विवाह से जुड़ी अजीबोगरीब परम्पराएं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रहे जाएंगे !

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विवाह एक पवित्र बंधन होता है जब भी परिवार में किसी की शादी होती है, तो हर कोई बहुत उत्साही होता है। विवाह के दौरान कई रस्में की जाती है लेकिन इनमें से कई रस्में बहुत दिलचस्प और अजीब भी होती हैं।

भारत में ही अलग अलग जगह पर अलग अलग रीति रिवाज हैं लेकिन दुनिया में कुछ जगह ऐसी भी हैं जहाँ की अजीबोगरीब परम्पराओं के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे।

इन अजीब प्रथाओं के बारे में जानने के बाद आप जरूर ये कहेंगे कि ऐसा क्यों किया जाता है। आज हम दुनिया भर की सबसे अजीब शादियों की परम्पराओं के बारे में बताने जा रहें हैं :-

रोमानिया: दुल्हन का अपहरण और फिरौती की मांग

रोमानिया में एक अजीब और मज़ेदार परम्परा होती है। विवाह से ठीक पहले नकली अपहरण होता है। दुल्हन के दोस्त और परिवार के लोग दुल्हन का अपहरण करते हैं और उसे मुक्त करने के लिए दूल्हे से फिरौती की मांग करते हैं। शादी के बाद दूल्हे को अपने दोस्तों और परिवार को एक पार्टी देनी होती है ।

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इंडोनेशिया: नवविवाहितों को 3 दिनों तक बाथरूम का उपयोग करने की अनुमति नहीं होती

इंडोनेशिया में टीडॉन्ग जनजाति की परंपरा है कि नवविवाहितों को शादी के 3 दिन और 3 रात तक बाथरूम का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।

इस समारोह के दौरान नवविवाहितों को कम भोजन और पानी मिलता है। इस रस्म के बारे में एक मान्यता यह भी है कि यह रस्म विवाहित जीवन को खुशहाल बनाती है और इस परंपरा को तोड़ना बुरा माना जाता है।

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चीन: रोने का अभ्यास किया जाता है

चीन के तुजिया जातीय समूह में शादी से ठीक एक महीने पहले यह विचित्र परंपरा शुरू होती है। शादी के एक महीने से दुल्हन हर दिन एक घंटे के लिए रोना शुरू कर देती है।

दुल्हन की माँ 10 दिनों के बाद ऐसा करती है और दादी 10 दिनों के बाद करती है। धीरे-धीरे परिवार की सभी महिलाएं सदस्य इस रोने की परंपरा में शामिल हो जाती हैं।

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फ्रांस में अजीब प्रथाएं

फ्रेंच पोलिनेशिया में शादी के बाद, कपल के रिश्तेदार जमीन पर सोते हैं। फिर उनके ऊपर एक कपड़ा रखा जाता है। यह एक मानव गलीचा बनता है। न्यूलीवेड्स को फिर इस मानव गलीचा पर चलना होता है।

वेल्स : लकड़ी से बनी नक्‍काशीदार चम्‍मच तोहफे में दिया जाता है

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वेल्‍स में पुरुष शादी से पहले अपनी होने वाली पत्‍नी को लकड़ी से बनी नक्‍काशीदार चम्‍मच तोहफे के रूप में देते हैं। इसके पीछे लड़के का लड़की से यह वादा होता है कि वह उसे जिंदगी में कभी भूखा नहीं रहने देगा।

बोर्नियो : लड़का और लड़की को घर से कहीं जाने की इजाजत नहीं होती।

बोर्नियो के एक आदिवासी इलाके में शादी वाले दिन लड़का और लड़की को घर से कहीं जाने की इजाजत नहीं होती, यहां तक कि वे बाथरूम भी नहीं जा सकते। अन्य परंपराओं की तरह इसके बारे में भी माना जाता है कि ऐसा होने वाले दंपती के सौभाग्य के लिए किया जाता है।

स्‍कॉटलैंड : दुल्हा-दुल्हन को शगुन को तौर पर सड़े- गले अंडे, टमाटर और मछलियां मारते हैं।

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जिस तरह भारत में शादी से पहले दुल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है। उसी तरह स्‍कॉटलैंड में शादी से पहले लड़का-लड़की को उसके फ्रैंड्स व रिश्तेदार शगुन को तौर पर सड़े- गले अंडे, टमाटर और मछलियां मारते हैं।

इस तरह सभी द्वारा फेंकी ये गंदी चीजों से लड़का-लड़की को बचना होता है। मान्यता है कि इन चीजों से वे खुद को संभालने में अगर सक्षम रहें तो वे अपनी आगे आने वाली जिंदगी में किसी भी संकट या तुफान से जुझने के लिए तैयार हैं।

इटली : ताला लगा कर चाबी नदी में फेंक दी जाती है

इटली के रोम में शादी करने जा रहा जोड़ा पहले नदी के ऊपर स्थित पुल पर आता है और यहां आकर उन्हें एक खूबसूरत सा ताला लगा दिया जाता है और उसकी चाबी नदी में फेंक देता है। मान्यता है कि ऐसा करने से उनका संबंध हमेशा के लिए जुड़ जाता है और फिर यह दंपती कभी अलग नहीं होते।

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दुनिया का सबसे लम्बा गांव बसा है पोलैंड में

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पोलैंड गणराज्य आधिकारिक तौर पर मध्य यूरोप में एक देश है। इसका का कुल क्षेत्रफल लगभग 3 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, जो इसे यूरोप का 9वां सबसे बड़ा देश बना देता है।

लगभग 40 मिलियन की आबादी के साथ यह यूरोपीय संघ का 6 वां सबसे अधिक आबादी वाला देश है। वैसे तो इस देश में काफी खूबसूरत जगहें है लेकिन आज हम इस पोस्ट में बात करने जा रहे हैं पोलैंड के एक गांव के बारे में जो दुनिया का सबसे लम्बा गांव बन गया है ।

तो चलिए जानते हैं दुनिया के सबसे लम्बे गांव के बारे में :-

पोलैंड का सुलोस्जोव गांव दुनिया का सबसे लंबा गांव बन गया है। यह 9 किमी की लंबाई और करीब 150 मीटर की चौडाई में बसा है। इस गांव में करीब 1600 घर हैं, जो एक सड़क के दोनों तरफ बने हैं।

इनमें करीब 6200 लोग रहते हैं। वर्ल्ड रूरल प्लानिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गांव क्राकोव शहर से करीब 30 किमी दूर है। यह 14वीं शताब्दी में बसा था। उस वक्त इसका दायरा करीब 500 मीटर था।

लेकिन धीरे-धीरे इसकी बसावट लंबाई में बढ़ती गई। इस गांव के दोनों तरफ हरेभरे खेत हैं। इस गांव में अस्पताल, बैंक, स्कूल और सारी मूलभूत सुविधाएँ हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा गांव बांग्लादेश का बनियाचोंग

बांग्लादेश का बनियाचोंग गांव दुनिया का सबसे बड़ा गांव है। यहां की आबादी करीब 2.40 लाख है। हबींगज जिले के इस गांव में 50.84 फीसदी पुरुष हैं। जबकि 49.16 फीसदी महिलाएं हैं।

उत्तर प्रदेश का गहमर है एशिया का सबसे बड़ा गांव

यूपी का गहमर एशिया का सबसे बड़ा गांव हैं। यहां की आबादी 1.10 लाख से ज़्यादा है। गाजीपुर के इस गांव की खासियत है कि यहां हर घर से कोई न कोई सेना में है। यह गांव साल 1530 में बसा था।

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सांप का दिखना शुभ है या अशुभ, जानें शास्‍त्रों के अनुसार क्या है मान्यता!

आमतौर पर सांप का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दुनिया सांपों को खौफ का दूसरा नाम मानती है, वहीं दूसरी तरफ शास्त्रों में इन्हें पूजनीय भी बताया गया है।

भगवान महादेव भी सर्प को एक आभूषण के रूप में स्‍वीकार करते हैं। इन सभी तथ्यों के साथ ही ज्योतिष शास्त्र में सांपों के दिखने के बारे में कुछ शुभ और अशुभ संकेत बताए गए हैं।

तो चलिए आज इस पोस्ट जानते हैं सांप को दिखने पर क्या मान्यताएं हैं :-

पेड़ पर चढ़ता हुआ सांप देखना

यदि किसी व्यक्ति को सांप पेड़ पर चढ़ता दिखाई देता है तो उसे समझ लेना चाहिए कि आने वाले समय में कुछ अच्छा होने वाला है। सामान्यत: ये एक शुभ संकेत होता है और धन मिलने की संभावनाओं को दर्शाता है।

इसका मतलब है कि जल्द ही प्रगति और उन्नति का मार्ग खुलेंगे। हालाँकि, पेड़ से सांप को उतरते हुए देखना शुभ नहीं माना जाता है। इसका मतलब है कि आपको अपने कार्य क्षेत्र में कुछ मुद्दों से निपटना पड़ सकता है।

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रास्ते पर सांप दिखना

रास्ते पर सांप का दिखाई देना शुभ संकेत माना जाता है। यह एक संकेत माना जाता है कि कुछ अच्छा होने वाला है या अच्छी खबर आने वाली है।

अगर आपको कोई सांप दाईं ओर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है, तो यह भी एक अच्छा संकेत है। यदि बाएं हाथ की ओर से कोई सांप आपका रास्ता काट दे तो आपको सावधान होकर कार्य करना चाहिए।

ऐसा होने पर कार्यों में असफलता के योग बनते हैं। यदि संभव हो तो हर सोमवार को शिवलिंग पर दूध से अभिषेक करना चाहिए। भगवान शिव की मूर्ति, या शिवलिंग के सामने एक घी का दीपक जलाना चाहिए।

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साँपों का एक जोड़े को देखना

यदि किसी व्यक्ति को नाग-नागिन प्रणय (प्रेम) करते दिखे तो इसे अशुभ माना जाता है। ऐसे में व्यक्ति को नाग-नागिन के सामने रुकना नहीं चाहिए।

यदि उनके प्रेम में विघ्न पड़ता है तो यह व्यक्ति के लिए खतरनाक हो सकता है। अत: ऐसे स्थान से तुरंत चले जाना चाहिए। नाग-नागिन से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।

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घर में सांप का दिखना

कई बार घरों के अंदर सांप चले जाते हैं, घर में सांपों का मिलना बेहद शुभ माना जाता है। इसका मतलब है कि आप धन का सृजन करने जा रहे हैं।

घर में सांप को परेशान या मारना नहीं करना चाहिए। यदि हो सके तो साँप को सुरक्षित रूप से बाहर निकालें।

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सफेद सांप का दिखना

यदि कोई व्यक्ति सफेद सांप देखता है तो यह शुभ माना जाता है। ऐसा होने पर व्यक्ति को सफलता मिलती है।

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सांप की केंचुली मिलना

अगर आपको कहीं सांप की केंचुली दिखाई दे तो यह एक शुभ संकेत माना जाता है। यह माना जाता है कि आप अपने लंबित ऋण जल्द ही प्राप्त करेंगे।

यदि संभव हो तो केंचुली को एक लाल कपड़े में लपेट लेना चाहिए और घर के अंदर रख लेना चाहिए। सांप की इस केंचुली को बाहर किसी को भी नहीं दिखाना चाहिए।

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मरा हुआ सांप दिखना

अगर किसी को मरा हुआ सांप दिख जाता है, तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। यदि ऐसा कोई दृश्य दिखाई देता है, तो भगवान शिव से माफी मांगनी चाहिए। मंदिर में जाकर जल और दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें।

दूसरी ओर, मंदिर में सांप का दिखना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जल्द ही आपकी सारी इच्छाएं पूरी होने वाली है।

यह भी कहा जाता है कि यदि शिवलिंग पर सांप लिपटा हुआ दिखाई दे तो यह भी बहुत शुभ संकेत होता है। यह दर्शाता है कि भोलेनाथ की हम पर कृपा है।

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त्रिपुरा का रहस्यमयी उनाकोटी मंदिर : जिसका रहस्य आज तक कोई नहीं सुलझा पाया

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त्रिपुरा के जंगलों में बसा हुआ उनाकोटि मूल रूप से भगवान शिव को समर्पित एक तीर्थ स्थल है, और माना जाता है कि यह 7वीं – 9वीं शताब्दी ईसवी पुराना है।

यह मंदिर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से तकरीबन 125 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह मंदिर पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े रहस्यों में भी गिना जाता है। दूर-दूर तक फैले जंगल, तंग पगडण्डी और कोलाहल मचाते नदी स्रोतों के मध्य स्थित है यह त्रिपुरा की ‘उनाकोटी‘।

यह स्थान काफी सालों तक अज्ञात रूप में यहां मौजूद है, हालांकि अब भी बहुत लोग इस स्थान का नाम तक नहीं जानते हैं। यह मंदिर जितना अद्भुत है उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है।

यहां कुल 99 लाख 99 हजार 999 पत्थर की मूर्तियां हैं, जिनके रहस्यों को आज तक कोई भी सुलझा नहीं पाया है। जैसे कि ये मूर्तियां किसने बनाई, कब बनाई और क्यों बनाई और सबसे जरूरी कि एक करोड़ में एक कम ही क्यों? हालांकि इसके पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं, जो हैरान करने वाली हैं।

इन्हीं रहस्यमयी मूर्तियों के कारण ही इस जगह का नाम उनाकोटी पड़ा है, जिसका अर्थ होता है “करोड़ में एक कम”। यहाँ दो तरह की मूर्तियों मिलती हैं, एक पत्थरों को काट कर बनाई गईं मूर्तियां और दूसरी पत्थरों पर उकेरी गईं मूर्तियां।

यहां ज्यादातर हिन्दू धर्म से जुड़ी प्रतिमाएं हैं, जिनमें भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान विष्णु, और गणेश भगवान आदि की मूर्तियां स्थित है।

इस स्थान के मध्य में भगवान शिव के एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, जिन्हें उनाकोटेश्वर के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव की यह मूर्ति लगभग 30 फीट ऊंची बनी हुई है।

इसके अलावा भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के साथ दो अन्य मूर्तियां भी मौजूद हैं, जिनमें से एक मां दुर्गा की मूर्ति है। यहां तीन नंदी की मूर्तियां भी हैं। इसके अलावा यहां और भी ढेर सारी मूर्तियां बनी हुई हैं।

इस स्थान के मुख्य आकर्षणों में भगवान गणेश की अद्भुत मूर्तियां भी हैं। जिसमें गणेश की चार भुजाएं और बाहर की तरफ निकले तीन दांतों को दर्शाया गया है। भगवान गणेश की ऐसी मूर्ति बहुत ही कम देखी गई है।

इसके अलावा यहां भगवान गणेश की चार दांत और आठ भुजाओं वाली दो और मूर्तियां भी हैं। इन अद्भुत मुर्तियों के कारण यह स्थान काफी रोमांच पैदा करता है।

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शीर्ष भारतीय मसाले और उनके स्वास्थ्य लाभ

भारतीय मसाले बहुत लंबे समय से भोजन को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए इस्तेमाल होते आये हैं। बहुत से देश ऐसे हैं जो मसालों का उत्पादन और व्यापार करते हैं।

मसालों के व्यपारी प्राचीन समय से ही लोकप्रिय व्यपारी रहे हैं। भारत अपने मसालों के उत्पादन के लिए पूरे विश्व में मशहूर है।

यह हैं भारत के कुछ मसाले और उनके स्वास्थ्य लाभ:-

हल्दी(Turmeric)

turmericयह भारत के सबसे आम इस्तेमाल किये जाने वाले मसालों में से एक है। हल्दी (Turmeric) का इस्तेमाल बहुत से व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है। हल्दी एक एंटीओक्सीडेंट है और यह कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने में भी सक्षम है।

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हींग(asafoetida)

asafoetidaयह भारत के तीखे स्वाद वाले मसालों में से एक है। अगर इस मसाले को किसी भोजन में डाल दिया जाए तो यह उस भोजन की गंद बदल देता है।

इसका इस्तेमाल भारत की सबसे मशहूर खट्टी-मिट्ठी दाल बनाने में होता है। इस मसाले से अस्थमा, खांसी, ब्रोंकाइटीस जैसी बीमारियों का भी समाधान किया जाता है।

जीरा(Cumin Seed)

cumin-seedजीरा, घरों में सबसे आम होने वाले मसालों में से एक है, इसे व्यंजनों की एक विस्तृत किस्म तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसको भारत का पारम्परिक व्यंजन उड़िया को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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अदरक(Ginger)

gingerअदरक को प्रचीन समय से भारत और एशिया के कई देशों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह भोजन बनाने के मसालों में सबसे अव्वल मसाला है।

अदरक के बिना भोजन को स्वादिष्ट बनाना असंभव सा लगता है। यह जुकाम, जोड़ों के दर्द से राहत और रक्तचाप जैसी कई बीमारियों का समाधान करने में सक्षम होता है।

इलायची(Cardamom)

cardamomइलायची भारत के जंगली क्षेत्रों में पैदा की जाती है। यह मसाला भी अदरक की तरह बीमारियों का इलाज करने में मददगार होता है।

यह व्यंजनों को स्वाद बनाने में इस्तेमाल होता है और इसका इस्तेमाल चाय को स्वादिष्ट बनाने के लिए भी किया जाता है।

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काली मिर्च(Black Pepper)

black-pepperकाली मिर्च को कब्ज, दस्त, कान का दर्द, अवसाद और ह्रदय रोग का इलाज करने में किया जाता है। इसकी पैदावार मूल रूप से दक्षिण भारत में की जाती है। इसका इस्तेमाल भोजन का स्वाद बढ़ाने और स्वास्थ्य का उपचार करने में होता है।

लौंग(Cloves)

clovesभारत में लौंग अपने स्वाद और चिकिस्ता के इलाज के लिए सदियों से मशहूर है। लौंग से बहुत सारी बीमारियों का इलाज होता है। यह पेट की खराबी के इलाज में सबसे सफल औषधि है।

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केसर(saffron)

saffronकेसर भारत का सबसे महंगा मसाला है। इसका इस्तेमाल भारत में शुभ अवसरों पर किया जाता है। केसर स्वास्थ्य की पाचन शक्ति और भूख बढ़ाने में मददगार होता है।

दालचीनी(Cinnamon)

cinnamonदालचीनी के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ हैं। इसका बहुत समय से रक्त शर्करा को नियंत्रण करने में इस्तेमाल होता रहा है।

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सरसों के बीज(Mustard Seeds)

mustard-seedsज्यादातर भारतीय सरसों के बीज और इसके तेल को घर में अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन बीजों में विटामिन बी होता है जो शरीर में गठिया होने से रोकता है और मांसपेशियों के दर्द को दूर करता है।

धनिया (Coriander)

corianderधनिया का उपयोग 7,000 सालों से होता आ रहा है। यह मसाले मूल रूप से आयरलैंड से उत्पन्न हुए हैं। इन मसालों का उपयोग भारत में भोजन बनाने और सलाद में होता है।

धनिये का इस्तेमाल शूगर की बीमारी को दूर करने के लिए और एक एंटीओक्सिडेंट के रूप में भी होता है।

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फ़ूड टिप्स: वजन कम और कंट्रोल करने वाली डाइट

रुजुता दिवेकर भारत में सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाली आहार विशेषज्ञ हैं, उन्होंनें मुकेश अम्बानी के बेटे अनंत अम्बानी का वजन 108 किलोग्राम कम करने में विशेष भूमिका निभाई है।

रुजुता की देखरेख में युवा अम्बानी ने महज़ 18 महीनों में 108 किलो वजन कम किया था। अनंत की इस उपलब्धि पर अभिनेता सलमान खान और क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने अनंत की जमकर तारीफ़ की थी।

अनंत अम्बानी, बाएं वजन घटाने से पहले और बाद में दायें (सचिन के साथ)
अनंत अम्बानी, बाएं वजन घटाने से पहले और बाद में दायें (सचिन के साथ)

आईये जानते हैं, रुजुता दिवेकर से आहार के बारे में कुछ बेहद काम की बातें। हो सकता है इन टिप्स को आजमा कर और अपना कर आपके जीवन में भी अनंत अम्बानी की तरह खुशनुमा काया-कल्प हो जाए।

रुजुता के अनुसार,

  1. स्थानीय फलों का प्रयोग करें। जैसे केला, अंगूर, चीकू, आम आदि। सभी फलों में फ्रुक्टोसे (फ्रक्टोज, fruit sugar) होता है इसलिए यह बात मायने नहीं रखती कि आप आम के बाद सेब खा रहे हैं या सेब के बाद आम। सेब चाहे कोंकण से आता है और सेब कश्मीर से, इसलिए आम आपके लिए स्थानीय हो जाता है। मधुमेह रोगी ऊपर लिखे सभी फल खा सकते हैं क्योंकि फ्रक्टोज आपके शूगर को नियंत्रण में कर लेगा।
  2. सब्जियां बनाते समय बीजों के तेल जैसे अखरोट, सरसों, नारियल तिल आदि का प्रयोग करें। पैकिंग वाले तेल, जैतून की तरह चकचक आदि का प्रयोग न करें। रिफाइंड तेलों से कच्ची घानी का सरसों तेल बेहतर होता है।
  3. स्पीच या सेमीनार में रजुता अपना काफी समय देशी घी और इसके फायदों के बारे में बताने के लिए देती हैं। उनके अनुसार देशी घी रोज खाएं। हम कितना देशी घी खाएं यह भोजन पर भी निर्भर करता है। देशी घी ब्लड में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करता है।
  4. Coconut यानी नारियल का प्रयोग अधिक करें। आप नारियल का प्रयोग पोहा, खांडवी या चटनी बनाकर भोजन के रूप में कर सकते हैं। नारियल में कोलेस्ट्रोल की मात्रा न के बराबर होती है। साथ ही यह कमर पतली करने में सहायक होता है।
  5. डिब्बाबंद औट(जई, गेंहू) व अनाज(cereals) का नाश्ता न करें। इस पैकट वाले भोजन की हमें जरूरत नहीं होती है। हमारे दिन की शुरुआत इस तरह के स्वादहीन और बोरिंग भोजन से नहीं होनी चाहिए। इस प्रकार का भोजन हमारे दिन को भी उबाऊ बनाता है। नाश्ते में आप पोहा, उपमा, इडली, डोसा या परांठा ले सकते हैं।
  6. फरहान खान बिस्कुट की नई एड देते हैं कि बिस्कुट में फाइबर है। मैं कहती हूँ, यहाँ तक कि हमारे घर के कचरे में भी फाइबर होता है। डिब्बाबंद औट के फाइबर के बदले आप पोहा, उपमा, इडली, डोसा आदि खा सकते हैं।
  7. जब तक आपके मुहं में दांत हैं तब तक सीधे फल और सब्जियां चबा कर खाएं, जूस पीने की जरुरत नहीं।

8 . गन्ना वास्तव में एक DETOX यानी शरीर से विषैले पदार्थो को निकालने वाला पदार्थ है। गन्ने का ताज़ा जूस पियो या गन्ना चबा कर खाएं।

Rujuta Diwekar is highest paid dietician in India
रुजुता दिवेकर – मशहूर डायटीशियन
  1. सफेद चावल का प्रयोग करें। भूरे चावलों को पकाने के लिए 5 -6 सीटी लगती हैं तो पचने में कितना समय लगता होगा। सफेद चावल (हाथ से उगाये गये) प्राकृतिक चावल होते हैं। GI index में चावल का स्थान ज्यादा उच्च नहीं है। जब हम इन्हें दाल, दही, कढ़ी के साथ खाते हैं तो हम इसे GI Index में और नीचे ले आते हैं। देशी घी डालने से हम इसे और नीचे ले आते हैं। चावल में कुछ बेहद पोषक तत्व होते हैं और इन्हें आप दिन में तीन बार भी खा सकते हैं।
  2. हमें कितना खाना चाहिए ? सीधा सा उतर है, जितनी भूख हो उतना खाना खाएं। न कम न ज्यादा। दरअसल आपका पेट ही आपका गाइड है।
  3. हम चावल और चपाती को इकट्ठा भी खा सकते हैं। यह आपकी इच्छा के ऊपर निर्भर करता है। चावल को आप तीन टाइम के भोजन में शामिल कर सकते हैं।
  4. भोजन केवल आपकी भूख ही नहीं मिटाता है यह आपको अच्छा अनुभव भी कराता है।
  5. कैलोरी की चिंता के बजाय पोषक तत्वों के बारे में ज्यादा सोचें।
  6. ब्रैड, बिस्कुट, केक, पिज़्ज़ा और पास्ता को बिल्कुल भी खाने की जरूरत नहीं है।
  7. अपने आप से पूछें कि क्या यह भोजन आपकी दादी या नानी भी खाती थी। अगर हाँ तो बिना डर के खाएं।
  8. मौसम के अनुसार भोजन करें। बरसात में पकौड़ा ,फफड़ा, जलेबी खाएं। आपकी भूख आपके मौसमी भोजन को भी तय करती है। मौसम के अनुसार, जैसे सर्दियों में आप तला हुआ भोजन खा सकते हैं।
  9. सुबह उठकर खाली पेट या जब आप भूखे हों तो चाय का प्रयोग न करें। हाँ दिन में 2-3 बार आप चीनी के साथ चाय पी सकते हैं।
  10. ग्रीन टी की कोई जरुरत नहीं। पीली, नीली या बैंगनी टी की भी जरुरत नहीं।
  11.  हर प्रकार का पारम्परिक भोजन करें।
  12. हर तरह के पैक्ड, डिब्बाबंद, इम्पोर्टेड भोजन और पेय खाना-पीना बिल्कुल बंद करें।
  13. पीसीओ (Polycystic Ovary Syndrome) और थाईराइड की स्थिति में वजन कम करने का प्रशिक्षण लें और डिब्बा बंद भोजन से बचें।
  14. खाना खाने के बाद हल्का व्यायाम करें और थोड़ा-सा जरूर चलें। इससे आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी ।

विज्ञान के अद्भुत तथ्य!

वैज्ञानिकों द्वारा हमेशा ऐसी ऐसी खोजें की जाती रही हैं जो बहुत ही चौंकाने वाली होती हैं। आज हम कुछ ऐसी ही खोजों  के बारे में जानेंगे। विज्ञान से जुड़े वो रोचक और दिलचस्प तथ्य जो शायद आप नहीं जानते।

  1. प्रकाश की रफ्तार 1 लाख 86 हज़ार मील प्रति सेकंड है।
  2. सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने के लिए 8 मिनट 17 सेकंड का समय लगता है।
  3. दुनिया में अभी तक पैदा हुए लोगों की कुल आबादी का 10 प्रतिशत हिस्सा अभी भी जिंदा है।
  4. धरती 1 हज़ार मील प्रति सेकंड की रफ्तार से अपनी धुरी पर घूमती है। धरती की अंतरिक्ष में सूर्य के इर्द-गिर्द घूमने की रफ्तार 67 हजार मील प्रति सेकंड है।
  5. हर साल, धरती पर 10 लाख से भी ज्यादा भूकंप आते हैं।
  6. जब 1883 में क्राकाटोआ में ज्वालामुखी में बहुत बड़ा धमाका हुआ था जिससे इस ज्वालामुखी के फटने की आवाज इतनी ज्यादा थी कि इस ज्वालामुखी के फटने की आवाज 4,800 किलोमीटर दूरी पर ऑस्ट्रेलिया में भी सुनी गयी थी।
  7. पृथ्वी में हर सेकंड आसमानी बिजली 100 बार जमीन से टकराती है।
  8. हर साल आकाशी बिजली से 1 हजार लोगों की मौत हो जाती है।
  9. अक्टूबर 1999 में लन्दन के आकार का हिमशैल अंटार्कटिक से अलग हो गया था।
  10. अगर आप अपनी कार को सीधे ऊपर की तरफ ड्राइव करते हैं तो आप सिर्फ एक घंटे में ही अंतरिक्ष में पहुंच जायेंगे।
  11. हमारी धरती 4.5 अरब साल पुरानी है इसके साथ सूर्य और चन्द्रमा भी 4.5 अरब साल पुराने हैं।
  12. अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष में डकार नहीं ले सकते- क्योंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता जिससे उनकी पेट से गैस बाहर नहीं निकलती और वह अंदर ही रह जाती है।
  13. डीएनए की खोज वर्ष 1869 में स्विस फ्रेडरिक मैस्चलेर द्वारा की गयी थी।
  14. अल्फ्रेड नोबेल ने वर्ष 1866 में बारूद की खोज की थी।
  15. 5 में से 4 लोग इबोला वायरस से पीड़ित होने की वजह से मर जाते हैं।
  16. 5 अरब साल बाद सूरज का इंधन खत्म हो जायेगा और यह एक विशाल लाल गोले की शकल ले लेगा।
  17. रबर के आविष्कार से पहले पेंसिल का आविष्कार हुआ था। पेंसिल से लिखे शब्दों को मिटाने के लिए पहले ब्रेड का इस्तेमाल किया जाता था।
  18. सूरज धरती से बड़ा है पर क्या आप जानते है कि सूरज धरती से लाखों गुना बड़ा है यानि सूरज में लाखों धरती समा जाए। इतना बड़ा !
  19. हमारे ब्रह्मांड में 100 अरब आकाशगंगाएं हैं।
  20. हर घंटे में हमारा ब्रह्मांड एक अरब मील तक फ़ैल जाता है।
  21. थर्मामीटर का अविष्कार 1607 में गैलिलियो द्वारा किया गया था।
  22. हाथ मिलाने से इतने कीटाणु स्थानांतरित होते हैं, जितने की चूमने से भी नहीं होते।
  23. 16 दिसंबर 1811 को न्यू मैड्रिड में आया 7.9 रिक्टर के भूंकप की वजह से मिसीसिपी नदी उल्टी बहने लगी थी।
  24. पहला हृदय प्रत्यारोपण क्रिश्चियन बार्नार्ड ने सन 1967 में किया जिसमे मरीज 18 दिनों तक जीवित रहा।
  25. दुनिया में सबसे लम्बा पेड़ एक ऑस्ट्रेलियाई नीलगिरी था – 1872 में इसे 435 फीट लंबा मापा गया था।
  26. जब हम छीकते हैं तो उसकी रफ़्तार 100 मील प्रति घंटा होती है।
  27. बम का पता लगाने के लिए कुत्तों को ट्रेनिंग दी जाती है। पर क्या आप जानते हैं कि मधुमक्खियों को भी इसके लिए ट्रेनिंग दी जाती है।
  28. आपने सुना होगा शेर शिकार करता है, पर क्या आप जानते हैं कि 90 प्रतिशत शिकार शेरनी ही करती है। शेर तभी उसकी मदत के लिए आता है जब उसे जरूरत होती है।
  29. विश्व का पहला कंप्यूटर “ENIAC” 27 टन का था, जो की एक हॉल जितना विशाल था।
  30. पृथ्वी का तीन चौथाई हिस्से में जल है, पर मौजूद कुल पानी में से 97 प्रतिशत पानी नमकीन है। इसी कारण से हमारे पास पीने लायक केवल 1 प्रतिशत पानी है।

दुनिया की 5 सबसे ऊंची व् अदभुत इमारतें

दुनिया में 5 ऊंची व् अदभुत इमारतें हैं जिनकी कारीगिरी और वास्तुशिल्प दुनियाभर के लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है। आइए जानें दुनिया की 5 ऐसी अदभुत इमारतों के बारे में…

बुर्ज खलीफा, दुबई

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बुर्ज ख़लीफ़ा दुनिया की सबसे ऊँची इमारत है। यह इमारत दुबई में आठ अरब डॉलर की लागत से बनाई गई है। इस इमारत की ऊंचाई 2,717 फीट है।

इसका उद्घाटन 4 जनवरी 2010 में किया गया था। इस इमारत में कुल 162 मंजिले हैं। इसमें स्विमिंग पूल, खरीदारी की व्यवस्था, दफ़तर, सिनेमा घर सहित सारी सुविधाएँ मौजूद है।

इसकी 76 वीं मंजिल पर एक मस्जिद भी बनाई गई है। बुर्ज ख़लीफ़ा इमारत को 96 किलोमीटर दूर से भी साफ़-साफ़ देखा जा सकता है। इसमें लगाई गई लिफ़्ट दुनिया की सबसे तेज़ चलने वाली लिफ़्ट है।

शंघाई टावर, चीन

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शंघाई टावर चीन के शंघाई नगर के पुडौंग जिले में स्थित एक गगनचुम्बी इमारत है। यह इमारत 6 सितंबर, 2015 को बन कर तैयार हुई थी। इस इमारत में 121 मंजिले हैं। शंघाई टावर की ऊंचाई 2,073 फुट है।

यह एक मिश्रित उपयोग की इमारत है जिसके भीतर होटल, कार्यालय, सम्मेलन कक्ष और शॉपिंग मॉल इत्यादी हैं। यह चीन की पहली और विश्व की दूसरी सबसे ऊँची इमारत है।

मक्का रॉयल क्लॉक टावर, सऊदी अरब

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यह टावर सऊदी अरब के प्रसिद्ध मक्का शहर में है। मक्का रॉयल क्लॉक टावर की ऊंचाई 1,972 फीट हैं और यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इमारत है।

मक्का रॉयल क्लॉक टावर का निर्माण 2011 में हुआ है और इसका दूसरा नाम अब्राज अल-बैत टावर हैं। मक्का रॉयल क्लॉक टावर में 120 मंजिलें हैं।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, अमेरिका

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यह इमारत अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर में थी। इसकी ऊंचाई 1,776 फीट थी। लेकिन 11 सितम्बर 2001 को अल-कायदा द्वारा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया गया था जिसके कारण यह इमारत क्षतिग्रस्त हो गई।

विश्व के सबसे बड़े व्यावसायिक केन्द्र के रूप में विख्यात अमेरिका की यह बहुप्रतिष्ठित इमारत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर वर्ष 1973 में 75 करोड़ डालर की लागत से बनकर तैयार हुई थी।

यह सात इमारतों का एक झुंड था जिसका डिजाइन प्रसिद्ध मिनोरू यामासाकी और एमरी रोथ वास्तुकारों ने तैयार किया था।

ताइपे 101, ताईवान

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ताइपे 101, ताईवान की राजधानी ताइपे में स्थित एक गगनचुंबी अदभुत इमारत है। ताइपे101 का उद्घाटन 2004 में हुआ है। इसमे 101 फ्लोर है और इसकी ऊंचाई 1,671 फुट है।

दुनिया का सबसे लंबा ग्रीटिंग कार्ड 7 किलोमीटर था जाने कुछ रोचक तथ्य !

बधाई देने की परम्परा हज़ारों साल पुरानी है। कहा जाता है कि पहला शुभकामना संदेश ईसा से 600 वर्ष पहले भेजा गया था। इस तरह के संदेशों ने आज के ग्रीटिंग कार्ड तक की यात्रा कैसे पूरी की, आज हम इस पोस्ट में जानेंगे।

नववर्ष, जन्मदिन, विवाह या त्योहारों के अवसर पर बधाई संदेश, पत्र और कार्ड भेजने की रीति बहुत पुरानी है। आजकल तकनीक के विस्तार और उन्नति के चलते ई-मेल, व्हाट्सएप, मोबाइल फोन, एसएमएस तथा संचार के अत्याधुनिक साधनों के ज़रिए झटपट शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हो जाता है, लेकिन पुराने समय में बधाई संदेश भेजना सरल नहीं था। इसके बावजूद लोग विभिन्न तरीकों से अपने मन की बातें एक-दूसरे तक पहुंचा देते थे।

आज के समय में

आजकल बाज़ार में एक से लेकर हज़ार रुपए तक की क़ीमत के बधाई कार्ड उपलब्ध हैं। कई कम्पनियां सिर्फ़ बधाई कार्ड बेचकर करोड़ों की कमाई कर रही हैं।

तमाम कूरियर कम्पनियां व इंटरनेट केंद्र ख़ासतौर पर शुभकामना संदेश व उपहार भेजने का काम करते हैं। गौरतलब है कि भारतीय डाक विभाग की तरफ़ से बधाई पत्र भेजने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। विभिन्न सोशल कम्युनिटीज़ पर कस्टमाइज़्ड संदेश भेजने की सुविधा भी है।

सैकड़ों साल पहले का

सदियों पहले आज की तरह संचार के तीव्र साधन नहीं थे, तब दूतों व कबूतरों द्वारा भी बधाई पत्र भेजे जाते थे। चीन व मिस्र में बधाई संदेश भेजने की श्रेष्ठ परम्परा थी।

इन देशों में कई ताम्रपत्रों के अलावा इत्र की ऐसी शीशियां भी मिली हैं, जिन पर शुभकामनाएं दर्ज हैं। भारत में ताड़पत्रों, केले के पत्तों, कदम्ब छाल, कपड़ों पर बधाई संदेश भेजे जाते थे।

मौर्य काल में तांबे, सोने-चांदी के पत्तों पर सौभाग्य व मंगल कामनाएं दी जाती थीं। इतिहासकारों के अनुसार, ईसा से 600 वर्ष पूर्व के बधाई पत्र भी मिले हैं।

भारत में अंग्रेज़ों ने सर्वप्रथम क्रिसमस तथा नए वर्ष पर शुभकामना संदेश भेजने और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहने की रवायत डाली। शुरुआती दिनों का एक छपा हुआ शुभकामना पत्र वर्ष 1843 ई. में भेजा गया था, जो इंग्लैंड में मिला है।

ब्रिटिश म्यूज़ियम में 1842 ई. का मुद्रित बधाई कार्ड भी मिला है। इस पर ‘हैप्पी क्रिसमस टू यू’ लिखा है। ज़ाहिर है कि किसी संदेश के प्रत्युत्तर में ये कार्ड छापकर भेजने के लिए तैयार किया गया होगा।

कुछ रोचक तथ्य

  • भारत में शुरुआती दिनों में शिवकाशी, मद्रास और मुम्बई में अधिक बधाई पत्र छपते थे।
  • हैदराबाद के निज़ाम का नाम सबसे ज़्यादा शुभकामना पत्र भेजने वालों की सूची में दर्ज है।
  • दुनिया का सबसे लम्बा ग्रीटिंग कार्ड 7 किलोमीटर का था। इसे 10 दिसम्बर, 1967 को वियतनाम युद्ध में मोर्चे पर डटे अमेरिकी सैनिकों के नाम भेजा गया था। इस पर 1 लाख लोगों की सामूहिक शुभकामनाएं दर्ज थीं और इसका वज़न 10 टन था।
  • दुनिया का सबसे छोटा शुभकामना पत्र 1920 में एक चावल के दाने पर लिखकर प्रिंस ऑफ़ वेल्स को भेजा गया था।
    13वीं सदी में यूरोपियनों ने वुडकट्स पर नए साल के ग्रीटिंग्स भेजकर नई परम्परा शुरू की थी।
  • अमेरिका में छपे हुए ग्रीटिंग कार्ड्स बेचने की शुरुआत लुई प्रैग नामक एक जर्मन लिथोग्राफ़र ने की थी, जिसने वर्ष 1856 में बोस्टन में ग्रीटिंग कार्ड्स की दुकान सजाई थी।
  • अमेरिका में हर साल साठ लाख ग्रीटिंग कार्ड्स भेजे जाते हैं, जिनका बाज़ार आठ अरब डॉलर्स का है।
  • सबसे लोकप्रिय शुभकामना संदेश हैप्पी बर्थडे के होते हैं। दुनिया में कुल बिकने वाले ग्रीटिंग कार्ड में से आधे जन्मदिन संदेशों के होते हैं।
  • जहां तक सीज़नल कार्ड्स की बात है तो क्रिसमस पर सबसे ज़्यादा ग्रीटिंग कार्ड दिए जाते हैं। इसके बाद वैलेंटाइंस डे, मदर्स डे और फ़ादर्स डे के कार्ड्स की बारी आती है।

भारत की पहली सौर ऊर्जा संचालित ट्रेन

भारत दुनिया के सबसे विशाल रेल-यातायात वाले देशों में से एक है। भारतीय रेलवे ने उर्जा-संरक्षण के लिए बड़ी पहल की है। अब वह दिन दूर नहीं जब देश में सौर ऊर्जा से संचालित ट्रेनें पटरियों पर दौड़ेंगी।

इससे भारतीय रेलवे को भारी भरकम डीजल की खपत से छुटकारा मिलेगा। भारतीय रेलवे ने इसकी शुरुआत कर दी है। हालांकि ट्रेन को तो डीजल इंजन ही खींचेगी लेकिन साधारण तथा वातानुकूलित डिब्बों में लाइटों व पंखों को सोलर पैनलों के जरिये सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा।

पारंपरिक तथा प्रदूषण फैलाने वाले ऊर्जा स्रोतों पर अब निर्भर नही रहना पड़ेगा। भारतीय रेल सौर ऊर्जा के साथ-साथ अन्य प्राकृतिक गैसों, बायोडीजल व सीएनजी से भी ट्रेनों को दौड़ाने की कोशिशों में आगे बढ़ रही है।
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सोलर ट्रेनों से होने वालें फ़ायदे

एक सोलर पैनल एक दिन में करीब लगभग 300 यूनिट्स पाॅवर जेनरेट करता हैं। इससे बोगियों में बल्ब और पंखों के लिए बिजली की जरुरत सौर उर्जा से पूरी होगी।

इसका इस्तेमाल होने से रेलवे को हर साल एक बोग़ी पर 1.24 लाख का मुनाफ़ा होगा। सोलर ट्रेन की मदद से सालाना 239 टन कार्बन डाईऑक्साइड कम उत्पन्न होगी। सौर ऊर्जा से एक ट्रेन पर हर साल 90,000 लीटर डीजल की खपत कम की जा सकती है।
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रेलवे की योजना और संभावना

भारतीय रेल मंत्रालय की योजना 2020 तक सौर ऊर्जा से 1,000 मेगावॉट बिजली उत्पन्न करने का लक्ष्य प्राप्त करना है। इससे रेलवे की दस फीसदी ऊर्जा की जरूरत पूरी होगी।

रेलवे के मुताबिक, मुख्य तौर पर हमारी निगाहें सौर ऊर्जा पर हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक ट्रेनें और ईएमयू ट्रेने बढ़ेगी, हमारी ऊर्जा जरूरत भी बढ़ेगी।

इसी लक्ष्य पर नजर रखते हुए हम सौर ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस योजना से 2020 तक हम कुल ऊर्जा जरूरतों का दस फीसदी पूरा करने में समर्थ हो पाएँगे।
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