होता है और इसके साथ-साथ थॉयरायड ग्लैंड की कार्यप्रणाली नार्मल होती है। इससे मानसिक तनाव की समस्या से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा सूर्य नमस्कार से हमारी स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

पीरियड्स रेगुलर होता है

स्त्रियों द्वारा नियमित सूर्य नमस्कार करने से उनके अनियमित मासिक चक्र नियमित हो जाता है। पेट की मसल्‍स को मजबूत बनाने के लिए हर रोज सूर्य नमस्कार करें।

शरीर में लचीलापन आता है

सूर्य नमस्कार के आसन से पूरे शरीर का वर्कआउट होता है। इससे शरीर फ्लेक्सिबल होता है।

ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखता है

सूर्य नमस्कार करने से शरीर में रक्त प्रवाह तेज होता है, जो रक्त नलिकाओं को साफ़ कर ब्लड प्रेशर को कम करता है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को सावधानी के तौर पे सूर्य नमस्कार नहीं करने चाहिए।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा

यदि आप नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करते हैं, तो आप न केवल अपने शारीरिक रूप में बल्कि अपने मानसिक रूप में भी स्व्स्थ रहेंगे। यह मेमोरी और नर्वस सिस्‍टम में सुधार करने में मदद करता है। यह आपको शांत करने और चिंता से छुटकारा पाने में भी मदद करता है।

बेहतर डाइजेस्टिव सिस्‍टम

सूर्य नमस्कार आपके डाइजेस्टिव सिस्‍टम को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। यह आपके डाइजेस्टिव सिस्‍टम में ब्‍लड के फ्लो को बढ़ाता है, जिससे आपकी आंतों की बेहतर कार्यप्रणाली सुनिश्चित होती है।

शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है

सूर्य नमस्कार करते वक्त हवा फेफड़ों में तेजी से अंदर-बाहर होती है। इससे ऑक्सीजन तेजी से रक्त कोशिकाओं के साथ मिलकर शरीर के सभी हिस्सों में पंहुचता है और वहां से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर निकाल फेंकता है।

इसके फलस्वरूप हमारा शरीर डिटॉक्स हो जाता है। इसके अलावा सूर्य नमस्कार करने से पसीने के साथ भी कुछ हानिकारक तत्व शरीर से बाहर निकल जाता है।

रीढ़ की हड्डी को मिलती है मजबूती

सूर्य नमस्कार के दौरान स्ट्रेचिंग से मांसपेशी और लीगामेंट के साथ रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और कमर लचीला होती है l

अनिद्रा से बचाएं

सूर्य नमस्कार आपके सोने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। यह आपके दिमाग को शांत करने में मदद करता है, जिससे आपको रात में बेहतर और अधिक शांतिपूर्ण नींद मिलती है।

इन्हें नहीं करना चाहिए सूर्य नमस्कार

  • गर्भवती महिला तीसरे महीने के गर्भ के बाद से इसे करना बंद कर दें।
  • हर्निया और उच्च रक्ताचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार नहीं करने की सलाह दी जाती है
  • पीठ दर्द की समस्या से ग्रस्त लोग सूर्य नमस्कार शुरू करने से पहले उचित सलाह जरूर लें।
  • महिलाएं पीरियड के दौरान सूर्य नमस्कार और अन्य आसन न करें।

यद्यपि सूर्य नमस्कार दिन के किसी भी समय किया जा सकता है, सबसे उपयुक्त और लाभकारी समय सूर्योदय के समय होता है, जब सूर्य की किरणें आपके शरीर को पुनर्जीवित करती हैं और आपके दिमाग को तरोताजा कर देती हैं।

ये है दुनिया का सबसे खतरनाक पक्षी, ले चुका है कई लोगों की जान

आपने अपने घर के आस-पास रोज कई पक्षियों को देखा होगा, जिनमें से कुछ बेहद खूबसूरत हैं तो वहीं कुछ बेहद खतरनाक होते हैं। आज हम इस पोस्ट में आपको बेहद खतरनाक पक्षी के बारे में बताने जा रहे है जो आपकी जान तक ले सकता है। तो चलिए जानते हैं इस खतरनाक पक्षी के बारे में :-

इंसानों द्वारा पक्षियों को पालने की परंपरा काफी पुरानी है। इंसान सिर्फ तोता, कबूतर या मुर्गियां नहीं पालते थे बल्कि उन्होंने दुनिया के कुछ बेहद खतरनाक जीवों को भी अपने पिंजरे में कैद किया था।

ऐसा माना जाता है कि 18,000 साल पहले इंसानों ने कैसवैरी पक्षी को पाला था जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक पक्षियों में से एक माना जाता है। यह पक्षी अपने पंजों से इंसानों की जान भी ले सकता है।

इस विषय में अमेरिका (US) की पेन यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर क्रिस्टिना डगलस का कहना है कि जीवाश्मों से पता चलता है कि इंसानों ने कैसोवरी (Cassowary) का पालन-पोषण 18 हजार पहले शुरू कर दिया था।

आमतौर पर ये ऑस्ट्रेलिया और पश्चिमी अफ्रीका के गिनी देश में पाए जाते हैं। इनकी त्वचा पर नीले रंग के धब्बे होते हैं। फीमेल कैसोवेरी का औसत वजन 59 किलोग्राम और मेल कैसोवेरी का वजन 34 किलोग्राम तक हो सकता है।

इनके सिर पर मुकुट जैसा केस्कूय होता है। जो देखने में बहुत सुंदर लगता है। जो इन्हें सिर पर चोट लगने से बचाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में कैसोवेरी को सबसे खतरनाक पक्षी माना गया है।

ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी में पाए जाने वाले कैसवैरी से उसके अंडे लेना बिल्कुल आसान नहीं है। हालांकि हजारों साल पहले ही इंसानों ने इसका बुरा हाल कर दिया था। इन पर शोध करने वाले प्रोफेसर के मुताबिक कैसोवरी का मांस या पंखों का इस्तेमाल करने के लिए उन्हें पाला जाता रहा होगा।

इसके मोटे और नुकीले अंगूठे पैर इसे एक ताकतवर पक्षी बनाते हैं। यह इंसानों और कई बड़े जानवरों को मारने में सक्षम है। यह पक्षी हर साल अपना घोंसला बदलना पसंद करता है।

2019 में फ्लोरिडा में विदेशी पालतू जानवरों के एक मालिक को कैसोवरी ने बगीचे में उसके सामने गिरने के बाद मार दिया था। वहीं दुनिया के इस सबसे खतरनाक पक्षी की कहानी को आगे बढ़ाएं तो रिसर्चर्स के मुताबिक उन्होंने कैसवैरी पक्षियों को तब पकड़ा जब वो कमजोर थे ।

लोगों ने उसके मेल कैसोवरी का शिकार किया और फिर वहां रखे अंडे अपने साथ ले गए। नर घोंसला लावारिस नहीं छोड़ते इसलिए अंडों की रक्षा करते हैं।

लिहाजा शिकारियों के लिए उनका शिकार करना आसान होता है। कैसवैरी पक्षियों को आज भी Papua New Guinea में उनके पंखों के लिए पाला जाता है और उनके अंडों को राष्ट्रीय भोजन माना जाता है।

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ये है दुनिया का सबसे ज्यादा बदबूदार फल, फिर भी कई जगह खाया जाता है बड़े शौक से

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दुनिया में कई ऐसे फल होते हैं जो अपने आप में ही अजीब होते हैं। हालांकि फल कोई भी हो उनमें से हमेशा खुशबु ही आती है लेकिन हम आपको आज जिस फल के बारे में बता रहे हैं उनमें से खुशबु नहीं बल्कि बदबू आती है और बदबू भी ऐसी जिसे सूंघकर इंसान बेहोश हो जाए। इस फल को दुनिया का सबसे ज्यादा बदबूदार फल कहा जाता है।

यह फल जितना बदबूदार है उतना ही महंगा भी है। बताया जा रहा है कि, यह फल 500 डॉलर यानी 37 हजार 730 रुपए का है। इसे ड्यूरियन फल के नाम से जाना जाता है।

डूरियन में विटामिन सी, फ़ोलिक एसिड, बी 6 और विटामिन ए होता है। साथ ही पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम, सोडियम, ज़िंक, फ़ोस़फ़ोरस जैसे मिनरल्स और प्रोटीन मिलता है।

इसकी सबसे खास बात यह है कि जिस भी स्टोर पर यह बेचा जाता है, वहां अलग से शीशे वाले बॉक्स में सैटिन के कपड़े पर इसे रखा जाता है। लोगों में इसका क्रेज़ इतना है कि लोग इसके साथ सेल्की क्लिक करवाते हैं।

पूरे साउथ एशिया में इस फल को ‘किंग ऑफि फ्रूट्स‘ (King of Fruits) के नाम से जाना जाता है। लोगों को इस फल का क्रीमी टेक्स्चर बेहद पसंद है।

ये दक्षिण पूर्व एशिया में मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और फ़िलीपीन्स जैसे देशों में पाया जाता है। डूरियन से निकलने वाली बदबू की तुलना सड़े हुए अंडे, नाली में सड़ रहे कचरे और गले-सड़े लहसुन की बदबू से की जाती है। इससे निकलने वाली बदबू की वजह से इसे कई होटलों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ले जाना बैन है।

लेकिन इसकी परेशान करने वाली गंध के बावजूद दक्षिण एशिया में कई लोग ड्यूरियन फल को पसंद करते हैं, यही वजह है कि इसे इस क्षेत्र में ‘फलों का राजा’ भी कहा जाता है।

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जीवों में भी होता है ‘सिक्स्थ सेंस’

हम अक्सर कॉमन सैंस और ‘सिक्स्थ सैंस’ की बातें करते रहते हैं। इंसान के पास ये दोनों होती हैं। जानवरों में ‘कॉमन सैंस की बात तो रिसर्च का विषय है लेकिन यह सच है कि कई जीव- जंतु हालात को इंसान से भी ज्यादा जल्दी समझते और उसी तरह व्यवहार करते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि सभी जीव- जंतुओं में ‘सिक्सथ सैंस’ यानी छठी इंद्रिय होती है। यहां आपको हम कुछ खास जीवों के बारे में बता रहे हैं। माना जाता है कि इनमें कमाल की ‘सिक्सथ सैंस’ होती है। आइये जानते हैं :-

कुत्ते :- कुत्ते के सूंघने के साथ ही सुनने की शक्ति हमसे से कई गुना अधिक होती है। इसी तरह कुत्ते जैसे दिखने वाले कुछ और जानवर इंसानों की तुलना में बेहद पतली आवाज सुन लेते हैं इसीलिए कुत्ते का विस्फोटक या नशीली चीजों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

डॉल्फिन :- डॉल्फिन समुद्र के भीतर रहते हुए अपने ध्वनि पैदा करने वाले अंग पानी के अंदर की साजिशों के साथ ही भोजन की पड़ताल करने में सक्षम हो जाती है। इसके लिए डॉल्फिन हाई फ्रीक्वैसीं वाले शोर- शराबे जैसी आवाज निकालती है।

इसका उसे फायदा यह होता है कि इस आवाज में एक खास ढंग की भाषा होती है। यह हम इंसानों को समझ में नहीं आती।

चमगादड़ :- चमगादड़ परिंदों की तरह उड़ने वाले स्तनपायी में भी यह इंद्रियां पाई जाती हैं। इनके भीतर राडार की तरंग छोड़ने वाली इंद्रियां होती हैं जिनके जरिए वह अपना भोजन प्राप्त कर लेते हैं और यही इंद्रियां इन्हें आगे आने वाली किसी खतरे से बचाती भी हैं।

चमगादड़ अंधे होते हैं। इन्हें जीवन जीने के लिए आंखों की कोई जरूरत नहीं होती। यह छठी इंद्रिय के जरिए अपनी जरूरतें पूरी कर लेते हैं।

कबूतर :- कबूतरों की बनावट तीन लैवल वाले जटिल पैटर्न से होती है। इससे वे खराब हालात का को भांपने में सक्षम होते हैं। इसका फायदा वे इलाकों की पहचान में भी करते देखे गए हैं।

सांप :- जहरीले सांपों की जातियों में भी ‘सिक्सथ सैंस’ होता है। इससे वह बिलों की गहराई को सूंघ लेते हैं। ऐसा वे अपनी नाक और आंख जैसी दिखने वाली जगह के बीच मौजूद छठी इंद्रिय की मदद से करते हैं। दरसल, सांपों की आंखें नहीं होती, बल्कि उनमें मौजूद इंफ्रारैड जैसी छठी इंद्रिय काम करती है।

इसी से वे रात में भी शिकार करते हैं। यह इंद्रियां कितनी संवेदनशील होती है कि अगर कोई बिल के मुहाने पर पहुंच जाए तो वह पड़ताल कर लेते हैं कि वह कितनी दूर और किस तरह का शिकार है।

मकड़ी :- सभी मकड़ियों में खास ‘रिसैप्टर’ अंग होते हैं जिन्हें ‘सिल्ट सेसिला’ कहते हैं। यह सैंस उनकी अस्थियों में लगे होते हैं। इससे मकड़ी अपने शिकार के आकार, भार आदि की पहचान कर पाती हैं।

मकड़ी के जाल में कोई जीव फंसता है तो पहले से वह तय कर लेती है कि उस पर हमला करना ठीक होगा या नहीं। कीड़े के उड़ने की गति और हवा के बहने की रफ्तार भी मकड़िया अपने सैंसरों से करती हैं।

बत्तख :- बतख जैसे जलीय जीवों में उनके पंखों के ठीक भीतर इलैक्ट्रासैप्टर्स’ लगे होते हैं। इनकी मदद से वे इलैक्ट्रिकल फील्ड का पता लगा लेते हैं। ऐसा वे तब करते हैं जब उन्हें आभास होता है कि आस – पास उनका शिकार मौजूद है इसलिए बतख जाति के ये जीव तैरने के दौरान अपने सिर को बाएं दाएं छुपाते रहते हैं।

इसकी बदौलत उनमें सुनने की शक्ति बढ़ती है लेकिन कोई चीज उन से टकराती है तो वह ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं और अपने को बचाने के काम में लग जाते हैं।

बिल्लियां :- बिल्लियों के बारे में तो वैज्ञानिकों का दावा है कि उनमें किसी नेचुरल डिजास्टर या मौसम बदलावों को काफी पहले ही समझने की क्षमता होती है। ऐसे मौकों पर वे भी अजीब हरकतें करती हैं।

भीषण तूफान ज्वालामुखी के विस्फोटों, भूकंप यहां तक कि हवाई झंझावातों से पहले ही बिल्लियों को इनके आने की सुगबुगाहट होने लगती है।

साल्मन मछली :- यह मछली उन समुद्री जीवो में शामिल हैं जो अपने जीवन की सुरक्षा और खानपान के लिए अपनी छठी इंद्रिय का प्रयोग करती है। समुद्री कछुए जिन तटों पर पैदा होते हैं उन्हें कभी नहीं भूलते, वे चाहे जितनी दूर की यात्रा कर लें, लौट कर आते वे अपने जन्म स्थान पर ही हैं।

किसी इसी तरह कई जानवर अपना भोजन पाने के लिए काफी दूर निकल जाते हैं और उसे पाने के बाद धरती के मैग्नेटिक फील्ड के जरिए वहीं वापस आ जाते हैं जहां से वे भोजन की तलाश में चले थे।

पंजाब केसरी से साभार….।

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पंखो पर की गई अद्भुत पेंटिंग्स!

पक्षियों के पंखों का इस्तेमाल पुराने (इतिहास) समय से होता आ रहा है। खास तौर से हम मोर पंख कलम, कपड़ों, गहनों और सजावट के लिए इस्तेमाल करते आ रहे है। लेकिन एक कलाकार ऐसी भी हैं, जो पक्षियों के पंखों पर अद्भुत पेंटिंग्स करती हैं। यहाँ हम शुतुरमुर्ग, मोर और कई अन्य पक्षियों के पंखों पर की गई चित्रकारी और कलाकारों द्वारा बनायी गई अदभुत पेंटिंग्स को आपके सामने रख रहे हैं।

अलास्का की रहने वाले जूली थॉमसन (Julie Thompson) कला वन्य जीवन से बहुत प्रभावित हैं। जूली ने 1990 के दशक की शुरुआत में, मोर और टर्की जैसे पालतू पक्षियों द्वारा प्राकृतिक रूप से शेड का उपयोग करके इस कलाकृति को शुरू किया था। जूली थॉमसन मानना है कि हर पंख में पेंटिंग से संबंधित एक अलग तरह का व्यक्तित्व होता है।

वे पंखों पर हर प्रकार के चित्र बनाती थीं । प्रत्येक चित्र बहुत बारीकी से बना होता है,जो प्रत्येक व्यक्ति को अपनी और आकर्षित करता है। जूली थॉमसन पिछले 20 साल से एक वन्य जीवन कलाकार हैं, जो पक्षियों के पंखों पर अदभुत पेंटिंग्स बनाती हैं। ये वह पंख हैं, जिसे हम अक्सर नज़र अंदाज़ कर देते हैं।

जूली थॉमसन इन्ही पंखों पर खूबसूरत पेंटिंग्स बनती हैं। कई बार एक पंख पर पेंटिंग बनाने  में 20 घंटे से ज़्यादा समय लग जाता है। उनके द्वारा बनाई गई तस्वीरें इतनी ज़्यादा खूबसूरत होती है, कि जूली थॉमसन अपनी तस्वीरों के बारे में कुछ भी बयां नहीं करती, बल्कि इनकी तस्वीरें इतनी काबिल होती हैं, कि वो खुद को बयां कर देती हैं।

हाल ही में जूली थॉमसन ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी प्रदर्शनी को भी दिखाया है। उनके द्वारा बनाई गई कुछ ऐसी ही पेंटिंग जिनके बारे में हम आपके बताने जा रहे हैं।

यह हैं उनके द्वारा बनायी गयी कुछ अदभुत पेंटिंग्स।

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