जानिए सर्दी में रेल की पटरी पर क्यों लगाया जाता है डेटोनेटर?

आपने अक्सर सर्दी के मौसम में देखा होगा कि रेल की पटरी पर कहीं-कहीं बटन के जैसी कोई चीज लगी होती है, इसे ‘डेटोनेटर‘ कहते हैं। दरअसल जब भी सर्दी का मौसम आता है तो सर्दी के साथ कोहरे का आगमन भी हो जाता है।

कोहरे के साथ ही ट्रेन के लेट होने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। इस मौसम में रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर का इस्तेमाल भी शुरू हो जाता है, जिससे लोको पायलट को काफी मदद मिलती है। आज हम इस पोस्ट में जानेगें डेटोनेटर क्या होते हैं और इसका क्या इस्तेमाल होता है, तो आइए जानते हैं :-

why detonators are installed on railway tracks in winter

क्या होते हैं डेटोनेटर?

डेटोनेटर एक तरह के विस्फोटक होते हैं और इन्हें ट्रेन के लिए इस्तेमाल होने वाली माइंस भी कहा जाता है। यह एक छोटे बटन की तरह होते हैं और जैसे ही उस पर से ट्रेन गुजरती है तो यह जोर से आवाज़ करते हैं। एक तरह से इनमें विस्फोट होता है, लेकिन सिर्फ आवाज़ ही होती है।

अब सवाल यह है कि आखिर रेलवे इन विस्फोटक का इस्तेमाल क्यों करती है और क्या इससे ट्रेन को कोई नुकसान नहीं होता? इसका जवाब ये है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल करता है और यह दुर्घटना से बचने के लिए या फिर कोहरे आदि में इस्तेमाल किया जाता है।

कैसे होता है उपयोग

जैसे ही रेलवे कर्मचारियों को रेलवे ट्रैक में कुछ खराबी का पता चलता है और ट्रेन को रोकना जरूरी हो जाता है, ऐसे में डेटोनेटर का उपयोग किया जाता है और खराब ट्रैक से कुछ मीटर पहले ही इसे लगा दिया जाता है।

ये डेटोनेटर्स माइंस की तरह काम करते हैं और जैसे ही ट्रेन का पहिया इससे गुजरता है तो आवाज़ होती है, जैसे माइंस में ब्लास्ट होता है।

इस आवाज को सुनकर ट्रेन का ड्राइवर समझ जाता है कि आगे कुछ खतरा है और ट्रेन के ब्रेक लगा देता है। इस स्थिति में एक के बाद दो-तीन डेटोनेटर्स लगाए जाते हैं, जिससे लोको पायलट पहले से सतर्क हो जाता है और ट्रेन की स्पीड को कम कर देता है। इस तरह खराब टैक से पहले गाड़ी रोक दी जाती है। आम स्थिति में इसे 600 मीटर पहले ही लगा दिया जाता है।

जब ज़्यादा कोहरा होता है तब भी इसका उपयोग किया जाता है। क्योंकि ज्यादा कोहरे में लोकोपायलट को बोर्ड आदि देखने में दिक्कत होती है। ऐसी स्थिति में जब भी कोई स्टेशन आता है तो इससे पहले ये डेटोनेटर्स लगा दिए जाते हैं।

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जानिए सूखे मेवों के चमत्कारी फायदों बारे में !!

मेवा या ख़ुश्क मेवा एक खाद्य श्रेणी है जिसमें सूखे हुए फल और फलों की गिरियां आती हैं। ड्राई फ्रूट किसी एक फल का नही होता बल्कि ऐसे कई सारे फल हैं जिनको हम सूखे मेवों के रूप में खाते हैं जिनमें काजू, बादाम, पिस्ता आदि प्रमुख हैं।

सूखे मेवों में विटामिन, प्रोटीन फाइबर, फाइटो न्यूट्रियंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट और बहुत से जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। आज के इस लेख में हम जानेगें सूखे मेवों के चमत्कारी फायदों के बारे में

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पिस्ता

पिस्ता हमारे लिए बहुत फायदेमंद होता है। पिस्ता के बीज पोषक तत्वों और फाइबर आहार का स्रोत होते हैं। इन छोटे मेवों में कई विटामिन, खनिज, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और जरूरी फैटी एसिड होते हैं।

अन्य सूखे मेवों की तुलना में पिस्ता में फैट और कैलोरी की मात्रा कम होती है। पिस्ता में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है। फाइबर से हमें लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास होता है।

इस वजह से हम अधिक नहीं खा पाते और कम खाने की आदत से हमारा वजन नियंत्रित रहता है। पिस्ता वजन को नियंत्रित रखता है। इससे कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुडी परेशानियों से बचा जा सकता है।

बादाम

बादाम को भिगो कर खाने से दिमाग तेज होता है। इससे दांत और हड्डियों को ताकत मिलती है। भीगे हुए बादाम खाने से इसें मौजूद विटामिन ई एक एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर काम करता है।

बादाम में मौजूद यह तत्व उम्र और सूजन को रोकता है जो कि फ्री रेडिकल से होता है। सूखे हुए बादाम के मुकाबले भिगे हुए बादाम एंजाइम रिलीज करने में मदद करते हैं, जो कि पाचन प्रकिया के लिए अच्छे होते हैं।

बादाम सबसे हेल्दी मिड-मील स्नैक्स होते हैं। बादाम के अंदर मोनोसैचुरेटेड फैट्स मौजूद होते हैं जो कि भूख पर रोक लगाते हैं और भर हुआ रखते हैं। इसके साथ आप वजन बढ़ने पर भी रोक लगा सकते हैं।

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काजू

काजू, दुनियाभर में सबसे लोकप्रिय सूखे मेवे में से एक है। काजू में प्रोटीन, खनिज, आयरन, फाइबर, फोलेट, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम, एंटी-ऑक्सीडेंट, मिनरल और विटामिन के गुण पाए जाते हैं, जो सेहत को कई तरह की परेशानियों से बचाने में मददगार हैं।

काजू को डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। काजू में पॉलीफेनोल्स और कैरोटेनॉयड्स नामक एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए कई मामलों में बेहद फायदेमंद होते हैं।

अखरोट

फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर अखरोट यानी वॉलनट सिर्फ ब्रेन हेल्थ और मेमोरी के लिए ही नहीं बल्कि हमारी संपू्र्ण हेल्थ के लिए लाभकारी है। अपने गुणों की बदौलत इसे विटामिन्स का राजा कहा जाता है।

आप अगर अखरोट को भिगोकर खाते हैं तो यह और भी अधिक फायदेमंद होता है अखरोट का सेवन हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है।

जो ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और आपके हार्ट को स्वस्थ रखता है। अखरोट मधुमेह, मोटापा और दिल की बीमारियों को दूर करता है। नींद न आने की परेशानी है तो रोजाना अखरोट का सेवन जरूर करें।

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जानिए क्या है पोंगल का महत्व और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य!!

पोंगल दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय त्यौहार है, जिसे 14 से 17 जनवरी के बीच मनाया जाता है। लोहड़ी की तरह इसे भी किसानों द्वारा फसल के पक जाने की खुशी में मनाया किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि ये त्यौहार संपन्नता को समर्पित है। कहते हैं कि इस त्यौहार का इतिहास 1000 साल से भी पुराना है। आज इस पोस्ट में हम आपको इस त्यौहार के महत्व और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलए जानते है :-

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पोंगल का महत्व

जहां उत्तर भारत में लोहड़ी और मकर संक्रांति का महत्व है उसी तरह दक्षिण भारत में पोंगल का एक अलग ही महत्व है। कहा जाता है कि इसे दक्षिण भारत में नए साल के रूप भी मनाया किया जाता है।

क्योंकि खेती-बाड़ी करने वाले किसाने के लिए गाय-बैलों का भी बड़ा महत्व है, इसलिए पोंगल के त्यौहार पर इनकी भी पूजा की जाती है। किसान इस दिन अपनी बैलों को स्नान कराकर उन्हें सजाते हैं।

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कैसे मनाया जाता है यह त्यौहार?

चार दिन तक चलने वाले इस त्यौहार को तमिलनाडु में नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्यौहार तमिल महीने ‘तइ’ की पहली तारीख पहली तारीख से शुरू होता है। इस त्यौहार में  इंद्र देव और सूर्य की उपासना की जाती है।

पोंगल का त्यौहार संपन्नता को समर्पित है। इसके पहले दिन लोग सुबह उठकर स्नान करके नए कपड़े पहनते हैं और नए बर्तन में दूध, चावल, काजू और गुड़ की चीजों से पोंगल नाम का भोजन बनाते हैं।

सूर्य को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद को “पगल” कहते हैं पूजा के बाद लोग एक दूसरे को पोंगल की बधाई देते हैं।

भोगी पंडिगाई – पहला दिन

इस त्यौहार के पहले दिन को भोगी पंडिगाई कहते हैं। इस दिन घरों की साफ-सफाई की जाती है और जो चीजें पुरानी या टूटी-फूटी होती है उसे बाहर कर दिया जाता है। फिर इसके बाद घरों सजाया जाता है।

आंगन और घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाई जाती है। इस दिन रात के समय घर के सभी सदस्य अलाव जलाकर एकत्रित होते हैं और रातभर भोगी कोट्टम बजाते हैं जो एक तरह का ढोल होता है। इसमें भगवान का आभार व्यक्त किया जाता है।

थाई पोंगल – दूसरा दिन

इस त्यौहार का दूसरा दिन ही सबसे खास माना जाता है। इस दिन मिट्टी के नए बर्तन में नई फसल से पैदा होने वाले चावल को दूध, गुड़ और मेवे के साथ मिलाकर खीर तैयार करते हैं। फिर इसे सूर्य भगवान को भोग के रूप में अर्पण किया जाता है। जिसे बाद में प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

मट्टू पोंगल – तीसरा दिन

इसके तीसरे दिन खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले गाय और बैलों को स्नान कराकर सजाया और संवारा जाता है। रंग बिरंगे फूल और मालाओं से बैलों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है। तमिल मान्यताओं के मुताबिक मट्टू भगवान शिव की सवारी है।

कानुम पोंगल – चौथा दिन

कानुम पोंगल का आखिरी दिन होता है। इस दिन पर घर को आम और नारियल के पत्तों से घर पर तोरण बनाया जाता है। महिलाएं रंगोली बनाती हैं और नए-नए कपड़े पहनकर एक दूसरे को पोंगल की शुभकामनाएं देती हैं।

ये है दुनिया भर की 20 रचनात्मक मूर्तियां, जिन्हें देखकर आप अपने दाँतों तले उँगलियाँ दबा लेंगें !!

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ख़ूबसूरती के मामले में दुनिया में इतनी चीज़े है कि हमारा जीवन कम पड़ जाएगा पर ये लिस्ट ख़तम नहीं होगी। अब इसमें से बहुत सी जगह कुदरती है और कुछ इंसानों द्वारा निर्मित की गयी है। आज हम इस लेख में आपको दिखाने जा रहे हैं दुनिया की ऐसी 20 रचनात्मक मूर्तियां, जो क्रीएटिविटी और बौद्धिक क्षमता का अनूठा नमूना है।

तो चलिए देखते हैं :-

1) सैल्मन स्कल्पचर, पोर्टलैंड, ओरेगन, यूएसए

यह एक ओरेगोनियन मूर्तिकार कीथ जेलम (Keith Jellum) द्वारा निर्मित की गई है।

2) एक्सपेंशन, न्यूयॉर्क, यूएसए

इस मूर्ति को पेज ब्रेडले (Paige Bradley) द्वारा चित्रित किया गया है।

3) शार्क, ऑक्सफोर्ड, यूके

इसे मूर्तिकार जॉन बकली (John Buckley) द्वारा डिजाइन किया गया था।

4) द अननोन ऑफिसियल , रेकजाविक, आइसलैंड

इस अद्वितीय प्रतिमा का निर्माण 1994 में Magnús Tómasson द्वारा किया गया था।

5) केल्पी, ग्रेंजमाउथ, यूके

इसका निर्माण मूर्तिकार एंडी स्कॉट (Andy Scott) द्वारा किया गया है।

6) मैन हैंगिंग आउट, प्राग, चेक रिपब्लिक

इसे मूर्तिकार David Černý द्वारा निर्मित किया गया है।

7) हिप्पो मूर्तियां, ताइपे, ताइवान

इसे बोरेडपांडा (Boredpanda) द्वारा बनाया गया है ।

8) लाइफ साइज स्टैटूज़ पोर्ट्रे सीन फ्रॉम द वर्ल्ड वॉर, इसाबात, तुर्की

9) मैन एट वर्क, ब्रातिस्लावा, स्लोवाकिया

इस का निर्माण Viktor Hulík ने किया है।

10) इगुआना पार्क, एम्स्टर्डम, नीदरलैंड्स

इन प्रतिमाओं को हंस वैन हाउवेलिंगन (Hans van Houvelingen) द्वारा बनाया है।

11) स्पाइडर, टेट मॉडर्न, लंदन, यूके

इस कलाकृति का निर्माण 1994 में अमेरिकी कलाकार लुईस बुर्जुआ ( Louise Bourgeois) द्वारा बनाई गई थी जोकि 9 मीटर ऊँची है।

12) लेस वोयाजर्स, मार्सिले, फ्रांस

इस मूर्ति को फ्रांसीसी कलाकार ब्रूनो कैटलानो (Bruno Catalano) बनया है।

13) डी वार्तकापोएन, ब्रुसेल्स, बेल्जियम

1985 में बेल्जियम के कलाकार टॉम फ्रैंटजेन (Tom Frantzen) द्वारा बनाई गई थी।

14) द नॉटेड गन, टर्टल बे, न्यूयॉर्क, यूएसए

इस का निर्माण कार्ल फ्रेड्रिक रॉयटर्सवार्ड और रिंगो स्टार (Carl Fredrik Reuterswärd and Ringo Starr) द्वारा किया गया है

15) कैटल ड्राइव, डलास, टेक्सास, यूएसए

इसे रॉबर्ट समर्स (Robert Summers) द्वारा बनाया गया था।

16) रुंडल मॉल पिग्स, एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया

इसे दक्षिण अफ्रीका में जन्मे कलाकार मार्गुराइट डेरिकोर्ट (Marguerite Derricourt) द्वारा बनाया गया था

17) ब्लैक घोस्ट, क्लेपेडा, लिथुआनियाई

कांस्य की मूर्ति सवाजुनास जर्कस और सर्गेजस प्लॉटनिकोवा (Svajunas Jurkus and Sergejus Plotnikovas) द्वारा बनाई गई है।

18) ब्रेक थ्रू फ्रॉम योर मोल्ड, फिलाडेल्फिया, पेनसिल्वेनिया, यूएसए

इस प्रतिमा का निर्माण ज़ेनोस फ्रूडाकिस (Zenos फ्रूडकीस) ने किया था ।

19) द मौनमेंट ऑफ़ एन एनोनिमस पस्सर्बी, व्रोकला, पोलैंड

इसे जेरजी कलीना (Jerzy Kalina) द्वारा बनाया गया है।

20) पीपल ऑफ़ द रिवर, सिंगापुर

इसका निर्माण चोंग फाह चोंग (Chong Fah Cheong) द्वारा किया गया है

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जानिए पढ़ाई को मज़ेदार बनाने के कुछ टिप्स!!

पढ़ाई करते समय अक्सर ऐसा होता है कि पढ़े हुए शब्द याद नहीं रहते या फिर हम पढ़ाई से बोर होने लगते हैं जिससे पढ़ाई से मन ऊब जाता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहें हैं कि आखिर कैसे हम पढ़ाई को मज़ेदार बना सकते हैं, चलिए जानते हैं:-

स्टडी करते समय म्युजिक सुनिए

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जब भी बच्चे स्टडी शुरू करते हैं तो जल्दी ही उनका माइंड अपनी स्टडीज़ में कंसन्ट्रेट नहीं कर पाता है। ऐसे में आप पढ़ते समय अपना मनपसंद म्यूजिक सुन सकते हैं।

ऐसा करने पर आपका कंसंट्रेशन लेवल काफी बढ़ सकता है। यदि आपको लगता है कि म्युजिक सुनने से आपका ध्यान भटकता है, तो ब्रेक के समय में म्युजिक सुनें।

अपने पास स्नैक्स रखें

पढ़ाई के दौरान स्नैक्स खाने से आपका मोटीवेशन बढ़ता है और आपके अंदर ऊर्जा भी बनी रहती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि स्नैक्स हेल्दी हों।

ये कुछ टिप्स हैं जो स्टडी को रोचक बना सकते हैं

  • आप ग्रुप में या पार्टनर के साथ बैठकर स्टडी कर सकते हैं।
  • नए शब्दों को समझने और उन्हें दिमाद में बनाए रखने के लिए स्क्रैबल खेलें।
  • लिखने या हाईलाइट करने के लिए कलरफुल स्टेशनरी का इस्तेमाल करें।
  • पढ़ाई के लिए एक अलग जगह खोजें।
  • डिफरेंट कॉन्सेप्ट सीखने के लिए वीडियो देखें।
  • एक नए आइडिया या कॉन्सेप्ट को समझकर खुद को एक्सप्लेन करें और सुनें।
  • 30 से 45 मिनट के छोटे-छोटे टाइम स्लॉट में पढ़ाई करें।
  • नए कॉन्सेप्ट को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर देखें और जहां संभव हो उन्हें अप्लाई करें।
  • कोई सब्जेक्ट बोरिंग लगने लगे तो दूसरे सब्जेक्ट पर स्विच करें और ब्रेक के बाद वापस उस टॉपिक पर आएं।
  • खुद को याद दिलाते रहें कि आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना है।

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जानिए किसने उड़ाई सबसे पहली पतंग!!

मकर संक्रांति पर भारत में पतंग उड़ाने का रिवाज है। कहीं-कहीं सामूहिक पतंग उत्सव आयोजित किए जाते हैं तो कहीं लोग अपने घरों की छतों पर ही पतंग उड़ाना पसंद करते हैं।

आसमान रंग-बिरंगी खूबसूरत पतंगों से भर जाता है। भारत में प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव भी मनाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली बार पतंग आई कहाँ से?

वैसे तो पतंगों की उत्पत्ति या इतिहास के बारे में अधिक लिखित जानकारी नहीं है। माना जाता है पतंग उड़ाने के सबसे पहले लिखे गए लेख चीनी हान राजवंश के सेनापति हान हसिन से संबंधित थे।

हालांकि, इसके आविष्कार को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। यह भी कहते हैं कि सबसे पहले इसका आविष्कार चीन में किया गया था और पूर्वी चीन के प्रांत शानडोंग को पतंग का घर कहा जाता है।

एक पौराणिक कथा से पता चलता है कि एक चीनी किसान अपनी टोपी को हवा में उड़ने से बचाने के लिए उसे एक रस्सी से बांध कर रखता था और इसी दौरान किसी तरह से पतंगें बना कर उड़ाने की शुरूआत हुई।

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रेशम के कपड़े से बनती थी पतंग

एक और मान्यता के अनुसार 5वीं सदी ईसा पूर्व में चीनी दार्शनिक मोझी और लू बान (गोंगशु बान) ने इसका आविष्कार किया था। तब पतंगों को बनाने के लिए बांस तथा रेशम के कपड़े का इस्तेमाल किया जाता था।

प्राचीन और मध्ययुगीन चीनी स्रोतों में वर्णित है कि पतंगों को दूरी मापने, हवा का परीक्षण, सिग्नल भेजने और सैन्य अभियानों में संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

सबसे पहली चीनी पतंग फ्लैट यानी चपटी और आयताकार हुआ करती थी। फिर बाद में पतंगों को कई रूपों तथा आकारों में तैयार करने तथा तरह-तरह से सजाया जाने लगा था और कुछ में तो सीटी को भी लगाया जाता था ताकि उड़ते वक्त संगीत सुनाई दे।

भारत में कब आई पतंग

ज्यादातर लोगों का मानना है कि चीनी यात्री फा हियान और स्यून त्सांग पतंग भारत में लाए। यह कागज और बांस के ढांचे से बनी होती थी। लगभग सभी पतंगों का आकार एक जैसा ही होता था। आज पतंग उड़ाना भारत में काफी लोकप्रिय है।

बड़े और बच्चे समान रूप से इसे पसंद करते हैं। देश के विभिन्न भागों में तो कुछ विशेष त्यौहार एवं वर्ष के कुछ महीनों में पतंगबाजी या काइट उड़ाने की प्रतियोगिता में भी लोग हिस्सा लेते हैं।

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भारत के प्रसिद्ध पतंग उत्सव

गुजरात : गुजरात का काइट उत्सव विश्व प्रसिद्ध है। मकर संक्रांति को इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग घर की छतों पर तरह-तरह के आकार की पतंगें उड़ाते हैं।

जनवरी में ही हर साल वहां अंतर्राष्ट्रीय काइट फेस्टिवल का आयोजन भी होता है। इसे देखने के लिए जापान, मलेशिया, सिंगापुर, रूस आदि जगहों से बड़ी संख्या में पर्यटक भी आते हैं।

जयपुर : जयपुर में काइट उत्सव को बड़े जश्न से मनाया जाता है। यह महोत्सव मकर संक्रांति से शुरू होता है जो आगामी 3 दिन तक चलता है। जयपुर के पोलो ग्राऊंड में दुनियाभर के सबसे अच्छे पतंगबाज बारी-बारी पतंगों को उड़ाकर आपना कौशल प्रदर्शित करते हैं।

तेलंगाना : तेलंगाना में भी पतंग महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है। जनवरी में आयोजित इस पतंग महोत्सव में 40 से अधिक देशों के लोग हिस्सा लेते हैं।

साथ ही यहां पर खाने-पीने के स्टॉल और प्रदर्शनियां भी लगती हैं। इस आयोजन में एक से बढ़कर एक आकृति की पतंग से आसमान अद्भुत दिखने लगता है।

पंजाब : पंजाब में काइट फैस्टिवल वसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है और इस दिन सभी लोग एक से बढ़कर एक रंगीन पतंग उड़ाते हैं और पेंच भी लड़ाते हैं।

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माउन्ट एवरेस्ट से भी कहीं ऊँचा है ये समुद्री पर्वत!!

धरती पर आज भी 70 प्रतिशत से अधिक जल है। धरती के मात्र 20 से 25 प्रतिशत हिस्से पर मानव आबादी रहती है उसमें भी अधिकतर पर जंगल, रेगिस्तान, पर्वत और नदियां हैं।

इस 20 से 25 प्रतिशत हिस्से पर पर एवरेस्ट पर्वत को दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता है। ऐसे में समुद्र के 70 से 75 प्रतिशत हिस्सों में तो एवरेस्ट से भी ऊंचे ऊंचे पर्वत विद्यामान है।

पृथ्वी पर पाए जाने वाले पर्वतीय श्रृंखलाओं में से एक है 70 हजार किलोमीटर लंबे समुद्र के भीतर का पर्वतनुमा क्षेत्र। समूचे समुद्र में ऐसे करीब 1 लाख बड़े पर्वतनुमा क्षेत्र हैं।

धरती पर सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट है, जो नेपाल-भारत-तिब्बत सीमा पर है और इसकी चोटी समुद्र तल (लेवल) से 8,850 मीटर ऊंची है। लेकिन समुद्र के भीतर इससे भी ऊंचा एक पर्वत है जिसे ‘मौना कीआ माउंटेन‘ कहते हैं।

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मौना किआ पर्वत

मौना कीआ माउंटेन हवाई (संयुक्त राज्य अमेरिका) के नजदीक प्रशांत महासागर का एक हिस्सा है। वास्तव में यह माउंटेन एक विशाल द्वीप है जिसका आधार समुद्र के तल से बहुत नीचे है।

समुद्र के पानी की सतह से इसकी ऊंचाई लगभग 4207 मीटर है, लेकिन समुद्र के तल से इसकी कुल ऊंचाई करीब 10,211 मीटर है यानी इस पहाड़ का आधे से ज्यादा हिस्सा समुद्र के पानी के अंदर है।

यदि समुद्र के अंदर से इसकी ऊंचाई मापी जाए तो यह विश्व का सबसे ऊंचा पर्वत होगा। यदि हम फीट की बात करें तो माउंट एवरेस्ट 29035 फीट ऊंचा है जबकि मौना कीआ 32808 फीट ऊंचा है।

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समुद्र के अंदर पहाड़

जिस तरह पृथ्वी की अंदरूनी हलचल से पहाड़ों का जन्म होता है, वैसे ही समुद्र तल की हलचल से समुद्र के अंदर पहाड़ों का जन्म होता है। समुद्र तल में फटने वाले ज्वालामुखियों से भी पहाड़ बन जाते हैं। इन पहाड़ों की ऊंचाई 1 से 3 किलोमीटर हो सकती है

इनमें ज्यादातर माउंटेन पानी के अंदर ही डूबे होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ पानी के ऊपर भी आ गए हैं। समुद्र के पानी से ऊपर उठे हुए चपटे पहाड़ों को ही द्वीप (Island) कहा जाता है। हवाई द्वीप समूह का जन्म ऐसे ही हुआ।

सागर के अंदर बहुत से पहाड़ हैं। मध्य सागर के मध्य में स्थित पर्वत श्रृंखला संसार में सबसे बड़ी श्रृंखला है। इसकी लंबाई लगभग 64,000 किमी (40 हजार मील) है। प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के उत्तरी-पूर्वी भाग में भी बहुत से पर्वत हैं। इनमें अधिकांश पर्वत तो पानी में डूबे हुए हैं।

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जानिए महत्व “मकर सक्रांति” का!!

14 जनवरी, शुक्रवार को “मकर संक्रांति” के दिन पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। 14 जनवरी को सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 2.29 बजे होगा। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में लगभग 1 माह के लिए आते हैं।

इस बार “मकर संक्रांति” की शुरूआत रोहणी नक्षत्र में हो रही है जो शाम 8.18 मिनट तक रहेगी। इस नक्षत्र को शुभ नक्षत्र माना जाता है। इसमें नान-दान और पूजन करना शुभ फलदायी होता है। इसके साथ ही इस दिन ब्रह्म योग और आनंदादि योग का निर्माण हो रहा है। इसे भी अनंत फलदायी माना जाता है।

मकर संक्रांति के दिन से शुभ कार्यों, जैसे विवाह संस्कार, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कार्य आरंभ हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति से ही सूर्य देवता का दिन 6 माह के लिए आरम्भ हो जाता है। सूर्य के उत्तरायण की अवस्था को देवताओं का दिन कहा जाता है।

मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। वर्ष में 12 संक्रांतियां पड़ती हैं परंतु इनमें से मकर संक्रांति का विशेष महत्व है।

इस दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ उत्तरायण होना शुरू हो जाता है इसीलिए इस दिन को उत्तरायण भी कहते हैं। इस दिन से देश में दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं तथा शीत ऋतु का प्रभाव कम होने लगता है।

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मकर संक्रांति का खगोलीय तथ्य

नवग्रहों में सूर्य ही एकमात्र ग्रह है जिसके आस-पास सभी ग्रह घूमते हैं। यही प्रकाश देने वाला पुंज है जो धरती पर जीवन प्रदान करता है। प्रति वर्ष 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जिसे सामान्य भाषा में मकर संक्रांति कहते हैं।

यह एक खगोलीय घटना है जब सूर्य हर वर्ष धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है और हर बार यह समय लगभग 20 मिनट बढ़ जाता है। अतः 72 साल बाद एक दिन का अंतर पड़ जाता है।

15वीं शताब्दी के आसपास यह संक्रांति 10 जनवरी के आसपास पड़ती थी और अब यह 14 व 15 जनवरी को होने लगी है। लगभग 150 वर्ष के बाद 14 जनवरी की डेट आगे पीछे हो जाती है।

सन् 1863 में मकर संक्रांति 12 जनवरी को पड़ी थी। 2012 में सूर्य मकर राशि में 15 जनवरी को आया था। 2018 में 14 जनवरी और 2019 तथा 2020 में यह 15 जनवरी को पड़ी थी। गणना यह है कि 5000 वर्ष बाद मकर संक्रांति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनानी पड़ेगी।

जितने समय में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चकर लगाती है, उस अवधि को सौर वर्ष कहते हैं। धरती का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना ‘क्रांति चक्र‘ कहलाता है। इस परिधि को 12 भागों में बांटकर 12 राशियां बनी हैं।

पृथ्वी का एक राशि से दूसरी में जाना ‘संक्रांति‘ कहलाता है। यह एक खगोलीय घटना है जो साल में 12 बार होती है। सूर्य एक स्थान पर ही खड़ा है, धरती चकर लगाती है। अतः जब पृथ्वी मकर राशि में प्रवेश करती है तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं।

पौराणिक महत्व

आज के दिन का पौराणिक महत्व भी खूब है। सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने असुरों का संहार भी इसी दिन किया था। महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह ने भी प्राण त्यागने के लिए इस समय अर्थात सूर्य के उत्तरायण होने तक प्रतीक्षा की थी।

यशोदा जी ने इसी संक्रांति पर श्री कृष्ण को पुत्र रूप में प्राप्त करने का व्रत लिया था। इसके अलावा यही वह ऐतिहासिक एवं पौराणिक दिवस है जब गंगा नदी, भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगासागर तक पहुंची थीं।

इस दिन पवित्र नदियाँ एवं तीर्थों में स्नान, दान, देव कार्य एवं मंगलकार्य करने से विशेष लाभ होता है। सूर्योदय के बाद खिचड़ी आदि बनाकर तिल के गुड़ वाले लड्डू प्रथम सूर्यनारायण को अर्पित करने चाहिएं, बाद में दानादि करना चाहिए। अपने नानेके जल में तिल डलने चाहिएं।

इस दिन ओम नमो भगवते सूर्याय नमः या ओम सूर्याय नमः मंत्रों का जाप करें। माघ माहात्म्य का पाठ भी कल्याणकारी है। सूर्य उपासना कल्याणकारी होती है।

सूर्य ज्योतिष में हड्डियों के कारक भी हैं अत: जिन्हें जोड़ों के दर्द सताते हैं या बार बार दुर्घटनाओं में फ्रैक्चर होते हैं उन्हें इस दिन सूर्य को जल अवश्य अर्पित करना चाहिए। पतंग उड़ाने की प्रथा भी इसीलिए बनाई गई ताकि खेल के बहाने, सूर्य की किरणों को शरीर में अधिक ग्रहण किया जा सके।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए नाभि में शहद लगाने के जबरदस्त फायदों के बारे में!!

शहद का इस्तेमाल पुराने समय से ही आयुर्वेदिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है। यह स्वाद से भरा होने के साथ-साथ पौष्टिक तत्वों से भरपूर भी होता है।

एंटी-बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर शहद सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होते हैं। यह स्वाद बढ़ाने के अलवा स्किन और सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में कारगर है।

आज हम इस लेख में आपको बताएंगे नाभि में शहद लगाने के जबरदस्त फायदों के बारे में :-

tremendous benefits of applying honey in the navel

स्किन की ड्राईनेस दूर होगी

स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए नाभि पर शहद लगाएं। इसे लगाने से त्वचा मुलायम और चमकदार बनेगी। इसमें मॉयश्चराइजिंग गुण होते हैं ये स्किन की ड्राईनेस को दूर करता है। मुहांसों की समस्या में इसकी कुछ बूंदें नाभि पर डालें। इससे मुहांसों की प्रॉब्लम दूर होगी।

इंफेक्शन से बचाव

इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। इसका सेवन सर्दी-जुकाम को ठीक करने में भी फायदा मिलता है। नाभि की सफाई सही तरीके से न करने से इंफेक्शन हो सकता है। शहद में मौजूद और एंटी बैक्टीरियल गुण नाभि के इंफेक्शन को ठीक करते हैं।

पेट दर्द से छुटकारा

पेट से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आप इसकी मदद ले सकते हैं। इसके लिए आप अदरक के रस में शहद मिलाकर नाभि में लगाएं, इससे आपका पाचन तंत्र सही तरीके से काम करने लगेगा। इसके अलावा इस प्रयोग से पेट दर्द और मरोड़ की समस्या से भी निजात पाया जा सकता है।

इसका नाभि पर इस्तेमाल रात को सोने से पहले करना बेहतर होता है। लेकिन अगर आप किसी वजह से रात को नाभि पर शहद न लगा सकें।

तो जब भी आप दो-तीन घंटे आराम करें उस समय नाभि पर शहद लगायें। जिससे इसका असर सही तरह से हो सके। इसका इस्तेमाल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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ये वीडियो दिल जीत लेगा आपका, नोरा फतेही के गाने ‘डांस मेरी रानी’ पर विदेशी लड़कों ने किया जबरदस्त डांस!!

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा और नोरा फतेही का गाना ‘डांस मेरी रानी‘ ने खूब धमाल मचा रखा है। इस गाने पर नोरा फतेही का डांस और मूव्स देशवासियों के साथ-साथ विदेशों को भी पसंद आ रहा है।

दो विदेशी लड़कों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे ‘डांस मेरी रानी’ पर डांस करते नजर आ रहे हैं।

इंस्टाग्राम में वायरल वीडियो में ये विदेशी लड़के बिना किसी बीट को मिस किए एकदम परफेक्ट मूव्स के साथ गाने पर डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

 

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गुरु रंधावा ने इस वीडियो को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया हैं। गुरु रंधावा ने इंस्टाग्राम में ये वीडिया शेयर करते हुए कैप्शन लिखा है- When it reaches international market. 💥. इस वीडियो अभी तक  लाखों लाइक्स और कई कमेंट्स मिल चुके हैं।

वहीं एक दूसरा वीडियो नोरा फतेही ने भी शेयर किया है जिसमें भी एक विदेशी लड़का और लड़की ‘डांस मेरी रानी’ गाने पर डांस करते हुए नज़र आ रहे हैं।

 

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