शीर्ष भारतीय मसाले और उनके स्वास्थ्य लाभ

भारतीय मसाले बहुत लंबे समय से भोजन को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए इस्तेमाल होते आये हैं। बहुत से देश ऐसे हैं जो मसालों का उत्पादन और व्यापार करते हैं।

मसालों के व्यपारी प्राचीन समय से ही लोकप्रिय व्यपारी रहे हैं। भारत अपने मसालों के उत्पादन के लिए पूरे विश्व में मशहूर है।

यह हैं भारत के कुछ मसाले और उनके स्वास्थ्य लाभ:-

हल्दी(Turmeric)

turmericयह भारत के सबसे आम इस्तेमाल किये जाने वाले मसालों में से एक है। हल्दी (Turmeric) का इस्तेमाल बहुत से व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है। हल्दी एक एंटीओक्सीडेंट है और यह कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने में भी सक्षम है।

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हींग(asafoetida)

asafoetidaयह भारत के तीखे स्वाद वाले मसालों में से एक है। अगर इस मसाले को किसी भोजन में डाल दिया जाए तो यह उस भोजन की गंद बदल देता है।

इसका इस्तेमाल भारत की सबसे मशहूर खट्टी-मिट्ठी दाल बनाने में होता है। इस मसाले से अस्थमा, खांसी, ब्रोंकाइटीस जैसी बीमारियों का भी समाधान किया जाता है।

जीरा(Cumin Seed)

cumin-seedजीरा, घरों में सबसे आम होने वाले मसालों में से एक है, इसे व्यंजनों की एक विस्तृत किस्म तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसको भारत का पारम्परिक व्यंजन उड़िया को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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अदरक(Ginger)

gingerअदरक को प्रचीन समय से भारत और एशिया के कई देशों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह भोजन बनाने के मसालों में सबसे अव्वल मसाला है।

अदरक के बिना भोजन को स्वादिष्ट बनाना असंभव सा लगता है। यह जुकाम, जोड़ों के दर्द से राहत और रक्तचाप जैसी कई बीमारियों का समाधान करने में सक्षम होता है।

इलायची(Cardamom)

cardamomइलायची भारत के जंगली क्षेत्रों में पैदा की जाती है। यह मसाला भी अदरक की तरह बीमारियों का इलाज करने में मददगार होता है।

यह व्यंजनों को स्वाद बनाने में इस्तेमाल होता है और इसका इस्तेमाल चाय को स्वादिष्ट बनाने के लिए भी किया जाता है।

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काली मिर्च(Black Pepper)

black-pepperकाली मिर्च को कब्ज, दस्त, कान का दर्द, अवसाद और ह्रदय रोग का इलाज करने में किया जाता है। इसकी पैदावार मूल रूप से दक्षिण भारत में की जाती है। इसका इस्तेमाल भोजन का स्वाद बढ़ाने और स्वास्थ्य का उपचार करने में होता है।

लौंग(Cloves)

clovesभारत में लौंग अपने स्वाद और चिकिस्ता के इलाज के लिए सदियों से मशहूर है। लौंग से बहुत सारी बीमारियों का इलाज होता है। यह पेट की खराबी के इलाज में सबसे सफल औषधि है।

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केसर(saffron)

saffronकेसर भारत का सबसे महंगा मसाला है। इसका इस्तेमाल भारत में शुभ अवसरों पर किया जाता है। केसर स्वास्थ्य की पाचन शक्ति और भूख बढ़ाने में मददगार होता है।

दालचीनी(Cinnamon)

cinnamonदालचीनी के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ हैं। इसका बहुत समय से रक्त शर्करा को नियंत्रण करने में इस्तेमाल होता रहा है।

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सरसों के बीज(Mustard Seeds)

mustard-seedsज्यादातर भारतीय सरसों के बीज और इसके तेल को घर में अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन बीजों में विटामिन बी होता है जो शरीर में गठिया होने से रोकता है और मांसपेशियों के दर्द को दूर करता है।

धनिया (Coriander)

corianderधनिया का उपयोग 7,000 सालों से होता आ रहा है। यह मसाले मूल रूप से आयरलैंड से उत्पन्न हुए हैं। इन मसालों का उपयोग भारत में भोजन बनाने और सलाद में होता है।

धनिये का इस्तेमाल शूगर की बीमारी को दूर करने के लिए और एक एंटीओक्सिडेंट के रूप में भी होता है।

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फ़ूड टिप्स: वजन कम और कंट्रोल करने वाली डाइट

रुजुता दिवेकर भारत में सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाली आहार विशेषज्ञ हैं, उन्होंनें मुकेश अम्बानी के बेटे अनंत अम्बानी का वजन 108 किलोग्राम कम करने में विशेष भूमिका निभाई है।

रुजुता की देखरेख में युवा अम्बानी ने महज़ 18 महीनों में 108 किलो वजन कम किया था। अनंत की इस उपलब्धि पर अभिनेता सलमान खान और क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने अनंत की जमकर तारीफ़ की थी।

अनंत अम्बानी, बाएं वजन घटाने से पहले और बाद में दायें (सचिन के साथ)
अनंत अम्बानी, बाएं वजन घटाने से पहले और बाद में दायें (सचिन के साथ)

आईये जानते हैं, रुजुता दिवेकर से आहार के बारे में कुछ बेहद काम की बातें। हो सकता है इन टिप्स को आजमा कर और अपना कर आपके जीवन में भी अनंत अम्बानी की तरह खुशनुमा काया-कल्प हो जाए।

रुजुता के अनुसार,

  1. स्थानीय फलों का प्रयोग करें। जैसे केला, अंगूर, चीकू, आम आदि। सभी फलों में फ्रुक्टोसे (फ्रक्टोज, fruit sugar) होता है इसलिए यह बात मायने नहीं रखती कि आप आम के बाद सेब खा रहे हैं या सेब के बाद आम। सेब चाहे कोंकण से आता है और सेब कश्मीर से, इसलिए आम आपके लिए स्थानीय हो जाता है। मधुमेह रोगी ऊपर लिखे सभी फल खा सकते हैं क्योंकि फ्रक्टोज आपके शूगर को नियंत्रण में कर लेगा।
  2. सब्जियां बनाते समय बीजों के तेल जैसे अखरोट, सरसों, नारियल तिल आदि का प्रयोग करें। पैकिंग वाले तेल, जैतून की तरह चकचक आदि का प्रयोग न करें। रिफाइंड तेलों से कच्ची घानी का सरसों तेल बेहतर होता है।
  3. स्पीच या सेमीनार में रजुता अपना काफी समय देशी घी और इसके फायदों के बारे में बताने के लिए देती हैं। उनके अनुसार देशी घी रोज खाएं। हम कितना देशी घी खाएं यह भोजन पर भी निर्भर करता है। देशी घी ब्लड में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करता है।
  4. Coconut यानी नारियल का प्रयोग अधिक करें। आप नारियल का प्रयोग पोहा, खांडवी या चटनी बनाकर भोजन के रूप में कर सकते हैं। नारियल में कोलेस्ट्रोल की मात्रा न के बराबर होती है। साथ ही यह कमर पतली करने में सहायक होता है।
  5. डिब्बाबंद औट(जई, गेंहू) व अनाज(cereals) का नाश्ता न करें। इस पैकट वाले भोजन की हमें जरूरत नहीं होती है। हमारे दिन की शुरुआत इस तरह के स्वादहीन और बोरिंग भोजन से नहीं होनी चाहिए। इस प्रकार का भोजन हमारे दिन को भी उबाऊ बनाता है। नाश्ते में आप पोहा, उपमा, इडली, डोसा या परांठा ले सकते हैं।
  6. फरहान खान बिस्कुट की नई एड देते हैं कि बिस्कुट में फाइबर है। मैं कहती हूँ, यहाँ तक कि हमारे घर के कचरे में भी फाइबर होता है। डिब्बाबंद औट के फाइबर के बदले आप पोहा, उपमा, इडली, डोसा आदि खा सकते हैं।
  7. जब तक आपके मुहं में दांत हैं तब तक सीधे फल और सब्जियां चबा कर खाएं, जूस पीने की जरुरत नहीं।

8 . गन्ना वास्तव में एक DETOX यानी शरीर से विषैले पदार्थो को निकालने वाला पदार्थ है। गन्ने का ताज़ा जूस पियो या गन्ना चबा कर खाएं।

Rujuta Diwekar is highest paid dietician in India
रुजुता दिवेकर – मशहूर डायटीशियन
  1. सफेद चावल का प्रयोग करें। भूरे चावलों को पकाने के लिए 5 -6 सीटी लगती हैं तो पचने में कितना समय लगता होगा। सफेद चावल (हाथ से उगाये गये) प्राकृतिक चावल होते हैं। GI index में चावल का स्थान ज्यादा उच्च नहीं है। जब हम इन्हें दाल, दही, कढ़ी के साथ खाते हैं तो हम इसे GI Index में और नीचे ले आते हैं। देशी घी डालने से हम इसे और नीचे ले आते हैं। चावल में कुछ बेहद पोषक तत्व होते हैं और इन्हें आप दिन में तीन बार भी खा सकते हैं।
  2. हमें कितना खाना चाहिए ? सीधा सा उतर है, जितनी भूख हो उतना खाना खाएं। न कम न ज्यादा। दरअसल आपका पेट ही आपका गाइड है।
  3. हम चावल और चपाती को इकट्ठा भी खा सकते हैं। यह आपकी इच्छा के ऊपर निर्भर करता है। चावल को आप तीन टाइम के भोजन में शामिल कर सकते हैं।
  4. भोजन केवल आपकी भूख ही नहीं मिटाता है यह आपको अच्छा अनुभव भी कराता है।
  5. कैलोरी की चिंता के बजाय पोषक तत्वों के बारे में ज्यादा सोचें।
  6. ब्रैड, बिस्कुट, केक, पिज़्ज़ा और पास्ता को बिल्कुल भी खाने की जरूरत नहीं है।
  7. अपने आप से पूछें कि क्या यह भोजन आपकी दादी या नानी भी खाती थी। अगर हाँ तो बिना डर के खाएं।
  8. मौसम के अनुसार भोजन करें। बरसात में पकौड़ा ,फफड़ा, जलेबी खाएं। आपकी भूख आपके मौसमी भोजन को भी तय करती है। मौसम के अनुसार, जैसे सर्दियों में आप तला हुआ भोजन खा सकते हैं।
  9. सुबह उठकर खाली पेट या जब आप भूखे हों तो चाय का प्रयोग न करें। हाँ दिन में 2-3 बार आप चीनी के साथ चाय पी सकते हैं।
  10. ग्रीन टी की कोई जरुरत नहीं। पीली, नीली या बैंगनी टी की भी जरुरत नहीं।
  11.  हर प्रकार का पारम्परिक भोजन करें।
  12. हर तरह के पैक्ड, डिब्बाबंद, इम्पोर्टेड भोजन और पेय खाना-पीना बिल्कुल बंद करें।
  13. पीसीओ (Polycystic Ovary Syndrome) और थाईराइड की स्थिति में वजन कम करने का प्रशिक्षण लें और डिब्बा बंद भोजन से बचें।
  14. खाना खाने के बाद हल्का व्यायाम करें और थोड़ा-सा जरूर चलें। इससे आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी ।

विज्ञान के अद्भुत तथ्य!

वैज्ञानिकों द्वारा हमेशा ऐसी ऐसी खोजें की जाती रही हैं जो बहुत ही चौंकाने वाली होती हैं। आज हम कुछ ऐसी ही खोजों  के बारे में जानेंगे। विज्ञान से जुड़े वो रोचक और दिलचस्प तथ्य जो शायद आप नहीं जानते।

  1. प्रकाश की रफ्तार 1 लाख 86 हज़ार मील प्रति सेकंड है।
  2. सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने के लिए 8 मिनट 17 सेकंड का समय लगता है।
  3. दुनिया में अभी तक पैदा हुए लोगों की कुल आबादी का 10 प्रतिशत हिस्सा अभी भी जिंदा है।
  4. धरती 1 हज़ार मील प्रति सेकंड की रफ्तार से अपनी धुरी पर घूमती है। धरती की अंतरिक्ष में सूर्य के इर्द-गिर्द घूमने की रफ्तार 67 हजार मील प्रति सेकंड है।
  5. हर साल, धरती पर 10 लाख से भी ज्यादा भूकंप आते हैं।
  6. जब 1883 में क्राकाटोआ में ज्वालामुखी में बहुत बड़ा धमाका हुआ था जिससे इस ज्वालामुखी के फटने की आवाज इतनी ज्यादा थी कि इस ज्वालामुखी के फटने की आवाज 4,800 किलोमीटर दूरी पर ऑस्ट्रेलिया में भी सुनी गयी थी।
  7. पृथ्वी में हर सेकंड आसमानी बिजली 100 बार जमीन से टकराती है।
  8. हर साल आकाशी बिजली से 1 हजार लोगों की मौत हो जाती है।
  9. अक्टूबर 1999 में लन्दन के आकार का हिमशैल अंटार्कटिक से अलग हो गया था।
  10. अगर आप अपनी कार को सीधे ऊपर की तरफ ड्राइव करते हैं तो आप सिर्फ एक घंटे में ही अंतरिक्ष में पहुंच जायेंगे।
  11. हमारी धरती 4.5 अरब साल पुरानी है इसके साथ सूर्य और चन्द्रमा भी 4.5 अरब साल पुराने हैं।
  12. अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष में डकार नहीं ले सकते- क्योंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता जिससे उनकी पेट से गैस बाहर नहीं निकलती और वह अंदर ही रह जाती है।
  13. डीएनए की खोज वर्ष 1869 में स्विस फ्रेडरिक मैस्चलेर द्वारा की गयी थी।
  14. अल्फ्रेड नोबेल ने वर्ष 1866 में बारूद की खोज की थी।
  15. 5 में से 4 लोग इबोला वायरस से पीड़ित होने की वजह से मर जाते हैं।
  16. 5 अरब साल बाद सूरज का इंधन खत्म हो जायेगा और यह एक विशाल लाल गोले की शकल ले लेगा।
  17. रबर के आविष्कार से पहले पेंसिल का आविष्कार हुआ था। पेंसिल से लिखे शब्दों को मिटाने के लिए पहले ब्रेड का इस्तेमाल किया जाता था।
  18. सूरज धरती से बड़ा है पर क्या आप जानते है कि सूरज धरती से लाखों गुना बड़ा है यानि सूरज में लाखों धरती समा जाए। इतना बड़ा !
  19. हमारे ब्रह्मांड में 100 अरब आकाशगंगाएं हैं।
  20. हर घंटे में हमारा ब्रह्मांड एक अरब मील तक फ़ैल जाता है।
  21. थर्मामीटर का अविष्कार 1607 में गैलिलियो द्वारा किया गया था।
  22. हाथ मिलाने से इतने कीटाणु स्थानांतरित होते हैं, जितने की चूमने से भी नहीं होते।
  23. 16 दिसंबर 1811 को न्यू मैड्रिड में आया 7.9 रिक्टर के भूंकप की वजह से मिसीसिपी नदी उल्टी बहने लगी थी।
  24. पहला हृदय प्रत्यारोपण क्रिश्चियन बार्नार्ड ने सन 1967 में किया जिसमे मरीज 18 दिनों तक जीवित रहा।
  25. दुनिया में सबसे लम्बा पेड़ एक ऑस्ट्रेलियाई नीलगिरी था – 1872 में इसे 435 फीट लंबा मापा गया था।
  26. जब हम छीकते हैं तो उसकी रफ़्तार 100 मील प्रति घंटा होती है।
  27. बम का पता लगाने के लिए कुत्तों को ट्रेनिंग दी जाती है। पर क्या आप जानते हैं कि मधुमक्खियों को भी इसके लिए ट्रेनिंग दी जाती है।
  28. आपने सुना होगा शेर शिकार करता है, पर क्या आप जानते हैं कि 90 प्रतिशत शिकार शेरनी ही करती है। शेर तभी उसकी मदत के लिए आता है जब उसे जरूरत होती है।
  29. विश्व का पहला कंप्यूटर “ENIAC” 27 टन का था, जो की एक हॉल जितना विशाल था।
  30. पृथ्वी का तीन चौथाई हिस्से में जल है, पर मौजूद कुल पानी में से 97 प्रतिशत पानी नमकीन है। इसी कारण से हमारे पास पीने लायक केवल 1 प्रतिशत पानी है।

दुनिया की 5 सबसे ऊंची व् अदभुत इमारतें

दुनिया में 5 ऊंची व् अदभुत इमारतें हैं जिनकी कारीगिरी और वास्तुशिल्प दुनियाभर के लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है। आइए जानें दुनिया की 5 ऐसी अदभुत इमारतों के बारे में…

बुर्ज खलीफा, दुबई

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बुर्ज ख़लीफ़ा दुनिया की सबसे ऊँची इमारत है। यह इमारत दुबई में आठ अरब डॉलर की लागत से बनाई गई है। इस इमारत की ऊंचाई 2,717 फीट है।

इसका उद्घाटन 4 जनवरी 2010 में किया गया था। इस इमारत में कुल 162 मंजिले हैं। इसमें स्विमिंग पूल, खरीदारी की व्यवस्था, दफ़तर, सिनेमा घर सहित सारी सुविधाएँ मौजूद है।

इसकी 76 वीं मंजिल पर एक मस्जिद भी बनाई गई है। बुर्ज ख़लीफ़ा इमारत को 96 किलोमीटर दूर से भी साफ़-साफ़ देखा जा सकता है। इसमें लगाई गई लिफ़्ट दुनिया की सबसे तेज़ चलने वाली लिफ़्ट है।

शंघाई टावर, चीन

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शंघाई टावर चीन के शंघाई नगर के पुडौंग जिले में स्थित एक गगनचुम्बी इमारत है। यह इमारत 6 सितंबर, 2015 को बन कर तैयार हुई थी। इस इमारत में 121 मंजिले हैं। शंघाई टावर की ऊंचाई 2,073 फुट है।

यह एक मिश्रित उपयोग की इमारत है जिसके भीतर होटल, कार्यालय, सम्मेलन कक्ष और शॉपिंग मॉल इत्यादी हैं। यह चीन की पहली और विश्व की दूसरी सबसे ऊँची इमारत है।

मक्का रॉयल क्लॉक टावर, सऊदी अरब

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यह टावर सऊदी अरब के प्रसिद्ध मक्का शहर में है। मक्का रॉयल क्लॉक टावर की ऊंचाई 1,972 फीट हैं और यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इमारत है।

मक्का रॉयल क्लॉक टावर का निर्माण 2011 में हुआ है और इसका दूसरा नाम अब्राज अल-बैत टावर हैं। मक्का रॉयल क्लॉक टावर में 120 मंजिलें हैं।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, अमेरिका

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यह इमारत अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर में थी। इसकी ऊंचाई 1,776 फीट थी। लेकिन 11 सितम्बर 2001 को अल-कायदा द्वारा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया गया था जिसके कारण यह इमारत क्षतिग्रस्त हो गई।

विश्व के सबसे बड़े व्यावसायिक केन्द्र के रूप में विख्यात अमेरिका की यह बहुप्रतिष्ठित इमारत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर वर्ष 1973 में 75 करोड़ डालर की लागत से बनकर तैयार हुई थी।

यह सात इमारतों का एक झुंड था जिसका डिजाइन प्रसिद्ध मिनोरू यामासाकी और एमरी रोथ वास्तुकारों ने तैयार किया था।

ताइपे 101, ताईवान

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ताइपे 101, ताईवान की राजधानी ताइपे में स्थित एक गगनचुंबी अदभुत इमारत है। ताइपे101 का उद्घाटन 2004 में हुआ है। इसमे 101 फ्लोर है और इसकी ऊंचाई 1,671 फुट है।

दुनिया का सबसे लंबा ग्रीटिंग कार्ड 7 किलोमीटर था जाने कुछ रोचक तथ्य !

बधाई देने की परम्परा हज़ारों साल पुरानी है। कहा जाता है कि पहला शुभकामना संदेश ईसा से 600 वर्ष पहले भेजा गया था। इस तरह के संदेशों ने आज के ग्रीटिंग कार्ड तक की यात्रा कैसे पूरी की, आज हम इस पोस्ट में जानेंगे।

नववर्ष, जन्मदिन, विवाह या त्योहारों के अवसर पर बधाई संदेश, पत्र और कार्ड भेजने की रीति बहुत पुरानी है। आजकल तकनीक के विस्तार और उन्नति के चलते ई-मेल, व्हाट्सएप, मोबाइल फोन, एसएमएस तथा संचार के अत्याधुनिक साधनों के ज़रिए झटपट शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हो जाता है, लेकिन पुराने समय में बधाई संदेश भेजना सरल नहीं था। इसके बावजूद लोग विभिन्न तरीकों से अपने मन की बातें एक-दूसरे तक पहुंचा देते थे।

आज के समय में

आजकल बाज़ार में एक से लेकर हज़ार रुपए तक की क़ीमत के बधाई कार्ड उपलब्ध हैं। कई कम्पनियां सिर्फ़ बधाई कार्ड बेचकर करोड़ों की कमाई कर रही हैं।

तमाम कूरियर कम्पनियां व इंटरनेट केंद्र ख़ासतौर पर शुभकामना संदेश व उपहार भेजने का काम करते हैं। गौरतलब है कि भारतीय डाक विभाग की तरफ़ से बधाई पत्र भेजने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। विभिन्न सोशल कम्युनिटीज़ पर कस्टमाइज़्ड संदेश भेजने की सुविधा भी है।

सैकड़ों साल पहले का

सदियों पहले आज की तरह संचार के तीव्र साधन नहीं थे, तब दूतों व कबूतरों द्वारा भी बधाई पत्र भेजे जाते थे। चीन व मिस्र में बधाई संदेश भेजने की श्रेष्ठ परम्परा थी।

इन देशों में कई ताम्रपत्रों के अलावा इत्र की ऐसी शीशियां भी मिली हैं, जिन पर शुभकामनाएं दर्ज हैं। भारत में ताड़पत्रों, केले के पत्तों, कदम्ब छाल, कपड़ों पर बधाई संदेश भेजे जाते थे।

मौर्य काल में तांबे, सोने-चांदी के पत्तों पर सौभाग्य व मंगल कामनाएं दी जाती थीं। इतिहासकारों के अनुसार, ईसा से 600 वर्ष पूर्व के बधाई पत्र भी मिले हैं।

भारत में अंग्रेज़ों ने सर्वप्रथम क्रिसमस तथा नए वर्ष पर शुभकामना संदेश भेजने और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहने की रवायत डाली। शुरुआती दिनों का एक छपा हुआ शुभकामना पत्र वर्ष 1843 ई. में भेजा गया था, जो इंग्लैंड में मिला है।

ब्रिटिश म्यूज़ियम में 1842 ई. का मुद्रित बधाई कार्ड भी मिला है। इस पर ‘हैप्पी क्रिसमस टू यू’ लिखा है। ज़ाहिर है कि किसी संदेश के प्रत्युत्तर में ये कार्ड छापकर भेजने के लिए तैयार किया गया होगा।

कुछ रोचक तथ्य

  • भारत में शुरुआती दिनों में शिवकाशी, मद्रास और मुम्बई में अधिक बधाई पत्र छपते थे।
  • हैदराबाद के निज़ाम का नाम सबसे ज़्यादा शुभकामना पत्र भेजने वालों की सूची में दर्ज है।
  • दुनिया का सबसे लम्बा ग्रीटिंग कार्ड 7 किलोमीटर का था। इसे 10 दिसम्बर, 1967 को वियतनाम युद्ध में मोर्चे पर डटे अमेरिकी सैनिकों के नाम भेजा गया था। इस पर 1 लाख लोगों की सामूहिक शुभकामनाएं दर्ज थीं और इसका वज़न 10 टन था।
  • दुनिया का सबसे छोटा शुभकामना पत्र 1920 में एक चावल के दाने पर लिखकर प्रिंस ऑफ़ वेल्स को भेजा गया था।
    13वीं सदी में यूरोपियनों ने वुडकट्स पर नए साल के ग्रीटिंग्स भेजकर नई परम्परा शुरू की थी।
  • अमेरिका में छपे हुए ग्रीटिंग कार्ड्स बेचने की शुरुआत लुई प्रैग नामक एक जर्मन लिथोग्राफ़र ने की थी, जिसने वर्ष 1856 में बोस्टन में ग्रीटिंग कार्ड्स की दुकान सजाई थी।
  • अमेरिका में हर साल साठ लाख ग्रीटिंग कार्ड्स भेजे जाते हैं, जिनका बाज़ार आठ अरब डॉलर्स का है।
  • सबसे लोकप्रिय शुभकामना संदेश हैप्पी बर्थडे के होते हैं। दुनिया में कुल बिकने वाले ग्रीटिंग कार्ड में से आधे जन्मदिन संदेशों के होते हैं।
  • जहां तक सीज़नल कार्ड्स की बात है तो क्रिसमस पर सबसे ज़्यादा ग्रीटिंग कार्ड दिए जाते हैं। इसके बाद वैलेंटाइंस डे, मदर्स डे और फ़ादर्स डे के कार्ड्स की बारी आती है।

भारत की पहली सौर ऊर्जा संचालित ट्रेन

भारत दुनिया के सबसे विशाल रेल-यातायात वाले देशों में से एक है। भारतीय रेलवे ने उर्जा-संरक्षण के लिए बड़ी पहल की है। अब वह दिन दूर नहीं जब देश में सौर ऊर्जा से संचालित ट्रेनें पटरियों पर दौड़ेंगी।

इससे भारतीय रेलवे को भारी भरकम डीजल की खपत से छुटकारा मिलेगा। भारतीय रेलवे ने इसकी शुरुआत कर दी है। हालांकि ट्रेन को तो डीजल इंजन ही खींचेगी लेकिन साधारण तथा वातानुकूलित डिब्बों में लाइटों व पंखों को सोलर पैनलों के जरिये सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा।

पारंपरिक तथा प्रदूषण फैलाने वाले ऊर्जा स्रोतों पर अब निर्भर नही रहना पड़ेगा। भारतीय रेल सौर ऊर्जा के साथ-साथ अन्य प्राकृतिक गैसों, बायोडीजल व सीएनजी से भी ट्रेनों को दौड़ाने की कोशिशों में आगे बढ़ रही है।
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सोलर ट्रेनों से होने वालें फ़ायदे

एक सोलर पैनल एक दिन में करीब लगभग 300 यूनिट्स पाॅवर जेनरेट करता हैं। इससे बोगियों में बल्ब और पंखों के लिए बिजली की जरुरत सौर उर्जा से पूरी होगी।

इसका इस्तेमाल होने से रेलवे को हर साल एक बोग़ी पर 1.24 लाख का मुनाफ़ा होगा। सोलर ट्रेन की मदद से सालाना 239 टन कार्बन डाईऑक्साइड कम उत्पन्न होगी। सौर ऊर्जा से एक ट्रेन पर हर साल 90,000 लीटर डीजल की खपत कम की जा सकती है।
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रेलवे की योजना और संभावना

भारतीय रेल मंत्रालय की योजना 2020 तक सौर ऊर्जा से 1,000 मेगावॉट बिजली उत्पन्न करने का लक्ष्य प्राप्त करना है। इससे रेलवे की दस फीसदी ऊर्जा की जरूरत पूरी होगी।

रेलवे के मुताबिक, मुख्य तौर पर हमारी निगाहें सौर ऊर्जा पर हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक ट्रेनें और ईएमयू ट्रेने बढ़ेगी, हमारी ऊर्जा जरूरत भी बढ़ेगी।

इसी लक्ष्य पर नजर रखते हुए हम सौर ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस योजना से 2020 तक हम कुल ऊर्जा जरूरतों का दस फीसदी पूरा करने में समर्थ हो पाएँगे।
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भारत में 10 सबसे भुतहा जगहें

भारत एक खूबसूरत, लेकिन उतनी ही रहस्यमयी जगह है. यहां के विभिन्न स्थानों में बहुत सारे रहस्य छुपे हुए हैं. यह रहस्य महलों, किलों, राजाओं, रानियों, राजकुमारों, राजकुमारियों और युद्धों से जुड़े हैं.

भारत में बहुत सारी जगहें हैं यहाँ पर भूत-प्रेतों का वास समझा जाता है. यहाँ इस लेख में भारत की शीर्ष 10 प्रेत-बाधित अथवा भुतहा जगहों की सूची दी जा रही है जहाँ पर असाधारण गतिविधियों को देखा गया है.

भानगढ़ का किला

bhangarh-fortभानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगह मानी जाती है. सरकार ने भी पर्यटकों को यहाँ अंधेरा होने से पहले चले जाने की चेतावनी जारी कर रखी है. लोगों के मुताबिक 16वीं शताब्दी में इसी शहर में रहने वाले एक जादूगर को भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती के साथ प्यार हो गया. जिस पर तांत्रिक ने काला जादू कर दिया था.

वह राजकुमारी को अपने वश में करना चाहता था, लेकिन एक दुर्घटना के चलते उस तांत्रिक की मृत्यु हो गई. ऐसा कहा जाता है कि जादूगर ने मरते वक्त भानगढ़ के किले को श्राप दिया कि यह जल्दी ही नष्ट-भ्रष्ट हो जाएगा. उस श्राप के बाद इस किले में रहने वाले लोगों की मृत्यु हो जाती है और उनकी आत्मा इस किले के अंदर भ्रमण करती है.

कुलधारा गांव, जैसलमर

kuldhara-village-rajasthanराजस्थान का यह गांव पिछले 170 से अधिक सालों से वीरान पड़ा हुआ है. इस गाँव में पालीवाल ब्राह्मण रहा करते थे. एक बार एक मंत्री गांव की सुंदर लड़की से शादी करना चाहता था. ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो मंत्री ने उनका लगान दो गुना कर दिया.

जिससे गाँव वालों ने वह जगह छोड़ दी और तब से यहां कोई नहीं रहता. सालों से वीरान पड़ा यह गाँव खंडहर बन गया है. यहाँ आने वाले टुरिस्टों का कहना है कि यहां गांववासियों को आज भी महसूस किया जाता है. यहाँ भी सूर्यास्त के बाद जाना मना है.

 गुफा नंबर 33, शिमला

Cave No. 33, Shimla

शिमला, हिमाचल प्रदेश का सबसे सुंदर और मशहूर शहर है. यह शहर कई भुतहा कहानियों से भी संबध रखता है और यहां पर ऐसी कई जगह हैं जो भुतहा मानी जाती हैं. टनल नंबर 33 ऐसी ही भुतहा जगहों में से एक है.

इस सुरंग का निर्माण एक अंग्रेज़ इंजीनियर बड़ोग ने करवाया था. इसलिए इसे बड़ोग सुरंग भी कहते है, लोगों का मानना है कि इस सुरंग को बनाने वाले अंग्रेज इंचार्ज बड़ोग ने एक बड़ी भूल यह कर दी कि एक ही बार में दोनों ओर से सुरंग बनाने का कार्य शुरू कर दिया.

अंदाजे की भूल से सुरंग के दोनों छोर मिल नहीं पाए जिसके कारण उन पर एक रुपया जुरमाना किया गया. अपनी इस चूक से वह इतने अधिक दुखी हुए कि उन्होंने एक दिन अपने कुत्ते के साथ सैर पर जाते हुए स्वयं को गोली मार कर आत्म ह्त्या कर ली. आज भी इसमें उस अंग्रेज इंजीनियर की रूह भटकती है. लोगों को इस सुरंग में जाने से रोकने के लिए बाकायदा बोर्ड लगा है.

जीपी ब्लाक – मेरठ, उत्तर प्रदेश

 

GP Block – Meerut, Uttar Pradesh

मेरठ का जीपी ब्लाक भुतहा स्थानों में से एक है. इस जगह पर बहुत असाधारण गतिविधियां होती हैं. इन गतिविधियों के साथ-2 यहां पर बहुत अजीब चीजें देखी गयी हैं. कहा जाता हैं कि इस जगह पर लडकों और लडकियों के भूतों का निवास है. कई लोगों ने देखा कि इस जगह में 4 लड़के 1 मोमबत्ती की रौशनी में शराब पी रहे हैं.

दुमस बीच, गुजरात

Dumas Beach, Gujarat

यह बीच गुजरात के अरेबियन समंदर के तट पर स्थित है. यह अपनी काली धरती और असाधारण गतिविधियां के लिए जाना जाता है. सुबह सैर करने वाले लोगों और पर्यटकों को यहां रोने की आवाजें और किसी के बात करने की आवाजें सुनाई देती हैं. यह समझा जाता है कि यहां बहुत सारे लोगों ने अपनी जान गंवाई है.

अग्रसेन की बावड़ी, दिल्ली

Agrasen's Stepwell, Delhi

आप कल्पना कीजिए अग्रसेन की बावड़ी जैसी अदभुत इमारत दिल्ली जैसे बड़े शहर के बीचो-बीच स्थित है और इस इमारत पर अतीत में बहुत कुछ बुरा घटा हो. इस इमारत को 14वीं सदी में अग्रसेन द्वारा तैयार किया गया था. बाद में अग्रसेन ने इस इमारत को काले पानी से भर दिया और लोगों को उस पानी में गिरा कर मार दिया. इसी वजह से इस जगह को शापित समझा जाता है.

रामोजी फिल्म सिटी, हैदराबाद

रामोजी भारत की सबसे बड़ी फिल्म सिटी के रूप में भी जाना जाता है. इस शहर में बहुत से होटल हैं जो किसी न किसी वजह से आलौकिक गतिविधियों का शिकार होते आ रहे हैं. इसका मुख्य कारण यह समझा जाता है कि यह शहर जिस जगह बसा है वहां पर पुराने समय में भयंकर युद्ध हुआ था जिसमे सैंकड़ो जाने गयी थी.

Ramoji Film City, Hyderabad

कहा जाता है कि यहाँ ऊपर रखी लाइटें अपने आप गिर जाती हैं. कई बार लाइटमैन जो लाइट पकडे ऊपर बैठे थे गिर गये और उन्हें गहरी चोटें आई. महिलाओं को खास कर निशाना बनाया जाता है, कई लड़कियों ने बताया कि अदृश्य शक्तियों ने उनके कपडे फाड़ डाले और बाथरूम जोकि अंन्दर से बंद थे, खटखटाए गये.

शनीवारवाडा किला, पुणे

Shaniwarwada-fortशनिवारवाडा किला का निर्माण मराठा साम्राज्य को बुलंदितयों पर ले जाने वाले बाजीराव पेशवा ने 1746 ई. में किया था. प्रचलित कहानियों के अनुसार बाजीराव की मृत्यु के बाद राजनीतिक दांव-पेंच और सत्ता के लालच में 18 साल की उम्र में नारायण राव की हत्या इस महल में कर दी गई थी.

इस महल में 1828 ई. में रहस्यमय तरीके से आग लग गई और काफी हद तक महल नष्ट हो गया. परन्तु आज भी यहाँ आने वाले लोगों को भूतहा अनुभूतियां होती हैं विशेष तौर पर अमावस्या की रात को यहां आवाजें आती हैं. स्थापनीय लोग कहते हैं कि अमावस की रात को एक दर्द भरी आवाज आती है जो बचाओ-बचाओ पुकारती है.

 

 डाओ की पहाड़ी, कुर्सेओंग | पश्चिम बंगाल

कुर्सेओंग बहुत खुबसूरत पहाड़ी इलाका है. इस पहाड़ी इलाके के घने जंगलों ने कई लोगों की जानें ली हैं. इसी वजह से डाओ की पहाड़ी हमारी शीर्ष 10 प्रेत-बाधित जगहों में से दूसरे नंबर पर है. इस घाटी के घने जंगलों में कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है और इसी वजह से क्षेत्र को पार करते समय लोगों की हड्डियां तक कांप जाती हैं।

Dao's Hill, Kurseong West Bengal

यहाँ अजीब आवाजें आती हैं और कई भुतहा आकृतिओं को लोगों द्वारा देखा गया है। लकड़ी काटने वालों ने कई बार जंगल में एक सिर-विहीन लड़के का भूत देखा है जो अचानक प्रकट होता है तुरन्त ही जंगल में गायब हो जाता है.

 कोटा का ब्रिज राज भवन महल (राजस्थान)

Bridge of Kota Raj Bhawan Palace (Rajasthan)

यह महल 178 वर्ष पुराना है और 1980 में इस महल को हेरिटेज स्थानों की सूची में डाला गया. इस किले में ब्रिटिश सेना का मेजर बुर्टोन का भूत रहता है. जिसको 1857 के दंगों में भारतीय सिपाहियों द्वारा उसके दो बच्चों के साथ मार दिया था. हालाँकि, मेजर का भूत किसी को नुक्सान नहीं पहुंचाता.

The Creepiest Photographs Ever Taken

भारत की इन 5 जगहों पर नहीं जा सकते भारतीय

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अपने देश में हम आजाद हैं, यह तो हम सभी जानते ही हैं और हम अपने देश में बिना किसी रुकावट के कहीं भी आ-जा सकते हैं।

देश के कानून ने भी हमें यह मौलिक अधिकार दिया है कि भारत के किसी भी हिस्‍से में हम आ-जा सकते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरान होगी कि भारत में कुछ जगहें ऐसी भी हैं, जहां संविधान का भी राज नहीं चलता। इन जगहों पर भारतीयों के जाने पर रोक है।

आइए जानते है भारत की उन 5 जगहों के बारे में जहाँ नहीं जा सकते भारतीय :-

कसोल कैफे (हिमाचल प्रदेश)

हिमाचल प्रदेश के कसोल में भारतीयों को फ्री कसोल कैफे में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। कसोल हिमाचल प्रदेश का एक छोटा सा गांव है। इस गांव को लोग मिनी इज़राइल के नाम से जानते हैं।

साल 2015 में कैफे ने एक भारतीय महिला को सर्व करने से साफ मना कर दिया था। कैफे का कहना था कि वह सिर्फ अपने मेंबर्स को ही सर्व करते हैं।

इस घटना के बाद कैफे की काफी आलोचना भी हुई थी और इस पर नस्लवाद के आरोप भी लगे थे। आपको बता दें कि कैफे के आसपास अंकित सभी साइन बोर्ड भी हिब्रू भाषा में हैं।

यूनो-इन होटल, बैंगलोर

बैंगलोर में यूनो-इन होटल जापानी लोगों के लिए बनाया गया था, जिसे 2012 में स्थापित किया गया था। इस होटल पर नस्लवाद के गंभीर आरोप लगे थे और साल 2014 में ग्रेटर बैंगलोर सिटी कॉर्पोरेशन द्वारा होटल को बंद करवा दिया गया था।

होटल के प्रबंधन का कहना था कि उन्होंने जापान की कई कंपनियों के साथ अनुबंध (समझौता) कर रखा है, जिसके चलते वह सिर्फ जापानी पर्यटकों को ही अपनी सेवाएं देते हैं।

गोवा के कुछ बीच

गोवा अपने खूबसूरत समुद्र तटों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भारतीयों के लिए, गोवा देश के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है।

हालाँकि देश सहित दुनिया भर से कई पर्यटक गोवा बीच पर आते हैं, फिर भी गोवा में कुछ स्थान ऐसे हैं जहाँ भारतीयों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।

गोवा के इस तट पर प्रवेश करने वाले भारतीयों पर प्रतिबंध आधिकारिक नहीं है, लेकिन स्थानीय निवासियों के अनुसार, भारत के पर्यटक विदेशी पर्यटकों के लिए समस्याएं पैदा करते हैं और उनके साथ गलत व्यवहार करते हैं।

दरअसल, कहा जाता है कि भारतीय विदेशी महिलाओं पर भद्दे कमेंट करते हैं। उनकी पोशाकों पर भी फ़ब्तियां कसते हैं, जिसकी वजह से भारतीयों को वहां जाने से रोका जाता है।

ऐसी स्थिति में, स्थानीय लोगों ने कई समुद्र तटों पर भारतीय पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। गोवा में अंजुना बीच एक ऐसी जगह है जहाँ आप किसी भी भारतीय पर्यटक को घूमते हुए नहीं देखेंगे।

नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का एक द्वीप नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड भी है, जहां सिर्फ आदिवासी निवास करते हैं। यह द्वीप बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं रखता है। साल 2018 में एक अमेरिकी ईसाई धर्म प्रचारक की मौत के बाद यह द्वीप चर्चा में आया था।

इस तरह के कबीलों में रह रहे आदिवासियों की रक्षा के लिए वहां आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रखा गया है, इसके लिए बाकायदा कानून की भी व्यवस्था की गई है।

नॉर्थ सेंटिनल द्वीप 23 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां पर रह रहे आदिवासियों की संख्या महज 100 के करीब है। इस द्वीप पर बाहर से आए हुए किसी भी व्यक्ति का जाना वर्जित है।

पुडुचेरी के कुछ बीच

पुडुचेरी भारत का एक खूबसूरत छोटा सा शहर है, जहां की जनसंख्या भी बहुत कम है। यहां पर अक्सर विदेशी पर्यटक आते हैं।

गोवा की तरह यहां भी कुछ बीच ऐसे हैं, जहां भारतीयों का जाना मना है, हालांकि यह आधिकारिक तौर पर नहीं है। फॉरेनर्स ओनली बीच पर आपको विदेशी सैलानी घूमते दिख जाएंगे, लेकिन इस बीच पर इंडियंस नहीं दिखते।

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जानिए पृथ्वी की सबसे ठंडी जगह के बारे में??

जानिए पृथ्वी की सबसे ठंडी जगह के बारे में??

यदि आप सोचते हैं कि -1 डिग्री या -2 डिग्री तापमान वाली जगहें सबसे ठंडी होती हैं तो आप गलत सोच रहे हैं, दुनिया में इससे भी ज्यादा ठंडी जगह है।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं साइबेरिया के ओयमयकों गांव की। इस गांव का औसत तापमान -58 डिग्री सेल्सियस ही रहता है । इसी कारण यह गाँव दुनिया की सबसे ठंडी जगह मानी जाती है।

तो आइए जानते है पृथ्वी के सबसे ठंडी जगह के बारे में:-

पृथ्वी का सबसे ठंडा गांव..

साइबेरिया का ओयमयकों गांव, रूस व धरती की सबसे ठंडी जगह मानी जाती है। आप यकीन नहीं मानेंगे की ओयमयकों गांव का वर्ष 1933 में निम्नतम तापमान -67.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।

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ओयमयकों गांव कम आबादी वाला गांव है। इस गांव में लगभग 500 लोग ही रहते है। ये लोग खेती तथा पशुपालन पर ही निर्भर रहते है।

coldest-village-oymyakonओयमयकों गांव के लोगों को जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। -58 डिग्री सेल्सियस में आप नलों से पानी लेने के बारे में सोच भी नहीं सकते।

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यहाँ आप अगर पानी को हवा में उछालेंगे तो पानी हवा में बर्फ बन कर ही नीचे आएगा। ओयमयकों गांव में गाड़ी चलाने से पहले उसे हीट वाले गैराज में रखना पड़ता होता है।

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एक ऐसा द्वीप जहाँ चलता है बिल्लियों का राज

एक ऐसा द्वीप जहाँ चलता है बिल्लियों का राज

दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जहां इंसानों की बढ़ती आबादी की वजह से जंगली प्रजातियों के लिए खतरा बन गया है लेकिन दुनिया में एक ऐसा द्वीप भी है जहाँ जानवरों का राज चलता है जीं हाँ आपने सही सुना, जापान का ओशिमा आइलैंड।

इस आइलैंड में बिल्लियों की संख्‍या इंसानों की संख्‍या से 6 गुना अधिक हैं। ओशिमा आइलैंड को “cat island ” के नाम से भी जाना जाता है।

ओशिमा जापान के इशिनोमाकी शहर में एक छोटा सा द्वीप है। यह अजिशिमा के पश्चिम में प्रशांत महासागर के ओशिका (aoshika) प्रायद्वीप में स्थित है।

दुसरे विश्वयुद्ध के बाद इस द्वीप के ज्यादातर लोगों ने कहीं और पनाह ले ली। 1950 के दशक में ओशिमा द्वीप में करीब 1,000 लोग रहते थे लेकिन धीरे-धीरे यहाँ रहने वाले लोगों की संख्या घटती चली गई। यहाँ रहने वाले लोगों में अधिकतर उम्रदराज और बुजुर्ग हैं।

ऐसा माना जाता है की एक वृद्ध मछुआरा चूहों की समस्या से परेशान होकर इस द्वीप पर कुछ बिल्लियाँ लेकर आया था। लेकिन धीरे-धीरे इनकी आबादी बढ़ती गई और अब इनकी संख्या इंसानों की संख्या से 6 गुना अधिक हैं। इस द्वीप पर बुजुर्ग और पेंशनभोगी लोग ही रहते हैं।

बिल्लियों के द्वीप के नाम से मशहूर ओशि‍मा द्वीप पर एक भी कार एवं रेंस्तरा नही हैं। यहां चारों ओर सिर्फ व् सिर्फ बिल्लियां ही दिखाई देती हैं। यहाँ रहने वाले लोग मछलीपालन का काम करते हैं।