पग – कुत्ते की पालने योग्य सबसे पसंदीदा नस्ल, जाने कैसे करें देखभाल

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वैसे तो सभी कुत्ते बहुत प्यारे होते हैं परन्तु छोटे कद के कुत्तों की बात ही कुछ और होती है। यह कुत्ते बहुत प्यारे व सुन्दर होते हैं और इन्हें छोटे घरों या अपार्टमेंट में रखना भी आसान होता है। इन्हीं कुत्तों में सबसे ज्यादा पसंदीदा कुत्ता पग है l यह चार रंगों में पाया जाता है :- काला, गोल्डन, सिल्वर एवं एप्रीकॉटl

पग प्रजाति के कुत्ते चीन में विकसित हुए हैं और यह बच्चों को बहुत पसंद आते हैं l इस नस्ल के कुत्ते शांत स्वभाव और आलसी होते हैं इन्हें इंसानों की तरह सोना बहुत पसंद होता हैं l

ये अधिकतर समय सोते ही रहते हैं l पग नस्ल के कुत्तों की औसत आयु 12 से 15 साल तक होती है l पग को मिलनसार और सज्जन साथी के लिए जाना जाता है। 2004 में वर्ल्ड डॉग शो में पग को “बेस्ट इन शो” घोषित किया गया था।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं कि इनका रख-रखाव कैसे किया जा सकता है :-

खान पान

भोजन की मात्रा और किस्म, कुत्ते की उम्र और उसकी नस्ल पर निर्भर करती है। छोटी नस्लों को बड़ी नस्ल के मुकाबले भोजन की कम मात्रा की आवश्यकता होती है। भोजन उचित मात्रा में दिया जाना चाहिए नहीं तो कुत्ते सुस्त और मोटे हो जाते हैं।

संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स, फैट, प्रोटीन, विटामिन और ट्रेस तत्व शामिल हैं, पालतू जानवरों को स्वस्थ और अच्छे आकार में रखने के लिए आवश्यक होते हैं।

कुत्ते को 6 आवश्यक तत्व जैसे फैट, खनिज, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स, पानी और प्रोटीन की आवश्यकता होती है इसके साथ ही इन्हें सारा समय साफ पानी की आवश्यकता होती है।

पिल्ले को 29 प्रतिशत प्रोटीन और प्रौढ़ कुत्ते को आहार में 18 प्रतिशत प्रोटीन की जरूरत होती है। हम उन्हें ये सारे आवश्यक तत्व उच्च गुणवत्ता वाले सूखा भोजन देकर दे सकते हैं। इन्हें दिन में दो बार ½ -1 कप उच्च गुणवत्ता वाला सूखा भोजन देना चाहिए।

देखभाल

  • इस नस्ल के कुत्ते अधिक गर्मी वाले वातावरण में ज्यादा अधिक देर तक नही रह सकते हैं गर्म स्थान पर ज्यादा देर तक रहने इसे समस्या होने लगती हैं। गर्मी से बचाने के लिए आपको विशेष रूप से इन पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। आप यदि ऐसे स्थान पर रहते हैं जहां अधिक गर्मी होती तो आपको पग की सुविधा अनुसार तापमान को नियंत्रित करना होगा।
  • ये खाने के मामले में थोड़े लालची होते है तथा स्वादिष्ट और पसंदीदा भोजन मिलने पर यह अपनी भूख से अधिक खा सकते हैं तथा इस कारण यह मोटे और भारी हो सकते है जिसके लिए आपको इसके भोजन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं।

पग डॉग का स्वास्थ्य

वैसे तो पग एक स्वस्थ्य नस्ल है लेकिन बाकी अन्य नस्लों की तरह ही इसे कुछ अनुवांशिक बीमारियों का खतरा बना रहता है तथा एक पग नस्ल को पालने से पहले आपको इन स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पता होना बेहद जरूरी हैं।

  • एलर्जी:- एलर्जी के प्रति भी पग एक स्वेदंशील नस्ल है तथा यह बहुत जल्दी भोज्य पदार्थों और पराग कणों के कारण एलर्जी का शिकार हो जाते हैं।
  • चेलेटिएला डर्मेटाइटिस:- चेलेटिएला डर्मेटाइटिस यह एक त्वचा रोग है जोकि बालो के बाहर वाली त्वचा को प्रभावित करता है। इस रोग के कारण बालो में डेंड्रफ की समस्या होने लगती है जोकि मुख्य रूप से पर पीट पर दिखाई देते हैं। चेलेटिएला डर्मेटाइटिस रोग के जिम्मेदार घुन के समान दिखने वाले परजीवी होती है।
  • पग डॉग एन्सेफलाइटिस:- पग डॉग एन्सेफलाइटिस (PDE) यह पग नस्ल में होने वाली एक बेहद खतरनाक और जानलेवा रोग है यह एक मस्तिस्क में होने वाली बीमार है इस रोग की वजह से मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। PDE एक लाईलाज बीमारी है इस रोग से अधिकतर व्यस्क पग डॉग प्रभावित होते हैं और इस रोग के दौरान दौरे, चक्कर आना, अंधापन जैसे लक्षण पग में देखने को मिलते है। अमेरिकी केनेल क्लब कैनाइन हेल्थ फाउंडेशन ने pde को पग नस्ल के लिए एक विनाशकारी बीमारी बताया है।
  • मिर्गी:- मिर्गी भी पग नस्ल में देखे जाने वाली एक अनुवांशिक बीमारियों में से एक है मिर्गी से सभी पग तो पीड़ित नहीं होते है लेकिन कुछ डॉग्स में यह समस्या देखने को मिल सकती हैं। पग नस्ल में मिर्गी के दौरे दिखने पर पशु चिकित्सक की सलाह से जरूरी उपचार करवाए।
  • कॉर्नियल अल्सर:- आपका प्यारा पग कार्नियल अल्सर से भी पीड़ित हो सकता है कॉर्नियल अल्सर के सबसे आम लक्षण स्क्विंटिंग, लालिमा और ओकुलर डिस्चार्ज हैं। उपयुक्त चिकित्सा के साथ ये आमतौर पर अपने प्रारंभिक आकार के आधार पर 3 से 5 दिनों में ठीक हो जाते हैं। 5 से 7 दिनों से अधिक समय तक बने रहने वाले अल्सर जिसमें चिकित्सा के बावजूद थोड़ा सुधार होता है, को दुर्दम्य माना जाता है।

यदि आपके पास पग है तो यह किताब इसके स्वभाव को समझने और इसे आपके और करीब लाने में मदद कर सकती है। यह किताब आपके पालतू पग की psychology यानि मनोविज्ञान को समझने में बहुत अधिक सहायक हो सकती है।

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