गोल्डन रिट्रीवर कुत्ते पालने योग्य सबसे पसंदीदा नस्ल, जानिए कैसे करें देखभाल  

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गोल्डन रिट्रीवर कुत्ते की नस्ल लोकप्रिय नस्लों में से एक हैं। गोल्डन रिट्रीवर को भारत में बहुत पसंद किया जाता है। इस नस्ल के कुत्ते बच्चों वाले घर में अधिक पसंद किया जाता है और ये खेलकूद में बहुत तेज़ होते हैं।

ये बच्चों के साथ जल्दी घुल मिल जाने और खेलने कूदने के लिए जाने जाते है। इनकी खास बात यह भी है कि ये कुत्ते अपने मालिकों के साथ घूमना और उनके पैरों पर सोना पसंद करते हैं।

इन्हें मुख्यत: शिकार करने, ट्रैकिंग करने और थेरेपी करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इनकी सूंघने की शक्ति बहुत तेज होती है। यह नस्ल बहुत खूबसूरत, वफादार, सामाजिक और बुद्धिमान होती है।

इस नस्ल को दैनिक व्यायाम या सैर की आवश्यकता होती है। इसकी खाल पानी सोखने के योग्य नहीं होती। इसके नाम से ही पता चलता है कि इसकी खाल सुनहरी (गोल्डन) रंग की होती है।

इस नस्ल के कुत्ते 1.9 फीट से 2 फीट लंबे होते हैं और इनका औसतन भार 25-35 किलो होता है और जीवन काल 10-12 वर्ष होता है।

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भोजन की सही मात्रा

भोजन की मात्रा और किस्म, कुत्ते की उम्र और उसकी नस्ल पर निर्भर करती है। छोटी नस्लों को बड़ी नस्ल के मुकाबले भोजन की कम मात्रा की आवश्यकता होती है।

भोजन उचित मात्रा में दिया जाना चाहिए नहीं तो कुत्ते सुस्त और मोटे हो जाते हैं। संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स, फैट, प्रोटीन, विटामिन और ट्रेस तत्व शामिल हैं, यह जानवरों को स्वस्थ और अच्छे आकार में रखने के लिए आवश्यक होता हैं। इसके साथ ही इन्हें सारा समय साफ पानी की आवश्यकता होती है।

पिल्ले को 29 प्रतिशत प्रोटीन और प्रौढ़ कुत्ते को आहार में 18 प्रतिशत प्रोटीन की जरूरत होती है। हम उन्हें ये सारे आवश्यक तत्व उच्च गुणवत्ता वाले सूखा भोजन देकर दे सकते हैं। इन्हें दिन में दो बार 2-3 कप उच्च गुणवत्ता वाला सूखा भोजन देना चाहिए।

भोजन जो कुत्ते को नहीं देना चाहिए

  • कॉफी – यह पालतू जानवरों के लिए हानिकारक होती है क्योंकि इसके कारण कैफीन विषाक्तता होगी। इस बीमारी के लक्षण हैं तेजी से सांस लेना, बेचैनी, मांसपेशियों में झटके और घबराहट होना होता है।
  • आइस क्रीम – मानवों की तरह ही कई कुत्ते लैक्टोस को सहन नहीं करते और परिणामस्वरूप उन्हें डायबिटीज़ हो जाती है।
  • चॉकलेट – क्योंकि चॉकलेट में उच्च मात्रा में थियोब्रोमाइन होता है जो कि नुकसानदायक पदार्थ होता है। इसके कारण अत्याधिक प्यास लगती है, दौरे पड़ते हैं, दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है और फिर अचानक मौत हो जाती है।
  • शराब – यह कुत्ते के लीवर और दिमाग को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है, कुत्ते कोमा में चले जाते हैं और यहां तक कि मौत भी हो जाती है।
  • प्याज – यह कुत्ते के लाल रक्ताणुओं को नष्ट करके उसे नुकसान पहुंचाता है।

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कैसे करें देख भाल

पिल्ले का चयन करते समय सावधानियां – पिल्ले का चयन करते समय उसके बालों, लिंग और आकार के अनुसार किया जाना चाहिए। पिल्ला वह खरीदें जो 8-12 सप्ताह का हो।

पिल्ला खरीदते समय उसकी आँखें, मसूड़े, पूंछ और मुंह की जांच करें। आँखें साफ और गहरी होनी चाहिए, मसूड़े गुलाबी होने चाहिए और दस्त के कोई संकेत नहीं होने चाहिए।

आश्रयकुत्ते को रहने के लिए अच्छी तरह से हवादार, साफ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करें। आश्रय बारिश और हवा और आंधी से सुरक्षित होना चाहिए। सर्दियों में कुत्तों को ठंड के मौसम से बचाने के लिए कंबल दें और गर्मियों में छाया और ठंडे स्थानों की आवश्यकता होती है।

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पानी – कुत्ते के लिए 24 घंटे साफ पानी उपलब्ध होना चाहिए। पानी को साफ रखने के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तन को आवश्यकतानुसार दिन में कम से कम दो बार या इससे अधिक समय में साफ करना चाहिए।

बालों की देख रेख – सप्ताह में दो बार बालों को साफ किया जाना चाहिए। कंघी करने से अच्छा है प्रतिदिन ब्रशिंग करें। छोटे बालों वाली नस्ल के लिए सिर्फ ब्रशिंग की ही आवश्यकता होती है और लंबे बालों वाली नस्ल के लिए ब्रशिंग के बाद कंघी करनी चाहिए।

गोल्डन रिट्रीवर को ब्रश कैसे करें – गोल्डन रिट्रीवर के लिए पहला कदम एक अच्छी ब्रशिंग है, जो नियमित रूप से सप्ताह में कम से कम एक बार किया जाना चाहिए।

नहलाना – कुत्तों को 10-15 दिनों में एक बार नहलाना चाहिए। नहलाने के लिए औषधीय शैंपू की सिफारिश की जाती है।

नवजात पिल्लों की देखभाल – पिल्लों के जीवन के कुछ हफ्तों के लिए उनकी प्राथमिक गतिविधियों में अच्छे वातावरण, आहार और अच्छी आदतों का विकास शामिल है।

कम से कम 2 महीने के नवजात पिल्ले को मां का दूध प्रदान करें और यदि मां की मृत्यु हो गई हो या किसी भी मामले में पिल्ला अपनी मां से अलग हो जाए तो शुरूआती फीड या पाउडरड दूध पिल्ले को दिया जाता है।

बीमारियां और रोकथाम

कैंसर – इसके लक्षण हैं सांस लेने में कठिनाई, सुस्ती, तेजी से वजन घटना, अचानक लंगड़ापन, भूख की कमी और पेशाब में कठिनाई होना। अधिक उम्र के कुत्तों में यह बीमारी ज्यादातर पायी जाती है।

मुख्य रूप से बोस्टन टेरियन, गोल्डन रिटिराइवरज़ और बॉक्सरज़ नस्लें हैं जिनमें ट्यूमर विकसित होता है और ग्रेट डेन्स और सेंट बर्नार्ड नसलों में हड्डियों का कैंसर मुख्यत: पाया जाता है।

इलाज – कैंसर की किस्म और अवस्था के आधार पर इलाज करवाना चाहिए। इलाज में मुख्यत: कीमोथेरेपी, रेडिएशन, सर्जरी और इम्यूनोथेरेपी शामिल होती है।

शूगर– यह बीमारी मुख्यत: इंसुलिन हारमोन की कमी या इंसुलिन की अपर्याप्त प्रतिक्रिया के कारण होती है। इसके लक्षण हैं, सुस्ती, उल्टियां, क्रॉनिक त्वचा संक्रमण, अंधापन, डीहाइड्रेशन, भार कम होना और बार-बार पेशाब आना।

मुख्य रूप से यह 6-9 वर्ष के कुत्तों में शूगर के कारण होता है। पूडलज़, केज हंड, डेशुंड, और सिनाउज़र, सैमाइड, टेरिअर नस्लों में यह बीमारी मुख्यत: पायी जाती है। गोल्डन रिट्रीवर और कीशोंड्ज़ नसल में जुवेनाइल डायबिटीज़ पायी जाती है।
इलाज – उचित रक्त नियमन के लिए इंसुलिन के इंजैक्शन जरूरी होते हैं।

हार्टवॉर्म – इसके लक्षण हैं सांस लेने में कठिनाई, उल्टियां, खांसी होना, भार कम होना और थकान होना। यह बीमारी मुख्यत: जानवर को जानवर से मच्छरों के द्वारा फैलती है।
इलाज– हार्टवॉर्म बीमारी के इलाज के लिए एडल्टीसाइड्ज़ नाम की दवाई कुत्ते की मांसपेशी में दी जाती है।

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रेबीज़ – रेबीज़ के लक्षण हैं अतिसंवेदनशील, बुखार, भूख में कमी, कमज़ोरी, जबड़े और गले की मांसपेशियों का लकवाग्रस्त होना, अचानक मृत्यु आदि।
इलाज – कुत्ते को रेबीज़ एक बार हो जाने पर इसका कोई इलाज नहीं है। इस बीमारी के परिणामस्वरूप अचानक मृत्यु हो जाती है।

दाद – इसके लक्षण हैं कानों, पंजों, सिर और शरीर के अगले भागों आदि पर धब्बों का पड़ना। दाद, आकार में गोल और धब्बेदार होते हैं। कम उम्र के कुत्ते इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं।
इलाज – दाद के इलाज के लिए चिकित्सीय शैंपू या लेप की सिफारिश की जाती है।

केनिन डिस्टेम्पर – 3-6 महीने के कुत्ते इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसके लक्षण हैं उल्टी, खांसी, डायरिया और निमोनिया।
इलाज – एंटीबायोटिक जैसे क्लोरमफेनीकोल या एम्पीसिलिन या जेंटामिसिन 5-7 दिनों के लिए दें।
रोकथाम – 7-9 सप्ताह के कुत्ते को पहला टीका लगवाना चाहिए और फिर दूसरा टीका 12-14 सप्ताह के बच्चे को लगवाना चाहिए।

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