1200 साल पुराना जिंजी किला : जानिए कुछ रोचक तथ्य

417

भारत में ऐसे कई किले हैं जो सदियों से इतिहास की कहानियां बयां कर रहे हैं, उन्हीं में से एक है जिंजी किला, जिसे जिंजी दुर्ग या सेंजी दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है।

जिंजी दुर्ग दक्षिण भारत के उत्‍कृष्‍टतम किलों में से एक है। इस किले का निर्माण नौंवी शताब्दी में चोल राजवंशों द्वारा कराया गया था।

यह किला तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में पुद्दुचेरी के पास स्थित है। इस किले की खूबसूरती यह है कि यह सात पहाड़ियों पर निर्मित कराया गया है, जिनमें कृष्णगिरि, चंद्रागिरि और राजगिरि प्रमुख पहाड़ियां हैं।

यह इस प्रकार निर्मित है कि छत्रपति शिवाजी ने इसे भारत का सबसे ‘अभेद्य दुर्ग’ कहा था। वहीं अंग्रेजों ने इसे ‘पूरब का ट्रॉय’ कहा था।

आइए जानते हैं कुछ रोचक तथ्य

यह किला लगभग 11 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है, जिसकी दीवारों की लंबाई लगभग 13 किलोमीटर है।

इस किले पर कई शासकों ने राज किया है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर मुगलों, कर्नाटक के नवाबों, फ्रांसीसियों और अंग्रजों के अधीन रहा है।

17वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठों द्वारा इस किले को किसी भी हमलावर सेना से बचाने के लिए पुननिर्मित किया गया था।

इस किले का मुख्य आकर्षण राजगिरि है, जहां एक पिरामिडनुमा शीर्ष से सजी बहुमंजिला कल्याण महल है। इसके अलावा राजगिरि पहाड़ी के निचले हिस्से में महल, अन्नागार और एक हाथी टैंक भी है। यह ग्रेनाइट किलेबंदी की अंतरतम रेखा से घिरा हुआ है, और सभी शाही संरचनाओं को घेरता है।

ऊंची दीवारों से घिरा हुआ यह किला रणनीतिक रूप से इस प्रकार बनाया गया था कि दुश्मन इस पर आक्रमण करने से पहले कई बार जरूरत सोचते थे, क्योंकि यह किला पहाड़ियों पर स्थित है, इसलिए आज भी यहां के राज दरबार तक दो घंटे की चढ़ाई के बाद ही पहुंचा जा सकता है।

जिंजी से जुड़ा सबसे दिलचस्प चरित्र राजा तेज सिंह है, जिसे स्थानीय रूप से राजा देशसिंह या देसिंग राजा के रूप में जाना जाता है। मुग़ल आधिपत्य के दौरान, औरंगज़ेब ने जिंजी को बुंदेलखंड के अपने सेनापति राजा स्वरूप सिंह को जागीर के रूप में दे दिया था।

स्वरूप सिंह की मृत्यु के बाद आर्कोट के नवाब (कर्नाटक क्षेत्र के मुगल गवर्नर) ने उनके बेटे राजा तेज सिंह पर अपना अधिकार जताने की कोशिश की। उन्होंने मांग की कि तेज सिंह करों का भुगतान करें भले ही वह मुगल सम्राट के सामंत थे।

जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो नवाब ने उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया, और जिंजी पर युद्ध की घोषणा की। 22 वर्षीय तेज सिंह, जो उस समय बुंदेलखंड में थे, ने अपनी छोटी सेना के साथ नवाब के पराक्रमी सैनिकों के खिलाफ जिंजी की रक्षा करते हुए अपनी जान की बाज़ी लगा दी।

यह किला तमिलनाडु पर्यटन क्षेत्र का एक सर्वाधिक रोचक स्थल है। जहां हर साल हजारों की संख्या में लोग घूमने आते हैं क्योंकि इस समय भारत समेत दुनिया भर में कोरोना वायरस फैला हुआ है इसीलिए इस पर्यटन स्थल को फिलहाल बंद कर दिया गया है ।

यह भी पढ़ें 

मेहरानगढ़ किला- इस किले की ऊंचाई है कुतुब मीनार से भी ज़्यादा, जहां से दिखता है पाकिस्तान

राजस्थान के मशहूर किले और महल

भानगढ़ का किला जहां शाम ढलते ही जाग उठती हैं आत्माएं

बाघों का निवास – नाहरगढ़ किला

चित्तौड़गढ़ किला- जौहर का गढ़