जानिए कहानी पटाखों की!!

हर साल दिवाली पर पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर बहस शुरू हो जाती है। इस बार भी लोगों को ‘ग्रीन क्रैकर्स‘ चलाने के लिए ही प्रोत्साहित किया जा रहा है जो पर्यावरण को आम पटाखों जितना नुक्सान नहीं पहुंचाते और ध्वनि प्रदूषण भी कम करते हैं परंतु क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले पटाखे कैसे बने और भारत में इनका उपयोग कब शुरू हुआ था।

यूं बने पटाखे

इतिहास में पटाखों का पहला प्रमाण चीन में मिलता है जहां बांस को लगातार गर्म करने पर वह धमाके के साथ फटता था। इसके बाद पटाखों का आविष्कार एक दुर्घटना के कारण चीन में ही हुआ। मसालेदार खाना बनाते समय एक रसोइए ने गलती से साल्टपीटर‘ (पोटैशियम नाईट्रेट)आग पर डाल दिया।

इससे उठने वाली लपटें रंगीन हो गई जिससे लोगों की उत्सुकता बढ़ी। फिर मुख्य रसोइए ने ‘साल्टपीटर‘ के साथ कोयले व सल्फर का मिश्रण आग के हवाले कर दिया जिससे काफी तेज आवाज के साथ रंगीन लपटें उठीं।

बस, यहीं से आतिशबाजी यानी पटाखों की शुरूआत हुई। कुछ चीनी रसायनशास्त्रियों ने चारकोल, सल्फर आदि मिलाकर कच्चा बारूद बनाया और कागज में लपेटकर फायर पिल’ बनाई।

ये कागज के बम थे जिनका उपयोग वे दुश्मनों को डराने के लिए करते थे। कागज के पटाखे इजाद करने के 200 साल बाद चीन में हवा में फूटने वाले पटाखों का निर्माण शुरू हो गया। इन पटाखों का उपयोग युद्ध के अलावा आतिशबाजी के रूप में एयर शे के लिए होने लगा।

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यूरोप में पटाखे

यूरोप में पटाखों का चलन 1258 ईस्वी में शुरू हुआ था। यहां सबसे पहले पटाखों का उत्पादन इटली ने किया। जर्मनी के लोग युद्ध के मैदानों में इन बमों का इस्तेमाल करते थे। इंगलैंड में पहली बार इनका उपयोग समारोहों में किया गया।

महाराजा चार्ल्स (पंचम) अपनी हरेक विजय का जश्न आतिशबाजी करके मनाते थे। इसके बाद 14वीं सदी के शुरू होते ही लगभग सभी देशों ने बम बनाने का काम शुरू कर दिया।

अमरीका में इसकी शुरूआत 16वीं शताब्दी में सेना ने की थी। पश्चिमी देशों ने हाथ से फैंके जाने वाले बम बनाए। बंदूकें और तोप भी इसी कारण बनी थीं।

भारत में पटाखे

बारूद की जानकारी भारतीयों को बहुत पहले से थी। ईसा पूर्व काल में रचे गए चाणक्य के अर्थशास्त्र में एक ऐसे चूर्ण का जिक्र है जो तेजी से जलता और तेज लपटें पैदा करता था। इसे एक नलिका में डाल दिया जाए तो पटाखा बन
जाता था।

बंगाल के इलाके में बारिश के मौसम के बाद कई इलाकों में सूखती हुई जमीन पर ही लवण की एक परत बन जाती थी। हालांकि, इसका अधिक उपयोग नहीं किया गया।

भारत में मुगलों के दौर में पटाखे खूब इस्तेमाल होने लगे। तब शादी या दूसरे जश्न में भी आतिशबाजी होती थी। अंग्रेजों के शासन के दौरान भी उत्सवों में आतिशबाजी करना काफी लोकप्रिय हुआ।

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19वीं सदी में पटाखों की मांग बढ़ने का ही नतीजा था कि कई फैक्टरियां लगीं। भारत में पटाखों की पहली फैक्टरी 19वीं सदी में कोलकाता में लगी। बाद में भुखमरी और सूखे की समस्या से जूझ रहे शिवकाशी (तमिलनाडु) के 2 भाई शणमुगा और पी. नायर नाडर कोलकाता की एक माचिस फैक्टरी में नौकरी के लिए पहुंचे।

वहां के कामकाज को समझने और सीखने के बाद इन्होंने शिवकाशी लौट कर अपनी खुद की फैक्टरी शुरू की। शिवकाशी का शुष्क मौसम पटाखे बनाने के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ। आज शिवकाशी ही देश में पटाखे बनाने का सबसे बड़ा केन्द्र है।

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अब ग्रीन पटाखों से दिवाली

दिवाली पर पटाखों की वजह से होने वाले प्रदूषण के कारण कुछ सालों से इन्हें कम चलाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है और इन पर बैन भी लग रहा है।

इसे देखते हुए अब कई प्रकार के ग्रीन पटाखे बाजार में मिलने लगे हैं जो आम पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करते हैं और साथ ही हानिकारक कैमिकल और ध्वनि प्रदूषण भी कम फैलाते हैं।

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जानिए क्या है कलर ब्लाइंडनेस के कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !!

कलर ब्लाइंडनेस एक ऐसी स्थिति है जिसमें कुछ रंगों में अंतर करने की क्षमता सामान्य से कम हो जाती है। जिसमें आपकी आँखें उस तरह से रंग नहीं देख पाती हैं, जैसी होनी चाहिए। इसका अर्थ है कि कलर ब्लाइंडनेस से पीड़ित व्यक्ति को लाल, हरे, नीले या इनका मिश्रण देखने में परेशानी होती है।

ऐसा बहुत कम होता है कि किसी व्यक्ति की रंग देखने की क्षमता ही चली जाए (इसे मोनोक्रोमसी कहते हैं)। बहुत से लोगों का यह मानना हैं कि कलर ब्लाइंडनेस से पीड़ित व्यक्ति को केवल काले और सफेद रंग ही दिखते हैं परन्तु यह एक गलत धारणा है।

कलर ब्लाइंडनेस के कई अलग-अलग प्रकार और स्तर हैं। भारत में कलर ब्लाइंडनेस का प्रचलन पुरुषों में 8% और महिलाओं में केवल 0.5% है।

हम रंग कैसे देखते हैं?

मानवीय आँख रेटिना (आँख के अंदर की ओर झिल्ली) को हल्का सा उत्तेजित करके रंग देखती है। रेटिना रॉड और कॉन्स कोशिकाओं से बनी होती है।

रॉड कोशिकाएं :-रॉड कोशिकाएं रेटिना के घेरे में स्थित होती हैं। यह हमें रात को देखने में मदद करती हैं, लेकिन यह रंगों में अंतर नहीं कर सकती।

कॉन्स कोशिकाएं : कॉन्स कोशिकाएं रेटिना के केंद्र में स्थित होती हैं, यह रात में देखने में मदद नहीं करती हैं, लेकिन दिन के समय के दौरान रंगों को समझने में सक्षम होती हैं। कॉन्स कोशिकाओं को तीन प्रकार में विभाजित किया जाता है:

1. एल-कॉन कोशिकाएं जो लाल रौशनी को महसूस करती हैं।

2. एम-कॉन कोशिकाएं जो हरी रौशनी को महसूस करती हैं।

3. एस-कॉन कोशिकाएं जो नीली रौशनी को महसूस करती हैं।

कलर ब्लाइंडनेस का निदान स्वयं किया जा सकता है। यह तब होता है जब रंग महसूस करने वाली कॉन कोशिकाएं मस्तिष्क को संकेत नहीं भेज पाती हैं। यह आमतौर पर या तो पारिवारिक कारणों की वजह से होता है या ऑप्टिक तंत्रिका या रेटिना के रोगों द्वारा होता है। यह समस्या एक्स-क्रोमोजोम से जुड़ी है और लगभग हमेशा एक मां से अपने बेटे में होती है।
कलर ब्लाइंडनेस उम्र बढ़ने, आँख की समस्याओं (जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा), आंखों की चोटों, कुछ दवाइयों के दुष्प्रभावों के कारण हो सकता है। पारिवारिक कारणों से हुआ कलर ब्लाइंडनेस जीवन भर रहता है।

लाल-हरा रंगों का कलर ब्लाइंडनेस पारिवारिक कारणों से होता है। यह सबसे आम प्रकार का कलर ब्लाइंडनेस है।

कलर ब्लाइंडनेस के प्रकार

कलर ब्लाइंडनेस तीन प्रकार का होता है जिसमें से प्रत्येक के उप-प्रकार हैं:-

लाल-हरा कलर ब्लाइंडनेस पारिवारिक कारणों से हुए कलर ब्लाइंडनेस का सबसे सामान्य प्रकार लाल कॉन या हरे कॉन रंगद्रव्य की क्षति या कम कार्य कर पाने के कारण होता है। लाल-हरा कलर ब्लाइंडनेस चार प्रकार का होता है :-

1. प्रोटेनॉम्ली (Protanomaly) – यह कलर ब्लाइंडनेस लाल कॉन रंगद्रव्य के आसामान्य होने के कारण होता है। इस प्रकार के कलर ब्लाइंडनेस में लाल, नारंगी और पीले रंग हरे दिखते हैं और रंग चमकदार नहीं होते हैं। यह स्थिति सौम्य होती है और आमतौर पर दैनिक जीवन पर इसका असर नहीं होता है।

2. प्रोटेनॉपिआ (Protanopia) – इस कलर ब्लाइंडनेस में लाल कॉन रंगद्रव्य काम करना बंद कर देते हैं और लाल रंग काला दिखाई देता है। नारंगी, पीले और हरे रंग के कुछ प्रकार सभी पीले रंग के रूप में दिखाई देते हैं।

3. ड्यूटेरानॉम्ली (Deuteranomaly) – यह कलर ब्लाइंडनेस का सबसे आम प्रकार है। इसमें हरा कॉन रंगद्रव्य असामान्य होता है। इसमें पीला और हरा रंग लाल दिखाई देते है और बैंगनी और नीले रंग को पहचानना मुश्किल होता है। यह स्थिति सौम्य होती है और आमतौर पर दैनिक जीवन पर इसका भी असर नहीं होता है।

4. ड्यूटेरानॉपिआ (Deuteranopia) – इस कलर ब्लाइंडनेस में हरे कॉन रंगद्रव्य काम करना बंद कर देते हैं। वे लाल रंगों को भूरा-पीला और हरे रंग को गहरा पीला जैसा देखते हैं।

नीला-पीला कलर ब्लाइंडनेस

नीला-पीला कलर ब्लाइंडनेस लाल-हरे कलर ब्लाइंडनेस से दुर्लभ है। इसमें नीले कॉन रंगद्रव्य (ट्राइटन) या तो होते ही नहीं हैं या सीमित कार्य करते हैं। नीले-पीले कलर ब्लाइंडनेस के दो प्रकार होते हैं।

1. ट्राइटोनॉमलि (Tritanomaly) – इसमें नीले कॉन रंगद्रव्य कम कार्य करते हैं। इसमें नीला रंग हरा दिखाई देता है और गुलाबी से पीले और लाल में फरक करना मुश्किल हो सकता है।

2. ट्राइटेनॉपिआ(Tritanopia) – ट्राइटेनॉपिआ से ग्रस्त लोगों में नीली कॉन कोशिकाओं की कमी होती है। इसमें नीला रंग हरा दिखाई देता है और पीला रंग बैंगनी या हल्के भूरे रंग का दिखता है।

पूर्ण कलर ब्लाइंडनेस (मोनोक्रोमसी)

पूर्ण कलर ब्लाइंडनेस (मोनोक्रोमैसी) वाले लोगों को रंग बिल्कुल दिखाई नहीं देते हैं और उनकी दृष्टि की स्पष्टता भी प्रभावित हो सकती है। मोनोक्रोमसी दो प्रकार के होते हैं।

1. कॉन मोनोक्रोमसी (Cone monochromacy) – इसमें तीन कॉन सेल रंगद्रव्य में से दो या तीनों काम नहीं करते। लाल कॉन मोनोक्रोमसी, हरी कॉन मोनोक्रोमसी और नीली कॉन मोनोक्रोमसी होती है। कॉन मोनोक्रोमसी वाले लोगों को रंगों में भेद करने में परेशानी होती है क्योंकि मस्तिष्क को विभिन्न प्रकार के कॉन से आए संकेतों की ज़रुरत होती है रंगों को देखने के लिए जब केवल एक प्रकार का कॉन काम करता है तो यह तुलना संभव नहीं होती है।

2. रॉड मोनोक्रोमसी (Rod monochromacy) – यह जन्म से मौजूद होता है। इसमें कॉन कोशिकाओं में से कोई भी कार्यात्मक रंगद्रव्य नहीं होता है। रॉड मोनोक्रोमसी वाले लोगों को दुनिया काले, सफेद और ग्रे रंग में दिखती है। रॉड मोनोक्रोमसी वाले लोग प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते है जिसे फोटोफोबिक कहते है।

कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण

1. सामान्य तरीके से रंगों और रंगों की चमक को देखने में समस्या।

2. सामान्य रंगों के बीच अंतर को बताने में असमर्थता।

अक्सर, कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण बहुत आम होते हैं कुछ लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें इसकी समस्या है। जब कोई बच्चा रंगों को सीख रहा होता है, तो माता-पिता को कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर परिस्थितियों में पाए जाने वाले अन्य लक्षण निम्नलिखित हैं:-

1. कुछ रंगों को पहचानने में असमर्थता।

उदाहरण के लिए लाल और हरे रंगों के बीच के अंतर न बता पाना लेकिन नीले और पीले रंगों में आसानी से बता देना।

2. केवल कुछ रंगों को देख पाना।

3. केवल काले, सफेद, और ग्रे रंग देख पाना (दुर्बल मामलों में)।

4. कुछ रंगों में फर्क करने की कम क्षमता।

5. पढ़ने में कठिनाई।

6. पलकों का गिरना।

7. एक रंग के कुछ प्रकारों को ही देखा पाना।

8. कई रंग देखने में कठिनाई।

9. रंगों के नाम गलत बताना।

10. दृष्टि में दोहरापन (डिप्लोपिआ)।

11. आँख में दर्द होना।

12. आँखों की गतिविधि में तीव्रता।

13. कभी-कभी, दृष्टि की कमज़ोर होना।

कलर ब्लाइंडनेस के कारण

यदि आपकी आँखें सामान्य हैं, तो आप अलग-अलग रंगों में अंतर कर सकते हैं लेकिन अगर आपकी कॉन कोशिकाओं में एक या अधिक प्रकाश-संवेदनशील रसायनों की कमी होती है, तो आप केवल दो प्राथमिक रंग देख सकते हैं। कलर ब्लाइंडनेस होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:-

1. पारिवारिक विकार

पारिवारिक कारणों से होने वाली रंग दृष्टि की समस्याएं महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में अधिक सामान्य होती हैं। सबसे आम कलर ब्लाइंडनेस लाल-हरे रंग की होती है जबकि नीले-पीले रंग की कलर ब्लाइंडनेस बहुत कम होती है।

कोई भी रंग न देख पाने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं। पारिवारिक विकार के कारण आपको हल्के, मध्यम या गंभीर स्तर का विकार हो सकता है।

पारिवारिक विकार के कारण हुई कलर ब्लाइंडनेस आमतौर पर दोनों आँखों को प्रभावित करती है और इसकी तीव्रता आपके जीवनकाल में नहीं बदलती।

2. रोग

कुछ ऐसी परिस्थितियां जो कलर ब्लाइंडनेस का कारण बन सकती हैं, वह हैं सिकल सेल एनीमिया, मधुमेह, आँख की मैक्युलर डिजनरेशन (मैक्यूला का व्यपजनन), अल्जाइमर रोग, ग्लूकोमा, पार्किंसंस रोग, शराब की पुरानी लत और ल्यूकेमिया। इसमें एक आँख दूसरे की तुलना में अधिक प्रभावित हो सकती है और कलर ब्लाइंडनेस का इलाज किया जा सकता अगर उससे जुड़ी बीमारी का इलाज हो।

3. कुछ दवाएं जो हृदय की समस्याएं, उच्च रक्तचाप, स्तंभन दोष, संक्रमण, तंत्रिका संबंधी विकार और मनोवैज्ञानिक समस्याओं का इलाज करती हैं, कलर ब्लाइंडनेस भी कर सकती हैं।

4. उम्र का बढ़ना आपकी उम्र बढ़ने के साथ-साथ रंगों को देखने की आपकी क्षमता धीरे-धीरे कम होती है। रसायन कार्यस्थल में कुछ रसायनों के संपर्क में आना जैसे कार्बन डाइसल्फाइड और उर्वरक, कलर ब्लाइंडनेस कर सकते हैं।

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णान्धता) से बचाव

कलर ब्लाइंडनेस का निदान आमतौर पर एक नियमित आँख के परीक्षण के दौरान हो जाता है इसलिए बच्चों का 4 साल की उम्र में कलर ब्लाइंडनेस का परीक्षण किया जाना चाहिए। यह रोका नहीं जा सकता है, लेकिन इससे स्वास्थ्य के लिए कोई खतरा नहीं होता है।

इससे असुविधा हो सकती है लेकिन रोज़मर्रा की जिंदगी पर इससे कोई बाधा नहीं होती। कलर ब्लाइंडनेस के अधिकांश मामले पारिवारिक कारणों के कारण होते हैं इसलिए, इन्हें रोका नहीं जा सकता।

हालांकि, बच्चों में कलर ब्लाइंडनेस काशीघ्र निदान इसकी प्रकृति और गंभीरता को समझने में मदद कर सकता है। अगर आप दृष्टि की कमी से सम्बंधित कोई दवा ले रहे हैं तो आपकी दृष्टि की नियमित जाँच होनी चाहिए।

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अलग दिखने का ऐसा जुनून, जिसे देखकर आप दंग जायेंगे

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आज कल लोग अलग करने या दिखने के लिए कुछ भी करते हैं। कोई अपने कपड़ों और लुक के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं तो कोई अपने हेयर स्टाइल साथ।

आज की हमारी इस पोस्ट में हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने सबसे अलग दिखने के चकर में अपने सिर के सारे बाल हटवा दिए, तो चलिए जानते हैं :-

मशहूर मैक्सिकन रैपर (Mexican Rapper) डैन सुर ने अपने सिर से सारे बाल हटवा दिए और उसकी जगह सोने की चेन लगवा ली है। इन्होंने लाइम लाइट में आने के लिए ऐसा काम किया है जो आज तक किसी ने नहीं किया होगा। डैन सुर (Dan Sur) नाम के इस रैपर की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो भी रही है।

 

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डैन सुर ने इंस्टाग्राम पर अपने नए लुक की फोटो पोस्ट की है। जिसमें उसके चेहरे पर गोल्ड की चेन लटकते दिख रही है। रैपर ने ऑपरेशन के जरिए खोपड़ी में सोने की चेन का गुच्छा लगवाया है।

एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए डैन सुर ने बताया कि वो कुछ अलग करना चाहते थे। उनका कहना है कि बालों को तो हर कोई रंगवाता है और उनकी नकल भी हरकोई कर लेता है।

डैन ने कहा कि उनके सिर में एक हुक को लगाया गया है ये सोने के चेन उसी हुक की सहायता से दूसरी हुक के साथ एक के बाद एक करके जुड़े हुए हैं। रैपर का दावा है कि इस नए लुक से उन्हें म्यूजिक करियर में मदद मिलेगी।

वहीं डैन ने यह भी दावा किया है कि वो अपने सिर में सोने की चेन लगवाने वाले दुनिया के पहले इंसान हैं। रैपर ने ये भी बताया कि उन्होंने अपने दांतों में भी सोना लगवाया है। जिस कारण उनके नए लुक के फोटो और वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं ।

ये विशालकाय पेड़ है पूरे जंगल के समान

बरगद एक दीर्घजीवी और विशालकाय पेड़ होता है, जिसे हिंदू परंपरा के अनुसार पूज्यनीय माना जाता है। वैसे तो बरगद के पेड़ दुनियाभर में पाए जाते हैं, लेकिन दुनिया का सबसे विशालकाय जो बरगद का पेड़ है, वह भारत में ही है।

इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इस पेड़ को ‘द ग्रेट बनियन ट्री‘ के नाम से जाना जाता है। यह पेड़ 250 साल से भी ज्यादा पुराना है। आइए जानते हैं इस विशालकाय पेड़ के बारे में:-

कहां है यह पेड़

बरगद का यह विशालकाय पेड़ कोलकाता के आचार्य जगदीशचंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन में है। वर्ष 1787 में जब इस बॉटनिकल गार्डन की स्थापना की गई थी, उस समय इस बरगद की उम्र 15 से 20 साल थी। इस हिसाब से आज इस बरगद की उम्र लगभग 250 साल से भी अधिक होगी।

85 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां

‘द ग्रेट बनियन ट्री‘ दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ है। यह 14,500 वर्ग मीटर में फैला है। इसकी सबसे ऊंची शाखा की लंबाई या कह सकते हैं इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 24 मीटर है।

इसकी 3000 से अधिक जटाएं हैं, जो अब जड़ों में तब्दील हो चुकी हैं। इस वजह से इसे दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ या ‘वॉकिंग ट्री‘ भी कहा जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस एक पेड़ पर पक्षियों की 85 से ज्यादा प्रजातियां निवास करती हैं।

कितने क्षेत्र में फैला है यह यह बरगद

पहली बार देखने पर तो यह एक जंगल की तरह नज़र आता है। दरअसल, इसके पेड़ की शाखाओं से निकली जटाएं पानी की तलाश में नीचे ज़मीन की ओर बढ़ती गईं और बाद में जड़ के रूप में पेड़ को पानी और सहारा देने लगीं। वर्तमान में यह लगभग 18.918 वर्ग मीटर से भी अधिक क्षेत्र में फैला है।

गिनीज बुक में भी दर्ज है इसका नाम

इस पेड़ की विशालता को देखते हुए इसका नाम ‘गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स‘ में भी दर्ज किया गया है। भारत सरकार ने साल 1987 में इसके सम्मान में डाक टिकट जारी किया था। यही नहीं, यह ‘बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया‘ का प्रतीक चिन्ह भी है।

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ये है समुद्री खीरा, जानिए कुछ दिलचस्प तथ्य!!

समुद्री खीरा (sea cucumber), दरअसल इसका खीरे से कोई लेना देना नहीं है। यह एक जीव है और इसे ‘समुद्री खीरा’ इसलिए कहते हैं, क्योंकि यह खीरे की तरह दिखता है।

यह सॉफ्ट स्किन और ट्यूब जैसी बॉडी वाला जीव है। इसका समुद्री ईकोसिस्टम में महत्वपूर्ण रोल है। यह पोषक तत्वों को रिसाइकल करता है, साथ ही समुद्र में बढ़े एसिड की मात्रा को भी कम करता है।

समुद्री खीरे की मांग चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बहुत अधिक है, क्योंकि इनका उपयोग दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। सी कुकुंबर की करीब 1200 प्रजातियां पाई जाती हैं। यह अलग-अलग रंगों और आकार के हो सकते हैं।

कुछ दिलचस्प तथ्य

  • सी कुकुंबर रात में एक्टिव होता है। ये समुद्र तल में पाए जाते हैं।
  • इनकी लंबाई करीब 3 से 12 इंच तक हो सकती है।
  • यह स्टार फिश की तरह एक कोशीय जीव है यानी इनमें हड्डियां नहीं होती हैं।
  • जहां एक किलो कुकुंबर की कीमत 20 से 30 रुपए होती है, वहीं समुद्री खीरे की एक किलो की कीमत लाख रुपए तक होती है। यही वजह है कि इनका अवैध शिकार भी बहुत अधिक में होता है।
  • IUCN (The International Union for Conservation of Nature) की रेड लिस्ट में ब्राउन समुद्री खीरा (लुप्तप्राय), ब्लैकस्पॉटेड सी कुकुंबर, नीला समुद्री खीरा आदि शामिल हैं।

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विदेशी जगहों से कम नहीं लगती भारत की ये 10 जगहें !!

भारत में ऐसी कई जगहें हैं जो बिल्कुल विदेशी जगहों की तरह लगती हैं और आप जब भारत की इन शानदार जगहों को देखेंगे तो हैरान रह जाएंगे। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ जगहों के बारे में बताएंगे जो हूबहू विदेशी जगहों की तरह दिखती हैं। तो चलिए जानते हैं :-

जैसलमेर में थार रेगिस्तान – अफ्रीका में सहारा रेगिस्तान

सहारा रेगिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान है और हर पर्यटक अपनी जिन्दगी में एक बार सहारा रेगिस्तान की रोमंचक यात्रा का अनुभव अवश्य करना चाहता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं ‘द ग्रेट इंडियन डेजर्ट’ के रूप में लोकप्रिय थार रेगिस्तान, अपने अंतहीन टीलों और अनगिनत सितारों से भरी तारों वाली रातों के लिए मशहूर है जोकि सहारा रेगिस्तान से कुछ कम नहीं लगता।

थार रेगिस्तान भारत का मुख्य रेगिस्तान है जहाँ आप रात में केम्पिंग के साथ दिन के समय में ऊंट सफारी और जीप सफारी करके थार रेगिस्तान में सहारा रेगिस्तान को महसूस कर सकते हैं। अगर आप रेगिस्तान की सुंदरता को देखना चाहते हैं तो थार रेगिस्तान एक अच्छा विकल्प है।

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अंडमान और निकोबार द्वीप समूह – फी फी थाईलैंड

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह कई मायनों में थाईलैंड के फी फी द्वीप समूह से मिलता जुलता हैं। यह स्थान अपनी साहसिक गतिविधियों जैसे स्कूबा डाइविंग, सर्फिंग, नौकायन, स्नोर्कलिंग और कई अन्य के लिए जाना जाता है। अगर आप इस तरह की गतिविधि करने के इच्छुक हैं, तो आप इन्हें अंडमान निकोबार में भी कर सकते हैं।

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चित्रकूट वॉटरफॉल – नियाग्रा फॉल्स

चित्रकोट फॉल्स को भारत के नियाग्रा फॉल्स के रूप में जाना जाता है, और यह असल में, नियाग्रा फॉल्स का एक छोटा वर्जन भी है। नियाग्रा फॉल्स संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है, जो 176 फीट की ऊंचाई से गिरता है।

इसकी की तुलना में चित्रकोट से लगभग 100 फीट की ऊंचाई से पानी गिरता है, जबकि मानसून के दौरान यह 150 मीटर तक हो जाता है जो कि एक बेहद खूबसूरत नज़ारा है।

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केरल में एलेप्पी – वेनिस इटली

जब बात भारतीय डेस्टिनेशन और उनके विदेशी जगहों जैसी दिखने की बात आती है, तो केरल का अलाप्पुझा भी इस लिस्ट में जरूर आता है। आलाप्पुड़ा (Alappuzha), जो पहले आलेप्पी (Alleppey) कहलाया जाता था, भारत के केरल राज्य के आलाप्पुड़ा ज़िले में स्थित एक नगर है।

जिस तरह से वेनिस प्राकृतिक नहरों और कैनाल का घर है, उसी तरह से अलाप्पुझा भी अपने खूबसूरत बैकवॉटर राइड्स और स्वादिष्ट सीफूड के लिए जाना जाता है।

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कश्मीर की गुलमर्ग घाटी और स्विट्ज़रलैंड

गुलमर्ग का खूबसूरत शहर, जोकि श्रीनगर से 52 किमी दूर है। यहां का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण गुलमर्ग गोंडोला है, जो एशिया की सबसे ऊंची और सबसे लंबी केबल कार परियोजना है।

गुलमर्ग की सुंदरता और इसकी बर्फ से ढकी चोटियां एकदम स्विट्जरलैंड की तरह दिखती हैं। अगर आप भारत में रहकर विदेशी जगह का लुत्फ उठाना चाहें, तो गुलमर्ग से बेहतर आपके लिए कुछ नहीं हो सकता है।

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भारत में पॉन्डिचेरी शहर – फ्रांस में फ्रेंच टाउन

फ्रांस की राजधानी पेरिस बहुत ही खूबसूरत जगह है। इसे ‘सिटी ऑफ लव‘, ‘सिटी ऑफ लाइट्स‘, ‘फैशन सिटी‘ और न जाने कितने खूबसूरत उपनाम दिए गए हैं। इस देश की अपनी बात ही अलग है।

वहीं भारत के पुदुच्चेरी, (पहले पॉन्डिचेरी) में आपको फ्रांस की झलक जरूर मिलेगी। इस स्थान की खास बात यह है कि यह स्थान करीबन 300 वर्षों तक फ्रांसीसी अधिकार में रहा है, जिसके कारण आज भी यहां फ्रांसीसी वास्तुशिल्प और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

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वैली ऑफ़ फ्लावर्स उत्तराखंड – एंटेलोप घाटी संयुक्त राज्य अमेरिका  

अगर आप कैलिफोर्निया की खूबसूरत एंटीलोप घाटी को देखना चाहते हैं। तो आपको इसके लिए कैलिफ़ोर्निया जाने की जरूरत नहीं है बल्कि आप भारत में ही एंटीलोप घाटी की मनमोहक सुन्दरता को महसूस कर सकते हैं, उत्तराखंड में स्थित “वैली ऑफ़ फ्लावर्स” में फूलों की लाखों प्रजातियाँ पाई जाती है। जिसे एंटीलोप घाटी के पर्यावाची के रूप में भी जाना जाता है।

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खज्जियार हिमाचल प्रदेश – स्विट्जरलैंड

खज्जियार हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में बसा एक अद्भुत हिल स्टेशन है यह “मिनी स्विट्जरलैंड” के नाम से बहुत प्रसिद्ध है। खज्जियार में आप जैसे ही प्रवेश करते हैं आपको सबसे पहले घास का मैदान दिखाई देगा।

यह घास का मैदान आपको असल स्विट्जरलैंड की याद जरूर दिलायेगा। इसके चारों तरफ घिरे देवदार के पेड़ों की झील के नीले पानी में बहुत ही सुंदर परछाइयां दिखती हैं। जो हूबहू स्विट्जरलैंड जैसे ही दिखाई देती है

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कूर्ग, कर्नाटक – स्कॉटलैंड

आधिकारिक तौर पर कूर्ग को कोडागु के रूप में जाना जाता है, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इस स्थान को भारत के स्कॉटलैंड के रूप में भी जाना जाता है। वजह तो कई हैं, लेकिन सबसे अहम वजह है यहां के हरे भरे परिदृश्य। देश में कॉफी का सबसे बड़ा उत्पादक होने के नाते, यह हिल स्टेशन देश भर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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लक्षद्वीप  – मालदीव

मालदीव खास कर सेलिब्रिटीज के बीच बहुत ही लोकप्रिय है। इसका कारण है कि वहां का क्रिस्टल क्लीयर पानी, सुंदर बीच और शानदार रिजॉर्ट्स। वहीं भारत का लक्षद्वीप एकदम मालदीव जैसा ही है। नीला पानी, समृद्ध समुद्री जीवन, सुंदर परिदृश्य, प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक वातावरण मालदीव की तरह मनोरम और रोमांचकारी है।

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जानिए दुनिया की 5 सबसे लंबी महिलाओं के बारे में!!

दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं, जो सबसे अलग और ज़रा हटके होते हैं। कुछ लोग अपने अजीबो गरीब कारनामों की वजह से जाने जाते हैं तो कुछ हाइट की वजह से और यही बात उन्हें दूसरों से अलग करती है। आज हम आपको हमारी इस पोस्ट में दुनिया की 5 सबसे लंबी महिलाओं के बारे में बताने जा रहें हैं, तो चलिए जानते हैं :-

रुमेयसा गेलगी (Rumeysa Gelgi)

हाल ही में तुर्की की एक महिला ने गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज़ करवाया है। तुर्की की रुमेयसा गेलगी ने दुनिया की सबसे लंबी महिला होने का रिकॉर्ड बनाया है। उनका नाम सबसे लंबी जीवित महिला के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है।

रुमेयसा 24 साल की हैं और उनकी लंबाई 7.01 फीट है। हालांकि रुमेयसा की लंबाई सामान्य नहीं है। वह एक बीमारी की वजह से इतनी लंबी हो गई है। रुमेयसा वेवर सिंड्रोम नाम की बीमारी से जूझ रही हैं। इस बीमारी में हाइट असामान्य रुप से बढ़ जाती है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

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याओ डेफेन (Yao Defen)

याओ डेफेन चीन की रहने वाली थीं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने 2009 में इन्हें सबसे लंबी जीवित महिला का खिताब दिया था। याओ की लंबाई 7 फीट 8 इंच (234 सेमी) थी। इनकी भी लंबाई की वजह (पिट्यूटरी ग्लैंड) पीयूष ग्रंथि में ट्यूमर का होना था। ये जब 11 साल की थीं, तभी इनकी लंबाई 6 फीट 2 इंच हो गई।

इन्हें अच्छी मेडिकल हेल्प मिल सके इसके लिए ब्रिटिश टेलीविजन ने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई ताकि इनके इलाज के लिए पैसे जमा हो सकें। उस डॉक्यूमेंट्री के बाद ग्रोथ हॉर्मोन पर काम करने वाले दो बेहतरीन डॉक्टर याओ की मदद के लिए आगे भी आए। हालांकि 40 साल की उम्र में ही याओ ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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सैंडी एलन (Sandy Allen)

अमेरिका की सैंडी एलन भी गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल रहीं। इनकी लंबाई 7 फीट 7 इंच (231 सेमी) थीं। सैंडी की लंबाई के पीछे भी बीमारी ही थी। उनके भी पिट्यूटरी ग्लैंड (पीयूष ग्रंथि) में ट्यूमर था, जिसके कारण उनका ग्रोथ हार्मोन बेकाबू हो गया।

पेशे की बात करें तो सैंडी एक्टर थीं। उन्होंने कई फिल्म, टेलीविजन शो और डॉक्यूमेंट्री के लिए काम किया था। इसके अलावा सैंडी ने ‘कास्ट ए जाइंट शैडो‘ नाम से एक किताब भी लिखी है। 2008 में 53 साल की उम्र में इनकी मृत्यु हो गई।

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मार्गो डाइडेकी (Margo Dydek)

मार्गो डाइडेकी प्रोफेशनल पोलिश बास्केटबॉल प्लेयर थीं। इनकी लंबाई 7 फीट 2 इंच (2.18 सेमी) थीं। वो दुनिया की सबसे लंबी पेशेवर महिला बास्केटबॉल खिलाड़ी होने के लिए प्रसिद्ध थीं। मार्गो ने WNBA (Women’s National Basketball Association) में कई टीमों के लिए सेंटर पोजिशन का रोल निभाया था।

उन्हें पोलिश गोल्ड क्रास ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया। साल 2019 में उन्हें एफआईबीए (FIBA) हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था। खेल की दुनिया में कई रिकॉर्ड इनके खाते में शामिल हैं।

मार्गो के परिवार में सबकी लंबाई औसतन 6 फीट से ज़्यादा थी। 37 साल की उम्र में मार्गो की कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौत हो गई। जिस वक्त उनकी मौत हुई वो प्रेग्नेंट थीं।

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उल्जाना सेमजोनोवा (Uljana Semjonova)

लातवियाई बॉस्केटबॉल प्लेयर उल्जाना इस वक्त 69 साल की हैं। 70-80 के दशक में ये सोवियत यूनियन के लिए खेलती थीं। वह अपनी टीम की मुख्य खिलाड़ी हुआ करती थीं। साल 1993 में ये पहली गैर अमेरिकी महिला बनीं, जिन्हें बॉस्केटबॉल ऑफ फेम से सम्मानित किया गया।

इनकी लंबाई 7 फीट (2.14) है। इनके पैर इतने लंबे हैं कि इन्हें मर्दो के 21 नंबर के जूते पहनने पड़ते हैं। उल्जाना महिला बास्केटबॉल में अब तक की ऐसी खिलाड़ी रहीं हैं, जिनके सबसे बड़े पैर है।

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जीवन में सफल होने के लिए कुछ बेहतरीन टिप्स!

“सफलता उस स्थान से तय नहीं की जाती जिस पर कोई व्यक्ति अपने जीवन में पहुँचता है, बल्कि उन कठिनाइयों से नापी जाती है जिन्हें उसने सफल होने के दौरान पार किया होता है.”

– बुकर टी. वाशिंगटन

जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हमेशा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। परिश्रमी और आत्मविश्वासी व्यक्तियों के जीवन में भी एक ऐसा मोड़ आता है जब उन्हें भी ऐसा लगता है कि आगे बढ़ने के सारे दरवाजे बंद हो चुके है और खुद को अहसाय महसूस करने लगते हैं।

ऐसा पल सभी की जिंदगी में आता है। लेकिन यह समय हार मानने का नहीं बल्कि खुद में आत्मविश्वास पैदा करने का है कि हम सफल होने के लिए ही बने हैं। आइए जानें जीवन को सफल बनाने के कुछ बेहतरीन टिप्स जिनसे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगें।

उद्देश्य निर्धारित कीजिए

जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना बहुत ही आवश्यक है। जब अच्छी तरह से यह जान जाएंगे कि उदेश्य क्या है तो उस लक्ष्य को बिना डगमगाए प्राप्त कर सकते हैं।

एक बात का विशेष ध्यान रखें की उदेश्य छोटा भी नही होना चाहिए न ही बहुत बड़ा जिसे हासिल ही नही किया जा सके। इसलिए उदेश्य सोच समझ कर ही निर्धारित करना चाहिए।

उपलब्ध संसाधनो का सही प्रकार से प्रयोग करें

जिंदगी हर दिन सबको अनगिनत मौके देती हैं। बस यह याद रखना है कि उन्हें पहचानते और उनका सही उपयोग कैसे करना हैं। उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आस-पास उपलब्ध संसाधनो का सही प्रयोग करना चाहिए। संसाधन कई प्रकार के हो सकते हैं। जैसे कि समय, परिश्रम, धन-सम्पत्ति, और अन्य प्राकृतिक सम्पदा आदि।

नए विचारों व् योजनाओं को अपनाने में घबराएँ नहीं

नए विचार ही आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। नए विचार व् योजनायें सफलता की शुरुआत होती हैं। 16वीं व् 17वीं सदी में हम जिन्ह तकनीकों का उपयोग करते थे, अब उनका अस्तित्व ही नहीं है।

आज हम ऐसी प्रौद्योगिकी के उस दौर में जी रहे हैं, जहाँ चीजें दिन प्रतिदिन बहुत तेजी से बदल रही हैं इसलिए बदलाव के इस दौर में नई चीजें सीखने से परहेज़ नहीं करना चाहिए।

वक्त सारे घाव भर देता है

हर इंसान को जिंदगी में अच्छे व बुरे हालातों से गुजरना पड़ता हैं। हमारी जिंदगी में कितने भी बुरे दिन क्यों न रहे हों, वक्त सारे घाव भर देता है। घीरे-धीर हम इन हालातों से लड़ना सीख जाते हैं। धीरे धीरे हमें इन हालातों की आदत हो जाती है और सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो जाता है।

धैर्य रखिये

जब भी असफलता का सामना करना पड़े, तो घबराना नही चाहिए, धैर्य बनाए रखना चाहिए। असफलताओं से घबराना नही चाहिए बल्कि धैर्य रख के आगे बढ़ने का प्रयत्न करना चाहिए। किसी विद्वान ने भी कहा है “असफलता, सफलता की चाबी है। यह सफलता की पहली सीढ़ी होती है.”

कर्मठ बनो

हम में से कुछ लोग ऐसे भी होते है जो उदेश्य तो बहुत बड़ा निधारित करते हैं। लेकिन उस उदेश्य के अनुरूप काम नहीं करते है जिससे उदेश्य को प्राप्त नही कर पाते है। सफलता प्राप्त करने के लिए उदेश्य को ध्यान में रखकर कड़ी मेहनत करनी चाहिए।

असफलताएँ और गलतियां आशीर्वाद /वरदान हैं

व्यक्ति जीवन में गलतियाँ कर-कर के ही सीखता है जिसका मतलब यह है की आप अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रयासरत हैं। गलतियों ही इंसान को मजबूत बनाती है और सिखाती है कि किन-किन गलतियों को दोहराने से हमें बचना चाहिए।

“जाने दो यारों” ऐटिट्यूड अपनाएं, हमेशा आप प्रसन्न रहेंगे

जीवन में कभी-कभी कुछ चीजों को छोड़ देना या किसी को माफ़ कर देना चाहिए। ऐसा करने से शांति मिलती है और मन से बोझ हल्का हो जाता है। शांत मन से ही कुछ नया सोच सकते हैं और उदेश्य को प्राप्त कर सकते हैं।

हर अगला दिन आपके लिए नयी उम्मीदों का भण्डार लेकर आता है

सफलता पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। सफलता की रास्ते में बहुत से लोग पीछे खीचने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन हमेशा ही खुद पर नियंत्रण रखते हुए आगे बढना चाहिए। क्या पता कल का दिन नई उमीद लेकर आए और किस्मत के दरवाजे खुल जाएंगे।

सकारात्मक सोच रखें

अपनी मानसिक सोच को हमेशा सकारात्मक रखें। सकारात्मक मानसिक सोच हमेशा नकारात्मकता से दूर रखेगी। सकारात्मक सोच हमेशा ही जीत दिलाएगी। इसलिए हमेशा ही सकारात्मक सोचे और उदेश्य को प्राप्त करें।

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जंगली जानवरों की शीशे को देखकर हंसा देने वाली प्रतिकिर्या!

 

इस फिल्म में फ्रेंच फोटोग्राफर ने जंगल के बीचो-बीच शीशा रख दिया और फिर बाद में उसने अपने कैमरे से जंगली जानवरों की शीशे को देखकर की जाने वाली प्रतिकिर्या को शूट किया।

इस वीडियो में जंगली जानवरों ने शीशे को देखकर बहुत हंसा देने वाली प्रतिकिर्या व्यक्त की है।

भारत में सर्वश्रेष्ठ रोमांटिक स्थल।

भारत दुनिया का सबसे खूबसूरत देश और एक रोमांटिक स्थल है। सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता के साथ भारत का समृद्ध इतिहास, भारत को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की दृष्टि से एक उपयुक्त और यादगार पर्यटन स्थल के रूप में प्रस्तुत करता है।

आईये नजर डालते हैं भारत के उन चुनिंदा पर्यटन स्थलों पर जिन्हें सैलानी विशेष तौर पर पसंद करते हैं।

शिमला, पहाड़ों की रानी

shimlaशिमला बर्फ से ढके पहाड़ों और हरी घास के मैदानों से भरा एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। शिमला का वातावरण बहुत ही शांतिपूर्ण है। शिमला आने वाले सैलानी यहाँ घूमने-फिरने के अलावा फिशिंग व गोल्फ के साथ-साथ ट्रैकिंग का मजा भी ले सकते हैं।

सैलानियों की शिमला यात्रा जाखू मंदिर तक पहुँचे बिना अधूरी मानी जाती है। यहाँ से पूरा शिमला और आस-पास के इलाके का आकर्षक दृश्य दिखाई देता है. जाखू में भगवान हनुमान जी का प्राचीन मंदिर भी है।

मनाली…. हनीमून स्थल

manaliमनाली की वादियां हनीमून कपल्स की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक हैं. यहाँ ट्रैकिंग करने के लिए काफी अच्छी जगहें हैं। यहाँ पर आप अपने साथी के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं।

सर्दियों में मनाली का तापमान शून्य डिग्री से नीचे पहुंच जाता है और गर्मी के दिनों में हल्का ठंडा रहता है। सैलानी यहाँ हिमालय नेशनल पार्क, हिडिम्बा देवी मंदिर, सोलांग घाटी, रोहतांग पास, पंद्रकनी पास, रघुनाथ मंदिर और जगन्नकनाथी देवी मंदिर देख सकते हैं।

मुन्नार (केरल राज्य)

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मुन्नार हिल स्टेशन भीड़-भाड़ से दूर शांत वातावरण के लिए प्रशिद्ध है। यहाँ पर चमकदार चाय-बागान से ढके पर्वतों का अंतहीन अनुभव मिलता है। यह चाय-बागान भारत में सबसे ऊंचाई पर स्थित हैं। चाय-बागान की मीठी सुगंध हवा में रोमांस पैदा करती है।

यह तीन पर्वतों की श्रृंखला – मुथिरपुझा, नल्लथन्नी और कुंडल का मिलन स्थल है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 1600 मीटर है। मुन्नार हिल स्टेशन किसी जमाने में दक्षिण भारत के पूर्व ब्रिटिश प्रशासन का ग्रीष्मकालीन रिजॉर्ट हुआ करता था।

ऊटी हिल स्टेशन, दक्षिण भारत

ootyऊटी दक्षिण भारत में हनीमून के लिए सर्वोतम स्थल है. कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर बसा यह शहर मुख्य रूप से सुखद जीवन-शैली के लिए जाना जाता है। नीले पर्वतों (नीलगिरि) की पर्वतमाला मे बसा हुआ ऊटी प्रति वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है।

सर्दियों के अलावा यहाँ साल भर मौसम सुहाना बना रहता है। ऊटी झील बहुत ही लोकप्रिय है। इस झील में बोटिंग की अच्छी व्यवस्था है. ऊटी में आप घुड़सवारी का आनंद भी उठा सकते हैं।

कूर्ग … भारत का स्कॉटलैंड

coorgपर्यटन की दृष्टि से भारत का पांचवां सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है कूर्ग। कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड और कर्नाटक को कश्मीर कहा जाता है। यहाँ हरे भरे जगल, ऊँचे पहाड़ और हवाओं में फैली कॉफी की खुशबू का आनंद उठाया जा सकता है।

कुर्ग को कोडागु भी कहा जाता है जिसका मतलब है पहाड़ियों पर बसा हुआ धुंध का जंगल। यह लोकप्रिय हनीमून स्थल है। यहाँ काल्पनिक पहाड़ियाँ, सागौन और चंदन के जंगल, सुगन्धित कॉफी और चाय के बागान देख सकते हैं।

पांडिचेरी

pondicherryपांडिचेरी लगभग 300 वर्षों तक फ्रांसीसी अधिकार में रहा है और आज भी यहाँ फ्रांसीसी वास्तुशिल्प और संस्कृति देखने को मिलती है। पांडिचेरी पुराने समय में फ्रांस के साथ होने वाले व्यापार का मुख्य केंद्र था।

आज भी अनेक पर्यटक इसके सुंदर समुद्र तटों और तत्कालीन सभ्यता की झलक पाने के लिए यहाँ आते हैं। केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान बहुत महत्वपूर्ण है।

इस कारण प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक यहाँ आते हैं। आप को यहाँ दो शानदार मानव निर्मित झीलें देखने को मिलेंगी। इसके अलावा यहाँ की चुन्नाम्बर नदी भी बहुत लोकप्रिय है।

गोवा

goaगोवा को घरती पर प्राकृतिक स्वर्ग भी कहा जाता है। यह स्थल कपल्स की पार्टी और रातभर नृत्य के लिए प्रसिद्ध है। अन्य समय में आप गोवा में कम से कम आबादी वाले समुद्र तटों पर समय व्यतीत कर सकते हैं। गोआ में अनगिनत समुद्र तट हैं।

गोआ में इतने अधिक बीच हैं कि पर्यटकों को गोआ के सभी बीचों को देखने के लिए कम से कम एक महीना लग जाएगा। गोआ के कुछ प्रसिद्ध बीच दोला पाउला, कैलेंगुट, अंजुना, आरामबोल, कोलवा, मीरामार, वागाटोर, अगोंडा आदि हैं।

जयपुर, गुलाबी नगरी

jaipurजयपुर एक राजसी शहर है। जयपुर को गुलाबी नगरी नाम से भी जाना जाता है। जयपुर में भव्य व सुंदर हवेलियों और किलों की भरमार है। सिटी पैलेस जयपुर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।

सिटी पैलेस राजस्थानी व मुगल शैली की मिश्रित रचना है जो कि पुराने शहर के बीचों बीच स्थित है। जयपुर में सिटी पैलेस के अलावा और भी पर्यटक स्थल है जैसे कि जंतर मंतर, हवा महल, गोविंद देवजी का मंदिर, सरगासूली, राम निवास बाग, गुड़िया घर आदि।

नैनीताल (उत्तराखंड)

nainitalझीलों का शहर नैनीताल उत्तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। नैनी शब्द का अर्थ है आँखें और ताल का अर्थ है झील। नैनीताल कुमाऊं क्षेत्र का सबसे सुंदर हिल स्टेशन है। गर्मियों में यहाँ बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। यहाँ की झील, मंदिर, बाज़ार पर्यटकों को बहुत लुभाते हैं।

प्राचीन वातावरण के बीच अपने साथी के साथ ऐसे मौसम में समय व्यतीत करना अपने आप में ही रोमांस पैदा करता है। नैनीताल में नाव की सवारी लेना एक शांतिपूर्ण अनुभव है। यहाँ का शेरवानी होटल हिमालय के दर्शनीय स्थलों से घिरा हुआ है।

दार्जिलिंग

darjeelingदार्जिलिंग एक बहुत ही खुबसूरत पर्यटक स्थल है। यहाँ की हसीन वादियां, ऊँचे ऊँचे वृक्ष, ठंडी मंद मस्त हवाएँ, रंग बिरंगे फूलों की मदहोश करने वाली खुशबु, बर्फीली घाटियां आपको दार्जिलिंग का एक यादगार सफर दे सकती हैं। दार्जिलिंग में आ के ऐसा लगेगा कि किसी स्वर्ग में आ गए हों। दार्जिलिंग कपल्स के लिए आदर्श स्थल है।

यहाँ चाय के सबसे प्रसिद्ध बागान हैं। हज़ारों देशों में निर्यात होने वाली दार्जिलिंग की चाय सबको खूब भाती है। समुद्र तल से लगभग 6812 फुट की उंचाई पर स्थित इस शहर की सुन्दरता को शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है।

बर्फ़ से ढके सुंदर पहाड़ों का दृश्य अति मनमोहक होता है। टॉय ट्रेन में यात्रा इसमें चार चांद लगा देती है। यह ट्रेन दार्जिलिंग की सुंदर वादियों की सैर कराती है।