बेहद खूबसूरत है रोज़ा बैंकेसिया नाम का यह फूल

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रोज़ा बैंकेसिया नाम के इस गुलाब को लेडी बैंक्स भी कहते हैं। इसे मध्य और पश्चिमी चीन के गांसू, हैनान, युन्नान, हुबई और जियांग-सू प्रान्तों में इसे सैकड़ों वर्षों से उगाया जा रहा है।

इस खूबसूरत गुलाब का नामकरण लेडी डोरोथिया बैंक्स के नाम पर किया गया है, जो 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री सर् जोसफ बैंक्स की पत्नी थीं।

जोसफ बैंक्स ने कप्तान कुक की प्रसिद्ध समुद्री यात्रा (1768-1771) में भाग लिया था और युकलिपटस के पेड़ों से यूरोप का पहला परिचय भी कराया था। विश्व प्रसिद्ध रॉयल बोटेनिक गार्डन को स्थापित करने की सलाह भी इन्होनें ही तत्कालीन राजा जॉर्ज तृतीय को दी थी।

डोरोथिया बैंक्स स्वयं एक जुनूनी संग्रहकर्ता थीं। विवाह के बाद इन्होंने स्प्रिंग-ग्रोव्स स्थित अपने बंगले की डेरी को चीनी कलाकृतियों के विशाल संग्रह में तब्दील कर डाला था। उनके इस विशाल संग्रह से अब केवल एक पाण्डुलिपि उपलब्ध है।

इसमें उनके द्वारा संग्रहित नायाब चीनी कलाकृतियों तथा संग्रह के उनके तरीके का व्यापक ज़िक्र हुआ है। 1807 में जब जोसेफ़ बैंक्स द्वारा एक वैज्ञानिक को पौधों की खोज में चीन भेजा गया तो चीन की प्रसिद्ध फाआ-टी नर्सरी से वे इस गुलाब का पहला पौधा इंग्लैंड में लाए थे।

रोज़ा बैंकेसिया रोज को आसानी से उगाया जा सकता है। इसे पानी की बहुत कम ज़रूरत होती है। इसके पीले फूलों के गुच्छों का आकर्षण निश्चित ही अद्वितीय है। एशिया के कुछ देशों में इसका उपयोग गैंग्रीन और कोढ़ के संक्रमण को रोकने के लिए भी किया जाता है।

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दुनिया के 6 सबसे पुराने शहर, आज भी हैं मौजूद

दुनिया में ऐसे कई शहर हैं, जो हजारों साल पहले भी अस्तित्व में थे। इसका मतलब है कि इन जगहों पर हजारों साल पहले भी लोगों का बसेरा हुआ करता था और आज भी यहां लोग रहते हैं।

आज हम आपको दुनिया के उन 6 शहरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें से कई 5 हजार पुराने तो कुछ 11 हजार साल पुराने बताए जाते हैं। ये शहर जितने पुराने हैं, उतने ही खूबसूरत भी।

तो चलिए जानते हैं :-

एथेंस, ग्रीस

एथेंस ग्रीस की राजधानी है और साथ ही ग्रीस का सबसे बड़ा और पुराना शहर भी है जोकि लगभग 7000 साल पुराना है। यह शहर 11 वीं और 7 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के बीच अस्तित्व में आया था। ये शहर तत्वविज्ञान का प्राचीन निवास और पश्चिमी सभ्यता का जन्मस्थान भी है।

ऐसा कहा जाता है कि इस शहर का अस्तित्व सुकरात, प्लेटो और अरस्तू के दिनों से बहुत पहले का है। ये एक ऐसा शहर था जहां की खूबसूरत इमारतें, दुकानें और भी कई चीजें दुनियाभर में प्रसिद्ध थी। आज के समय में एथेंस को पूरे यूरोप का सबसे पुराना शहर माना जाता है।

दमिश्क, सीरिया

दमिश्क सीरिया की राजधानी है और इस्लाम का चौथा सबसे पवित्र शहर है, दमिश्क अरब संस्कृति की राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। दमिश्क दुनिया का 11000 साल पुराना शहर है।

ऐसा माना जाता है कि दमिश्क में 8000 से 10000 ईसा पूर्व में लोगों ने रहना प्रारंभ कर दिया था। दमिश्क विश्व के प्राचीनतम नगरों में गिना जाता है और जहाँ आज भी लोग रह रहे हैं।

वाराणसी, भारत

वाराणसी भारत का सबसे पुराना शहर है और सबसे पुराने धर्म, हिंदू धर्म का जन्मस्थान भी है यह शहर लगभग 5000 साल पुराना है। बनारस या काशी के नाम से भी जाना जाने वाला यह शहर उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में गंगा नदी के तट पर स्थित है और ये 11वीं शताब्दी ईसा पूर्व में अस्तित्व में आया था।

यह शहर हमेशा से ही दुनिया भर से हिंदू तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय रहा है। शहर की घुमावदार सड़कों के किनारों पर  भगवान शिव को समर्पित स्वर्ण मंदिर, काशी विश्वनाथ सहित कुछ 2,000 मंदिर मौजूद हैं।

बाइब्लोस, लेबनान

बेरूत के उत्तर में लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, बायब्लोस लेबनान के माउंट लेबनान गवर्नेट में सबसे पुराना और सबसे बड़ा शहर है। ऐसा माना जाता है कि इस शहर में पहली बार 8800 और 7000 ईसा पूर्व के बीच मनुष्यों द्वारा रहना शुरू किया गया था और 5000 ईसा पूर्व से लगातार बसा हुआ है।

इसके अलावा आपको बता दें, ये शहर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में भी शामिल है। यहां 12वीं सदी में बने कई प्राचीन मंदिर और किले भी हैं, जिन्हें देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं।

सुसा, ईरान

सुसा दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक था और आपको बता दें, इस शहर का कुछ हिस्सा आज भी शुश, खुज़ेस्तान प्रांत, ईरान के रूप में बसा हुआ है। यह शहर 6200 – 6300 वर्ष पुराना हैं।

इसका स्थान टाइग्रिस नदी के करीब था और यही वजह है कि ये प्राचीन दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक बन गया था। ऐसा माना जाता है कि एक बार शहर को पूरी तरह से अश्शूरियों द्वारा नष्ट कर दिया गया था, लेकिन फिर से इसका पुनर्निर्माण करा दिया गया।

 प्लोवदीव, बुल्गारिया

4,000 ईसा पूर्व अस्तित्व में आया यह शहर बुलगेरिया का सबसे बड़ा शहर है। प्लोवदीव्स का इतिहास छह शताब्दियों से अधिक समय का है, जो इसे यूरोप के सबसे पुराने शहरों में से एक बनाता है।

यह शहर एक महत्वपूर्ण फारसी, थेसियन, मैसेडोनियन और ओटोमन हब था। आज, प्लोवदीव बुल्गारिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर और एक उभरता हुआ पर्यटन केंद्र भी है।

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अपने आप को बेहतर बनाने के 10 टिप्स!

ज्यादातर लोग भविष्य की चिंता में ही डूबे रहते हैं. ऐसे लोग वर्तमान में रहकर भी भविष्य के बारे में सोचते रहते हैं और भूतकाल में हुई घटनाओं के बारे में सोच सोच कर दुखी रहते हैं. ऐसा करते समय वह अपने वर्तमान को भी व्यर्थ और दु:खग्रस्त करते रहते हैं.

प्याज के बेकार छिलके करेंगे कमाल, जानिए कैसे?

प्याज के जिन छिलकों को हम बेकार समझ कर फैंक देते हैं, वे अब बेकार नहीं होंगे। इन बेकार छिलकों से प्राप्त ‘पोरस कार्बन नैनो पार्टिकल्स’ यानी एक तरह के सूक्ष्म तत्वों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों की एक टीम ने उन्नत क्षमता वाले ‘सॉफ्ट रोबोटिक’ तत्व विकसित किए हैं।

सरल शब्दों में कहें तो ये तत्व कई तरह के अत्याधुनिक कामों में सहायक हो सकते हैं। जैसे कि ये कम शक्ति वाली ‘नियर इंफ्रारेड लाइट’ को रोशनी प्रदान करने में मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा इनका उपयोग दवा आपूर्ति, सहायक उपकरणों, सर्जरी और यहां तक कि कृत्रिम अंगों को तैयार करने में भी हो सकता है। ये ‘सॉफ्ट रोबोट’ रबड़ जैसे पॉलीमर से युक्त होते हैं और इनमें ‘नैनोमैटीरियल्स’ (सूक्ष्म तत्व) लगे होते हैं।

सम्भावना है कि ऊर्जा के स्रोत को यांत्रिक गति में परिवर्तित करने के इनके गुण के कारण ये चिकित्सा, सैन्य और अंतरिक्ष तक के कामों में भी उपयोग हो सकेंगे।

इसकी वजह मुख्य रूप से इनका लचीलापन, मजबूती और आसानी से किसी भी चीज में ढलने की खूबी है। ‘सैंटर फार नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज’ बेंगलूर में प्रो. एस. कृष्ण प्रसाद के नेतृत्व वाली एक टीम ने ‘पोरस कार्बन नैनो पार्टिकल्स’ का उपयोग करते हुए यह खोज की है।

सूजन और कैंसर से बचाव में भी कारगर

वैसे प्याज के छिलके सेहत के लिए भी काफी कमाल के हो सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार इनमें फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। साथ ही इनमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स, क्वेरसेटिन और फीनोलिक शरीर में सूजन और कैंसर जैसी समस्याओं से बचाव में काफी कारगर है।

अगर प्याज के छिलकों को पानी में डालकर गरारे किया जाएं या फिर चाय में उबालकर पिया जाए तो इससे गले की खराश, पैरों में दर्द और मसल्‍स ऐंठन से राहत व अन्य समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।

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अनोखा मेला : जानिए पत्थर बरसाने वाले गोटमार मेले की कहानी

गोटमार मेले का आयोजन महाराष्ट्र की सीमा से लगे मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पांढुरना कस्बे में हर वर्ष भादो मास के कृष्ण पक्ष में अमावस्या पोला त्योहार के दूसरे दिन किया जाता है।

मराठी भाषा बोलने वाले नागरिकों की इस क्षेत्र में बहुलता है और मराठी भाषा में गोटमार का अर्थ पत्थर मारना होता है। शब्द के अनुरूप मेले के दौरान पांढुरना और सावरगांव के बीच बहने वाली नदी के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं और सूर्योदय से सूर्यास्त तक पत्थर मारकर एक-दूसरे का लहू बहाते हैं।

इस घटना में कई लोग घायल हो जाते हैं। इस पथराव में कुछ लोगों की मृत्यु के मामले भी हुए हैं। बावजूद इसके यहां यह मेला मनाया जाता है। गौरतलब है कि यहां बरसों पुरानी परम्परा को हर साल दोहराया जाता है।

जाम नदी के दोनों किनारों पर बसे इन गावों के लोग नदी के बीच में पहले एक झंडा लगाते हैं फिर इस झंडे को पाने के लिए दोनों ओर से जम कर पत्थर युद्ध होता है। प्रशासन की सख्ती के बाद भी दोनों ओर के लोग ट्राली भर-भरकर पत्थर जमा करते हैं।

इस खूनी खेल के पीछे मान्यता है कि सांवरगांव की एक लड़की को पांढुरणा के लड़के से प्रेम हो गया था। दोनों ने चुपचाप शादी कर ली लेकिन जब इस बात की जानकारी गांव वालों को लगी तो वे इस जोड़े के विरोध में उतर आए और नदी पार कर रहे युगल पर सांवरगांव की तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई।

जवाब में पांढुरणा वालों ने भी पत्थर चलाए, जिससे लड़की और लड़के की मौत हो गई। तब से इसे परम्परा बना दिया गया और करीब 300 सालों से इसे ऐसे ही निभाया जाता है। हालांकि, कुछ लोग इसे सिर्फ कहानी मानते हैं।

प्रशासन ने कई बार गोटमार में पत्थर की जगह गेंद के इस्तेमाल की पहल की लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं हुआ। हर साल यह खेल खेला जाता है और बड़ी संख्या में लोग इसमें घायल होते हैं। देश के अनोखे लेकिन बेहद खतरनाक खेल को खेलने और देखने भी बड़ी तादाद में लोग पहुंचते हैं।

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जानिए देश-विदेश की उन राजकुमारियों के बारे में जिन्होंने शाही जिंदगी छोड़ थाम लिया आम आदमी का दामन

कहते हैं प्यार अंधा होता है लेकिन प्यार में पड़ना भी एक शानदार अनुभव होता है, जिसे हम में से बहुत से लोग महसूस करते हैं। यह व्यक्ति को ख़ुशी और गम दोनों देता हैं। दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जिन्होंने प्यार के लिए बहुत कुछ कुर्बान किया है। आज की हमारी इस पोस्ट में हम आपको देश-विदेश की उन राजकुमारियों में बताने जा रहे हैं जिन्होंने प्यार की खातिर सब कुछ छोड़ दिया। तो चलिए जानते हैं:-

माको

हाल ही में जापान की राजकुमारी माको ने शाही परिवार से बाहर के एक आम इंसान कोमुर से शादी से करने का फैसला किया। माको जापान के मौजूदा राजा नारूहितों के भाई राजकुमार आकिशिनो की बेटी हैं।

माको कोमुर से शादी करने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने शाही परिवार से मिलने वाली भारी भरकम दौलत भी ठुकरा दी। अक्टूबर में होने वाली इस शादी के लिए उनका बॉयफ्रेंड अमेरिका से लौट भी आया है।

दीया कुमारी

जयपुर के पूर्व महाराज सवाई भवानी सिंह व पद्मिनी देवी की इकलौती संतान थी दीया कुमारी। दीया कुमारी और एक आम आदमी नरेंद्र की पहली मुलाकात 1989 में हुई थी। उस वक्त वह महज 18 साल की थीं।

तब नरेंद्र ग्रेजुएशन के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे थे। एक बार वह महल में आए तभी दीया की मुलाकात नरेंद्र से हुई थी।

हालांकि, समान गोत्र होने के नाते दोनों की शादी को लेकर राजपूत समाज ने नाराजगी जताई थी, मगर दोनों ने अगस्त 1997 में कोर्ट में गुपचुप शादी कर ली थी।

इसके बाद काफी हंगामा हुआ था और दीया कुमारी का राजघराने से रिश्ता भी खत्म हो गया था। दोनों के दो बच्चे हैं। हालांकि, शादी के 21 साल बाद दोनों ने पारिवारिक वजहों से अलग होने का फैसला ले लिया था।

महारानी विक्टोरिया

बात 1887 की है जब इंग्लैंड में महारानी विक्टोरिया का राज था। उनकी जिंदगी में कोई अंग्रेज नहीं, एक भारतीय आया था, जो अंग्रेजों को बड़ा नागवार गुजरा। भारत में आगरा के रहने वाले मुंशी अब्दुल करीम और महारानी की रिलेशनशिप का जिक्र काफी चर्चा में रहा था।

ब्रिटेन की एक लेखिका शरबनी बसु ने अपनी किताब ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ में महारानी और ‘खूबसूरत, लंबे भारतीय नौजवान करीम’ के करीबी रिश्ते के बारे में लिखा है। उस वक्त 24 साल के करीम को महारानी के लिए आगरा से इंग्लैंड एक तोहफे के तौर पर भेजा गया था।

उन्हें महारानी को उर्दू सिखाने का काम मिला था। बस यहीं से दोनों करीब आ गए। दोनों का साथ 15 साल तक रहा। हालांकि, दोनों के बीच के संबंध कभी खुलकर सामने नहीं आए। मगर एक महारानी ने अपने नौकर के लिए खत लिखे और तब यह काफी बड़ी बात थी।

दोनों के रिश्ते पर हॉलीवुड में एक फिल्म- ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ भी बनी है। महारानी की मौत के बाद किंग एडवर्ड ने करीम को भारत भेज दिया और दोनों के बीच लिखे गए खतों को नष्ट करने का आदेश दिया। 1909 में करीम की भी मौत हो गई।

स्वीडन की प्रिंसेस विक्टोरिया

स्वीडन की राजकुमारी विक्टोरिया को एक जिम मालिक और ट्रेनर डेनियल वेस्टिलंग से प्यार हुआ और वह उसे अपना दिल दे बैठीं।

उनकी यह मुलाकात 2001 में उस समय हुई, जब वह जिम ट्रेनिंग के लिए डेनियल के जिम में गई थीं और वहीं से उनका प्यार का सिलसिला शुरू हुआ। दोनों ने जून, 2010 में शादी कर ली और उनके दो बच्चे हैं।

प्रिंसेस मैडलिन

यह बात है 2013 से पहले की, जब एक ब्रिटिश फाइनेंसर क्रिस्टोफर नील पर स्वीडन की राजकुमारी मैडलिन का दिल आ गया। अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में ज्यादातर समय बिताने वाले नील उस वक्त वॉल स्ट्रीट में काम करते थे।

शेयर बाजार की बारीकियों को समझने की खूबी ने कब मैडलीन की धड़कनों के गणित को नाप लिया पता ही नहीं चला। दोस्ती और फिर प्यार के रास्ते पर चलते हुए दोनों ने 2013 में शादी कर ली।

युगाडा की राजकुमारी रूथ कामुटल

अफ्रीकी देश युगांडा की राजकुमारी रूथ कोमुंटेल की अमेरिका के मिसौरी के रहने वाले क्रिस्टोफर थॉमस से वाशिंगटन में मुलाकात हुई। वे दोनों अमेरिकन यूनिवर्सिटी में मिले थे। क्रिस्टोफर मैरीलैंड में एक अकाउंटेंट थे।

यहीं से दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। अरसे तक क्रिस्टोफर को यह नहीं पता था कि रूथ एक राजकुमारी हैं। दोनों ने 2012 में शादी कर ली। हालांकि, अगले ही साल यानी 2013 में ही दोनों की शादी टूट गई।

डचेस ऑफ अल्बा कायेताना

स्पेन की डचेस ऑफ अल्बा कायेताना अपने समकालीनों से काफी आगे थीं। उन्होंने 2011 में नौकरशाह अलफांसो डियाज से शादी रचा ली थी। उस वक्त महारानी की उम्र 85 साल की थी, और डियाज 60 साल के थे। इस शादी ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

रानी भारी भरकम उपाधियां धारण करने में यकीन रखती थीं। हालांकि, शादी के तीन साल बाद ही यानी 2014 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। मगर, जाते-जाते रानी ने डियाज को अपनी कुल संपत्ति में पांच बिलियन डॉलर देने का ऐलान कर दिया था।

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जानिए कब है विश्वकर्मा पूजा तिथि, पूजन मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में पर्व त्योहारों को विशेष महत्व दिया जाता हैं वहीं देवताओं के शिल्पी, निर्माण और सृजन के देवता कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की पूजा आराधना हर साल सितंबर महीने में की जाती हैं।

इस महीने में विश्वकर्मा पूजा या भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती हैं। विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष तौर पर औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों आदि की पूजा की जाती हैं।

मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। कारोबार में तरक्की और उन्नति होती हैं जो भी कार्य आरंभ किए जाते हैं वे पूरे होते हैं भगवान विश्वकर्मा को संसार का पहला इंजीनियर भी कहा जाता हैं।

तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं कि इस साल विश्वकर्मा पूजा कब हैं और पूजन का मुहूर्त क्या हैं तो आइए जानते हैं।

जानिए कौन हैं भगवान विश्वकर्मा

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा पहले वास्तुकार और इंजीनियर हैं इन्होंने स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान, द्वारिका नगरी, यमपुरी, कुबेरपुरी आदि का निर्माण किया था। उन्होंने इस संसार की रचना में ब्रह्मा जी की मदद की थी। इस संसार का मानचित्र तैयार किया था।

पूजा मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व हर साल उस दिन मनाया जाता है जब सूर्यदेव सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इस दिन को कन्या संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है। इस साल 17 सितंबर को रात 1 बजकर 29 मिनट पर सूर्य की कन्या संक्रांति का क्षण हैं।

इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक हैं राहुकाल को छोड़कर आप विश्वकर्मा पूजा करें। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 6 बजकर 7 मिनट से प्रारंभ हो रहा हैं तो आप इस समय से पूजा कर सकते हैं।

हर साल की तरह इस साल भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर दिन शुक्रवार को हैं इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में विश्वकर्मा पूजा मनाया जाएगा।

विश्वकर्मा पूजा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 6 बजकर 7 मिनट से अगले दिन 10 सितंबर को प्रात: 3 बजकर 36 मिनट तक बना रहेगा।

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जानिए शहद और दालचीनी के एक साथ प्रयोग करने के चमत्कारी फायदे

दालचीनी एक सदाबहार वृक्ष है जोकि 10 से 15 मीटर लम्बा होता है। यह दक्षिण भारत और श्रीलंका में पाया जाता है। इसकी अलग गंध होने के कारण इसकी छाल का इस्तेमाल मसालों में किया जाता है।

इसके स्वाद का कारण इसमें पाया जाने वाला सुगंधित तेल है। यह तेल पीले सुनहरे रंग का होता है। इसका स्वाद गर्म सुगंधित होता है।

वहीं शहद एक मीठा और चिपचिपा द्रव्य है जो मधुमक्खियों द्वारा पैदा किया जाता है। वे इसे फूलों के पराग से पाती हैं। इसमें कैंसर और ट्यूमर रोधी गुण पाए जाते हैं।

जब कच्चे शहद को बड़े पैमाने पर संसाधित तथा गर्म किया जाता है तो इसके फायटोन्यूट्रियंट’ कम हो जाते हैं। शहद में ज्यादातर सूक्ष्म जीव पैदा नहीं होते क्योंकि इसमें पानी की कम क्रियाएं होती हैं।

शहद विश्व के प्रत्येक देश में मिलता है। शहद के कोई भी दुष्प्रभाव नहीं हैं। आज का विज्ञान मानता है कि बेशक शहद मीठा होता है मगर यदि इसका सेवन दवाई के तौर पर उचित मात्रा में किया जाए तो शूगर के मरीजों के लिए यह हानिकारक नहीं हो सकता।

शहद और दालचीनी के एक साथ प्रयोग करने के चमत्कारी फायदे

दालचीनी पाऊडर और शहद के मिश्रण से कई बीमारियों का उपचार होता है। आज के वैज्ञानिक इसे कई बीमारियों के लिए रामबाण मानते हैं।

पश्चिमी देशों में हुए शोध में पाया गया है कि यदि नाश्ते में दालचीनी पाऊडर और शहद के मिश्रण को मक्खन, जैली और जैम के स्थान पर बैड पर निरंतर लगाकर खाया जाए तो इससे कई बीमारियों का उपचार संभव हो सकता है।

शहद तथा दालचीनी का रोजाना सेवन शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत को भी बढ़ा कर बैक्टीरियल तथा वायरल इंफैक्शन से रक्षा करता है।

शहद तथा दालचीनी पाऊडर का एक साथ उपयोग करना दिल की बीमारियों, जोड़ों के दर्द, वात रोग, मूत्राशय में संक्रमण, दांतों का दर्द, कोलेस्ट्रोल, प्रतिरक्षा तंत्र, बदहजमी, लम्बी उम्र, कील मुंहासे, चमड़ी रोग, वजन कम होना, कैंसर, बदबूदार सांस और बहरेपन के लिए फायदेमंद है।

भोजन करने से पहले 2 चम्मच शहद पर थोड़ा-सा दालचीनी पाऊडर छिड़क कर खाने से एसिडिटी नहीं होती तथा हाजमा सही रहता है।

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रेड लेडी के नाम से जानी जाती है ये महिला, जो है लाल रंग की दीवानी

हर इंसान का अपना एक शौक होता है और उसी शौक के कारण वह अपने दोस्तों के बीच जाना जाता है। लेकिन दुनिया में ऐसे कई लोग हैं, जो अपने अजीबोगरीब शौक की वजह से मशहूर हैं। ऐसी ही एक महिला हैं जोरिका रिबरनिक, जो अपने अनोखे शौक के कारण ही सारी दुनिया में ‘रेड लेडी’ के नाम से जानी जाती है क्योंकि उसे लाल रंग से कुछ ज्यादा ही लगाव है।

बोस्निया की रहने वाली जोरिका रिबरनिक नामक एक महिला टीचर है। उसे लाल रंग इतना ज़्यादा पसंद है कि वह अपने आस-पास सब कुछ लाल ही देखना चाहती है।

जानकर हैरानी होगी कि जोरिका के घर का हर सामान लाल रंग का होने के साथ ही उसके बाल भी लाल रंग के ही हैं। जोरिका के अनुसार जब वह 18 साल की थी तब उसे लाल रंग की चीजों का ऐसा शौक चढ़ा कि आज तक नहीं उतरा। यहां तक कि वह किसी के अंतिम संस्कार में भी जाती है तो लाल ड्रैस पहन कर ही जाती हैं।

फिलहाल उसके घर में केवल एक वाटर हीटर को छोड़कर हर चीज का रंग लाल है। वह भी इसलिए क्योंकि उसके पति जोरॉन के कहने पर ही उन्होंने अलग रंग का हीटर खरीदा था।

पिछले 4 दशक में जोरिका का यह शौक इतना लोकप्रिय हो गया है कि लोग उसे किसी सैलिब्रिटी से कम नहीं मानते हैं और अब तो सोशल मीडिया पर भी वह खूब लोकप्रिय है।

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सपने में सांप का रहस्य, जानें सपने में साँप दिखने के क्या हैं मायने

साँप को सर्प, नाग, भुजंग आदि नामों से भी जाना जाता है। सांप यदि साक्षात नजर आ जाए तो डर के मारे पसीने छूट जाते हैं। यहां तक कि अगर सपने में सांप दिख जाए तो व्यक्ति घबराकर उठ बैठता है।

साँप और मनुष्य का संबंध सृष्टि के आदि काल से रहा है। हिंदू धर्म-शास्त्रों और पुराणों में सांप से जुड़ी अनेक कथाएं प्रचलित हैं। सांप को हिंदू शास्त्रों में पूजनीय माना गया है। यह भगवान शिव के गले का हार है और भगवान विष्णु की शैय्या है।

एक ओर सांप को जहां पूजनीय माना जाता है वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े कई शुभ-अशुभ लक्षण, मिथक और भ्रांतियाँ भी प्रचलित हैं। सपने में सांप को देखने के मिश्रित अर्थ हो सकते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में यह शुभ होता है तो वहीं दूसरी और कुछ अवसरों में या अशुभ भी हो सकता है।

अगर किसी को सपने में सांप दिखाई देता है तो इसे अपशकुन माना जाता है, लेकिन यह भ्रांति है। सांप के सपने की व्याख्या अलग-अलग संस्कृतियों में वृहद रूप से की गई है। अगर आपको सपने में सांप दिखाई देता है तो इसका फल देखने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि यह किस संदर्भ में दिखा है।

तो आइए देखते हैं सपने में सांप को देखने के कुछ प्रसिद्ध अर्थ।

सपने में साँप को देखने का अर्थ या रहस्य

सपने में सांप द‍िखने का रहस्य, जानें सपनों में सांप नजर आने के क्या हैं मायने

  • सपने में यदि आप किसी मंदिर में सांप देख लेते हैं या जाग्रत अवस्था में किसी मंदिर में सांप दिखाई दे जाए तो इसे शुभ माना जाता है। मंदिर में सांप दिखना इस बात का संकेत है कि आपकी मनोकामनाएं निकट भविष्य में ही पूर्ण होने वाली है।
  • यदि आप सांप को पेड़ पर चढ़ते हुए देखें तो इसका अर्थ है कि आपके जीवन में जल्द ही कोई शुभ घटना होने वाली है। यह तरक्की का भी संकेत है। साथ ही अचानक लाभ या रुका हुआ धन वापस मिलने का संकेत भी माना जाता है।
  • सपने में यदि शिवलिंग पर सांप लिपटा हुआ दिखाई दे तो यह भी शुभ संकेत है। इसका अर्थ यह हुआ कि भगवान शिव का आशीर्वाद आने के साथ है और जिस कार्य को पूरा करने के लिए आप लंबे समय से इंतेजार हैं उसमें शीघ्र ही सफलता मिलने वाली है।
  • यदि कोई निर्धन व्यक्ति सांप को पेड़ पर से उतरते देखता है तो यह उसके लिए शुभ संकेत है। यह प्रबल धन प्राप्ति का संकेत माना जाता है।
  • यदि आप किसी विशेष कार्य के लिए जा रहे हैं और उस समय कोई सांप आपके दाहिने हाथ की ओर से रास्ता काट दे तो यह शुभ होता है। यह इस बात का संकेत करता है कि आप जिस काम के लिए निकल रहे हैं वह पूरा हो जाएगा।
  • सपने में श्वेत सांप देखना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह धन का प्रतीक है।
  • सपने में मरा हुआ सांप देखना ठीक नहीं है। यह निकट भविष्य में किसी बड़े संकट का सूचक है। इसके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए पांच सोमवार शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल या कच्चा दूध अर्पित करें।
  • कोई धनवान व्यक्ति सपने में पेड़ पर से सांप को उतरते देखे तो यह उसके लिए बड़ी धनहानि का संकेत है। ऐसा सपना देखें तो आर्थिक मामलों में सावधानी रखने की जरूरत होती है।
  • किसी आवश्यक कार्य के लिए घर से निकलते समय यदि बाएं हाथ की ओर से कोई सांप आपका रास्ता काट जाए तो सावधान रहने की आवश्यकता है। यह इस बात का संकेत है कि आप जिस कार्य के लिए जा रहे हैं उसके पूरा होने में संशय है। ऐसा हो तो वापस घर में आकर भगवान शिव से प्रार्थना करके निकलें।
  • सपने में नाग-नागिन के जोड़े को प्रेम करते देखना अशुभ सूचक है। यदि साक्षात नाग-नागिन प्रणय करते दिखें तो वहां से हट जाएं। यह बड़ी हानि की सूचना देता है।
  • सपने में सांप का डंसना इस बात की सूचना है कि आपको जल्द ही गंभीर रोग होने वाला है या किसी प्रकार का संकट आने वाला है। लेकिन इस सपने के अर्थ के बारे में विद्वानों में मतभेद है।
  • कुछ स्वप्नफल विचारकों के अनुसार सपने में साँप के द्वारा डसना इस बात की और इशारा करता है कि आपको बहुत अधिक ख्याति या सफलता प्राप्त होने वाली है।
  • यदि सपने में सांप आपका पीछा कर रहा है और आप बहुत घबराए हुए हैं तो यह समझा जाएगा कि आप भविष्य के प्रति डरे हुए हैं, कोई चिंता आपको खाए जा रही है या किसी बात को लेकर आप डरे हुए हैं। यह भी हो सकता है कि आप किसी सच को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं या उस राज के खुल जाने का आपको डर है। हालांकि यह सपना अशुभ माना जाता है।
  • सपने में सांप और नेवले की लड़ाई देखने का अर्थ है कि आप कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं और आपको कोर्ट कचहरी के चक्कर काटना पड़ सकते हैं।
  • सपने में सांप द्वारा दांत दिखाना या काट लिए जाने की पोजिशन बनाकर दांत दिखाना इस बात का संकेत है कि आपको कोई धोखा दे सकता है या किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचा सकता है।
  • रात में सोते समय अगर सपने में सफेद या सुनहरा या चमकीला सांप नजर आए, तो यह भी किस्मत खुलने का इशारा होता है। यह भी कहा जाता है कि पूर्वजों का आशीर्वाद मिलेगा।
  • सपने में सांप आपको कहीं जाते हुए दिखाई दे या आपको देखकर छुप जाए तो समझा जाता है कि पितृदेव अपकी रक्षा कर रहे हैं।
  • सपने में सांप को बिल में जाते हुए देखने का अर्थ है अचानक धन की प्राप्ति होना। बिल से बाहर निकलते देखना धनहानि है।
  • सपने में बार बार सांप का दिखाई देने का अर्थ है कि आपको पितृदोष हैं या आपके पितृ आपसे नाराज हैं। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है।
  • सपने में खुदाई करते समय सांप निकलता हुआ दिखाई दे तो समझो धन प्राप्त होगा।

तो ये रहे सपने में सांप को देखने के कुछ अर्थ। यदि आप कुछ और अर्थ जानते हैं और हमसे शेयर करना चाहते हैं तो नीचे कॉमेंट करें, हम कोशिश करेंगे कि हम इसे अपनी पोस्ट में सम्मिलित करें।

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