सांप की जीभ दो भागों में क्यों कटी होती है? जानिए क्या है इसके पीछे रहस्य!

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सांप को देखकर अक्सर लोग डर जाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में सांपों की 2500 से 3000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। जहरीले सर्पो की 89 प्रजातियाँ भारत में पाई जाती है, जिनमें से 29 समुद्री साँप और 40 स्थलीय साँप हैं।

वैसे तो आपने अपनी जिंदगी में कई सांप देखे होंगे और इतना तो जरूर जानते होंगे कि सांप की जीभ आगे से दो हिस्सों में बंटी हुई होती है लेकिन ऐसा क्यों है। चलिए आज जानते हैं इस रहस्य के बारे में।

सांपों की जीभ दो भागों में कटी हुई होती है। इसके पीछे एक गहरा रहस्य छुपा हुआ है जिसका उल्लेख महाभारत में देखने को मिलता है। जी हां, दरअसल महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखी गई महाभारत में सांपों की जीभ से जुड़ी एक बहुत ही रोचक कथा है।

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महाभारत के अनुसार, महर्षि कश्यप की 13 पत्नियां थीं। कद्रू उनमें से एक थी। सभी सांप कद्रू के बच्चे हैं। इसके आलावा महर्षि कश्यप की एक अन्य पत्नी का नाम विनता था, जिनके पुत्र पक्षीराज गरुड़ हैं।

एक बार महर्षि कश्यप की पत्नी कद्रू और विनता ने एक सफेद घोड़ा देखा। उसे देखकर कद्रू ने कहा कि घोड़े की पूंछ काली थी और विनता ने कहा कि नहीं यह सफेद थी। इस बात पर दोनों में एक शर्त लग गई।

तब कद्रू ने अपने नाग पुत्रों से कहा कि वो अपना आकार छोटा करके घोड़े की पूंछ से लिपट जाएं। ताकि घोड़े की पूंछ काली नजर आए और वह शर्त जीत ले। उस समय कुछ नाग पुत्रों ने ऐसा करने से मना कर दिया।

कद्रू ने अपने ही पुत्रों को श्राप दे दिया। दरअसल श्राप यह था कि तुम राजा जनमेजय के यज्ञ में भस्म हो जाओगे। शाप सुनकर नाग पुत्र सफेद घोड़े की पूंछ पर चढ़ गए जैसा कि उनकी माँ ने कहा था और घोड़े की पूंछ काली हो गई।

शर्त हारने के बाद विनता कद्रू की दासी बन गई। जब विनता के बेटे गरुड़ को पता चला कि उसकी माँ गुलाम बन गई है तो उन्होंने कद्रू और उनके नाग पुत्रों से पूछा कि तुम्हें मैं ऐसी कौन सी वस्तु लाकर दूं, जिससे कि मेरी माता तुम्हारे दासत्व से मुक्त हो जाएं।

तब नाग पुत्रों ने कहा कि अगर तुम हमें स्वर्ग से अमृत लाकर दोगे तो तुम्हारी माता अवश्य ही हमारी माता के दासत्व से मुक्त हो जाएंगी।

अब नागपुत्रों के कहेनुसार गरुड़ स्वर्ग से अमृत का कलश ले आए और उसे कुशा यानि कि एक प्रकार की धारदार घास पर रख दिया।

इसके बाद उन्होंने सभी सर्पों को अमृत पीने से पहले स्नान करने को कहा। गरुड़ के कहेनुसार, सभी सांप स्नान के लिए गए लेकिन इसी बीच देवराज इंद्र वहां आए और फिर से अमृत कलश लेकर स्वर्ग चले गए।

जब सभी सांप स्नान करने के बाद आए तो उन्होंने देखा कि कुश पर कोई अमृत पात्र नहीं था। सांप फिर उस घास को चाटने लगे जिस पर अमृत रखा था।

दरअसल उन्हें लगा कि इस जगह पर अमृत का थोड़ा अंश तो अवश्य गिरा होगा। हालांकि ऐसा करने से उन्हें अमृत की प्राप्ति तो नहीं हुई लेकिन घास की वजह ही उनकी जीभ के दो टुकड़े अवश्य हो गए।

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