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जानिए मछलियों के अनोखे संसार के बारे में!!

मछलियों का संसार बड़ा विचित्र और रोमांचक होता है। इन्हें जल की रानी या जलपरी भी कहा गया है। पानी में ही जन्म लेने, पलने और विचरण करने वाली इन मछलियों की अनन्त किस्में हैं।

आज इस पोस्ट में हम बात करने जा रहे हैं मछलियों के अनोखे संसार के बारे में, तो चलिए जानते हैं :-

अनेक प्रकार की मछलियां

प्रत्येक वर्ष मछलियों की 200 या 300 नई प्रजातियों की खोज होती है और उनके नाम रखे भी जाते हैं। यह मछलियां विभिन्न प्रकार की होती हैं। इनमें से कुछ मछलियां बहुत छोटी हैं तो वहीं कुछ बहुत बड़ी ।

मछलियों का सुरक्षा कवच

इनके शरीर पर स्केल्स होते हैं, जो एक परत बनाते हैं और इनके लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं। यह मछलियों के लाइफस्टाइल के अनुसार बनते हैं।

उदाहरण के लिए जो मछलियां तटीय स्थानों पर रहती हैं, उनके शरीर पर यह सख्त होता है। जो गहरे पानी में रहती हैं, उनका इतना सख्त कवच नहीं होता। इन स्केल्स पर म्यूकस का कवर भी होता है, जो इनकी त्वचा को चिकनी और सुरक्षित करता है ।

कितना लंबा जीवन

कुछ मछलियों का जीवन बस कुछ हफ्तों का होता है, जबकि कुछ मछलियां 50 साल तक जीती हैं।

कैसे सांस लेती हैं मछलियां

सभी को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मछलियों के पास विशेष अंग (गिल्स) होते हैं जो उनके सिर के दोनों ओर पाए जाते हैं।

वे पानी के अंदर सांस लेने के लिए मुंह को खोलती हैं और गिल्स की तरफ पंप कर देती हैं। इसके बाद यह ग्रुप में उपस्थित मैब्रेन की मदद से पानी में मौजूद ऑक्सीजन को सोख लेती हैं।

इसके बाद गिल्स खुलने से ये पानी बाहर आ जाता है। कुछ मछलियां सांस लेने के लिए बार-बार पानी की सतह पर आती हैं ।

कैसे करती हैं मछलियां आपस में बातचीत

पहले समझा जाता था कि मछलियां बोलना नहीं जानतीं, फिर जब पानी के अंदर आवाज सुनने वाली मशीन का आविष्कार हुआ तब पता चला कि ये कितनी गिटर- पिटर करती हैं।

क्रोकर नामक मछली बिल्कुल कछुए की भांति आवाज निकालती है। कुछ तो विस्फोट जैसी आवाज निकालती हैं। ऐसी आवाज तब निकलती है, जब वे मछुआरे के जाल में फंस जाती हैं।

होता यह है कि उनके पास एक छोटा-सा ‘स्विम ब्लैडर’ होता है। जिसमें गैस भरी होती है ताकि वे आसानी से तैर सकें। और आराम करने के समय वे इस ब्लैडर के आकार को अपने अनुरूप ढाल लेती हैं लेकिन जब वे अचानक मछुआरे के जाल में फंसती हैं, तब उनके पास इतना समय नहीं होता कि वे उस गैस को बाहर कर दें।

जैसे ही वह पानी के बाहर आती हैं, उनका ब्लैडर फट जाता है और विस्फोट-सी आवाज होती है।

रोचक बातें

जैलीफिश, स्टारफिश और ऑक्टोपस मछलियां नहीं हैं। ये इनवर्टिब्रेट्स हैं, यानी इनके पास रीड की हड्डी नहीं होती और न ही ये मछली की प्रजाति में आती हैं।

पंजाब केसरी से साभार……।

यह भी पढ़ें :-

क्या सचमुच मछलियों की बारिश होती है??

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