स्पेन में खुदाई के दौरान मज़दूरों को मिला चांदी और पीतल

स्पेन : आपने ऐसी कहानियां सुनी होंगी जिनमें ज़मीन में छुपे खज़ाने का ज़िक्र होता है. और हां, शायद आपने बचपन में दोस्तों के साथ मिलकर

10 प्रभावशाली लोग, जिनका कोई वजूद नहीं था!

10 प्रभावशाली लोग : पूरी दुनिया में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनको हम किस्सों में, खिलौनों के रूप में, त्यौहारों आदि में देखते हैं, असल में उनका कोई वजूद नहीं है।

इन लोगों की तस्वीर हम किसी वस्तु के ऊपर देख सकते हैं। यह ऐसे लोग हैं, जिनको मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन असल जिंदगी में उनका कोई भी वजूद नहीं था।

सांता क्लॉज़ (Santa Claus)

क्रिसमस में सांता क्लॉज़ बच्चों के लिए तरह- तरह के उपहार लेकर आता है और बच्चे भी ख़ुशी ख़ुशी सांता क्लॉज़ के आने का इन्तजार करते होते हैं।

असल में सांता नाम कोई इंसान नहीं था, ये तो पश्चिम सभ्यता में लोग अपने बच्चों के नखरों को शांत करने के लिए सांता क्लॉज़ का सहारा लेते हैं। वह अपने बच्चों को बताते हैं कि अगर वह ज़्यादा शरारतें करेंगे, तो सांता क्लॉज़ उनके लिए उपहार नहीं लेकर आएगा।

बार्बी (Barbie Doll)

बार्बी गुड़िया, जो एक खूबसूरत खिलौना है, इस खिलौने को लड़कियों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है. इस बात पर लोग हैरान हो सकते हैं कि बार्बी बच्चों पर अपना प्रभाव डालती है या बच्चे बार्बी पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं?

इसमें कोई शक नहीं है, बार्बी डॉल लड़कियों की जीवनशैली पर बहुत प्रभाव छोड़ती है। असल जिन्दगी में बार्बी नाम की कोई लड़की नहीं है, जिसको देखकर यह गुड़िया बनायी गई हो.

रोबिन हुड (Robin Hood)

रोबिन हुड के वजूद पर भी अच्छी बहस हो सकती है कि रोबिन हुड का वजूद था भी या नहीं? लेकिन पश्चिम सभ्यता में बचपन से ही यह सिखा दिया जाता है कि रोबिन हुड एक हीरो था, जबकि वह फिल्म में एक चोर के चरित्र में दिखाया गया था।

वह अमीरों से पैसे लूटता था और गरीबों में बाँट देता था। चोरी करना जुर्म होता है, चाहे वह अच्छे के लिए की गयी हो या बुरे के लिए।

काऊ-बॉयज (Cowboys)

काऊबॉयज, लड़कों का पसंदीदा चरित्र है। बचपन से यह सिखाया जाता है कि काऊबॉयज हीरो की तरह होते हैं, जिनके पास एक चमचमाती बंदूक होती थी।

वह न्याय के लिए लड़ते थे। वह बच्चों और औरतों को संकट से बचाते थे. असल जिंदगी में काऊबॉयज का किसी भी तरह से वजूद नहीं है। यह सिर्फ एक काल्पनिक चरित्र है, जो लोगों को अच्छे काम करने के लिए एक प्रेरणादायक चरित्र था।

द मार्लबोरो मैन (The Marlboro Man)

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यह चरित्र उन धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए बनाया गया था, जो सिगरेट में फिल्टर के साथ धूम्रपान करते हैं. “द मार्लबोरो मैन” एक सिगरेट का ब्रांड था, जो लोगों को उत्साहित करता था कि इस ब्रांड की सिगरेट बाकियों के मुकाबले ज़्यादा अच्छी है।

इस सिगरेट पर एक आदमी का चरित्र बना होता था, जिसको मार्लबोरो मैन कहा जाता था। असल में यह चित्र सिर्फ मार्केटिंग के लिए बनाया गया था, असल जिंदगी में इस चरित्र का कोई भी वजूद नहीं था।

रोजी-एक प्रभावशाली चरित्र (Rosie the Riveter)

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आपने रोज़ी का नाम नहीं सुना होगा, लेकिन आपने इसकी तस्वीर जरूर देखी होगी। रोज़ी एक महिला की तस्वीर थी, जिसको दुसरे विश्वयुद्ध में महिलाओं में उम्मीद जगाने के लिए बनाया गया था। उस समय इस चरित्र ने महिलाओं को इतना प्रभावित किया था, वह उस समय फैक्ट्रियों में पुरुषों की जगह काम करने लगी थी।

देडालुस और इकारुस (Daedalus and Icarus)

पूरी दुनिया का चक्कर सिर्फ 24 घंटों में निकालने का कारनामा कभी मुमकिन ना होता अगर पौराणिक पात्र डेडालुस और इकारुस ना होते।

इस पौराणिक कहानी में दिखाया गया था कि डेडालुस अपने पुत्र इकारुस के लिए इस तरह के उड़ने वाले पंख बना रहा है, जो 24 घंटों में पूरी दुनिया का चक्कर लगाने में सक्षम होते हैं। इस पौराणिक कहानी से प्रेरित होकर मानव का 24 घंटों में पूरी दुनिया का चक्कर लगाने का सपना पूरा हो गया था।

छोटा सा इंजन जो बहुत कुछ कर सकता है (The Little Engine That Could)

यह किताब बच्चों के लिए बनायी गयी थी, इस कहानी को बच्चों को आत्मविश्वास, आशावाद और कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देने के लिए बनाया गया था. इस पुस्तक को सबसे पहले वर्ष 1906 में प्रकाशित किया गया था. इस पुस्तक की कहानी से बच्चे बहुत प्रभावित होते हैं और उनमें सकरात्मक सोच व अच्छे काम करने की उम्मीद बनती है.

बड़ा भाई (Big Brother)

“बिग ब्रदर” एक तरह का स्लोगन है जिसको समाज द्वारा सरकार के खिलाफ विरोध करने के लिए जाना जाता है. “बिग ब्रदर” के नाम का इस्तेमाल लोगों द्वारा विद्रोह किया जाता है जब सरकार कोई ऐसा बिल पास करती है जो लोगों के हक में न होकर उनके विरोध में होता है। बिग ब्रदर के चरित्र को जॉर्ज ओरवेल के उपन्यास में लिया गया था. उसने यह उपन्यास 1984 में लिखा था।

रोमियो और जूलिएट

रोमियो और जूलिएट चरित्र को हम एक शानदार आपस में प्यार करने वाली जोड़ी मानते हैं. लेकिन इस जोड़ी ने बहुत लोगों की शादियाँ करवाई भी हैं और उनकी शादियाँ तुड़वाई भी हैं।

युगल आपस में शादी करते हैं और यह उम्मीद लगाते हैं कि उनका जीवनसाथी रोमिओ या जूलियट जैसा होगा। जब ऐसा नहीं होता तो वह अपने आपको शादी के बंधन में फंसा हुआ मानने लगते हैं जबकि असल जिंदगी में शादी में रोमांस की जरूरत नहीं होती, सफल शादी में एक दुसरे का सम्मान, प्यार और चैरिटी ज्यादा मायने रखती है.

चाणक्य नीति: ये सो जाएं तो जगा दें, और ये सो रहे हों तो न जगाएं

चाणक्य नीति में हम आपको बताएँगे कि ऐसे कौन से लोग हैं सोते हुए से नहीं जगाना चाहिए? यदि आप इन्हें व्यावहारिक जीवन में अपनाते हैं तो हो सकता है आपको इसका लाभ मिले।

यदि ये सात लोग सो जाएं तो इन्हें जगा देना चाहिए।
1. विद्यार्थी 2. सेवक 3. पथिक 4. भूखा आदमी 5. डरा हुआ आदमी 6. खजाने का रक्षक या चौकीदार 7. खजांची

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इन सात जीवों को नींद से नहीं जगाना चाहिए।
1. सांप 2. राजा 3. बाघ 4. डंक वाला कीट 5. छोटा बच्चा 6. किसी और का श्वान 8. मूर्ख।

युवती को दफनाने के बाद उसकी कब्र से आने लगी चीखें

युवती को दफनाने के बाद उसकी कब्र से आने लगी चीखें

यह घटना लंदन के पश्चिमी होंडुरस शहर की है। यहां पर रहने वाले एक परिवार के सदस्या की मौत के बाद जब उसको कब्र में दफनाया गया, तो अचानक उसकी कब्र से चीखों की आवाजें आने लगी।

3 महीने पहले गर्भवती लड़की नेसी पेरेज एक दिन अचानक बाथरूम में बेहोश हो गयी थी। जब परिवार वालों ने उसे डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया था।

इसके बाद नेसी के परिवार वालों ने उसे पास के ही एक कब्रिस्तान में दफना दिया। उसे दफनाने के बाद जैसे ही उसके परिवार वाले घर को वापिस आने लगे, उन्हें कब्र से चीखों की आवाजें सुनाई देने लगी।

इसके फौरन बाद नेसी के घर वालों ने उसे कब्र से निकालकर डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि नेसी को जब कब्र से बाहर निकाला गया, उसका शरीर गर्म था।

युवती के परिजनों का मानना है कि नेसी पहले मरी नहीं थी, केवल बेहोश हुई थी और उसकी मौत कब्र में दफनाये जाने के बाद हुई थी।

जानिए तिल के बीज से होने वाले चमत्कारी फायदे

हम सभी के घरों में तिल का इस्तेमाल तो होता ही है और खासतौर पर मीठी चीजों में! तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो शरीर से कोलेस्ट्रोल को कम करता है।

दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है। इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भी शामिल होते हैं।

इसके सेवन से शरीर गर्म रहता है, इसलिए सर्दियों में इसे खाना फ़ायदेमंद माना जाता है। अच्छे प्रचुर फैट की मौजूदगी के कारण तिल के बीज ऊर्जा का अच्छा स्रोत होते हैं।

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तिल के स्वास्थ्य लाभ

  • तिल विटामिन बी और आयरन से भरपूर होते हैं। जिन लोगों में विटामिन बी या आयरन की कमी होती है, उनमें बाल सफेद होने, सुनने में कमी और याददाश्त कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं इसलिए इसका सेवन इन समस्याओं को दूर करने में मददगार है।
  • इनमें पाया जाने वाला सेसमिन शरीर में फ्री रैडिकल्स से लीवर की रक्षा करता है। इसके अलावा ये बीज फाइबर से भरपूर होते हैं। इससे कोलन कैंसर के ख़तरे से बचा जा सकता है।
  • काले और सफेद तिल मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं जो हाइपरटेंशन को रोकने में मदद करते हैं। इनके तेल मेंमौजूद पॉलीअनसैचुरेटेड फैट को रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार माना जाता है।
  • इसमें कैल्शियम और ज़िंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये दोनों ही हड्डियों को मज़बूत बनाते हैं।
  • इनके सेवन से सूजन कम होती है। लंबे समय तक लो लेवल की सूजन रहने से कई क्रॉनिक बीमारियां हो सकती है, जिसमें मोटापा, हृदय रोग और लीवर की बीमारी शामिल हैं।

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  • लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए, हमारे शरीर को जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, वो तत्व तिल में पाए जाते हैं।
  • तिल में कार्ब्स कम होता है जबकि प्रोटीन और हेल्थी फैट ज्यादा होता है। इन पोषक तत्वों के होने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है।
  • तिल का सेवन हाइपरटेंशन को कम करने का एक जैविक तरीक़ा है। तिल में मौजूद प्राकृतिक तेल और फैटी एसिड कई हृदय संबंधी बीमारियों को होने से रोकते हैं।
  • इनका सेवन करने से मुंह का स्वास्थ्य बेहतर होता है। तिल को अच्छी तरह से चबाकर खाएं। दांत मज़बूत रहेंगे।

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ध्यान देने योग्य बातें

  • तिल से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है। उन लोगों में ब्लड प्रेशर को बहुत कम कर सकता है जिनका पहले से ही ब्लड प्रेशर कम हो।
  • यह सर्जरी के दौरान और बाद में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बाधा डालता है। यदि कोई सर्जरी होनी है, तो कम से कम 2 हफ्ते पहले से तिल का उपयोग बंद कर दें।
  • जिन लोगों का लीवर कमज़ोर होता है या लीवर में पथरी होती है, उन्हें तिल का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

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अजीबोग़रीब शौक :- ड्रैगन की तरह दिखता है यह शख्स!

अजीबोग़रीब शौक :- ड्रैगन की तरह दिखता है यह शख्स

हर इंसान का कोई न कोई शौक जरूर होता है और प्रत्येक इंसान अपना शौक पूरा करने की पूरी कोशिश करता है लेकिन कुछ इंसान ऐसे भी होते हैं जिन पर शौक का जुनून सवार होता है जिसके लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।

किसी-किसी का शौक बेहद ही अजीबोग़रीब होता है और वे  इसे पूरा करने के लिए बेहिसाब दौलत खर्च करते हैं।आज हम बात करने जा रहे हैं ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में जिसने अपने अजीबोग़रीब शौक के चक्कर में लाखों रुपये गवाएं हैं।

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टायमैट लीजन मेडुसा नाम के इस व्यक्ति को अपने शरीर में अजीब बदलाव का शौक है, इस कार्य के लिए इन्होंने कॉस्मेटिक सर्जरी और बॉडी मॉडिफिकेशन भी करवाई है जिसके लिए इन्होंने 61 हजार पाउंड की बड़ी रकम खर्च की है। टायमैट ने यह रकम अपने शरीर में जबरदस्त बदलाव, कान हटाने और जीभ को बीच से कटवाने पर खर्च किया है

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यह है मकसद

टायमैट लीजन मेडुसा का मकसद खुद को ड्रैगन की तरह दिखना है। आपको सुनकर हैरानी होगी कि उनके बॉडी के मॉडिफिकेशन का काम अभी भी चल रहा है।

इसके पीछे उनका मकसद यह है कि जिन लोगों ने बॉडी मॉडिफिकेशन करा राखी है उनके प्रति सकारात्मक भाव दिखा सकें।

टायमैट का कहना है कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जो लोग साई-फाई फिल्मों में दिखने वालों की तरह बॉडी मॉडिफिकेशन करवाते हैं वो लूजर और मंदबुद्धि वाले हैं, परन्तु ऐसा नहीं है।

पहले मैं एक आम आदमी की तरह देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में से एक बैंकिंग वाइस प्रेसिडेंट था। टायमैट ने कहा कि मैं लोगों को बस यह बताना चाहता हूँ कि मॉडिफायड लोग भी बुद्धिमान, दयालु, प्यार करने वाले लोग होते हैं। सिर्फ इसलिए कि मेरे कान निकाल लिए गए हैं इसका यह मतलब नहीं है कि मेरे पास दिमाग नहीं है।

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बचपन में हुआ दुर्व्यवहार

टायमैट जब वह पांच साल का था, तब उनके सौतेले पिता ने उनके साथ काफी शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार किया, इतना ही नहीं उसके माता-पिता ने उसे रात में दक्षिणी टेक्सास के घने जंगलों में छोड़ दिया।

जहां खतरनाक रैटलस्नेक रहते हैं। जब उनके माता-पिता ने उन्हें कार से बाहर फेंक दिया, तो उन्होंने एक जहरीले रैटलर को अपना माता-पिता मान लिया।

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शुरुआत

टायमैट लीजन मेडुसा ने पहली बार 1997 में बॉडी मॉडिफिकेशन करवाया और उन्होंने अपने सिर पर दो सिंग लगवाए, जिनकी कीमत 330 पाउंड (लगभग 29 हजार रुपये) थी।

टायमैट ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार बॉडी मॉडिफिकेशन करवाई थी, उस समय वे दुनिया के पांचवें व्यक्ति बन गए थे जिसने सिर पर सींग लगवाए थे।

उन्होंने बॉडी मॉडिफिकेशन पहले शौक से कराया, लेकिन बाद में यह सब उनके जीवन का प्रमुख हिस्सा बन गया। टायमैट की मॉडिफिकेशन को देखें तो पहले वे महिला के रूप में बने, लेकिन बाद में उनका मानव ड्रैगन के रूप में अवतार हुआ। हालत यह है कि अब लोग टायमैट को ‘ड्रैगन लेडी’ के रूप में पहचानते हैं।

कागज से बनायी गयी आश्चर्यजनक कलाकृतियाँ!

इन मूर्तियों को लॉस एंजेल में रहने वाली मूर्तिकार जेफ़ निशिनाका द्वारा बनाया गया है. उन्होंने अपने 30 साल के करियर में बहुत शानदार कलाकृतियाँ बनायी हैं. उन्होंने अपने करियर के शुरुआत में पहले कला का अध्ययन किया और फिर एक व्याख्याता(illustrator) के रूप में काम किया. लेकिन उनका कागज की कलाकृतियाँ बनाना सबसे पसंदीदा शौंक है. वह कागज को मोड़कर उनकी कलाकृतियाँ बनाने में सक्षम है. यह हैं उनके द्वारा बनायी गयी आश्चर्यजनक कागज की मूर्तियाँ.

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भारतीय सेना द्वारा आज तक किए गए ये 11 सर्जिकल स्ट्राइक

सर्जिकल स्ट्राइक एक तरह की सैन्य कार्रवाई होती है, जिसमें एक चुने गए टारगेट को ध्वस्त करना होता है। सर्जिकल स्ट्राइक का मुख्य उद्देश्य कम से कम नुकसान में ज्यादा से ज्यादा टारगेट को तबाह करना होता है।

इसमें इस बात का ध्यान रखा जाता है कि केवल टारगेट को निशाना बनाना है। इसमें आम पब्लिक और पब्लिक प्रॉपर्टी को निशाना नहीं बनाया जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक हवाई या जमीनी मार्ग से होती है।

स्पेशल सेना की टुकड़ी को हवाई रास्ते से दुश्मन के इलाके में छोड़ा जाता है या फिर हवा बमबारी के जरिए हमला किया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे है, वो 11 सर्जिकल स्ट्राइक, जो भारतीय सेना ने अब तक की है।

मई 1998

1998 में भारतीय सेना के इस ऑपरेशन की शिकायत पाकिस्तान ने खुद संयुक्त राष्ट्र को की थी। यह शिकायत संयुक्त राष्ट्र की 1998 की वार्षिक किताब के पेज नंबर 321 पर दर्ज़ है।

4 मई को पाकिस्तान ने इस शिकायत में कहा कि पीओके में एलओसी के 600 मीटर पार बंदाला सेरी में 22 लोगों को मार डाला गया। पाकिस्तान गांव में मौजूद कुछ चश्मदीदों के हवाले से ये भी बताया गया कि करीब एक दर्जन शख्स, काले कपड़ों में आधी रात को आए।

उन्होंने कुछ पर्चे भी छोड़े, जिस पर एक में लिखा था- ‘बदला ब्रिगेड’। वहीं दूसरे पर्चे पर लिखा था- बुरे काम का बुरा नतीजा, एक और पर्चे पर लिखा था, एक आंख के बदले 10 आंखें, एक दांत के बदले पूरा जबाड़ा।

उस वक्त कुछ अमेरिकी अधिकारियों की ओर से माना गया था कि यह कार्रवाई पठानकोट और ढाकीकोट के गावों में 26 भारतीय नागरिकों की हत्या के बदले में की गई थी।

ग्रीष्मकाल 1999

1999 की गर्मियों में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने जम्मू के पास मुनावर तवी नदी से एलओसी को क्रॉस किया था, इस ऑपरेशन में पाकिस्तान की एक पूरी चौकी को उड़ा दिया गया।

इस घटना के बाद पाकिस्तान ने बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) का गठन किया था, इस गठन में पाकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SAG) के कमांडो को शामिल किया गया था। जनवरी में एक भारतीय सैनिक का सिर कलम कर देने के लिए BAT को ही जिम्मेदार माना जाता है।

जनवरी 2000

21-22 जनवरी 2000 को करगिल युद्ध के 6 महीने बाद नीलम नदी के पार नडाला एनक्लेव में एक पोस्ट पर रेड के दौरान 7 पाकिस्तानी सैनिकों को कथित तौर पर पकड़े जाने का दावा किया गया था।

पाकिस्तान के मुताबिक यह सातों सैनिक भारतीय सैनिकों की गोलीबारी में घायल हुए थे, बाद में इन सैनिकों के शवों को पाकिस्तान को वापस कर दिया गया था।

भारतीय सेना के सूत्रों का कहना था कि भारतीय सेना की ओर से यह कार्रवाई कैप्टन सौरभ कालिया और 4 जाट रेजीमेंट के पांच जवानों- सिपाही भंवर लाल बागरिया, अर्जुन राम, भीखा राम, मूला राम और नरेश सिंह की शहादत के बाद की गई थी।

मार्च 2000

12 बिहार बटालियन के कैप्टन गुरजिंदर सिंह इंफैन्ट्री बटालियन कमांडो (घातक) की टीम के साथ एलओसी पार जाकर पाकिस्तानी चौकी पर धावा बोला।

यह पाकिस्तानी सेना के पूर्व में किए गए हमले की जवाबी कार्रवाई थी। भारत के इस ऑपरेशन में कैप्टन सूरी शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

इसी दौरान 2 मार्च 2000 को लश्कर ए तैयबा के आतंकियों ने एक हमले में 35 सिखों की हत्या कर दी थी। उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, उनकी सरकार की ओर से 9 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) को सरहद पार कार्रवाई करने की अनुमति दी गई थी।

इस करवाई में स्पेशल फोर्स के मेजर की अगुआई में भारतीय सैनिकों ने एलओसी पार जाकर 28 पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों का काम तमाम किया था।

सितंबर 2003

सितंबर 2003 में एलओसी पर दोनों देशों में सीज़फायर लागू होने के बाद से दूसरे की जमीन पर जाकर होने वाले ऑपरेशन की कम ही जानकारी उपलब्ध है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से एलओसी पर निगरानी वाले संयुक्त राष्ट्र प्रेषक दल (UNMOGIP) को दर्ज शिकायतों से पता चलता है कि क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशंस बदस्तूर जारी रहे।

पाकिस्तान ने इस शिकायत में यह दावा किया है कि भारतीय सैनिकों ने 18 सितंबर 2003 को पूंछ के भिम्बर गली के पास बरोह सेक्टर में एक पोस्ट पर हमला किया। इस घटना में पाकिस्तानी जेसीओ समेत 4 जवान मारे गए।

जून 2008

जून 2008 में दो बार ऐसी घटनाएं हुईं। पहले 5 जून 2008 को पूंछ के सलहोत्री गांव में क्रांति बार्डर निगरानी पोस्ट पर हमला हुआ था, जिसमें 2-8 गुरखा रेजीमेंट का जवान जावाश्वर छामे शहीद हुआ था।

पाकिस्तान की शिकायतों के रिकॉर्ड के मुताबिक पूंछ के भट्टल सेक्टर में 19 जून 2008 को भारतीय सैनिकों की कार्रवाई में चार पाकिस्तानी जवान मारे गए।

अगस्त 2011

पाकिस्तान ने 30 अगस्त 2011 को शिकायत दर्ज कराई कि उसके एक जेसीओ समेत चार जवान केल में नीलम नदी घाटी के पास भारतीय सेना की कार्रवाई में मारे गए।

अखबार ‘द हिंदू’ ने इस घटना पर सूत्रों के हवाले से बताया था कि ये ऑपरेशन कारनाह मे भारतीय जवानों पर हमले में दो भारतीय सैनिकों की हत्या और उनके शवों को क्षतविक्षत किए जाने के बदले में किया गया था।

जनवरी 2013

सावन पात्रा पाकिस्तानी पोस्ट से भारतीय सैनिकों को निशाना बनाया जा रहा था। 6 जनवरी 2013 की रात को क्रॉस बार्डर फायरिंग के बाद 19 इंफैन्ट्री डिवीजन कमांडर गुलाब सिंह रावत ने इस पाकिस्तानी पोस्ट पर हमला करने की इजाजत मांगी।

पाकिस्तान की ओर से फिर कहा गया कि सावन पात्रा में स्थित उनकी पोस्ट पर भारतीय सैनिकों ने हमला किया। इस घटना पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिल्ली में कहा सावन पात्रा को निशाना बनाने के लिए एलओसी पार जाने की औपचारिक अनुमति नहीं थी, लेकिन तनाव की गर्मी में इस तरह की चीजें होती रहती हैं। पाकिस्तान ऐसा करता है, तो हमारी सेना भी ऐसा करती है।

जून 2015

4 जून 2015 को नागा उग्रावादियों ने चंदेल एरिया में भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। इस हमले में हमारे 18 सैनिक शहीद हो गए थे।

इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना की 70 सैनिकों की एक टीम ने म्यामार के जंगलों में सर्जिकल ऑपरेशन किया। 40 मिनट चले इस सर्जिकल ऑपरेशन में 38 नागा उग्रवादियों को मौत के घाट उतारा गया था और वहीं 7 नागा उग्रवादी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

सितंबर 2016

उड़ी में हुए आतकंवादी हमले के बाद 29 सितंबर 2016 की रात सेना ने एलओसी पार करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक किया। इस हमले के दौरान 38 आतंकवादी मारे गए और उनके के 7 ठिकाने भी नष्ट कर दिए गए।

फरवरी 2019

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में जैश ए मोहम्मद के एक आतंकवादी द्वारा भारतीय सेना के एक काफिले पर हमला किया गया। इस हमले में हमारे 40 जवान शहीद हो गए।

भारतीय सेना ने इस हमले में शहीद हुए 40 सुरक्षाकर्मियों की शहादत का बदला पाकिस्तान की सीमा में घुसकर लिया। इस ऑपरेशन में वायुसेना के विमानों ने करीब 300 आतंकियों को ‘दोजख की आग’ में झोंक दिया।

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विश्व के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन

10 ऐसे देश जिनके पास नहीं है अपनी सेना….!

जिन देशों की सैन्य क्षमता अच्छी होती है उन देशों की गिनती पावरफुल देशों में की जाती है । आज के युग में हर देश अपनी सेना की ताकत का प्रदर्शन करने से नहीं कतराता है, लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व में ऐसे भी कई देश हैं जिनके पास अपनी सेना नहीं हैं ।

आइए जानें विश्व के ऐसे देशों के बारें में जिनके पास अपनी सेना नहीं हैं…..!

एंडोरा

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यूरोप का यह छोटा सा देश एंडोरा 1278 में बना था। एंडोरा देश 467.6 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। इस देश के पास अपनी सेना नहीं है वह दुसरे देशों पर निर्भर है।

अगर एंडोरा देश पर कभी भी हमले की स्थिति उत्पन्न होती है तो वह अपने नजदीकी देश स्पेन और फ्रांस पर निर्भर हैं। एंडोरा ने आपदा या हमले से बचने के लिए अपने पड़ोसी देशों फ्रांस और स्पेन से सैन्य सम्बन्धी समझौता कर रखा है।

ग्रेनेडा

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ग्रेनेडा देश के पास अपनी सेना न होने के बावजूद अमरीका जैसे शक्तिशाली देश का हमला झेल चूका है। यह हमला सेना और सरकार के बीच हो रहे आपसी विवाद के कारण हुआ था और सन 1983 में सेना को हटा दिया गया था।

ग्रेनेडा देश में अभी भी आंतरिक सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस के पास है। ग्रेनेडा देश का क्षेत्रफल 348.5 वर्ग किलोमीटर है।

लिकटेंस्टीन

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लिकटेंस्टीन देश उन देशों में से एक है जिन्हें कभी भी सेना की जरूरत महसूस नहीं हुई। 1868 में हुए हमले के बाद यहाँ की सरकार ने अपनी सेना तैयार की थी लेकिन सेना तैयार करने में अधिक खर्च की आवश्कता थी और लिकटेंस्टीन देश यह खर्च उठाने में असमर्थ था। लिकटेंस्टीन देश में पुलिस ही सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों को संभालती हैं।

सोलोमन आइलैंड्स

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सोलोमन आइलैंड के पास अपनी सेना नहीं हैं। यह देश 1893 तक ब्रिटेन पर आधारित था। सोलोमन आइलैंड कई द्वीपों का समूह है जिसके कारण 1976 में बनी सरकार ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाई।

सोलोमन आइलैंड में जातीय संघर्ष और अपराधिक मामले बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। सोलोमन आइलैंड न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया के मध्य में हैं इसलिए अब आस्ट्रेलिया ही इस देश की देख-रेख कर रहा है।

नॉरू

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नॉरू देश दुनिया के सबसे छोटे देशों में गिना जाता है। नॉरू देश का क्षेत्रफल सिर्फ 21.10 वर्ग किलोमीटर हैं। इस देश के पास अपनी कोई सेना नहीं है। इस देश की पुलिस ही सुरक्षा और कानून व्यवस्था देखती हैं। जरूरत पड़ने पर ऑस्ट्रेलिया इस देश की मदद करता है।

वेटिकन सिटी

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वेटिकन शहर यूरोप महाद्वीप में स्थित एक देश है। यह दुनिया का सबसे छोटा देश है। वेटिकन सिटी के पास अपनी कोई सेना नहीं है। वेटिकन शहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी इटली के पास है।

मॉरीशस

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मॉरीशस हिन्द महासागर में बसा एक छोटा सा देश है जिसके पास अपनी कोई सेना नहीं है। मॉरीशस को हिन्द महासागर का मोती भी कहा जाता है। इस देश के पास ज्यादा से ज्यादा 10 हजार पुलिसकर्मी ही है। इनके ऊपर ही मॉरीशस शहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

पलाऊ

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पलाऊ देश के पास अपनी सेना नहीं है वह केवल पुलिसवालों पर ही निर्भर है। 1983 में अमेरिका के साथ हुए समझौते के अनुसार अमेरिका, पलाऊ को हर तरह से सुरक्षा प्रदान करेगा।

हैती

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हैती देश नॉर्थ अमेरिका में स्थित है। वर्ष 1995 में सेना और सरकार के आपसी विवाद के कारण यहाँ से सेना को हटा दिया गया था।अब हैती देश के पास कोई अपनी सेना नहीं है और यह देश केवल पुलिस पर ही निर्भर हैं।

मार्शल आइलैंड

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मार्शल आइलैंड 1983 में स्वतंत्र हो चूका है लेकिन आज भी इसे अमेरिका का ही हिस्सा माना जाता है। मार्शल आइलैंड में भी कोई सेना नहीं है। अगर कभी भी इस आइलैंड पर हमला या कोई आपदा आती है तो अमेरिकी सेना ही इसकी जिम्मेदारी लेती हैं।

भारतीय सेना के बारे में कुछ अदभुत तथ्य!

भारतीय सशस्त्र बल सेना, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल भारत को दुश्मनों से सुरक्षित रखते हैं। हम में से बहुत से लोगों को उनकी जीत और उनके तरकीय योगदान के बारे में पता होगा।

यहां निम्नलिखित सूची में भारत की सेना के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं, जिससे पढ़कर आप Indian Army को पहले से 10 गुना ज़्यादा सम्मान की नज़रों से देखेंगे।

भारतीय सेना दुनिया की सबसे ऊँची रणभूमि “सियाचिन ग्लेशियर” को नियन्त्रण करती है, जिसकी ऊंचाई समुन्द्र तल से 5000 मीटर है.

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भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी “स्वैच्छिक” सेना है।

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सभी सेवारत और रिज़र्व सेना के पास अपनी सेवा देने या ना देने का अधिकार होता है। यह अधिकार भारत के संविधान में भी दर्ज है। लेकिन इस संविधान को कभी भी प्रयोग में नहीं लाया गया। भारतीय सेना के पास पहाड़ों की उंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ने की महारत हासिल है।

Indian Army द्वारा High Altitude Warfare School (HAWS) दुनिया में सबसे संभ्रांत सैन्य प्रशिक्षण चलाया जाता है। जिसमें अमेरिका, इंग्लैंड और रूस के विशेष सेना बल ने अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण करने से पहले हिस्सा लिया था।

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भारत ने 1970 और 1990 में परमाणु परिक्षण किया था। इस परिक्षण के बारे में दुनिया की सबसे ताकतवर ख़ुफ़िया एजेंसी सी.आई.ए. को भी नहीं पता चला था और यह सी.आई.ए की अब तक की सबसे बड़ी असफलता है।

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भारत में अन्य सरकारी संगठनों और संस्थाओं के विपरीत Indian Army में किसी भी व्यक्ति की जाती या धर्म नहीं देखा जाता।

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भारत और पाकिस्तान के बीच हुई “लोंगेवाला की लड़ाई” में सिर्फ दो भारतीय सेना के जवान ही शहीद हुए थे. इस लड़ाई पर मशहूर बॉलीवुड फिल्म “बॉर्डर” बनी है।

लोंगेवाला की लड़ाई भारत और पाकिस्तान के बीच दिसम्बर 1971 में हुई थी। इस लड़ाई में 120 Indian Army के जवानों ने 2000 पाकिस्तानी सेना के जवानों को घुटने टेकने के लिए मज़बूर कर दिया था।

सबसे रोचक तथ्य यह है कि इस लड़ाई में Indian Army के पास सिर्फ एक जीप थी, जिस पर एम्40 की राइफल लगी थी और दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना 2000 की तदाद में टैंकों से लेस थी।

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Indian Army द्वारा चलाया गया ऑपरेशन राहत (2013) अब तक सबसे बड़ा लोगों को बचाने वाला मिशन था. ऑपरेशन राहत मिशन को भारतीय वायु सेना द्वारा चलाया गया था।

इस मिशन का मुख्य लक्ष्य 2013 में उत्तराखंड में आयी बाढ़ से प्रभावित लोगों को बचाना था। ऑपरेशन राहत के पहले चरण में 17 जून 2013 को 20,000 लोगों को बाढ़ के क्षेत्र से सुरक्षित निकाल लिया गया था, जो अपने-आप में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड था।

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केरल की एज़िमाला नौसेना अकादमी पूरे एशिया में सबसे बढ़ी अकादमी है।

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भारतीय सेना के पास घुड़सवार सेना की रेजिमेंट भी है. ऐसी रेजिमेंट दुनिया में सिर्फ तीन ही हैं।

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भारतीय वायु सेना का ताजीकिस्तान में आउट-स्टेशन है।

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भारतीय सेना ने भारत के सबसे ऊँचे पुल का भी निर्माण किया है. यह लदाख वैली में द्रास और सुरु नदियों के बीच बना हुआ है। इस पुल का निर्माण भारतीय सेना द्वारा अगस्त 1982 में किया गया था।

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सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (एमईएस) भारत में सबसे बड़ी निर्माण एजेंसियों में से एक है। एमईएस और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) पर भारत की बेहद शानदार सड़कों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी है। खर्दुन्गला (जो पूरी दुनिया में सबसे ऊँची सड़क है) और चुम्बकीय पहाड़ी जैसी सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी एमईएस पर आती है।

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भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुआ युद्ध उस समय खत्म हो गया था। जब पाकिस्तानी सेना के 93,000 जवानों ने Indian Army के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। दुसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था, जो पाकिस्तानी सेना द्वारा किया गया था।

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अक्सर कई लोकप्रिय हस्तियों को सशस्त्र बलों की मानद रैंक से सम्मानित किया जाता है। सचिन तेंदुलकर को भारतीय वायु सेना द्वारा कप्तान का रैंक से सम्मानित किया गया है और एम्.एस धोनी को भारतीय सेना द्वारा लेफ्टिनेंट की पदवी से सम्मानित किया गया है।

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