जानिए सांता की सवारी ‘रेंडियर’ के बारे में 10 रोचक तथ्य !!

रेंडियर या कैरिबू पृथ्वी से सुदूर-उत्तर के बर्फ़ीले आर्कटिक और उपार्कटिक इलाक़ों में मिलने वाली एक हिरण की नस्ल है। जब क्रिसमस की बात होती है तो सबसे पहले ध्यान में आता है रेंडियर, क्योंकि सांता की सवारी तो यही है न!

आज इस पोस्ट में हम आपको रेंडियर से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहें चलिए जानतें हैं:-

रोचक तथ्य

  1. रेंडियर अमेरिका और कैनेडा में ‘कैरिबू’ नाम से प्रचलित है। बाकी स्थानों पर ‘रेंडियर‘ के नाम से जाना जाता है।
  2. इनके खुर (Hooves) गर्मियों में जब ज़मीन नर्म होती है, तब फैलते हैं और सर्दियों में ज़मीन सख्त होने पर सिकुड़ (Srink) जाते हैं।
  3. रेंडियर की नाक पूरी तरह से बालों से ढंकी होती है। इनकी नाक की विशेषता यह है कि ये हवा को फेफड़ों में जाने से पहले गर्म करती है।
  4. ये नाक से लेकर पैरों के नीचे तक बालों से ढंके होते हैं, जो जमी हुई ज़मीन और बर्फ पर चलते समय इनको अच्छी पकड़ देते हैं।
  5. फीमेल रेंडियर एक बार में ज़्यादातर एक ही बच्चे को जन्म देती है। जन्म के समय इनका वजन 3 से 9 किलो तक हो सकता है।
  6. हिरणों की सबसे छोटी प्रजाति दक्षिणी पुडु (Southern pudu) है। इसका वजन 9 किलो के आसपास होता है और पूरी तरह से विकसित होने पर यह लगभग 36 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं।
  7. हिरणों की सबसे बड़ी प्रजाति मूस या एल्क (Moose or Elk) है। इसकी लंबाई करीब 2 मीटर तक होती है और वजन लगभग 820 किलो तक हो सकता है।
  8. रेंडियर हिरण की ऐसी प्रजाति है जिसे पालतू बनाया जाता है। उनका अधिकतर इस्तेमाल बोझ उठाने, दूध, मीट आदि के लिए किया जाता है। साथ ही इनकी खालों (Skin) का इस्तेमाल भी कई चीजों को बनाने में किया जाता है।
  9. रेंडियर का रंग और आकार स्थान के अनुसार अलग-अलग होता है। मेल और फीमेल दोनों के सींग होते हैं, पर मेल रेंडियर के सींग बड़े होते हैं। कुछ प्रजाति ऐसी भी हैं जिनमें फीमेल के सींग नहीं होते।
  10. रेंडियर का जीवनकाल लगभग 15 से 20 साल तक का होता है।

यह भी पढ़ें :-

जानें कुछ चीज़ें ठोस, तरल और गैसीय क्यों होती है?

कोई भी चीज़ जो जगह घेरती हो और जिसका कोई आकार या पिंड हो, हम उसे पदार्थ कहते हैं। लोहा, सोना, चांदी, पानी, आक्सीजन आदि ये सब पदार्थ हैं। आमतौर पर धातुएंठोस, पानी तरल तथा ऑक्सीजन-गैसीय अवस्था में पाई जाती हैं लेकिन ये सभी पदार्थ इन तीनों में से किसी भी अवस्था में हो सकते हैं जैसे कि ठोस, तरल या गैस

पदार्थ आधारभूत इकाइयों से मिल कर बना होता है जिसे मॉलिक्यूल्स कहा जाता है जो आगे खुद छोटी इकाइयों में बंटे होते हैं जिन्हें अणु या एटम कहा जाता है।

some things solid some liquid and some gas

ठोस अवस्था

ठोस अवस्था में किसी तत्व के मालिक्यूल्स एक-दूसरे के बहुत करीब होते हैं। उनके बीच की आकर्षण शक्ति बहुत शक्तिशाली होती है। इसी कारण ठोस पदार्थ की आकृति, आकार तथा घनत्व निर्धारित होते हैं और उन्हें आसानी से दबाया नहीं जा सकता।

तरल अवस्था

तरल अवस्था में पदार्थ के मालिक्यूल्स एक-दूसरे के इतने करीब नहीं होते और इसी के साथ उनमें खिंचाव की शक्ति भी तुलाना में कम होती है। परिणामस्वरूप तरल उसी पात्र की आकृति ग्रहण कर लेते हैं जिसमें उन्हें रखा जाता है लेकिन उनका भार वही रहता है।

गैसीय अवस्था

गैसीय अवस्था में मालिक्यूल्स एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं तथा उनमें खिंचाव की शक्ति बहुत कम होती है। इसका परिणाम यह होता है कि न तो इनकी आकृति और न ही भार एक जैसा रहता है। यह उस पात्र की आकृति प्राप्त कर लेता है जिसमें इसे रखा जाता है तथा इसे आसानी से दबाया जा सकता है।

ब्रह्मांड में पाए जाने वाले सभी तत्व इन उपरोक्त अवस्थाओं में पाए जा सकते हैं यानी ठोस, तरल तथा गैस में। उदाहरण के लिए पानी जो सामान्यतः तरल अवस्था में होता है बर्फ के रूप में जमने पर ठोस अवस्था प्राप्त कर लेता है और जब उसे वाष्पीकृत किया जाता है तो यह गैस का रूप लेता है।

इसी तरह से सामान्य स्थितियों में ऑक्सीजन एक गैस है लेकिन इसको ठंडा करके तरल या ठोस अवस्था में बदला जा सकता है।

पदार्थ की इन तीन अवस्थाओं के अतिरिक्त एक चौथी अवस्था भी है प्लाज्मा। पदार्थ के मालिक्यूल तथा अणु इस अवस्था में आयनीकृत (आयोनाइन्ड) होते हैं। इस अवस्था में पॉजिटिव तथा नेगेटिव दोनों तरह के आयन होते हैं।

फ्लोरेसैंटट्यूब में चमकदार पदार्थ प्लाज्मा अवस्था होती है जो रेडियो तरंगों को प्रतिबिंबित करता है। आमतौर पर तापमान को कम करने से तत्व ठोस अवस्था में आ जाता है तथा तापमान को उच्च दर्जे तक बढ़ाने से गैसीय अवस्था में पहुंच जाता है।

पंजाब केसरी से साभार

यह भी पढ़ें :-

जानिए कैसे शुरू हुई सांता की परम्परा

माना जाता है कि 25 दिसम्बर को क्रिसमस के अवसर पर बच्चों के प्यारे सांता क्लॉज दुनिया भर में घूम कर बच्चों को गिफ्ट्स बांटते हैं। हो…हो…हो…कहते हुए लाल-सफेद कपड़ों में बड़ी-सी सफेद दाढ़ी और बालों वाले सांता क्लॉज बच्चों के चेहरे पर खुशियां बिखेरने के लिए आते हैं।

कंधे पर तोहफों से भरी पोटली, हाथ में क्रिसमस बैल लिए सांता का इंतजार हर बच्चे को रहता है। सांता की तरह उनका इतिहास भी बहुत निराला है।

who Santa Claus, how tradition Santa started

कैसे शुरू हुई सांता की परम्परा

सांता क्लॉज के संबंध में कहा जाता है कि वह रेडियरों से खींची जाने वाली स्लेज पर सवार होकर किसी बर्फीले स्थान से आते हैं। वह चिमनियों के रास्ते घरों में प्रवेश करके सभी बच्चों को उपहार देते हैं।

सांता क्लॉज की परम्परा की शुरूआत संत निकोलस ने चौथी-पांचवीं सदी में हुई थी। वह बच्चों और नाविकों से बेहद प्यार करते थे। उनका उद्देश्य था कि क्रिसमस और नववर्ष के दिन गरीब-अमीर सभी प्रसन्न रहें।

उनका जन्म तीसरी सदी में तुर्किस्तान के मायरा नामक शहर में हुआ था। वह एक रईस परिवार से थे। निकोलस जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उनकी दयालुता के किस्से लम्बे अर्से तक कथा-कहानियों के रूप में चलते रहे हैं।

संत निकोलस के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कोंस्टेंटाइन प्रथम के सपने में आकर 3 सैनिक अधिकारियों को मृत्युदंड से बचाया था। 17वीं सदी तक इस दयालु बुजुर्ग का नाम संत निकोलस के स्थान पर ‘सांता क्लॉज‘ हो गया।

यह नाम डेनमार्क वासियों की देन है। वहां के लोग संत निकोलस को ‘सेन्टरी क्लॉज’ पुकारते थे। आगे चलकर इसी का परिवर्तित रूप ‘सांता क्लॉज‘ यूरोपीय चर्च प्रधान देशों में प्रचलित हुआ।

आधुनिक युग में क्रिसमस के अवसर पर सांता क्लॉज का महत्व इतना अधिक बढ़ गया है कि उन्हें ‘क्रिसमस का पिता‘ (फादर ऑफ क्रिसमस) और ‘फादर ऑफ जनवरी‘ तक कहा जाता है।

यह ही पढ़ें :-क्रिसमस के बारे में 18 विचित्र और रोचक तथ्य!

सांता के रॅडियर

सांता क्लॉज के रेडियरों के नाम हैं- ‘रुडोल्फ, डेशर, डांसर, प्रेन्सर, विक्सन, डेंडर, ब्लिटजन, क्युपिड और कोमेट‘। आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर सांता के रेडियर उड़ते कैसे होंगे!

क्रिसमस और सांता क्लॉज से कई मान्यताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि बरसों पहले जब सांता क्लॉज ने रेडियरों पर झिलमिलाती हुई ‘मैजिक डस्ट’ डाली तो वे फुर्र से उड़ गए।

‘मैजिक डस्ट’ छिड़कने से रेडियर क्रिसमस लाइट की स्पीड से उड़ने लगते ताकि सांता हर बच्चे के पास पहुंचकर उन्हें गिफ्ट दे सकें। मान्यता है कि बच्चे गहरी नींद में सो जाते हैं, तो सांता तोहफा रखकर अगले बच्चे के घर निकल जाते हैं।

कैसे बना सांता का हुलिया

आजकल जिस रूप में हम सांता को देखते हैं, शुरूआती दौर में उनका हुलिया ऐसा नहीं रहा होगा तो फिर लाल और सफेद रंग के कपड़े पहने लंबी दाढ़ी और सफेद बालों वाले सांता का यह हुलिया आखिर आया कहां से?

दरअसल, 1822 ईस्वी में क्लीमेंट मूर की कविता ‘नाइट बिफोर क्रिसमस‘ में छपे सांता के कार्टून ने दुनिया भर का ध्यान खींच लिया।

फिरथामस नस्ट नामक पॉलिटिकल काटनिस्ट ने हार्पर्स वीकली के लिए एक कार्टून तैयार किया था, जिससे सफेद दाढ़ी वाले सांता क्लॉज को यह लोकप्रिय शक्ल मिली।

धीरे-धीरे सांता की शक्ल का उपयोग विभिन्न ब्रांड्स के प्रचार के लिए किया जाने लगा। आज के जमाने के सांता का अस्तित्व 1930 में आया। हैडन संडब्लोम नामक एक कलाकार कोका-कोला की एड में सांता के रूप में 35 वर्षों तक दिखाई दिया।

सांता का यह नया अवतार लोगों को बहुत पसंद आया और आखिरकार इसे सांता के नए रूप के साथ स्वीकार किया गया। जो आज तक लोगों बीच काफी मशहूर है।

पंजाब केसरी से साभार

यह भी पढ़ें :- 

जानिए क्यों सजाते हैं क्रिसमस ट्री

यहाँ पर होती है दुनिया सबसे अजीबो गरीब प्रतियोगिता!!

0

प्रतियोगिता लोगों को अपने जीवन में विपरीत स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करती है और चुनौती और परिवर्तन की सूरत में डटकर मुकाबला करना सिखाती है।

यूँ तो दुनिया में बहुत सी प्रतियोगिताएं होती रहती है जिनमें से कुछ बेहद अजीबोगरीब भी होती हैं। आज की इस पोस्ट में आपको बताने जा रहें ऐसी प्रतियोगिता के बारे में, जो शायद न आपने कभी देखी होगी न कभी उसके बारे में सुना होगा, तो चलिए जानते हैं

कहाँ होती है ये प्रतियोगिता

हर कोई खूबसूरत दिखना चाहता है लेकिन क्या हो अगर लोग खूबसूरत की बजाय बदसूरत दिखने की होड़ में शामिल हो जाएं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला स्पेन के ट्क्नॉस शहर में।

दरअसल यह स्पेन के ट्क्नॉस शहर के एक उत्सव में अजीबोगरीब प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इस प्रतियोगिता में लोगों को अपने चेहरे को बदसूरत व भद्दा दिखाना होता है लेकिन शर्त ये है कि इसके लिए उन्हें किसी तरह के मेकअप करने की इजाजत नहीं होती, बल्कि केवल अपने चेहरे के हाव-भावों व अंगों के सहारे ही उन्हें ऐसा करना होता है।

नौ दिन तक चलने वाला यह उत्सव ट्क्नॉस के बिलबाओ सिटी हॉल में आयोजित किया गया था। इस प्रतियोगिता को “कॉन्कुर्सो डे फिओस” के नाम से जाना जाता है। यह उत्सव पहली बार 1978 में आयोजित किया गया था।

यह भी पढ़ें :-

करी पत्ते के हैं बेहद चमत्कारी फायदे, जानिए कैसे ?

करी पत्ते का उपयोग रसोई में कई रैसिपी में स्वाद बढ़ाने लिए करते देखा होगा। जिस डिश में करी पत्ते के डाला जाता है उसका स्वाद बढ़ जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं करी पत्ता खाने के और कितने लाभ है।

इसमें कई ऐसे कई सारे तत्व पाए जाते हैं जो सेहत के लिए वरदान है। इसका इस्तेमाल त्वचा और बालों के लिए भी बहुत ही अच्छा माना जाता है।

इसके अलावा इसके कई ऐसे फायदे भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको इस पोस्ट में करी पत्तों के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं :-

There are many miraculous benefits of curry leaves, know how

स्किन के लिए फायदेमंद

ऐंटीऑक्सिडेंट, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुणों से भरपूर करी पत्ता स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है। करी पत्ता में भरपूर मात्रा में विटामिन्स भी पाई जाती हैं जो आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ साथ आपकी त्वचा को चमकदार बनाने मदद करती हैं।

यह भी पढ़ें :-जानिए सूर्य नमस्कार के 10 चमत्कारी फायदे!!

लीवर के लिए फायदेमंद

करी पत्ते में टैनिन और कारबाजोले एल्कलॉइड जैसे तत्व मौजूद होते हैं। करी पत्ते में हेप्टोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं जो लिवर को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद विटमिन सी लीवर को सेहतमंद रखता है।

वजन कंट्रोल करता है

करी पत्तों के नियमित सेवन से आप तेजी से अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल में कर सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ करी पत्ते से उबले पानी में शहद और नींबू का रस मिलाकर पीना है कुछ दिनों तक इसका सेवन करने वजन आसानी कंट्रोल होने लगता है।

यह भी पढ़ें :-फ़ूड टिप्स: वजन कम और कंट्रोल करने वाली डाइट

एनीमिया के खतरे से बचाता है

करी पत्ते में आयरन और फॉलिक एसिड पाया जाता है। जो एनिमिक पेसेंट में खून की कमी को तेजी से पूरा करने लगता है। इस वजह से यह एनीमिया के खतरे से सुरक्षित रखता है।

डेंड्रफ की प्रॉब्लम से छुटकारा दिलाता है

अगर आप भी डैंड्रफ के लिए ट्रीटमेंट कराकर थक चुके हैं जो करी पत्ता आपकी इस समस्या को आसानी से दूर कर सकता है।

इसके लिए आपको करी पत्तों का पतला पेस्ट बनाकर दही के साथ मिलाकर सिर में लगाने होगा और डैंड्रफ की समस्या आसानी से दूर हो जाएगी और इससे बाल जल्दी सफेद नहीं होते।

यह भी पढ़ें :-जानिए गहरी सांस लेने के चमत्कारी फायदों के बारे में

डायबिटीज में फायदेमंद

देश में लगभग हर दूसरे घर में डायबिटीज के पेसेंट हैं ऐसे में करी पत्ता आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर आप इसके चार से पांच पत्ते नियमित रूप से चबाते हैं तो आपकी डायबिटीज अपने आप कंट्रोल में आ जाती है।

कॉलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मददगार

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए करी पत्ते का इस्तेमाल करना लाभदायक माना जाता है क्योंकि करी पत्ते में विटामिन सी के साथ एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइन्फ्लामेट्री गुण मौजूद होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कंट्रोल कर सकता है।

यह भी पढ़ें :-

जानिए शहद और दालचीनी के एक साथ प्रयोग करने के चमत्कारी फायदे

नीम से त्वचा के लिए होते है चमत्कारी फायदे, जाने कैसे करें इस्तेमाल

मोमबत्ती के ये 10 डिज़ाइन देखकर आपके मुँह में पानी आ जाएगा !!

मोमबत्ती का वास्तु शास्त्र में बहुत खास महत्व होता है। माना जाता है कि कैंडल्स जलाने से घर में एनर्जी का संतुलन बना रहता है। ये नेगेटिव एनर्जी को दूर करके उसे पॉजिटिव एनर्जी में बदल देती है।

आजकल बाजार में कई तरह की अलग-अलग डिज़ाइन वाली मोमबत्तियां देखने को मिलती हैं। घर में अलग-अलग स्टाइल और रंगों की मोमबत्तियां बहुत ही सुंदर लगती हैं।

आज के समय में लोग घर को सजाने के लिए भी मोमबत्तियों का इस्तेमाल करते हैं। ये न सिर्फ घर में रोशनी करती हैं बल्कि घर के माहौल में चार चांद लगा देती हैं और उसे खुशनुमा बना देती है।

आज पोस्ट में हम आपको मोमबत्तियों के कुछ ऐसे डिज़ाइन बताने जा रहे हैं जिन्हें देखकर ये समझ पाना मुश्किल है कि ये मोमबत्ती है या कोई खाने की डिश, तो चलिए देखते हैं :-

1) ये तरबूज नहीं मोमबत्ती हैं!!

2) इसे देखकर आपके मुँह में पानी आ गया होगा लेकिन ये केवल ओरियो और दूध की तरह दिखने वाली मोमबत्ती है।

Seeing these candle designs will make your mouth water

3) ये नींबू की तरह स्लाइस लग रहे हैं पर ये मोमबत्ती है!

Seeing these candle designs will make your mouth water

4) इसे फ्लेवर्ड फ्रूट शेक न समझे, यह कैंडल्स है!

Seeing these candle designs will make your mouth water

5) कैंडी कॉर्न के तरह दिखने वाली मोमबत्ती

Seeing these candle designs will make your mouth water

6) ये खूबसूरत सी दिखने वाली कोई डिश नहीं बल्कि कैंडल्स है

7) इसे देखकर तो आप जरूर सोच रहे होंगे कि ये क्रिसमस कपकेक है लेकिन यह भी एक मोमबत्तियों का सेट है।

Seeing these candle designs will make your mouth water

8) चेरी चीज़ केक स्लाइस नहीं मोमबत्ती ही है भाई!

Seeing these candle designs will make your mouth water

9) ये है कीवी कैंडल्स

Seeing these candle designs will make your mouth water

10) गलती से इसे लेमन ड्रिंक समझ कर मत पी लेना, ये भी कैडल्स है!

Seeing these candle designs will make your mouth water

यह भी पढ़ें :-

जानिए कहानी ‘गुड़िया’ की!!

गुड़िया भला किसे अच्छी नहीं लगतीं। पुराने जमाने से ही ये मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं।

गुड़िया क्या है?

इस प्रश्न का उत्तर डिक्शनरी में कुछ इस प्रकार मिलता है, “बच्चे का खिलौना, कठपुतली आदि जिसका निर्माण मानवीय चेहरे से मिलती जुलती आकृति में किया गया हो।”

पुराने जमाने में इनके चेहरे विभिन्न ऐतिहासिक हस्तियों के आधार पर बनाए जाते थे और सम्भवतः आरम्भिक दौर में इनका निर्माण क्ले, फर या लकड़ी से किया जाता था।

प्राचीन काल की गुड़िया

आज पूर्व ऐतिहासिक काल की गुड़िया मौजूद नहीं है। हालांकि खुदाई में बैबीलोनियन काल की ऐसी एलबैस्टर गुड़िया बरामद हुई हैं जिनकी भुजाएं हिलती थीं।

2000 ईसा पूर्व की मिस्त्री क्रबों में भी चपटी लकड़ी के टुकड़ों से बनाई हुई गुड़िया बरामद हुई हैं जिनके बाल मिट्टी अथवा लकड़ी के बीड्स से बनाए गए थे।

पुरातन काल में यूनान और रोम में बच्चों की कब्रों के साथ गुड़िया भी दफनाई जाती थीं। यूनान तथा रोम में बड़ी होने पर लड़कियां अपनी गुड़िया देवी को अर्पित कर दिया करती थीं क्योंकि बड़ी होने पर उन्हें उनसे खेलने की अनुमति नहीं होती थी।

अधिकांश पुरातन गुड़िया जो पाश्चात्य देशों में बच्चों को कब्रों में पाई गईं वे बहुत सादगी भरपूर होती थीं और आमतौर पर इनका निर्माण क्ले, चिथड़ों, लकड़ी अथवा हड्डियों से किया जाता था।

कुछ अधिक बेहतरीन किस्म की गुड़िया हाथी दांत अथवा मोम से भी बनाई जाती थीं। इनका निर्माण चाहे जिस पदार्थ से भी किया जाता हो, उनके पीछे उद्देश्य मात्र यही होता था कि इनका निर्माण यथासंभव अधिक से अधिक मानवीय चेहरों में मिलता जुलता किया जाए।

इस संबंध में 600 ईसा पूर्व में एक बड़ी प्रगति का 25 संकेत मिलता है जब उस दौर की बनी हुई ऐसी गुड़िया बरामद हुई जिनके अंग हिलते थे और जिनके कपड़े उतारे जा सकते थे।

पुरातन कालीन गुड़िया के दौर के बाद यूरोप इनके उत्पादन का एक बहुत बड़ा केंद्र बन गया। शुरू-शुरू में ये लकड़ी से बनाई जाती थीं।

लकड़ी से प्लास्टिक का सफर

बहरहाल समय बीतने के साथ-साथ इनके निर्माण स्तर में भी उत्तरोत्तर सुधार आता गया और इसमें इस्तेमाल की जाने 3 वाली निर्माण सामग्री में लकड़ी एवं कागज की लुगदी आदि का इस्तेमाल किया जाने लगा।

इन मिश्रणों की ढलाई प्रेशर में की जाती थी जिसके परिणामस्वरूप यह अधिक टिकाऊ बनती थीं। अब तक इनका सामूहिक निर्माण भी शुरू हो गया था।

हर व्यापारी अपने सामान के निर्माण में उपयक्त सामग्री को राज रखने की कोशिश करता है और पुराने जमाने के निर्माता भी इसका अपवाद नहीं थे।

वे भी इनके निर्माण में उपयुक्त होने वाली सामग्री को रहस्य के आवरण में ही रखते थे ताकि अन्य निर्माताओं को इसका पता न चले।

समय के साथ-साथ गुड़िया की निर्माण प्रक्रिया और इसमें प्रयुक्त सामग्री में सुधार होता चला गया। इंगलैंड में 1850 और 1930 के बीच अत्यंत शानदार मोम की गुड़िया का निर्माण हुआ।

अब खांचे बनाकर मोम मिट्टी और प्लास्टर से गुड़िया का निर्माण शुरू हो गया। 19वीं शताब्दी तक चीन, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क भी इनके निर्माण में कूद चुके थे और तरह-तरह की गुड़िया लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुकी थीं। 1880 के दशक में फ्रांस में बनी बेब नामक गुड़िया अत्यंत लोकप्रिय हुई।

सन् 1900 के आते-आते अधिक यथार्थवादी गुड़िया बनाई जाने लगीं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद गुड़िया निर्माताओं ने प्लास्टिक का उपयोग शुरू कर दिया।

इसके अलावा 1950 और 1960 में इनके निर्माण में फोम, रबड़ तथा विनाइल के उपयोग से सिर में विग लगाने की बजाय बालों का बिठाना संभव हो गया।

सबसे ज्यादा बिकने वाली गुड़िया

आज की तारीख में तो यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि गुड़िया का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा व्यवसाय बन चुका है और इसके बिना बच्चों के मनोरंजन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ‘बार्बी’ आज की तारीख में विश्वभर में सर्वाधिक बिकने वाली गुड़िया हैं।

पंजाब केसरी से साभार

यह भी पढ़ें :-

सऊदी शाही परिवार ने उड़ाए करोड़ों रूपये इन 6 चीज़ों पर, जानकर दंग रह जाएंगे आप

सउदी अरब मध्यपूर्व में स्थित एक सुन्नी मुस्लिम देश है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है जिसकी स्थापना 1750 के आसपास सउद द्वारा की गई थी। ये तो हम सब जानते हैं कि ये एक अमीर देश है और यहां क लोग पैसा पानी की तरह बहाते हैं।

आज की पोस्ट में हम आपको बताने जा रहें हैं सऊदी शाही परिवार की 6 सबसे महंगी चीज़ों में बारे जिन पर इन्होनें करोड़ों रुपए उड़ा दिए, तो चलिए जानते हैं:-

फै़ल्कन पक्षियों के लिए फ़्लाइट सीट्स बुक

surprised know about these expensive things royal family Saudi Arabia

फ़ैल्कन UAE का राष्ट्रीय पक्षी है और इसलिए इन्हें फ़्लाइट्स में ऑन-बोर्ड ले जाया जा सकता है। सऊदी के एक राजकुमार ने अपने 80 फै़ल्कन पक्षियों के लिए फ़्लाइट सीट्स बुक की थी।

इंसानों की तरह पक्षियों का भी पासपोर्ट बनता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 2002-2013 के बीच UAE सरकार ने परिंदों को 28,000 पासपोर्ट इशू किए थे। सुनने में अजीब लगने वाला ये किस्सा मिडिल ईस्ट में बेहद आम है।

यह भी पढ़ें :- सऊदी अरब के बारे में कुछ रोचक तथ्य

218 करोड़ की ड्रेस

surprised know about these expensive things royal family Saudi Arabia

हम आमतौर पर 20-25 हजार रुपये की सबसे महंगी पोशाक पहनते हैं, अगर कोई सेलिब्रिटी है तो वह लाखों की पोशाक पहनता है लेकिन जो ड्रेस राजा अब्दुल्ला की बेटी ने पहनी थी वह करीब 218 करोड़ रुपये की थी।उनकी शादी 2015 में हुई थी।

वह पोशाक पूरी तरह से सोने की बनी हुई थी। उस पोशाक को कुछ इस तरीके से बनया गया था जिससे वह ड्रेस पिरामिड सा दिखाई दे रही थी।

बाघ और शेर पालने का शौक़

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Fazza (@faz3)

दुबई के राजकुमार हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतौम ने इंस्टाग्राम पर अपने पालतु शेर फ़्रॉस्टी के साथ कई तस्वीरें शेयर की हैं।

इंटरनेट पर वह अक्सर अपने पालतू जानवरों के साथ तस्वीरें और वीडियो शेयर करते रहते हैं। हालांकि एनिमल वेलफ़ेयर वालों के सालों तक दबाव बनाने के बाद, 2017 में गल्फ़ देशों ने जंगली और ख़तरनाक जानवरों का निजी स्वामित्व पर बैन लगा दिया था।

सोने की गाड़ियाँ

surprised know about these expensive things royal family Saudi Arabia

लग्जरी कारों का शौक हर किसी को होता है। लेकिन क्या होगा अगर आपको सोने की गाड़ी मिल जाए? सऊदी अरबपति तुर्की बिन अब्दुल्ला के पास बेंटले, लेम्बोर्गिनी, रोल्स रॉय जैसी कई लग्जरी कारें हैं और ये सभी सोने से बनी हैं।

हीरों की अंगूठी नहीं, कार

surprised know about these expensive things royal family Saudi Arabia

सऊदी अरब के राजकुमार अलवलीद बिन तलाल के पास कई लक्ज़री गाड़ियां हैं। राजकुमार तलाल के पास एक मर्सिडीज़ बेन्ज़ है जिसमें हीरे लगे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, राजकुमार की गाड़ी को छूने वाले से राजकुमार तलाल 1000 डॉलर चार्ज करते थे।

तोहफे के रूप में गोल्डन टॉयलेट

surprised know about these expensive things royal family Saudi Arabia

बादशाह अबदुल्लाह ने अपनी बेटी को शादी के तोहफ़े में गोल्डन टॉयलेट दिया। 2011 में फ़ोर्ब्स ने अबदुल्लाह और उसके परिवार की कुल संपत्ति 21 बिलियन डॉलर बताई।

सोशल मीडिया पर चौंकाने वाला वीडियो वायरल!!

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल होते रहते हैं। आमतौर पर बच्चों के जितने भी वीडियो वायरल होते हैं वो या तो डांस का वीडियो होता है या फिर कोई गाना गा रहा है या फिर कोई फनी वीडियो होता है लेकिन आज की हमारी इस पोस्ट में हम जिस वीडियो के बारे में बताने जा रहे हैं वो बेहद चौंकाने वाला है।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by 🐍SNAKE WORLD🐍 (@snake._.world)

दरअसल सोशल मीडिया पर एक छोटी सी बच्ची का यह वीडियो लोगों को काफी चौंका रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक 6-7 साल की बच्ची 20 फीट से ज्यादा बड़े और भारी-भरकम अजगर के साथ खेलती हुई नज़र आ रही है।

इस वीडियो को ‘snake-world‘ नाम के एक यूजर ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। लोग इस विडियो को बहुत पसंद कर रहे है। इस चौंकाने वाले वीडियो को देखकर लोग अलग अलग प्रतिक्रियाऐं दे रहे हैं,

Shocking video viral on social media

यह भी पढ़ें :-

जानिए कौन है मिस यूनिवर्स हरनाज़ कौर संधू ?

21 सालों बाद मिस यूनिवर्स का खिताब जीतकर हरनाज़ कौर संधू ने भारत को पूरी दुनिया में गौरवान्वित किया है। आपको बता दें कि इजरायल में स्थित इलियट शहर में LIVA मिस डिवा यूनिवर्स 2021 का आयोजन किया गया था।

इस प्रतियोगिता में दुनिया भर से कुल 75 महिलाओं ने हिस्सा लिया था लेकिन भारत की हरनाज कौर संधू ने बाजी मार ली, तो चलिए आपको बताते हैं कि कौन है हरनाज संधू?

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Miss Universe (@missuniverse)

कौन हैं हरनाज

हरनाज़ कौर संधू चंडीगढ़ की रहने वाली हैं और पेश से एक मॉडल हैं। उन्हें एक्टिंग, सिंगिंग, डांसिंग, योगा, स्विमिंग, घुड़सवारी और कुकिंग का शौक है। साल 2017 में वो मिस चंडीगढ़ बनी थीं।

इसके बाद साल 2019 में वो ‘फेमिना मिस इंडिया पंजाब’ Femina Miss India Punjab भी रह चुकी हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पंजाबी फिल्मों “यारा दिया पू बरन” और “बाई जी कुट्टंगे” में भी अभिनय किया है।

हरनाज़ ने पराग्वे की नादिया फरेरा और दक्षिण अफ्रीका की लालेला मसवाने को हराकर ताज अपने नाम किया। इससे पहले सन 2000 में इंडिया से लारा दत्ता ने मिस यूनिवर्स जीता था और सन 1994 में सुष्मिता सेन ने जीता था।

इन सवालो का जवाब देकर मिस यूनिवर्स बनी हरनाज संधू

मैक्सिको की एंड्रिया मेजा ने हरनाज संधू को मिस यूनिवर्स का ताज पहनाया। एंड्रिया मेजा ने पिछले साल 2020 में मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया था।

इजराइल के ऐलट में आयोजित हुए इस 70वें संस्करण समारोह के अंतिम दौर में हरनाज संधू से पूछा गया था कि आज युवा महिलाएं जो दबाव झेल रहीं है, उससे निपटने के लिए क्या सलाह देना चाहेंगी?

इस प्रतियोगिता में अंतिम सवाल-जवाब चरण में संधू से पूछा गया था कि वर्तमान समय में युवा महिलाएं जो दबाव महसूस कर रही हैं, उससे निपटने के लिए वह उन्हें क्या सलाह देंगी।

इस का जवाब देते हुए संधू ने कह था, वर्तमान समय में युवा जिस बड़े दबाव का सामना कर रहे हैं, वह है खुद पर विश्वास करना। यह जानना कि आप अद्वितीय हैं और यही आपको सुंदर बनाता है।

दूसरों के साथ खुद की तुलना करना बंद करें और दुनिया भर में हो रही महत्वपूर्ण चीजों के बारे में बात करें। यही आपको समझने की जरूरत है।

बाहर आएं और खुद के लिए बात करें क्योंकि आप ही अपनी जिंदगी के नेतृत्वकर्ता हैं, आप ही खुद की आवाज हैं। 

संधू ने कहा कि वह खुद पर भरोसा करती हैं और इसी वजह से वह इस निर्णायक मोड़ पर खड़ी हैं और उनके इस जवाब ने उन्हें इतिहास रचने का मौका दिया।