जानिए अजवाइन के फायदे, नुकसान और उपयोग

अजवाइन एक भारतीय मसाला है। अनेक प्रकार के गणों से भरपुर अजवाइन पाचक, रुचि कारक, तीक्षण, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ तथा कृमि का नाश करने वाली होती है। अजवाइन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जोकि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।

आमतौर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं जैसे अपच, पेट फूलना और पेट के दर्द के लिए एक औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।

इसके बीजों में कार्मिनेटिव, एंटीमाइक्रोबियल और लीवर प्रोटेक्टिव गुण होते हैं। यह रक्तचाप कम करने और ब्रोन्कोडायलेटरी (पदार्थ जो फेफड़ों में वायु प्रवाह को बढ़ाता है) गुणों के लिए भी जाना जाता है।

इस पोस्ट में हम आपको इसके फायदे, नुकसान और उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए शुरू करते हैं:-

गैस और कब्ज

गैस और कब्ज की समस्या किसी को भी हो सकती है। ऐसे में अजवाइन इस समस्या के लिए असरदार साबित हो सकती है। इसमें एंटीस्पास्मोडिक और कार्मिनेटिव गुण पाए जाते हैं, जो गैस के प्रभाव को कम करने के लिए दवाई का काम करती है।

साथ ही, इसमें थाइमोल नामक कंपाउंड भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसका उपयोग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की बीमारियों से राहत पाने के लिए किया जाता है।

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अस्थमा के लिए

अजवाइन का ब्रोन्कोडायलेटिंग प्रभाव फेफड़ों में ब्रोन्कियल नलियों को फैलाता है और हल्के अस्थमा के मामले में राहत देता है। यह बढ़े हुए कफ को संतुलित करता है।

अजवाइन बलगम को आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और अस्थमा को काफी हद तक ठीक करने में मदद करता है।

किडनी स्टोन के लिए

अजवाइन में एंटीलिथियाटिक गुण होते हैं और यह किडनी स्टोन बनने के जोखिम को कम करता है। एक अध्ययन में कहा गया है कि अजवाइन के बीजों में मौजूद एंटीलिथियाटिक प्रोटीन कैल्शियम ऑक्सालेट और कैल्शियम फॉस्फेट दोनों को जमा होने से रोकता है और किडनी में पथरी बनने से रोकता है।

सर्दी, फ्लू और वायरल इन्फेक्शन

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मेसी एंड लाइफ साइंस द्वारा किए गए एक वैज्ञानिक रिसर्च में पाया गया है कि अजवाइन के बीज में लगभग 50% थाइमोल मौजूद होता है, जिसे मुख्य तौर पर एंटीबैक्टीरिया के रूप में जाना जाता है।

इसके अलावा, थाइम शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को भी बढ़ाने का काम कर सकता है, जिससे जुकाम, फ्लू और अन्य वायरल इन्फेक्शन को दूर रखा जा सकता है।

वजन कम करने में सहायक

भुनी हुई अजवाइन खाने के फायदे शरीर के वजन को कम करने के लिए हो सकते हैं। एक शोध के अनुसार, अजवाइन को भूख को शांत रखने और मोटापे को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे वजन कम होता है।

नुकसान

वैसे तो अजवाइन खाने के फायदे कई होते हैं, लेकिन कई बार अजवाइन खाने के नुकसान भी हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • गर्भवती महिलाओं को ज्यादा मात्रा में अजवाइन का सेवन नहीं करना चाहिए, इसकी तासीर गर्म होती है। इसकी वजह से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिसके कारण स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए गर्भवती महिलाओं को जितना हो सके अजवाइन के सेवन को अधिक मात्रा में अवॉयड करना चाहिए।
  • अजवाइन में रक्त को पतला करने का गुण होता है और यह रक्त के थक्के को धीमा कर सकता है। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि अजवाइन या इसके सप्लीमेंट्स के साथ-साथ ब्लड क्लॉटिंग को धीमा करने वाली दवाओं से भी परहेज करें। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे रक्तस्राव की संभावना बढ़ सकती है
  • लीवर की बीमारी के रोगियों को इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए क्योंकि इससे स्थिति और खराब हो सकती है।

उपयोग

  • अजवाइन, सेंधा नमक, सेंचर नमक, हींग और सूखे आंवले को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती है।
  • एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ी अजवाइन और जीरा एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इसमें चीनी मिलाकर पिएं एसिडिटी से राहत मिलेगी।
  • अजवाइन, सोंठ पाऊडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं। भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा।
  • इसके तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है। भुनी हुई इसका मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
  • जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवाइन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान लें। इससे जोड़ों की मालिश करें। इससे दर्द से आराम होगा।

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डायबिटीज :- जानिए लक्षण और उपचार

डायबिटीज एक ऐसा विकार है जिसमें शरीर की ग्लूकोज (शुगर) को ऊर्जा में बदलने की क्षमता प्रभावित होती है। ग्लूकोज ही हमारे शरीर का प्रमुख ईंधन होता है, भोजन का पाचन होने के बाद यह वसा, प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट में बदलता है।

कार्बोहाइड्रेट के पाचन के बाद यह ग्लूकोज में बदलता है और यह तब रक्त में पहुंचता है जहां से इसका इस्तेमाल शरीर की विभिन्न कोशिकाओं द्वारा ऊर्जा के लिए किया जाता है।

इस ग्लूकोज को रक्त से कोशिकाओं में पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण हार्मोन – इंसुलिन की आवश्यकता होती है। इंसुलिन का उत्पादन अग्नाशय (पैंक्रियाज, जो इंसुलिन बनाता है) में मौजूदा बीटा कोशिकाओं द्वारा होता है लेकिन मधुमेह ग्रस्त लोगों में यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

डायबिटीज के लिए बाजार में बहुत सारे उपकरण उपलब्ध हैं। उन्हीं में से एक है ग्लूकोमीटर। यदि आप भी यह ग्लूकोमीटर खरीदना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें। ग्लूकोमीटर घर पर ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह सेकंडों में आपके रक्त शर्करा के स्तर को बता सकता है।

डायबिटीज उस स्थिति में होता है जबकि हमारी पैंक्रियाज में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनता, जो कि टाइप 1 डायबिटीज कहलाता है या जो इंसुलिन बनता भी है वह दोषपूर्ण होता है जो कि ग्लूकोज को कोशिकाओं में पहुंचाने में असमर्थ होता है, इसे टाइप 2 डायबिटीज कहते हैं।

Diabetes symptoms and benefits

टाइप 1 डायबिटीज आमतौर से बच्चों और युवाओं में होती है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकती है।

टाइप 2 डायबिटीज ज्यादा आम है। यह मोटे तौर पर वयस्कों को अपना शिकार बनाती है, हालांकि हाल के वर्षों में देखा गया है कि यह बच्चों को भी अपनी चपेट में लेने लगी है।

अन्य प्रकार की डायबिटीज

LADA (लेटेंट ऑटोइम्यून मधुमेह जो वयस्कों में पाई जाती है),

MODY (मैच्योरिटी ऑसैट डायबिटीज जो युवाओं को प्रभावित करती है) और

GDM (गैस्टेशनल डायबिटीज मेलाइटस)।

लक्षण

धुंधला दिखना, सामान्य से अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब जाना, घाव का देरी से भरना, बिना किसी कारण थकान बनी रहना, तेजी से वजन गिरना, नपुंसकता, हाथों या पंजों का सुन्न पड़ना या उनमें झनझनाहट महसूस करना। इनमें से एक या अधिक लक्षण हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह कर अपने खून की जांच करवानी चाहिए।

उपचार

पोषक तत्वों वाली सेहतमंद और संतुलित खुराक का सेवन करें, नियमित व्यायाम, ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखना तथा डॉक्टर की दी दवाओं का समय से प्रयोग जरूरी है।

डायबिटीज रोगियों के लिए सैल्फ केयर दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए यानी आपको अपनी सेहत की देखभाल की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। हालांकि, आप देखभाल के लिए अन्य लोगों की भी सहायता ले सकते हैं।

जानिए टाइगर स्नेक से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, जिसके डंक से बच पाना है मुश्किल

टाइगर स्नेक दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा और अत्यधिक विषैला सांप है। टाइगर स्नेक का नाम उनकी बाघ जैसी धारियों के नाम पर रखा गया है। हालाँकि, कुछ टाइगर स्नेक में धारियाँ नहीं होती हैं। टाइगर स्नेक दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। ये पानी में भी आसानी से तैर सकते हैं।

जब उन्हें खतरा महसूस होता है, तो वे खुद को जमीन से ऊपर उठा लेते हैं और अपने सिर और गर्दन को लगभग एक कोबरा की तरह चपटा कर लेते हैं।

यह स्नेक आम तौर पर लगभग 1 मीटर लंबे होते हैं लेकिन 1.5 मीटर तक बढ़ सकते हैं। उनका सिर उनकी गर्दन से थोड़ा चौड़ा और अलग होता है। टाइगर स्नेक के शरीर का रंग ग्रे-ब्राउन और काला होता है और इसका निचला भाग हल्का पीला या नारंगी होता है।

खुराक

इसके आहार में खाद्य स्रोतों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होती है। वे मुख्य रूप से मेंढक खाते हैं, लेकिन वे अन्य सरीसृपों (reptiles), पक्षियों, छोटे स्तनधारियों और मछलियों का भी सेवन करते हैं।

आवास

टाइगर स्नेक कई प्रकार के आवासों में पाए जा सकते हैं। ये अक्सर खाड़ियों, नदियों या दलदलों के पास देखे जाते हैं। ये आमतौर पर जमीन पर रहने वाले सांप होते हैं, लेकिन उन्हें छोटे पेड़ों और झाड़ियों पर चढ़ते हुए भी देखा गया है।

यह सांप गर्म रातों में अधिक सक्रिय रहता है। टाइगर स्नेक ठंडे महीनों को बिलों में बिताते हैं। इसके सामान्य आवास में ऑस्ट्रेलिया के तटीय क्षेत्र शामिल हैं।

अगर इनके प्रजनन की बात करें तो टाइगर सांप एक समय में 20 से 30 जीवित बच्चों को जन्म देते हैं। वे आमतौर पर वसंत ऋतु में संभोग करते हैं और गर्मियों में बच्चों को जन्म देते हैं।

टाइगर स्नेक के जहर में शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन, कोगुलेंट, हेमोलिसिन और मायोटॉक्सिन होते हैं। इसके काटने के बाद 30 मिनट से 24 घंटे के अंदर व्यक्ति की मौत हो जाती है।

इसके लक्षणों में पैर और गर्दन में दर्द, झुनझुनी, सुन्नता और पसीना आना शामिल है, इसके बाद सांस लेने में कठिनाई और पक्षाघात (लकवा) की काफी तेजी से शुरुआत होती है।

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सुसाइड प्लांट : जो कर देता है आत्महत्या करने के लिए मजबूर

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दुनिया में एक से बढ़कर एक अजीबोगरीब और खतरनाक चीज़ें हैं। जिनके बारे में सुनकर हम हैरानी में पड़ जाते हैं। हमने अपने कई लेखों के माध्यम से धरती पर मौजूद कई रहस्यमयी व अजीबोगरीब चीज़ों के बारे में आपको बताया है। साथ ही कई रोचक तथ्यों को भी आपके सामने रखा है।

आज की इस पोस्ट में हम आपको एक ऐसे ही अजीबोगरीब पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं जो बेहद खतरनाक हैं, तो चलिए जानते हैं :-

दरअसल हम आज जिस पौधे के बारे में बात करने जा रहे हैं उसे जिमपाई जिमपाई के नाम से जाना जाता है। यह पौधा ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी वर्षावनों में पाया जाता है।

Suicide plant

इसे कई नामों से जाना जाता है, जैसे स्टिंगिंग ब्रश, मलबेरी-लिव्ड स्टिंगर, द सुसाइड प्लांट और मूनलाइटर। यह बिछुआ परिवार ‘उर्टिकेसी’ से संबंध रखता है। इस पौधे का वैज्ञानिक नाम डेंड्रोक्नाइड मोरोइड्स है।

क्यों कहा जाता है “सुसाइड प्लांट”

दिखने में तो यह साधारण पौधे जैसा होता है। लेकिन अगर इसके कांटे इंसान को चुभ जाएं, तो इससे असहनीय दर्द होता है, जो लगातार कुछ घंटों से लेकर 2 दिनों तक भी रह सकता है।

इसका डंक आपको एक ही साथ गर्म एसिड से जलने और बिजली के झटके दे सकता है। कहा जाता है कि यह पौधा लोगों को तड़पाकर खुदकुशी के लिए मजबूर कर देता है और इसलिए इसे ‘सुसाइड प्लांट‘ भी कहते हैं।

इसे भले ही दुनिया के ज़हरीले पौधों की सूची में रखा गया है, लेकिन इसके फल इंसानों के खाने के लिए सुरक्षित है, लेकिन शर्ते है कि कांटें पूरी तरह से हटे हुए हों।

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जानिए बेहद प्यारी नस्ल बुलडॉग के बारे में रोचक तथ्य

बुलडॉग मास्टिफ प्रकार के कुत्तों की एक ब्रिटिश नस्ल है। इसे अंग्रेजी बुलडॉग या ब्रिटिश बुलडॉग के रूप में भी जाना जाता है। बुलडॉग कुत्तों की नस्ल एक बहुत ही प्रसिद्ध और पसंद की जाने वाली प्रजाति है। इस नस्ल के कुत्तों का स्वभाव बहुत ही शांतिपूर्ण होता है। यह आकार में छोटे और बेहद प्यारे होते है।

मुख्य रूप से यह अपने आकार और स्वरुप के वजह से पूरे विश्व में इतने ज्यादा लोकप्रिय हैं एवं पसंद किये जाते हैं। बुलडॉग नस्ल के कुत्ते, इंसानों के साथ बहुत जल्दी घुल मिल जाते हैं।

इसी वजह से ज्यादातर लोग बुलडॉग को पालना पसंद करते हैं। इस लेख में हम जानेंगे इस प्यारी नस्ल से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में, तो चलिए जानते हैं :-

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आकार

इस नस्ल के कुत्ते मध्यम आकार के होते हैं इनके माथे के अगले हिस्से पर खाल की मोटी परत होती है, साथ ही गोल, काली आंखें, तथा गले के नीच लटकती खाल और मुड़े होंठ, छोटे बाल तथा नुकीले दांत होते हैं।

इसका रंग लाल, हल्का पीला, सफ़ेद, ब्रिन्डल (लहरों अथवा पट्टियों के रूप में मिश्रित रंग) तथा इन सभी के साथ चितकबरे रंग में भी पाए जाते हैं।

एक वयस्क नर बुलडॉग का वजन 50 पौंड (23 किलोग्राम) होता है, जबकि वयस्क मादा का वजन लगभग 40 पौंड (18 किलोग्राम) होता है।

भोजन

अन्य किसी भी नस्ल की तरह ही बुलडॉग को एक उच्च गुणवत्ता वाले भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन की मात्रा इसके आकार उम्र पाचन प्रक्रिया और दैनिक गतिविधि पर निर्भर करता है।

बुलडॉग के उचित स्वास्थ्य के लिए सही भोजन का चुनाव बहुत जरुरी होता है। एक सही और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन बुलडॉग के विकास दर को सुनिश्चित करता है तथा उसे सेहतमंद बनाये रखने में सहायक होता है। बुलडॉग को दिन में कम से कम दो से तीन बार भोजन देने की आवश्यकता होती है।

भोजन में पशु चिकित्सक एक बढ़िया डॉग फ़ूड देने की सलाह देते हैं जिसमें की सभी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में उपस्थित होते हैं।

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बुलडॉग स्वास्थ्य

वैसे तो यह एक स्वस्थ्य नस्ल है लेकिन बाकी अन्य नस्लों की तरह ही बुलडॉग भी कुछ बिमारियों से ग्रसित होते हैं सभी बुलडॉग्स में यह बीमारियों देखने को नहीं मिलती है लेकिन इन सभी बिमारियों के प्रति जागरूक रहना बेहद जरुरी होता हैं।

बुलडॉग में हिप डिस्प्लेसिया (hip dysplasia) होने वाली एक ऐसी समस्या है जिसमें कूल्हे की हड्डी प्रभावित होती है जिसके कारण पिछले पैरो में लंगड़ापन जैसी समस्या होती है।

आँखों का सूखापन – यह अधिकांश बुलडॉग्स नस्लों में पाए जाने वाली समस्याओं में से एक है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कि प्राकृतिक रूप से आंसुओ का निर्माण नहीं होता है जिसके परिणाम स्वरुप आँखों में रूखापन, धुंधला दिखना आदि समस्याएँ पैदा होती हैं

बुलडॉग क्लब इस प्रजाति की औसत आयु 8 से 12 वर्ष आंकता हैं, हालांकि ब्रिटेन में किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार यह 6.5 वर्ष मानी गयी है।

सर्वेक्षण में पता चला कि इसकी मृत्यु के प्रमुख कारण ह्रदय सम्बन्धी रोग (20%), कैंसर (18%) तथा अधिक आयु (9%) थे। जिनकी मृत्यु अधिक आयु के कारण हुई, उनकी औसत आयु 10 से 11 वर्ष रही।

कीमत

भारत में बुलडॉग की कीमत 10 हज़ार रुपये से शुरू होकर 60 हज़ार तक है।

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पंडित जवाहर लाल नेहरू के 12 अनमोल विचार

प‍ंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहबाद में हुआ था। वे एक ऐसे कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के थे, जो अपनी प्रशासनिक क्षमताओं तथा विद्वत्ता के लिए विख्यात थे।

जवाहर लाल नेहरू, संसदीय सरकार की स्थापना और विदेशी मामलों में ‘गुटनिरपेक्ष‘ नीतियों के लिए विख्यात हुए। वे आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य – एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र – के वास्तुकार मानें जाते हैं।

कश्मीरी पण्डित समुदाय के साथ उनके मूल की वजह से वे पण्डित नेहरू भी बुलाएँ जाते थे, जबकि भारतीय बच्चे उन्हें चाचा नेहरू के रूप में जानते हैं।

1930 और 1940 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से प‍ंडित जवाहर लाल नेहरू एक थे। जानिए उनके 12 अनमोल विचार …

1 नागरिकता देश की सेवा में होती हैं। 
2 संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है। 
3 लोकतंत्र अच्छा है।  मैं ऐसा इसलिए कहता हूं क्योंकि अन्य प्रणालियां इससे बदतर हैं। 
4 संकट में हर छोटी सी बात का महत्व होता है। 
5  तथ्य, तथ्य हैं और किसी की पसंद से गायब नहीं होते हैं। 
6 विफलता तभी होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं। 
7 एक महान कार्य में लगन और कुशल पूर्वक काम करने पर भी, भले ही उसे तुरंत पहचान न मिले, अंततः सफल जरूर होता है। 
8 लोगों की कला उनके मन का सही दर्पण है। 
9  एक पूंजीवादी समाज की शक्तियों को अगर अनियंत्रित छोड़ दिया जाए, तो वे अमीर को और अमीर तथा गरीब को और गरीब बना देती हैं। 
10 वह व्यक्ति जिसे वो सब मिल जाता है जो वो चाहता था, वह हमेशा शांति और व्यवस्था के पक्ष में होता है। 
11 शांति के बिना अन्य सभी सपने गायब हो जाते हैं और राख में मिल जाते हैं। 
12 आप दीवार के चित्रों को बदल कर इतिहास के तथ्यों को नहीं बदल सकते हैं। 

जानिए पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाल दिवस से जुडी कुछ खास बातें !!!

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 इलाहाबाद के एक धनी परिवार में हुआ था। उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू और माता का नाम स्वरूपरानी था।

पिता पेशे से वकील थे। उनकी 3 पुत्रियां थीं, और जवाहरलाल नेहरू उनके इकलौते पुत्र थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। नेहरू जी को बच्चों से बड़ा स्नेह और लगाव था और वे बच्चों को देश के आने वाली कल का निर्माता मानते थे।

बच्चे उन्हें प्यार से ‘चाचा नेहरू‘ बुलाते थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए महत्त्व पूर्ण योगदान दिया है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की शिक्षा

जवाहरलाल नेहरू को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी। उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की।

हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की और वे बार में बुलाए गए। यही कारण है कि 14 नवंबर का दिन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।  जंहा बच्चों दवारा अनेक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये जाते है।

क्यूँ मनाया जाता है बाल दिवस

हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। CHILDREN’S DAY यानि बाल दिवस लोगों को बच्चों के अधिकार, देखभाल और शिक्षा के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये मनाया जाता है। कहा जाता है कि देश का भविष्य बच्चों पर ही निर्भर करता है।

बच्चे सर्वशक्तिमान द्वारा उनके माता-पिता के लिए भगवान का उपहार हैं। वो निर्दोष, सराहनीय, शुद्ध और हर किसी को प्यारे होते हैं। 14 नवंबर को पंडित जवाहरलाल नेहरु का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

चाचा नेहरु को बच्चों से बहुत प्रेम था। उन्होंने भारत की आजादी के बाद बच्चों के साथ ही युवाओं के भलें के लिए बहुत अच्छे काम किया।

बाल दिवस मनाने के पीछे इरादा

यह हमारे के लिए गर्व की बात है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “चिल्ड्रेन्स डे” मनाने का प्रस्ताव पहली बार भारत के पूर्व रक्षा मंत्री श्री वी.के. कृष्ण मेनन द्वारा दिया गया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा 20 नवम्बर 1959 को अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस (International Children’s Day) मनाने का निश्चय किया गया।

क्यूंकि यह दिन बच्चों, जो किसी भी देश का भविष्य होते हैं, के कल्याण से जुड़ा था।  अतः विश्व के सभी देशों ने इसे ख़ुशी से अपनाया और जल्द ही यह दिवस विश्वस्तर पर मनाया जाने लगा।

बाल दिवस की नींव 1925 में रखी गई थी, जिसके बाद 1953 में दुनिया भर में इसे मान्यता मिली। यह दिन बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी मूल जरूरतों को पूरा करने की याद दिलाता है।

बाल दिवस पर भारत के पहले प्रधामनंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू दवारा कही गई ये 10 बातें

  1. जो व्यक्ति भाग जाता है वह शांत बैठे व्यक्ति की तुलना में अधिक खतरे में पड़ जाता है।
  2. विफलता तभी होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं।
  3. हम वास्तविकता में क्या हैं वो और लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं उससे कहीं अधिक मायने रखता है।
  4. महान विचार और छोटे लोग कभी भी एक साथ नहीं रह सकते।
  5. जिसमें अज्ञानता है वो बदलाव से जरूर डरते हैं।
  6. सत्य हमेशा सत्य ही रहता हैं चाहे आप पसंद करें या ना करें।
  7. देश के लोगों की नागरिकता, देश की सेवा में निहित हैं।
  8. हर हमलावर देश यह दावा करता हैं कि वह अपनी रक्षा के लिए कार्य कर रहा हैं।
  9. संकट के समय हर छोटी चीज मायने रखती है।
  10. कार्य के प्रभावी होने के लिए उसे स्पष्ठ लक्ष्य की तरफ निर्देशित किया जाना चाहिए।

नागोरो – एक ऐसा अजीबोगरीब जापानी गांव जहां चलता है गुड़ियों का राज

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जापान तकनीकी के मामले में अग्रणी देश है। संसाधनों के लिहाज से काफी प्रगति कर चुके जापान में सब कुछ अच्छा है लेकिन इस देश में नागोरो नाम का एक ऐसा गांव है जो वीरान हो चूका है।

आज हम आपको इस पोस्ट में इसी अजीबोगरीब गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां चलता है गुड़ियों का राज, तो चलिए शुरू करते हैं:-

नागोरो या नागोरू, जिसे अब नागोरो गुड़िया गांव के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि इस गांव में पिछले 18 साल में कोई भी बच्चा नहीं जन्मा, वजह है यहां युवाओं की जनसंख्या का करीब-करीब खत्म हो जाना।

इसमें पहले लगभग 300 निवासी थे, लेकिन जापान की जनसंख्या में गिरावट के कारण जनवरी 2015 तक यह घटकर 35, अगस्त 2016 तक 30 और सितंबर 2019 तक 27 हो गई।

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अब गांव पर चलता है ‘गुड़ियों ’ का राज

इस गांव के गली-मोहल्ले से लेकर स्कूलों तक में बच्चों की जगह पुतले और गुड़िया बैठी हुई हैं। इन गुड़ियों को बनाने का काम किया है अयानो सुकिमी नाम की महिला ने।

वे खुद भी नागोरो की रहने वाली हैं। सबसे पहले उन्होंने अपने पिता के कपड़े पहनाकर एक पुतला बनाया था लेकिन ये उन्होंने सिर्फ शौक के लिए बनाया था।

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गांव को गुड़ियों से भरने की पहले तो उनकी कोई योजना नहीं थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस शौक के अपना मिशन बना लिया।

अब गांव में इंसानों से ज्यादा तो पुतले और गुड़िया दिखाई देती हैं। जापानी भाषा में ऐसी आदमकद गुड़िया को “बिजूका” कहते हैं और नागोरो में अब बिजूका का ही राज चलता है।

जब ये गांव आबाद था तो यहां एक स्कूल भी था। जब बच्चे ही नहीं रह गए तो स्कूल भी बंद कर दिया गया। हालांकि लोगों को ये कमी न खले, इसके लिए यहां भी बच्चों की जगह पुतले और गुड़िया बिठाई गई हैं। टीचर की जगह पर भी बिजूका मौजूद है, जो उन्हें पढ़ाती हुई दिखती हैं।

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अयानो सुकिमी ने लकड़ी, अखबार और कपड़ों का इस्तेमाल करके बिजूका बनाई हैं और उन्हें इंसानों की तरह कपड़े पहनाकर प्रॉपर ह्यूमन टच अप दिया है।

जर्मन फिल्म मेकर फ्रिट्ज़ शूमन ने साल 2014 में इस गांव को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी। इसी के बाद इसे गुड़ियों और पुतलों का गांव कहा जाने लगा। अब लोग अक्टूबर के पहले रविवार को यहां खास पुतलों का त्यौहार देखने आते हैं। यह गांव अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।

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चाणक्य नीति : इन 4 बातों को हमेशा रखना चाहिए गुप्त

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चाणक्य नीति के रचयिता आचार्य चाणक्य को उनकी बुद्धिमत्ता और विभिन्न विषयों में प्रवीणता के कारण आज भी सर्वश्रेष्ठ  विद्वान लोगों की श्रेणी में रखा जाता है। चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे कौटिल्य या विष्णुगुप्त नाम से भी विख्यात हैं। पिता श्री चणक के पुत्र होने के कारण वह चाणक्य कहलाए।

वह एक महान राजनीति के महाविद्वान होने के साथ-साथ एक महान अर्थशास्त्री भी थे। वे अपने ‘कुटिल सदुपयोग’ ,जनकल्याण तथा अखंड भारत के निर्माण जैसे सृजनात्मक कार्यो में करने के कारण ‘कौटिल्य‘ कहलाए।

चाणक्य ने कई शास्त्रों की रचना भी की थी जो आज भी मनुष्य के लिए उपयोगी है। आचार्य चाणक्य की नीति को ‘चाणक्य नीति‘ के नाम से जाना जाता है, जिसमें मानव जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं।

यदि जीवन में इन बातों का ध्यान रखा जाए तो कई समस्याओं से बचा जा सकता है और जीवन को सुखमय व्यतीत किया जा सकता है। चाणक्य की नैतिकता में भी कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं, जिन्हें हमें गुप्त रखना चाहिए, तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से कि वे कौन कौन सी बातें हैं जिन्हें हमें दूसरों को नहीं बताना चाहिए:-

Acharya Chanakya

पति-पत्नी के बीच की बातें

नैतिकता के अनुसार व्यक्ति को कभी भी अपने वैवाहिक जीवन की बातें किसी और से नहीं करनी चाहिए। पति-पत्नी के बीच की बातचीत को अपने तक ही सीमित रखना चाहिए।

खासकर अगर आपके और आपके जीवनसाथी के बीच किसी भी तरह का झगड़ा चल रहा हो तो उसका जिक्र किसी तीसरे व्यक्ति से नहीं करना चाहिए, भले ही वह आपका भरोसेमंद दोस्त ही क्यों न हो। इससे आपको आगे चलकर मान सम्मान की हानि उठानी पड़ती है। इसके साथ ही आपके रिश्ते में भी दरार आ जाती है।

अपने काम से संबंधित योजना किसी को न बताएं

आचार्य चाणक्य का कहना है कि कभी भी किसी अन्य व्यक्ति के सामने अपने काम से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों या योजनाओं का जिक्र नहीं करना चाहिए।

इससे आपको कार्यक्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है और आपके कार्य में सफलता मिलने की संभावना भी कम हो जाती है इसलिए काम हो जाने के बाद ही किसी को बताना चाहिए।

अपने अपमान की गाथा न गाएं

आचार्य के अनुसार यदि किसी ने आपका अपमान किया है तो इस घटना को अपने तक ही सीमित रखना बेहतर है। दूसरों को बताने से उनके मन में आपके लिए सम्मान भी कम हो जाएगा।

आर्थिक नुकसान के मामले में किसी को न बताएं

आचार्य चाणक्य के अनुसार जिन लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है उन्हें इसे बाहरी लोगों को बताने से बचना चाहिए। उनके अनुसार जो लोग पैसों को लेकर परेशानी में होने पर दूसरों के साथ अपनी बात साझा करते हैं, वे मदद करने के बजाय निराश हो सकते हैं। इतना ही नहीं आपकी परेशानी जानकर लोग आपसे दूरी भी बनाने लगेंगे।

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बेहद फायदेमंद है लक्ष्मणा का पौधा!

घर में पौधा लगाना शुभ होता है। इससे घर की सुंदरता तो बढ़ती है साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा होता है लेकिन कुछ खास पौधों में वास्तु दोष दूर करने की क्षमता होती है। साथ में कई ऐसे भी पौधे हैं जिनको लगाने से धन प्राप्ति के संयोग बनते हैं।

ऐसा ही एक पौधा है जिसका नाम “लक्ष्मणा” है। कहा गया है कि इस पौधे को लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यह पौधा जहां भी लगा होता है वहां का वास्तुदोष दूर होता है।

आयुर्वेद में इसे लक्ष्मण बूटी के नाम से जाना जाता है। लक्ष्मणा का पौधा बेल प्रजाति का होता है। इसकी पत्तियां पीपल या पान के पत्ते के समान होती हैं।

आइए जाने लक्ष्मणा पौधे के फायदों के बारे में:-

अपराजिता के पौधे की तरह यह पौधा भी धनलक्ष्मी को आकर्षित करने में सक्षम है। कहते हैं कि जिस किसी के भी घर में सफेद पलाश और लक्षमणा का पौधा होता है वहां जिंदगीभर किसी भी प्रकार से धन, दौलत आदि की कमी नहीं रहती है।

दोनों ही पौधों के आयुर्वेद और तंत्रशास्त्र में कई और भी चमत्कारिक प्रयोग बताए गए हैं। श्वेत लक्ष्मण का पौधा ही तांत्रिक प्रयोग में लाया जाता हैं।

आयुर्वेदाचार्यों अनुसार यह फोड़े फुंसी, खांसी, मूत्र रोग, कान में सूजन एवं जलन, जिगर का रोग, जख्म या घाव, हाथीपांव, घेंघा, सफेद दाग, पथरी, सूजाक, त्वचार रोग, सिरदर्द, आधाशीशी, माइग्रेन आदि रोगों के इलाज में लाभदायक होता है।

मान्यता है कि उत्तर दिशा को धन की कारक दिशा माना जाता है। इसलिए घर में लक्ष्मणा का पौधा पूर्व-उत्तर की दिशा लगाना उत्तम माना गया है। इसे बालकनी में बड़े गमले में लगाना चाहिए ।

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