त्रिपुरा का रहस्यमयी उनाकोटी मंदिर : जिसका रहस्य आज तक कोई नहीं सुलझा पाया

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त्रिपुरा के जंगलों में बसा हुआ उनाकोटि मूल रूप से भगवान शिव को समर्पित एक तीर्थ स्थल है, और माना जाता है कि यह 7वीं – 9वीं शताब्दी ईसवी पुराना है।

यह मंदिर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से तकरीबन 125 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह मंदिर पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े रहस्यों में भी गिना जाता है। दूर-दूर तक फैले जंगल, तंग पगडण्डी और कोलाहल मचाते नदी स्रोतों के मध्य स्थित है यह त्रिपुरा की ‘उनाकोटी‘।

यह स्थान काफी सालों तक अज्ञात रूप में यहां मौजूद है, हालांकि अब भी बहुत लोग इस स्थान का नाम तक नहीं जानते हैं। यह मंदिर जितना अद्भुत है उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है।

यहां कुल 99 लाख 99 हजार 999 पत्थर की मूर्तियां हैं, जिनके रहस्यों को आज तक कोई भी सुलझा नहीं पाया है। जैसे कि ये मूर्तियां किसने बनाई, कब बनाई और क्यों बनाई और सबसे जरूरी कि एक करोड़ में एक कम ही क्यों? हालांकि इसके पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं, जो हैरान करने वाली हैं।

इन्हीं रहस्यमयी मूर्तियों के कारण ही इस जगह का नाम उनाकोटी पड़ा है, जिसका अर्थ होता है “करोड़ में एक कम”। यहाँ दो तरह की मूर्तियों मिलती हैं, एक पत्थरों को काट कर बनाई गईं मूर्तियां और दूसरी पत्थरों पर उकेरी गईं मूर्तियां।

यहां ज्यादातर हिन्दू धर्म से जुड़ी प्रतिमाएं हैं, जिनमें भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान विष्णु, और गणेश भगवान आदि की मूर्तियां स्थित है।

इस स्थान के मध्य में भगवान शिव के एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, जिन्हें उनाकोटेश्वर के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव की यह मूर्ति लगभग 30 फीट ऊंची बनी हुई है।

इसके अलावा भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के साथ दो अन्य मूर्तियां भी मौजूद हैं, जिनमें से एक मां दुर्गा की मूर्ति है। यहां तीन नंदी की मूर्तियां भी हैं। इसके अलावा यहां और भी ढेर सारी मूर्तियां बनी हुई हैं।

इस स्थान के मुख्य आकर्षणों में भगवान गणेश की अद्भुत मूर्तियां भी हैं। जिसमें गणेश की चार भुजाएं और बाहर की तरफ निकले तीन दांतों को दर्शाया गया है। भगवान गणेश की ऐसी मूर्ति बहुत ही कम देखी गई है।

इसके अलावा यहां भगवान गणेश की चार दांत और आठ भुजाओं वाली दो और मूर्तियां भी हैं। इन अद्भुत मुर्तियों के कारण यह स्थान काफी रोमांच पैदा करता है।

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